Durga Saptashati Mantra: नवरात्र में मां दुर्गा के अधिकांश भक्त दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं. दुर्गा सप्तशती के पाठ को चंडी पाठ के नाम से भी जाना जाता है. मार्कंडेय पुराण के अनुसार, शरदीय नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने और उसमें दिए गए विशेष मंत्रों के जाप से परेशानियों से मुक्ति मिलती है. ऐसा मार्कंडेय पुराण में कहा गया है. इस लेख में आपको दुर्गा सप्तशती में दिए गए 6 मंत्रों को उसके हिंदी अर्थ सहित बता रहे हैं.
दुर्गा सप्तशती के 6 मंत्र हिंदी अर्थ सहित
- काम में सफलता पाने के लिए
शरणागतदीनार्त्त-परित्राणपरायणे, सर्व्वस्यार्त्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तुते
अर्थ- शरण में आए हुए दीनों (असहायों) और पीड़ितों की रक्षा में तत्पर रहने वाली, सभी का कष्ट दूर करने वाली हे नारायणी देवी! आपको नमस्कार है.
करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः
अर्थ- हे शुभ कार्यों को उत्पन्न करने वाली और कल्याण करने वाली ईश्वरी देवी! आप हमारा कल्याण और मंगल करें. हे देवी! आप हमारी सभी आपत्तियों और विपत्तियों का नाश करें.
- मां दुर्गा से मनचाहा वरदान प्राप्ति के लिए
बभूवान्तर्हिता सद्यो भक्त्या ताभ्यामभिष्टुता, एवं देव्या वरंल्लब्ध्वा सुरथः क्षत्रियर्षभः
अर्थ- हे देवी! जिस तरह राजा सुरथ और वैश्य द्वारा की गई स्तुति से प्रसन्न होकर आपने उन्हें तत्काल वरदान दिया था, उसी तरह मेरे द्वारा की गई मंत्र स्तुति से मुझे वर (वरदान) प्रदान करें.
- अकाल मृत्यु से बचने के लिए
शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके, घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च
अर्थ- हे देवी! आप अपने त्रिशूल से हमारी रक्षा करें. हे मां अम्बिके! आप अपनी तलवार से हमारी रक्षा करें. आप अपने घंटे की पवित्र ध्वनि से और अपने धनुष की टंकार से भी हमारी रक्षा करें.
- किसी भी तरह की विपत्ति के नाश के लिए
दुर्ग्गे स्मृता हरसि भीतिमशेष-जन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभान्ददासि दारिद्र्य-दुःख-भयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता
अर्थ- हे मां दुर्गे! जब कोई संकट में आपको याद करता है, तो आप सभी प्राणियों का डर दूर कर देती हैं. जब कोई शांत मन से आपका ध्यान करता है, तो आप उसे अत्यंत शुभ और श्रेष्ठ बुद्धि देती हैं. हे गरीबी, दुःख और भय को मिटाने वाली माता! आपके सिवा दूसरी कौन है, जिसका दिल हमेशा सबकी भलाई करने के लिए दया से भरा रहता है.
- बाधा दूर करने और शत्रुनाश के लिए
सर्व्वबाधाप्रशमनन् त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि, एवमेव त्वया कार्य्यमस्मद्वैरि-विनाशनम्
अर्थ- हे तीनों लोकों की स्वामिनी! पूरे संसार की रक्षा करने वाली माता! आप इसी प्रकार हमारे शत्रुओं (और सभी प्रकार की बुराइयों) का नाश करती रहें और हमारे जीवन में आने वाले सभी संकटों और बाधाओं को हमेशा के लिए दूर करती रहें.
- बाधा से मुक्ति, धन लाभ और संतान प्राप्ति के लिए
सर्व्वबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः
अर्थ- जो मनुष्य (इस स्तुति द्वारा) मेरी पूजा करेगा, वह मेरी कृपा से सभी प्रकार की बाधाओं और परेशानियों से मुक्त हो जाएगा और उसे धन-दौलत, अन्न तथा संतान का सुख प्राप्त होगा. इसमें कोई संदेह नहीं है.
दुर्गा सप्तशती के 6 शक्तिशाली मंत्र और उनके अर्थ
| क्रम | किस उद्देश्य के लिए | दुर्गा सप्तशती का मंत्र | मंत्र का अर्थ |
| 1 | काम में सफलता और कल्याण के लिए | शरणागतदीनार्त्त-परित्राणपरायणे, सर्व्वस्यार्त्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तुते करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः |
हे नारायणी देवी! शरण में आए असहायों और पीड़ितों की रक्षा करने वाली तथा सभी के कष्ट दूर करने वाली माता, आपको नमस्कार है. हे देवी! हमारा कल्याण करें और सभी आपत्तियों व विपत्तियों का नाश करें. |
| 2 | मां दुर्गा से मनचाहा वरदान पाने के लिए | बभूवान्तर्हिता सद्यो भक्त्या ताभ्यामभिष्टुता, एवं देव्या वरंल्लब्ध्वा सुरथः क्षत्रियर्षभः। | हे देवी! जिस प्रकार राजा सुरथ और वैश्य की स्तुति से प्रसन्न होकर आपने उन्हें वरदान दिया था, उसी प्रकार मेरी स्तुति से प्रसन्न होकर मुझे भी मनचाहा वरदान प्रदान करें. |
| 3 | अकाल मृत्यु के भय से रक्षा के लिए | शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके, घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च। | हे देवी! अपने त्रिशूल और तलवार से हमारी रक्षा करें. अपने घंटे की पवित्र ध्वनि और धनुष की टंकार से भी हमारी रक्षा करें. |
| 4 | सभी प्रकार की विपत्तियों से मुक्ति के लिए | दुर्ग्गे स्मृता हरसि भीतिमशेष-जन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभान्ददासि।दारिद्र्य-दुःख-भयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता। | हे मां दुर्गे! संकट में स्मरण करने पर आप सभी प्राणियों का भय दूर करती हैं. शांत मन से ध्यान करने पर शुभ बुद्धि प्रदान करती हैं. हे गरीबी, दुख और भय को मिटाने वाली माता! आपके समान सबका कल्याण करने वाली और कौन है? |
| 5 | बाधाएं दूर करने और शत्रुओं के नाश के लिए | सर्व्वबाधाप्रशमनन् त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि, एवमेव त्वया कार्य्यमस्मद्वैरि-विनाशनम्। | हे तीनों लोकों की स्वामिनी देवी! आप हमारे शत्रुओं और बुराइयों का नाश करें तथा जीवन में आने वाले सभी संकटों और बाधाओं को दूर करें. |
| 6 | बाधा मुक्ति, धन-धान्य और संतान सुख के लिए | सर्व्वबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः। | देवी कहती हैं कि उनकी कृपा से मनुष्य सभी बाधाओं से मुक्त होकर धन-धान्य और संतान का सुख प्राप्त करेगा. इसमें कोई संदेह नहीं है. |
नोट: दिए गए मंत्रों का उल्लेख कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय से प्रकाशित दुर्गा सप्तशती नामक पुस्तक में किया गया है.
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