Hot News

Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

समस्तीपुर

मैयारी में स्कॉर्पियो से 400 लीटर विदेशी शराब बरामद, प्राथमिकी दर्ज

चालक फरार, शराब तस्करी के नेटवर्क का पता लगाने में जुटी पुलिस नया विचार न्यूज़ सरायरंजन। थाना क्षेत्र में शराब तस्करी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में रविवार को गुप्त सूचना के आधार पर सरायरंजन पुलिस ने मैयारी गांव में छापेमारी कर एक स्कॉर्पियो से करीब 400 लीटर विदेशी शराब बरामद की। पुलिस की कार्रवाई के दौरान वाहन चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने शराब और वाहन को जब्त कर मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार, सरायरंजन थानाध्यक्ष धनंजय कुमार को गुप्त सूचना मिली थी कि मैयारी गांव में एक स्कॉर्पियो के माध्यम से विदेशी शराब की खेप ले जाई जा रही है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बताए गए स्थान पर छापेमारी की। इस दौरान स्कॉर्पियो पर लदी करीब 400 लीटर विदेशी शराब बरामद हुई। हालांकि, पुलिस को देखकर चालक फरार हो गया। इस मामले में सरायरंजन थाना कांड संख्या 258/26 दर्ज किया गया है। पुलिस ने बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम, के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। शराब के स्रोत और तस्करी नेटवर्क की जांच पुलिस अब जब्त स्कॉर्पियो के मालिक, फरार चालक और शराब के कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है। जांच की जा रही है कि शराब कहां से लाई गई थी, इसे किसने मंगवाया था और इसकी आपूर्ति कहां की जानी थी। पुलिस वाहन के मालिक और तस्करी में शामिल अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। थानाध्यक्ष धनंजय कुमार ने बताया कि शराब तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। इस अवैध कारोबार में शामिल लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य खबर, शिक्षा, समस्तीपुर

जीईसी समस्तीपुर के डॉ. दीपक कुमार मंडल लगातार तीन साल दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल

लगातार तीन साल दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल हुए जीईसी के डॉ. दीपक कुमार मंडल वर्ष 2024 से 2026 तक सूची में बनाई जगह, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में शोध योगदान को मिली पहचान नया विचार न्यूज़ समस्तीपुर। सरायरंजन प्रखंड के नरघोघी गांव स्थित प्रशासनी इंजीनियरिंग कॉलेज (जीईसी), समस्तीपुर के प्रभारी प्राचार्य एवं मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. दीपक कुमार मंडल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्थान का मान बढ़ाया है। उन्हें वर्ष 2024 से 2026 तक लगातार तीन वर्षों के लिए दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला है। उनकी इस उपलब्धि को शोध कार्यों, वैज्ञानिक योगदान और शैक्षणिक उत्कृष्टता की महत्वपूर्ण पहचान माना जा रहा है। डॉ. मंडल का नाम इंजीनियरिंग क्षेत्र में शोध करने वाले वैज्ञानिकों की इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया गया है। उनके प्रमुख शोध क्षेत्र यांत्रिक अभियांत्रिकी हैं। उपलब्ध वैज्ञानिक प्रोफाइल के अनुसार, उनकी वैश्विक रैंक 1,68,598 और संबंधित उपक्षेत्र में रैंक 1,608 है। वहीं, उनका एच-इंडेक्स 14 तथा एचएम-इंडेक्स 6 दर्ज है। ये सूचकांक शोध प्रकाशनों और उनके उद्धरणों के आधार पर वैज्ञानिकों के शोध प्रभाव का आकलन करने में उपयोग किए जाते हैं। शोध और वैज्ञानिक योगदान को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची एल्सेवियर के आंकड़ों और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के वैज्ञानिक प्रभाव संबंधी विश्लेषण पर आधारित है। इसमें वैज्ञानिकों के शोध प्रकाशनों, उद्धरणों और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर उनके अकादमिक योगदान का मूल्यांकन किया जाता है। डॉ. मंडल को लगातार तीन वर्षों तक इस सूची में स्थान मिलने से प्रशासनी इंजीनियरिंग कॉलेज, समस्तीपुर की शैक्षणिक उपलब्धियों को भी पहचान मिली है। यह उपलब्धि संस्थान में शोध, नवाचार और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विद्यार्थियों को मिलेगी प्रेरणा डॉ. मंडल की इस सफलता से संस्थान के विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं को उच्चस्तरीय शोध कार्यों के लिए प्रेरणा मिलेगी। साथ ही, इंजीनियरिंग के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शोध को प्रोत्साहित करने और संस्थान की अकादमिक पहचान मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सारी याचिकाएं मंजूर, 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है. इन याचिकाओं में उठाए गए सवालों के बीच अब 27 अक्टूबर की तारीख अहम मानी जा रही है. राहुल गांधी ने भी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका इधर, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की जा चुकी है. याचिका को डायरी नंबर भी आवंटित कर दिया गया है. इससे पहले राहुल गांधी की कानूनी टीम सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री पहुंची थी. राहुल गांधी निर्वाचन आयोग में कथित अनियमितताओं और नई दिल्ली में इस मुद्दे पर जारी विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों को लेकर व्यक्तिगत रूप से रिट याचिका दाखिल करने के लिए समय बढ़ाने की मांग कर रहे थे. SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसलों पर उठे सवाल याचिकाकर्ताओं ने SIR प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि आयोग में कुछ महत्वपूर्ण फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद लिए गए. याचिकाओं में इन फैसलों की वैधानिकता की जांच करने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है. याचिकाओं में SIT जांच और कार्रवाई की मांग कुछ याचिकाओं में कथित चुनावी अनियमितताओं की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और संबंधित फैसलों को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं. इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर होगा. 27 अक्टूबर को सुनवाई पर टिकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट में इन मामलों की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग और केंद्र प्रशासन का पक्ष महत्वपूर्ण होगा. अदालत यह जांच सकती है कि संबंधित फैसले लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप लिए गए थे या नहीं. इससे पहले 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम तौर पर CEC को निलंबित करने की मांग स्वीकार नहीं की थी और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था. ये भी पढ़ें: केरल विधानसभा में CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव पास, देश के इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा The post CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सारी याचिकाएं मंजूर, 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

