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10 रुपये छुट्टे के लिए ऑटो ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या, हैदराबाद में दिल दहलाने वाली वारदात

Hyderabad Auto Driver Murder : बात सिर्फ 10 रुपये के छुट्टे से शुरू हुई थी. मामला इतना बढ़ गया कि लोगों ने ऑटो ड्राइवर को पीट-पीट कर मार डाला. घटना रविवार शाम तेलंगाना के वट्टेपल्ली की है. ऑटो ड्राइवर का नाम मुकरम बताया जा रहा है, जो वट्टेपल्ली से परिवार के साथ अपने घर जा रहा था. इसी दौरान रास्ते में मिली एक स्त्री सवारी से उसकी 10 रुपये के कारण बहस हो गई और भीड़ ने उसे मौत के घाट उतार दिया. क्या है पूरा मामला मुकरम अपने परिवार के साथ अपनी ऑटो से घर जा रहा था. रास्ते में एक स्त्री उसकी ऑटो में बैठती है, जिसे कुछ ही दूरी तक का सफर तय करना था. वह अपने गंतव्य तक पहुंचकर 200 रुपये का नोट देती है. चालक के पास छुट्टे नहीं थे. इसी बात पर दोनों के बीच बहस छिड़ गई. मामला इतना बढ़ गया कि स्त्री ने अपने बेटे को फोन लगा दिया. स्त्री के बेटे का नाम अजीम अपने साथ कुछ लोगों को लेकर पहुंचा और ऑटो ड्राइवर के साथ मारपीट करने लग गया. भीड़ ने उन्हें इतनी बेरहमी से मारा कि उसकी मौत हो गई. पुलिस ने शुरू की जांच, परिजनों को सख्त कार्रवाई का भरोसा वारदात की सूचना मिलते ही राजेंद्रनगर डीसीपी श्रीनिवास (IPS) और फलकनुमा थाने की पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और मामले की पड़ताल शुरू की. वहीं, बहादुरपुरा के विधायक मोहम्मद मुबीन ने भी मौके का मुआयना किया और पीड़ित परिवार से मिलकर संवेदना जताई. उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि इस वारदात में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. ये भी पढ़ें: 21 सितंबर का मौसम : UP-बिहार से MP-झारखंड तक नजर; देखें इन 20 राज्यों की Weather Update The post 10 रुपये छुट्टे के लिए ऑटो ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या, हैदराबाद में दिल दहलाने वाली वारदात appeared first on Naya Vichar.

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राम मंदिर दान चोरी केस में अहम मोड़, 22 सितंबर तक चार्जशीट नहीं हुई दाखिल तो आरोपियों को मिल सकती है जमानत

Ram Mandir Donation Theft : अयोध्या में राम मंदिर दान चोरी मामले में अब जांच एजेंसी के सामने चार्जशीट दाखिल करने की समय सीमा पूरी होने वाली है. मामले में 8 आरोपियों के खिलाफ दर्ज केस की जांच को 22 सितंबर को 90 दिन पूरे हो जाएंगे. ऐसे में अगर तय समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं होती है, तो आरोपियों के लिए जमानत मिल सकती है . 22 सितंबर को पूरे होंगे 90 दिन राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के मामले में 25 जून को आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. इसके बाद सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था. अब मामले की जांच को 90 दिन पूरे होने वाले हैं. ऐसे में मंगलवार, 22 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करना जांच एजेंसी के लिए अहम माना जा रहा है. अगर इस अवधि में चार्जशीट दाखिल नहीं किया जाता है, तो आरोपियों की ओर से वैधानिक जमानत का दावा किया जा सकता है. 8 आरोपियों के खिलाफ दर्ज है केस एफआईआर में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्र को नामजद किया गया है. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. इनमें चोरी, कर्मचारी के रूप में संपत्ति की चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी की संपत्ति को रखने या ठिकाने लगाने में मदद करने और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराएं शामिल हैं. 18 सितंबर को बढ़ी थी न्यायिक हिरासत राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत 18 सितंबर को बढ़ाई गई थी. आरोपियों के वकील अधिवक्ता कुल शेखर सिंह ने पीटीआई-भाषा को बताया था कि अयोध्या की भ्रष्टाचार निवारण अदालत के विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा ने यह आदेश दिया. अधिवक्ता के मुताबिक, अदालत ने 21 सितंबर को मामले की सुनवाई की तारीख तय की थी. साथ ही पुलिस को अगली सुनवाई में केस डायरी पेश करने का निर्देश दिया गया था. अब तक 79.85 लाख रुपये बरामद मामला राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए चढ़ावे के कथित गबन से जुड़ा है. अभियोजन पक्ष के अनुसार, जांच के दौरान अब तक 79.85 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं. जांच में सामने आए तथ्यों और बरामदगी के आधार पर पुलिस की ओर से मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है. अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि 22 सितंबर तक जांच एजेंसी अदालत में चार्जशीट दाखिल करती है या नहीं. Also Read : शाहजहांपुर में सांड बना काल! अचानक बाइक के सामने आया, जोरदार टक्कर के बाद हुआ कुछ ऐसा कि परिवार में मचा कोहराम The post राम मंदिर दान चोरी केस में अहम मोड़, 22 सितंबर तक चार्जशीट नहीं हुई दाखिल तो आरोपियों को मिल सकती है जमानत appeared first on Naya Vichar.

