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Author name: Vinod Jha

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फिस्टुला में क्षारसूत्र करवाने के बाद किन बातों का रखें ध्यान? जानिए आयुर्वेदिक डॉक्टर विकास की सलाह

Kshar Sutra Care Tips: फिस्टुला (भगंदर) एक ऐसी समस्या है जिसमें गुदा के आसपास एक असामान्य रास्ता बन जाता है. आयुर्वेद में इसका प्रभावी इलाज क्षारसूत्र थेरेपी से किया जाता है. इस उपचार में औषधीय धागे की मदद से फिस्टुला को धीरे-धीरे ठीक किया जाता है. आयुर्वेदिक डॉक्टर डॉ. विकास के अनुसार, क्षारसूत्र करवाने के बाद मरीज को कुछ जरूरी सावधानियां जरूर रखनी चाहिए ताकि घाव जल्दी भरे और संक्रमण से बचाव हो सके. साफ-सफाई का रखें खास ध्यान क्षारसूत्र के बाद गुदा के आसपास की जगह को साफ रखना बहुत जरूरी होता है. डॉक्टर अक्सर गुनगुने पानी से सिट्ज बाथ लेने की सलाह देते हैं. इससे दर्द कम होता है और घाव जल्दी ठीक होता है. कब्ज बिल्कुल न होने दें डॉ. विकास बताते हैं कि कब्ज होने से घाव पर दबाव पड़ता है और दर्द बढ़ सकता है. इसलिए, फाइबर युक्त भोजन खाएं, ज्यादा पानी पिएं, हरी सब्जियां और फल डाइट में शामिल करें. भारी काम और ज्यादा देर बैठने से बचें क्षारसूत्र के बाद कुछ समय तक भारी वजन उठाने या ज्यादा देर तक बैठने से बचना चाहिए. इससे घाव पर दबाव पड़ सकता है. समय-समय पर ड्रेसिंग और धागा बदलवाएं क्षारसूत्र थेरेपी में डॉक्टर समय-समय पर औषधीय धागा बदलते हैं. इसलिए नियमित फॉलो-अप पर जाना बहुत जरूरी है. मसालेदार और तला-भुना कम खाएं बहुत ज्यादा मसालेदार या तला-भुना खाना पेट में जलन और कब्ज बढ़ा सकता है. इसलिए हल्का और सुपाच्य भोजन लेना बेहतर होता है. डॉक्टर की दवाएं नियमित लें आयुर्वेदिक दवाएं और लेप संक्रमण को कम करने और घाव भरने में मदद करते हैं. इसलिए दवाएं डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लें. यह भी पढ़ें: सुबह खाली पेट पिएं ये जादुई ड्रिंक, 15 दिनों में दिखने लगेगा असर यह भी पढ़ें: जिम जाने की जरूरत नहीं! रात को सोने से पहले करें ये 2 काम, मक्खन की तरह पिघलेगी चर्बी The post फिस्टुला में क्षारसूत्र करवाने के बाद किन बातों का रखें ध्यान? जानिए आयुर्वेदिक डॉक्टर विकास की सलाह appeared first on Naya Vichar.

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सुंदरबन में बाघ से जंग जारी : 5 साल में 21 मौतें, आंकड़े घटे लेकिन खतरा बरकरार

Sundarbans Tiger Attack Deaths: पश्चिम बंगाल के सुंदरबन क्षेत्र में मानव और बाघ के बीच संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है. पिछले 5 वर्षों में बाघ के हमलों में 21 लोगों की जान जा चुकी है. हालांकि, हाल के वर्षों में मौत के आंकड़ों में थोड़ी कमी आयी है, लेकिन खतरा बरकरार है. 2022 में हुई सबसे ज्यादा मौतें वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 के बीच बाघ के हमलों में 21 लोगों की मौत हुई है. वर्ष 2022 में सबसे ज्यादा मौतें हुईं. इसके बाद 2023 और 2024 में मामलों में कुछ गिरावट आयी, लेकिन बाघ के हमले पूरी तरह से बंद नहीं हुए हैं. रोजी-रोटी के लिए जोखिम उठाते हैं लोग सुंदरबन के कई लोग आज भी जंगल और नदी पर निर्भर हैं. मछली पकड़ना, शहद इकट्ठा करना और लकड़ी लाना यहां के लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन है. यही वजह है कि जोखिम जानते हुए भी लोग जंगल में जाते हैं और कई बार बाघ का शिकार बन जाते हैं. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें क्यों बढ़ता है संघर्ष? विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं, चक्रवात और पर्यावरणीय बदलावों के कारण बाघों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हुआ है. इससे वे अक्सर गांवों की ओर रुख करते हैं. वहीं, जंगल पर बढ़ती लोगों की निर्भरता भी संघर्ष का बड़ा कारण है. इसे भी पढ़ें : सुंदरबन दुनिया का सुंदर क्षेत्र, बंगाल प्रशासन ने नहीं किया इसका विकास, बोले भूपेंद्र यादव क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ? वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि मानव-बाघ संघर्ष को कम करने के लिए बेहतर निगरानी, जागरूकता अभियान और वैकल्पिक आजीविका के साधन उपलब्ध कराना जरूरी है. साथ ही, जंगल में प्रवेश करने वालों के लिए सख्त नियमों का पालन और सुरक्षा उपाय अनिवार्य होने चाहिए. खत्म नहीं हुआ है खतरा पिछले 2 वर्षों में मौतों की संख्या कुछ कम हुई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसे स्थायी सुधार नहीं माना जा सकता. सुंदरबन का संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र अभी भी मानव-बाघ संघर्ष की चुनौती से जूझ रहा है. इसे भी पढ़ें सुंदरबन के लोगों तक नहीं पहुंच पायेंगे बाघ, लग रहे 300 फिशिंग सेंसर लाइट सुंदरवन में जल्द शुरू होगी बाघों की गिनती, लगेंगे 1,484 कैमरे The post सुंदरबन में बाघ से जंग जारी : 5 साल में 21 मौतें, आंकड़े घटे लेकिन खतरा बरकरार appeared first on Naya Vichar.

