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Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

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Hyundai के ये मॉडल्स हुए सस्ते, कंपनी दे रही ₹1.05 लाख तक बचाने का मौका

Hyundai Motor Company ने मई 2026 के लिए अपनी पूरी रेंज पर शानदार ऑफर्स का ऐलान किया है. कंपनी अलग-अलग मॉडल्स पर ग्राहकों को करीब ₹1.05 लाख तक की बचत करने का मौका दे रही है. इन ऑफर्स में कैश डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस, स्क्रैपेज बेनिफिट्स, अपग्रेड ऑफर्स और कॉर्पोरेट डिस्काउंट शामिल हैं. हालांकि, कंपनी ने इसी महीने से अपनी कारों की कीमतों में करीब 1% तक बढ़ोतरी करने का भी ऐलान किया है. Hyundai Creta Hyundai Creta पर इस महीने सबसे ज्यादा फायदा मिल रहा है. इस पर कंपनी करीब ₹1.05 लाख तक की छूट दे रही है. यह मिड साइज SUV अपने सेगमेंट की बेस्ट-सेलिंग कारों में शामिल है. इसमें कई इंजन ऑप्शन्स, फीचर-लोडेड केबिन और बेहतर सर्विस नेटवर्क का फायदा मिलता है. इसकी कीमत ₹10.79 लाख से ₹20.05 लाख के बीच है और इसका मुकाबला Kia Seltos, Maruti Grand Vitara, Toyota Hyryder, Honda Elevate, Skoda Kushaq और Volkswagen Taigun से है. Hyundai Grand i10 Nios Grand i10 Nios पर लगभग ₹80,000 तक के बेनिफिट्स मिल रहे हैं. यह एंट्री-लेवल हैचबैक आसान ड्राइविंग और कम्फर्ट के लिए जानी जाती है. इसकी कीमत ₹5.55 लाख से ₹8.03 लाख के बीच है और यह Maruti Suzuki Swift और Tata Tiago को टक्कर देती है. Hyundai Alcazar Hyundai Alcazar पर पेट्रोल वेरिएंट्स में ₹75,000 तक और डीजल वेरिएंट्स में ₹45,000 तक का डिस्काउंट मिल रहा है. यह SUV प्रीमियम इंटीरियर और आरामदायक राइड के लिए जानी जाती है, हालांकि इसकी थर्ड-रो स्पेस थोड़ी सीमित है. इसकी कीमत ₹14.50 लाख से ₹21.06 लाख के बीच है और यह Tata Safari, MG Hector और Mahindra XUV700 से मुकाबला करती है. Hyundai Creta Electric Creta Electric पर ₹70,000 तक का फायदा मिल रहा है. यह इलेक्ट्रिक SUV दमदार परफॉर्मेंस, अच्छी रेंज और फीचर-रिच केबिन के साथ आती है. इसकी कीमत ₹18.02 लाख से ₹23.82 लाख के बीच है और इसका मुकाबला MG ZS EV और Tata Harrier EV जैसे मॉडल्स से है. Hyundai i20 Hyundai i20 पर ₹65,000 तक का डिस्काउंट मिल रहा है. यह प्रीमियम हैचबैक बेहतर स्पेस, कम्फर्ट और फीचर्स के लिए जानी जाती है. इसकी कीमत ₹5.99 लाख से ₹11.53 लाख के बीच है और यह Maruti Suzuki Baleno, Toyota Glanza और Tata Altroz से मुकाबला करती है. Hyundai Verna Hyundai Verna पर ₹55,000 तक के ऑफर्स मिल रहे हैं. यह सेडान अपने टर्बो-पेट्रोल इंजन और फीचर-लोडेड केबिन के लिए जानी जाती है. इसकी कीमत ₹10.98 लाख से ₹18.25 लाख के बीच है और इसका मुकाबला Honda City, Skoda Slavia और Volkswagen Virtus से है. Hyundai Exter Hyundai Exter पर पुराने स्टॉक पर ₹40,000 तक और नए स्टॉक पर ₹35,000 तक की छूट मिल रही है. यह माइक्रो SUV फीचर्स और रिफाइंड इंजन के लिए जानी जाती है. इसकी कीमत ₹5.80 लाख से ₹9.42 लाख के बीच है और यह Tata Punch को टक्कर देती है. Hyundai Aura Hyundai Aura के पेट्रोल वेरिएंट पर ₹15,000 तक और CNG वेरिएंट पर ₹10,000 तक का डिस्काउंट मिल रहा है. यह कॉम्पैक्ट सेडान आरामदायक ड्राइव और रिफाइंड इंजन के लिए जानी जाती है. इसकी कीमत ₹6 लाख से ₹8.54 लाख के बीच है और इसका मुकाबला Maruti Dzire और Honda Amaze से है. यह भी पढ़ें: Honda Amaze, City और Elevate पर बंपर डिस्काउंट, ₹2.12 लाख तक बचाने का मौका The post Hyundai के ये मॉडल्स हुए सस्ते, कंपनी दे रही ₹1.05 लाख तक बचाने का मौका appeared first on Naya Vichar.