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Asian Games 2026: शूटिंग में भारत को तीसरा मेडल, रुद्रांक्ष-हिमांशु-पार्थ की तिकड़ी ने सिल्वर पर लगाया निशाना

Asian Games 2026: एशियन गेम्स 2026 में हिंदुस्तान के खाते में एक और मेडल जुड़ गया है. शूटिंग रेंज में हिंदुस्तानीय निशानेबाजों का शानदार प्रदर्शन जारी है. मेन्स 10 मीटर एयर राइफल टीम प्रतियोगिता में हिंदुस्तान ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया है. रुद्रांक्ष बालासाहेब पाटिल, हिमांशु ढिल्लों और पार्थ राकेश माने की तिकड़ी ने हिंदुस्तान को यह पदक दिलाया. हिंदुस्तानीय टीम ने कुल 1890.1 अंक हासिल किए और दूसरे स्थान पर रही. चीन ने 1899 अंकों के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि दक्षिण कोरिया ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. रुद्रांक्ष, हिमांशु और पार्थ ने लगाया मेडल पर निशाना हिंदुस्तान की ओर से मेन्स 10 मीटर एयर राइफल टीम गेम में रुद्रांक्ष पाटिल, हिमांशु ढिल्लों और पार्थ माने मैदान में उतरे थे. तीनों निशानेबाजों ने मिलकर हिंदुस्तान को पोडियम तक पहुंचाया. रुद्रांक्ष पाटिल हिंदुस्तानीय शूटिंग के अनुभवी नामों में शामिल हैं. वहीं हिमांशु ढिल्लों भी जूनियर स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं. पार्थ माने ने भी टीम के लिए अहम योगदान दिया. एशियन गेम्स 2026 के लिए हिंदुस्तान की मेन्स 10 मीटर एयर राइफल टीम में इन तीनों का चयन हुआ था. ये भी पढ़ें: Asian Games 2026: हिंदुस्तान को मिला पहला मेडल, शूटिंग में स्त्री टीम ने जीता सिल्वर हिंदुस्तान का एशियन गेम्स में तीसरा सिल्वर यह एशियन गेम्स 2026 में हिंदुस्तान का तीसरा सिल्वर मेडल है. इससे पहले हिंदुस्तानीय निशानेबाजों ने स्त्री 10 मीटर एयर राइफल की टीम प्रतियोगिता में सिल्वर जीता था. एलावेनिल वलारिवन, सोनम मस्कर और विदार्शा विनोद की तिकड़ी ने हिंदुस्तान को यह पदक दिलाया था. स्त्री 10 मीटर एयर राइफल के व्यक्तिगत मुकाबले में भी एलावेनिल वलारिवन ने सिल्वर मेडल जीता. वह गोल्ड से सिर्फ 0.6 अंक दूर रह गई थीं. शूटिंग में लगातार मिल रहे मेडल एशियन गेम्स 2026 में हिंदुस्तानीय शूटिंग दल ने शुरुआत से ही अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है. स्त्री 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में सिल्वर के बाद अब पुरुष टीम ने भी रजत पदक जीत लिया है. हिंदुस्तानीय निशानेबाजों की नजरें अब बाकी शूटिंग स्पर्धाओं में भी पदक जीतने पर होंगी. हिंदुस्तान के अब तक के सिल्वर मेडल स्त्री 10 मीटर एयर राइफल टीम – एलावेनिल वलारिवन, सोनम मस्कर, विदार्शा विनोद स्त्री 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत – एलावेनिल वलारिवन पुरुष 10 मीटर एयर राइफल टीम – रुद्रांक्ष पाटिल, हिमांशु ढिल्लों, पार्थ माने ये भी पढ़ें: Asian Games 2026: इलावेनिल वलारिवन ने शूटिंग में जीता सिल्वर, हिंदुस्तान को मिला दूसरा मेडल The post Asian Games 2026: शूटिंग में हिंदुस्तान को तीसरा मेडल, रुद्रांक्ष-हिमांशु-पार्थ की तिकड़ी ने सिल्वर पर लगाया निशाना appeared first on Naya Vichar.

