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Author name: Vinod Jha

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सिलीगुड़ी के पास BSF चौकी पहुंचे अमित शाह, सीमा सुरक्षा की समीक्षा और ‘चिकन नेक’ पर किया महामंथन

Amit Shah Siliguri BSF Post Visit: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार (18 जुलाई 2026) को उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी शहर के बाहरी इलाके में स्थित सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 18वीं बटालियन की चौकी का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में हिंदुस्तान-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और सीमा प्रबंधन की व्यापक समीक्षा की. गृह मंत्री शुक्रवार रात को ही पश्चिम बंगाल के दौरे पर पहुंचे थे. वह कई कार्यक्रमों में भाग लेंगे. इसके साथ ही वे बीएसएफ से जुड़ी कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे. अमित शाह के 3 प्रमुख कार्यक्रम ‘प्रहरी सम्मेलन’ को संबोधित करेंगे. बीएसएफ कर्मियों से सीधा संवाद करेंगे. पौधरोपण कार्यक्रम में भाग लेंगे. ‘चिकन नेक’ गलियारे की सुरक्षा पर महामंथन बीएसएफ परिसर में गृह मंत्री अमित शाह एक उच्चस्तरीय बैठक करने जा रहे हैं. बैठक में राज्य के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल, गृह सचिव संघमित्रा घोष, बीएसएफ के महानिदेशक प्रवीण कुमार, एनआईए (NIA) के महानिदेशक राकेश अग्रवाल, राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) सिद्धनाथ गुप्ता, उत्तर बंगाल के आईजी सुकेश जैन और खुफिया ब्यूरो (IB) के संयुक्त निदेशक शामिल हो सकते हैं. ये भी पढ़ें: अमित शाह के दौरे से पहले कोलकाता में बवाल, डॉ श्यामा प्रसाद की प्रतिमा के चबूतरे पर तोड़फोड़, तनाव 8 राज्यों और 3 देशों से जुड़ा है ‘चिकन नेक’ बैठक का मुख्य एजेंडा ‘चिकन नेक’ के नाम से प्रसिद्ध सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी गलियारे (Siliguri Corridor) की सुरक्षा व्यवस्था है. 17 से 22 किलोमीटर लंबा यह संकरा क्षेत्र हिंदुस्तान के लिए बेहद संवेदनशील है, क्योंकि यह पूर्वोत्तर के 8 राज्यों को शेष हिंदुस्तान से जोड़ने वाला एकमात्र जमीनी मार्ग है. यह गलियारा 3 अंतरराष्ट्रीय सीमाओं- उत्तर में नेपाल, दक्षिण में बांग्लादेश और उत्तर-पूर्व में भूटान के बीच स्थित है. ये भी पढ़ें: अमित शाह आज पश्चिम बंगाल में, नदिया पुलिस हाई अलर्ट सीमा पर बाड़ लगाने के लिए शुभेंदु प्रशासन ने ट्रांसफर की जमीन सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में पश्चिम बंगाल की राज्य प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है. राज्य प्रशासन ने इस संवेदनशील क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने के लिए 120 एकड़ भूमि बीएसएफ को हस्तांतरित की है. इसके अलावा, सुरक्षा और बेहतर कनेक्टिविटी के मद्देनजर इस इलाके के 7 महत्वपूर्ण राजमार्गों का प्रबंधन भी केंद्र प्रशासन को सौंप दिया गया है. यह प्रबंधन पहले राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) के राष्ट्रीय राजमार्ग प्रकोष्ठ के अधीन था. ये भी पढ़ें: अमित शाह शुक्रवार को आयेंगे बंगाल, तीन दिवसीय दौरे में केंद्रीय गृह मंत्री करेंगे सीमा सुरक्षा की समीक्षा ‘उत्तर कन्या’ में प्रशासनिक बैठकें, शाम को पहुंचेंगे कोलकाता गृह मंत्री अमित शाह का उत्तर बंगाल स्थित राज्य सचिवालय की शाखा ‘उत्तर कन्या’ में भी कई बैठकों की अध्यक्षता करने का कार्यक्रम है. इन बैठकों में सीमा प्रबंधन के अलावा राज्य में नये आपराधिक कानूनों (New Criminal Laws) के क्रियान्वयन तथा जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़े प्रशासनिक मुद्दों की समीक्षा की जायेगी. ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल आ रहे हैं अमित शाह, सीमा सुरक्षा की समीक्षा करेंगे गृह मंत्री 19 जुलाई को कोलकाता में शाह के कई कार्यक्रम शनिवार शाम को अमित शाह कोलकाता पहुंचेंगे. रविवार को कोलकाता में कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेने के अलावा, वे राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर एक और उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे. The post सिलीगुड़ी के पास BSF चौकी पहुंचे अमित शाह, सीमा सुरक्षा की समीक्षा और ‘चिकन नेक’ पर किया महामंथन appeared first on Naya Vichar.

