रांची : झारखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अब महज छह महीने का समय बाकी रह गया है. वर्तमान पंचायती राज व्यवस्था का कार्यकाल समाप्त होने की ओर है, लेकिन राज्य के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का बुरा हाल है. हैरानी की बात यह है कि विकास कार्यों को धरातल पर उतारने के लिए पंचायतों के पास 658 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि उपलब्ध है, लेकिन पंचायती राज विभाग की ओर से ‘खर्च की गाइडलाइन’ जारी न किए जाने के कारण पूरा पैसा फाइलों और प्रशासनी खातों में अटका पड़ा है. वर्ष 2010 के बाद 16 वर्षों में यह पहला मौका था जब राज्य वित्त आयोग के माध्यम से पंचायतों को यह राशि उपलब्ध कराई गई, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती ने इस ऐतिहासिक कदम पर पानी फेर दिया है.
76% ग्रामीण आबादी पर सीधी मार
झारखंड की लगभग 3.29 करोड़ आबादी में से करीब 2.50 करोड़ (76 प्रतिशत) लोग गांवों में रहते हैं. राज्य की 4,423 पंचायतों में ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों जैसे- नल-जल योजना व जलमीनार की मरम्मत, बंद पड़ी योजनाओं को चालू करना, गांव की नालियां, कच्ची-पक्की सड़कें, आंगनबाड़ी केंद्र और प्रशासनी स्कूलों में छोटे-मोटे निर्माण कार्य इसी फंड से होने थे. 5वें राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा पर पंचायती राज सचिव ने 29 मार्च 2026 को ही इस आवंटन का पत्र जारी कर दिया था. हालांकि, बीते 6 महीनों में विभाग यह तय नहीं कर पाया कि पैसा किस मद में और किस प्रक्रिया से खर्च होगा, जिससे 2.50 करोड़ आबादी बुनियादी सुविधाओं को तरस रही है.
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ग्राम पंचायतों के पास ही अटका 493.51 करोड़ रुपये का बजट
झारखंड वित्त आयोग द्वारा स्वीकृत 658 करोड़ रुपये की कुल राशि का बंटवारा त्रिस्तरीय पंचायती राज ढांचे में इस प्रकार किया गया है.
- ग्राम पंचायत (75% हिस्सा): 493.51 करोड़ रुपये (सबसे निचला और सीधा असरदार स्तर)
- पंचायत समिति (15% हिस्सा): 98.70 करोड़ रुपये
- जिला परिषद (10% हिस्सा): 65.79 करोड़ रुपये
ग्राम पंचायतों के पास ही करीब 494 करोड़ रुपये की भारी राशि पड़ी हुई है, जो सीधे गांव के विकास पर खर्च होनी थी. त्रिस्तरीय पंचायत जनप्रतिनिधि संघ के अध्यक्ष विकास कुमार महतो का कहना है कि “बजट आवंटित कर देना और 6 महीने तक गाइडलाइन न देना पंचायतों को जानबूझकर पीछे धकेलने जैसा है. जनता जवाब मांग रही है और जनप्रतिनिधि बेबस हैं.
ग्रामीण विकास व पंचायती राज विभाग सचिव मनोज कुमार से ‘नया विचार’ के सवाल
सवाल: राज्य वित्त आयोग से स्वीकृत 658 करोड़ रुपये की राशि की वर्तमान में क्या स्थिति है?
सचिव: पहली बार हम लोगों ने पंचायतों को 658 करोड़ रुपये देने का निर्णय लिया था. इसमें से 197 करोड़ रुपये की राशि जिला परिषदों को हस्तांतरित भी कर दी गई थी.
सवाल: लेकिन मार्च से अब तक 6 महीने बीत गए, जमीनी स्तर पर पंचायतों को विकास का पैसा मिला ही नहीं?
सचिव: पूरी राशि का इंतजाम अब कर लिया गया है. बहुत जल्द ही यह सारी राशि सीधे पंचायतों के खातों में भेज दी जाएगी, ताकि गांवों में तुरंत काम शुरू हो सके.
सवाल: पिछले वित्तीय वर्ष के मार्च का मामला है, आखिर इतनी बड़ी देरी क्यों हुई?
सचिव: त्रिस्तरीय पंचायतों (जिला, समिति व ग्राम पंचायत) को एक साथ बजट राशि जारी करनी थी, इसलिए पूरे फंड का प्रबंधन किया जा रहा था. अब आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. राशि जारी करने के साथ ही काम के निष्पादन और खर्च की विस्तृत गाइडलाइन भी जिलों को भेज दी जाएगी.
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