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Author name: Vinod Jha

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डिजिटल अरेस्ट से ऑनलाइन फ्रॉड तक: साइबर अपराध पर साथ आए 91 देश, UN की संधि से क्या बदलेगा

ऑनलाइन ठगी, डेटा चोरी, हैकिंग और इंटरनेट के जरिए होने वाले दूसरे अपराध किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं. अपराधी एक देश में बैठकर दूसरे देश के व्यक्ति या कंपनी को निशाना बना सकते हैं और डिजिटल सबूत किसी तीसरे देश में मौजूद सर्वर पर मिल सकता है. ऐसे मामलों में अलग-अलग देशों की कानून व्यवस्था के बीच तालमेल बड़ी चुनौती होती है. इसी चुनौती से निपटने के लिए हिंदुस्तान ने संयुक्त राष्ट्र के साइबर अपराध कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए हैं. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान इस कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए और उन्होंने इसे सुरक्षित डिजिटल भविष्य के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने वाला कदम बताया. समझते हैं कि UN कन्वेंशन क्या है और हिंदुस्तान डिजिटल भविष्य के लिए यह कितना कारगर है? और इसका आप पर क्या असर होगा ? UN साइबर क्राइम कन्वेंशन है क्या? संयुक्त राष्ट्र का यह कन्वेंशन साइबर अपराध से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग का एक साझा कानूनी ढांचा तैयार करता है. करीब पांच साल चली बातचीत के बाद तैयार हुआ यह पहला व्यापक वैश्विक साइबर अपराध कन्वेंशन है. जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 2024 में मंजूर किया था. इसका मकसद केवल हैकिंग जैसे अपराधों से निपटना नहीं है, बल्कि डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करके किए जाने वाले गंभीर अपराधों की जांच में दुनिया के देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है. हिंदुस्तान ने हस्ताक्षर किए, इसका क्या मतलब हुआ? हिंदुस्तान के हस्ताक्षर करने का मतलब यह नहीं है कि कन्वेंशन हिंदुस्तान में तुरंत लागू हो गया है. संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 25 सितंबर 2026 तक यह कन्वेंशन अभी लागू नहीं हुआ है. इसके लिए कम से कम 40 देशों को अनुसमर्थन, स्वीकृति, मंजूरी या शामिल होने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इसके बाद 90 दिन में कन्वेंशन प्रभावी होगा. यानी हिंदुस्तान का मौजूदा कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस समझौते से जुड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण औपचारिक कदम है, लेकिन इसका पूरा कानूनी असर आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा. ये भी पढ़ें: UNGA : ऑनलाइन ठगों पर दुनिया भर में कसेगा शिकंजा, साइबर क्राइम के खिलाफ हिंदुस्तान ने साइन किया UN कन्वेंशन साइबर अपराध की जांच में क्या बदलेगा? इसे उदाहरण से समझते हैं… मान लीजिए हिंदुस्तान में किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी हुई. ठगी करने वाला किसी दूसरे देश(पाकिस्तान) में बैठा है और ठगी का पैसा किसी तीसरे देश (अमेरिका) में मौजूद खाते में चला गया. ऐसे मामले में हिंदुस्तानीय जांच एजेंसियों को पाकिस्तान और अमेरिका से जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक सबूत हासिल करने की जरूरत पड़ सकती है. कन्वेंशन का एक बड़ा उद्देश्य ऐसे ही मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आसान बनाना है. इसमें गंभीर अपराधों से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सबूत साझा करने के लिए सहयोग का ढांचा बनाया गया है. इससे अलग-अलग देशों की एजेंसियों के बीच जांच से जुड़ी जानकारी हासिल करने की प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है. आम लोगों के लिए इसका मतलब क्या है? आम इंटरनेट यूजर के लिए इसका सबसे बड़ा मतलब सीधे तौर पर कोई नया नियम लागू होना नहीं है. इसका असर ज्यादातर पर्दे के पीछे होने वाली जांच और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की व्यवस्था में दिखाई देगा. ऑनलाइन ठगी, फर्जी पहचान, डिजिटल चोरी या दूसरे गंभीर साइबर अपराधों में अगर अपराधी और पीड़ित अलग-अलग देशों में हैं, तो जांच एजेंसियों को डिजिटल सबूत जुटाने की जरूरत होती है. कन्वेंशन ऐसे मामलों में देशों के बीच सहयोग मजबूत करने का आधार देता है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, कन्वेंशन साइबर अपराध की रोकथाम और जांच के साथ-साथ पीड़ितों की सुरक्षा, तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण पर भी जोर देता है. क्या इससे ऑनलाइन ठगी तुरंत बंद हो जाएगी? नहीं, यह समझना जरूरी है कि इस तरह का कोई अंतरराष्ट्रीय समझौता अपने आप साइबर ठगी खत्म नहीं कर सकता. अपराध रोकने के लिए मजबूत कानून, पुलिस और जांच एजेंसियों की क्षमता, डिजिटल फोरेंसिक व्यवस्था और लोगों में साइबर सुरक्षा की जागरूकता भी जरूरी है. कन्वेंशन का फायदा खास तौर पर उन मामलों में हो सकता है जहां अपराध की कड़ी कई देशों से जुड़ी हो. हालांकि इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग देश इसे अपनी घरेलू कानूनी व्यवस्था के साथ किस तरह लागू करते हैं. ये भी पढ़ें: Explained: ज्ञानेश कुमार को हटाने की तैयारी में कांग्रेस! कैसे होती है CEC की नियुक्ति और हटाने का क्या है नियम? आगे की प्रक्रिया क्या होगी? संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड के अनुसार, कन्वेंशन पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया 2025 में शुरू हुई थी और देशों के लिए न्यूयॉर्क में 31 दिसंबर 2026 तक हस्ताक्षर का रास्ता खुला है. 25 सितंबर 2026 तक 91 हस्ताक्षर और तीन पक्षकार दर्ज थे, लेकिन कन्वेंशन अभी प्रभावी नहीं हुआ था. हिंदुस्तान के हस्ताक्षर के बाद अगला महत्वपूर्ण सवाल इसके अनुसमर्थन और घरेलू स्तर पर लागू किए जाने की प्रक्रिया का होगा.  The post डिजिटल अरेस्ट से ऑनलाइन फ्रॉड तक: साइबर अपराध पर साथ आए 91 देश, UN की संधि से क्या बदलेगा appeared first on Naya Vichar.