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तीन स्टेज वाला रॉकेट, 350 किलो पेलोड कैपेसिटी : जानिए भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट की 5 खूबियां

Vikram Rocket Launch : हिंदुस्तान के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया है. हैदराबाद स्थित निजी कंपनी ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ ने देश का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष सेंटर से लॉन्च किया. ‘मिशन आगमन’ के तहत हुए इस लॉन्च ने हिंदुस्तान के निजी स्पेस सेक्टर के लिए बड़ी उपलब्धि हासिल की है. इस मिशन के साथ स्काईरूट एयरोस्पेस हिंदुस्तान की पहली निजी कंपनी बन गई है, जिसने ऑर्बिटल क्लास रॉकेट लॉन्च किया. ये भी पढ़ें : Video : हिंदुस्तान का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 लॉन्च तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज और लिक्विड मॉड्यूल से लैस विक्रम-1 को आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया गया है. इसमें तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज लगाए गए हैं, जो रॉकेट को शुरुआती उड़ान के दौरान आवश्यक ताकत देते हैं. इसके अलावा इसमें लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल भी लगाया गया है, जो अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद रॉकेट की दिशा और कक्षा को सटीक तरीके से नियंत्रित करता है. इसी तकनीक की मदद से यह अलग-अलग उपग्रहों को उनकी तय कक्षाओं में स्थापित कर सकता है. विक्रम-1 रॉकेट 350 किलो तक का पेलोड ले जाने में सक्षम विक्रम-1 को छोटे और मध्यम आकार के उपग्रहों के लॉन्च को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. यह 450 किलोमीटर ऊंचाई वाली लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 350 किलोग्राम तक का पेलोड पहुंचाने की क्षमता रखता है. रॉकेट को 60 डिग्री इंक्लिनेशन वाली कक्षा के लिए तैयार किया गया है, जिससे पृथ्वी अवलोकन, संचार और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े कई मिशनों को लॉन्च किया जा सकता है. कार्बन फाइबर और 3D-प्रिंटेड इंजन इसकी सबसे बड़ी ताकत विक्रम-1 पूरी तरह कार्बन-कंपोजिट यानी कार्बन फाइबर से बना है. यह स्टील की तुलना में कई गुना हल्का होने के साथ काफी मजबूत भी होता है. कम वजन होने से रॉकेट ज्यादा पेलोड ले जा सकता है. इसके अलावा इसमें लगे कई इंजन और ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल 3D प्रिंटिंग तकनीक से तैयार किए गए हैं. इससे निर्माण लागत कम होती है और रॉकेट को तेजी से तैयार किया जा सकता है. ये भी पढ़ें : पत्नी, शिशु और माता-पिता, जानिए सोनम वांगचुक की फैमिली में कौन-कौन हैं? डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया नाम इस रॉकेट सीरीज का नाम हिंदुस्तानीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है. स्काईरूट एयरोस्पेस का मानना है कि विक्रम-1 भविष्य में छोटे उपग्रहों के व्यावसायिक लॉन्च के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बन सकता है. इसके जरिए हिंदुस्तान वैश्विक स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ-साथ निजी स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी नई पहचान बना सकता है. The post तीन स्टेज वाला रॉकेट, 350 किलो पेलोड कैपेसिटी : जानिए हिंदुस्तान के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट की 5 खूबियां appeared first on Naya Vichar.

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सोनम वांगचुक का अस्पताल में भी अनशन जारी, पत्नी गीतांजलि बोलीं- 20 जुलाई को होकर रहेगा संसद मार्च