फिल्म देखते वक्त छलक आते हैं आंसू? कमजोरी नहीं, ये है इसके पीछे की वजह

कभी किसी फिल्म में मां-बेटी की विदाई देखकर आंखें भर आईं, तो कभी किसी किरदार का दर्द देखकर खुद को रोने से रोक नहीं पाए? अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो जरूरी नहीं कि आप भावनात्मक रूप से कमजोर हों. कई बार दूसरों के दुख को महसूस करना और उनकी कहानी से जुड़ जाना हमारी संवेदनशीलता को दिखाता है. मनोविज्ञान में भावनाओं को समझने और दूसरों के प्रति सहानुभूति रखने की क्षमता को अहम माना जाता है. आइए जानते हैं कि इमोशनल फिल्म देखकर रोने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं और इसका मन पर क्या असर पड़ता है. इमोशनल फिल्म देखकर रोना कमजोरी नहीं नीदरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगन में हुए शोध में फिल्मों के दौरान रोने और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं का अध्ययन किया गया। इस विषय पर हुई रिसर्च से पता चलता है कि फिल्म देखकर रोने का अनुभव हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है. कई बार कहानी से जुड़ाव और किरदारों के प्रति सहानुभूति आंसुओं की वजह बनती है. इसलिए किसी का भावुक होना उसे कमजोर समझने का आधार नहीं है. रोने के बाद क्यों हल्का लगता है मन? कई बार मन में दुख, तनाव या किसी बात की परेशानी जमा होती रहती है. जब हम किसी भावुक कहानी को देखते हैं, तो वही भावनाएं आंसुओं के रूप में बाहर आ सकती हैं. रोने के बाद कुछ लोगों को राहत महसूस होती है और उनका मूड भी बेहतर हो जाता है. हालांकि, यह असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता. मनोविज्ञान के अनुसार, भावनाओं को पहचानना और उन्हें स्वीकार करना मानसिक सेहत के लिए मददगार हो सकता है. दिमाग कैसे करता है भावनाओं को नियंत्रित? निमहंस, बेंगलुरु के मनोवैज्ञानिक डॉ. टीएस जयसूर्या के अनुसार, हाइपोथैलेमस मस्तिष्क के लिम्बिक सिस्टम से जुड़ा एक अहम हिस्सा है. यह शरीर की तनाव प्रतिक्रिया और भावनाओं से जुड़े कई कामों में भूमिका निभाता है. जब हम दुख, खुशी या डर जैसी भावनाएं महसूस करते हैं, तो मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्से सक्रिय होते हैं. इनमें एमिग्डाला भी शामिल है, जो भावनाओं को समझने और उनसे जुड़ी प्रतिक्रियाओं में भूमिका निभाता है. इसके बाद शरीर में आंसू आने जैसी प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं. भावनाओं को दबाना जरूरी नहीं कभी फिल्म का कोई दृश्य हमें अपनी जिंदगी की याद दिला देता है, तो कभी किसी अनजान किरदार का दर्द भी अपना लगने लगता है. ऐसी प्रतिक्रिया स्वाभाविक है. रोना हर बार तनाव दूर करने का तरीका नहीं होता, लेकिन अपनी भावनाओं को समझना और जरूरत पड़ने पर किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना मन को संभालने में मदद कर सकता है. इसलिए अगली बार किसी फिल्म को देखकर आंसू आएं, तो खुद को कमजोर समझने के बजाय अपनी भावनाओं को समझने की कोशिश करें. यह भी पढ़ें: शिशु के हाथ से मोबाइल लेते ही शुरू हो जाता है रोना? इन 5 तरीकों से दूर करें फोन की जिद The post फिल्म देखते वक्त छलक आते हैं आंसू? कमजोरी नहीं, ये है इसके पीछे की वजह appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