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UPI Transaction Fee: डिजिटल पेमेंट पड़ा महंगा? दुकानदारों के काम आएंगे ये कानूनी और सुरक्षित बैंकिंग तरीके

देश भर में डिजिटल लेनदेन की तस्वीर बदलने वाला यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और वित्त मंत्रालय के हालिया दिशा-निर्देशों के अनुसार, ₹2,000 से अधिक राशि वाले चुनिंदा मर्चेंट (P2M) यूपीआई ट्रांजेक्शन पर 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू कर दिया गया है. हालांकि, आम ग्राहकों और छोटे दुकानदारों के लिए यूपीआई अब भी पूरी तरह मुफ्त है. इस नए वित्तीय बदलाव के बाद व्यापारियों के बीच ट्रांजेक्शन लागत घटाने को लेकर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं. क्या है नया MDR नियम और कारोबारियों पर इसका सीधा असर? एनपीसीआई के ढांचे के अनुसार, ₹2,000 तक के सभी प्रकार के मर्चेंट भुगतान और आम नागरिकों के बीच होने वाले पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांसफर पूरी तरह शुल्क-मुक्त रखे गए हैं. MDR का 0.4% शुल्क केवल उन बड़े मर्चेंट खातों पर लागू होता है जिनकी मासिक यूपीआई डिजिटल प्राप्ति निर्धारित सीमाओं से अधिक है. उदाहरण के तौर पर, यदि कोई बड़ा कारोबारी ₹5,000 का सिंगल यूपीआई पेमेंट स्वीकार करता है, तो उसे ₹20 का शुल्क प्रोसेसिंग फीस के रूप में चुकाना होगा. यह राशि ग्राहक से वसूलना गैर-कानूनी है, इसलिए व्यापारियों को अपने ऑपरेटिंग मार्जिन और पेमेंट मॉडल का नए सिरे से विश्लेषण करना पड़ रहा है. क्या पर्सनल QR कोड और बिल स्प्लिटिंग हैं सुरक्षित विकल्प? कई छोटे और मध्यम व्यापारी MDR से बचने के लिए कमर्शियल मर्चेंट अकाउंट के बजाय पर्सनल क्यूआर (P2P) कोड का उपयोग करने या बड़े बिल को ₹2,000 से कम के टुकड़ों में बांटने (Bill Splitting) जैसे रास्ते अपना रहे हैं. बैंकिंग विशेषज्ञों और वित्तीय संस्थाओं के अनुसार, व्यावसायिक भुगतानों को जानबूझकर व्यक्तिगत ट्रांसफर के रूप में दिखाना बैंक और यूपीआई सेवा प्रदाताओं की शर्तों का सीधा उल्लंघन है. इसके अलावा, नियमित रूप से बड़े बिलों को छोटे-छोटे भुगतानों में विभाजित करने पर बैंकिंग सिस्टम के फ्रॉड डिटेक्शन एल्गोरिदम खाते को संदिग्ध श्रेणी में डाल सकते हैं, जिससे खाता फ्रीज होने का जोखिम रहता है. डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर और स्टैटिक QR का व्यावहारिक तालमेल व्यापारिक लागत को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से नियंत्रित करने के लिए विशेषज्ञ सही बैंकिंग समाधान चुनने की सलाह देते हैं. छोटे दुकानों के लिए महंगे साउंडबॉक्स या डिजिटल पॉइंट ऑफ सेल (PoS) डिवाइस के रेंटल चार्ज से बचने के लिए साधारण स्टैटिक क्यूआर कोड एक किफ़ायती साधन है. इसके अलावा, ₹1 लाख प्रति माह तक का डिजिटल लेनदेन करने वाले छोटे व्यापारी ‘P2PM’ (स्मॉल मर्चेंट) श्रेणी के तहत 0% MDR छूट का लाभ उठा सकते हैं. वहीं बड़े सप्लायरों या थोक खरीदारी के लिए यूपीआई के स्थान पर सीधे एनईएफटी (NEFT), आईएमपीएस (IMPS) या बैंक-टू-बैंक ट्रांसफर का विकल्प अपनाना ज्यादा व्यावहारिक साबित हो सकता है. FAQs: UPI MDR और मर्चेंट भुगतानों से जुड़े मुख्य सवाल 1. क्या ₹2,000 से ऊपर के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर आम ग्राहकों को अतिरिक्त चार्ज देना होगा? नहीं, एनपीसीआई के नियमानुसार आम ग्राहकों के लिए सभी यूपीआई भुगतान 100% मुफ्त हैं. 0.4% MDR का भुगतान केवल व्यापारी को अपने मर्चेंट अकाउंट से करना होता है. 2. P2PM यानी छोटे दुकानदारों के लिए MDR के क्या नियम हैं? जिन छोटे दुकानदारों या रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की मासिक यूपीआई प्राप्तियां ₹1 लाख तक हैं, उन्हें P2PM श्रेणी में रखा गया है और उनके लिए ₹2,000 से ऊपर के भुगतानों पर भी MDR पूरी तरह माफ है. 3. क्या दुकानदार MDR की भरपाई के लिए ग्राहक से अलग से पैसा ले सकता है? बिलकुल नहीं, मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को ग्राहक पर डालना बैंकिंग नियमों के खिलाफ है. व्यापारी को केवल प्रदर्शित वस्तु या सेवा का तय मूल्य ही स्वीकार करना होता है. ये भी पढ़ें: UPI MDR Fees Update: जब डिजिटल पेमेंट से सिस्टम के पैसे बचते हैं, तो अब मर्चेंट्स पर चार्ज क्यों? समझें पूरा इनसाइड कैलकुलेशन ये भी पढ़ें: बिना इंटरनेट के भी फीचर फोन से कर पाएंगे UPI पेमेंट, PhonePe ने शुरू की नई सर्विस, जानें कैसे करेगी काम The post UPI Transaction Fee: डिजिटल पेमेंट पड़ा महंगा? दुकानदारों के काम आएंगे ये कानूनी और सुरक्षित बैंकिंग तरीके appeared first on Naya Vichar.

