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Author name: Vinod Jha

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बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा! 6 लाख की डील, OMR खेल और फर्जी दस्तावेज का खुलासा

Bihar Police Recruitment Exam (संवाददाता- गया जी/भभुआ/सासाराम/नवादा): केंद्रीय चयन परिषद (सिपाही भर्ती) द्वारा आयोजित मद्यनिषेध सिपाही, कक्षपाल और चलंत दस्ता सिपाही पदों की लिखित परीक्षा के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और कदाचार का मामला सामने आया है. विभिन्न केंद्रों से हाइटेक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, जाली दस्तावेज और ओएमआर शीट से छेड़छाड़ के आरोप में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य सरगनाओं की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है. गया जी में छह लाख की सेटिंग का खुलासा, नालंदा में छापेमारी गया जी के रामरुचि बालिका स्कूल परीक्षा केंद्र से ब्लूटूथ डिवाइस के साथ पकड़े गये परीक्षार्थी प्रिंस कुमार ने पुलिसिया पूछताछ में एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है. नालंदा जिले के कोरई गांव निवासी प्रिंस ने स्वीकार किया कि उसने परीक्षा पास करने के लिए छह लाख रुपये में सेटिंग की थी. इस स्पोर्ट्स का मुख्य सूत्रधार नालंदा के खुंदुपुर गांव निवासी अमित कुमार उर्फ अर्जुन है. गया पुलिस ने नालंदा में अमित के घर पर छापेमारी की. पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह फरार हो गया. पुलिस ने उसकी मां और बहन से घंटों पूछताछ की है. आधार कार्ड में छेड़छाड़ कर दोबारा परीक्षा दे रहा शातिर भभुआ में गिरफ्तार भभुआ के सरदार वल्लभ भाई पटेल महाविद्यालय में तैनात दंडाधिकारी अमन कुमार राय की शिकायत पर पुलिस ने एक शातिर युवक रवि कुमार को गिरफ्तार किया है. गया जिले के वजीरगंज का रहनेवाला रवि कुमार अपने मूल आधार कार्ड में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से छेड़छाड़ कर दोबारा परीक्षा में शामिल हो रहा था. जांच में पता चला कि वह इससे पूर्व 14 जून को आरा (भोजपुर) के आरबीएस स्कूल में नाम बदलकर परीक्षा दे चुका था. कोचस में हाइटेक उपकरणों के साथ गिरोह का सदस्य दबोचा रोहतास जिले के कोचस थाना क्षेत्र में पुलिस ने वाहन चेकिंग के दौरान परीक्षा में फर्जीवाड़ा कराने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग कैमूर जिले में परीक्षा केंद्र की ओर जा रहे हैं. महात्मा गांधी चौक पर जब एक संदिग्ध लग्जरी कार को रोका गया, तो उसका मुख्य सरगना नंदकिशोर पासवान (निवासी बेतिया) भीड़ का फायदा उठाकर भाग निकला, जबकि पश्चिम चंपारण के भुंटुन कुमार को पुलिस ने दबोच लिया. कार की तलाशी लेने पर एक काले बैग से दो वॉकी-टॉकी, तीन ब्लूटूथ डिवाइस, चार बुकलेट, तीन चार्जर, माइक रिसीवर, कनेक्टर और दो मोबाइल फोन सहित भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किये गये. नवादा में ओएमआर की कार्बन कॉपी लेकर परीक्षार्थी फरार नवादा के एसकेएम महाविद्यालय परीक्षा केंद्र पर एक परीक्षार्थी राहुल कुमार परीक्षा समाप्त होने के बाद ओएमआर शीट की मूल प्रति तो जमा कर दी, लेकिन उसकी कार्बन कॉपी लेकर फरार हो गया. कक्ष वीक्षक सतेंद्र प्रसाद की सूचना पर केंद्राधीक्षक ने नगर थाने में लिखित शिकायत दर्ज करायी है. पुलिस मामले की जांच कर रही है कि कार्बन कॉपी ले जाने के पीछे क्या मंशा थी. Also Read: गया जी में सिपाही से साइबर ठगी, डॉक्टर के यहां नंबर लगाने के नाम पर खाते से उड़ाए 1.89 लाख रुपये The post बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा! 6 लाख की डील, OMR स्पोर्ट्स और फर्जी दस्तावेज का खुलासा appeared first on Naya Vichar.

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‘अंडा हमले’ का डर या ‘रेकी’ की आशंका, ममता बनर्जी के आवास पर क्यों खड़ी हुई नीली दीवार!