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JTET Exam 2026 देने वालों का इंतजार खत्म! 1 नवंबर हो सकती है परीक्षा

JTET Exam 2026: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) 2026 की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ा अपडेट सामने आया है. 11 अक्टूबर को प्रस्तावित परीक्षा अब नहीं होगी. हाईकोर्ट में हुई हालिया सुनवाई के दौरान झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) ने पहले दी गई समयसीमा में बदलाव की जानकारी देते हुए 1 नवंबर को परीक्षा कराने की संभावित तारीख बतायी है. हालांकि, JAC की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है. संकेत हैं कि सितंबर के अंत या अक्टूबर के पहले सप्ताह तक नई परीक्षा तिथि की औपचारिक घोषणा की जा सकती है. हाईकोर्ट में बदली गयी परीक्षा की टाइमलाइन JTET का पूरा मामला फिलहाल हाईकोर्ट की निगरानी में चल रहा है. इससे पहले JAC ने अदालत में दाखिल टाइमलाइन में 11 अक्टूबर को परीक्षा और दिसंबर में रिजल्ट देने की बात कही थी. अब हालिया सुनवाई में परिषद ने अदालत को बताया कि परीक्षा निर्धारित तिथि पर कराना संभव नहीं है और इसके लिए कुछ अतिरिक्त समय चाहिए. सुनवाई के दौरान JAC ने 1 नवंबर को परीक्षा आयोजित करने की संभावित तिथि अदालत के सामने रखी. अदालत में दी गई इस जानकारी के बाद अभ्यर्थियों के बीच नई संभावित तारीख को लेकर चर्चा तेज हो गई है, लेकिन अंतिम फैसला आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही माना जाएगा. अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार JAC की ओर से अभी नई तिथि की अधिसूचना जारी नहीं हुई है. परिषद को विज्ञप्ति के माध्यम से परीक्षा की नई तारीख घोषित करनी है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह घोषणा सितंबर के अंत या अक्टूबर के पहले सप्ताह तक किसी भी दिन की जा सकती है. यानी फिलहाल अभ्यर्थियों को 1 नवंबर को संभावित परीक्षा तिथि मानकर तैयारी जारी रखने की सलाह दी जा रही है, जबकि अंतिम पुष्टि JAC की आधिकारिक सूचना से होगी. एडमिट कार्ड और रिजल्ट की संभावित टाइमलाइन यदि परीक्षा 1 नवंबर को होती है तो एडमिट कार्ड लगभग 15 अक्टूबर के आसपास जारी होने की संभावना है. वहीं रिजल्ट दिसंबर अंत तक जारी करने की बात पहले की तरह बरकरार रखी गई है. यानी परीक्षा की तिथि में बदलाव जरूर हुआ है, लेकिन परिणाम जारी करने की समयसीमा में फिलहाल कोई बदलाव नहीं बताया गया है. दूसरे राज्यों के अभ्यर्थी भी होंगे शामिल JTET में इस बार केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के अभ्यर्थी भी शामिल होंगे. परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों की संख्या पहले की तुलना में काफी बढ़ी है. बताया गया कि भर्ती प्रक्रिया 2024 में शुरू हुई थी, जब करीब 3 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था. बाद में पहले से आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों को दोबारा शुल्क नहीं देना पड़ा और नए आवेदन भी जुड़े. इसके बाद अभ्यर्थियों की संख्या बढ़कर लगभग 4.5 लाख तक पहुंच गई है. 10 साल बाद बढ़ी परीक्षा की अहमियत JTET लंबे अंतराल के बाद आयोजित हो रही है, इसलिए इसकी अहमियत और बढ़ गई है. बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षक और पारा शिक्षक भी इस परीक्षा में शामिल हो रहे हैं. इसके पीछे एक कारण यह भी है कि पात्रता परीक्षा पास करने पर उन्हें निर्धारित लाभ और मानदेय से जुड़ी सुविधाएं मिल सकती हैं. इसे भी पढ़ें: NHAI को हाईकोर्ट से राहत, डिप्टी जीएम की बहाली मामले में CAT का आदेश रद्द सहायक आचार्य भर्ती से भी जुड़ी है परीक्षा JTET का सीधा संबंध राज्य में प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में सहायक आचार्य भर्ती से भी जुड़ा हुआ है. पहले हुई सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई थी कि अगली सहायक आचार्य नियुक्ति JTET आयोजित होने के बाद ही आगे बढ़ेगी. इसी वजह से यह परीक्षा केवल पात्रता परीक्षा नहीं, बल्कि हजारों अभ्यर्थियों के लिए प्रशासनी शिक्षक बनने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है. फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि 11 अक्टूबर की जगह 1 नवंबर संभावित नई तिथि के रूप में सामने आई है, जबकि अंतिम फैसला JAC की आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा. इसे भी पढ़ें: झारखंड में ओवरस्पीडिंग लील रही लोगों की जान, NCRB की रिपोर्ट में पहले ही दी गई थीं चेतावनियां The post JTET Exam 2026 देने वालों का इंतजार खत्म! 1 नवंबर हो सकती है परीक्षा appeared first on Naya Vichar.