Sonam Wangchuk Hunger Strike: अस्पताल के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए गीतांजलि आंगमो ने प्रशासन और पुलिस प्रशासन पर कई गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “20 जुलाई का हमारा कार्यक्रम पूरी तरह तय है. शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाना कार्यपालिका और नीति निर्माताओं की जिम्मेदारी है. हमारा काम सिर्फ उन्हें यह आईना दिखाना है कि वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है.” आंदोलन अब सिर्फ ‘पेपर लीक’ तक सीमित नहीं गीतांजलि ने कहा कि यह आंदोलन अब केवल नीट परीक्षा के पेपर लीक के मुद्दे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की पूरी शिक्षा प्रणाली में अमूल-चूल सुधारों के लिए एक व्यापक राष्ट्रव्यापी अभियान बन चुका है. न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, “यह लड़ाई सिर्फ कुछ प्रश्नपत्रों के लीक होने के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की अंतरात्मा को जगाने के लिए है, और देश की जनता अब काफी हद तक जागृत हो चुकी है.” इलेक्ट्रोलाइट पाउडर लेने से इनकार, सिर्फ नमक-पानी पर उपवास अस्पताल प्रशासन द्वारा वांगचुक को इलेक्ट्रोलाइट पाउडर देने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने इसे लेने से साफ मना कर दिया. पत्नी ने बताया कि वांगचुक चीनी का बिल्कुल भी सेवन नहीं कर रहे हैं, वे केवल नमक युक्त पानी पीकर अपना अनशन जारी रखे हुए हैं. उन्होंने कहा, “सोनम पिछले 20 दिनों से उपवास पर हैं. वे शारीरिक रूप से कमजोर जरूर हुए हैं और उनकी मांसपेशियां शिथिल हो रही हैं, लेकिन मानसिक रूप से वे बेहद मजबूत और सचेत हैं.” जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या कोई वरिष्ठ नेता इस गतिरोध को सुलझाने के लिए हस्तक्षेप कर सकते हैं, तो उन्होंने निराशा जताते हुए कहा, “वह दौर अलग था, यह दौर अलग है. मुझे इसकी कोई संभावना नजर नहीं आती.” हाईकोर्ट के आदेश पर उठाए सवाल, जांच रिपोर्ट पर शक सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराए जाने की कानूनी वैधता पर सवाल उठाते हुए गीतांजलि ने कहा कि दिल्ली हई कोर्ट ने केवल नियमित स्वास्थ्य निगरानी का निर्देश दिया था, अस्पताल में जबरन भर्ती करने का कोई आदेश नहीं था. इसलिए पुलिस की यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप नहीं है. वांगचुक की पत्नी ने अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट पर भी जताया संदेह वांगचुक की पत्नी ने अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट पर भी संदेह जताया. उन्होंने कहा: “अस्पताल प्रशासन हमें मेडिकल रिपोर्ट नहीं सौंप रहा है. उनके पोटेशियम लेवल को लेकर जो आंकड़े दिए जा रहे हैं, वे संदिग्ध हैं. कल उनका पोटेशियम 4.3 था और आज अचानक 2.9 बताया जा रहा है, जो मुमकिन नहीं लगता. हम कोई भी दवा या उपचार लेने से पहले किसी बाहरी (इंडिपेंडेंट) लैब से इन टेस्ट रिपोर्टों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन करवाएंगे.” हालत स्थिर, पर कमजोरी : अस्पताल प्रशासन सफदरजंग अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ चारू बंबा ने बताया कि सोनम वांगचुक को सुबह करीब 7:40 बजे अस्पताल लाया गया था. लंबे समय तक उपवास के कारण वे थोड़े कमजोर हैं और उनमें हल्का डिहाइड्रेशन है. हालांकि, उनके सभी प्रमुख स्वास्थ्य पैरामीटर स्थिर हैं और डॉक्टरों की टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है. वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई कोर्ट के निर्देश और वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए डॉक्टरों की सलाह पर की गई है, जिसमें पूरे संयम का परिचय दिया गया. ये भी पढ़ें: सोनम वांगचुक के अनशन आंदोलन को कौन-कौन दे रहे समर्थन? झारखंड का ये विधायक भी पहुंचा जंतर-मंतर The post सोनम वांगचुक का अस्पताल में भी अनशन जारी, पत्नी गीतांजलि बोलीं- 20 जुलाई को होकर रहेगा संसद मार्च appeared first on Naya Vichar.

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पत्नी, बच्चे और माता-पिता, जानिए सोनम वांगचुक की फैमिली में कौन-कौन हैं?