खास बातें जब घर के ठीक बाहर कुणाल घोष पर बरसे अंडे, हिल गया सुरक्षा महकमा ममता के घर के सामने हुए हमले से सुरक्षा अधिकारी परेशान सौगत रॉय से लेकर अभिषेक बनर्जी तक बने निशाना Mamata Banerjee Residence Blue Fences: रेकी की भी थी आशंका ममता के घर की रेकी की आयी थी शिकायत Mamata Banerjee Residence Blue Fences: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद उभरा जन-आक्रोश अब राजनेताओं के लिए सिरदर्द बन चुकी है. सूबे में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बड़े-बड़े दिग्गजों पर हाल के दिनों में अंडों से हुए हमलों (Egg Attacks) ने सुरक्षा एजेंसियों को भी परेशान कर दिया है. लोगों के गुस्से से प्रदेश की सबसे बड़ी नेता ममता बनर्जी को बचाने के लिए उनके कोलकाता के कालीघाट स्थित आवास पर अभूतपूर्व सुरक्षा प्रबंध किये गये हैं. जब घर के ठीक बाहर कुणाल घोष पर बरसे अंडे, हिल गया सुरक्षा महकमा ममता बनर्जी के आवास के चारों ओर रातोंरात ऊंची-ऊंची नीली रंग की फेंसिंग (सुरक्षा दीवार) कर दी गयी, ताकि सड़क से कोई उपद्रवी घर के भीतर ‘अंडे’ या कोई अन्य अवांछित वस्तु न फेंक सके. यह फैसला सोमवार को हुई एक सनसनीखेज घटना के बाद लिया गया. तृणमूल कांग्रेस के नेता और बेलेघाटा के पूर्व विधायक कुणाल घोष (Kunal Ghosh) जब ममता बनर्जी से मिलकर उनके घर से बाहर निकले, तो गुस्साये लोगों ने उन पर कच्चे अंडे फेंके थे. ममता के घर के सामने हुए हमले से सुरक्षा अधिकारी परेशान इस घटना ने पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे आला अधिकारियों को परेशान कर दिया. अधिकारियों को लगा कि अगर इतनी सुरक्षा के बीच ऐसी घटना हो सकती है, तो आगे कोई बड़ी चूक भी हो सकती है. इसलिए आनन-फानन में पूरे आंगन और परिसर को ऊंची नीली फेंसिंग से घेर दिया गया. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें सौगत रॉय से लेकर अभिषेक बनर्जी तक बने निशाना बंगाल में सत्ता बदलने के बाद जनता ने विरोध और गुस्से का इजहार करने के लिए ‘कच्चे अंडों’ को हथियार बना लिया है. सौगत रॉय और अभिषेक बनर्जी जैसे दिग्गज तृणमूल नेता भी ‘अंडा हमले’ का शिकार हो चुके हैं. Mamata Banerjee Residence Blue Fences: रेकी की भी थी आशंका प्रशासनिक सूत्रों की मानें, तो इस ऊंची फेंसिंग के पीछे सिर्फ अंडों से बचाव का ही एकमात्र कारण नहीं है. रणनीतिक और सुरक्षा कारण भी हैं. 4 मई को प्रशासन बदलने के बाद हरीश चटर्जी स्ट्रीट पर स्थित इस वीवीआईपी लेन से पुलिस के कड़े पहरे और बैरिकेड्स को हटा दिया गया था. इससे यह सड़क आम जनता के लिए पूरी तरह खुल गयी थी. ममता के घर की रेकी की आयी थी शिकायत रास्ता खुलने के बाद कोई भी राहगीर आसानी से घर पर नजर रख सकता था कि ममता बनर्जी से मिलने कौन से नेता और व्यवसायी आ-जा रहे हैं. हाल ही में ममता के घर की संदिग्ध रेकी (Recce) की सनसनीखेज शिकायत भी सामने आयी थी. इसे भी पढ़ें बंगाल में ‘सुरक्षा’ पर संग्राम! ममता बनर्जी की पसंद के बॉडीगार्ड्स को शुभेंदु प्रशासन ने हटाया, डेरेक ओब्रायन बोले- रात भर बिना सुरक्षा के थीं दीदी ममता बनर्जी के घर से वापस बुलाये गये सभी सुरक्षा गार्ड, पुलिस चौकी पूरी तरह खाली The post ‘अंडा हमले’ का डर या ‘रेकी’ की आशंका, ममता बनर्जी के आवास पर क्यों खड़ी हुई नीली दीवार! appeared first on Naya Vichar.

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राज्यसभा चुनाव: प्रणव झा की हार के बाद कांग्रेस में बौखलाहट, बोले के राजू – आरजेडी और माले ने हमें दिया धोखा

रांची से आनंद मोहन की रिपोर्ट Rajya Sabha Election: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजे गुरुवार 18 जून 2026 को घोषित कर दिए गए. चुनाव में झामुमो समर्थित उम्मीदवार बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी ने जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा. नतीजों के सामने आते ही महागठबंधन के भीतर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. प्रणव झा की हार पर के राजू का बड़ा आरोप कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के राजू ने सहयोगी दलों राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और भाकपा माले पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि आरजेडी और माले के विधायकों ने कांग्रेस के साथ धोखा किया है, जिसकी वजह से पार्टी समर्थित उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सके. के राजू का कहना है कि अगर गठबंधन के सभी सहयोगी दल पूरी मजबूती के साथ साथ खड़े रहते, तो परिणाम अलग हो सकता था. उनके इस बयान ने राज्य की नेतृत्व में नई बहस को जन्म दे दिया है. दीपिका पांडेय सिंह ने भी उठाए सवाल कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने भी प्रणव झा की हार के लिए आरजेडी और माले को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि महागठबंधन की मजबूती का दावा करने वाले सहयोगी दलों को अपने रुख को स्पष्ट करना चाहिए. दीपिका पांडेय के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने इंडिया गठबंधन के भीतर असहजता बढ़ा दी है. नेतृत्वक जानकारों का मानना है कि इस विवाद का असर भविष्य में गठबंधन की रणनीति पर भी पड़ सकता है. बैजनाथ राम और परिमल नथवानी ने दर्ज की जीत 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में हुए मतदान में झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम को सबसे अधिक 31 वोट मिले और वह राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे. दूसरी सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी ने जीत दर्ज की. परिमल नथवानी को कुल 30 वोट मिले थे, लेकिन इनमें से दो मत रद्द कर दिए गए. इस तरह उन्हें 28 वैध वोट प्राप्त हुए. वहीं, कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 20 वोट मिले, जिनमें एक वोट अमान्य घोषित कर दिया गया. कुल 81 मतों में तीन वोट रद्द हुए. अंतिम गणना में बैजनाथ राम को 31 और परिमल नथवानी को 28 वैध वोट मिले, जबकि प्रणव झा केवल 19 वैध वोटों तक ही सीमित रह गए. महागठबंधन के पास थे 56 विधायक झारखंड विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थन है. इनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, आरजेडी के चार और भाकपा माले के दो विधायक शामिल हैं. संख्या बल के लिहाज से गठबंधन मजबूत स्थिति में था और कांग्रेस को उम्मीद थी कि वह दोनों सीटों पर जीत दर्ज कर लेगा. लेकिन चुनाव परिणाम ने इन दावों को झटका दे दिया. अब कांग्रेस नेताओं के आरोपों के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या महागठबंधन के भीतर सबकुछ ठीक है या फिर राज्यसभा चुनाव ने अंदरूनी मतभेदों को उजागर कर दिया है. इसे भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव: बैजनाथ राम और परिमल नथवाणी ने मार ली बाजी, बिखर गया महागठबंधन का कुनबा परिणाम के बाद बढ़ सकती है नेतृत्वक खींचतान राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने झारखंड की नेतृत्व में नए समीकरणों और संभावित खींचतान के संकेत दे दिए हैं. कांग्रेस नेताओं द्वारा सहयोगी दलों पर लगाए गए आरोपों के बाद आने वाले दिनों में महागठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर और बयानबाजी देखने को मिल सकती है. फिलहाल, चुनावी हार के बाद कांग्रेस जवाब तलाशने में जुटी हुई है और सहयोगी दलों की भूमिका पर सवाल खड़े कर रही है. इसे भी पढ़ें: कौन हैं बैजनाथ राम, जिन्होंने झारखंड से जीता राज्यसभा चुनाव? The post राज्यसभा चुनाव: प्रणव झा की हार के बाद कांग्रेस में बौखलाहट, बोले के राजू – आरजेडी और माले ने हमें दिया धोखा appeared first on Naya Vichar.

