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तमिलनाडु में बीजेपी को फिर लगा झटका, अन्नामलाई के बाद उपाध्यक्ष और सचिव ने भी छोड़ी पार्टी

Tamil Nadu BJP: तमिलनाडु में बीजेपी के लिए मुश्किलें और बढ़ गई हैं. के अन्नामलाई के इस्तीफे के बाद शुक्रवार को तमिलनाडु बीजेपी के उपाध्यक्ष कारू नागराजन और स्टेट सेक्रेटरी सुमति वेंकटेश ने भी पार्टी छोड़ दी है. दोनों ने बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा दे दिया है. कारू नागराजन ने पार्टी से इस्तीफा देकर के. अन्नामलाई के नेतृत्वक आंदोलन में शामिल हो गए हैं. इससे पहले शुक्रवार (5 जून) को ही अन्नामलाई ने हिंदुस्तानीय जनता पार्टी छोड़ दी थी. अन्नामलाई के नए नेतृत्वक अभियान को समर्थन देंगे कारू नागराजन! बीजेपी की सदस्यता छोड़ चुके पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष कारू नागराजन ने के. अन्नामलाई के नए नेतृत्वक अभियान का समर्थन करने के संकेत दिए हैं. नागराजन ने कहा कि अन्नामलाई एक निडर और सिद्धांतों पर चलने वाले नेता हैं, जो किसी भी व्यक्ति या दल की गलतियों को उजागर करने से पीछे नहीं हटते. नागराजन ने उनके साथ काम करने की इच्छा भी जताई. चेन्नई: तमिलनाडु भाजपा के उपाध्यक्ष कारू नागराजन ने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया और आज के. अन्नामलाई के नेतृत्वक आंदोलन में शामिल हो गए। pic.twitter.com/BSn2rctrRM — ANI_HindiNews (@AHindinews) June 5, 2026 स्टेट सेक्रेटरी सुमति वेंकटेश ने भी छोड़ी पार्टी के. अन्नामलाई के इस्तीफे के बाद तमिलनाडु बीजेपी के स्टेट सेक्रेटरी सुमति वेंकटेश ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने शोसल मीडिया एक्स पर अपना इस्तीफा शेयर किया है. This is my humble intimation to all 👃👃👃 pic.twitter.com/mHpAtDHNml — Sumathi Venkatesh (மோடியின் குடும்பம்) (@SumathiVenkat18) June 5, 2026 न्नामलाई ने तमिलनाडु की नेतृत्व में नया बदलाव लाने का किया वादा तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई ने बीजेपी छोड़ने के बाद राज्य में एक नई नेतृत्वक यात्रा की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि उनका मकसद आम आदमी की नेतृत्व को आगे बढ़ाना है, जो व्यक्ति-पूजा, चाटुकारिता और वंशवादी नेतृत्व से अलग होगी. सोशल मीडिया पर जारी अपने संबोधन में अन्नामलाई ने अपने नए नेतृत्वक विजन की रूपरेखा पेश करते हुए कहा कि यह किसी व्यक्ति या नाम के इर्द-गिर्द नहीं, बल्कि एक विचार और परिवर्तन के सिद्धांत पर आधारित आंदोलन होगा. खुद को बदलें, बदलाव अपने आप आएगा- अन्नामलाई अन्नामलाई ने कहा कि उनके आंदोलन का मूल मंत्र मारुवोम, मातृवोम (खुद को बदलें और बदलाव लाएं) होगा. उन्होंने कहा- आइए हम खुद को बदलें और बदलाव स्वाभाविक रूप से आएगा. हमारा आंदोलन आत्म-परिवर्तन के जरिए समाज और नेतृत्व में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करेगा. अन्नामलाई ने कहा- मैं आम आदमी की नेतृत्व करना चाहता हूं. यह नेतृत्व किसी एक व्यक्ति की छवि या व्यक्तित्व पर आधारित नहीं होगी, बल्कि जनता की आकांक्षाओं और जरूरतों पर आधारित होगी. किसी नेतृत्वक दल से प्रतिस्पर्धा नहीं अन्नामलाई ने यह भी साफ किया कि उनका नया नेतृत्वक आंदोलन किसी मौजूदा पार्टी के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने के उद्देश्य से नहीं बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा- हम यहां किसी से मुकाबला करने के लिए नहीं आए हैं. सत्ताधारी दल हो या विपक्षी दल, सभी को अपनी नीतियां और विचार रखने का अधिकार है. हम भी उचित समय पर अपने विचार और नीतियां जनता के सामने रखेंगे. The post तमिलनाडु में बीजेपी को फिर लगा झटका, अन्नामलाई के बाद उपाध्यक्ष और सचिव ने भी छोड़ी पार्टी appeared first on Naya Vichar.