Sonam Wangchuk Family : देश भर में चर्चा में चल रहे सोनम वांगचुक का जन्म लद्दाख के लेह जिले में उलेतोकपो गांव में 1 सितंबर 1966 को हुआ. उनकी शुरुआती पढ़ाई 9 साल की उम्र तक घर पर ही हुई. अपने कई इंटरव्यू में सोनम बता चुके हैं कि उनकी इस शुरुआती पढ़ाई में उनकी मां का बड़ा योगदान रहा. वहीं पिता सोनम वांग्याल भी सामाजिक कार्यकर्ता और बड़े नेता के तौर पर काफी प्रचलित थे. बताते चलें कि सोनम वांगचुक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 21 दिनों से आमरण अनशन पर हैं. उन्हें पुलिस ने शनिवार सुबह जबरन अस्पताल में भर्ती कराया है. पिता सोनम वांग्याल भी रहे बड़े जननेता सोनम वांगचुक के पिता सोनम वांग्याल लद्दाख के प्रमुख नेतृत्वक नेताओं में गिने जाते थे. वे पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस और बाद में कांग्रेस पार्टी से जुड़े. अपने नेतृत्वक जीवन में वे जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सदस्य (MLA) रहे और 1975 में राज्य प्रशासन में कैबिनेट मंत्री भी बने. वर्ष 1984 में उन्होंने लद्दाख के लोगों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर लेह में आमरण अनशन शुरू किया था. उनकी बिगड़ती तबीयत की समाचार मिलने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी खुद दिल्ली से लेह पहुंचीं और उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया. इस आंदोलन के कुछ साल बाद 1989 में लद्दाख को एसटी का दर्जा मिला. उनका निधन 1998 में हुआ. सोनम वांगचुक के पिता सोनम वांग्याल (फोटो : X) ये भी पढ़ें : अभिजीत दीपके का ऐलान: सोनम वांगचुक गए तो क्या, अब मैं बैठूंगा अनशन पर सोनम वांग्याल नाम के एक और शख्स ने बनाया था इतिहास सोनम वांग्याल नाम से एक और प्रसिद्ध शख्स लद्दाख से ही आते हैं, लेकिन उनका सोनम वांगचुक के परिवार से संबंध नहीं है. वे हिंदुस्तान के जाने-माने पर्वतारोही और हिंदुस्तान-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के पूर्व जवान रहे हैं. मई 1965 में कैप्टन एम.एस. कोहली के नेतृत्व वाले हिंदुस्तान के पहले सफल एवरेस्ट अभियान में उन्होंने महज 23 साल की उम्र में माउंट एवरेस्ट फतह कर इतिहास रच दिया था. इसके लिए उन्हें पद्म श्री, अर्जुन पुरस्कार और वर्ष 2017 में तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार (लाइफटाइम अचीवमेंट) से सम्मानित किया गया. बाद में वे खुफिया ब्यूरो (IB) में सहायक निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए. मां ने घर पर ही दी थी शुरुआती शिक्षा सोनम वांगचुक की मां सेरिंग वांगमो ने उनके बचपन और शिक्षा की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई. उस समय उनके गांव उलेतोकपो में कोई स्कूल नहीं था. ऐसे में करीब 9 साल की उम्र तक उन्होंने अपने बेटे को घर पर ही पढ़ाया. सेरिंग वांगमो ने उन्हें मातृभाषा लद्दाखी में पढ़ना-लिखना सिखाया और जीवन से जुड़े कई व्यावहारिक सबक भी दिए. सोनम वांगचुक कई बार कह चुके हैं कि अपनी मातृभाषा में मिली शुरुआती शिक्षा ने उनकी सोच और व्यक्तित्व को मजबूत बनाया. ये भी पढ़ें : जंतर मंतर से सोनम वांगचुक को हटाया गया, अस्पताल ले गई पुलिस, CJP ने लगाया लाठीचार्ज का आरोप प्रकृति से जुड़ाव की सीख भी मां से मिली स्कूल न होने की वजह से सोनम वांगचुक अपना अधिकतर समय अपनी मां के साथ बिताते थे. वे खेती-बाड़ी और घर के दूसरे कामों में उनका हाथ बंटाते थे, जिससे बचपन से ही उनका प्रकृति और स्थानीय जीवनशैली से गहरा जुड़ाव बना. यही अनुभव आगे चलकर उनके पर्यावरण और टिकाऊ विकास से जुड़े कामों की प्रेरणा भी बने. छेरिंग वांगमो का अब निधन हो चुका है, लेकिन सोनम वांगचुक आज भी कई मौकों पर अपनी मां को अपनी पहली शिक्षिका और सबसे बड़ी प्रेरणा बताते हैं. कौन हैं सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि? सोनम वांगचुक की पत्नी का नाम गीतांजलि जे. एंगमो है, जो पेशे से एक सोशल एंटरप्रेन्योर और एजुकेशनिस्ट हैं. ओड़िशा के बालासोर में एक पंजाबी-जैन परिवार में जन्मीं गीतांजलि की बचपन से ही सामाजिक विकास में गहरी रुचि थी. उन्होंने ओड़िशा फकीर मोहन विश्वविद्यालय से भौतिकी में डिग्री प्राप्त की और उसके बाद भुवनेश्वर के जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से मार्केटिंग और फाइनेंस में एमबीए किया.  ये भी पढ़ें : PHOTO : ह्यूमन चेन, सफेद पर्दा और पुलिस का घेरा… ऐसे जंतर-मंतर से हटाए गए सोनम वांगचुक, देखें तस्वीरें वर्ल्ड चैंपिंयन रह चुकी हैं गीतांजलि एक सामाजिक उद्यमी और शिक्षिका के रूप में उनका करियर सोनम के प्रेरक जीवन के साथ काफी मेल खाता है. शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के साथ-साथ वह कराटे में ब्लैक बेल्ट भी हैं और 2009 में वर्ल्ड चैंपियन रह चुकी हैं. सोनम वांगचुक के बच्चों या अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है. इसका कारण यह कि उन्होंने अपने निजी जीवन के बारे में अधिक जानकारियां साझा नहीं की है. The post पत्नी, शिशु और माता-पिता, जानिए सोनम वांगचुक की फैमिली में कौन-कौन हैं? appeared first on Naya Vichar.