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ममता बनर्जी बोलीं- मुझे नजरबंद कर दिया, टीएमसी की रैली के रास्ते पर भाजपा ने किया कब्जा

ममता बनर्जी ने खुद को नजरबंद किये जाने का दावा करके पश्चिम बंगाल की नेतृत्व में सनसनी फैला दी है. पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने शनिवार को कहा- मुझे नजरबंद कर दिया गया है. तृणमूल कांग्रेस की रैली में जाने की अनुमति नहीं दी गयी. इतना ही नहीं, उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं को गुंडा तक करार दे दिया. उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी के नेताओं को भी ‘नजरबंद’ करके रखा गया है. श्रीरामपुर में होने वाली रैली में ममता गुट के नेताओं को शामिल होने से रोका जा रहा है. पत्रकारों को संबोधित करतीं ममता बनर्जी. फोटो : ममता बनर्जी के फेसबुक पेज का स्क्रीन शॉट. ममता बनर्जी ने संवाददाताओं को किया संबोधित ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) की सबसे बड़ी नेता ममता बनर्जी ने कोलकाता में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा- भाजपा के गुंडों ने श्रीरामपुर में तृणमूल की रैली स्थल तक जाने वाले रास्ते पर कब्जा कर लिया. वहां कोई पुलिस नहीं थी. ममता बनर्जी ने ये बातें अपनी पार्टी के एक नेता पर हुए कथित हमले के बाद कहीं. हमें नजरबंद करके रखा गया है. मुझे रैली वाली जगह पर जाने की इजाजत नहीं है. लेकिन मैं जाऊंगी और रैली को संबोधित करूंगी. मुझे रोक सकें तो रोककर दिखाएं. -ममता बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस की नेता कुणाल घोष को बुरी तरह पीटा गया : ममता बनर्जी ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ की प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा समर्थकों ने टीएमसी के नेता और विधायक कुणाल घोष पर हमला किया है. कुणाल को बुरी तरह से पीटा गया है. वह गंभीर रूप से घायल हैं. इतना ही नहीं, कार पर हमला भी किया गया है. ममता बनर्जी ने पूछा- कार पर हमले हो रहे हैं, विधायक को पीटा जा रहा है, पुलिस कहां है. ये भी पढ़ें: ममता बनर्जी की प्रस्तावित पदयात्रा से पहले 4 टीएमसी नेता की गिरफ्तारी से हुगली में सियासत गरमायी ‘भाजपा प्रशासन बंगाल के लिए सही नहीं’ ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लिए यह शुभ संकेत नहीं है. विपक्षी पार्टी को कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं दी जा रही है. उन्होंने कहा कि वह इसके विरोध में कोर्ट जायेंगीं. दीदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रशासन इस राज्य के लिए सही नहीं है. ‘बंगाल में जो हो रहा है अफ्रीका में भी नहीं होता’ बंगाल की पूर्व चीफ मिनिस्टर ने यहां तक कहा कि अफ्रीका में भी ऐसा नहीं होता, जैसा आजकल बंगाल में हो रहा है. उन्होंने कहा- लोगों को वोट देने का अधिकार नहीं रहा. लोगों को विरोध-प्रदर्शन का अधिकार नहीं है. लोगों को बोलने का अधिकार नहीं है. एक जगह से दूसरी जगह जाने का अधिकार नहीं है. ये भी पढ़ें: बारुईपुर दुष्कर्म-हत्याकांड के विरोध में सड़क पर उतरीं ममता बनर्जी, लगे चोर-चोर के नारे, टीएमसी-भाजपा कार्यकर्ता भिड़े कोर्ट के आदेश का भी नहीं हो रहा पालन : ममता बनर्जी ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल में अब कोर्ट के आदेश का भी पालन नहीं हो रहा है. पुलिस को कोर्ट के ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा- हमें हर बार कार्यक्रम के लिए कोर्ट की अनुमति लेनी होती है. हमें कोर्ट जाना पड़ता है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि कोर्ट के पास बहुत से काम हैं. पहले से बड़ी संख्या में मुकदमे लंबित हैं. बिहार या उत्तर प्रदेश में ऐसा जुल्म नहीं होता : ममता ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में जो जुल्म विपक्षी दल पर हो रहा है, वह बिहार या उत्तर प्रदेश में नहीं हो रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसा देश के किसी हिस्से में नहीं होता. अगर ये लोग जनता के वोट से जीते होते, तो ऐसा नहीं करते. The post ममता बनर्जी बोलीं- मुझे नजरबंद कर दिया, टीएमसी की रैली के रास्ते पर भाजपा ने किया कब्जा appeared first on Naya Vichar.

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चुनाव आयोग के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में इंडिया गठबंधन, 30 को हो सकती है दिल्ली में बैठक

इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (इंडिया) के घटक दल चुनाव आयोग और अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए 30 सितंबर को दिल्ली में बैठक करेंगे. यह जानकारी पीटीआई न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से दी है. विपक्ष चुनाव आयोग के मुद्दे पर एकजुट होकर प्रशासन पर हमले की तैयारी में है और इसी कोशिश के लिए इंडिया के घटक दल मिलकर बैठक करने वाले हैं. इंडिया गठबंधन की बैठक उस वक्त हो रही है जब गरमाया हुआ है SIR का मुद्दा देश में अभी कई ऐसे मुद्दे चर्चा में हैं, जिसने विपक्ष को प्रशासन पर हमला करने का अवसर दे दिया है. विपक्षी दल चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठा रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि इस प्रक्रिया में कई वैलिड मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं. विपक्ष यह मांग कर रहा है कि मतदाता सूची में किसी का नाम हटाने और दस्तावेजों से जुड़ी समस्याओं को लेकर चुनाव आयोग के काम में ट्रांसपरेसी हो ताकि वैलिड वोटर का नाम सूची से हटे. एसआईआर का मुद्दा पिछले कुछ राज्यों में हुए चुनाव के बाद से काफी चर्चा में है और विपक्ष इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है. बिहार और बंगाल में हुए चुनाव के वक्त से ही यह मुद्दा काफी विवादों में रहा है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग हो रही है तेज इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के देश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग तेज हो गई है. रिपोर्ट मे यह दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ति दर्ज की थी. रिपोर्ट में ये आपत्तियां मतदाता सूची के पुनरीक्षण और उससे जुड़े फैसलों से संबंधित बताई गईं. चुनाव आयोग ने इन दावों के बीच कहा कि अलग-अलग विचार संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं. उसके बाद से विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में नया प्रस्ताव लाने की तैयारी की समाचारें हैं. ये भी पढ़ें: नागालैंड में नकली शराब पीने से 19 लोगों की मौत, 1990 से लागू है शराबबंदी The post चुनाव आयोग के मुद्दे पर प्रशासन को घेरने की तैयारी में इंडिया गठबंधन, 30 को हो सकती है दिल्ली में बैठक appeared first on Naya Vichar.