“हमें कितनी बार साथ देखा है?” जब रेखा संग अफेयर की खबरों पर भड़क उठे थे अमिताभ बच्चन, मांग लिए थे सबूत

अमिताभ बच्चन और रेखा की जोड़ी पर्दे पर जितनी हिट थी, असल जिंदगी में उनके अफेयर के चर्चे भी हर जुबान पर थे. सालों तक इन गॉसिप्स पर खामोश रहे अमिताभ बच्चन ने साल 1999 में अपना गुस्सा जाहिर किया था. उन्होंने मीडिया पर पलटवार करते हुए सीधे सबूत मांगे और पूछा- “आखिर आपने हमें कितनी बार एक साथ देखा है?” अमिताभ को सबसे ज्यादा ठेस तब लगी, जब एक मैगजीन ने दावा किया कि रेखा उनके बंगले ‘प्रतीक्षा’ में शिफ्ट हो गई हैं. बिग बी ने इसे अपने घर और माता-पिता का अपमान बताया. जहां एक तरफ अमिताभ इन दावों को सिरे से खारिज कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ रेखा का अंदाज बिल्कुल बेबाक था. 2004 में सिमी गरेवाल के शो में उन्होंने खुलेआम अमिताभ के लिए अपने प्यार का इजहार कर दिया था. ये भी पढ़ें: अमिताभ बच्चन के सामने गुहार लगाती रही छोटी बच्ची, बिग बी ने नहीं दिया भाव, वीडियो देख लोगों को क्यों याद आए नाना पाटेकर? The post “हमें कितनी बार साथ देखा है?” जब रेखा संग अफेयर की समाचारों पर भड़क उठे थे अमिताभ बच्चन, मांग लिए थे सबूत appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Retail Inflation: सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54% हुई, खाद्य मुद्रास्फीति भी 7.74% पर पहुंची