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समय रैना ने उड़ाया सुनील पाल का मजाक, विवाद बढ़ा तो कॉमेडियन ने दिया करारा जवाब

द ग्रेट इंडियन कपिल शो के हालिया एपिसोड में समय रैना और रणवीर अल्लाहबादिया नजर आए. इंडिया गॉट लेटेंट के बाद पहली बार दोनों साथ किसी शो में साथ दिखे. यहां कपिल के साथ उनका हंसी-मजाक वाला अंदाज देखा गया. हालांकि जैसी ही कॉमेडियन सुनील पाल की एंट्री हुई, समय रैना ने उनपर पर कई हल्के-फुल्के तंज कसे, जिन पर वहां मौजूद लोग हंसते नजर आए. हालांकि सोशल मीडिया पर नेटिजन्स को यह रास नहीं आया और उन्हें यह अपमानजनक लगा. अब सुनील पाल ने इस मुद्दे पर सफाई दी. क्या बोले सुनील पाल सुनील पाल ने एचटी टाइम्स संग बात करते हुए सफाई दी. उन्होंने कहा कि मैंने इसे अपमान के रूप में नहीं लिया. उनके अनुसार यह एक कॉमेडी शो है, जहां एक-दूसरे की टांग खींचना फॉर्मेट का हिस्सा होता है. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने भी समय पर जवाबी मजाक किए थे और यह सब मंच की जरूरत के हिसाब से था. समय से नहीं है कोई दुश्मनी- सुनील पाल सुनील ने आगे क्लियर किया कि अगर यही बातें किसी गंभीर माहौल में होतीं तो शायद उनका रिएक्शन अलग होता, लेकिन कॉमेडी की दुनिया में बड़े से बड़ा स्टार भी मजाक का हिस्सा बनता है. उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें पहले से पता था कि समय शो में आने वाले हैं और उनके बीच कोई निजी दुश्मनी नहीं है. समय रैना ने सुनील पाल को क्या कहा पहले तो समय रैना कहा कि उन्हें सुनील से सिर्फ एक शिकायत है कि वह ठीक से दांत साफ नहीं करते. वहीं एक और कमेंट में उन्होंने उन्हें दस में से एक नंबर देने की बात कही. चप्पल पहनकर प्रीमियर में आने वाले सवाल पर भी समय ने चुटकी ली और कहा कि जुता तो इनको पड़ा जाता है किसी से. यह भी पढ़ें- पवन के बाद फिर अक्षरा सिंह की जिंदगी में आई नई मोहब्बत, स्पेशल वन को लेकर कही ये बात The post समय रैना ने उड़ाया सुनील पाल का मजाक, विवाद बढ़ा तो कॉमेडियन ने दिया करारा जवाब appeared first on Naya Vichar.

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TVK की चली आंधी, तमिलनाडु में केवल एक वोट से हार गया ये दिग्गज

तमिलनाडु की नेतृत्व में बड़ा उलटफेर तब देखने को मिला, जब डीएमके के वरिष्ठ नेता और सहकारिता मंत्री के.आर. पेरियाकरुप्पन तिरुप्पत्तूर सीट से सिर्फ एक वोट से हार गए. इतनी करीबी हार ने सबको हैरान कर दिया और यह चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया. निर्वाचन आयोग के अनुसार, तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के उम्मीदवार सीनिवास सेतुपति आर. ने 83,375 मत हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि डीएमके के पेरियाकरुप्पन 83,374 मतों के साथ महज एक वोट से पीछे रह गए. यह मुकाबला बेहद रोमांचक मोड़ पर खत्म हुआ. पहले पेरियाकरुप्पन 30 मतों से आगे थे, लेकिन आखिरी गणना में टीवीके उम्मीदवार बाजी मार ले गए. वहीं, हिंदुस्तानीय जनता पार्टी के के.सी. तिरुमरन 29,054 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे. सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी TVK मंत्री की ये हार दिखाती है कि विजय की TVK ने कितना बड़ा असर डाला है. पहली बार चुनाव लड़कर ही पार्टी 108 सीटें जीत गई और तमिलनाडु की पुरानी दो-ध्रुवीय नेतृत्व को हिला दिया, साथ ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. तिरुप्पत्तूर का यह परिणाम हिंदुस्तान के चुनावी इतिहास के सबसे करीबी मुकाबलों में दर्ज हो गया है, जो यह दिखाता है कि लोकतंत्र में हर एक मत कितनी निर्णायक भूमिका निभाता है. विजय की टीवीके ने शानदार प्रदर्शन किया तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय के नेतृत्व वाली टीवीके ने एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) को पछाड़ते हुए 108 सीट हासिल की. इस चुनाव में DMK मात्र 59 सीट में ही जीत हासिल कर सकी. यहां विधानसभा चुनाव के तहत 23 अप्रैल को मतदान हुए थे और मतगणना 4 मई को हुई. विपक्षी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIDMK) ने 47 सीट जीतीं, जबकि उसकी सहयोगी पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) को चार सीट और बीजेपी के अलावा अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम (एएमएमके) को क्रमशः एक-एक सीट मिली. यह भी पढ़ें : प्रशासन कैसे बनेगी? तमिलनाडु में विजय की TVK के पास हैं ये ऑप्शन DMK के सहयोगी दलों में से कांग्रेस ने पांच सीट जीतीं, जबकि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), हिंदुस्तानीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और वीसीके ने दो-दो सीट जीतीं. डीएमडीके को राज्य की कुल 234 विधानसभा सीट में से एक सीट मिली. The post TVK की चली आंधी, तमिलनाडु में केवल एक वोट से हार गया ये दिग्गज appeared first on Naya Vichar.

