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‘कबीर सिंह’ के 20 मिनट भी नहीं झेल पाए अदिल हुसैन, फिल्म करने का आज भी पछतावा, 200 करोड़ के ऑफर पर कही ये बात

किसी एक्टर की पहचान हमेशा उसके सबसे बड़े रोल से नहीं होती. कई बार पर्दे पर कुछ मिनट का किरदार भी ऐसा असर छोड़ जाता है कि पूरी फिल्म के बाद वही चेहरा याद रह जाता है. अदिल हुसैन इसी तरह के एक्टर हैं. उन्होंने न तो पारंपरिक तरीके से बॉलीवुड में एंट्री ली और न ही खुद को सिर्फ हिंदी सिनेमा तक सीमित रखा.

असम के छोटे से शहर गोलपाड़ा से निकले अदिल ने थिएटर किया, स्टैंड-अप कॉमेडी की, मोबाइल थिएटर में काम किया, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा पहुंचे और फिर इंटरनेशनल सिनेमा तक अपनी जगह बनाई.

आज उनके 63वें जन्मदिन के मौके पर जानिए एक छोटे से कस्बे से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अदाकारी से अलग पहचान बनाने तक का उनका पूरा सफर.

5 साल की उम्र में शुरू हुआ जुनून

अदिल हुसैन का जन्म 5 अक्टूबर 1963 को असम के गोलपाड़ा में हुआ था. उनके पिता एक स्कूल हेडमास्टर थे और चाहते थे कि बेटा पढ़ाई पूरी करके अंग्रेजी का प्रोफेसर या शिक्षक बने. लेकिन अदिल की किस्मत में तो कुछ और ही लिखा था.

आदिल हुसैन

शुरुआती दिनों में थिएटर और मंच पर परफॉर्म करते अदिल हुसैन.

बचपन के अनोखे किस्से:

  • 5 साल में पहली परफॉर्मेंस: जब वह सिर्फ 5 साल के थे, तभी से मोहल्ले के लोगों को इकट्ठा करके उनके सामने स्टैंड-अप कॉमेडी करने लगे थे.
  • 16 साल में लिया फैसला: स्कूल के नाटकों में भाग लेते-लेते 16 साल की उम्र तक आते-आते उन्होंने तय कर लिया कि उन्हें एक्टर ही बनना है.
  • पिता से मतभेद: पिता एक सुरक्षित प्रशासनी नौकरी चाहते थे. एक्टिंग के फैसले की वजह से पिता उनसे कई सालों तक नाराज रहे, लेकिन अदिल ने अपना रास्ता नहीं बदला.
  • कॉमेडी और मिमिक्री: गुवाहाटी के बी. बरुआ कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उन्होंने लगभग 6 साल तक स्टैंड-अप कॉमेडी की और मशहूर बॉलीवुड स्टार्स की नकल उतारी.
  • असम का मोबाइल थिएटर: उन्होंने असम की मशहूर ‘मोबाइल थिएटर’ परंपरा में काम किया और गांव-गांव घूमकर लाइव ऑडियंस के सामने अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया.

जब NSD पहुंचकर टूटा स्टार बनने का सपना

शुरुआत में अदिल भी आम लड़कों की तरह बड़े स्टार्स के दीवाने थे. वह अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र और राजेश खन्ना जैसा बड़ा सुपरस्टार बनना चाहते थे. नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के दिनों में अदिल हुसैन.

27 साल की उम्र में जब वह नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा पहुंचे, तो सुपरस्टार बनने का उनका यह सपना बदल गया. NSD में उन्होंने समझा कि एक्टर बनने का मतलब सिर्फ स्टारडम हासिल करना नहीं, बल्कि किरदार को ईमानदारी से जीना है.

इसके बाद उन्हें चार्ल्स वॉलेस स्कॉलरशिप मिली और वह ड्रामा स्टूडियो लंदन में एक्टिंग सीखने गए.

