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Author name: Vinod Jha

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हिरासत में लिये जाने पर नेहा वोरा ने कहा- ‘यह डिटेंशन नहीं किडनैपिंग है’

AISA की अध्यक्ष नेहा वोरा ने रविवार को अपने एक्स एकाउंट पर किए गए पोस्ट में लिखा कि दिल्ली पुलिस उन्हें एक व्हीकल में ले जा रही है. नेहा वोरा का यह आरोप है कि दिल्ली पुलिस उन्हें डिटेन नहीं कर रही बल्कि उनका अपहरण करके कहीं ले जा रही है. इनका प्रदर्शन दिल्ली के अशोक रोड पर चल रहा था. नेहा को इस प्रदर्शन के दौरान दूसरी बार डिटेन किया गया है. नेहा वोरा को 3 अक्टूबर को भी डिटेन किया गया था. नेहा वोरा का पोस्ट यहां देखें- नेहा को डिटेन करने का क्या है आधार? नेहा वोरा के डिटेंशन वाले पोस्ट पर कई रिएक्शन भी आ रहे हैं. जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि जिस गाड़ी में नेहा को लेकर पुलिस जा रही है, उसमें कोई स्त्री पुलिस नहीं हैं. यह एक स्त्री को डिटेन करने का गलत तरीका है. वहीं कुछ लोग यह भी लिख रहे हैं कि एक बार फिर नेहा को डिटेन किया गया है, क्या यह गैरकानूनी नहीं है.एक्स पर कुछ लोग यह भी लिख रहे हैं कि अगर उसे ले जाया जा रहा है तो कानूनी आधार और वजह साफ होना चाहिए. प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए रैफ के जवान तैनात चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसीपी विवेक भगत की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन जब और तेज हुआ तो रैफ के जवानों को तैनात कर दिया गया है. उससे पहले सीआरपीएफ के जवान प्रदर्शन को नियंत्रित कर रहे थे. ये भी पढ़ें: Explained: NEET से ज्ञानेश कुमार तक, अभिजीत दीपके का आंदोलन कितना बदला; मोदी प्रशासन पर कितना दबाव? The post हिरासत में लिये जाने पर नेहा वोरा ने कहा- ‘यह डिटेंशन नहीं किडनैपिंग है’ appeared first on Naya Vichar.

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सिंगल चार्ज में बिहार से मुंबई, 1,770 KM रेंज वाली हाइब्रिड SUV, 1 घंटे में 43,900 गाड़ियां बुक

हम सभी जानते हैं कि चीन अपने नए-नए चमत्कारों के लिए मशहूर है. इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है. चीन की मशहूर कार कंपनी Geely ने अपनी नई प्रीमियम हाइब्रिड SUV Geely Galaxy Battleship 700 से बाजार में गदर मचा दिया है. इस गाड़ी की सबसे बड़ी खासियत इसकी 1,770 किलोमीटर की कंबाइंड रेंज है. चीन में लोगों के बीच SUV का ऐसा क्रेज दिखा कि बुकिंग खुलने के शुरुआती एक घंटे में ही इसे 43,900 ऑर्डर मिल गए. चीन में इसे आधिकारिक तौर पर 10 अक्टूबर 2026 को लॉन्च किया जा रहा है. 1,770 किलोमीटर की टेंशन-फ्री ड्राइव इस SUV में 47.14 kWh की LFP बैटरी और पेट्रोल इंजन का जबरदस्त कॉम्बिनेशन दिया गया है. कंबाइंड रेंज: फुल टैंक पेट्रोल और फुल चार्ज बैटरी के साथ यह गाड़ी 1,770 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है (CLTC टेस्टिंग के अनुसार). इलेक्ट्रिक रेंज: अगर आप रोजमर्रा के काम के लिए इसे शहर में चलाते हैं, तो सिर्फ इलेक्ट्रिक मोड पर भी यह 305 किलोमीटर तक चल सकती है. यानी, रोज-रोज पेट्रोल भराने का कोई झंझट नहीं! रफ्तार और पावर में स्पोर्ट्स कार को भी टक्कर आकार में बड़ी होने के बावजूद इसकी स्पीड किसी स्पोर्ट्स कार से कम नहीं है. इसमें Geely का Thor EM-T हाइब्रिड सिस्टम इस्तेमाल किया गया है, जिसमें टर्बो पेट्रोल इंजन के साथ तीन इलेक्ट्रिक मोटर वाला AWD (ऑल-व्हील ड्राइव) सिस्टम लगा है. पावर और टॉर्क: यह इंजन 1,113 HP की बंपर पावर और 1,330 Nm का पीक टॉर्क जनरेट करता है. पिकअप: 0 से 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ने में इसे महज 3.95 सेकंड लगते हैं. खराब रास्तों का साथी और ‘क्रैब वॉक’ फीचर Geely ने इसे सिर्फ शहर की चमचमाती सड़कों के लिए नहीं, बल्कि पक्के तौर पर एक ऑफ-रोड SUV भी बनाया है. सस्पेंशन और क्लीयरेंस: इसका 233 mm का ग्राउंड क्लीयरेंस, 30-डिग्री अप्रोच और 31-डिग्री डिपार्चर एंगल ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर ड्राइविंग को आसान बनाता है. एक्टिव हाइड्रोलिक सस्पेंशन गाड़ी को हर रास्ते पर स्थिर रखता है. क्रैब वॉक (Crab Walk): यह इसका सबसे मजेदार फीचर है. इसकी मदद से SUV अपने पहियों की दिशा बदलकर कुछ हद तक केकड़े की तरह तिरछी दिशा में चल सकती है. Waltz Turn: इस फीचर से गाड़ी बेहद कम जगह (लगभग 3.36 मीटर टर्निंग रेडियस) में आसानी से घूम जाती है. गाड़ी के अंदर फ्रिज भी मौजूद लंबी यात्राओं को आरामदायक बनाने के लिए इसका केबिन एकदम प्रीमियम बनाया गया है. डेशबोर्ड और केबिन में कुल 5 हाईटेक स्क्रीन्स दी गई हैं. सफर में कोल्ड ड्रिंक्स और पानी को ठंडा रखने के लिए 18.5 लीटर का ड्यूल फ्रिज भी मौजूद है. 2,900 mm के व्हीलबेस के चलते अंदर यात्रियों को भरपूर स्पेस मिलेगा. एक नजर में: Battleship 700 की पूरी कुंडली फीचर जानकारी मॉडल Geely Galaxy Battleship 700 पावरट्रेन Thor EM-T हाइब्रिड (टर्बो पेट्रोल + 3 मोटर AWD) अधिकतम पावर / टॉर्क 1,113 HP / 1,330 Nm 0-100 km/h स्पीड 3.95 सेकंड बैटरी और EV रेंज 47.14 kWh LFP / 305 KM कंबाइंड रेंज 1,770 KM डायमेंशन (LxWxH) 5,085 mm x 1,999 mm x 1,895 mm व्हीलबेस / क्लीयरेंस 2,900 mm / 233 mm लॉन्च डेट 10 अक्टूबर 2026 (चीन) हिंदुस्तान में कब आएगी? फिलहाल कंपनी ने Battleship 700 को हिंदुस्तान में लॉन्च करने को लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया है. हिंदुस्तान में आने पर इसकी कीमत, फीचर्स और बैटरी रेंज में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं. हिंदुस्तानीय ग्राहकों को इस धांसू SUV के लिए अभी इंतजार करना होगा. The post सिंगल चार्ज में बिहार से मुंबई, 1,770 KM रेंज वाली हाइब्रिड SUV, 1 घंटे में 43,900 गाड़ियां बुक appeared first on Naya Vichar.