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बोकारो सिविल कोर्ट को साइनाइड बम से उड़ाने की धमकी, सुरक्षा व्यवस्था टाइट

बोकारो से मुकेश झा की रिपोर्ट Bomb Threat: झारखंड के बोकारो जिले में उस समय हड़कंप मच गया जब सिविल कोर्ट को साइनाइड बम से उड़ाने की धमकी मिली. यह धमकी कोर्ट के रजिस्ट्रार के आधिकारिक ईमेल पर भेजी गई थी. मेल में दावा किया गया कि न्यायालय परिसर में 14 साइनाइड बम लगाए गए हैं. धमकी भरे इस ईमेल के सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया और पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई. भोर 3:54 बजे आया धमकी भरा ईमेल जानकारी के अनुसार, यह धमकी भरा ईमेल भोर करीब 3:54 बजे भेजा गया था. मेल में दावा किया गया कि कोर्ट परिसर में कई जगहों पर साइनाइड बम लगाए गए हैं और एक निश्चित समय तक परिसर खाली नहीं करने पर बड़ा विस्फोट हो सकता है. इस ईमेल में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और तमिलनाडु का भी जिक्र किया गया है, जिससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं. हालांकि प्रारंभिक जांच में किसी स्पष्ट लिंक की पुष्टि नहीं हो सकी है. एहतियातन खाली कराया गया कोर्ट परिसर बोकारो के पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह ने बताया कि इस धमकी की जानकारी सुबह करीब 9 बजे न्यायिक पदाधिकारी के माध्यम से पुलिस को मिली. सूचना मिलते ही प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एहतियातन पूरे कोर्ट परिसर को खाली करा दिया. सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के क्षेत्र में बैरिकेडिंग कर दी गई है, ताकि अनावश्यक भीड़ या आवाजाही को रोका जा सके. पुलिस की कई टीमें मौके पर तैनात कर दी गई हैं और पूरे इलाके की गहन जांच की जा रही है. रांची से बुलाई गई जगुआर स्क्वाड टीम मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची से जगुआर स्क्वाड टीम को भी बुला लिया गया है. जिला स्तर के प्रशिक्षित जवान और अधिकारी पूरे परिसर की सघन तलाशी ले रहे हैं. इसके साथ ही रांची एटीएस के एसपी को भी इस मामले की जानकारी दे दी गई है. सुरक्षा एजेंसियां इस ईमेल की तकनीकी जांच भी कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि धमकी किसने और कहां से भेजी है. इसे भी पढ़ें: इटखोरी सीओ की दबंगई ने पकड़ा तूल, वीडियो वायरल होने पर बाबूलाल मरांडी ने की निलंबन की मांग मेल में 1 बजे तक परिसर खाली करने की चेतावनी सूत्रों के अनुसार धमकी भरे ईमेल में यह भी लिखा गया है कि दोपहर एक बजे तक कोर्ट परिसर खाली कर दिया जाए. अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. फिलहाल, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच में जुटी हैं. अधिकारियों का कहना है कि हर पहलू से जांच की जा रही है और दोषी का जल्द पता लगाने की कोशिश की जा रही है. वहीं, कोर्ट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. इसे भी पढ़ें: हाईकोर्ट में 4 हफ्ते के लिए टली जमशेदपुर के जेएनसी की सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट से मिल चुका है स्टे The post बोकारो सिविल कोर्ट को साइनाइड बम से उड़ाने की धमकी, सुरक्षा व्यवस्था टाइट appeared first on Naya Vichar.