2012 में बदला करियर, मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

अदिल हुसैन ने असमिया, बंगाली, तमिल, मलयालम, मराठी, हिंदी और अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में काम किया. लेकिन साल 2012 उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ.

फिल्म ‘इंग्लिश विंग्लिश’ और ‘लाइफ ऑफ पाई’ में अदिल हुसैन के आइकॉनिक रोल्स.

साल फिल्म किरदार खासियत / उपलब्धि
2012 इंग्लिश विंग्लिश सतीश गोडबोले (श्रीदेवी के पति) कम बोलने वाले, व्यावहारिक पति के रोल में बिना ड्रामे के छाप छोड़ी.
2012 लाइफ ऑफ पाई संतोष पटेल (पाई के पिता) ऑस्कर विजेता फिल्म, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई.
2017 मुक्ति भवन / मज राति केतकी दया / सोमनाथ 64वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में दोनों फिल्मों के लिए Special Mention Award मिला.
2018 व्हाट विल पीपल से मिर्जा (नॉर्वेजियन फिल्म) नॉर्वे का प्रतिष्ठित Amanda Award जीता.
2019 कबीर सिंह कॉलेज डीन छोटा सा रोल, लेकिन आज भी फिल्म चुनने को लेकर पछतावा जताया.
2026 ऑपरेशन सफेद सागर एयर मार्शल विनोद पाटनी नेटफ्लिक्स सीरीज में 1999 कारगिल युद्ध के एयर कमांडर का दमदार रोल.

‘कबीर सिंह’: जब अपनी ही फिल्म की कर दी पब्लिक में बुराई

अदिल हुसैन के करियर में ‘कबीर सिंह’ सबसे चर्चित विवादों में से एक रहा. वह अकेले ऐसे एक्टर रहे जिन्होंने खुलेआम अपनी ही हिट फिल्म की आलोचना की.

फिल्म ‘कबीर सिंह’ में कॉलेज डीन के किरदार में अदिल हुसैन.

  • बिना स्क्रिप्ट पढ़े की फिल्म: अदिल ने बताया कि ‘कबीर सिंह’ इकलौती ऐसी फिल्म थी, जिसे उन्होंने बिना पूरी स्क्रिप्ट पढ़े साइन किया था.
  • 20 मिनट में थिएटर से बाहर: जब वह फिल्म देखने थिएटर पहुंचे, तो 20 मिनट बाद ही बाहर निकल आए. उन्होंने कहा कि फिल्म में स्त्रीओं के प्रति गलत बर्ताव और हिंसा को सही ठहराया गया है, जिसका उन्हें पछतावा है.
  • 100-200 करोड़ का ऑफर भी ठुकरा दें: निर्देशक संदीप रेड्दी वांगा से सोशल मीडिया पर बहस के बाद अदिल ने साफ कहा कि अगर उन्हें ‘एनिमल’ जैसी फिल्मों के लिए 200 करोड़ रुपये भी मिले, तो भी वह ऐसी फिल्में नहीं करेंगे.

2026 में लगातार एक्टिव: एयर मार्शल के रोल में दिखे

63 साल की उम्र में भी अदिल का सफर जारी है. साल 2026 में रिलीज हुई वेब सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में उन्होंने 1999 कारगिल युद्ध के दौरान वेस्टर्न एयर कमांड के चीफ रहे एयर मार्शल विनोद पाटनी का किरदार निभाया. 2026 की सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में एयर मार्शल के रोल में अदिल हुसैन.

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अदिल का मानना है कि रोल छोटा हो या बड़ा, जब तक कैमरा आपके ऊपर है, किरदार एकदम असली और सच्चा लगना चाहिए. अमिताभ और धर्मेंद्र जैसा स्टार बनने का सपना देखने वाले अदिल हुसैन आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. वह साबित करते हैं कि स्टारडम से बड़ी चीज होती है- एक बेहतरीन और सच्चा कलाकार होना.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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