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Bajaj Pulsar फैंस के लिए खुशखबरी, NS200, N250 और NS400Z होंगी अपडेट, मिलेगी 5-इंच TFT स्क्रीन और बहुत कुछ

Bajaj Pulsar के चाहने वालों के लिए बड़ी समाचार है. कंपनी अपनी तीन पॉपुलर बाइक्स को नए फीचर्स के साथ अपडेट करने की तैयारी में है. कंपनी जल्द ही अपनी तीन दमदार बाइक्स- Pulsar NS200, N250 और NS400Z का नया अपडेटेड वर्जन बाजार में उतारने वाली है. इन्हें टेस्टिंग के दौरान देखा गया है. इन बाइक्स में नया 5-इंच TFT इंस्ट्रूमेंट कंसोल मिलने की उम्मीद है. आइए जानते हैं इन तीनों Pulsar बाइक्स में क्या नए अपडेट्स देखने को मिल सकते हैं. तीनों Pulsar में मिलेगा नया TFT कंसोल Bajaj अपनी Pulsar रेंज को लगातार अपडेट कर रही है. अब NS200, N250 और NS400Z के अपडेटेड मॉडल टेस्टिंग के दौरान नजर आए हैं. इन तीनों बाइक्स में 5-इंच TFT इंस्ट्रूमेंट कंसोल मिलने की उम्मीद है. यह मौजूदा इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर की जगह ले सकता है. कंपनी ने अपनी कुछ दूसरी Pulsar बाइक्स में भी इस तरह का TFT डिस्प्ले देना शुरू किया है. ये भी पढ़ें: 80kmpl माइलेज, 112kg वजन और ₹59,100 शुरूआती कीमत…TVS Sport के 2 वेरिएंट में क्या है अंतर? मिलेंगे स्मार्ट कनेक्टिविटी फीचर्स नए TFT डिस्प्ले के साथ इन बाइक्स में स्मार्टफोन कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है. संभावित फीचर्स कुछ इस प्रकार हो सकते हैं: Google Maps मिररिंग म्यूजिक कंट्रोल थर्ड-पार्टी नोटिफिकेशन डॉक्यूमेंट स्टोरेज स्मार्टफोन कनेक्टिविटी इन फीचर्स की मदद से राइडर को बार-बार स्मार्टफोन देखने की जरूरत कम हो सकती है. नया स्विचगियर भी मिल सकता है नए TFT डिस्प्ले के साथ स्विचगियर में भी बदलाव किए जा सकते हैं. टेस्ट बाइक में नया कंट्रोल सेटअप देखने को मिला है. इसमें फोर-वे कंट्रोलर दिए जाने की उम्मीद है. यह कंट्रोलर TFT स्क्रीन के अलग-अलग फंक्शन को ऑपरेट करने में मदद कर सकता है. NS200 में मिल सकता है बड़ा हार्डवेयर अपडेट तीनों बाइक्स में फीचर अपडेट के साथ Pulsar NS200 में हार्डवेयर बदलाव भी देखने को मिल सकता है. टेस्टिंग के दौरान NS200 को नए फ्रंट सस्पेंशन सेटअप के साथ देखा गया है. इसमें WP अपसाइड-डाउन (USD) फ्रंट फोर्क मिलने की संभावना है. इसके अलावा टेस्ट बाइक में एडजस्टेबल ब्रेक और क्लच लीवर भी दिखाई दिए हैं. हालांकि, इन फीचर्स को लेकर कंपनी की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है. इंजन में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं अपडेटेड मॉडल्स में मौजूदा इंजन को बरकरार रखा जा सकता है. यानी बदलाव मुख्य रूप से फीचर्स और इक्विपमेंट तक सीमित रहने की उम्मीद है. Pulsar NS200 199.5cc लिक्विड-कूल्ड सिंगल-सिलेंडर इंजन पावर: 24.5 PS टॉर्क: 18.74 Nm गियरबॉक्स: 6-स्पीड Pulsar N250 249.07cc ऑयल-कूल्ड सिंगल-सिलेंडर इंजन पावर: 24.5 PS टॉर्क: 21.5 Nm गियरबॉक्स: 5-स्पीड Pulsar NS400Z 349.13cc लिक्विड-कूल्ड सिंगल-सिलेंडर इंजन पावर: 40.6 PS टॉर्क: 33.2 Nm गियरबॉक्स: 6-स्पीड कब लॉन्च होंगी नई Pulsar? इन तीनों बाइक्स को टेस्टिंग के दौरान स्पॉट किया जा चुका है, जिससे इनके अपडेटेड वर्जन के जल्द आने की उम्मीद है. हालांकि, लॉन्च डेट और कीमत की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है. इसलिए कीमत या लॉन्च टाइमलाइन को लेकर किसी भी दावे को फिलहाल अनुमान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए. क्या बदलेगा, एक नजर में बाइक संभावित प्रमुख अपडेट Pulsar NS200 5-इंच TFT, नए स्विचगियर, USD फोर्क, एडजस्टेबल लीवर Pulsar N250 5-इंच TFT, स्मार्ट कनेक्टिविटी, नया स्विचगियर Pulsar NS400Z 5-इंच TFT, स्मार्ट कनेक्टिविटी, नया स्विचगियर नोट: ऊपर दिए गए नए फीचर्स टेस्टिंग में देखे गए मॉडल और उपलब्ध रिपोर्ट्स पर आधारित संभावित अपडेट हैं. अंतिम फीचर्स, कीमत और लॉन्च डिटेल की पुष्टि Bajaj Auto की आधिकारिक घोषणा के बाद ही होगी. ये भी पढ़ें: Royal Enfield की 5 सबसे सस्ती बाइक्स… 350cc से ज्यादा का इंजन और ₹1.51 लाख की शुरुआती कीमत, देखें लिस्ट The post Bajaj Pulsar फैंस के लिए खुशसमाचारी, NS200, N250 और NS400Z होंगी अपडेट, मिलेगी 5-इंच TFT स्क्रीन और बहुत कुछ appeared first on Naya Vichar.