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‘मैं मौत से नहीं डरता, करना चाहता था विमान क्रैश’, स्मित मच्छार पर हमला करने वाले को-पायलट का चौकाने वाला खुलासा

Flydubai Co-Pilot : फ्लाईदुबई एयरलाइन के एक को-पायलट पर विमान के कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला करने और विमान को अपने कब्जे में लेने की कोशिश करने का आरोप है. अब इस मामले में एक नया खुलासा हुआ है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब में पूछताछ के दौरान को-पायलट हमाम अल-हमामी ने जांचकर्ताओं से कहा कि वह विमान को क्रैश करना चाहता था और उसे मौत का डर नहीं था. सऊदी अरब से UAE लाया गया आरोपी 29 वर्षीय हमाम अल-हमामी ओमान का नागरिक है. घटना के बाद विमान की इमरजेंसी लैंडिंग सऊदी अरब में कराई गई थी. इसके बाद आरोपी को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) वापस लाया गया, जहां उससे पूछताछ की जा रही है. कैप्टन पर जानलेवा हमला हमाम ने विमान में मौजूद क्रैश एक्स से कैप्टन स्मित मच्छर पर कई बार हमला किया. इसके बाद उसने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की. कैप्टन ने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिसके बाद यात्रियों और क्रू मेंबर्स को बीच-बचाव करने का मौका मिला. UAE के अटॉर्नी जनरल ने बताया आतंकी कृत्य UAE के अटॉर्नी जनरल ने शनिवार को कहा कि को-पायलट ने आतंकी कृत्य को अंजाम देने की कोशिश की थी. इस घटना की जांच सऊदी अरब, UAE और इजरायल की एजेंसियां कर रही हैं. जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि आरोपी का किसी बाहरी संगठन या ताकत से कोई संबंध तो नहीं था. कट्टरपंथ की ओर झुकाव की जांच हमाम अल-हमामी के पिता ओमान के नागरिक हैं, जबकि मां सीरिया की रहने वाली हैं. वह कई साल तक दुबई में रहा और सीरिया में भी कुछ समय बिताया. सीरिया में लंबे समय तक चले गृहयुद्ध के दौरान इस्लामी विद्रोही गुटों ने बशर अल-असद की प्रशासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी. WSJ की रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या सीरिया में रहने के दौरान हमाम की सोच कट्टरपंथ की ओर बढ़ी थी. हालांकि, इस पहलू की जांच अभी जारी है. डिलीट किए गए सोशल मीडिया अकाउंट की भी जांच जांच एजेंसियां हमाम की ऑनलाइन गतिविधियों को भी खंगाल रही हैं. उसके डिलीट किए गए X अकाउंट की 3,000 से ज्यादा पोस्ट के स्क्रीनशॉट इंटरनेट आर्काइव पर मौजूद हैं. रिपोर्ट के अनुसार, कुछ पोस्ट में उसने स्त्रीओं के नौकरी करने का विरोध किया था और पर्दा करने वाली धार्मिक स्त्रीओं को पसंद करने की बात लिखी थी. दिसंबर 2021 की एक पोस्ट में उसने कथित तौर पर लिखा था कि उसने सीरियाई या लेबनानी बनकर एक फर्जी अकाउंट बनाया था, ताकि सऊदी स्त्रीओं से संपर्क कर सके. एक अन्य पोस्ट में उसने कहा था कि उसकी पत्नी नौकरी नहीं करेगी. Oman Air ने उड़ान भरने से रोक दिया था हमाम ने अपने विमानन करियर की शुरुआत ओमान की प्रशासनी एयरलाइन ओमान एयर से की थी. उसके परिचितों के हवाले से WSJ ने बताया कि चरमपंथी वेबसाइटों में उसकी दिलचस्पी सामने आने के बाद ओमान एयर ने उसे उड़ान भरने से रोक दिया था. रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद उसे कट्टरपंथ से दूर करने के लिए एक कार्यक्रम में शामिल किया गया और उड़ान के बजाय डेस्क जॉब दी गई. जांचकर्ता अब यह पता लगा रहे हैं कि ऐसी पृष्ठभूमि के बावजूद उसे दोबारा पायलट की नौकरी कैसे मिली. 2025 में दूसरी एयरलाइन में नौकरी की कोशिश मोरक्को के प्रशासनी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, हमाम ने 2025 में रॉयल एयर मैरोक में नौकरी पाने की कोशिश की थी. बाद में उसे UAE में फ्लाईदुबई में नौकरी मिल गई. एयरलाइन ने उसे इसी साल फरवरी में नियुक्त किया था. भर्ती प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल WSJ के मुताबिक, UAE में पायलटों की नियुक्ति के दौरान आम तौर पर सुरक्षा जांच की जाती है. हालांकि, अखबार यह पता नहीं लगा पाया कि फ्लाईदुबई ने हमाम की नियुक्ति से पहले कौन-कौन सी जांच की थी. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि अगर ओमान से हमाम की पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी मांगी जाती, तो वहां के अधिकारी इसे साझा कर सकते थे. हालांकि, ओमान को इस संबंध में किसी दूसरे देश से जानकारी मांगने का अनुरोध नहीं मिला था. विमानन की पढ़ाई भी कर चुका था आरोपी हमाम ने UAE में विमानन की पढ़ाई की थी. इसके अलावा, उसने इंग्लैंड की बकिंघमशायर न्यू यूनिवर्सिटी से विमानन प्रबंधन का ऑनलाइन कोर्स भी पूरा किया था. जून 2022 की एक सोशल मीडिया पोस्ट में उसने उड़ान भरने के अपने शौक और पहली बार अकेले विमान उड़ाने के अनुभव के महत्व का जिक्र किया था. जांच में कई सवालों के जवाब तलाश रही एजेंसियां इस घटना ने पायलटों की भर्ती, सुरक्षा जांच और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी साझा करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं. जांच एजेंसियां हमाम की पृष्ठभूमि, उसकी ऑनलाइन गतिविधियों और कथित कट्टरपंथी झुकाव की पड़ताल कर रही हैं. UAE और फ्लाईदुबई ने जांच जारी होने का हवाला देते हुए इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है. ये भी पढ़ें: 5 अक्टूबर का मौसम : बिहार-झारखंड समेत 10 राज्यों में बारिश के आसार, दिल्ली-UP में रहेगा मौसम साफ ये भी पढ़ें: 4 अक्टूबर की टॉप 20 समाचारें: हॉकी-क्रिकेट में हिंदुस्तान को गोल्ड, UN में खुल गई पाकिस्तान की पोल; 308 पहियों वाले ‘राक्षस ट्रक’ का कटा टैक्स The post ‘मैं मौत से नहीं डरता, करना चाहता था विमान क्रैश’, स्मित मच्छार पर हमला करने वाले को-पायलट का चौकाने वाला खुलासा appeared first on Naya Vichar.