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रांची में युवक की पिटाई कर रहे थे बदमाश, मदद की गुहार सुनकर भी नहीं रुकी कोतवाली पुलिस

रांची से राजेश कुमार की रिपोर्ट Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करने वाला एक मामला सामने आया है. अपर बाजार स्थित बालाजी बुटिक के पास कुछ बदमाशों ने एक युवक को हथियार के बल पर रोककर उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी. हैरानी की बात यह रही कि घटना के दौरान कोतवाली थाना की पीसीआर वैन मौके के पास से गुजर रही थी, लेकिन पीड़ित की गुहार सुनने के बावजूद पुलिसकर्मी नहीं रुके और आगे बढ़ गए. यह घटना 28 मई 2026 की रात करीब 11 बजे की बताई जा रही है. पुलिस को देखकर जगी उम्मीद, लेकिन मिली निराशा किशोरगंज निवासी पीड़ित युवक महेश कुमार (35) ने बताया कि जब बदमाश उनकी पिटाई कर रहे थे, उसी दौरान कोतवाली थाना की पीसीआर वैन वहां से गुजर रही थी. पुलिस वाहन को देखकर उन्हें उम्मीद जगी कि अब उनकी जान बच जाएगी और पुलिस बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई करेगी. उन्होंने पीसीआर वैन में मौजूद पुलिसकर्मियों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन उनकी आवाज अनसुनी कर दी गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिस वाहन बिना रुके वहां से आगे निकल गया. इसके बाद बदमाशों का मनोबल और बढ़ गया तथा वे लगातार महेश कुमार के साथ मारपीट करते रहे. घटना के दौरान आसपास से कई लोग भी गुजरते रहे, लेकिन किसी ने हस्तक्षेप करने की कोशिश नहीं की. वायरल हुआ घटना का वीडियो घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वायरल फुटेज में कुछ लोग एक युवक को घेरकर मारते हुए दिखाई दे रहे हैं. वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस की भूमिका को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिस समय पर हस्तक्षेप करती तो घटना को रोका जा सकता था. वायरल वीडियो ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि जब पुलिस की मौजूदगी के बावजूद पीड़ित को सहायता नहीं मिली, तो आम नागरिक सुरक्षा के लिए किस पर भरोसा करें. कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी घटना के बाद महेश कुमार ने कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है. दर्ज शिकायत के अनुसार 28 मई की रात सत्येंद्र सिंह, रोहित सिंह, विशाल घोष, मोटी और ऋषभ सिंह ने हथियार के बल पर उन्हें रोका और जमकर मारपीट की. आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी. पीड़ित ने पुलिस को बताया कि हमलावरों ने न केवल शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया बल्कि उन्हें लगातार डराने और धमकाने का भी प्रयास किया. प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है. पहले भी हो चुकी है मारपीट और छिनतई महेश कुमार ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि यह पहली बार नहीं है जब इन लोगों ने उनके साथ मारपीट की हो. उन्होंने बताया कि 8 मई 2026 को भी इन्हीं आरोपियों ने किशोरगंज इलाके में उनके साथ मारपीट की थी और उनकी चेन छीन ली थी. उस मामले में सुखदेवनगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. हालांकि, पीड़ित का आरोप है कि उस मामले में भी पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. कार्रवाई नहीं होने के कारण आरोपियों का मनोबल बढ़ गया और उन्होंने दोबारा इस घटना को अंजाम दिया. कार्रवाई नहीं होने से पीड़ित परिवार में नाराजगी घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से पीड़ित और उनके परिवार में नाराजगी है. शुक्रवार को महेश कुमार और उनके परिजन रांची के सिटी एसपी से मिले और पूरे मामले की जानकारी दी. उन्होंने पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की. सिटी एसपी ने मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है. हालांकि, समाचार लिखे जाने तक आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर बताए जा रहे हैं. इसे भी पढ़ें: कोर्ट मैरिज के बाद जेल के शिव मंदिर में शादी कर रहे थे दूल्हा-दुल्हन, जेलर ने रुकवाई रस्म पुलिस की भूमिका पर उठ रहे सवाल इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस समय पीड़ित मदद के लिए पुकार रहा था, उसी समय पुलिस वाहन का वहां से गुजरना और फिर भी सहायता नहीं करना चर्चा का विषय बना हुआ है. अब लोगों की नजर पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी है. यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है. इसे भी पढ़ें: गुमला में हिंदुस्तानमाला परियोजना का विरोध तेज, 10 किमी पैदल चलकर थाना पहुंचे टाना भगत The post रांची में युवक की पिटाई कर रहे थे बदमाश, मदद की गुहार सुनकर भी नहीं रुकी कोतवाली पुलिस appeared first on Naya Vichar.

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60 फैंस को फ्री में मिला फीफा वर्ल्ड कप का टिकट, तकनीकी गड़बड़ी से मचा बवाल