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बिहार में 11वीं में एडमिशन की पहली लिस्ट जारी, OFSS वेबसाइट पर करें चेक

Bihar 11th Admission 2026: बिहार बोर्ड ने इंटर (11वीं) में एडमिशन लेने वाले छात्रों के लिए बड़ी अपडेट जारी कर दी है. सत्र 2026-28 के लिए OFSS सिस्टम के जरिए पहली मेरिट लिस्ट जारी हो चुकी है. जिन छात्रों ने आवेदन किया था, अब उनके लिए सबसे जरूरी काम है अपना नाम चेक करना और समय पर एडमिशन लेना. कब से कब तक होगा एडमिशन? पहली मेरिट लिस्ट के आधार पर एडमिशन की प्रक्रिया 05 मई 2026 से शुरू हो गई है. छात्रों को 12 मई 2026 तक अपने दिए गए स्कूल या कॉलेज में जाकर नामांकन कराना होगा. इसके बाद स्कूलों को 13 मई 2026 तक सभी एडमिशन की जानकारी ऑनलाइन अपडेट करनी होगी. Bihar 11th Admission 2026: ऐसे चेक करें मेरिट लिस्ट अगर आपको जानना है कि आपका नाम किस कॉलेज में आया है, तो ये आसान स्टेप्स फॉलो करें: सबसे पहले OFSS की ऑफिशियल वेबसाइट- ofssbihar.net पर जाएं. वहां First Selection List वाले लिंक पर क्लिक करें. अपना बारकोड नंबर और मोबाइल नंबर डालें. स्क्रीन पर आपका इंटीमेशन लेटर आ जाएगा. इसे डाउनलोड करके प्रिंट निकाल लें. BSEB ने दी अपडेट #BSEB #BiharBoard #Bihar #OFSS #INTER_ADMISSION pic.twitter.com/kbcBjsaQu0 — Bihar School Examination Board (@officialbseb) May 5, 2026 स्लाइड-अप का फायदा कैसे मिलेगा? कई बार छात्रों को पहली लिस्ट में पसंद का कॉलेज नहीं मिलता. ऐसे में Slide-up ऑप्शन काम आता है. लेकिन ध्यान रखें, इसके लिए पहले आपको दिए गए कॉलेज में एडमिशन लेना जरूरी है. अगर आप एडमिशन नहीं लेते हैं, तो आपका नाम आगे की प्रक्रिया से हट सकता है. अगर आपका नाम पहली मेरिट लिस्ट में नहीं आया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. आप 12 मई 2026 तक अपने विकल्प बदल सकते हैं या नए कॉलेज जोड़ सकते हैं. इसके बाद अगली मेरिट लिस्ट में आपको मौका मिल सकता है. अगर आपको एडमिशन या मेरिट लिस्ट से जुड़ी कोई परेशानी हो रही है, तो आप हेल्पलाइन नंबर 0612-2230009, 0612-2230051 पर संपर्क कर सकते हैं. यह भी पढ़ें: छात्रों के लिए बड़ी राहत, IGNOU ने फिर बढ़ाई असाइनमेंट जमा करने की डेडलाइन The post बिहार में 11वीं में एडमिशन की पहली लिस्ट जारी, OFSS वेबसाइट पर करें चेक appeared first on Naya Vichar.

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पश्चिम बंगाल में शपथ ग्रहण 9 को, मुख्यमंत्री का नाम तय करने कोलकाता आ रहे हैं अमित शाह और राजनाथ सिंह