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Asian Games 2026: फ्री में कब, कहां और कैसे देखें भारत-अफगानिस्तान क्वार्टर फाइनल मैच? जानें पूरी डिटेल

Free Mein Kaha Dekhe IND VS AFG Match: हिंदुस्तान की पुरुष क्रिकेट टीम एशियन गेम्स 2026 में अपने अभियान की शुरुआत करने के लिए नागोया पहुंच चुकी है. श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली हिंदुस्तानीय टीम सोमवार, 28 सितंबर को क्वार्टर फाइनल मुकाबले में अफगानिस्तान से भिड़ेगी. हिंदुस्तानीय टीम की नजर एशियन गेम्स में अपने गोल्ड मेडल को डिफेंड करने पर है. अगर आप भी हिंदुस्तान और अफगानिस्तान के बीच होने वाले इस रोमांचक क्वार्टर फाइनल मुकाबले को लाइव देखना चाहते हैं, तो यहां जानें मैच कब, कहां और कैसे टीवी, मोबाइल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर देखा जा सकता है. हिंदुस्तान-अफगानिस्तान क्वार्टर फाइनल कब और कहां स्पोर्ट्सा जाएगा? हिंदुस्तान और अफगानिस्तान के बीच एशियन गेम्स 2026 पुरुष क्रिकेट का क्वार्टर फाइनल मुकाबला 28 सितंबर 2026 को स्पोर्ट्सा जाएगा. दोनों टीमें नॉकआउट मुकाबले में आमने-सामने होंगी. हिंदुस्तान और अफगानिस्तान के बीच क्वार्टर फाइनल मुकाबला नागोया, जापान में स्पोर्ट्सा जाएगा. हिंदुस्तानीय टीम नॉकआउट मुकाबले से पहले नागोया पहुंच चुकी है और अब उसकी नजर सेमीफाइनल में जगह बनाने पर है. कितने बजे शुरू होगा हिंदुस्तान-अफगानिस्तान मैच? हिंदुस्तान और अफगानिस्तान के बीच क्वार्टर फाइनल मुकाबला हिंदुस्तानीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे शुरू होगा. मैच को लेकर हिंदुस्तानीय क्रिकेट फैंस की नजरें श्रेयस अय्यर की अगुवाई वाली टीम पर रहेंगी. जानकारी विवरण मुकाबला हिंदुस्तान बनाम अफगानिस्तान, पुरुष क्रिकेट क्वार्टर फाइनल तारीख 28 सितंबर 2026 समय सुबह 10:30 बजे (IST) स्थान नागोया, जापान कप्तान श्रेयस अय्यर (हिंदुस्तान), डारविस रसूली (अफगानिस्तान) ये भी पढ़ें: Photos: जापान में हिंदुस्तानीय क्रिकेटरों की मस्ती, कोई बारिश के बीच घूमते तो कोई शॉपिंग करते आए नजर मोबाइल और लैपटॉप पर कैसे देखें लाइव? मोबाइल फोन और टैबलेट पर हिंदुस्तान-अफगानिस्तान के बीच क्वार्टर फाइनल मैच देखने के लिए फैंस को SonyLIV ऐप का इस्तेमाल करना होगा. वहीं लैपटॉप पर लाइव स्ट्रीमिंग की देखने के लिए आपको SonyLIV की वेबसाइट पर जाना होगा. मैच देखने से पहले SonyLIV का सब्सक्रिप्शन से जुड़ी सारी चीजों की जांच जरूर कर लें. टीवी पर कहां देखें हिंदुस्तान-अफगानिस्तान का लाइव मैच? टीवी पर हिंदुस्तान और अफगानिस्तान के बीच क्वार्टर फाइनल मुकाबला देखने के लिए Sony Sports Network के चैनलों पर जाना होगा. नेटवर्क की ओर से अलग-अलग भाषाओं में कमेंट्री और कवरेज उपलब्ध कराई जा सकती है. फ्री में कहां देखें हिंदुस्तान-अफगानिस्तान मैच? अगर आप हिंदुस्तान बनाम अफगानिस्तान क्वार्टर फाइनल मुकाबला फ्री में टीवी पर देखना चाहते हैं, तो DD Sports और DD Free Dish पर इसकी उपलब्धता देख सकते हैं. हालांकि, मैच के प्रसारण की ताजा जानकारी अपने टीवी ऑपरेटर या आधिकारिक प्रसारण शेड्यूल से जरूर जांच लें. नया विचार पर पढ़ें हिंदुस्तान-अफगानिस्तान मैच के लाइव अपडेट्स अगर आप किसी वजह से हिंदुस्तान और अफगानिस्तान का लाइव प्रसारण नहीं देख पाते हैं, तो नया विचार के साथ मैच के हर जरूरी अपडेट से जुड़े रह सकते हैं. मैच के दौरान टॉस, प्लेइंग XI, स्कोर, विकेट और मुकाबले के अहम पलों की जानकारी लाइव अपडेट्स के जरिए मिलती रहेगी. ये भी पढ़ें: Asian Games 2026: अफगानिस्तान से क्वार्टर फाइनल मुकाबले के लिए नागोया पहुंची टीम इंडिया, 27 सितंबर को भिड़ंत हिंदुस्तान के लिए क्यों खास है यह क्वार्टर फाइनल? हिंदुस्तान एशियन गेम्स में अपने पिछले गोल्ड मेडल को बचाने के इरादे से उतरा है. 2023 में हांगझोउ एशियन गेम्स में हिंदुस्तानीय पुरुष टीम ने गोल्ड मेडल जीता था. उस टूर्नामेंट के फाइनल में हिंदुस्तान का सामना अफगानिस्तान से हुआ था और बारिश के कारण मुकाबला पूरा नहीं हो सका था. अब एशियन गेम्स 2026 के क्वार्टर फाइनल में एक बार फिर हिंदुस्तान और अफगानिस्तान आमने-सामने होंगे. इस मुकाबले में जीतने वाली टीम सेमीफाइनल में पहुंचेगी. एशियन गेम्स 2026 के लिए इस प्रकार है दोनों टीमें हिंदुस्तानीय टीम: श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), शिवम दुबे, तिलक वर्मा (उपकप्तान), नितीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, वैभव सूर्यवंशी और यश ठाकुर. अफगानिस्तान टीम: डारविस रसूली (कप्तान), मोहम्मद इशाक, इमरान मीर, नजीबुल्लाह जादरान, इस्मत आलम, करीम जनत, नांगेयालिया खारोटी, अब्दुल्लाह अहमदजई, खालिद तनीवाल, मोहम्मद अकरम, फरीदून दाऊदजई, फरमानुल्लाह सफी, हसन ईसास्पोर्ट्स, फैसल शिनोजादा और अरब गुल मोमंद. ये भी पढ़ें: IND vs WI: विराट कोहली-रोहित शर्मा की वापसी पर बोले मोर्ने मोर्केल, ‘टीम इंडिया खुशकिस्मत है कि…’ The post Asian Games 2026: फ्री में कब, कहां और कैसे देखें हिंदुस्तान-अफगानिस्तान क्वार्टर फाइनल मैच? जानें पूरी डिटेल appeared first on Naya Vichar.