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चुनाव आयोग की बैठक में तृणमूल कांग्रेस का हंगामा, ज्ञानेश कुमार से भिड़ गयी चंद्रमा भट्टाचार्य

मुख्य बातें आयोग के व्यवहार से नाराज दिखी चंद्रिमा भट्टाचार्य क्या सुप्रीम कोर्ट जाना गलत था कितने फेज में हो चुनाव पर चुप रही तृणमूल बंगाल को भाजपा की नजर से देखता है आयोग Election Commission Meeting:कोलकाता. बंगाल में विधानसभा चुनाव को ले कर चुनाव आयोग की आज विभिन्न नेतृत्वक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई. बैठक में विभिन्न नेतृत्वक दलों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे. तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधियों का आरोप है कि चुनाव आयोग ने उन्हें बैठक में बुलाया तो जरूर, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया. तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ के साथ बैठक के बाद रवाना हो गया. आयोग के व्यवहार से नाराज दिखी चंद्रिमा भट्टाचार्य चंद्रिमा भट्टाचार्य ने आयोग के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की है. उनका दावा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उन्हें बोलने से मना किया है. चंद्रिमा उनके इस व्यवहार से नाखुश दिखी. चंद्रिमा ने कहा- मैं एक स्त्री हूं और वे मुझे बोलने से मना करते रहे. वास्तव में उन्हें स्त्रीओं के लिए कोई सम्मान नहीं है. इसीलिए वे स्त्रीओं के नाम भी काट रहे हैं. अगर मेरा नाम सूची में नहीं है, तो इसे साबित करना आपकी जिम्मेदारी है. मुझे लाइन में क्यों खड़ा होना पड़ता है. स्त्रीओं पर चिल्लाना आपका काम नहीं है. क्या सुप्रीम कोर्ट जाना गलत था तृणमूल ने एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केस दायर किया है. आयोग के साथ हुई बैठक में यह मुद्दा उठा. चंद्रिमा ने कहा- मैं एसआईआर के बारे में कुछ भी कहूँ, वे कहते हैं कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है, तो फिर उन्होंने हमें क्यों बुलाया. जब उन्होंने हमें बुलाया था, तो हमें उनकी बात सुननी चाहिए थी. क्या सुप्रीम कोर्ट जाना गलत था. हमने काफी कुछ किया है और सुप्रीम कोर्ट गए हैं. क्यों न जाएँ, जनता की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है. कितने फेज में हो चुनाव पर चुप रही तृणमूल चुनाव कितने चरण में हो इस सवाल का जवाब देने से तृणमूल नेताओं ने परहेज किया. उन्होंने कहा- यह मतदान के दौरों पर चर्चा करने का स्थान नहीं है. तृणमूल प्रतिनिधिमंडल में शामिल फिरहाद हकीम ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा-भाजपा के पैर तले ज़मीन नहीं है. वे राज्य को बर्बाद कर रहे हैं. उन्होंने निर्दोष लोगों को SIR की कतार में खड़ा कर दिया है. उनकी वजह से कई लोगों की मौत हो चुकी है. बंगाल की अन्य समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें बंगाल को भाजपा की नजर से देखता है आयोग तृणमूल प्रतिनिधिमंडल में शामिल फिरहाद हकीम ने कहा- भाजपा ने यह धारणा बना रखी है कि बंगाल रोहिंग्याओं और घुसपैठियों का अड्डा है. इसी के अनुरूप आयोग ने नीति बनाई है, लेकिन दो महीने की इस प्रक्रिया में आपको इसका कोई सबूत नहीं मिला. इसके बजाय, आपने हिंदुस्तानीय नागरिकों को परेशान किया है. सैकड़ों मौतों के लिए कौन जिम्मेदार है. इतने सारे लोग अपनी नौकरी छोड़कर कतारों में खड़े हैं, सिर्फ अपनी नागरिकता साबित करने के लिए. यह आयोग की गलती है. Also Read: चुनाव आयोग की बैठक: भाजपा ने रखीं 16 सूत्री मांगें, सीपीएम चाहती है दो चरणों में मतदान The post चुनाव आयोग की बैठक में तृणमूल कांग्रेस का हंगामा, ज्ञानेश कुमार से भिड़ गयी चंद्रमा भट्टाचार्य appeared first on Naya Vichar.

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राज्यसभा चुनाव : बीजेपी ने 3 राज्यों में नियुक्त किया सेंट्रल ऑब्जर्वर, बिहार की जिम्मेदारी किसे मिली