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Explained: NEET से ज्ञानेश कुमार तक, अभिजीत दीपके का आंदोलन कितना बदला; मोदी सरकार पर कितना दबाव?

एक आंदोलन ने शिक्षा मंत्री की कुर्सी हिला दी, दूसरा सीधे चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है; लेकिन क्या इस बार भी केंद्र प्रशासन उसी तरह दबाव में आएगी? कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP का उदय NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन से हुआ था. दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे प्रदर्शन के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. अब वही संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल चुका है. 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. दिल्ली के जंतर-मंतर पर इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समूहों के प्रदर्शन हुए. CJP ने अब 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन की घोषणा की है. दीपके का कहना है कि आंदोलन तीन दिन का नहीं, तीन महीने तक चल सकता है. NEET से ज्ञानेश कुमार तक आखिर कितना बदला आंदोलन? पहली नजर में दोनों आंदोलनों में काफी समानता दिखाई देती है. दोनों में युवा बड़ी संख्या में जुड़े, सोशल मीडिया का इस्तेमाल हुआ और CJP ने एक स्पष्ट मांग को आंदोलन का केंद्र बनाया. लेकिन दोनों आंदोलनों का मूल चरित्र अलग है. NEET आंदोलन का सीधा संबंध छात्रों के भविष्य से था. परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों ने लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों को प्रभावित किया. यही वजह थी कि मामला जल्दी ही देशभर में फैल गया. प्रशासन ने मामले की जांच CBI को सौंपी और कानून भी बनाया. बाद में CJP का आंदोलन तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही समाप्त हुआ. 25 जुलाई 2026 को प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. NEET आंदोलन का स्पष्ट समीकरण था, छात्र बनाम परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा मंत्रालय. अब समीकरण बदल गया है इस बार CJP का निशाना चुनाव आयोग है और मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है. मुद्दा मतदाता सूची, Special Intensive Revision यानी SIR और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़ा है. यह केवल किसी परीक्षा में गड़बड़ी का मामला नहीं है. यह उस संस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा सवाल है, जो चुनाव कराने के लिए संवैधानिक रूप से जिम्मेदार है. इस बार आंदोलन का दायरा बड़ा, लेकिन रास्ता ज्यादा कठिन यही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ी चुनौती दोनों है. CJP का आरोप है कि SIR और मतदाता सूची में बदलाव से बड़ी संख्या में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं. विपक्षी दल भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठा रहे हैं. लेकिन चुनाव आयोग इन आरोपों को उसी रूप में स्वीकार नहीं करता. आयोग ने 23 सितंबर को कहा कि SIR समेत उसके सभी फैसले आयोग में सबकी सहमति से लिया गया. आयोग ने यह भी कहा कि लिखित टिप्पणियां और आंतरिक आपत्तियां बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था के सामान्य checks and balances का हिस्सा हैं. 26 सितंबर के अपने एक अन्य निर्णय में आयोग ने यह भी कहा कि जिन मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के जरिए नाम जुड़वा सकते हैं. आयोग ने दावों और आपत्तियों की समयसीमा भी कुछ जगहों पर बढ़ाई. इसलिए मौजूदा विवाद में दो दावे आमने-सामने हैं. एक तरफ CJP और विपक्षी समूह चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं. दूसरी तरफ चुनाव आयोग कह रहा है कि SIR कानूनी प्रक्रिया के तहत हुआ है और आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं. यही वह बिंदु है जहां मौजूदा आंदोलन को NEET आंदोलन से अलग करके देखना जरूरी है. ये भी पढ़ें: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विजिलेंस जांच के आदेश ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना आसान नहीं ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग के प्रमुख हैं. चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है. इसलिए CJP की सीधी मांग केंद्र प्रशासन के किसी मंत्री को हटाने की मांग जैसी नहीं है. ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना आसान नहीं है. संविधान ने CEC को बहुत मजबूत सुरक्षा दी है, ताकि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता बनी रहे. संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, CEC को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है. सीईसी को पद से हटाने के लिए संसद में महाभियोग लाया जा सकता है. दोनों सदनों में प्रस्ताव को साधारण बहुमत से नहीं, बल्कि विशेष बहुमत से पारित होना होता है. इसके बाद ही हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है. संसद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रपति CEC को पद से हटाने का आदेश जारी कर सकते हैं. अगर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठते हैं, विपक्ष इसे संसद और सड़क दोनों पर मुद्दा बनाता है और युवा संगठन इसे राष्ट्रीय आंदोलन का रूप देने में सफल होते हैं, तो बहस स्वाभाविक रूप से केंद्र प्रशासन तक पहुंचती है. 2 अक्टूबर के प्रदर्शन में यह बात साफ दिखी. मुंबई में CJP का प्रदर्शन था, जबकि दिल्ली में AAP, वामपंथी छात्र संगठनों और नागरिक समूहों ने भी प्रदर्शन किया. कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया. यानी इस बार CJP अकेले मुद्दा नहीं उठा रहा. यही वह बदलाव है जिसे मोदी प्रशासन के लिए नेतृत्वक रूप से महत्वपूर्ण माना जा सकता है. हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि केंद्र प्रशासन उसी स्तर के दबाव में आ गई है, जैसा NEET आंदोलन के अंतिम चरण में दिखा था. ये भी पढ़ें: Watch Video: थाने के बाहर भड़के CJP प्रवक्ता सौरव दास, बोले- पुलिस बात करे, वरना अंदर घुसेंगे सवाल- क्या मुंबई की भीड़ देशव्यापी आंदोलन बनेगी? 2 अक्टूबर के जेल भरो आंदोलन में बड़ी संख्या में युवा और समर्थक जुटे थे. सोशल मीडिया पर अभियान चला. ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे और पोस्टर चर्चा में रहे. लेकिन किसी आंदोलन का भविष्य केवल एक दिन की भीड़ तय नहीं करती. तीन सवाल, जो महत्वपूर्ण हैं पहला – क्या CJP महाराष्ट्र के बाहर लगातार भीड़ जुटा पाएगा? दूसरा – क्या यह मुद्दा केवल नेतृत्वक कार्यकर्ताओं तक रहेगा या आम मतदाताओं तक पहुंचेगा? तीसरा – क्या विपक्षी दल लंबे समय तक CJP के साथ खड़े रहेंगे? अगर ये तीनों चीजें होती हैं, तो आंदोलन का आकार

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JDU में नीरज बनाम अनंत की लड़ाई हुई आर-पार, ललन सिंह ने क्यों कहा- ‘दो लोगों के झगड़े में नहीं पड़ता’