FIFA World Cup: फीफा वर्ल्ड कप 2026 की टिकट बिक्री के दौरान एक तकनीकी गड़बड़ी की वजह से बड़ा घाटा उठाना पड़ सकता था. फुटबॉल फैंस ने फीफा वर्ल्ड कप का टिकट फ्री (बिना भुगतान किए हुए) में खरीद लिया. इससे फीफा को बहुत नुकसान हुआ. लेकिन फीफा ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए बिना भुगतान के खरीदें गए टिकटों को रद्द कर दिया है और फैंस से टिकट की कीमत चुकाने की अपील की है. 60 फैंस को फ्री में मिला टिकट फीफा ने लगभग 60 फैंस को 3 जून को एक ऑफिशियल मेल भेजा. जिसमें बताया कि चेकआउट के दौरान हुए समस्या के कारण उन्हें टिकट बिना किसी भुगतान के मिला है. यह एक तकनीकी खामी थी और टिकटों की सही कीमत सिस्टम में नहीं दिख सका. हालांकि, फीफा ने यह भी कहा कि फैंस द्वारा खरीदे गए टिकट को सुरक्षित रखा गया है और उन्हें भुगतान के बाद यह टिकट दिया जाएगा. इस मामले से जुड़े एक मेल भी सामने है. जिसे टिकट टॉक नेटवर्क ने ऑनलाइन शेयर किया. मेल के अनुसा फीफा ने टिकट की कीमत में आई गड़बड़ी की पहचान कर उसे ठीक कर दिया है. यह समस्या 21 मई 2026 को आधिकारिक टिकटिंग वेबसाइट पर चेकआउट के समय गलत कीमत दिखाए जाने से हुई. जिसके बाद उसी आधार पर लेन देन पूरा हुआ. फीफा ने फैंस को टिकट खरीदने के लिए 7 दिन का समय दिया मेल के माध्यम से यह भी बताया गया है कि सामान्य बिक्री नियमों के तहत सभी ऐसे टिकट रद्द कर दिए हैं, जिनमें गलत मूल्य वाले टिकट शामिल थे. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि अगर टिकट के लिए कोई भुगतान हुआ है तो उसका पूरा रिफंड दिया जाएगा. वहीं उन फैंस से यह भी अनुरोध किया गया है कि सात दिनों तक वो पैसा जमा करके टिकट ले सकते हैं. यदि सात दिनों के अंदर टिकट का पैसा नहीं दिया तो यह टिकट दूसरे को दे दी जाएगी. फीफा टिकट की कीमतों को लेकर बहस जारी यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब फीफा वर्ल्ड कप 2026 के टिकटों की ऊंची कीमतों को लेकर पहले से ही बहस चल रही है. अप्रैल में फीफा की रीसेल वेबसाइट पर विश्व कप फाइनल के चार टिकट बिक्री के लिए उपलब्ध थे, जिनकी कीमत लगभग 23 लाख अमेरिकी डॉलर प्रति टिकट तक पहुंच गई थी. ऐसे में फाइनल देखने के लिए फैंस को भारी कीमत चुकाना पड़ सकता है. यह भी पढ़ें: फीफा वर्ल्ड कप 2026 में कितने ग्रुप बने, यहां देखें सबसे खतरनाक ग्रुप The post 60 फैंस को फ्री में मिला फीफा वर्ल्ड कप का टिकट, तकनीकी गड़बड़ी से मचा बवाल appeared first on Naya Vichar.

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बीजेपी से MLC बनेंगे पवन सिंह, संजय मयूख फिर बने उम्मीदवार, BJP ने 4 नामों पर लगाई मुहर

BJP MLC Candidate: हिंदुस्तानीय जनता पार्टी ने बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 के लिए अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है. पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने चार उम्मीदवारों को मंजूरी दी है. जारी सूची के अनुसार पवन सिंह, डॉ. संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित को उम्मीदवार बनाया गया है. पार्टी ने इन नामों पर अंतिम सहमति दे दी है. उम्मीदवारों की सूची जदयू ने भी उम्मीदवारों की घोषणा की जनता दल यूनाइटेड ने भी बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए अपने चार उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है. पार्टी ने निशांत कुमार, हिंदुस्तानी मंडल, ललन प्रसाद और शिवरानी देवी को चुनाव मैदान में उतारने का फैसला किया है. जेडीयू की ओर से पटना सीट के लिए निशांत कुमार को उम्मीदवार बनाया गया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सीट से ललन प्रसाद को पार्टी ने अपना प्रत्याशी घोषित किया है. मधुबनी से हिंदुस्तानी मेहता को और पश्चिमी चंपारण से शिवरानी देवी प्रजापति को जदयू ने बिहार विधान परिषद का उम्मीदवार बनाया है. जदयू में तीन अति पिछड़े, भाजपा में दो सवर्ण और दो अति पिछड़े एनडीए के आठ घोषित उम्मीदवारों में पांच अतिपिछड़ों को जगह दी गयी है. एक स्वास्थ्य मंत्री नियशांत पिछड़े वर्ग से उम्मीदवार बनाये गये हैं. जबकि भाजपा के चार उम्मीदवारों में संजय मयूख और पवन सिंह सवर्ण उम्मीदवार बनाये गये हैं. जबकि शीला पंडित और अनिल कुमार ठाकुर अति पिछड़े समाज का प्रतिनिधित्व करेंगे. जदयू के चारों नये चेहरे, भाजपा में संजय मयूख तीसरी बार बनेंगे एमएलसी जदयू ने जिन चार उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की है. उनमें सभी नये चेहरे हैं. चारों उम्मीदवार पहली बार किसी सदन के सदस्य होंगे. भाजपा के चार उम्मीदवारों में संजय मयूख तीसरी बार उम्मीदवार बनाये गये हैं. पार्टी ने उनके नाम पर भरोसा जताते हुए एक बार फिर उपरी सदन भेजने का फैसला लिया है. तीन अन्य उम्मीदवार पवन सिंह, अनिल ठाकुर और शीला पंडित पहली बार उम्मीदवार बनायी गयी हैं. कैसे तय होती है जीत 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में 9 विधान परिषद सीटों के लिए चुनाव होना है. ऐसे में जीत का आंकड़ा कुल मतदान करने वाले विधायकों की संख्या के आधार पर तय किया जाता है. अगर सभी 243 विधायक वोट डालते हैं, तो चुनावी नियमों के अनुसार जीत का कोटा निकाला जाता है. इसके लिए कुल वोट मूल्य 24300 माना जाता है, क्योंकि हर विधायक के वोट की कीमत 100 होती है. इसके बाद 24300 को 10 से भाग दिया जाता है, क्योंकि 9 सीटों के साथ एक संख्या और जोड़ी जाती है. इससे आंकड़ा 2430 आता है. इसमें 1 जोड़ने पर जीत का कोटा 2431 हो जाता है. यानी किसी भी उम्मीदवार को जीत दर्ज करने के लिए कम से कम 2431 वोट मूल्य हासिल करना होगा. आसान भाषा में कहें तो लगभग 25 विधायकों की पहली वरीयता का समर्थन किसी उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए पर्याप्त माना जाता है. एनडीए और महागठबंधन की स्थिति वर्तमान समय में विधानसभा में एनडीए के पास जदयू, भाजपा, लोजपा (रामविलास), हम और रालोमो को मिलाकर 202 विधायक हैं. इस संख्या के आधार पर एनडीए आसानी से 8 सीटें जीत सकता है. दूसरी तरफ महागठबंधन के पास राजद, कांग्रेस, माले, सीपीएम और अन्य सहयोगी दलों को मिलाकर 35 से ज्यादा विधायक हैं. इसके अलावा एआईएमआईएम और बसपा के विधायक भी विपक्षी खेमे में हैं. कुल मिलाकर विपक्ष के पास लगभग 41 विधायक हैं, जो एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त हैं. बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें दूसरी वरीयता के वोट क्यों अहम यदि पहली वरीयता के वोटों से सभी सीटों का फैसला नहीं हो पाता, तो दूसरी वरीयता के मतों की गिनती शुरू होती है. इसी प्रक्रिया से पहले भी राज्यसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार शिवेश राम को जीत मिली थी. उस चुनाव में कई उम्मीदवार पहले दौर में ही जीत गए थे. उनके अतिरिक्त वोटों की वैल्यू निकालकर दूसरी वरीयता के आधार पर दूसरे उम्मीदवार को ट्रांसफर किया गया. इसी वजह से शिवेश राम जीत का आंकड़ा पार कर सके थे. इसे भी पढ़ें: ‘खड़े होकर क्या कर रहे, गोली चलाओ’, खान सर के आदेश पर बॉडीगार्ड्स ने दागी गोलियां कोचिंग की छुट्टी होने के बाद पटना पुलिस खान सर पर कस सकती है शिकंजा, प्रशासन ने की ये अपील The post बीजेपी से MLC बनेंगे पवन सिंह, संजय मयूख फिर बने उम्मीदवार, BJP ने 4 नामों पर लगाई मुहर appeared first on Naya Vichar.