Table of Contents भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व की नजर मुख्यमंत्री पद के लिए कई दावेदार West Bengal Election Result: नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का लक्ष्य पूरा हो चुका है, लेकिन इस बार बंगाल का मुख्यमंत्री कौन होगा. इस बारे में लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही हैं. अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान पहले ही घोषणा कर दी थी कि बंगाल का ही कोई मूल निवासी भाजपा का मुख्यमंत्री बनेगा. ऐसे में भाजपा ने बिना मुख्यमंत्री के ही चुनाव लड़ा था. इस बार बंगाल के चुनाव के बाद भाजपा किसे मुख्यमंत्री चुनेगी, इस पर काफी चर्चा हो रही है. कई नामों पर भी चर्चा हो रही है. ऐसे में भाजपा का शीर्ष नेतृत्व आज पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का फैसला करने के लिए कोलकाता रवाना हो सकता है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने बताया कि बंगाल में रविंद्र नाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर शपथ ग्रहण 9 मई को कोलकाता में होगा. भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व की नजर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की एक टीम दिल्ली से आ सकती है. राजनाथ सिंह को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. इस बीच, आज सुबह 11 बजे केंद्रीय मंत्रिमंडल की पूर्व निर्धारित बैठक है. समाचार है कि राजनाथ सिंह इस बैठक के बाद कोलकाता के लिए रवाना हो सकते हैं. अमित शाह का भी कोलकाता आने का कार्यक्रम है. जानकारी मिली है कि राजनाथ विधायकों के साथ संसदीय दल की बैठक में शामिल होंगे. इसके अलावा, मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के चयन के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में संसदीय बोर्ड की बैठक दिल्ली में होनी है. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें मुख्यमंत्री पद के लिए कई दावेदार पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में सबसे ज्यादा चर्चा में शुभेंदु अधिकारी का नाम आ रहा है. वे अब तक विपक्ष के नेता रहे हैं. इस चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर जैसे दो महत्वपूर्ण केंद्रों से जीत हासिल की है. इतना ही नहीं, उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक बार फिर हराया है. ऐसे में पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में उनका नाम सबसे पहले सामने आ रहा है. इस सूची में दिलीप घोष का नाम भी शामिल है. वे खड़गपुर सदर से चुनाव लड़ रहे हैं. स्वपन दासगुप्ता का नाम भी सूची में है. शामिक भट्टाचार्य का नाम भी सामने आ रहा है. Also Read: बंगाल चुनाव: आरएसएस के फिडबैक से आसान हुई भाजपा की राह, परिणाम में दिखा असर The post पश्चिम बंगाल में शपथ ग्रहण 9 को, मुख्यमंत्री का नाम तय करने कोलकाता आ रहे हैं अमित शाह और राजनाथ सिंह appeared first on Naya Vichar.

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सरकार कैसे बनेगी? तमिलनाडु में विजय की TVK के पास हैं ये ऑप्शन

तमिलनाडु चुनाव 2026 के नतीजों ने सबको चौंका दिया. अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जो कई लोगों के लिए बड़ी सरप्राइज रही. TVK सबसे बड़ी पार्टी तो बन गई, लेकिन 118 के बहुमत से 10 सीट पीछे रह गई. वह 108 सीटें ही जीत पाई. वहीं डीएमके गठबंधन को 73 सीटें मिलीं, जबकि एनडीए 53 सीटों के साथ काफी पीछे तीसरे नंबर पर रहा. इन तीनों के अलावा बाकी किसी भी पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली. TVK अकेले चुनाव लड़ रही थी. किसी भी पार्टी या गठबंधन को बहुमत नहीं मिला, तो अब सवाल उठ रहा है कि तमिलनाडु में आगे क्या होगा? क्या विजय 1967 के बाद पहले गैर-DMK और गैर-AIADMK मुख्यमंत्री बनेंगे? वे किसके साथ मिलकर प्रशासन बनाएंगे, यही अब सबसे बड़ा सवाल है. TVK अपने साथ छोटी पार्टियों को ला सकती है विजय और उनकी TVK के पास प्रशासन बनाने का एक रास्ता ये हो सकता है कि वे DMK गठबंधन के छोटे दलों को अपने साथ ले आएं. बहुमत के लिए उन्हें 10 विधायकों की जरूरत है, जबकि DMK के सहयोगी दलों के पास कुल 14 सीटें हैं. समाचारों के मुताबिक, कांग्रेस के कुछ नेता पहले से TVK के साथ आने के पक्ष में थे और उसके 5 विधायक समर्थन दे सकते हैं. वहीं CPI और CPI(M) के 2-2 विधायक भी साथ आ जाएं तो आंकड़ा और मजबूत हो जाएगा. ऐसे में बस एक और विधायक की जरूरत पड़ेगी, जो Viduthalai Chiruthaigal Katchi (VCK) से मिल सकता है. विपक्षी नेतृत्व पर पड़ेगा ये असर इस प्लान की सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि इसका असर देश की बड़ी विपक्षी नेतृत्व पर पड़ेगा. अगर कांग्रेस और बाकी दल राज्य में DMK का साथ छोड़ देते हैं, तो सवाल उठेगा कि क्या DMK फिर भी INDIA गठबंधन में बना रहेगा या नहीं. यह भी पढ़ें : Video : 116 नारियल फोड़कर टीवीके प्रमुख विजय की जीत का जश्न, देखें खास सेलिब्रेशन का वीडियो DMK+ गठबंधन TVK को समर्थन देगा क्या? दूसरा रास्ता ये हो सकता है कि पूरा DMK+ गठबंधन TVK को समर्थन दे दे, जिससे विजय आसानी से मुख्यमंत्री बन सकते हैं. आंकड़ों के हिसाब से भी ये संभव है और नेतृत्व के लिहाज से भी ठीक बैठता है. इससे राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा, बल्कि TVK के जुड़ने से वो और मजबूत ही होगा. लेकिन क्या DMK इसके लिए तैयार है? अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है. विजय कई बार DMK को अपना सीधा नेतृत्वक प्रतिद्वंदी बता चुके हैं और खुलकर निशाना भी साधा है. क्या AIADMK देगी साथ? एक और तरीका ये हो सकता है कि AIADMK, TVK को समर्थन देकर प्रशासन बनवाए. लेकिन अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है. उल्टा, दोनों पार्टियों के बयानों से यही लगता है कि TVK और AIADMK के साथ आने की संभावना फिलहाल काफी कम है. सीनियर AIADMK नेता सी. पोन्नैयन पहले ही कह चुके हैं कि पार्टी TVK के किसी भी गठबंधन प्रस्ताव को ठुकरा देगी. हालांकि ये बयान मतगणना के दौरान आया था, इसलिए आगे रुख बदलने की गुंजाइश पूरी तरह खत्म नहीं मानी जा रही है.   The post प्रशासन कैसे बनेगी? तमिलनाडु में विजय की TVK के पास हैं ये ऑप्शन appeared first on Naya Vichar.