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Vikram-1 Launched: स्काईरूट टीम को पीएम मोदी ने किया फोन, कहा- 25 से 30 साल के युवा दिख रहे थे मुझे

Vikram-1 Launched: हिंदुस्तान की पहली प्राइवेट कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस के ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 की सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीम से फोन पर बात कर बधाई दी. विक्रम-1 ने अपनी उड़ान सफलतापूर्वक पूरी करते हुए 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर पेलोड को कक्षा में स्थापित किया. इस कामयाबी के साथ हिंदुस्तान दुनिया का तीसरा देश बन गया है, जिसने किसी प्राइवेट कंपनी के जरिए ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च करने की उपलब्धि हासिल की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम से फोन पर कहा कि सबसे पहले आप सभी को बहुत-बहुत बधाई. आपने दो बड़े काम किए हैं. एक तो आसमान में पौधे गाड़ दिए हैं. दूसरा उसके रूट को आपने जमीन पर भी मजबूती दी है. आपकी यह उपलब्धि देश के युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा देगी. पीएम ने कहा कि लॉन्चिंग के दौरान वह पूरी प्रक्रिया देख रहे थे. उन्हें सबसे ज्यादा खुशी इस बात की हुई कि टीम के ज्यादातर सदस्य 25 से 30 साल के युवा थे, जिन्होंने अपने दम पर यह इतिहास रच दिया. देखें वीडियो. विक्रम-1 के लॉन्च के समय स्काईरूट एयरोस्पेस के दोनों संस्थापक इसरो के मिशन कंट्रोल सेंटर में मौजूद थे. सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें फोन कर बधाई दी और कहा कि ‘मिशन आगमन’ की तरह आगे भी आपकी हर उड़ान सफल रहे. पीएम ने कहा कि यह मिशन दिखाता है कि हिंदुस्तान अपनी ताकत के दम पर बड़े टारगेट हासिल कर सकता है. इस पर स्काईरूट के संस्थापक ने बताया कि विक्रम-1 पूरी तरह हिंदुस्तान में डिजाइन और तैयार किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी का ‘वंदे मातरम्’ वाला पोस्टकार्ड भी रॉकेट के साथ 450 किलोमीटर ऊंचाई पर पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंच गया है. ये भी पढ़ें: Video : हिंदुस्तान का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 लॉन्च The post Vikram-1 Launched: स्काईरूट टीम को पीएम मोदी ने किया फोन, कहा- 25 से 30 साल के युवा दिख रहे थे मुझे appeared first on Naya Vichar.

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सोनम वांगचुक के अनशन आंदोलन को कौन-कौन दे रहे समर्थन? झारखंड का ये विधायक भी पहुंचा जंतर-मंतर