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VIDEO: शिखर धवन के फोन में पत्नी की नहीं, इस खिलाड़ी की लगी है तस्वीर

Shikhar Dhawan Phone Wallpaper: हिंदुस्तानीय क्रिकेट के दो दिग्गजों रोहित शर्मा और शिखर धवन की दोस्ती किसी से छिपी नहीं है. मैदान पर दोनों की ओपनिंग जोड़ी ने लंबे समय तक हिंदुस्तानीय क्रिकेट को कई यादगार पारियां दीं और मैदान के बाहर भी उनकी बॉन्डिंग अक्सर फैंस का ध्यान खींचती रही है. अब दोनों से जुड़ा एक मजेदार वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें शिखर धवन के फोन के वॉलपेपर ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया. सोफी ने दिखाई तस्वीर यह पूरा मामला रोहित शर्मा के शो ‘Family Full House with Rohit Sharma’ से जुड़ा है. शो के दौरान एक हल्के-फुल्के पल में शिखर धवन की पत्नी सोफी शाइन ने उनसे प्यार को लेकर मजाकिया अंदाज में सवाल किया. धवन ने भी बिना देर किए कहा कि वह उनसे प्यार करते हैं. इसके बाद सोफी की नजर धवन के फोन पर गई, जहां वॉलपेपर में उनकी तस्वीर की जगह रोहित शर्मा की फोटो दिखाई दे रही थी. सोफी ने इसी बात को लेकर धवन से मजाक करते हुए पूछा कि क्या वह उन्हें रोहित से ज्यादा प्यार करते हैं? धवन ने मुस्कुराते हुए ‘हां, बिल्कुल’ अंदाज में जवाब दिया. इसके बाद यह पूरा पल सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. फैंस इस वीडियो को दोनों क्रिकेटरों की दोस्ती और भाई जैसे रिश्ते की एक झलक बता रहे हैं. ये भी पढ़ें: IND vs WI: विराट कोहली-रोहित शर्मा की वापसी पर बोले मोर्ने मोर्केल, ‘टीम इंडिया खुशकिस्मत है कि…’ रोहित-धवन की दोस्ती फिर चर्चा में रोहित शर्मा और शिखर धवन की दोस्ती सिर्फ सोशल मीडिया के वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है. दोनों ने हिंदुस्तानीय टीम के लिए लंबे समय तक साथ में ओपनिंग की है. 2013 चैंपियंस ट्रॉफी में दोनों को पहली बार नियमित तौर पर साथ ओपनिंग करने का मौका मिला और इसके बाद इस जोड़ी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. धवन के आक्रामक अंदाज और रोहित की टाइमिंग ने वनडे क्रिकेट में हिंदुस्तान को कई बड़ी साझेदारियां दीं. दोनों के बीच मैदान पर तालमेल इतना शानदार था कि कई बार बिना ज्यादा बातचीत के भी रनिंग और स्ट्राइक को लेकर उनकी समझ साफ नजर आती थी. वनडे में सबसे सफल ओपनिंग जोड़ियों में शामिल रोहित और धवन की ओपनिंग जोड़ी ने 2013 से 2022 के बीच वनडे क्रिकेट में 115 से ज्यादा पारियों में साथ बल्लेबाजी की. इस दौरान दोनों ने करीब 5,200 रन बनाए और 18 शतकीय साझेदारियां कीं. शतकीय ओपनिंग पार्टनरशिप के मामले में यह जोड़ी सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली की जोड़ी के बाद सबसे सफल जोड़ियों में शामिल रही. 2018 एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ दोनों की 210 रन की नाबाद ओपनिंग साझेदारी भी खूब याद की जाती है. इस मुकाबले में दोनों ने शतक लगाए थे. इसके अलावा 2019 में मोहाली में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 193 रन की साझेदारी भी इस जोड़ी की यादगार पारियों में शामिल है. ये भी पढ़ें: Asian Games 2026: हिंदुस्तान की बेटियों ने ईरान को हराकर कबड्डी में जीता गोल्ड, 37-34 से दर्ज की रोमांचक जीत The post VIDEO: शिखर धवन के फोन में पत्नी की नहीं, इस खिलाड़ी की लगी है तस्वीर appeared first on Naya Vichar.