Retail Inflation: सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54% हो गई. अगस्त में यह दर 4.83% थी. वहीं, खाद्य मुद्रास्फीति भी अगस्त के 5.97% से बढ़कर सितंबर में 7.74% पर पहुंच गई. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है. ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई 6.08% पर पहुंची आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में ग्रामीण क्षेत्रों की खुदरा महंगाई दर 6.08% रही. अगस्त में यह 5.24% थी. वहीं, शहरी क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर अगस्त के 4.31% से बढ़कर सितंबर में 4.88% हो गई. इस तरह ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में महंगाई दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई. संयुक्त रूप से खुदरा महंगाई दर अगस्त के 4.83% से बढ़कर सितंबर में 5.54% पर पहुंच गई. खाद्य महंगाई में भी तेज बढ़ोतरी सितंबर में खाद्य महंगाई दर में भी बढ़ोतरी हुई. उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) के आधार पर खाद्य मुद्रास्फीति की संयुक्त दर अगस्त में 5.97% थी, जो सितंबर में बढ़कर 7.74% हो गई. ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई दर अगस्त के 6.17% से बढ़कर सितंबर में 8.06% रही. वहीं, शहरी क्षेत्रों में यह दर 5.64% से बढ़कर 7.18% हो गई. Retail Inflation: सितंबर में खुदरा महंगाई बढ़कर 5.54% हुई, खाद्य मुद्रास्फीति भी 7.74% पर पहुंची सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54% हो गई. अगस्त में यह दर 4.83% थी. वहीं, खाद्य मुद्रास्फीति भी अगस्त के 5.97% से बढ़कर सितंबर में 7.74% पर पहुंच गई. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है. ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई 6.08% पर पहुंची आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में ग्रामीण क्षेत्रों की खुदरा महंगाई दर 6.08% रही. अगस्त में यह 5.24% थी. वहीं, शहरी क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर अगस्त के 4.31% से बढ़कर सितंबर में 4.88% हो गई. इस तरह ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में महंगाई दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई. संयुक्त रूप से खुदरा महंगाई दर अगस्त के 4.83% से बढ़कर सितंबर में 5.54% पर पहुंच गई. खाद्य महंगाई में भी तेज बढ़ोतरी सितंबर में खाद्य महंगाई दर में भी बढ़ोतरी हुई. उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) के आधार पर खाद्य मुद्रास्फीति की संयुक्त दर अगस्त में 5.97% थी, जो सितंबर में बढ़कर 7.74% हो गई. ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई दर अगस्त के 6.17% से बढ़कर सितंबर में 8.06% रही. वहीं, शहरी क्षेत्रों में यह दर 5.64% से बढ़कर 7.18% हो गई. सितंबर में CPI और CFPI के आंकड़े राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में अखिल हिंदुस्तानीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) का संयुक्त स्तर 109.49 रहा. अगस्त में यह 108.74 था. वहीं, उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) का संयुक्त स्तर अगस्त के 110.73 से बढ़कर सितंबर में 112.17 हो गया. ये सितंबर 2026 के अनंतिम आंकड़े हैं, जबकि अगस्त 2026 के आंकड़े अंतिम हैं. खुदरा और खाद्य महंगाई दर की टेबल तालिका 1: महंगाई दर (प्रतिशत में) श्रेणी अगस्त ग्रामीण अगस्त शहरी अगस्त संयुक्त सितंबर ग्रामीण सितंबर शहरी सितंबर संयुक्त खुदरा महंगाई (CPI) 5.24% 4.31% 4.83% 6.08% 4.88% 5.54% खाद्य महंगाई (CFPI) 6.17% 5.64% 5.97% 8.06% 7.18% 7.74% तालिका 2: उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (इंडेक्स) श्रेणी अगस्त ग्रामीण अगस्त शहरी अगस्त संयुक्त सितंबर ग्रामीण सितंबर शहरी सितंबर संयुक्त CPI (सामान्य) 109.28 108.07 108.74 110.11 108.71 109.49 CFPI (खाद्य) 110.74 110.72 110.73 112.21 112.10 112.17 नोट: सितंबर 2026 के आंकड़े अनंतिम (Provisional) हैं और अगस्त 2026 के आंकड़े अंतिम (Final) हैं. स्रोत: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय. सितंबर में CPI और CFPI के आंकड़े राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में अखिल हिंदुस्तानीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) का संयुक्त स्तर 109.49 रहा. अगस्त में यह 108.74 था. वहीं, उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) का संयुक्त स्तर अगस्त के 110.73 से बढ़कर सितंबर में 112.17 हो गया. ये सितंबर 2026 के अनंतिम आंकड़े हैं, जबकि अगस्त 2026 के आंकड़े अंतिम हैं. The post Retail Inflation: सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54% हुई, खाद्य मुद्रास्फीति भी 7.74% पर पहुंची appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

CJP Protest: चीनी कैमरे और अमेरिकी स्मार्ट चश्मों से प्रदर्शनकारियों पर नजर रख रही दिल्ली पुलिस, क्यों खतरनाक है विदेशी AI तकनीक?