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पश्चिम बंगाल में कौन होगा मुख्यमंत्री, नाम तय करने कोलकाता आ रहे अमित शाह और राजनाथ सिंह

Table of Contents भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व की नजर मुख्यमंत्री पद के लिए कई दावेदार West Bengal Election Result: नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का लक्ष्य पूरा हो चुका है, लेकिन इस बार बंगाल का मुख्यमंत्री कौन होगा. इस बारे में लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही हैं. अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान पहले ही घोषणा कर दी थी कि बंगाल का ही कोई मूल निवासी भाजपा का मुख्यमंत्री बनेगा. ऐसे में भाजपा ने बिना मुख्यमंत्री के ही चुनाव लड़ा था. इस बार बंगाल के चुनाव के बाद भाजपा किसे मुख्यमंत्री चुनेगी, इस पर काफी चर्चा हो रही है. कई नामों पर भी चर्चा हो रही है. ऐसे में भाजपा का शीर्ष नेतृत्व आज पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का फैसला करने के लिए कोलकाता रवाना हो सकता है. भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व की नजर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की एक टीम दिल्ली से आ सकती है. राजनाथ सिंह को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. इस बीच, आज सुबह 11 बजे केंद्रीय मंत्रिमंडल की पूर्व निर्धारित बैठक है. समाचार है कि राजनाथ सिंह इस बैठक के बाद कोलकाता के लिए रवाना हो सकते हैं. अमित शाह का भी कोलकाता आने का कार्यक्रम है. जानकारी मिली है कि राजनाथ विधायकों के साथ संसदीय दल की बैठक में शामिल होंगे. इसके अलावा, मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के चयन के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में संसदीय बोर्ड की बैठक दिल्ली में होनी है. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें मुख्यमंत्री पद के लिए कई दावेदार पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में सबसे ज्यादा चर्चा में शुभेंदु अधिकारी का नाम आ रहा है. वे अब तक विपक्ष के नेता रहे हैं. इस चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर जैसे दो महत्वपूर्ण केंद्रों से जीत हासिल की है. इतना ही नहीं, उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक बार फिर हराया है. ऐसे में पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में उनका नाम सबसे पहले सामने आ रहा है. इस सूची में दिलीप घोष का नाम भी शामिल है. वे खड़गपुर सदर से चुनाव लड़ रहे हैं. स्वपन दासगुप्ता का नाम भी सूची में है. शामिक भट्टाचार्य का नाम भी सामने आ रहा है. Also Read: बंगाल चुनाव: आरएसएस के फिडबैक से आसान हुई भाजपा की राह, परिणाम में दिखा असर The post पश्चिम बंगाल में कौन होगा मुख्यमंत्री, नाम तय करने कोलकाता आ रहे अमित शाह और राजनाथ सिंह appeared first on Naya Vichar.

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ध्रुवीकरण की बदली धारा, नये सितारे का उदय और वेंटिलेटर पर वामपंथ