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IMD Rain Alert: बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव, 4 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट

Weather Alert: बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तरी अंडमान सागर के ऊपर बना निम्न दबाव क्षेत्र अब धीरे-धीरे प्रभावी हो रहा है. इसके असर से अगले कुछ दिनों में पूर्वी और मध्य हिंदुस्तान के कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. हिंदुस्तान मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 22 से 24 सितंबर के दौरान उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश, 22 से 25 सितंबर तक दक्षिणी ओडिशा, 23 से 25 सितंबर तक छत्तीसगढ़ और तेलंगाना तथा 24-25 सितंबर को विदर्भ में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. झारखंड-बिहार में भी बारिश का दौर IMD के अनुसार 22 से 26 सितंबर के दौरान झारखंड, ओडिशा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कई स्थानों पर बारिश हो सकती है. बिहार में 24 से 26 सितंबर के दौरान काफी व्यापक से व्यापक बारिश की संभावना जताई गई है. झारखंड में 21 से 26 सितंबर तक काफी व्यापक से व्यापक बारिश का अनुमान है. राज्य में 23 से 25 सितंबर के दौरान कहीं-कहीं भारी बारिश भी हो सकती है. बिहार में 24 से 26 सितंबर के दौरान भारी बारिश की संभावना है. वहीं 22 से 26 सितंबर के दौरान गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है. 23-24 सितंबर को आंधी और तेज हवाओं का भी अलर्ट ओडिशा में 23 और 24 सितंबर को तेज हवाओं के साथ आंधी की संभावना है. हवा की रफ्तार 50-60 किमी प्रति घंटा और झोंकों के साथ 70 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. तेलंगाना में भी 23 से 25 सितंबर के दौरान 50-60 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने और झोंकों के साथ इसकी गति 70 किमी प्रति घंटा तक पहुंचने की संभावना है. राज्य/क्षेत्र तारीख बारिश का अनुमान दक्षिणी ओडिशा 22-25 सितंबर भारी से बहुत भारी बारिश उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश 22-24 सितंबर भारी से बहुत भारी बारिश छत्तीसगढ़ 23-25 सितंबर भारी से बहुत भारी बारिश तेलंगाना 23-25 सितंबर भारी से बहुत भारी बारिश विदर्भ 24-25 सितंबर भारी से बहुत भारी बारिश दक्षिणी ओडिशा 23-24 सितंबर कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश 23-24 सितंबर कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश दक्षिणी छत्तीसगढ़ 24 सितंबर कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश बंगाल की खाड़ी में समुद्र रहेगा खराब निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से बंगाल की खाड़ी में भी समुद्र की स्थिति खराब से बहुत खराब हो सकती है. IMD के अनुसार 22 सितंबर को मध्य बंगाल की खाड़ी, जबकि इसके बाद पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में समुद्र की स्थिति खराब से बहुत खराब रहने की संभावना है. 23-24 सितंबर को दक्षिणी ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तटों के पास 55-65 किमी प्रति घंटा की तेज हवाएं चल सकती हैं. मछुआरों के लिए खास चेतावनी IMD ने मछुआरों को बंगाल की खाड़ी और संबंधित तटीय क्षेत्रों में नहीं जाने की सलाह दी है. 22 से 24 सितंबर के दौरान पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तथा आंध्र प्रदेश-ओडिशा-पश्चिम बंगाल के तटों के पास समुद्र में जाने से बचने की सलाह है. The post IMD Rain Alert: बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव, 4 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट appeared first on Naya Vichar.

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Asian Games 2026 Day 2 Live: मेडल की संख्या बढ़ाने उतरेगा भारत, दूसरे दिन इन खेलों पर रहेगी नजरें

एशियन गेम्स 2026 के दूसरे दिन का स्वागत है. हिंदुस्तान मेडल की संख्या बढ़ाने के इरादे से उतरेगा. 21 सितंबर को एशियन गेम्स में दूसरे दिन के स्पोर्ट्सों से जुड़े अपडेट्स के लिए इस पेज को अपडेट करते रहिए. The post Asian Games 2026 Day 2 Live: मेडल की संख्या बढ़ाने उतरेगा हिंदुस्तान, दूसरे दिन इन स्पोर्ट्सों पर रहेगी नजरें appeared first on Naya Vichar.

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Karma Puja Rules: करमा पूजा के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें क्या करें और क्या नहीं