आंखों पर मेटा ग्लास, शर्ट के बटन पर स्मार्ट कैमरा, दिल्ली के लुटियंस जोन के आसमान पर ड्रोन का पहरा. कुछ ऐसा नजारा जंतर मंतर और आसपास के इलाकों में इन दिनों देखने को मिल रहा है. दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह सबकुछ प्रदर्शन पर निगरानी रखने के लिए किया जा रहा है. लेकिन, इन विदेशी AI तकनीक के इस्तेमाल की बात सिर्फ इतनी भर नहीं है. दरअसल, कई एक्सपर्ट विदेशी तकनीक के इस्तेमाल को बेहद खतरनाक बता रहे हैं. उनका कहना है कि इससे देश की सुरक्षा और आमलोगों की प्राइवेसी दोनों खतरे में है. क्या सच में ऐसा है? क्या हमारे देश में इस तरह के तकनीक पर निगरानी को लेकर कोई कानून है? अगर किसी व्यक्ति से जुड़ा डेटा किसी कंपनी के जरिए गलत इस्तेमाल होता है तो जिम्मेदार कौन होगा? इन सवालों का जवाब सुप्रीम कोर्ट के वकील और साइबर कानून एक्सपर्ट विराग गुप्ता के जरिए इस स्टोरी में जानते हैं…. {“type”:”faq”,”question”:”दिल्ली प्रदर्शन पर निगरानी के लिए प्रशासन किन विदेशी AI तकनीक का इस्तेमाल कर रही है?”,”answer”:”जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी Meta स्मार्ट चश्मों के अलावा मोबाइल फोन और कैमरों से रिकॉर्डिंग करते दिखाई दिए. पुलिस निगरानी के लिए इक्षणा वैन, ड्रोन और बॉडी कैमरों का भी इस्तेमाल करती है. इक्षणा वैन में लगे कैमरों की फुटेज का AI की मदद से विश्लेषण किया जा सकता है. वहीं, फेशियल रिकग्निशन तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति के चेहरे का पुलिस रिकॉर्ड में मौजूद तस्वीरों से मिलान किया जा सकता है.nnअभिज्ञान ऐप फिंगरप्रिंट के आधार पर व्यक्ति की पहचान और उपलब्ध आपराधिक रिकॉर्ड की जांच में मदद करता है. हालांकि, प्रत्येक कैमरे या ड्रोन में AI तकनीक का इस्तेमाल नहीं होता.”}{“type”:”faq”,”question”:”इन AI तकनीक के इस्तेमाल से क्या जोखिम हैं?”,”answer”:”प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें और वीडियो लीक होने पर उनकी पहचान, गतिविधियों और लोकेशन से जुड़ी जानकारी का दुरुपयोग हो सकता है. विदेशी तकनीक से लैस निगरानी उपकरणों के मामले में डेटा कहां स्टोर होता है, उस तक किसकी पहुंच है और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है, यह अहम सवाल हैं.nnयदि कैमरों या उनके सॉफ्टवेयर में सुरक्षा संबंधी खामियां हों, तो डेटा चोरी और साइबर हमलों का खतरा बढ़ सकता है. मामला केवल नागरिकों की निजता तक सीमित नहीं है. संवेदनशील प्रशासनी इमारतों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की फुटेज गलत हाथों में पहुंचने से सुरक्षा व्यवस्था और आवाजाही से जुड़ी जानकारी उजागर हो सकती है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी चुनौती बन सकती है.”}{“type”:”faq”,”question”:”क्या हिंदुस्तान में इस तरह के तकनीक के इस्तेमाल को लेकर कोई कानून हैं?”,”answer”:”हिंदुस्तान में सार्वजनिक स्थानों पर फेशियल रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल को विशेष रूप से नियंत्रित करने वाला कोई समर्पित कानून नहीं है. डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए सामान्य कानूनी ढांचा प्रदान करता है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर बायोमेट्रिक निगरानी के लिए अलग से विस्तृत नियम निर्धारित नहीं करता. कानून में कुछ परिस्थितियों में प्रशासनी एजेंसियों को छूट भी दी गई है.nnऐसे में डेटा को कितने समय तक सुरक्षित रखा जाएगा, उसे किन एजेंसियों के साथ साझा किया जा सकेगा और उसके दुरुपयोग की स्थिति में शिकायत कहां की जा सकेगी, जैसे सवाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं.”}{“type”:”faq”,”question”:”अगर किसी व्यक्ति का पर्सनल डेटा का इस्तेमाल कोई कंपनी गलत तरीके से करती है, तो जिम्मेदार कौन?”,”answer”:”प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें और वीडियो लीक होने पर उनकी पहचान, गतिविधियों और लोकेशन से जुड़ी जानकारी का दुरुपयोग हो सकता है. विदेशी तकनीक से लैस निगरानी उपकरणों के मामले में डेटा कहां स्टोर होता है, उस तक किसकी पहुंच है और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है, यह अहम सवाल हैं.nयदि कैमरों या उनके सॉफ्टवेयर में सुरक्षा संबंधी खामियां हों, तो डेटा चोरी और साइबर हमलों का खतरा बढ़ सकता है. मामला केवल नागरिकों की निजता तक सीमित नहीं है. संवेदनशील प्रशासनी इमारतों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की फुटेज गलत हाथों में पहुंचने से सुरक्षा व्यवस्था और आवाजाही से जुड़ी जानकारी उजागर हो सकती है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी चुनौती बन सकती है.”}{“type”:”faq”,”question”:”क्या किसी देश में कभी विदेशी तकनीक के इस्तेमाल से जोखिम के मामले सामने आए हैं?”,”answer”:”ईरान का उदाहरण बताता है कि निगरानी कैमरों से जुटाई गई जानकारी किस तरह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन सकती है. फरवरी 2026 में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई पर हुए हमले के बाद सामने आई रिपोर्टों में दावा किया गया कि तेहरान में लगे निगरानी कैमरों से मिली जानकारी का इस्तेमाल इजरायली खुफिया एजेंसियों ने लोगों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था को समझने के लिए किया था.nnइजरायल के Institute for National Security Studies (INSS) ने निगरानी कैमरों से जुड़े सुरक्षा जोखिमों पर अपनी रिपोर्ट में बताया है कि हैक किए गए कैमरों से संवेदनशील जगहों और गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा सकती है. युद्ध जैसे हालात में ऐसी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों और सैन्य ठिकानों के लिए खतरा बन सकती है.”} The post CJP Protest: चीनी कैमरे और अमेरिकी स्मार्ट चश्मों से प्रदर्शनकारियों पर नजर रख रही दिल्ली पुलिस, क्यों खतरनाक है विदेशी AI तकनीक? appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

iQOO फोन में आने वाला है नया सॉफ्टवेयर अपडेट, OriginOS 7 से बदल जाएगा चलाने का अंदाज, मिलेंगे ये खास फीचर्स