Election Results 2026 : बंगाल में अंतत: स्पोर्ट्सा हो ही गया. अभूतपूर्व परिणाम. ध्रुवीकरण के स्पोर्ट्स में हिंदू वोटरों का पलड़ा भारी. एसआइआर का प्रभाव. तृणमूल के अतिवाद, उग्र कार्यशैली और तुष्टीकरण की पराकाष्ठा की हार. डेमोग्राफिक बदलाव के दुष्परिणामों पर बंगाल के लोगों की प्रचंड प्रतिक्रिया. नतीजा-पहली बार बांग्ला में भी अपनी कहानी लिखेगी भाजपा. पांच राज्यों के परिणाम के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं- 1) बंगाल में हुआ ऐतिहासिक बदलाव, 2) केरल में हार के साथ ही वामपंथी नेतृत्व का वेंटिलेटर पर पहुंचना, 3) तमिलनाडु में द्रविड़ नेतृत्व के लिए टीवीके के रूप में नयी चुनौती. इसके अलावा असम में भाजपा की लगातार तीसरी और पुडुचेरी में दूसरी जीत देश के मौजूदा मूड को दर्शाती हैं. सबसे बड़ी सीख, जो सभी दलों को लेनी चाहिए, वह यह है कि हमेशा अल्पसंख्यकों को ढाल बनाकर चुनावी पटकथा नहीं लिखी जा सकती. सकारात्मक राष्ट्रवाद, विकास और समावेशी नेतृत्व ही जीत का आधार होने चाहिए. सकारात्मक राष्ट्रवाद से तात्पर्य यह है कि देश को भाषा, क्षेत्रीयता और उत्पत्ति (जाति, वर्ण) के आधार पर भेदभाव और ऐसे हर पाखंड से बाहर आना होगा. यह सीख भाजपा के लिए भी उतनी ही जरूरी है, जितनी अन्य दलों के लिए. हार तो सिखाती है, लेकिन कई बार जीत से भी सीख लेनी चाहिए. लगातार संगठनात्मक सक्रियता, लोगों के बीच उपलब्धता ही आपको स्वीकार्यता दिलायेगी और विजयश्री भी. स्पष्टता के बावजूद पांच राज्यों के विधानसभा परिणामों ने कई प्रमुख प्रश्नों को जन्म दिया है, जिनका उत्तर जरूरी है. पढ़िए यह विश्लेषण, कुछ अलग शैली में – तृणमूल कांग्रेस की हार के प्रमुख कारण ममता बनर्जी के नेतृत्व में 15 साल पहले एक शुरुआत हुई थी. राज्य ने इसे वामदलों के अत्याचार से मुक्ति के रूप में देखा. लेकिन, धीरे-धीरे वामदलों के कार्यकर्ता तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का काडर बन गये और उनकी कार्यशैली पार्टी का मूल. चुनावी लाभ के लिए बांग्लादेशी घुसपैठ पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया. अतिवाद की नींव पड़ी. विरोध और विरोधी के दमन की नीति अपनायी गयी. नेतृत्वक हत्याएं आम हो गयीं. संदेशखाली से लेकर आरजी कर में नर्सिंग छात्रा के साथ दुष्कर्म जैसी घटनाओं ने सामाजिक आक्रोश का रूप ले दिया. घुसपैठियों के बढ़ते अतिक्रमण से आम बंगालियों का जीना दूभर था. ऐसे में सुरक्षाबलों की भारी तैनाती ने उन्हें बिना डरे वोट डालने का हौसला दिया. स्थानीय स्तर पर कट-मनी और सिंडिकेट सिस्टम के तहत वसूली ने उद्यमियों समेत पूरे समाज को भयाक्रांत कर रखा था. आंदोलन की जन्मभूमि रहे बंगाल को यह कैसे स्वीकार होता, इसलिए यह परिणाम. एसआइआर के जरिये घुसपैठिया भगाओ और हिंदुत्व फैक्टर कितने प्रभावी? बिहार के नेपाल और बंगाल से सटे इलाकों, बंगाल और पूरे उत्तर पूर्व में किस तरह घुसपैठिये बढ़े हैं, यह खुली आंखों से देखा जा सकता है. वोटर लिस्ट के स्पेशल इन्टेंसिव रिवीजन (एसआइआर) की चुनाव आयोग की नीति के चलते बंगाल में करीब 27 लाख वोटर्स वोटिंग प्रकिया में छंट गये और वोट नहीं डाल सके. सही हुआ या गलत, यह बहस का मुद्दा हो सकता है, लेकिन इनमें बड़ी संख्या में बंगलादेशी घुसपैठियों के होने का अनुमान है. इसका सीधा प्रभाव ममता का गढ़ मानी जाने वाली छह अल्पसंख्यक बहुल जिलों की 118 सीटों के नतीजों से नजर आता है. जहां पिछले चुनाव में इनमें 103 सीटें टीएमसी ने जीती थीं, वहीं इस बार यह घटकर 58 रह गयीं. जबकि भाजपा जिसे पिछली बार इन जिलों में सिर्फ 14 सीटों पर जीत मिली थी, इस बार 53 सीटें उसके खाते में आयीं. ममता के दूसरे गढ़ यानी दक्षिण चौबीस परगना में पिछली बार भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली थी, वहां इस बार 21 सीटें मिली हैं. इसके अलावा भाजपा संगठन की जमीनी रणनीति और मोदी-शाह की ताबड़तोड़ रैलियों ने वोटरों को बिना डरे वोट डालने का साहस दिया. यहां यह भी रोचक है कि एसटी की 100 प्रतिशत और एससी की 91 प्रतिशत सीटों पर भाजपा की जीत ने हिंदुत्व के वर्गीकरण की सीमाएं भी धूमिल कर दीं. जीत यह भी बताती है कि पांच लाख नये जेन-जी वोटरों ने भी पार्टी का साथ दिया. भाजपा के लिये जीत के मायने? 1977 से वाम दलों ने लगातार 34 वर्ष, फिर तृणमूल कांग्रेस ने पूरे 15 साल तक बंगाल में आधुनिक विकास की नेतृत्व को पनपने नहीं दिया. लेकिन, लगातार तीन टर्म की एंटी इन्कमबेंसी और टीएमसी के रवैये से जन्मे जनआक्रोश को भाजपा संगठन की सक्रियता ने अंतत: वोटों में बदल दिया. बिहार के बाद बंगाल जीतते ही 2029 के लोकसभा चुनावों की राह भी पार्टी के लिए आसान हो सकती है. बंगाल को जोड़ लें तो 22 राज्यों में भाजपा की प्रशासन होगी. इनमें कुल 396 लोकसभा सीटें हैं, जिनमें अकेले यूपी में 80, बिहार में 40 और प़श्चिम बंगाल की 42 सीटें हैं. महाराष्ट्र की 48, मध्यप्रदेश की 29 और गुजरात की 26 सीटें भी जोड़ लें तो समीकरण पार्टी के पक्ष में नजर आते हैं. राज्यसभा में मजबूती तो तय है. जीत से पश्चिम बंगाल को क्या उम्मीद है? 1960 के पहले बंगाल देश का औद्योगिक केंद्र था. देश के जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से अधिक थी. लेकिन, 1977 के बाद वाम दलों और टीएमसी के 49 साल के शासन में इस ढांचे में तेजी से गिरावट आयी. 2024 तक जीडीपी में हिस्सेदारी घटकर 5.6 प्रतिशत रह गयी. टाटा ने सिंगूर क्या छोड़ा, व्यावसायिक घरानों ने मानो राज्य से मुंह मोड़ लिया. 2019 से 2024 के बीच ही करीब 2200 एमएसएमइ यहां बंद हुईं. हालिया स्थिति यह है कि राज्य में प्रशासनी कर्मियों के वेतन के लाले पड़े हुए हैं. भाजपा प्रशासन बनने के बाद केंद्र का भरपूर सहयोग तय है, इसलिए अब विकास कार्यों में रुकावट नहीं आयेगी. केंद्र की तमाम फ्लैगशिप योजनाएं, जिन्हें ममता के शासन ने अवरुद्ध कर रखा था, अब निर्बाध रूप से चलेंगी. पार्टी को वोट मिलेंगे और प्रदेश को विकास. केरल में हार क्या वामपंथ का अंत है? इसे वामपंथ का अंत भले ही न समझा जाए, लेकिन यह संसदीय नेतृत्व में फिलहाल मृत्युशैया पर पहुंच गया है. देश में अपने खाते के इकलौते राज्य को गंवाते ही 50 साल में पहली बार लेफ्ट मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स से बाहर हो गया है. हालांकि, केरल में