Rajya Sabha Election 2026: राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है. 16 मार्च को होने वाले मतदान से पहले हिंदुस्तानीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीतिक किलाबंदी तेज कर दी है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बिहार, हरियाणा और ओडिशा जैसे महत्वपूर्ण राज्यों के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों के नामों का एलान कर दिया है. बिहार की कमान छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और एक केंद्रीय मंत्री के हाथों में सौंपी गई है. राज्यसभा चुनाव: बिहार, हरियाणा और ओडिशा के लिए भाजपा ने नियुक्त किए सेंट्रल ऑब्जर्वर 16 मार्च को होगा राज्यसभा चुनाव राज्यसभा चुनाव के तहत 16 मार्च को बिहार, हरियाणा और ओडिशा में मतदान होना है. इन राज्यों में नेतृत्वक समीकरण काफी दिलचस्प माने जा रहे हैं. हरियाणा और ओडिशा में हिंदुस्तानीय जनता पार्टी ने निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन दिया है, जबकि बिहार में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया गया है. बिहार के लिए दो सेंट्रल ऑब्जर्वर नियुक्त भाजपा नेतृत्व ने बिहार के लिए दो वरिष्ठ नेताओं को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया है. इनमें छत्तीसगढ़ प्रशासन के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और केंद्र प्रशासन में राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा शामिल हैं. पार्टी का मानना है कि दोनों नेताओं का संगठनात्मक अनुभव और प्रशासनिक समझ चुनावी प्रक्रिया को सुचारू ढंग से संचालित करने में मदद करेगा. हरियाणा और ओडिशा के लिए भी तय हुई जिम्मेदारी हरियाणा के लिए गुजरात प्रशासन के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी को सेंट्रल ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है. वहीं ओडिशा में महाराष्ट्र प्रशासन के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है. भाजपा नेतृत्व का कहना है कि इन नेताओं के अनुभव से चुनावी प्रबंधन मजबूत होगा. रणनीति और अनुशासन पर रहेगा फोकस भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इन नियुक्तियों का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया के दौरान पार्टी की रणनीति, समन्वय और अनुशासन को प्रभावी तरीके से लागू करना है. इन राज्यों में मुकाबला काफी रोचक हो सकता है और क्रॉस वोटिंग की संभावना भी जताई जा रही है. ऐसे में पार्टी ने सेंट्रल ऑब्जर्वर की नियुक्ति कर चुनावी रणनीति को और मजबूत करने की कोशिश की है. Also Read: मंदिर में भजन गाते-गाते अचानक फूट-फूटकर रोने लगीं मैथिली ठाकुर, कहा- पता नहीं क्या हो रहा The post राज्यसभा चुनाव : बीजेपी ने 3 राज्यों में नियुक्त किया सेंट्रल ऑब्जर्वर, बिहार की जिम्मेदारी किसे मिली appeared first on Naya Vichar.

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पाजी कभी हंस भी लिया करो, टी20 वर्ल्ड कप जीत के बाद अर्शदीप की मस्ती

Highlights गंभीर के साथ अर्शदीप का मजाक  सैमसन को मिला उनका ‘जस्टिस’ विराट और अफरीदी के क्लब में शामिल संजू Arshdeep Singh Video: हिंदुस्तान ने टी20 वर्ल्ड कप (T20 World Cup) का अपना खिताब बचाकर क्रिकेट के मैदान पर इतिहास रच दिया है. हिंदुस्तान लगातार अपना खिताब बचाने वाली इकलौती टीम बन गई है. इस बड़ी जीत के बाद टीम इंडिया के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह (Arshdeep Singh) ने इंस्टाग्राम पर अपने वीडियो शेयर किए हैं. इन रील में वह हिंदुस्तानीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) और टी20 वर्ल्ड कप के हीरो संजू सैमसन (Sanju Samson) के साथ जीत का जश्न मनाते नजर आ रहे हैं. गंभीर के साथ अर्शदीप का मजाक  अर्शदीप सिंह ने अपने पहले इंस्टाग्राम रील में हेड कोच गौतम गंभीर के साथ मस्ती की. उन्होंने कैमरे के सामने गंभीर से कहा, “पाजी कभी हंस भी लिया करो.” अर्शदीप की इस बात पर गंभीर के चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान आ गई. गंभीर को मैदान पर हमेशा शांत माना जाता है. उनका यह मुस्कान वाला रूप बहुत कम देखने को मिलता है. अर्शदीप ने इस खास पल को अपने फैंस के साथ शेयर किया है. View this post on Instagram A post shared by Arshdeep Singh (@_arshdeep.singh__) सैमसन को मिला उनका ‘जस्टिस’ अर्शदीप ने अपने दूसरे रील में संजू सैमसन को दिखाया. इसमें उन्होंने सैमसन से कहा, “पाजी, जस्टिस मिल गया.” इंटरनेट पर फैंस लंबे समय से सैमसन को टीम में सही मौके देने की मांग कर रहे थे. अर्शदीप ने इसी बात की तरफ इशारा किया. सैमसन ने इस वर्ल्ड कप में कमाल का स्पोर्ट्स दिखाया. उन्होंने केवल पांच पारियों में 80.25 की औसत से 321 रन बनाए. इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 199.37 का रहा. सैमसन ने टूर्नामेंट में 27 चौके और 24 छक्के लगाए. वह इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले तीसरे खिलाड़ी बनकर सामने आए. View this post on Instagram A post shared by Arshdeep Singh (@_arshdeep.singh__) विराट और अफरीदी के क्लब में शामिल संजू संजू सैमसन ने अपने स्पोर्ट्स से कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं. वह एक टी20 वर्ल्ड कप में हिंदुस्तान के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं. उन्होंने इस मामले में विराट कोहली को पीछे छोड़ दिया है. कोहली ने 2014 के वर्ल्ड कप में 319 रन बनाए थे. सैमसन अब वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल और फाइनल दोनों मैचों में फिफ्टी लगाने वाले खास बल्लेबाजों की लिस्ट में आ गए हैं. इस लिस्ट में पहले से सिर्फ विराट कोहली और शाहिद अफरीदी का नाम था. सैमसन ने टी20 वर्ल्ड कप के नॉकआउट मैच में किसी भी हिंदुस्तानीय द्वारा सबसे बड़ा स्कोर बनाने का रिकॉर्ड भी बनाया है. उन्होंने वेस्टइंडीज के मार्लोन सैमुअल्स और न्यूजीलैंड के केन विलियमसन के 85 रन के रिकॉर्ड को भी पार कर लिया है. ये भी पढ़ें- घर चलो फिर बताती हूं, रोहित-रितिका की लड़ाई पर फैंस का फनी रिएक्शन बाप रे बाप! नहीं देख पाएंगे ईशान और उनकी गर्लफ्रेंड का ये वीडियो, आंखें मूंद लेंगे उतनी हॉट है माहिका का डांस देकर माथा पकड़ लेंगे आप The post पाजी कभी हंस भी लिया करो, टी20 वर्ल्ड कप जीत के बाद अर्शदीप की मस्ती appeared first on Naya Vichar.