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JDU ने जारी की MLC कैंडिडेट्स की लिस्ट, नीतीश के बेटे निशांत भी बने उम्मीदवार

Bihar MLC Election JDU Candidates List: बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. पार्टी ने चार सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर दिए हैं. नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को पार्टी ने पटना से मैदान में उतारा है. कौन कहां से लड़ेंगे चुनाव? पार्टी की ओर से जारी सूची के मुताबिक, निशांत कुमार- पटना, हिंदुस्तानी मेहता- मधुबनी, शिवरानी देवी प्रजापति- पश्चिमी चंपारण और ललन प्रसाद को शेखपुरा से उम्मीदवार बनाया गया है. इन नामों की घोषणा के साथ ही विधान परिषद चुनाव को लेकर नेतृत्वक सरगर्मी तेज हो गई है. निशांत कुमार की उम्मीदवारी पर सबसे ज्यादा चर्चा इस चुनाव में सबसे ज्यादा नजरें निशांत कुमार पर टिकी हैं. वह फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, जबकि राज्य प्रशासन में स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. संवैधानिक प्रावधानों के तहत मंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें शपथ लेने के छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी है. ऐसे में उनका विधान परिषद चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा था. निशांत कुमार पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र हैं. लंबे समय तक सक्रिय नेतृत्व से दूर रहने के बाद अब उनकी औपचारिक नेतृत्वक पारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं. ललन प्रसाद को भी मिला मौका JDU ने ललन प्रसाद को भी उम्मीदवार बनाया है. पार्टी उन्हें संगठन में सक्रिय और जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेताओं में गिनती है. वे अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) समाज से आते हैं और लंबे समय से संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं. स्थानीय स्तर पर पार्टी को मजबूत करने में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें यह मौका दिया गया है. 10 सीटों पर होना है चुनाव बिहार विधान परिषद की कुल 10 सीटों के लिए चुनाव होना है, जिसमें एक सीट पर उपचुनाव भी शामिल है. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून तय की गई है. यदि जरूरत पड़ी तो 18 जून को मतदान कराया जाएगा. Also Read: ‘शिक्षक पढ़ाता है, मीडियाबाजी नहीं करता, हाइलाइट होने के लिए ये सब हो रहा…’, खान सर पर बरसे तेज प्रताप यादव The post JDU ने जारी की MLC कैंडिडेट्स की लिस्ट, नीतीश के बेटे निशांत भी बने उम्मीदवार appeared first on Naya Vichar.

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अमित शाह ने त्रिपुरा में कहा- बाॅर्डर इलाकों में डेमोग्राफिक चेंज को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