Vivo के बाद अब iQOO भी अपने स्मार्टफोन के लिए OriginOS 7 सॉफ्टवेयर अपडेट लाने की तैयारी में है. इस अपडेट के बाद फोन का इंटरफेस और इस्तेमाल करने का अनुभव पहले से बेहतर हो सकता है. इससे ऐप खोलने, एक साथ कई ऐप चलाने और रोजमर्रा के काम करने में आसानी हो सकती है. इसके अलावा, इसमें नए AI फीचर्स भी मिलेंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे पहले iQOO 15 फोन में यह अपडेट देखने को मिलेगा. इसके बाद दूसरे स्मार्टफोन में भी दिया जाएगा. OriginOS 7 में क्या नया मिलेगा? OriginOS 7 एंड्रॉइड 17 पर आधारित है. इसमें फोन के इंटरफेस और एनिमेशन में बदलाव देखने को मिलेंगे. उदाहरण के लिए, जब आप एक ऐप से दूसरे ऐप पर जाते हैं या स्क्रीन बदलते हैं, तो कभी-कभी हल्का अटकाव महसूस होता है. ऐसे में ये नया सॉफ्टवेयर इस समस्या को दूर कर सकता है. नया सॉफ्टवेयर गेमिंग के भी अनुभव को भी स्मूद बनाएगा. मिलेंगे नए AI फीचर्स इस अपडेट में Jovi AI असिस्टेंट मिलेगा, जो यूजर्स को जानकारी खोजने और रोजमर्रा के कुछ काम करने में मदद कर सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, यूजर फोन को कंप्यूटर से जोड़कर भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके अलावा, इसमें Snap Note नाम का फीचर मिलेगा. इसकी मदद से नोट्स में जरूरी जानकारी खोजना आसान हो सकता है. वहीं, Snap and Go फीचर यूजर को स्क्रीनशॉट, ईमेल या कैलेंडर में मौजूद टिकट और यात्रा से जुड़ी जानकारी को पहचानकर उससे जुड़े नोटिफिकेशन दिखा सकेगा. साथ ही इसमें मिलने वाले Origin Workbench फीचर की मदद से यूजर्स एक साथ कई विंडो खोल सकेंगे. जिससे एक ऐप पर काम करते हुए दूसरे ऐप का इस्तेमाल करना आसान हो सकता है. इन फोन्स में मिलेंगे अपडेट रिपोर्ट के मुताबिक, Android 17 पर आधारित OriginOS 7 अपडेट इन 13 iQOO स्मार्टफोन में मिलेगा. हालांकि, इंडिया में यह अपडेट कब तक आएगा इसके बारे में अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है. अक्टूबर 2026 –  iQOO 15 नवंबर 2026 – iQOO 15R, iQOO 13 दिसंबर 2026 – iQOO 12, iQOO Neo 10, iQOO Neo 10R जनवरी 2027 – iQOO Neo 9 Pro, iQOO Z11 5G, iQOO Z11x 5G, iQOO Z11xa 5G, iQOO Z10 5G, iQOO Z10R 5G OriginOS 6 से कितना अलग होगा नया वर्जन? पुराने OriginOS 6 के मुकाबले OriginOS 7 में नए AI फीचर्स, बेहतर एनिमेशन और एक साथ कई ऐप चलाने की सुविधा में सुधार देखने को मिल सकता है. इससे यूजर्स के लिए फोन पर रोजमर्रा के काम करना आसान हो सकता है. हालांकि, नए वर्जन में मिलने वाले सभी बदलावों की आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है. यह भी जरूरी नहीं है कि हर iQOO स्मार्टफोन में सभी फीचर्स मिलें. कुछ सुविधाएं फोन के मॉडल और हार्डवेयर के हिसाब से अलग हो सकती हैं. इसलिए अपडेट मिलने के बाद फोन की परफॉर्मेंस में कितना सुधार होगा, यह उसके मॉडल पर भी निर्भर करेगा. ये भी पढ़ें: ColorOS 17 पर बेस्ड OPPO Find X10 सीरीज की लॉन्च डेट कंफर्म, मिलेगा 200MP कैमरा और 8000mAh की बैटरी The post iQOO फोन में आने वाला है नया सॉफ्टवेयर अपडेट, OriginOS 7 से बदल जाएगा चलाने का अंदाज, मिलेंगे ये खास फीचर्स appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

625 km की रेंज, मसाज वाली सीटें और 9 एयरबैग… भारत में लॉन्च हुई Volvo की यह लग्जरी इलेक्ट्रिक SUV, जानें कीमत?