Karma Puja Rules: करमा पूजा आदिवासी समुदाय का प्रमुख लोकपर्व है. इस साल यह पर्व 22 सितंबर, मंगलवार को है. परंपरानुसार, इस दिन करमा देवता की पूजा की जाती है. साथ ही, घर-परिवार में सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना की जाती है. परंपरानुसार, करमा पूजा के दिन जहां कुछ कार्यों को करना शुभ माना गया है वहीं, इस दिन कुछ कामों को करने से बचना चाहिए. आइए, जानते हैं कि करमा पूजा के दिन क्या करें और क्या नहीं. करमा पूजा के दिन क्या करें घर की साफ-सफाई और लेपन-धार्मिक परंपरा के अनुसार करमा पूजा के दिन घर, आंगन और पूजा स्थान की अच्छी तरह साफ-सफाई करें. साथ ही पूजा वाले स्थान को पवित्र करने के लिए गोबर या मिट्टी से लीपें या गंगाजल शुद्ध करें. संभव हो तो व्रत रखें- परंपरा के अनुसार, करमा पूजा के दिन बहन अपने भाई की लंबी आयु, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि के लिए निर्जल (बिना पानी के) व्रत रखती हैं. ऐसे में अगर संभव हो, तो निर्जल व्रत रखें. डाल की स्थापना करें- करमा पूजा के दिन घर के आंगन में करम पेड़ की एक डाली लगाना शुभ माना जाता है. सुनें करमा-धरमा की कथा- करमा पूजा पर शाम के वक्त करमा देवता की पूजा करें. इसके बाद करमा-धरमा की कथा पढें या सुनें. परंपरिक नृत्य के साथ गीत- करमा पूजा के दिन नृत्य करने और गीत गाने की परंपरा है. इसलिए इस दिन ढोल-नगाड़े के साथ पारंपरिक नृत्य करें और गीत गाएं. देवी-देवता को चढ़ाएं नया अन्न- करमा पूजा के अगले दिन देवी-देवताओं को नया अन्न (नवान्न) चढ़ाएं. इसके बाद प्रसाद लें. ये भी पढ़ें: Karma Puja 2026: इस साल किस दिन होगी करमा पूजा, जानें करम देवता की पूजा और व्रत विधि करमा पूजा पर क्या न करें? अपवित्रता (अशुद्धि) न रखें- मान्यतानुसार करमा पूजा के दिन मन, वचन और शरीर से पवित्र रहना चाहिए. गंदे कपड़े पहनकर या अशुद्ध अवस्था में पूजा करने से बचें. तामसिक चीजों का सेवन ना करें- करमा पूजा के दिन व्रत के दौरान मांस, मछली, लहसुन-प्याज और शराब इत्यादि तामसिक चीजों का सेवन न करें. डाल का अपमान न करें- करमा पूजा के दिन भूल से भी ‘करम डाल’ का अपमान न करें. इसके अलावा करम पेड़ की डालियों न तोड़ें और न ही उसे अपमानजनक तरीके जमीन पर रखें. गुस्सा करने और अपशब्द बोलने से बचें- करमा पूजा के दिन किसी को भी अपशब्द न कहें. साथ ही इस दिन किसी पर गुस्सा न करें. व्रत-पूजा के दौरान सोने से बचें- करमा व्रत पूजा नियम के अनुसार, व्रत करने वाली स्त्रीएं कथा और पूजा खत्म होने तक जागती हैं. ऐसे में इस दौरान सोने से बचना चाहिए. करमा पूजा के दिन क्या करें और क्या ना करें को दर्शाती इंफोग्राफिक्स (Image- AI Generated) ये भी पढ़ें: Pitru Paksha 2026: 26 सितंबर से शुरू हो रहा पितृ पक्ष, नोट करें पूर्णिमा से सर्वपितृ अमावस्या की सही तिथियां The post Karma Puja Rules: करमा पूजा के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें क्या करें और क्या नहीं appeared first on Naya Vichar.

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Explainer: भारत से बांग्लादेश जा रही हिलसा मछली, क्यों बदली दशकों पुरानी ट्रेड की दिशा?