Amit Shah : गृहमंत्री अमित शाह ने त्रिपुरा के हिंदुस्तान-बांग्लादेश सीमा पर कहा कि हम डेमोग्राफिक चेंज की इजाजत किसी कीमत पर नहीं देंगे. उन्होंने कहा कि त्रिपुरा की सीमा हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है. उन्होंने यह ऐलान लंकामुरा सीमा चौकी पर बीएसएफ जवानों को संबोधित करते हुए किया. उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि सीआरपीएफ और बीएसएफ के सभी जवान एक पेड़ को अपना भाई बहन या बच्चा मानकर पूरी श्रद्धा से उसकी देखभाल कर रहे हैं. डेमोग्राफिक चेंज को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चेतावनी के अंदाज में कहा कि सीमावर्ती राज्यों में किसी भी डेमोग्राफिक चेंज को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया. उन्होंंने घुसपैठ को रोकने के लिए सख्त निगरानी और स्मार्ट बॉर्डर परियोजना लागू करने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि चाहे त्रिपुरा हो, चाहे पश्चिम बंगाल या फिर बिहार, हम किसी भी कीमत पर डेमोग्राफिक चेंज नहीं होने देंगे. यह हमारा अटल विश्वास और अटल संकल्प है. स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट के माध्यम से की जाएगी निगरानी केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने कहा कि सीमा की सुरक्षा को बेहतर और मजबूत करने के लिए प्रशासन की ओर से स्मार्ट बॉर्डर परियोजना लागू की जा रही है. इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देश के सात से आठ स्थानों पर लागू किया जाएगा. इसमें आधुनिक तकनीक और स्थानीय प्रशासन का समन्वय शामिल किया जाएगा. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर शून्य से लेकर 15 किलोमीटर के दायरे में किसी भी अनधिकृत अतिक्रमण को बिल्कुल बर्दाश्त न करने (Zero-tolerance) की नीति अपनाई गई है. गृहमंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों में कट्टरपंथी केंद्रों,संदिग्ध वाहनों और फर्जी कंपनियों पर कड़ी निगरानी रखने के आदेश दिए हैं. एक पेड़ मां के नाम कोई प्रशासनी कार्यक्रम नहीं विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) के अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हिंदुस्तान ब‍ांग्लादेश बॉर्डर को जोड़ने वाली लंकामुरा सीमा चौकी पर तैनात बीएसएफ के जवानों की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि यहां चौकी स्थापना के लिए कितने पेड़ों को काटना पड़ा, लेकिन खुशी इस बात की है कि हमारे जवान पेड़ लगाने का कार्य कर रहे हैं. गृहमंत्री ने कहा कि एक पेड़ मां के नाम, यह प्रशासनी आदेशों से प्रेरित कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह हमारी स्वाभाविक आदत होनी चाहिए. The post अमित शाह ने त्रिपुरा में कहा- बाॅर्डर इलाकों में डेमोग्राफिक चेंज को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा appeared first on Naya Vichar.

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पटना हाईकोर्ट को मिलीं नई महिला चीफ जस्टिस, जानिए कौन हैं न्यायमूर्ति मीनाक्षी एम. राय

Patna High Court Chief Justice: बिहार की न्यायपालिका के लिए शुक्रवार का दिन खास रहा. न्यायमूर्ति मीनाक्षी एम. राय ने पटना उच्च न्यायालय की नई मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली. पटना के लोकभवन में आयोजित समारोह में बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने उन्हें शपथ दिलाई. इस मौके पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री श्रवण कुमार और पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे. शपथ समारोह में मौजूद अतिथि न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू की जगह संभालेंगी जिम्मेदारी न्यायमूर्ति मीनाक्षी एम. राय ने इस पद पर संगम कुमार साहू का स्थान लिया है. न्यायमूर्ति साहू 4 जून को सेवानिवृत्त हुए थे. अब पटना हाईकोर्ट की कमान न्यायमूर्ति राय के हाथों में होगी. माना जा रहा है कि उनके लंबे अनुभव का लाभ बिहार की न्यायिक व्यवस्था को मिलेगा. 30 साल से ज्यादा का न्यायिक अनुभव सिक्किम से संबंध रखने वाली न्यायमूर्ति मीनाक्षी एम. राय का न्यायिक क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है. उन्होंने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है और न्यायपालिका में अपनी अलग पहचान बनाई है. उनका नाम ईमानदार, अनुभवी और कुशल न्यायिक अधिकारियों में गिना जाता है. दिल्ली यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई न्यायमूर्ति मीनाक्षी राय का जन्म 12 जुलाई 1964 को सिक्किम में हुआ था. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित लेडी श्री राम कॉलेज से नेतृत्व विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की. इसके बाद कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री हासिल की. वर्ष 1990 में उन्होंने दिल्ली बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया और दिल्ली हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में वकालत की. सिक्किम की पहली स्त्री जज बनने का गौरव 1990 में ही उनका चयन सिक्किम न्यायिक सेवा में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सह सिविल जज के पद पर हुआ था. इस उपलब्धि के साथ वह सिक्किम की पहली स्त्री बनीं, जिन्हें इस पद पर नियुक्त किया गया था. यह उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाती है. कई अहम पदों पर निभाई जिम्मेदारी अपने लंबे न्यायिक करियर में न्यायमूर्ति मीनाक्षी राय ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट जज, रजिस्ट्रार जनरल, एनडीपीएस कोर्ट की जज और भ्रष्टाचार निरोधक मामलों की विशेष न्यायाधीश जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया. उन्होंने न्यायपालिका के प्रशासनिक और न्यायिक दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. 2015 में बनीं हाईकोर्ट की जज 15 अप्रैल 2015 को उन्हें सिक्किम हाईकोर्ट का स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था. करीब एक दशक तक हाईकोर्ट में सेवाएं देने के बाद अब उन्हें पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी सौंपी गई है. Also Read: ‘शिक्षक पढ़ाता है, मीडियाबाजी नहीं करता, हाइलाइट होने के लिए ये सब हो रहा…’, खान सर पर बरसे तेज प्रताप यादव The post पटना हाईकोर्ट को मिलीं नई स्त्री चीफ जस्टिस, जानिए कौन हैं न्यायमूर्ति मीनाक्षी एम. राय appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड से गुजरने वाली 10 ट्रेनों के परिचालन में बदलाव, देखें पूरी लिस्ट और डेट