शनिवार सुबह 7:40 बजे सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया. वह 28 जून से जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे प्रदर्शन के समर्थन में आमरण अनशन पर बैठे हैं. यह आंदोलन नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और इस विवाद से जुड़े छात्रों की मौत के मामलों को लेकर चल रहा है. इनकी मांग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें. वांगचुक के अनशन को नेताओं के अलावा मनोरंजन जगत के लोगों का भी समर्थन मिला. वांगचुक के अनशन के समर्थन में अरविंद केजरीवाल 16 जुलाई को आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल जंतर-मंतर पहुंचे और सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनके आंदोलन का समर्थन किया. उन्होंने नीट पेपर लीक के आरोपों को लेकर केंद्र प्रशासन पर निशाना साधा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की. केजरीवाल ने कहा कि हर साल परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होते हैं और इसकी कीमत युवाओं को चुकानी पड़ती है. मैं प्रशासन से अपील करता हूं कि वह छात्रों और वांगचुक की बात सुने. डिंपल यादव पहुंचीं जंतर-मंतर समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद डिंपल यादव ने 16 जुलाई को केंद्र प्रशासन से सोनम वांगचुक के साथ बातचीत शुरू करने और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ द्वारा उठाई गई मांगों का समाधान करने का आग्रह किया. डिंपल ने केंद्र की मोदी प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह वांगचुक द्वारा किए जा रहे अनिश्चितकालीन अनशन और नीट प्रश्नपत्र के कथित लीक से जुड़ी छात्रों की मौत के बावजूद संवेदनहीन बनी हुई है. सपा सांसद जंतर-मंतर पर CJP के विरोध प्रदर्शन स्थल पर पहुंची और वांगचुक से उनके अनिश्चितकालीन अनशन के 19वें दिन मुलाकात की. कांग्रेस का समर्थन मिला सोनम वांगचुक को 17 जुलाई को कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा भी जंतर-मंतर पहुंचे और सोनम वांगचुक से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रशासन का सबसे बड़ा कर्तव्य लोगों की आवाज सुनना है. खेड़ा ने वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील करते हुए कहा कि उनकी सेहत सबसे ज्यादा जरूरी है. साथ ही उन्होंने केंद्र प्रशासन से भी आंदोलनकारियों की मांगों को गंभीरता से सुनने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की. वांगचुक से मिलने जंतर-मंतर पहुंचे झारखंड के विधायक जयराम झारखंड के डुमरी विधायक जयराम महतो भी दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे और भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से मुलाकात की. 17 जुलाई को उन्होंने वांगचुक का हालचाल जाना और उनकी बिगड़ती सेहत पर चिंता जताई. जयराम महतो ने केंद्र प्रशासन से अपील की कि वह इस मामले में सकारात्मक पहल करे और बातचीत के जरिए जल्द समाधान निकाले. उद्धव ठाकरे भी सोनम वांगचुक के समर्थन में सोनम वांगचुक के आंदोलन और सीजेपी की मांगों का समर्थन करने वाले नेताओं में उद्धव ठाकरे भी प्रमुख चेहरों में शामिल हैं. उन्होंने खुलकर वांगचुक के आंदोलन का समर्थन किया और उनकी मांगों के प्रति अपनी एकजुटता जताई. शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अभिजीत दीपके से फोन पर बात कर सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताई. उन्होंने वांगचुक से आमरण अनशन खत्म करने की अपील की और कहा कि उनकी सेहत सबसे ज्यादा जरूरी है. ये भी पढ़ें: सोनम वांगचुक को अस्पताल ले गई पुलिस, पत्नी बोलीं- मेरी मंजूरी के बिना कोई दवा न दी जाए टीएमसी की सांसद महुआ मोइत्रा ने किया समर्थन तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी शुरू से ही सोनम वांगचुक के आंदोलन का समर्थन किया है. उन्होंने 16 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की. महुआ ने लिखा कि आपके आंदोलन ने देश के युवाओं को न्याय की लड़ाई में एकजुट किया है. प्रशासन भले आपकी परवाह न करे, लेकिन आपकी जिंदगी हमारे लिए बेहद अहम है. उन्होंने वांगचुक से अनशन खत्म कर आंदोलन जारी रखने का आग्रह किया. सांसद चंद्रशेखर आजाद के अलावा ये नेता भी पहुंचे जंतर-मंतर भीम आर्मी प्रमुख और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद, सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी और अजेंद्र सिंह लोधी, टीएमसी की राज्यसभा सांसद डोला सेन, कांग्रेस सांसद प्रशांत यादवराव पडोले और सीपीआई के राज्यसभा सांसद संदोष कुमार भी जंतर-मंतर पहुंचे. सभी नेताओं ने सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनके आंदोलन का समर्थन किया और उनकी मांगों पर प्रशासन से सकारात्मक पहल की अपील की. किरण राव ने सोनम वांगचुक के अनशन के बीच उनका समर्थन किया फिल्म निर्माता किरण राव ने अनशन कर रहे कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का समर्थन किया और प्रशासन से “प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत शुरू करने” का आग्रह किया है. किरण राव ने 17 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘इंस्टाग्राम’ पर वांगचुक की एक तस्वीर शेयर की, जिस पर लिखा था कि मैं सोनम का समर्थन करती हूं. View on Instagram कॉमेडियन कुणाल कामरा भी पहुंचे थे समर्थन करने कॉमेडियन कुणाल कामरा भी दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे और सोनम वांगचुक के अनशन का समर्थन किया. इस दौरान उन्होंने केंद्र प्रशासन पर तीखा तंज कसते हुए आंदोलन के समर्थन में अपनी बात रखी. उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनकी काफी चर्चा होने लगी और वह एक बार फिर सुर्खियों में आ गए. एक्टर प्रकाश राज पहुंचे जंतर-मंतर 11 जुलाई को एक्टर प्रकाश राज भी दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे और सोनम वांगचुक व सीजेपी के आंदोलन में शामिल हुए. उन्होंने सोशल मीडिया पर वांगचुक के साथ तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि जंतर-मंतर पर देश के युवाओं के साथ एकजुटता में. मौके पर प्रकाश राज प्रदर्शनकारियों से बातचीत करते नजर आए और वांगचुक के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं.  The post सोनम वांगचुक के अनशन आंदोलन को कौन-कौन दे रहे समर्थन? झारखंड का ये विधायक भी पहुंचा जंतर-मंतर appeared first on Naya Vichar.

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कोसी, कमला और बलान उफनाई, 20+ गांव जलमग्न, 6 टापू में तब्दील, नाव एकमात्र सहारा

Bihar Flood Alert: नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का असर अब बिहार में साफ दिखने लगा है. कोसी बराज से लगातार पानी छोड़े जाने के बाद दरभंगा में बाढ़ के हालात गंभीर हो गए हैं. जिले के 20 से अधिक गांव जलमग्न हो चुके हैं, जबकि कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के छह गांव पूरी तरह टापू में तब्दील हो गए हैं. गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है और लोगों की आवाजाही अब केवल नाव के सहारे हो रही है. दरभंगा के कई गांवों का सड़क संपर्क टूटा बाढ़ का पानी बढ़ने के बाद नाव से जाते लोग, फोटो- नया विचार ग्रामीणों का कहना है कि बाजार जाने, दवा लाने, बैंक का काम करने और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए अब सिर्फ नाव ही एकमात्र विकल्प बचा है. निजी नाव संचालक एक बार आने-जाने के लिए प्रति व्यक्ति 40 रुपये किराया ले रहे हैं. बाढ़ के कारण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हो गई है. बिहार के कई जिलों में बारिश से राहत इधर शनिवार सुबह बगहा, पूर्णिया, अररिया, बक्सर, जहानाबाद, खगड़िया और बेतिया समेत कई जिलों में बारिश हुई. ठंडी हवाएं चलने और आसमान में बादल छाए रहने से लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली है. 5 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, 20 जुलाई से और सक्रिय होगा मानसून मौसम विभाग ने शनिवार को बिहार के पांच जिलों के लिए आंधी और बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. विभाग के अनुसार 20 जुलाई से मानसून फिर सक्रिय होने की संभावना है. इसके बाद राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर अच्छी बारिश हो सकती है. बारिश बढ़ने से तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी व उमस से राहत मिलेगी. यह भी पढे़ं: जलस्तर घटने के बाद भी बाढ़ का संकट बरकरार, नाव के सहारे आवागमन को मजबूर लोग The post कोसी, कमला और बलान उफनाई, 20+ गांव जलमग्न, 6 टापू में तब्दील, नाव एकमात्र सहारा appeared first on Naya Vichar.