JDU dispute बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की हो रही है. यहां जदयू के अधिकृत प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ पार्टी के ही विधायक अनंत सिंह ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है. अनंत सिंह न केवल नीरज कुमार के खिलाफ बयान दे रहे हैं, बल्कि जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी डॉ अनूज कुमार के समर्थन में चुनाव प्रचार भी कर रहे हैं. ऐसे में यह मुकाबला अब विपक्ष बनाम सत्ता पक्ष से आगे बढ़कर जदयू के अंदर की खींचतान का मामला बन गया है. अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच बढ़ते विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को दी गयी थी. जदयू की तीन दिनों तक चली मैराथन बैठक के बाद पार्टी ने उन्हें इस मामले को संभालने की जिम्मेदारी सौंपी थी. जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी कहा था कि ललन सिंह पूरे मामले को देख रहे हैं. लेकिन, अब ललन सिंह ने विवाद में सीधे तौर पर हस्तक्षेप करने से दूरी बना ली है. ‘दो लोगों के झगड़े में नहीं पड़ता’, ललन सिंह ने क्या कहा? लखीसराय में एक कार्यक्रम के दौरान ललन सिंह ने कहा कि वह दो लोगों के झगड़े में नहीं पड़ते. मैं विकास के काम में विश्वास करता हूं. उन्होंने कहा कि आज तक अपने गांव का झगड़ा तक नहीं सुलझाया है. हालांकि, ललन सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर अनंत सिंह और नीरज कुमार दोनों सुलह के लिए तैयार होते हैं, तो उन्हें समझौता कराने में कोई परेशानी नहीं होगी. लेकिन मौजूदा हालात में दोनों नेताओं के रुख को देखते हुए सुलह की संभावना कम ही नजर आ रही है. ललन सिंह के इस बयान के बाद जदयू में इस विवाद को लेकर तस्वीर और उलझ गयी है. पार्टी ने जिस नेता को विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी दी थी, वही अब दोनों पक्षों की सहमति का इंतजार करने की बात कह रहे हैं. बिहार से जुड़ी अन्य ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें.. एक तरफ नीरज, दूसरी तरफ अनंत सिंह पटना स्नातक सीट से जदयू के अधिकृत उम्मीदवार नीरज कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया और अब चुनाव प्रचार में उतर गये हैं. नीरज कुमार लगातार मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं. दूसरी ओर, अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ अपना रुख साफ कर दिया है. वह जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी डॉ अनूज कुमार के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं. अनंत सिंह का कहना है कि नीरज कुमार को हराने के लिए वह हरसंभव कोशिश करेंगे. ऐसे में पटना स्नातक सीट का चुनाव जदयू के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है. पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ उसी पार्टी का विधायक खड़ा है और उसके समर्थन में प्रचार कर रहा है. इसके बावजूद पार्टी की ओर से अब तक कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हुई है. अनंत सिंह पर कार्रवाई क्यों नहीं? अनंत सिंह के खुले विरोध के बावजूद जदयू की ओर से उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं किये जाने को लेकर पार्टी के अंदर कई तरह की चर्चाएं हैं. सवाल यह भी उठ रहा है कि जब नीरज कुमार पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार हैं और उनके खिलाफ पार्टी का विधायक खुले तौर पर प्रचार कर रहा है, तो जदयू नेतृत्व कार्रवाई करने से क्यों बच रहा है? पार्टी से जुड़े सूत्रों की मानें तो यह विवाद केवल अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच का मामला नहीं है. इसके पीछे पार्टी के शीर्ष स्तर पर चल रही शक्ति की नेतृत्व को भी देखा जा रहा है. सूत्रों का दावा है कि अनंत सिंह और नीरज कुमार इस पूरे विवाद में सामने दिख रहे दो चेहरे हैं. असली लड़ाई पार्टी के शीर्ष स्तर पर प्रभाव और नेतृत्वक ताकत को लेकर है. दोनों पक्ष एक-दूसरे को अपनी ताकत का एहसास कराने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, जदयू नेता और बिहार प्रशासन में मंत्री निशांत कुमार ने पार्टी का रुख साफ करते हुए कहा है कि नीरज कुमार जदयू के अधिकृत प्रत्याशी हैं और पार्टी उनके साथ है. इसके बावजूद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि नीरज कुमार पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार हैं और अनंत सिंह खुले तौर पर उनके खिलाफ चुनाव प्रचार कर रहे हैं, तो पार्टी उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है? आठ सीटों पर हो रहा है चुनाव बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए चुनाव होने वाला है. इनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं. चुनाव को लेकर सभी नेतृत्वक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. लेकिन पटना स्नातक सीट पर जदयू के भीतर खुलकर सामने आया विवाद इस चुनाव को सबसे ज्यादा चर्चा में ला रहा है. पटना स्नातक सीट पर अब मुकाबला केवल उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि जदयू के भीतर नेतृत्वक प्रभाव और ताकत की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है. अनंत सिंह के तेवर और पार्टी नेतृत्व की अब तक की चुप्पी ने इस पूरे मामले को और दिलचस्प बना दिया है. Also Read नीरज कुमार के खिलाफ अनंत सिंह ने खोला मोर्चा, आखिर विधायक किसके भरोसे ठोक रहे ताल? The post JDU में नीरज बनाम अनंत की लड़ाई हुई आर-पार, ललन सिंह ने क्यों कहा- ‘दो लोगों के झगड़े में नहीं पड़ता’ appeared first on Naya Vichar.

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ACP विवेक भगत पर महिला पत्रकार के सीने पर हाथ मारने का आरोप, जानें UPSC रैंक से लेकर कैडर तक

Who is ACP Vivek Bhagat: विवेक भगत दिल्ली पुलिस में सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) के पद पर तैनात हैं और कनॉट प्लेस सर्कल की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जुलाई और अक्टूबर, दोनों बार उनका नाम जंतर-मंतर के प्रदर्शनों से जुड़ा, इसलिए वे लगातार समाचारों में बने हुए हैं. आइए जानते हैं एसीपी विवेद भगत कौन है और उनकी यूपीएससी रैंक क्या थी? यूपीएससी 2017 बैच और रैंक भगत संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2017 बैच के अधिकारी हैं. उन्होंने इस परीक्षा में 967वीं रैंक हासिल की थी. उनका रोल नंबर 756167 है और वे अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी से आते हैं. कैडर और सेवा उनका कैडर DANIPS है, यानी दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पुलिस सेवा. इस सेवा के अधिकारी केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस व्यवस्था में काम करते हैं. एसीपी स्तर पर अधिकारी सर्कल की कानून-व्यवस्था, प्रदर्शनों के प्रबंधन और जांच की निगरानी जैसी जिम्मेदारियां निभाते हैं. अब क्यों हैं चर्चा में? 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक स्त्री पत्रकार ने आरोप लगाया कि AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लेते समय वह वीडियो बना रही थीं, तब एसीपी भगत ने उनके सीने पर हाथ मारा और धक्का दिया. दिल्ली पुलिस के अनुसार तीन स्त्री पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं. CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने FIR की मांग की और आरोप लगाया कि पुलिस भगत को बचा रही है. उन्होंने दोपहर 12 बजे तक FIR दर्ज करने का अल्टीमेटम दिया और कहा कि ऐसा न होने पर पत्रकार और प्रदर्शनकारी थाने के बाहर प्रदर्शन करेंगे. दिल्ली पुलिस का कहना है कि शिकायतें मिल गई हैं और उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए क्राइम ब्रांच (कमला मार्केट) को भेज दिया गया है. ये फिलहाल आरोप हैं और जांच जारी है. एसीपी भगत की ओर से इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया अब तक सामने नहीं आई है. ACP विवेक भगत ने क्या कहा? View on Instagram ये भी पढ़ें: स्त्री पत्रकार का आरोप- दिल्ली पुलिस के ACP विवेक भगत ने मेरा ब्रेस्ट प्रेस किया, पुलिस ने कहा- जांच कर रहे हैं The post ACP विवेक भगत पर स्त्री पत्रकार के सीने पर हाथ मारने का आरोप, जानें UPSC रैंक से लेकर कैडर तक appeared first on Naya Vichar.