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Video : 116 नारियल फोड़कर टीवीके प्रमुख विजय की जीत का जश्न, देखें खास सेलिब्रेशन का वीडियो

Video : आंध्र प्रदेश के तिरुमला में टीवीके प्रमुख विजय की जीत पर फैंस ने जश्न मनाया. फैंस ने मंदिर परिसर के अंदर 116 नारियल फोड़कर खुशी जताई और पार्टी की जीत को खास अंदाज में सेलिब्रेट किया. इसका वीडियो सामने आया है जिसे न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया है. वीडियो में नजर आ रहा है कि जमीन पर नारियल का ढेर पड़ा हुआ है. फैंस एक-एक करके नारियल को उठा रहे हैं और  जमीन पर पटककर तोड़ रहे हैं. आप भी देखें ये वीडियो. VIDEO | Tirumala, Andhra Pradesh: Fans of TVK chief Vijay celebrate the party’s victory in Tamil Nadu assembly elections by breaking 116 coconuts inside the temple premises.#TVK #Vijay #TamilNaduElectionResults2026 (Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/n3NQDo1saa — Press Trust of India (@PTI_News) May 5, 2026 तमिलनाडु में विजय की टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी एक्टर से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके ने 4 मई को तमिलनाडु के चुनावी इतिहास में एक तरह का रिकॉर्ड बनाते हुए सत्तारूढ़ डीएमके और उसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को उनके कोलाथुर निर्वाचन क्षेत्र में करारी शिकस्त दी. इसके बाद टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. वहीं, AIADMK तीसरे स्थान पर रही. 1967 में राज्य में पहली गैर-कांग्रेसी प्रशासन के सत्ता में आने के बाद से यह पहली बार है, जब दो द्रविड़ दलों के अलावा कोई अन्य पार्टी चुनाव में विजयी हुई. यह भी पढ़ें : तमिलनाडु में विजय की टीवीके बनी सबसे बड़ी पार्टी, बधाई देने पहुंचे ज्योतिष राधन पंडित, चुनाव से पहले दी थी सलाह The post Video : 116 नारियल फोड़कर टीवीके प्रमुख विजय की जीत का जश्न, देखें खास सेलिब्रेशन का वीडियो appeared first on Naya Vichar.

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विधायक बनीं दूसरे के घर झाड़ू-पोछा-बर्तन करने वाली कलिता माझी, BJP ने बंगाल में किया गजब परिवर्तन   