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क्या है क्लस्टर बम? ईरान के इस हथियार से कांप उठा है इजरायल, आयरन डोम भी कन्फ्यूज

Cluster Bombs: 5 मार्च को मध्य इजरायल के आसमान में कई जलते हुए प्रोजेक्टाइल दिखाई दिए. यह कोई आम हमला नहीं था. इजरायल का दावा है कि यह बॉम्बलेट थे. इनमें से एक मध्य इजरायल के अजोर शहर में एक घर पर गिरा, जिससे संपत्ति को नुकसान पहुंचा. इजरायली विश्लेषकों का कहना है कि यह दृश्य क्लस्टर हथियारों के इस्तेमाल से मेल खाता है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है. इसके बावजूद इजरायल का कहना है कि ईरानी मिसाइल हमलों के दौरान क्लस्टर हथियारों का ही उपयोग किया गया. घटना के बाद इजरायल के होम फ्रंट कमांड ने नागरिकों को चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि ऐसे हमलों के बाद जमीन पर पड़े किसी भी संदिग्ध या बिना फटे उपकरण के पास न जाएं और तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को इसकी जानकारी दें. इजरायली सेना का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने इन हथियारों का कई बार उपयोग किया गया है. उनके अनुसार, अगर इन्हें आबादी वाले इलाकों की ओर दागा गया है तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का संभावित उल्लंघन हो सकता है. न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, सेना के प्रवक्ता नादेव शोशानी ने कहा कि अगर ऐसे हथियार नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाते हैं तो इसे युद्ध अपराध माना जा सकता है. क्लस्टर बम क्या होते हैं? क्लस्टर बम ऐसे हथियार होते हैं, जो एक बड़े विस्फोट की जगह हवा में फटकर कई छोटे-छोटे विस्फोटक उपकरण फैला देते हैं. इन्हें सबम्यूनिशन या बॉम्बलेट कहा जाता है. क्लस्टर हथियार का वारहेड हवा में खुल जाता है और दर्जनों छोटे विस्फोटक उपकरण बड़े इलाके में फैल जाते हैं, जो जमीन से टकराते ही फट सकते हैं. सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक इनका उद्देश्य युद्ध के मैदान में फैले वाहनों, सैन्य उपकरणों या सैनिकों को एक साथ बड़े क्षेत्र को निशाना बनाना होता है. कई बार ये सैन्य और नागरिक लक्ष्यों के बीच अंतर नहीं कर पाते. The Iranian Terror Regime is attacking Israel using ballistic missiles with cluster munition warheads. While in the air, these missiles release dozens of small bombs that disperse over a wide radius. These weapons are designed to inflict indiscriminate damage to as many… pic.twitter.com/18mmWD2SLh — Israel War Room (@IsraelWarRoom) March 5, 2026 हवा में फटकर फैलते और युद्ध के तरीके को बदल देते हैं इजरायली डिफेंस फोर्स के अनुसार ऐसी मिसाइलों का वारहेड नीचे आते समय हवा में खुल जाता है और लगभग आठ किलोमीटर के दायरे में करीब 20 छोटे विस्फोटक उपकरण फैला देता है. इनमें से प्रत्येक में लगभग 2.5 किलोग्राम विस्फोटक हो सकता है, जो जमीन से टकराने पर विस्फोट करता है. इस वजह से एक ही मिसाइल कई छोटे धमाकों में बदलकर बड़े इलाके को प्रभावित कर सकती है. सामान्य मिसाइलों के विपरीत, जो एक ही स्थान पर बड़े विस्फोट के साथ फटती हैं, क्लस्टर हथियार हवा में खुलकर दर्जनों छोटे बॉम्बलेट अलग-अलग दिशाओं में बिखेर देते हैं. सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इससे युद्ध की प्रकृति बदल जाती है, क्योंकि