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आप नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा- ACP विवेक भगत मोलेस्टर है, वह एक घमंडी और घटिया अफसर है; गिरफ्तारी हो

सौरभ भारद्वाज ने कहा-‘ एसीपी विवेक भगत के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए. जिस तरह एक आम आदमी के साथ यौन उत्पीड़न के केस में कार्रवाई होती है, उसी तरह विवेक भगत के साथ भी होना चाहिए. एफआईआर दर्ज कर, गिरफ्तारी होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यह प्रशासन कहती है कि एक देश एक चुनाव होना चाहिए, लेकिन यही प्रशासन एक देश में दो कानून लागू करना चाहती है.’ आम आदमी पार्टी एसीपी विवेक भगत की गिरफ्तारी के लिए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है. वीडियो में देखें सौरभ भारद्वाज ने क्या कहा- जंतर-मंतर पर पुलिस ने ज्यादती की सौरभ भारद्वाज ने कहा कि 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ बदतमीजी की. वह भी तब जबकि किसी भी प्रदर्शनकारी ने पुलिस के खिलाफ कोई एक्शन नहीं दिखाया था. 75 साल से अधिक के प्रदर्शनकारियों पर भी दिल्ली पुलिस ने ज्यादती की. सांसदों के साथ बदमतीजी की गई, लेकिन स्त्री पत्रकारों के साथ जो बदतमीजी हुई उसे देश बर्दाश्त नहीं करेगा. एसीपी विवेक भगत पर मुकदमा दाखिल करना ही होगा. स्त्री पत्रकार के साथ बदतमीजी का लगा है आरोप एसीपी विवेक भगत पर जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान कवरेज कर रही स्त्री पत्रकारों के साथ बदतमीजी करने का आरोप लगा है. आरोप है कि उन्होंने 3 स्त्री पत्रकारों के साथ बदतमीजी की है. इस केस की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है. पुलिस ने कहा है कि जांच हो रही है और अगर दोष साबित हुआ तो कार्रवाई होगी. ये भी पढ़ें: स्त्री पत्रकार का आरोप- दिल्ली पुलिस के ACP विवेक भगत ने मेरा ब्रेस्ट प्रेस किया, पुलिस ने कहा- जांच कर रहे हैं The post आप नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा- ACP विवेक भगत मोलेस्टर है, वह एक घमंडी और घटिया अफसर है; गिरफ्तारी हो appeared first on Naya Vichar.

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NDA में चिराग का ‘प्रेशर गेम’, ‘समर्थन है, समर्पण नहीं’ के जरिए क्या साधना चाहते हैं मोदी के हनुमान

