Jitiya Vrat 2026 Rule: आज 3 अक्टूबर को जितिया व्रत पर माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के साथ निर्जला उपवास कर रही हैं. व्रत में पूरे दिन बिना अन्न और जल के नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है. ऐसे में आइए जानते हैं जितिया व्रत के नियम, व्रत से मिलने वाले लाभ और पारण से जुड़ी जरूरी जानकारियां.
जितिया व्रत में क्या नियम माने जाते हैं?
जितिया का निर्जला व्रत होने के कारण व्रती स्त्रीएं पूरे दिन भोजन और पानी का सेवन नहीं करती हैं. व्रत के दौरान भगवान जीमूतवाहन की पूजा और जितिया व्रत की कथा सुनने की परंपरा है. अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि और परंपराओं में थोड़ा अंतर भी देखने को मिलता है.
व्रत के दौरान सात्विक माहौल बनाए रखना, मन को शांत रखना और किसी तरह के विवाद से बचना भी पारंपरिक रूप से व्रत का हिस्सा माना जाता है. नहाय-खाय के दिन से ही भोजन और पूजा से जुड़े नियमों का पालन शुरू हो जाता है और पारण तक व्रत की मर्यादा रखी जाती है.
निर्जला व्रत में इन बातों का रखें ध्यान
निर्जला उपवास शरीर के लिए सामान्य व्रत की तुलना में अधिक कठिन हो सकता है. इसलिए व्रत रखने वाली स्त्रीओं को अनावश्यक भागदौड़, ज्यादा शारीरिक मेहनत और तेज धूप में लंबे समय तक रहने से बचना चाहिए. घर के जरूरी कामों के बीच पर्याप्त आराम करना भी जरूरी है.
अगर किसी स्त्री को व्रत के दौरान अत्यधिक कमजोरी, चक्कर, बेहोशी, भ्रम, सीने में तकलीफ या तबीयत अचानक बिगड़ने जैसा महसूस हो, तो केवल धार्मिक नियम के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. बीमारी से जूझ रहे लोगों, गर्भवती स्त्रीओं या नियमित दवा लेने वालों को निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना उचित है.
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जितिया व्रत से क्या फल मिलने की मान्यता है?
धार्मिक मान्यताओं में जितिया व्रत को संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और उनकी रक्षा की कामना से जोड़ा गया है. माताएं श्रद्धा के साथ भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं और व्रत कथा सुनती हैं. यही वजह है कि इस पर्व में पूजा-पाठ के साथ मां और संतान के रिश्ते की भावनात्मक झलक भी दिखाई देती है.
4 अक्टूबर को होगा पारण
इस साल अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर की सुबह 7 बजकर 59 मिनट से 4 अक्टूबर की सुबह 5 बजकर 51 मिनट तक रहेगी. जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद किया जाएगा.
पारण के समय जल्दबाजी में बहुत अधिक भोजन करने से बचना बेहतर है. लंबे समय तक बिना पानी और भोजन के रहने के बाद शरीर को सामान्य स्थिति में आने के लिए समय चाहिए. इसलिए पारण के बाद पहले हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लेना और पर्याप्त तरल पदार्थ लेना सहज रहता है.
नहाय-खाय से शुरू हुआ जितिया पर्व आज निर्जला उपवास तक पहुंच चुका है. अब 4 अक्टूबर की सुबह पारण के साथ व्रती स्त्रीओं का यह कठिन उपवास पूरा होगा.
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