एक स्थान पर विस्फोट होने की बजाय कई जगहों पर छोटे-छोटे धमाके होते हैं. इसके कारण नागरिकों के हताहत होने का खतरा बढ़ जाता है और बुनियादी ढांचे को भी ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है. इजरायली अधिकारियों के अनुसार ईरान द्वारा दागी गई एक मिसाइल में सामान्य विस्फोटक की जगह क्लस्टर वारहेड लगाया गया था. सेना के मुताबिक वारहेड जमीन से लगभग सात किलोमीटर की ऊंचाई पर फटा, जिसके बाद करीब आठ किलोमीटर के क्षेत्र में लगभग 20 छोटे बॉम्बलेट गिर गए. इजरायली विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान को इन मिसाइलों के विकास में बाहरी सहायता मिली होगी. कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि सैन्य तकनीक के हस्तांतरण में रूस या चीन की भूमिका हो सकती है. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता. Iranian ballistic missile with a cluster bomb warhead flying over Israel. By definition, cluster bombs indiscriminately target civilians. pic.twitter.com/QQPz7BIgdH — Israel War Room (@IsraelWarRoom) March 9, 2026 हमले की वजह से घर को पहुंचा नुकसान 🚨🇮🇱 JUST IN: Israeli emergency services MDA try to hide the destruction from Iranian cluster bombs. It’s time to leave the land. The sooner the better. pic.twitter.com/tWFrXJWLT4 — Jvnior (@Jvnior) March 5, 2026 बिना फटे बॉम्बलेट का खतरा इन हथियारों को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि कई बार इनके सभी बॉम्बलेट तुरंत नहीं फटते और कुछ जमीन पर पड़े रह जाते हैं. ये छिपे हुए लैंडमाइन की तरह लंबे समय तक खतरनाक बने रह सकते हैं. ऐसे बिना फटे विस्फोटक लंबे समय तक खतरनाक बने रहते हैं और बाद में आम लोगों के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं, क्योंकि कोई व्यक्ति अनजाने में इन्हें छू सकता है और विस्फोट हो सकता है. युद्ध समाप्त होने के कई साल बाद भी ये नागरिकों और राहतकर्मियों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं. यही कारण है कि मानवाधिकार संगठन लंबे समय से इन हथियारों के इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताते रहे हैं. ये भी पढ़ें:- हमले नहीं रुके तो ईरान को होगा ‘सबसे बड़ा नुकसान’… सऊदी ने दी फाइनल वॉर्निंग मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए चुनौती क्लस्टर वारहेड,  कैसे बढ़ाते हैं मुश्किल? क्लस्टर हथियार मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए भी जटिल स्थिति पैदा कर देते हैं. उदाहरण के तौर पर आयरन डोम जैसी प्रणाली आमतौर पर एक आने वाले रॉकेट या प्रोजेक्टाइल को ट्रैक करने के लिए बनाई गई है. अगर, उसी रॉकेट में क्लस्टर वारहेड लगा हो, तो उड़ान के अधिकांश समय तक वह एक ही लक्ष्य की तरह दिखाई देता है. आयरन डोम का टामीर इंटरसेप्टर प्रॉक्सिमिटी फ्यूज का इस्तेमाल करता है, जो लक्ष्य के पास पहुंचते ही विस्फोट कर मिसाइल को छर्रों से नष्ट करने की कोशिश करता है. अगर मिसाइल को समय रहते रोक लिया जाए, तो उसके भीतर मौजूद क्लस्टर सबम्यूनिशन हवा में ही नष्ट हो सकते हैं. इससे उनके जमीन पर गिरने और फैलने की संभावना कम हो जाती है. हालांकि क्लस्टर वारहेड मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए चुनौती बढ़ा देते हैं, क्योंकि एक बार छोटे बॉम्बलेट बड़े क्षेत्र में फैल जाएं तो उन्हें अलग-अलग