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राज्यसभा चुनाव: ZPM उम्मीदवार के लालतलुआंगकिमा जीते, पहली बार उच्च सदन पहुंची पार्टी

Mizoram Rajya Sabha Election: मिजोरम की एकमात्र राज्यसभा सीट पर हुए चुनाव में सत्तारूढ़ जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) के उम्मीदवार के. लालतलुआंगकिमा ने शानदार जीत दर्ज की है. इस जीत के साथ ही जेडपीएम ने इतिहास रच दिया है, क्योंकि यह पहला अवसर है जब पार्टी का कोई प्रतिनिधि संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में पहुंचेगा. गुरुवार को घोषित चुनाव परिणाम में लालतलुआंगकिमा ने विपक्षी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) की उम्मीदवार जोथानसांगी ह्मार को हराकर सीट अपने नाम की. 26 वोट हासिल कर दर्ज की जीत विधानसभा सचिव एवं निर्वाचन अधिकारी जोथानसांगा राल्ते के अनुसार, राज्यसभा चुनाव में कुल 36 वोट पड़े, जिनमें से के. लालतलुआंगकिमा को 26 मत मिले. वहीं, एमएनएफ उम्मीदवार जोथानसांगी ह्मार को उनकी पार्टी के सभी 10 विधायकों का समर्थन मिला और उन्हें कुल 10 वोट प्राप्त हुए. जेडपीएम के पास विधानसभा में स्पष्ट बहुमत होने के कारण शुरुआत से ही लालतलुआंगकिमा की जीत लगभग तय मानी जा रही थी. पहली बार राज्यसभा में पहुंचेगी जेडपीएम के. लालतलुआंगकिमा की जीत केवल एक चुनावी सफलता नहीं है, बल्कि जेडपीएम के नेतृत्वक सफर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी है. पार्टी पहली बार राज्यसभा में अपना प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने में सफल रही है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर उसकी मौजूदगी और मजबूत होगी. तीन विधायकों ने नहीं किया मतदान राज्यसभा चुनाव के दौरान तीन विधायकों ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया. इनमें बीजेपी के विधायक के. बेइचहुआ और के. हराहमो के अलावा कांग्रेस के एकमात्र विधायक सी. न्गुनलिआनचुंगा शामिल हैं. कांग्रेस विधायक सी. न्गुनलिआनचुंगा ने पहले ही साफ कर दिया था कि उन्होंने पार्टी आलाकमान के निर्देश के अनुसार मतदान से दूरी बनाई. वहीं, भाजपा के मीडिया संयोजक जॉनी लालथानपुइया ने बताया कि पार्टी के दोनों विधायकों ने भी राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाला. स्वास्थ्य कारणों से वोट नहीं डाल सके एक विधायक निर्वाचन अधिकारी जोथानसांगा राल्ते ने बताया कि विधायक डब्ल्यू. छुआनावमा स्वास्थ्य संबंधी कारणों की वजह से मतदान नहीं कर सके. इस प्रकार कुल 40 सदस्यीय विधानसभा में से 36 विधायकों ने मतदान किया, जबकि चार सदस्य वोटिंग प्रक्रिया से बाहर रहे. The post राज्यसभा चुनाव: ZPM उम्मीदवार के लालतलुआंगकिमा जीते, पहली बार उच्च सदन पहुंची पार्टी appeared first on Naya Vichar.

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कौन हैं बैजनाथ राम, जिन्होंने झारखंड से जीता राज्यसभा चुनाव?