Indian Railways: पुरी रेलवे स्टेशन पर चल रहे प्लेटफॉर्म और यात्री सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों के कारण हिंदुस्तानीय रेलवे ने कई महत्वपूर्ण ट्रेनों के परिचालन में अस्थायी बदलाव करने का निर्णय लिया है. ईस्ट कोस्ट रेलवे द्वारा किए जा रहे इस कार्य को देखते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर रेल मंडल ने प्रभावित ट्रेनों की सूची जारी की है. रेलवे के अनुसार निर्धारित अवधि के दौरान कुल 10 ट्रेनों को शॉर्ट टर्मिनेट और शॉर्ट ऑरिजिनेट किया जाएगा. रेलवे प्रशासन का कहना है कि विकास कार्य पूरा होने के बाद यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी. हालांकि फिलहाल कुछ दिनों तक यात्रियों को यात्रा योजना बनाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी. पुरी-कामाख्या एक्सप्रेस के परिचालन में बदलाव रेलवे द्वारा जारी सूचना के अनुसार 15643 पुरी-कामाख्या एक्सप्रेस 6, 13 और 20 जून को पुरी स्टेशन तक नहीं जाएगी. यह ट्रेन मालतीपतपुर स्टेशन तक ही संचालित होगी. इसी प्रकार 15644 कामाख्या-पुरी एक्सप्रेस 4, 11 और 18 जून को मालतीपतपुर स्टेशन में अपनी यात्रा समाप्त करेगी. इस बदलाव के कारण पुरी जाने वाले यात्रियों को मालतीपतपुर स्टेशन से वैकल्पिक साधनों का उपयोग करना पड़ सकता है. दुरंतो एक्सप्रेस भी रहेगी प्रभावित यात्रियों के बीच लोकप्रिय 22201 सियालदह-पुरी दुरंतो एक्सप्रेस भी इस बदलाव से प्रभावित होगी. यह ट्रेन 5, 8, 10, 12, 15, 17 और 19 जून को मालतीपतपुर स्टेशन में ही अपनी यात्रा समाप्त करेगी. 22202 पुरी-सियालदह दुरंतो एक्सप्रेस 4, 6, 9, 11, 13, 16, 18 और 20 जून को पुरी स्टेशन के बजाय मालतीपतपुर स्टेशन से रवाना होगी. रेलवे अधिकारियों के अनुसार यात्रियों को टिकट और यात्रा संबंधी जानकारी पहले से जांच लेने की सलाह दी गई है ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो. कामाख्या-पुरी एक्सप्रेस के रूट में भी अस्थायी परिवर्तन रेलवे ने बताया कि 15640 कामाख्या-पुरी एक्सप्रेस 7 और 14 जून को मालतीपतपुर स्टेशन में ही अपनी यात्रा समाप्त करेगी. 15639 पुरी-कामाख्या एक्सप्रेस 9 और 16 जून को मालतीपतपुर स्टेशन से ही अपने निर्धारित गंतव्य के लिए रवाना होगी. इन ट्रेनों से यात्रा करने वाले यात्रियों को विशेष रूप से अपनी यात्रा की योजना में बदलाव करने की आवश्यकता होगी. राउरकेला-पुरी एक्सप्रेस पर भी पड़ा असर पुरी स्टेशन पर चल रहे विकास कार्य का असर राउरकेला-पुरी एक्सप्रेस पर भी पड़ा है. रेलवे के अनुसार 18125 राउरकेला-पुरी एक्सप्रेस 4 जून से 19 जून तक खुर्दा रोड स्टेशन में ही अपनी यात्रा समाप्त करेगी. इसी प्रकार 18126 पुरी-राउरकेला एक्सप्रेस 5 जून से 20 जून तक पुरी स्टेशन के बजाय खुर्दा Road स्टेशन से संचालित की जाएगी. इससे ओडिशा और झारखंड के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को कुछ अतिरिक्त व्यवस्थाएं करनी पड़ सकती हैं. मेमू ट्रेनों के परिचालन में भी बदलाव दैनिक यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण 68441 जलेश्वर-पुरी मेमू और 68442 पुरी-जलेश्वर मेमू के परिचालन में भी बदलाव किया गया है. रेलवे के अनुसार दोनों मेमू ट्रेनें 4 जून से 20 जून तक क्रमशः खुर्दा रोड स्टेशन में समाप्त होंगी और वहीं से अपनी यात्रा शुरू करेंगी. इस बदलाव का असर स्थानीय और दैनिक यात्रियों पर अधिक पड़ सकता है, जो नियमित रूप से इन ट्रेनों का उपयोग करते हैं. इसे भी पढ़ें: हटिया-पूर्णिया कोर्ट एक्सप्रेस में ब्रेक बाइंडिंग से मचा हड़कंप, हजारीबाग रोड स्टेशन पर रुकी रही ट्रेन; यात्री परेशान यात्रियों से रेलवे की अपील रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की अद्यतन स्थिति अवश्य जांच लें. विकास कार्य के दौरान ट्रेनों के परिचालन में अस्थायी बदलाव किए गए हैं, इसलिए स्टेशन पहुंचने से पहले समय और प्रस्थान स्थल की जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है. रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पुरी स्टेशन पर चल रहे विकास कार्यों का उद्देश्य यात्रियों को भविष्य में बेहतर सुविधाएं प्रदान करना है. कार्य पूरा होने के बाद स्टेशन की क्षमता और यात्री सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा. इसे भी पढ़ें: बरौनी जंक्शन पर यात्रियों की भारी भीड़, समर स्पेशल ट्रेनों की देरी से बढ़ीं मुश्किलें The post झारखंड से गुजरने वाली 10 ट्रेनों के परिचालन में बदलाव, देखें पूरी लिस्ट और डेट appeared first on Naya Vichar.