NDA Alliance Politics केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान के “बिहार एनडीए प्रशासन का हिस्सा होने पर शर्म आती है” वाले बयान के बाद गठबंधन की नेतृत्व को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं. चिराग के इस बयान को नेतृत्वक जानकार केवल बिहार की कानून-व्यवस्था पर प्रशासन के खिलाफ हमला नहीं मान रहे. उनके मुताबिक, चिराग ने सार्वजनिक तौर पर प्रशासन पर दबाव बनाने के साथ-साथ अपनी पार्टी की लंबित मांगों को लेकर भी एक स्पष्ट नेतृत्वक संदेश देने की कोशिश की है. चिराग पासवान के बयान को इस संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि लोजपा (रामविलास) एनडीए का समर्थन कर रही है, लेकिन गठबंधन में अपने मुद्दों पर समझौता करने के लिए तैयार नहीं है. यानी सहयोगी दल से समर्थन की उम्मीद की जा सकती है, समर्पण की नहीं. चौकीदार-दफादार भर्ती समेत कई मांगें लंबित लोजपा (रामविलास) की कई मांगें लंबे समय से बिहार प्रशासन के स्तर पर लंबित हैं. इनमें चौकीदार और दफादार के पदों पर भर्ती, पार्टी के संस्थापक दिवंगत राम विलास पासवान की प्रतिमा स्थापित करना और पटना की किसी प्रमुख सड़क का नाम उनके नाम पर करना जैसी मांगें शामिल हैं. पार्टी नेताओं का कहना है कि इन मांगों को लेकर वरिष्ठ नेताओं की ओर से प्रशासन को कई बार पत्र भी लिखा गया है. लेकिन करीब नौ महीने बीतने के बाद भी इन पर ठोस पहल नहीं हुई है. पार्टी नेताओं के मुताबिक, प्रशासन की ओर से लगातार मामले को देखने और कार्रवाई का आश्वासन दिया जा रहा है. ऐसे में चिराग पासवान का कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर प्रशासन के खिलाफ खुलकर बोलना अपनी लंबित मांगों को लेकर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है. पार्टी के भीतर इसे इस संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है कि लोजपा (रामविलास) एनडीए में है, प्रशासन का समर्थन करती है, लेकिन अपनी नेतृत्वक जमीन और समर्थकों से जुड़े मुद्दों पर पीछे हटने को तैयार नहीं है. बिहार से जुड़ी अन्य ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें.. चौकीदार-दफादार भर्ती पर क्यों अड़ी है लोजपा (आर)? चौकीदार और दफादार के पदों पर भर्ती का मुद्दा लोजपा (रामविलास) के लिए खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पार्टी से जुड़े नेताओं का दावा है कि इन पदों पर भर्ती की मांग करने वालों में बड़ी संख्या उसके समर्थकों की है. लंबे समय से पार्टी का समर्थन करने वाले इन लोगों के बीच अब नाराजगी बढ़ रही है. पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रशासन में रहने के बावजूद यदि उनकी मांग पूरी नहीं होती है, तो इसका असर पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक पर पड़ सकता है. कुछ समर्थकों की नाराजगी इस बात को लेकर भी सामने आ रही है कि वे लगातार पार्टी के साथ खड़े रहे, लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं हो रही है.बिहार की नेतृत्व में पासवान समुदाय को लोजपा (रामविलास) का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है. ऐसे में पार्टी इस मुद्दे पर कोई नेतृत्वक समझौता करने के बजाय प्रशासन पर दबाव बढ़ाना चाहती है. इसी रणनीति के तहत चिराग का कानून-व्यवस्था के सवाल पर मुखर होना भी देखा जा रहा है. स्त्रीओं की सुरक्षा पर प्रशासन को घेरा चिराग पासवान ने एक प्राइवेट यूट्यूब चैनल के साथ बातचीत में बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन पर तीखा हमला किया. उन्होंने कहा कि स्त्रीएं अब घर से बाहर निकलने में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं. उनकी यह टिप्पणी जमुई और समस्तीपुर में स्त्रीओं से जुड़ी घटनाओं के सामने आने के बाद आयी. इन घटनाओं को लेकर प्रशासन की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठे हैं. चिराग के हमले ने एनडीए के भीतर इस मुद्दे को और नेतृत्वक बना दिया है. लोजपा (रामविलास) के पास लोकसभा में पांच सांसद हैं, जबकि बिहार विधानसभा में पार्टी के 19 विधायक हैं. ऐसे में चिराग के बयान को केवल एक सहयोगी दल के नेता की नाराजगी के तौर पर नहीं देखा जा रहा है. NDA में रहते हुए अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश चिराग पासवान एनडीए में रहते हुए इससे पहले भी कई मौकों पर अपनी ही प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर चुके हैं. भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में भी उन्होंने बिहार की सम्राट चौधरी प्रशासन पर तीखा हमला बोला था. इससे साफ है कि एनडीए में रहते हुए चिराग अपनी नेतृत्वक पहचान को अलग बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं. नेतृत्वक जानकारों का मानना है कि गठबंधन के भीतर रहते हुए प्रशासन की नीतियों और कामकाज पर सवाल उठाना चिराग की नेतृत्व का हिस्सा रहा है. इससे उन्हें अपनी पार्टी के समर्थकों के बीच अलग नेतृत्वक पहचान बनाए रखने में मदद मिलती है. साथ ही, उन राज्यों में सीटों और नेतृत्वक हिस्सेदारी को लेकर बातचीत की गुंजाइश भी बढ़ती है, जहां भाजपा को सहयोगियों की जरूरत पड़ सकती है. 2020 में NDA से अलग होकर चुनाव लड़ चुके हैं चिराग चिराग पासवान की नेतृत्व में एनडीए के भीतर रहते हुए अलग रुख अपनाने का इतिहास पुराना है. 