Rajya Sabha Election: झारखंड के पूर्व मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के वरिष्ठ नेता बैजनाथ राम ने राज्यसभा चुनाव में जीत हासिल कर संसद के उच्च सदन में अपनी जगह बना ली है. लातेहार की नेतृत्व से निकलकर राज्य स्तर और अब राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचने वाले बैजनाथ राम का सफर संघर्ष, दल बदल और कई नेतृत्वक उतार-चढ़ाव से होकर गुजरा है. लातेहार के एक साधारण परिवार से आते हैं बैजनाथ राम बैजनाथ राम लातेहार शहर के शहीद चौक स्थित धोबी मुहल्ला के निवासी हैं. उनका जन्म वर्ष 1967 में लातेहार प्रखंड के परसही गांव में हुआ था. शुरुआती शिक्षा उन्होंने अपने गांव में ही प्राप्त की. इसके बाद मैट्रिक और इंटरमीडिएट की पढ़ाई बालक उच्च विद्यालय, लातेहार से पूरी की. उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने लातेहार के बनवारी साहू महाविद्यालय में प्रवेश लिया और नेतृत्वक शास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की. छात्र जीवन से ही सामाजिक और नेतृत्वक गतिविधियों में उनकी रुचि रही. तीन वर्षों तक शिक्षक के रूप में किया काम शिक्षा पूरी करने के बाद बैजनाथ राम ने लातेहार शहर स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दीं. लगभग तीन वर्षों तक उन्होंने अध्यापन का कार्य किया. हालांकि, वर्ष 2000 में झारखंड के अलग राज्य बनने के साथ ही उन्होंने नौकरी छोड़कर सक्रिय नेतृत्व में कदम रखने का फैसला किया. यह फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ. एक शिक्षक के रूप में बच्चों को पढ़ाने वाले बैजनाथ राम ने नेतृत्व को अपना नया कार्यक्षेत्र बनाया और जल्द ही जनता के बीच अपनी पहचान स्थापित कर ली. जेडीयू के टिकट पर पहली बार बने विधायक झारखंड गठन के बाद वर्ष 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में बैजनाथ राम ने जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के टिकट पर लातेहार विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा. पहली ही बार में उन्हें जीत मिली और वे विधायक बन गए. प्रशासन में उन्हें स्पोर्ट्स मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई. इसके बाद उन्होंने मद्य निषेध मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के रूप में भी काम किया. मंत्री के तौर पर उन्होंने राज्य प्रशासन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और अपनी प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया. बीजेपी में शामिल होकर बने शिक्षा मंत्री वर्ष 2005 में बैजनाथ राम ने जेडीयू का साथ छोड़कर हिंदुस्तानीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया. बीजेपी के टिकट पर उन्होंने एक बार फिर लातेहार विधानसभा सीट से जीत दर्ज की. प्रशासन में उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया गया. शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने राज्य की शैक्षणिक व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर काम किया. हालांकि, वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में उन्हें राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी प्रकाश राम के हाथों हार का सामना करना पड़ा. टिकट कटने के बाद बीजेपी छोड़कर पहुंचे जेएमएम वर्ष 2014 का विधानसभा चुनाव बैजनाथ राम ने नहीं लड़ा. इसके बाद 2019 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में वे जुटे हुए थे और बीजेपी से टिकट मिलने की उम्मीद कर रहे थे. लेकिन पार्टी ने उनका टिकट काटते हुए प्रकाश राम को उम्मीदवार बना दिया. इस फैसले के बाद बैजनाथ राम ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया और झारखंड मुक्ति मोर्चा में शामिल हो गए. जेएमएम में शामिल होने के बाद उन्होंने संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई और पार्टी नेतृत्व का भरोसा भी हासिल किया. इसे भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव: दो पार्टियों के वो छह विधायक, जो बताए जा रहे ‘गेमचेंजर’! अब राज्यसभा पहुंचकर मिली नई जिम्मेदारी जेएमएम के टिकट पर राज्यसभा चुनाव जीतने के साथ ही बैजनाथ राम के नेतृत्वक जीवन में एक नया अध्याय जुड़ गया है. एक शिक्षक से विधायक, मंत्री और अब सांसद बनने तक का उनका सफर झारखंड की नेतृत्व में उनकी लंबी सक्रियता और अनुभव को दर्शाता है. लातेहार की नेतृत्व में कई उतार-चढ़ाव देखने वाले बैजनाथ राम अब राज्यसभा में झारखंड का प्रतिनिधित्व करेंगे. उनकी जीत को जेएमएम के लिए नेतृत्वक मजबूती के रूप में भी देखा जा रहा है. संसद के उच्च सदन में पहुंचने के बाद अब उनसे राज्य के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने की अपेक्षा की जा रही है. इसे भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव: बैजनाथ राम और परिमल नथवाणी ने मार ली बाजी, बिखर गया महागठबंधन का कुनबा The post कौन हैं बैजनाथ राम, जिन्होंने झारखंड से जीता राज्यसभा चुनाव? appeared first on Naya Vichar.

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कौन हैं कांग्रेस को पटखनी देने वाले परिमल नथवाणी? जानिए मुकेश अंबानी के ‘राइट हैंड’ की कहानी