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चुनाव आयोग की बैठक: भाजपा ने रखीं 16 सूत्री मांगें, सीपीएम चाहती है दो चरणों में मतदान

मुख्य बातें भाजपा ने रखी 16 सूत्री मांगें मतदान लोकतांत्रिक तरीके से नहीं हुआ! कांग्रेस ने सुरक्षा पर उठाया सवाल सबसे पहले पहुंचे भाजपा के प्रतिनिधि Election Commission Meeting: कोलकाता. बंगाल में विधानसभा चुनाव को ले कर चुनाव आयोग की आज विभिन्न नेतृत्वक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई. बैठक में भाजपा ने जहां राज्य की कानून व्यवस्था पर अविश्वास जताया और अपनी 16 सूत्री मांगे रखीं, वहीं माकपा के प्रतिनिधियों ने विधानसभा चुनाव अधिकतम दो चरणों में संपन्न कराने का आग्रह किया. सीपीएम के प्रतिनिधियों ने कहा कि एक चरण में मतदान हो तो बेहतर. अधिकतम दो चरणों में मतदान से भी कोई आपत्ति नहीं है. सीपीएम प्रतिनिधिमंडल ने एसआईआर पर आयोग की बैठक में अपना गुस्सा जाहिर किया. सलीम ने खुलकर कहा- हम जानना चाहते हैं कि आयोग ने मतदाता सूची तैयार करते समय लोगों को अपना दुश्मन क्यों बनाया. इसने जनता के खिलाफ जंग क्यों छेड़ी. चुनाव आयोग यातना आयोग क्यों बन गया. उन्हें मतदान से पहले अपनी गरिमा बनाए रखनी होगी. भाजपा ने रखी 16 सूत्री मांगें भाजपा प्रतिनिधिमंडल 16 मांगों के साथ आयोग की पूर्ण पीठ के समक्ष आया है. इस सूची में केंद्रीय बलों के उचित उपयोग से लेकर शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने और धांधली रोकने तक की मांगें शामिल हैं. शिशिर बाजोरिया ने कहा- हम राज्य पुलिस की भूमिका से नाखुश हैं. हमने इस बारे में आयोग को सूचित कर दिया है. हम चाहते हैं कि हर बूथ पर केंद्रीय बलों की मदद से मतदान कराया जाए. वेब कैमरे होने चाहिए. अगर कहीं कैमरा खराब हो जाता है, तो मतदान रोक दिया जाए या फिर से चुनाव कराया जाए. बूथ में प्रवेश करने से पहले हर व्यक्ति की पहचान सत्यापित की जानी चाहिए. वहां कोई पुलिस या पार्टी एजेंट मौजूद नहीं होगा. आयोग का लक्ष्य हिंसा-मुक्त और शांतिपूर्ण मतदान कराना है. हमने कहा है कि हम इसमें हर संभव सहायता प्रदान करेंगे. मतदान लोकतांत्रिक तरीके से नहीं हुआ! बैठक के बाद तापस रॉय ने कहा-कई राज्यों में लोकतांत्रिक तरीके से मतदान नहीं हुआ है. इन राज्यों में लोकतंत्र को पुनर्जीवित करना आयोग की जिम्मेदारी है. ममता और उनकी टीम अभी भी डर दिखा रही है. ज्ञानेश कुमार की उंगली काटना संविधान की उंगली काटने के बराबर है. तृणमूल को बहुत बड़ा झटका लगा है. हम हिंसा-मुक्त, भय-मुक्त और शांतिपूर्ण चुनाव चाहते हैं. भाजपा प्रतिनिधियों ने कहा कि आयोग के साथ बैठक में एसआईआर पर कोई चर्चा नहीं हुई. केवल चुनाव की स्थिति पर ही बात हुई. जगन्नाथ चटर्जी ने कहा- हमने एसआईआर पर चर्चा नहीं की. इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक मामला चल रहा है. अदालत जो भी फैसला लेगी, हम उसे मानने के लिए बाध्य हैं. आज बैठक में केवल मतदान पर चर्चा हुई. हमने अपनी असंतुष्टि व्यक्त की है. कांग्रेस ने सुरक्षा पर उठाया सवाल कांग्रेस को सुरक्षा चाहिए, चरणबद्ध मतदान नहीं. आयोग के साथ बैठक के बाद कांग्रेस नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा- चाहे एक चरण हो, दो चरण हों या तीन चरण हों – हमें सुरक्षा चाहिए. आयोग यह सुनिश्चित करे कि मतदान निष्पक्ष रूप से हो. अगर मतदान एक ही चरण में हो जाए तो हमें खुशी होगी, लेकिन सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है. मैंने आयोग को यह बात स्पष्ट कर दी है. पश्चिम बंगाल की अन्य समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें सबसे पहले पहुंचे भाजपा के प्रतिनिधि बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए तीन दिवसीय दौरे पर आयी चुनाव आयोग की पूरी बेंच आज नेतृत्वक दलों के प्रतिनिधियों के साथ विधानसभा चुनाव पर विचार-विमर्श किया. बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अन्य दो आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी मौजूद हैं. बैठक के लिए सबसे पहले भाजपा के प्रतिनिधि पहुंचे. इनमें शिशिर बाजोरिया, तापस रॉय और जगन्नाथ चटर्जी शामिल थे. तृणमूल की ओर से फिरहाद हकीम, राजीव कुमार और चंद्रिमा भट्टाचार्य आयोग की बैठक में शामिल हैं. सीपीएम के प्रतिनिधि भी बैठक में पहुंचे. पार्टी के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम के अलावा, अफरीन बेगम और शामिक लाहिड़ी भी मौजूद हैं. तृणमूल प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों में से एक राजीव कुमार आयोग की बैठक में आये हैं. कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में आशुतोष चटर्जी और प्रदीप भट्टाचार्य हैं. Also Read: कोलकाता के कालीघाट पहुंचे चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने की मंदिर में पूजा, बाहर लगते रहे वापस जाओ के नारे The post चुनाव आयोग की बैठक: भाजपा ने रखीं 16 सूत्री मांगें, सीपीएम चाहती है दो चरणों में मतदान appeared first on Naya Vichar.