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कौन हैं अन्नामलाई जिनके बीजेपी छोड़ने पर मचा हड़कंप? तमिलनाडु की राजनीति में आ सकता है नया मोड़

K Annamalai : के अन्नामलाई तमिलनाडु में बीजेपी के ऐसे नेता थे, जिन्होंने प्रदेश में बीजेपी की अलग पहचान बनाने की कोशिश की और उसकी छवि सहयोगी पार्टी से बदलकर एक स्वतंत्र छवि वाली पार्टी के रूप स्थापित की. उन्होंने अपने कार्यों से तमिलनाडु में बीजेपी की पहचान को मजबूत बनाया और उसका वोट शेयर बढ़ाया, लेकिन जिस अन्नामलाई को तमिलनाडु में बीजेपी के भविष्य के रूप में देखा जा रहा था, वह पार्टी से अलग हो गए हैं और अपनी अलग पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है, आइए समझते हैं कि क्या है इसकी वजह और कौन हैं अन्नामलाई और कैसा रहा है उनका सफर- कौन हैं के अन्नामलाई? तमिलनाडु की नेतृत्व में पिछले कुछ वर्षों में के अन्नामलाई का नाम काफी तेजी से चर्चित हुआ है. इन्होंने अपने बूते अपनी पहचान बनाई. पूर्व आईपीएस अधिकारी के अन्नामलाई का जन्म तमिलनाडु के करूर जिले में हुआ था. इन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद एमबीए किया और फिर 2011 में यूपीएससी की परीक्षा पास की. वे कर्नाटक कैडर के आईपीएस थे. उन्होंने उडुपी और चिकमंगलूर जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में काम किया. उनकी छवि एक ईमानदार पुलिस अधिकारी की थी, जिन्हें सिंघम उपनाम भी दिया गया था. 2011 से 2019 तक उन्होंने पुलिस सेवा में काम किया और फिर 2019 में इस्तीफा देकर नेतृत्व में आ गए. महज 42 साल के अन्नामलाई नेतृत्व के क्षेत्र में भी कुछ अलग करना चाहते हैं. उन्होंने दो बार चुनाव लड़ा, लेकिन एक बार भी उन्हें विजय नहीं मिली. वे एक बार विधानसभा का चुनाव लड़े थे और दूसरी बार लोकसभा का. बीजेपी के साथ नेतृत्वक सफर गृहमंत्री अमित शाह के साथ अन्नामलाई आईपीएस की नौकरी छोड़ने के बाद अगस्त 2020 में अन्नामलाई ने बीजेपी ज्वाइन कर लिया. उस वक्त उन्हें तमिलनाडु बीजेपी का उपाध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन कुछ समय बाद ही उन्हें तमिलनाडु बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने पार्टी को प्रदेश में आगे बढ़ाने का काफी प्रयास किया. उनके सबसे चर्चित अभियानों में ‘एन मन्न, एन मक्कल’ (मेरी धरती, मेरे लोग) यात्रा है. इस यात्रा के जरिए अन्नामलाई ने पूरे तमिलनाडु का दौरा किया और खुद को बीजेपी को राज्य स्तर पर स्थापित करने का पूरा प्रयास किया. इस काम में उन्हें सफलता भी मिली और वे बीजेपी के लिए भविष्य के नेता बन गए. अन्नामलाई ने लगातार डीएमसे प्रशासन पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं के आरोप लगाए. उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस और दस्तावेजों के साथ किए गए हमले ने खूब सुर्खियां भी बटोरीं. रिश्तों में तकरार कैसे शुरू हुई? जिस अन्नामलाई को बीजेपी के भविष्य के तौर पर देखा जा रहा था. उसी अन्नामलाई के साथ बीजेपी के रिश्ते खराब होने लगे. इसकी सबसे बड़ी वजह बीजेपी और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन था. अन्नामलाई डीएमके और एआईएडीएमके के खिलाफ नेतृत्व करना चाहते हैं, जबकि बीजेपी उनका साथ चाह रही थी. अन्नामलाई यह चाहते थे कि इन दोनों पार्टियों से अलग विकल्प के रूप में बीजेपी उभरे, ताकि उसे जनता का पूरा समर्थन मिले. लेकिन बीजेपी नेतृत्व ने 2026 विधानसभा चुनाव से पहले AIADMK के साथ गठबंधन कर लिया. यह गठबंधन अन्नामलाई को बिलकुल पसंद नहीं आया. इसी बीच उन्हें तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई. कई रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि इन वजहों से अन्नामलाई पार्टी में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे. अन्नामलाई ने क्यों दिया इस्तीफा? अन्नामलाई ने पार्टी छोड़ने के बाद यह बयान दिया है कि वे अपनी पहचान से दूर हो रहे थे. उन्होंने कहा कि मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं एक तमिलियिन हूं या फिर बीजेपी का सदस्य. वे यह बिलकुल नहीं चाहते थे कि बीजेपी द्रविड़ पहचान वाली पार्टियों से समझौता कर लें. वे पार्टी की स्वतंत्र पहचान चाहते थे, जब उन्हें ऐसा प्रतीत हुआ कि पार्टी उनकी राय को दरकिनार कर रही है तो उन्होंने पार्टी छोड़ दी.अन्नामलाई ने कहा है कि वे अपना रास्ता खुद तय करना चाहते हैं. उन्होंने एक नए नेतृत्वक आंदोलन की घोषणा भी की है, जो कथित तौर पर व्यक्तिपूजा और वंशवादी नेतृत्व के खिलाफ होगा. उनकी पार्टी अगला विधानसभा चुनाव लड़ेगी, जिसकी तैयारी शुरू कर दी गई है. ये भी पढ़ें : बंगाल की नेतृत्व में संक्रमण काल, ममता के सामने कुनबे को जोड़कर रखने की चुनौती, क्या होगा भविष्य? देश में आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त हुईं स्त्रीएं, लेकिन 22.3% अभी भी पतियों से पिट रहीं The post कौन हैं अन्नामलाई जिनके बीजेपी छोड़ने पर मचा हड़कंप? तमिलनाडु की नेतृत्व में आ सकता है नया मोड़ appeared first on Naya Vichar.