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क्या हमने कहा था कि कमर में पिस्टल लेकर घूमो? कोचिंग विवाद पर पहली बार बोले खान सर, प्रिंस यादव को लेकर किए ये दावे

Khan Sir Coaching Controversy: पटना के चर्चित कोचिंग फायरिंग विवाद पर खान सर ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है. एक पॉडकास्ट में उन्होंने रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की मौत और पूरे विवाद के बारे में बात की है. खान सर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें बेवजह इस मामले में घसीटा जा रहा है. ‘क्या हमने उसे नेपाल भेजा था?’ पॉडकास्ट में खान सर से पूछा गया कि रौशन आनंद का आरोप है कि 2 जून की घटना के बाद उनके बयान की वजह से प्रिंस यादव नेपाल गया, जहां बाद में उसकी मौत हो गई. इस पर खान सर ने साफ कहा कि यह आरोप गलत है. उन्होंने कहा कि क्या हमने उसे नेपाल भेजा था? क्या हमने कहा था कि किसी का अपहरण करो, कमर में पिस्टल लेकर घूमो या रंगदारी मांगो? हमने ऐसा कुछ नहीं कहा. प्रिंस यादव पर लगाए गंभीर आरोप खान सर ने दावा किया कि प्रिंस यादव के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज थे. उनके अनुसार, अपहरण और आर्म्स एक्ट समेत कई मामलों में पुलिस उसकी तलाश कर रही थी. उन्होंने कहा कि इन्हीं मामलों के दबाव में वह नेपाल गया था. पॉडकास्ट के दौरान फैजल खान ने अपने दावों के समर्थन में कुछ FIR की कॉपी भी लाए थे. ‘मुझे बेवजह दोषी बनाया जा रहा’ जब इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि किसी मृत व्यक्ति पर इस तरह के आरोप लगाना क्या सही है, तो खान सर ने कहा कि वह केवल जांच से जुड़ी बातों का जिक्र कर रहे हैं. उनका कहना था कि बिना किसी आधार के उन्हें पूरे मामले का जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. क्या है पूरा कोचिंग फायरिंग विवाद? 2 जून 2026 की रात पटना के मुसल्लहपुर हाट स्थित खान ग्लोबल स्टडीज कोचिंग पर 15 से 20 लोगों ने हमला किया. इस दौरान पथराव और तोड़फोड़ हुई. एक सुरक्षा गार्ड की पिटाई भी की गई. इसके बाद खान सर के गार्डों ने हवा में फायरिंग की, जिससे मामला और बढ़ गया. खान सर ने इस हमले के पीछे प्रतिद्वंद्वी ज्ञान बिंदु कोचिंग के संचालक रौशन आनंद का हाथ होने का आरोप लगाया. इसके बाद पुलिस ने रौशन आनंद को गिरफ्तार किया. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें जांच में बदला केस का रुख शुरुआत में पुलिस ने फायरिंग से इनकार किया था. लेकिन बाद में वीडियो सामने आने के बाद खान सर के सुरक्षा गार्डों को गिरफ्तार किया गया. 4 जून को खान सर और अन्य लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट की धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई. इसी दौरान रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की नेपाल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. इसके बाद रौशन आनंद को जमानत मिली. उन्होंने खान सर पर अपने भाई की हत्या कराने का आरोप लगाया. कोर्ट में विचाराधीन है मामला खान सर को 9 जून को अंतरिम अग्रिम जमानत मिली थी, जिसे बाद में कई बार बढ़ाया गया. 13 जुलाई 2026 को पटना सेशंस कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी. वहीं, उनके दोनों सुरक्षा गार्डों को भी नियमित जमानत मिल चुकी है. फिलहाल यह पूरा मामला अदालत में विचाराधीन है. दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं और मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है. Also Read: AI की राह पर बिहार: सीएम सम्राट की मौजूदगी में दो कंपनियों से करार, प्रशासन ने गूगल से भी की बातचीत The post क्या हमने कहा था कि कमर में पिस्टल लेकर घूमो? कोचिंग विवाद पर पहली बार बोले खान सर, प्रिंस यादव को लेकर किए ये दावे appeared first on Naya Vichar.