Bangladesh Hilsa Import: बांग्लादेश की हिलसा मछली की मांग हिंदुस्तान में बहुत अधिक है. खासकर दुर्गा पूजा के समय मछली की मांग और बढ़ जाती है. लेकिन इस बार मामला कुछ उल्टा पड़ गया. बांग्लादेश से हिंदुस्तान आने वाली हिलसा अब हिंदुस्तान से बांग्लादेश भेजी जा रही है. यह सुनकर आपको शायद यकीन न हो, लेकिन ICAR-CIFRIके मुताबिक, पिछले दो महीनों में हिंदुस्तान ने बांग्लादेश को करीब 500 टन हिलसा का निर्यात किया है. तो आइए जानते हैं, आखिर ऐसा क्या हो गया कि हिलसा मछली के बड़े निर्यातक देश बांग्लादेश को अब हिंदुस्तान से हिलसा क्यों मंगानी पड़ रही है. ICAR के अनुसार, हिंदुस्तान ने पिछले दो महीनों में बांग्लादेश को लगभग 500 टन हिलसा मछली का निर्यात किया है. खेप का एक बड़ा हिस्सा गुजरात, विशेषकर भरूच क्षेत्र से आया है, जबकि कुछ आपूर्ति पश्चिम बंगाल के हावड़ा थोक मछली बाजार के माध्यम से भी हुई है. चटगांव और सिलहट में अधिक अंडे वाली हिलसा मछली की काफी मांग है, जबकि अंडों को फिर से निर्यात के लिए प्रसंस्कृत भी किया जा रहा है. कुछ मछलियों का उपयोग सूखे और नमकीन उत्पादों के लिए भी किया जा रहा है. बांग्लादेश हिंदुस्तान से क्यों खरीद रहा है हिलसा मछली? बांग्लादेश में पद्मा और मेघना की हिलसा को सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है, लेकिन घरेलू उत्पादन में कमी और बढ़ती कीमतों के बीच गुजरात की हिलसा वहां एक सस्ता विकल्प बन रही है. India Today ने बांग्लादेशी अकादमिक और कार्यकर्ता रेजाउर रहमान लेनिन के हवाले से बताया है कि गुजरात की हिलसा का इस्तेमाल स्थानीय आपूर्ति की कमी को पूरा करने के साथ-साथ औद्योगिक प्रोसेसिंग के लिए भी किया जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के शुरुआती साढ़े नौ महीनों में हिंदुस्तान से करीब 4.27 लाख किलो हिलसा बांग्लादेश पहुंची. इसमें बड़ी मात्रा गुजरात के भरूच और नर्मदा क्षेत्र की मछली की बताई गई है. कीमत में भी बड़ा अंतर बांग्लादेश में नदी से मिलने वाली प्रीमियम हिलसा की कीमत काफी ज्यादा है. रिपोर्ट में बताया गया है कि पद्मा और मेघना की करीब एक किलो हिलसा की कीमत 2,200 से 2,800 टका तक हो सकती है. इसके मुकाबले गुजरात से आने वाली हिलसा बांग्लादेश के लैंड पोर्ट पर करीब 500 से 700 टका प्रति किलो की कीमत पर पहुंच सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, खुदरा बाजार में इसकी कीमत करीब 1,500 से 1,800 टका प्रति किलो तक हो सकती है. हिंदुस्तान से बांग्लादेश तक कैसे पहुंचती है गुजरात की हिलसा? गुजरात के नर्मदा और भरूच क्षेत्र से आने वाली हिलसा पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश पहुंचती है. रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी मात्रा में यह मछली पेट्रापोल सीमा के जरिए बांग्लादेश जाती है. पेट्रापोल इस व्यापार में ट्रांजिट और कोल्ड-स्टोरेज हब के रूप में काम करता है. बांग्लादेश से भी आती है हिलसा हावड़ा होलसेल फिश मार्केट एसोसिएशन के सचिव सैयद अनवर मकसूद ने कहा कि हर वर्ष दुर्गा पूजा से पहले हिंदुस्तान में बांग्लादेश और म्यांमार से बड़ी मात्रा में हिलसा आती है. बांग्लादेश प्रशासन की ओर से भी कोलकाता के लोगों के लिए पूजा के उपहार के तौर पर हिलसा भेजी जाती है. हालांकि, इस