Jharkhand Rajya Sabha Election, रांची: झारखंड में 2 सीटों के लिए हुए राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रहे कयासों का बाजार अब पूरी तरह खत्म हो चुका है. दो बार झारखंड से राज्यसभा सांसद रहे परिमल नथवाणी ने एक बार फिर जीत का सेहरा पहना है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि परिमल नाथवाणी कौन हैं, जिन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को हरा दिया? क्या वे सिर्फ एक अच्छे नेतृत्वज्ञ हैं या फिर एक बड़े बिजनेसमैन? अगर हम उनके करियर पर नजर डालें तो वे एक शानदार ऑलराउंडर की तरह नजर आते हैं, जिन्होंने हर क्षेत्र में अपना बड़ा योगदान दिया है. दरअसल, वे रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) में कॉर्पोरेट अफेयर्स (Corporate Affairs) के डायरेक्टर हैं. रिलायंस के मालिक मुकेश अंबानी के वे बेहद करीबी और उनके सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक माने जाते हैं. रिलायंस के कई बड़े प्रोजेक्ट्स, खासकर गुजरात के जामनगर में बनी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी के जमीनी काम को संभालने में इनकी मुख्य भूमिका रही है. लगातार तीन बार पहुंचे हैं राज्यसभा परिमल नथवाणी न केवल बिजनेस मैन हैं बल्कि नेतृत्व के भी शानदार खिलाड़ी हैं. यही वजह है कि वे लंबे समय तक राज्यसभा से सांसद भी रहे हैं. उनकी खास बात ये है कि वे हर दल के लोगों के साथ में अच्छा तालमेल बनाकर के रखते हैं. यही कारण है कि वे झारखंड से ही लगातार दो बार राज्यसभा पहुंचे थे. साल 2008 में वे पहली बार और फिर 2014 में झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा पहुंचे, जिसमें उन्हें सभी प्रमुख दलों (जेएमएम, भाजपा और कांग्रेस) का समर्थन प्राप्त था. केवल झारखंड से ही नहीं बल्कि वे आंध्र प्रदेश से भी राज्यसभा जा चुके हैं. साल 2020 में वे वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे थे. Also Read: चार घंटे तक अटकी रहेगी सबकी जान, विधानसभा में स्पोर्ट्सा होगा या बिदक जाएगा घोड़ा? क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में भी बनाई है पहचान नेतृत्व और बिजनेस के अलावा परिमल नथवाणी का स्पोर्ट्स प्रशासन में भी बड़ा नाम है. वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के पूर्व उपाध्यक्ष (Vice President) रह चुके हैं. अहमदाबाद के विश्व प्रसिद्ध ‘नरेंद्र मोदी स्टेडियम’ (मोटेरा स्टेडियम) के पुनर्निर्माण और उसे दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम बनाने के प्रोजेक्ट में उनका बहुत बड़ा योगदान था. वन्यजीव संरक्षण के लिए भी करते हैं काम परिमल नथवाणी अपने करियर में वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ा काम किये हुए हैं. जानकारी के मुताबिक गुजरात के गिर जंगलों में पाए जाने वाले एशियाई शेरों (Asiatic Lions) के संरक्षण के लिए भी वे काफी काम करते हैं. वे गिर राष्ट्रीय उद्यान के विकास और शेरों की सुरक्षा को लेकर अक्सर आवाज उठाते रहते हैं. Also Read: राज्यसभा चुनाव: मतगणना से पहले राधाकृष्ण किशोर का दावा, प्रणव झा को मिलेंगे 28.97 वोट The post कौन हैं कांग्रेस को पटखनी देने वाले परिमल नथवाणी? जानिए मुकेश अंबानी के ‘राइट हैंड’ की कहानी appeared first on Naya Vichar.

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रूस पर भारी पड़ रहा यूक्रेन! ड्रोन हमले से दहला मॉस्को, तेल रिफाइनरी बनी निशाना

Russia Ukraine War: यूक्रेन ने एक बार फिर रूस की राजधानी मॉस्को को निशाना बनाते हुए बड़ा ड्रोन हमला किया है. रूसी अधिकारियों के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार किए गए इस हमले में मॉस्को की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया. हमले के कारण राजधानी के कई हवाई अड्डों पर वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन भी रोकना पड़ा. चार साल से अधिक समय से जारी युद्ध के दौरान इसे यूक्रेन के सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक माना जा रहा है. रूस ने 555 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराने का दावा किया रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने रात भर में यूक्रेन की ओर से भेजे गए 555 ड्रोन को नष्ट कर दिया. मंत्रालय के अनुसार, इनमें से लगभग 200 ड्रोन मॉस्को की ओर बढ़ रहे थे, जिन्हें राजधानी तक पहुंचने से पहले ही रोक लिया गया. रूस का कहना है कि हाल के महीनों में यूक्रेन ने रूसी सैन्य और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाते हुए ड्रोन हमलों की संख्या बढ़ा दी है. मॉस्को तेल रिफाइनरी पर गिरे कई ड्रोन मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने बताया कि शहर के दक्षिण-पूर्वी बाहरी इलाके में स्थित मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर कई ड्रोन गिरे. हालांकि अधिकारियों ने तत्काल किसी बड़े नुकसान या हताहत की जानकारी नहीं दी, लेकिन घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया. रिफाइनरी रूस की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, इसलिए इस हमले को रणनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है. हमले के बाद मॉस्को के चार हवाई अड्डों पर उड़ानें रोकी गईं रूसी परिवहन मंत्रालय के अनुसार, सुरक्षा कारणों से मॉस्को के चार प्रमुख हवाई अड्डों से उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया. ड्रोन हमले के कारण हवाई यातायात प्रभावित हुआ और कई उड़ानों में देरी हुई. रूस में हाल के महीनों में ड्रोन हमलों के बाद हवाई अड्डों पर संचालन रोकने की घटनाएं बढ़ी हैं. यूक्रेन के हमले के बाद जेलेंस्की ने क्या कहा? रूस पर हमले के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर कहा कि कल रात, हमारे लंबी दूरी के हमलों ने एक बार फिर मॉस्को इलाके को निशाना बनाया. इस हफ्ते दूसरी बार मॉस्को की ऑयल रिफाइनरी पर हमला हुआ है. रोस्तोव इलाके और यूक्रेन के अस्थायी रूप से कब्जे वाले इलाकों में भी ठिकानों को निशाना बनाया गया. यह हमारे शहरों और समुदायों पर रूस के हमलों का पूरी तरह से जायज जवाब है, और रूस की युद्ध मशीन को चलाने वाले ठिकानों के खिलाफ हमारे सैनिकों की कार्रवाई का एक और अहम नतीजा है. Last night, our long-range sanctions once again reached the Moscow region – for the second time this week, the Moscow oil refinery was hit. Targets were also struck in the Rostov region and in temporarily occupied territories of Ukraine. This is a fully justified response to… pic.twitter.com/NhFl4FlT9L — Volodymyr Zelenskyy / Володимир Зеленський (@ZelenskyyUa) June 18, 2026 जेलेंस्की ने ट्रंप और मैक्रों से की बातचीत रूस पर यूक्रेन का हमला ऐसे समय हुआ है जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ अहम बैठकें और वार्ता की है. जेलेंस्की ने कहा कि यह बातचीत यूक्रेन के लिए बेहद अहम रही और इससे युद्ध की दिशा में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है. उन्होंने यह भी बताया कि फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान विश्व नेताओं ने यूक्रेन को भविष्य में भी हरसंभव समर्थन देने का भरोसा दिया है. जी-7 देशों ने दोहराया यूक्रेन के समर्थन का संकल्प फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि हाल के दिन यूक्रेन के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं क्योंकि जी-7 देश एक बार फिर उसके समर्थन में एकजुट दिखाई दिए हैं. मैक्रों ने कहा कि सहयोगी देश यूक्रेन को सैन्य और रणनीतिक सहायता देना जारी रखेंगे, ताकि वह अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर सके और रूस के खिलाफ प्रभावी जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम हो. कजान में आसियान नेताओं की मेजबानी कर रहे हैं पुतिन इसी बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मॉस्को से लगभग 700 किलोमीटर पूर्व स्थित कजान शहर में दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) के नेताओं की मेजबानी कर रहे हैं. रूस इस मंच के जरिए एशियाई देशों के साथ व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की कोशिश में लगा है. क्रेमलिन के विदेश मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव के अनुसार, दो दिवसीय बैठक में रूस और आसियान देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर चर्चा की जाएगी. कौन-कौन से देश हैं आसियान के सदस्य? आसियान (ASEAN) दक्षिण पूर्व एशिया का एक प्रमुख क्षेत्रीय संगठन है. इसके सदस्य देशों में ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमा, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, पूर्वी तिमोर और वियतनाम शामिल हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच जारी है जंग रूस और यूक्रेन के बीच चार सालों से ज्यादा समय से जंग जारी है. पहले विश्वयुद्ध से ज्यादा लंबी यह लड़ाई खिंच चुकी है. एक ओर यूक्रेन अपने हमलों की पहुंच बढ़ा रहा है, वो रूस के बुनियादी ढांचों पर अब टारगेट कर रहा है. वहीं रूस भी अपनी सुरक्षा और सैन्य प्रतिक्रिया को मजबूत करने में जुटा है. Also Read: ट्रंप का बड़ा यू-टर्न, बोले- ईरान के पास कुछ बैलिस्टिक मिसाइलें होनी चाहिए, समझौते के बाद बदले सुर The post रूस पर भारी पड़ रहा यूक्रेन! ड्रोन हमले से दहला मॉस्को, तेल रिफाइनरी बनी निशाना appeared first on Naya Vichar.