Kalita Majhi West Bengal MLA: 4 मार्च 2026 को पश्चिम बंगाल में नेतृत्वक परिवर्तन हो गया है. 15 साल के राज के बाद टीएमसी राज्य की सत्ता से बाहर हो गई है. 5 मार्च के सूर्योदय के साथ भाजपा का कमल पूरा खिल गया है. इस बार जनता ने स्पष्ट आदेश दिया, जिसमें नेतृत्व ही नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन भी दिखा. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में आम, सताए हुए और ममता की प्रशासन से त्रस्त जनता ने अपने ही जैसे लोगों को विधायक बनाया है. ऐसी ही दिलचस्प और प्रेरणादायक जीत हुई है कलिता माझी की. कोई भी पेशा छोटा नहीं होता. हम ऐसा बिल्कुल नहीं मानते, लेकिन समाज के कुछ अनकहे नियम हैं, जिसमें कुछ कामों को छोटा देखा जाता है. अपना घर चलाने के लिए दूसरे के घर शायद वही काम करते हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर हों. पश्चिम बंगाल को लेकर चुनाव से पहले (हां केवल सोशल मीडिया पर ही) ऐसी धारणा बनाई गई कि इस राज्य की स्त्रीएं देश के अन्य हिस्सों में मेड (दूसरे के घरों में काम करने वाली) हैं. तो! बंगाल ने क्या किया? ऐसी ही कामगार को अपनी विधायक बना लिया. टीएमसी कैंडिडेट को दी करारी शिकस्त महज 2,500 रुपये महीने कमाने वाली एक घरेलू कामगार से विधायक बनने तक का उनका सफर चर्चा का विषय बना है. माझी ने आउसग्राम सीट से जीत दर्ज करते हुए 1,07,692 वोट हासिल किए और टीएमसी के श्यामा प्रसन्न लोहार को 12,535 वोटों के अंतर से हराया. गुस्कारा नगरपालिका क्षेत्र की रहने वाली कलिता माझी नेतृत्व में आने से पहले चार घरों में घरेलू काम करती थीं. उनकी उम्मीदवारी शुरू से ही जमीनी जुड़ाव के कारण चर्चा में थी. सोशल मीडिया पर उनकी इस जीत, परिवार की स्थिति और संघर्ष की कहानी छाई हुई है. यह जीत साफ तौर पर सामाजिक-आर्थिक बदलाव की एक बड़ी मिसाल है.  बीजेपी सांसद बोले- ऐसा केवल हमारी पार्टी में संभव बीजेपी के सांसद पीसी मोहन ऐसी जीत केवल अपनी पार्टी में ही संभव होना बताया. सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा, ‘बीजेपी की बंगाल उम्मीदवार कलिता माझी, जो चार घरों में घरेलू काम करके महज 2,500 रुपये महीना कमाती हैं, ने आउसग्राम विधानसभा सीट से जीत हासिल की है. यह बीजेपी की उस ताकत को दर्शाता है, जहां एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी आगे बढ़कर एक प्रेरणादायक कहानी लिख सकता है.’  BJP Bengal candidate Kalita Majhi, who works as a domestic worker in 4 households and earns ₹2,500 a month, wins from the Ausgram constituency. This is the power of the BJP, where even the most humble citizen can rise and script a truly inspiring journey. pic.twitter.com/LVI4V9xSFU — P C Mohan (@PCMohanMP) May 4, 2026 पहले भी चुनाव लड़ चुकी हैं कलिता माझी इससे पहले कलिता माझी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में भी किस्मत आजमाई थी, लेकिन तब उन्हें तृणमूल कांग्रेस के अभेदनंद ठाकुर से 11,815 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था. इस बार फिर बीजेपी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया, जो सही साबित हुआ. ये भी पढ़ें:- बंगाल चुनाव: TMC का डेढ़ दशक पुराना किला ढहा, क्या हैं भाजपा की जीत के कारण ये भी पढ़ें:- सयानी घोष का गाना बना TMC की हार का कारण? उमा हिंदुस्तानी का तंज बीजेपी की बड़ी जीत ने बदला बंगाल बीजेपी की कलिता माझी के अलावा आरजी कर हॉस्पिटल की रेप पीड़िता ‘अभया’ की मां रत्ना देबनाथ, संदेशखाली में टीएमसी के स्ट्रांगमैन शाहजहां शेख की सताई हुई रेखा पात्रा ने भी जीत हासिल की है. जब बदलाव ऐसा है, तो जाहिर है भाजपा ने परिवर्तन जमीन पर उतार दिया है.  राज्य में शानदार प्रदर्शन करते हुए भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 206 सीटें जीत लीं. इस जीत के साथ ही पार्टी ने दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया और तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत कर दिया. ये भी पढ़ें:- कांग्रेस को बड़ा झटका, तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे चुनाव हारे ये भी पढ़ें:- कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने की पीएम मोदी और अमित शाह की तारीफ ममता भी हारीं अपनी सीट 1972 के बाद ऐसा पहली बार होने जा रहा है, जब राज्य और केंद्र में एक ही पार्टी की प्रशासन होगी. इस चुनाव में परिवर्तन का बड़ा उलटफेर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ भी हुआ. उन्हें भवानीपुर सीट से हार का सामना करना पड़ा. उन्हें बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने हरा दिया. पिछले चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था, इस बार भवानीपुर में भी कमल खिल गया है. हालांकि, इस बड़े बदलाव के बीच कलिता माझी की कहानी खास है. रसोई में काम करने से लेकर विधानसभा तक पहुंचने का उनका सफर लोकतंत्र की ताकत और जनता की बदलाव की ताकत की मिसाल है.  The post विधायक बनीं दूसरे के घर झाड़ू-पोछा-बर्तन करने वाली कलिता माझी, BJP ने बंगाल में किया गजब परिवर्तन    appeared first on Naya Vichar.

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