वर्ष बांग्लादेश से पद्मा नदी की हिलसा मछली हिंदुस्तान कब पहुंचेगी, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है. उन्होंने बताया कि राज्य के मछली व्यवसायियों ने बांग्लादेश के मत्स्य विभाग से हिलसा भेजने के लिए आवेदन किया है. अब व्यवसायियों की नजर इस बात पर है कि बांग्लादेश प्रशासन इस संबंध में क्या फैसला लेती है. पश्चिम बंगाल के लिए बड़ा बाजार अवसर ICAR के अनुसार, पश्चिम बंगाल इस उभरते व्यापार से लाभ उठा सकता है. राज्य में हिलसा से जुड़ा मजबूत मछली बाजार, नदी और मुहाना आधारित पारिस्थितिकी तंत्र तथा कोलकाता-हावड़ा का स्थापित मछली व्यापार नेटवर्क मौजूद है. संस्थान का कहना है कि मौजूदा व्यापार से उत्पादन, कोल्ड चेन, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, ब्रांडिंग और निर्यात आधारित मत्स्य कारोबार को मजबूत करने का अवसर मिल सकता है. ICAR-CIFRI के निदेशक डॉ. प्रदीप डे ने कहा कि बांग्लादेश को हिंदुस्तानीय हिलसा का निर्यात केवल व्यापार की घटना नहीं है, बल्कि यह इस मछली की क्षेत्रीय मांग और आर्थिक मूल्य का संकेत देता है. उनके मुताबिक, पश्चिम बंगाल के लिए यह उपभोग आधारित मत्स्य कारोबार से आगे बढ़कर ज्ञान आधारित, टिकाऊ और मूल्यवर्धित हिलसा वित्तीय स्थिति विकसित करने का अवसर है. निर्यात के साथ संरक्षण की चुनौती ICAR ने साफ किया है कि बढ़ती मांग के साथ हिलसा के प्राकृतिक भंडार पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ना चाहिए. इसलिए व्यापार बढ़ाने के साथ संरक्षण और टिकाऊ उत्पादन पर भी ध्यान देना जरूरी है. संस्थान के मुताबिक, किशोर हिलसा को पकड़ने से रोकना और वयस्क तथा प्रजनन करने वाली मछलियों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है. पश्चिम बंगाल प्रशासन की ओर से निर्धारित संरक्षण उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी जोर दिया गया है. 90 मिमी से छोटे जाल पर रोक क्यों जरूरी? ICAR-CIFRI के अनुसार, हुगली नदी में मार्च से मई के दौरान मछली पकड़ने के नियमों को सख्ती से लागू करने की जरूरत है. हिलसा पकड़ने वाले जाल का आकार 90 मिमी से अधिक रखने की सलाह दी गई है, ताकि करीब 500 ग्राम से कम वजन वाली छोटी मछलियां जाल में न फंसें. इसका उद्देश्य छोटी हिलसा को पकड़ने से बचाना है, ताकि उन्हें बड़े होने और प्रजनन करने का मौका मिल सके. प्रजनन के समय हिलसा की सुरक्षा पर जोर ICAR ने हिलसा के प्रजनन और प्रवास के दौरान संरक्षण को भी महत्वपूर्ण बताया है. संस्थान के मुताबिक, महालया से काली पूजा के आसपास हिलसा का प्रमुख अपस्ट्रीम प्रवास होता है, जबकि होली के आसपास एक अन्य महत्वपूर्ण प्रवास देखा जाता है. इन अवधियों में उचित मौसमी प्रतिबंध लगाने से हिलसा के प्राकृतिक प्रजनन और भविष्य के स्टॉक को मजबूत करने में मदद मिल सकती है. स्वस्थ नदियां ही हिलसा कारोबार का आधार ICAR-CIFRI के मुताबिक, हिलसा के लिए उपयुक्त मीठे पानी और खारे पानी का संतुलन, गहरे पानी के प्रवास मार्ग और अबाधित प्रजनन मार्ग जरूरी हैं. संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. रंजन कुमार मन्ना ने कहा कि हिलसा संरक्षण को मत्स्य क्षेत्र के भविष्य में निवेश के तौर पर देखना चाहिए. उनके मुताबिक, हिलसा के सुरक्षित प्रवास के लिए महत्वपूर्ण