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राज्यसभा चुनाव: बैजनाथ राम और परिमल नथवाणी ने मार ली बाजी, बिखर गया महागठबंधन का कुनबा

रांची से आनंद मोहन की रिपोर्ट Rajya Sabha Election: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार 18 जून 2026 को हुए चुनाव के साथ पिछले करीब दो सप्ताह से जारी नेतृत्वक उठापटक और सस्पेंस पर विराम लग गया. कड़े मुकाबले के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी ने जीत दर्ज की. इस परिणाम के साथ ही राज्य की नेतृत्व में महागठबंधन की एकजुटता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं. नतीजों ने बदल दिया नेतृत्वक समीकरण 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में हुए मतदान में झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम को सबसे अधिक 31 वोट मिले और वह आसानी से राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे. दूसरी सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी ने जीत हासिल की. परिमल नथवानी को कुल 30 वोट प्राप्त हुए थे, लेकिन इनमें से दो मत रद्द कर दिए गए. यानी उन्हें कुल 28 वोट मिले. वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को 20 वोट मिले, जिनमें एक वोट अमान्य घोषित कर दिया गया. कुल 81 वोटों में से तीन मत रद्द हुए. इस तरह अंतिम गणना में बैजनाथ राम को 31 और परिमल नथवानी को 28 वैध वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार जीत से दूर रह गए. परिमल नथवानी की जीत ने बढ़ाई महागठबंधन की मुश्किलें राज्यसभा चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन के नेताओं द्वारा दोनों सीटों पर जीत का दावा किया जा रहा था. कांग्रेस और झामुमो के नेताओं का कहना था कि गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और क्रॉस वोटिंग की कोई संभावना नहीं है. लेकिन चुनाव परिणामों ने इन दावों की पोल खोल दी. परिमल नथवानी की जीत के बाद यह साफ हो गया कि महागठबंधन के भीतर कहीं न कहीं नेतृत्वक दरार मौजूद थी. यही वजह रही कि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा अपेक्षित समर्थन जुटाने में असफल रहे और दूसरी सीट उनके हाथ से निकल गई. कौन हैं परिमल नथवानी परिमल नथवानी देश के प्रमुख उद्योग समूह रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े हुए हैं और लंबे समय से झारखंड की नेतृत्व में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. वह लगातार दो बार झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं. उन्होंने वर्ष 2008 में पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा का चुनाव जीता था. इसके बाद 2014 में भी उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल कर संसद के उच्च सदन में अपनी जगह बरकरार रखी. अब तीसरी बार उन्होंने राज्यसभा पहुंचने में सफलता प्राप्त की है. शिक्षक से सांसद तक का सफर तय करने वाले बैजनाथ राम झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम का नेतृत्वक सफर संघर्ष और कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. लातेहार के शहीद चौक स्थित धोबी मुहल्ला के निवासी बैजनाथ राम का जन्म वर्ष 1967 में लातेहार प्रखंड के परसही गांव में हुआ था. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त की और बाद में बालक उच्च विद्यालय, लातेहार से मैट्रिक और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद बनवारी साहू महाविद्यालय से नेतृत्वक शास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की. नेतृत्व में आने से पहले उन्होंने सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में लगभग तीन वर्षों तक शिक्षक के रूप में काम किया. लेकिन वर्ष 2000 में झारखंड राज्य गठन के बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर नेतृत्व को अपना पूर्णकालिक कार्यक्षेत्र बना लिया. कई दलों का सफर तय कर पहुंचे राज्यसभा बैजनाथ राम ने वर्ष 2000 में जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर पहली बार लातेहार विधानसभा सीट से जीत हासिल की और बाद में स्पोर्ट्स मंत्री, मद्य निषेध मंत्री तथा स्वास्थ्य मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले. वर्ष 2005 में वह भाजपा में शामिल हुए और शिक्षा मंत्री बने. हालांकि, बाद के वर्षों में नेतृत्वक परिस्थितियां बदलीं और टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने भाजपा छोड़कर झामुमो का दामन थाम लिया. अब झामुमो के उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा चुनाव जीतकर उन्होंने अपने लंबे नेतृत्वक अनुभव में एक और उपलब्धि जोड़ ली है. इसे भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव: दो पार्टियों के वो छह विधायक, जो बताए जा रहे ‘गेमचेंजर’! झारखंड की नेतृत्व में नए संकेत राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने यह संकेत दे दिया है कि झारखंड की नेतृत्व में आने वाले दिनों में नए समीकरण बन सकते हैं. एक ओर बैजनाथ राम ने झामुमो के खाते में सीट बरकरार रखी, वहीं परिमल नथवानी की जीत ने महागठबंधन की एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आने वाले समय में इन परिणामों का असर राज्य की नेतृत्व और गठबंधन की रणनीति पर भी देखने को मिल सकता है. इसे भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस के धीरज साहू का दावा, झारखंड में इस बार नहीं हुई क्रॉस वोटिंग The post राज्यसभा चुनाव: बैजनाथ राम और परिमल नथवाणी ने मार ली बाजी, बिखर गया महागठबंधन का कुनबा appeared first on Naya Vichar.