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ने का फैसला किया था. उस समय लोजपा ने मुख्य रूप से नीतीश कुमार की जदयू को निशाना बनाया था. हालांकि लोजपा को उस चुनाव में केवल एक सीट पर जीत मिली, लेकिन पार्टी के अलग चुनाव लड़ने से जदयू को कई सीटों पर नुकसान हुआ. इससे यह भी सामने आया कि चिराग अपने दम पर बिहार के चुनावी समीकरण को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं. पार्टी में टूट के बाद भी चिराग अपने पिता राम विलास पासवान के पारंपरिक पासवान वोट बैंक को अपने साथ बनाए रखने में सफल रहे. इसका असर 2024 के लोकसभा चुनाव में साफ दिखाई दिया, जब लोजपा (रामविलास) ने एनडीए के साथ रहते हुए अपने हिस्से की सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज की. इसके बाद से चिराग लगातार अपनी अलग नेतृत्वक पहचान बनाए रखने की कोशिश करते रहे हैं. केंद्र की सिविल सेवाओं में लेटरल एंट्री की नीति के कुछ पहलुओं पर उन्होंने आपत्ति जतायी, जाति जनगणना को लेकर सवाल उठाये और बिहार में शासन-व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी ही प्रशासन के खिलाफ आवाज उठायी. चिराग की नेतृत्व का क्या

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मुंबई में CEC के खिलाफ गर्जना मार्च: उद्धव ठाकरे बोले- ज्ञानेश कुमार बीजेपी के हथियार

Mumbai Protest: मुंबई में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. दोनों भाई सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं. लंबे समय बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे किसी बड़े नेतृत्वक मुद्दे पर एक साथ सड़क पर उतरे हैं. शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा कि यह प्रदर्शन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और कथित चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ है. विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाताओं के अधिकार छीने गए हैं. ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग प्रदर्शन का मुख्य निशाना सीईसी ज्ञानेश कुमार हैं. शिवसेना (UBT) और MNS के नेताओं ने उनके इस्तीफे की मांग की है. संजय राउत ने इस मार्च को संविधान और मतदान के अधिकार की रक्षा बता रहे हैं. उनका आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और लोगों का वोट का अधिकार छीना गया है. देखें मुंबई के आजाद मैदान का वीडियो जहां राज और उद्धव ठाकरे मार्च में शामिल हैं. बोले राज ठाकरे- मनमाने तरीके से चल रही प्रशासन मुंबई में विरोध मार्च के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए MNS प्रमुख राज ठाकरे ने प्रशासन और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि उनकी नाराजगी इस बात से नहीं है कि कोई पार्टी सत्ता में है, बल्कि इस बात से है कि उस सत्ता का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है. राज ठाकरे ने कहा कि देश के मतदाताओं को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि वे किसे सत्ता में बैठाना चाहते हैं और किसे विपक्ष में भेजना चाहते हैं. उन्होंने सवाल किया कि इस पूरे मामले पर चुनाव आयोग क्या जवाब देगा. उन्होंने प्रशासन के कामकाज को मनमाना बताते हुए आरोप लगाया कि बड़े संसाधन कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को दिए जा रहे हैं. उन्होंने जंगल, जमीन, एयरपोर्ट और पोर्ट जैसे संसाधनों का जिक्र करते हुए कहा कि यह सोच कैसे बन गई कि हम जो चाहें करेंगे और कोई फर्क नहीं पड़ेगा. राज ठाकरे ने दावा किया कि ऐसी स्थिति तभी बन सकती है जब चुनाव आयोग पर नियंत्रण हो. यहां देखें राज ठाकरे ने और क्या कहा बोले उद्धव ठाकरे- देश में तानाशाह नहीं बनने देंगे मुंबई में CEC के खिलाफ गर्जना मार्च में उद्धव ठाकरे ने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार बीजेपी के हथियार हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने नारे मेक इन इंडिया का जिक्र करते हुए कहा कि देश में निर्माण और विकास की पहल का स्वागत है, लेकिन अगर उसी के नाम पर तानाशाही खड़ी की जाएगी तो उसका विरोध होगा. उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि अगर मेक इन इंडिया के तहत देश में किसी तानाशाह को खड़ा करने की कोशिश की जाएगी, तो उसके खिलाफ लड़ाई लड़ी जाएगी. उन्होंने कहा कि आज लोग इसी तानाशाही को खत्म करने के लिए एकजुट हुए हैं. सिर्फ पार्टी कार्यकर्ता ही नहीं, आम लोगों को भी बुलावा विपक्षी नेताओं ने कहा है कि यह मार्च सिर्फ नेतृत्वक दलों तक सीमित नहीं रहेगा. मार्च में ऐसे लोगों को भी इसमें शामिल होने की अपील की गई है, जिन्हें चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर चिंता है. शिवसेना (UBT), MNS के साथ कांग्रेस, NCP, लेफ्ट दलों को भी मार्च में शामिल होने का न्योता दिया गया है. पार्टी झंडे नहीं, सिर्फ तिरंगा मार्च में पार्टी के झंडों की जगह केवल तिरंगा रखा गया है. उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने इस मार्च की घोषणा पिछले महीने की थी. दोनों दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया से मतदाताओं के नाम और मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है. The post मुंबई में CEC के खिलाफ गर्जना मार्च: उद्धव ठाकरे बोले- ज्ञानेश कुमार बीजेपी के हथियार appeared first on Naya Vichar.