Volvo ने कुछ समय पहले अपनी इलेक्ट्रिक SUV EX90 से पर्दा उठाया था. अब कंपनी ने आखिरकार इसे हिंदुस्तानीय बाजार में लॉन्च कर दिया है. इसकी एक्स-शोरूम कीमत 1.26 करोड़ रुपये रखी गई है. इस इलेक्ट्रिक SUV में Volvo की पहचान मानी जाने वाली शानदार स्वीडिश डिजाइन, दमदार परफॉर्मेंस और कई एडवांस टेक्नोलॉजी फीचर्स का कॉम्बिनेशन देखने को मिलता है. आइए जानते हैं हिंदुस्तान में लॉन्च हुई Volvo EX90 में क्या कुछ खास हमें मिलता है. Volvo EX90: प्राइस और वेरिएंट्स मॉडल एक्स-शोरूम कीमत Volvo EX90 Ultra 1.26 करोड़ रुपये Volvo EX90: एक्सटीरियर कार के फ्रंट प्रोफाइल की बात करें, तो यहां बंद ग्रिल के साथ Volvo का सिग्नेचर लोगो मिलता है. इसके अलावा, ‘थॉर्स हैमर’ डिजाइन वाले LED हेडलैंप्स दिए गए हैं, जिन्हें LED DRLs के साथ जोड़ा गया है. वहीं, स्कल्प्टेड बंपर और नीचे की तरफ ग्लॉस ब्लैक फिनिश वाला एयर डैम देखने को मिलता है. साइड से देखने पर EX90 में Volvo XC90 की झलक नजर आती है. इसकी चौकोर बॉडी डिजाइन SUV को दमदार लुक देती है. हालांकि, फ्लश-फिट डोर हैंडल्स और 21-इंच के अलॉय व्हील्स इसे XC90 से अलग लुक देते हैं. पीछे की तरफ C-शेप के कनेक्टेड LED टेललैंप्स मिलते हैं, जबकि D-पिलर्स पर ब्रेक लाइट्स दी गई हैं. इसके साथ रूफ स्पॉयलर और बंपर पर मोटी ग्लॉस ब्लैक क्लैडिंग SUV के रियर लुक को और शानदार बनाती है. Volvo EX90: इंटीरियर Volvo EX90 के केबिन में भी मिनिमल डिजाइन देखने को मिलता है. इसके डैशबोर्ड के बीच में एक बड़ी टचस्क्रीन दी गई है, जिसके जरिए इंफोटेनमेंट सिस्टम से लेकर क्लाइमेट कंट्रोल और यहां तक कि ORVM (साइड मिरर) को भी एडजस्ट किया जा सकता है. केबिन को प्रीमियम फील देने के लिए इसमें लेदर सीट अपहोल्स्ट्री के साथ एल्युमिनियम और लकड़ी के इंसर्ट्स दिए गए हैं. इसके अलावा, तीन-स्पोक स्टीयरिंग व्हील और डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर भी इंटीरियर को खास बनाते हैं. हिंदुस्तानीय बाजार में Volvo EX90 को 6-सीटर लेआउट में पेश किया जा रहा है. इसमें दूसरी रो में दो अलग-अलग कैप्टन सीटें मिलती हैं. इन सीटों पर पैसेंजर्स को अलग-अलग आर्मरेस्ट की सुविधा मिलती है. साथ ही, जरूरत के हिसाब से सीटों को आगे-पीछे खिसकाने और पीछे की ओर झुकाने का ऑप्शन भी दिया गया है. Volvo EX90: फीचर्स  इसमें 14.5-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है, जिसमें Google के फीचर्स इन-बिल्ट मिलते हैं. इसके अलावा, वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay का सपोर्ट भी मिलता है.  म्यूजिक सुनने के शौकीनों के लिए इसमें 25-स्पीकर वाला Bowers & Wilkins सराउंड साउंड सिस्टम दिया गया है. वहीं, ड्राइवर के लिए 9-इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलता है.  SUV में फोर-जोन क्लाइमेट कंट्रोल, आगे और पीछे की पावर-एडजस्टेबल सीटें, हीटिंग, वेंटिलेशन और मसाज की सुविधा वाली फ्रंट सीटें भी दी गई हैं. इसके अलावा, पावर्ड टेलगेट, पैनोरमिक फोटोक्रोमिक ग्लास रूफ और फोन चार्ज करने के लिए कई वायरलेस चार्जिंग पैड भी मिलते हैं. Volvo EX90: सेफ्टी इसमें 9 एयरबैग के साथ लेवल-2 ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) दिया गया है.  SUV में 360-डिग्री कैमरा, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC), टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS) और रेन-सेंसिंग वाइपर जैसे फीचर्स मिलते हैं. पार्किंग को आसान बनाने के लिए इसमें ऑटो पार्किंग असिस्ट और आगे-पीछे पार्किंग सेंसर दिए गए हैं.  पहाड़ी रास्तों पर गाड़ी को पीछे खिसकने से रोकने के लिए हिल होल्ड असिस्ट और इलेक्ट्रिक पार्किंग ब्रेक के साथ ऑटो होल्ड की सुविधा भी मिलती है. सेफ्टी के मामले में इस SUV को Euro NCAP क्रैश टेस्ट में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग भी मिली है. Volvo EX90: पावरट्रेन फीचर्स जानकारी बैटरी पैक 106 kWh इलेक्ट्रिक मोटर 2 दावा की गई रेंज (WLTP) 625 किमी अधिकतम पावर 462 PS अधिकतम टॉर्क 670 Nm 0-100 किमी/घंटा की रफ्तार 5.5 सेकंड ड्राइवट्रेन AWD (ऑल-व्हील ड्राइव) ये भी पढ़ें: अब CNG में आएगी Mahindra XUV3XO, मिल सकता है पैनोरमिक सनरूफ और टर्बोचार्ज्ड इंजन, 15 अक्टूबर को उठेगा पर्दा, टीजर आया सामने The post 625 km की रेंज, मसाज वाली सीटें और 9 एयरबैग… हिंदुस्तान में लॉन्च हुई Volvo की यह लग्जरी इलेक्ट्रिक SUV, जानें कीमत? appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Nobel Prize 2026: रॉबर्ट ई हॉल और माइकल वुडफोर्ड को मिला 2026 इकोनॉमिक्स नोबेल पुरस्कार