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आखिर क्यों 102 दिन बाद भी 26 साल के आकाश का अंतिम संस्कार करने के लिए परिवार नहीं हुआ राजी?

Police Custody Death : तमिलनाडु के मानमदुरै के रहने वाले वाले आर आकाश डेलिसन का अंतिम संस्कार 17 जुलाई को कोर्ट के आदेश पर प्रशासनी अधिकारियों ने कर दिया. उसके परिवार वाले उसकी मौत के 102 दिन बाद भी उसके अंतिम संस्कार के लिए राजी नहीं थे. उनका कहना था कि पुलिस कस्टडी में उसके साथ इतना अमानवीय व्यवहार हुआ कि उसकी मौत हो गई. मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के निर्देश पर हुआ अंतिम संस्कार आकाश का शव एक प्रशासनी अस्पताल की मॉर्चरी में रखा हुआ था. उसके परिवार वालों का कहना था कि उन्होंने उसके शव का अंतिम संस्कार इसलिए नहीं किया, क्योंकि वे उसे सबूत के तौर पर रखना चाहते थे. कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि शव को अनिश्चितकाल के लिए मॉर्चरी में नहीं रखा जा सकता. कोर्ट का आदेश 16 जुलाई को सामने आया, उसके बाद 17 को आकाश का अंतिम संस्कार हुआ. Madurai, Tamil Nadu | Manamadurai Akash Death Case The body of 26‑year‑old R. Aakash of Manamadurai, whose death sparked allegations of custodial torture and protests, was cremated at Thathaneri crematorium in Madurai after 102 days in the mortuary. Police carried out the… pic.twitter.com/xjmbn0GVhi — ANI (@ANI) June 17, 2026 6 मार्च को हुई थी आकाश की गिरफ्तारी आकाश की गिरफ्तारी 6 मार्च को हुई थी. उसपर हत्या की कोशिश का आरोप था. पुलिस का कहना था कि उसने हिरासत से भागने की कोशिश की और एक पुल से छलांग लगाने के दौरान उसे गंभीर रूप से चोट लग गई, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई. हालांकि परिवार वालों का यह कहना है कि उसे पुलिस हिरासत में इतनी यातना दी गई की उसकी मौत हुई. आकाश ने अस्पताल में अपनी मौत से पहले एक ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने यह बयान दिया था उसके साथ पुलिस हिरासत में अमानवीय व्यवहार हुआ और बुरी तरह से उसकी पिटाई हुई थी. ये भी पढ़ें : RSS ने खुद को रजिस्टर्ड संगठन क्यों नहीं बनाया है? 100 साल बाद क्यों उठा ये सवाल संजय राउत का दावा-50-50 करोड़ में खरीदे जा रहे हैं सांसद, 15 करोड़ दिया एडवांस, बौखलाहट में मीडिया के सामने दी गाली The post आखिर क्यों 102 दिन बाद भी 26 साल के आकाश का अंतिम संस्कार करने के लिए परिवार नहीं हुआ राजी? appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल में ‘सुरक्षा’ पर संग्राम! ममता बनर्जी की पसंद के बॉडीगार्ड्स को शुभेंदु सरकार ने हटाया, डेरेक ओब्रायन बोले- रात भर बिना सुरक्षा के थीं दीदी