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Vietnam Road Accident : जितिया का व्रत खोलते ही दरवाजे पर पहुंचा बेटे का शव, मां की चीख से दहल उठा कदमा

जमशेदपुर : शनिवार को मां ने बेटे की सलामती के लिए जितिया का कठिन व्रत रखा था. रविवार को व्रत का पारण किया और अभी घर में बैठी ही थीं कि दरवाजे पर बेटे का पार्थिव शरीर पहुंच गया. बेटे का नाम सुनते ही लग्न देवी बदहवास होकर गिर पड़ीं. कुछ पल बाद बेटे के शव से लिपटकर उनकी चीख निकल पड़ी- “बेटा, तुम्हारे लिए उपवास किया है… उठ जाओ. तुम मुझे छोड़कर नहीं जा सकते. ऐसे शांत मत रहो, कितना सोओगे… उठ जाओ ना. सभी की आंखें हो गयीं नम कदमा के शास्त्रीनगर ब्लॉक नंबर-4 में रविवार को यह मार्मिक दृश्य जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गयीं. बेटे की सलामती के लिए मां ने जितिया का व्रत रखा था, लेकिन व्रत खोलने के कुछ ही देर बाद उसी बेटे का शव सामने था. मां बार-बार शव से लिपटकर रोती रहीं और कहती रहीं कि “तेरी ही सलामती के लिए जितिया का व्रत रखा था और तुम ही छोड़कर चले गये… ऐसा क्यों किया.” मां की चीख-पुकार सुनकर आसपास का माहौल गमगीन हो गया. पिता रमेश कुमार समेत परिवार के अन्य सदस्यों का भी रो-रोकर बुरा हाल था. परिवार के लोग बारी-बारी से विनय के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन करते रहे. कदमा के शास्त्रीनगर में आवास. बेटे की अर्थी उठी तो घर में मचा कोहराम घर से जब विनय की अर्थी निकली तो एक बार फिर माहौल चीख-पुकार से भर गया. परिवार के सदस्यों के साथ आसपास के लोग भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए. बड़ी संख्या में लोग नम आंखों से विनय को अंतिम विदाई देने पहुंचे. शोकाकुल माहौल के बीच अंतिम यात्रा बिष्टुपुर स्थित पार्वती घाट पहुंची, जहां विनय कुमार का अंतिम संस्कार किया गया. योग प्रशिक्षण देने वियतनाम गये थे विनय कदमा शास्त्रीनगर निवासी विनय कुमार करीब दो वर्ष पहले योग प्रशिक्षण देने के लिए वियतनाम गये थे. 25 सितंबर की रात हल्की बारिश के दौरान विनय और रांची निवासी राजा कुमार स्कूटी से घर लौट रहे थे. इसी दौरान बारिश के कारण स्कूटी फिसल गयी और अनियंत्रित होकर सामने से आ रही ओमनी कार से टकरा गयी. हादसे में दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गयी थी. सांसद और केंद्रीय मंत्रियों की पहल के बाद जमशेदपुर पहुंचा शव विदेश में हुए हादसे के बाद विनय के पार्थिव शरीर को जमशेदपुर लाने के लिए परिवार की ओर से प्रयास किये गये. सांसद विद्युत वरण महतो, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की पहल के बाद शनिवार देर रात विनय का शव जमशेदपुर पहुंचा. शव को पहले टीएमएच में रखा गया. रविवार को परिजन अंतिम संस्कार से पहले विनय के पार्थिव शरीर को लेकर कदमा स्थित आवास पहुंचे. बेटे को आखिरी बार घर की चौखट पर देखकर परिवार का दर्द एक बार फिर फूट पड़ा. जिस घर में मां ने बेटे की लंबी उम्र और सलामती के लिए जितिया का व्रत रखा था, उसी घर से रविवार को बेटे की अर्थी उठी. जितिया की खुशियों के बीच आया यह मातम पूरे इलाके को गमगीन कर गया. The post Vietnam Road Accident : जितिया का व्रत खोलते ही दरवाजे पर पहुंचा बेटे का शव, मां की चीख से दहल उठा कदमा appeared first on Naya Vichar.

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