स्वीडिश रॉयल एकेडमी ऑफ साइंसेज ने अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में दिए जाने वाले नोबेल पुरस्कार की घोषणा की है. यह पुरस्कार वित्तीय स्थिति को स्थिर रखने और आर्थिक नीतियों को समझने में अहम योगदान देने वाले शोध को सम्मानित करता है. किस काम के लिए मिला पुरस्कार? रॉबर्ट ई हॉल और माइकल वुडफोर्ड को मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरीकरण के माइक्रोइकॉनॉमिक आधार पर काम करने के लिए चुना गया है. आसान भाषा में समझें तो इसका संबंध इस बात से है कि लोगों और कंपनियों के फैसले पूरी वित्तीय स्थिति को कैसे प्रभावित करते हैं. महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन और केंद्रीय बैंक जो नीतियां बनाते हैं, उन्हें समझने में इस तरह का शोध मदद करता है. केंद्रीय बैंकों को मिलेगा फायदा पुरस्कार समिति के अध्यक्ष जॉन हैसलर के मुताबिक, दोनों अर्थशास्त्रियों के काम ने ऐसे मॉडल के लिए मजबूत सैद्धांतिक आधार दिया है, जिनका इस्तेमाल आज दुनिया भर के केंद्रीय बैंक और प्रशासनें करती हैं. इनकी मदद से आर्थिक झटकों का सामना करने के लिए बेहतर नीतियां बनाई जा सकती हैं. गौरतलब है कि इकोनॉमिक्स का नोबेल पुरस्कार पहली बार 1969 में दिया गया था. यह अल्फ्रेड नोबेल के मूल पांच पुरस्कारों में शामिल नहीं था, बल्कि स्वीडन के केंद्रीय बैंक ने इसकी शुरुआत की थी. क्या है इकोनॉमिक्स का नोबेल पुरस्कार? इकोनॉमिक्स का नोबेल पुरस्कार अर्थशास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले लोगों को दिया जाता है. इसका आधिकारिक नाम अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में स्वेरिगेस रिक्सबैंक अर्थशास्त्र पुरस्कार है. दूसरे नोबेल पुरस्कारों की तरह इसकी भी दुनिया भर में खास पहचान है. ये भी पढ़ें: मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार कार्ल डिसेरोथ, पीटर हेगमैन और जॉर्ज नेगल को दिए जाने की घोषणा The post Nobel Prize 2026: रॉबर्ट ई हॉल और माइकल वुडफोर्ड को मिला 2026 इकोनॉमिक्स नोबेल पुरस्कार appeared first on Naya Vichar.

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top