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7.7% GDP ग्रोथ से चमकी अर्थव्यवस्था, अब डेटा में जुड़ेंगे ई-व्हीकल और घरेलू नौकर

India GDP : हिंदुस्तानीय वित्तीय स्थिति के लिए एक बहुत ही शानदार समाचार आई है. देश की इकोनॉमी ने पूरे साल यानी वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में 7.7% की रफ्तार से तरक्की की है. वहीं, अगर आखिरी तिमाही (जनवरी-मार्च) की बात करें, तो इस दौरान जीडीपी (GDP) ग्रोथ 7.8% दर्ज की गई है. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा 5 जून को जारी किए गए ये आंकड़े प्रशासन के अपने पुराने अनुमान (7.6%) से भी बेहतर रहे हैं. इस शानदार बढ़त के साथ ही प्रशासन ने जीडीपी को मापने के तरीके और पैमाने में भी एक ऐतिहासिक बदलाव किया है. मैन्युफैक्चरिंग में सुस्ती, पर GVA की रफ्तार बरकरार तिमाही-दर-तिमाही के आधार पर देखें तो विकास दर में थोड़ी सी नरमी आई है, जिसकी मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार का धीमा पड़ना है. तीसरी तिमाही में जो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 12.8% के ऊंचे स्तर पर था, वह चौथी तिमाही में घटकर 7.3% पर आ गया. हालांकि, देश की ग्रॉस वैल्यू ऐडेड (GVA) ग्रोथ पूरे साल और चौथी तिमाही दोनों में 7.9% की मजबूत स्थिति पर बनी हुई है. अगले साल थोड़ी धीमी हो सकती है रफ्तार सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़ों से ठीक पहले हिंदुस्तानीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी अगले वित्त वर्ष (2026-27) के लिए अपने अनुमान जारी किए हैं. आरबीआई के मुताबिक, अगले साल आर्थिक विकास की यह रफ्तार थोड़ी धीमी पड़कर 6.6% रह सकती है. वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए तिमाही आधार पर अनुमान क्यों बदला गया जीडीपी नापने का पैमाना ? प्रशासन ने इस बार जीडीपी के आंकड़ों को नए बेस ईयर 2022-23 के पैमाने पर कैलकुलेट किया है. इससे पहले तक साल 2011-12 को आधार वर्ष (Base Year) माना जाता था. क्यों था जरूरी: पुराना पैमाना 14 साल पुराना हो चुका था. उस समय आज की तरह यूपीआई (UPI), जोमैटो, ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स और गिग इकोनॉमी जैसी चीजें मुख्यधारा में नहीं थीं. क्या-क्या नया जुड़ा: आर्थिक तरक्की की सटीक तस्वीर देखने के लिए अब जीडीपी की नई सीरीज में जीएसटी नेटवर्क, ई-वाहन (E-Vehicles) डेटाबेस और घरों में काम करने वाले कुक, ड्राइवर व घरेलू नौकरों की सेवाओं से जुड़ा डेटा भी शामिल किया गया है. 2022-23 ही क्यों चुना: यह साल पूरी तरह से ‘सामान्य’ था. कोरोना महामारी खत्म हो चुकी थी, वित्तीय स्थिति स्थिर थी और डिजिटल इंडिया पूरी तरह स्थापित हो चुका था. क्या होता है बेस ईयर और कैसे निकलती है GDP? बेस ईयर (Base Year): यह वह साल होता है जिसकी कीमतों को फिक्स मानकर आज की तरक्की को मापा जाता है. इससे पता चलता है कि देश में उत्पादन (Production) सच में बढ़ा है या सिर्फ चीजें महंगी (महंगाई की वजह से) हुई हैं. जीडीपी निकालने का गणित: अर्थशास्त्र में जीडीपी की गणना करने के लिए एक खास फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जाता है. आम आदमी पर क्या होगा असर? इस बदलाव का आपकी जेब पर तुरंत कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा. लेकिन सही और सटीक आंकड़ों की मदद से प्रशासन बेहतर नीतियां और योजनाएं बना सकेगी. जब सही जगह पैसा लगेगा, तो देश में विदेशी निवेश (Foreign Investment) बढ़ेगा और नए रोजगार पैदा होंगे, जिसका फायदा घूम-फिरकर आने वाले समय में देश के हर नागरिक को मिलेगा. Also Read : क्या हिंदुस्तान में जल्द आने वाले हैं प्लास्टिक के नोट ? RBI ने सबकुछ साफ कर दिया The post 7.7% GDP ग्रोथ से चमकी वित्तीय स्थिति, अब डेटा में जुड़ेंगे ई-व्हीकल और घरेलू नौकर appeared first on Naya Vichar.

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