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बंगाली शादी में क्यों पहनते हैं दूल्हा-दुल्हन सफेद मुकुट, जानिए कारण

Bengali Wedding Crown: हिंदुस्तान में हर राज्य की शादी की अपनी अलग परंपराएं और रीति-रिवाज होते हैं. बंगाली शादी भी अपनी खास परंपराओं, सजावट और रस्मों के लिए जानी जाती है. बांग्लार_घोरेबैरे ने अपने इंस्टाग्राम के पेज पर एक पोस्ट को साझा करते हुए ये बताया है कि इस मुकुट को कैसे बनाया जाता है और ये क्यों पहना जाता है. आपने अक्सर देखा होगा कि बंगाली शादी में दूल्हा और दुल्हन दोनों सिर पर एक खास तरह का मुकुट पहनते हैं. दूल्हे के मुकुट को टोपर और दुल्हन के मुकुट को मुकुट कहा जाता है. यह सिर्फ सजावट के लिए नहीं होता, बल्कि इसके पीछे गहरी सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यता भी जुड़ी हुई है. बंगाली शादी में मुकुट पहनने की परंपरा बंगाली विवाह में दूल्हे द्वारा पहना जाने वाला टोपर आमतौर पर शोलापिथ (एक हल्के सफेद पौधे से बनने वाली सामग्री) से बनाया जाता है. यह हल्का, सुंदर और पारंपरिक डिजाइन वाला होता है. वहीं दुल्हन के लिए भी इसी तरह का सुंदर मुकुट बनाया जाता है. शादी के दौरान यह मुकुट पहनना शुभ माना जाता है और इसे विवाह का महत्वपूर्ण हिस्सा समझा जाता है. इस पूरे मुकुट को हाथों से तैयार किया जाता है. View this post on Instagram A post shared by banglar_ghorebaire (@banglar_ghorebaire) मुकुट पहनने के पीछे का कारण शुभता और पवित्रता का प्रतीक बंगाली संस्कृति में टोपर और मुकुट को शुभता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इसे पहनने से दूल्हा-दुल्हन को बुरी नजर से बचाव मिलता है और उनका वैवाहिक जीवन सुखमय होता है. भगवान का आशीर्वाद पाने की मान्यता कुछ मान्यताओं के अनुसार शादी के समय दूल्हा-दुल्हन को भगवान का स्वरूप माना जाता है. इसलिए उन्हें मुकुट पहनाया जाता है, जो सम्मान और आशीर्वाद का प्रतीक है. पारंपरिक पहचान बंगाली शादी की पहचान ही इन खास मुकुटों से होती है. यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी लोग इसे पूरे सम्मान के साथ निभाते हैं. सौंदर्य और शाही लुक टोपर और मुकुट दूल्हा-दुल्हन को शाही और आकर्षक रूप देते हैं. इससे उनकी शादी की पोशाक और भी खूबसूरत लगती है और पूरा लुक पारंपरिक बन जाता है. यह भी पढ़ें: रिश्तेदार या दोस्त की शादी में लगाएं ये लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन यह भी पढ़ें: आखिर बिहार की शादियों में क्यों बनाया जाता है कोहबर? जानिए इसकी खास वजह The post बंगाली शादी में क्यों पहनते हैं दूल्हा-दुल्हन सफेद मुकुट, जानिए कारण appeared first on Naya Vichar.

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डॉलर की बढ़ती मांग के चलते रुपया पस्त, आम आदमी पर बढ़ेगा बोझ

Crude Oil Price Impact on Rupee: सोमवार का दिन हिंदुस्तानीय इकॉनमी के लिए थोड़ी चिंता लेकर आया है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले हिंदुस्तानीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर (All-time low) पर जा गिरा है. बाजार खुलते ही रुपया 92.20 के स्तर पर था, जो देखते ही देखते 92.52 तक पहुंच गया है. क्यों टूट रहा है रुपया? रुपये की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आया उछाल है. सोमवार को कच्चे तेल के दाम करीब 25% बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए है. हिंदुस्तान अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से खरीदता है, जिसके लिए उसे डॉलर में पेमेंट करना पड़ता है. तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ गई है, जिससे रुपया कमजोर हो रहा है. क्या बढ़ जाएगी महंगाई? एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब रुपया गिरता है, तो विदेशों से सामान मंगाना महंगा हो जाता है. चूंकि हिंदुस्तान कच्चे तेल का बड़ा इम्पोर्टर है, इसलिए पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं. अगर ट्रांसपोर्टेशन महंगा हुआ, तो फल, सब्जी और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने भी निवेशकों को डरा दिया है, जिससे वे सुरक्षित निवेश के लिए डॉलर की ओर भाग रहे हैं. आरबीआई (RBI) क्या कदम उठाएगा? अब सबकी नजरें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया पर टिकी हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर रुपये में गिरावट इसी तरह जारी रही, तो आरबीआई दखल दे सकता है. आरबीआई अपने डॉलर भंडार का इस्तेमाल करके बाजार में उतार-चढ़ाव को कम करने की कोशिश करेगा. फिलहाल बाजार के जानकारों का मानना है कि जब तक ग्लोबल हालात और सप्लाई चेन ठीक नहीं होती, तब तक रुपये पर यह दबाव बना रह सकता है. ये भी पढ़ें: Asian Market Crash: तेल ने बिगाड़ा स्पोर्ट्स, एशियाई शेयर मार्केट धड़ाम The post डॉलर की बढ़ती मांग के चलते रुपया पस्त, आम आदमी पर बढ़ेगा बोझ appeared first on Naya Vichar.

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