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रसोई में इस दिशा में रखें गैस चूल्हा और सिंक, घर में बनी रहेगी खुशहाली

Kitchen Vastu Tips: रसोई घर का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है. यहीं पूरे परिवार के लिए भोजन तैयार होता है, इसलिए वास्तु शास्त्र में किचन की दिशा और उसमें रखी चीजों का खास महत्व बताया गया है. खासकर गैस स्टोव और सिंक की सही जगह को लेकर कई नियम बताए गए हैं. अगर ये दोनों सही दिशा में हों, तो घर में पॉजिटिव एनर्जी बनी रहती है. आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार रसोई में गैस और सिंक किस दिशा (Kitchen Vastu Tips) में होने चाहिए.  गैस स्टोव किस दिशा में रखें? वास्तु शास्त्र के अनुसार गैस स्टोव को रसोई के दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना सबसे शुभ माना जाता है. यह दिशा अग्नि तत्व का प्रतीक मानी जाती है. इस दिशा में खाना बनाने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.  अगर दक्षिण-पूर्व दिशा उपलब्ध न हो, तो उत्तर-पश्चिम दिशा भी एक विकल्प हो सकती है. खाना बनाते समय कोशिश करें कि आपका मुख पूर्व दिशा की ओर रहे. ऐसा करना शुभ माना जाता है.  सिंक किस दिशा में होना चाहिए? सिंक का संबंध जल तत्व से होता है. वास्तु के अनुसार इसे उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में रखना अच्छा माना जाता है. इस दिशा में पानी का स्थान होने से घर में संतुलन बना रहता है और पॉजिटिव माहौल बना रहता है.  Kitchen Vastu Tips: गैस और सिंक को साथ क्यों नहीं रखना चाहिए? वास्तु शास्त्र में अग्नि और जल को विपरीत तत्व माना गया है. इसलिए गैस स्टोव और सिंक को बिल्कुल पास-पास रखने से बचने की सलाह दी जाती है. अगर दोनों साथ होंगे, तो अग्नि और जल तत्व के बीच असंतुलन माना जाता है.  अगर किचन छोटा है और दोनों को दूर रखना संभव नहीं है, तो इनके बीच थोड़ा-सा गैप रखें. चाहें तो बीच में लकड़ी का चॉपिंग बोर्ड या कोई छोटा पार्टिशन भी रखा जा सकता है.  किचन में इन बातों का भी रखें ध्यान रसोई हमेशा साफ और व्यवस्थित रखें.  गैस स्टोव के ऊपर सीधे पानी की टंकी या भारी सामान न रखें.  सिंक में लंबे समय तक गंदे बर्तन जमा न रहने दें.  पीने के पानी का फिल्टर उत्तर-पूर्व दिशा में रखना बेहतर माना जाता है.  यह भी पढ़ें: घर में एक्वेरियम रखना शुभ है या नहीं? जानिए किस दिशा में रखने से बढ़ती है सुख-समृद्धि The post रसोई में इस दिशा में रखें गैस चूल्हा और सिंक, घर में बनी रहेगी खुशहाली appeared first on Naya Vichar.

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India’s Got Latent 2: बिहार की साक्षी झा के ‘मैन हेटर’ बयान से मचा हंगामा, बोली- पति को दारू पीकर मारना है

India’s Got Latent Season 2 Sakshi Jha: समय रैना के शो ‘इंडियाज गॉट लैटेंट सीजन 2’ का तीसरा एपिसोड रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है. इस बार शो की कंटेस्टेंट साक्षी झा ने अपने परफॉर्मेंस के दौरान खुद को मर्दों से नफरत करने वाली बताया. साक्षी बिहार की रहने वाली है और एक टीचर और सोशल मीडिया क्रिएटर भी हैं. Sakshi Jha Calls Herself Man-Hater During Act: साक्षी झा ने खुद को बताया ‘मैन हेटर’ अपने ऑडिशन की शुरुआत करते हुए साक्षी ने कहा, “हाय, मैं साक्षी हूं और मैं मर्दों से नफरत करती हूं. मुझे लगता है कि मर्दों के घमंड को तोड़ने में मुझे मजा आता है. मेरे दोस्त कहते हैं कि साक्षी, तू बहुत अजीब है. ठीक है, मैं हूं. मुझे लगता है कि मैं चाहे कितनी भी कोशिश कर लूं, मैं बड़ी इंसान नहीं बन सकती क्योंकि मैं एक औरत हूं. और इस पीढ़ी में औरत होना एक ट्रॉमा जैसा है.” साक्षी ने आगे कहा, “मैं किसी जाति से नफरत नहीं करती, लेकिन मैं मर्दों से नफरत करती हूं. मर्दों में ऐसा क्या है कि वह कहते हैं कि मैं मर्द हूं. भाई, क्या तुम अपने पिता के पेट से पैदा हुए थे? तुम्हें भी एक औरत ने ही जन्म दिया है.” उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सोच सिर्फ आम पुरुषों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके पिता और भाई को लेकर भी उनके मन में नाराजगी है. The post India’s Got Latent 2: बिहार की साक्षी झा के ‘मैन हेटर’ बयान से मचा हंगामा, बोली- पति को दारू पीकर मारना है appeared first on Naya Vichar.

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