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प्रशांत किशोर का मिशन 2030: बिहार के बाद अब दिल्ली में उतरेगी जन सुराज

Prashant Kishor Set To Delhi: बिहार की नेतृत्व के बाद प्रशांत किशोर अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जन सुराज पार्टी का विस्तार करने की तैयारी में हैं. द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जन सुराज पार्टी दिल्ली में अपनी नेतृत्वक जमीन तैयार करने जा रही है और रविवार को पार्टी समर्थकों की एक बैठक आयोजित की जाएगी. रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक में दिल्ली में पार्टी के कामकाज के लिए एक स्टीयरिंग कमेटी का ऐलान किया जा सकता है. यह कमेटी दिल्ली में पार्टी के संगठन और टीम को तैयार करने का काम करेगी. दिल्ली में पार्टी कार्यालय की भी तैयारी जन सुराज पार्टी दिल्ली में अपना कार्यालय खोलने के लिए जगह तलाश रही है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कुछ जगहों को शॉर्टलिस्ट किया गया है और लीज तथा किराये से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद कार्यालय को अंतिम रूप दिया जाएगा. पार्टी की नजर खास तौर पर दिल्ली की बड़ी पूर्वांचली आबादी पर है. बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से आने वाले पूर्वांचली मतदाता दिल्ली की कई विधानसभा सीटों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. 2027 MCD चुनाव से 2030 विधानसभा चुनाव तक नजर रिपोर्ट के अनुसार, जन सुराज दिल्ली में आने वाले चुनावों में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है. पार्टी से जुड़े प्रोफेसर कुमार शांतनु ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि पार्टी 2027 के दिल्ली नगर निगम चुनाव, 2029 के लोकसभा चुनाव और 2030 के विधानसभा चुनाव में चुनाव लड़ने की योजना बना रही है. उन्होंने कहा कि दिल्ली में संगठन खड़ा किए बिना भी पार्टी के कार्यकर्ता लोगों तक प्रशांत किशोर का संदेश और विजन पहुंचा रहे हैं और उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है. प्रदूषण और यमुना जैसे मुद्दों पर फोकस जन सुराज दिल्ली में प्रदूषण और यमुना की सफाई जैसे मुद्दों को भी अपने नेतृत्वक एजेंडे में शामिल करने की तैयारी में है. पार्टी का कहना है कि इन समस्याओं से निपटने के लिए पहले से कई व्यवस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत है. बिहार के बाद दिल्ली पर नजर प्रशांत किशोर ने 2 अक्टूबर 2024 को जन सुराज को औपचारिक रूप से नेतृत्वक पार्टी में बदला था. पार्टी ने नवंबर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में 238 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे एक भी सीट पर जीत नहीं मिली. इसके बाद अगस्त 2026 में प्रशांत किशोर ने पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में जीत दर्ज की. अब जन सुराज पार्टी बिहार से बाहर अपने संगठन का विस्तार करने की दिशा में दिल्ली को पहला बड़ा पड़ाव बनाने की तैयारी में है. ये भी पढ़ें: ‘मैथिली ठाकुर विधायक हैं, इसलिए रात में घूम सकती हैं’, प्रशांत किशोर ने जमुई कांड पर किया रिएक्ट The post प्रशांत किशोर का मिशन 2030: बिहार के बाद अब दिल्ली में उतरेगी जन सुराज appeared first on Naya Vichar.

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PAK में जनता की नहीं, फॉर्म-47 की सरकार! शहबाज शरीफ की दुखती नस पर भारत का प्रहार, जानें मामला

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में हिंदुस्तान पर, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा लगाए गए आरोप का हिंदुस्तान ने राइट ऑफ रिप्लाई के तहत जवाब दिया. UN में हिंदुस्तान के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने हिंदुस्तान की ओर से आतंकवाद, धार्मिक असहिष्णुता, लोकतांत्रिक अधिकारों और कश्मीर जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान के दावों का जवाब दिया. इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान की मौजूदा प्रशासन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ‘फॉर्म-47 प्रशासन’ शब्द का भी जिक्र किया. ऐसे में सवाल है कि आखिर फॉर्म-47 क्या है और पाकिस्तान की नेतृत्व में यह इतना चर्चित क्यों है? क्या है फॉर्म-47? पाकिस्तान के चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक फॉर्म-47 किसी निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव परिणाम का अंतिम समेकित विवरण यानी फाइनल रिपोर्ट होता है. इसे समझने के लिए पहले पाकिस्तान की चुनावी प्रक्रिया को समझना जरूरी है. इसकी शुरुआत होती है फॉर्म -45 से. इसमें किस बूथ पर किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले, इसका रिकॉर्ड रहता है. इसके बाद एक निर्वाचन क्षेत्र के अलग-अलग मतदान केंद्रों से मिले आंकड़ों को एक साथ जोड़कर फॉर्म-47 तैयार किया जाता है.इसे निर्वाचन क्षेत्र का अंतिम समेकित परिणाम कहा जाता है, यानी की उस निर्वाचन क्षेत्र में कुल कितने मतदान हुए. इसके बाद चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ती है और अंतिम परिणाम से जुड़े दूसरे दस्तावेज तैयार किए जाते हैं. जिसमें फॉर्म-48 और फॉर्म-49 जैसे दस्तावेज भी शामिल है. यानी फॉर्म-47 अपने आप में कोई विवादित या गैरकानूनी दस्तावेज नहीं है. विवाद इसके इस्तेमाल को लेकर लगाए गए नेतृत्वक आरोपों से जुड़ा है. फॉर्म-47 को लेकर क्या है विवाद पाकिस्तान में 8 फरवरी 2024 को हुए आम चुनाव के बाद कई नेतृत्वक दलों, खासकर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ(PTI) के नेताओं ने चुनाव परिणामों में गड़बड़ी के आरोप लगाए. आरोप ये लगाया गया कि मतदान केंद्रों पर तैयार किए गए फॉर्म-45 और बाद में जारी फॉर्म-47 के आंकड़ों में कई जगह अंतर था और इसी प्रक्रिया के जरिए नतीजों को प्रभावित किया गया. ये भी पढ़ें: UNGA में पाकिस्तान की हरकत देख हिंदुस्तानीय डिप्लोमैट को आई हंसी, शहबाज शरीफ की बातें सुन आप भी मुस्कुरा देंगे शहबाज शरीफ प्रशासन का क्या है फॉर्म-47 से कनेक्शन 2024 के चुनाव के बाद PTI और पाकिस्तान के कुछ विपक्षी नेताओं ने शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली गठबंधन प्रशासन को ‘फॉर्म-47 प्रशासन’ कहना शुरू किया. उनका आरोप है कि चुनाव में उनके समर्थित उम्मीदवारों को मिले जनादेश को नतीजों के अंतिम संकलन के दौरान बदला गया और इसी वजह से मौजूदा प्रशासन सत्ता में आई.यह आरोप आज भी लगया जाता है. यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र में फॉर्म-47 का जिक्र होने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर पाकिस्तान की चुनावी नेतृत्व और 2024 के आम चुनाव से जुड़े विवादों के केंद्र में है. The post PAK में जनता की नहीं, फॉर्म-47 की प्रशासन! शहबाज शरीफ की दुखती नस पर हिंदुस्तान का प्रहार, जानें मामला appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल में राजनीतिक उलटफेर: जब ममता बनर्जी ने माकपा नेता को अचानक मिलाया फोन, जानें इनसाइड स्टोरी