खास बातें मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मिले दीदी के करीबी ममता गुट के नेता बोले- नेतृत्वक प्रतिशोध की भावना का नया निचला स्तर ममता बनर्जी को खतरे में डालने की सोची-समझी कोशिश : टीएमसी Mamata Banerjee Security Row: AITC ने चीफ मिनिस्टर शुभेंदु अधिकारी पर साधा निशाना डेरेक ओब्रायन बोले- रात भर दीदी के घर के बाहर नहीं था कोई सुरक्षाकर्मी सागरिका घोष बोलीं- पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी Mamata Banerjee Security Row: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद से घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं. नया मामला ममता बनर्जी की सुरक्षा से जुड़ा है. दीदी के करीबी सांसद दावा कर रहे हैं कि बंगाल की नयी प्रशासन राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रही है. वहीं, समाचार यह भी है कि ममता बनर्जी मनपसंद सुरक्षा अधिकारी चाहती हैं और शुभेंदु अधिकारी प्रशासन ने इस मांग को खारिज कर दिया है. इसके बाद से ममता बनर्जी के करीबी नेताओं ने बंगाल की हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रशासन पर हमला तेज कर दिया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मिले दीदी के करीबी दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात अधिकारियों को हटाकर नये अफसरों की तैनाती की गयी है. इससे ममता बनर्जी और उनकी पार्टी दोनों नाराज हैं. ममता के करीबी नेताओं ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात कर बंगाल की पूर्व चीफ मिनिस्टर के मनपसंद अधिकारियों को सुरक्षा में लगाये जाने का आग्रह किया, जिसे सीएम ने खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि पुलिस जिस अधिकारी को चाहे, पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा में लगा सकती है. उन्हें अपनी पसंद का अधिकारी नहीं मिलेगा. ममता गुट के नेता बोले- नेतृत्वक प्रतिशोध की भावना का नया निचला स्तर तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा में लंबे समय से तैनात सुरक्षाकर्मियों को हटाये जाने का आरोप लगाते हुए बृहस्पतिवार को इसे ‘नेतृत्वक प्रतिशोध की भावना का नया निचला स्तर’ करार दिया. ममता बनर्जी को ‘जेड’ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है. लगातार 15 साल तक पश्चिम बंगाल पर शासन करने वाली पूर्व चीफ मिनिस्टर की सुरक्षा-व्यवस्था से किसी कर्मी को हटाये जाने या उसकी जगह किसी अन्य को तैनात किये जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. इसे भी पढ़ें : तृणमूल के बागी सांसद बोले- हमेशा रहेगा ममता बनर्जी का सम्मान, शुभेंदु प्रशासन और दिल्ली कनेक्शन पर खोला बड़ा राज ममता बनर्जी को खतरे में डालने की सोची-समझी कोशिश : टीएमसी तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा- ममता बनर्जी की सुरक्षा में लंबे समय से तैनात कर्मियों को हटाना कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि उन्हें अलग-थलग करने और खतरे में डालने की सोची-समझी कोशिश है. पार्टी ने कहा कि इनमें से कुछ सुरक्षाकर्मी बनर्जी के रेल मंत्री रहने के समय से उनकी सुरक्षा में तैनात थे. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें Mamata Banerjee Security Row: AITC ने चीफ मिनिस्टर शुभेंदु अधिकारी पर साधा निशाना तृणमूल ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर निशाना साधते हुए कहा- नेतृत्वक प्रतिशोध की भावना का चौंकाने वाला और निचला स्तर. शुभेंदु अधिकारी, आखिर आप क्या साजिश रच रहे हैं? बदले की नेतृत्व को लेकर आपकी सनक और असुरक्षा की भावना से प्रेरित होकर आपके द्वारा सत्ता का दुरुपयोग करना आपके वास्तविक चरित्र को उजागर करता है. अगर ओछी नेतृत्व का कोई चेहरा होता, तो वह निस्संदेह आपके जैसा होता. डेरेक ओब्रायन बोले- रात भर दीदी के घर के बाहर नहीं था कोई सुरक्षाकर्मी नेताओं के लगातार पार्टी छोड़ने के बीच पूर्व मुख्यमंत्री के वफादार सांसदों में शामिल तृणमूल नेता एवं राज्यसभा सदस्य डेरेक ओब्रायन ने कहा- ममता बनर्जी की सुरक्षा में 20 वर्ष से तैनात निजी सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) को उनके कोलकाता स्थित आवास से हटा दिया गया. उन्होंने दावा किया कि बुधवार रात उनके कालीघाट स्थित आवास के प्रवेश द्वार पर कोई सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं था. इसे भी पढ़ें : टीएमसी में बगावत पर वर्ल्ड मीडिया ने लिखा- अदम्य योद्धा का दुखद नेतृत्वक अंत सागरिका घोष बोलीं- पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल की एक अन्य राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष ने ‘एक्स’ पर लिखा- पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा नेतृत्व का विषय नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल प्रशासन की संस्थागत जिम्मेदारी है. घोष ने इसे ‘बदले की नेतृत्व’ बताते हुए सवाल किया- दीदी की सुरक्षा में लंबे समय से तैनात कर्मियों को अचानक क्यों हटा दिया गया और क्या देर रात उन्हें सुरक्षा के बिना रखा गया? इसे भी पढ़ें ममता बनर्जी के घर से वापस बुलाये गये सभी सुरक्षा गार्ड, पुलिस चौकी पूरी तरह खाली ममता बनर्जी से छिन जायेगा तृणमूल का सिंबल! दीदी के करीबी अरूप बोले- बंगाल में स्पोर्ट्सा होबे The post बंगाल में ‘सुरक्षा’ पर संग्राम! ममता बनर्जी की पसंद के बॉडीगार्ड्स को शुभेंदु प्रशासन ने हटाया, डेरेक ओब्रायन बोले- रात भर बिना सुरक्षा के थीं दीदी appeared first on Naya Vichar.

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