कोलकाता/नई दिल्ली : बंगाल की नेतृत्व में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. अभी नेतृत्वक में एक दूसरे कट्टर विरोधी रहे माकपा और तृणमूल नयी परिस्थिति में एक दूसरे के साथी बनते जा रहे हैं. राष्ट्रीय नेतृत्व में तृणमूल आज सीपीएम के काफी करीब आ गई हैं. ममता बनर्जी ने सीपीएम महासचिव एमए बेबी से फोन पर बात की है. इतना ही नहीं, ममता चाहती हैं कि अगले हफ्ते दिल्ली में इंडिया अलायंस की बैठक हो. उन्होंने राहुल गांधी से भी फोन पर बात की और उनसे इस संबंध में पहल करने का अनुरोध किया. बेबी और ममता के बीच हो रहा पत्राचार जिस दिन आयोग से संबंधित समाचार एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित हुई, उसी दिन ममता बनर्जी ने राहुल गांधी, अखिलेश यादव और उद्धव ठाकरे समेत कई विपक्षी नेताओं से फोन पर बात की. एम.ए. बेबी ने ज्ञानेश कुमार विवाद को लेकर देश के सभी विपक्षी नेताओं के साथ ममता को पत्र लिखा था. ममता ने सीपीएम महासचिव के पत्र के जवाब में एक प्रतिवाद पत्र भी लिखा. अभिषेक ने पहले की बेबी से बात पश्चिम बंगाल में सत्ता में रहते हुए ममता बनर्जी ने इंडिया अलायंस की बैठक में सीपीएम के साथ एक ही मेज पर बैठकर बैठक की, लेकिन उन्होंने कभी भी सीपीएम के महासचिव से अलग से बात नहीं की, राज्य में एकता की तो बात ही दूर है. अभिषेक बनर्जी से की पहल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले, अभिषेक बनर्जी ने दिल्ली में राहुल गांधी के आवास पर सीपीएम महासचिव एमए बेबी से निजी बातचीत की. सूत्रों के अनुसार, बेबी और अभिषेक ने उस दौरान एसआईआर प्रक्रिया पर भी चर्चा की. विपक्षी एकता पर जोर सूत्रों का कहना है कि बेबी और ममता बनर्जी हिंदुस्तान गठबंधन से बाहर की नेतृत्वक पार्टियों – आम आदमी पार्टी, डीएमके, बीजद – को आयोग के मुद्दे पर साथ लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. ममता-तृणमूल पर हमले की समाचार गणशक्ति अखबार में प्रकाशित हुई थी. तृणमूल के पक्ष में माकपा हाल ही में कोलकाता के मुकुंदपुर में ममता तृणमूल कांग्रेस के जुलूस पर हमले के आरोप लगे थे. इस घटना में कार्यकर्ता घायल हो गए थे. पूर्व विधायक हुमायूं कबीर भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे. आरोप थे कि भाजपा ने उनकी पिटाई की थी. यह समाचार घटना के अगले दिन सीपीएम के मुखपत्र गणशक्ति में प्रकाशित हुई थी. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें क्या रहा है पुराना रिश्ता ममता बनर्जी की नेतृत्वक दृष्टि से सबसे चर्चित मुद्दा वामपंथियों के खिलाफ उनका संघर्ष है. हिंदुस्तानीय नेतृत्व में ममता को वामपंथियों के 34 साल पुराने गढ़ को ध्वस्त करने वाली नेता के रूप में जाना जाता है. चाहे सड़कों पर प्रदर्शन हो, भूख हड़ताल हो या संसदीय नेतृत्व, सीपीएम को सत्ता से हटाने के लिए ममता का संघर्ष बंगाल के नेतृत्वक इतिहास में दर्ज होगा. हालांकि, अगर ममता बनर्जी भाजपा के विरोध में सीपीएम के साथ खड़ी होती हैं, तो यह एक नया इतिहास रचने जैसा होगा. Also Read: शुभेंदु अधिकारी ने ठुकराई विश्व हिंदू परिषद की मांग, बोले- दुर्गा पूजा में मांसाहार पर रोक नहीं The post बंगाल में नेतृत्वक उलटफेर: जब ममता बनर्जी ने माकपा नेता को अचानक मिलाया फोन, जानें इनसाइड स्टोरी appeared first on Naya Vichar.

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