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Kareena Kapoor Birthday Special: बैकलेस पोस्टर से ‘काली बिल्ली’ तक, करीना के इन विवादों ने मचाया था खूब बवाल

बॉलीवुड की ‘बेबो’ यानी करीना कपूर खान की जिंदगी में ग्लैमर, शोहरत और शानदार फिल्मों के साथ विवादों का भी कम कनेक्शन नहीं रहा है. कभी ‘कुर्बान’ के बैकलेस पोस्टर ने बवाल मचाया, तो कभी बिपाशा बसु के साथ ‘काली बिल्ली’ वाला विवाद सुर्खियों में छा गया. इतना ही नहीं, ‘प्रेग्नेंसी बाइबल’ नाम को लेकर भी करीना को कानूनी नोटिस का सामना करना पड़ा. जन्मदिन के मौके पर नजर डालते हैं बेबो से जुड़े उन विवादों पर, जिन्होंने उस दौर में खूब चर्चा बटोरी. ‘कुर्बान’ के बैकलेस पोस्टर पर मचा था बवाल साल 2009 में करीना कपूर और सैफ अली खान की फिल्म ‘कुर्बान’ रिलीज से पहले ही अपने पोस्टर को लेकर विवादों में आ गई थी. इंडिया टुडे की नवंबर 2009 की रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म के एक पोस्टर में करीना कपूर की पीठ दिख रही थी और वह सैफ अली खान के साथ नजर आ रही थीं. इस पोस्टर पर शिवसेना कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई थी. करीना कपूर खान बैकलेस पोस्टर बिपाशा बसु के साथ ‘काली बिल्ली’ वाला किस्सा फिल्म ‘अजनबी’ की शूटिंग के दौरान करीना कपूर और बिपाशा बसु के कथित विवाद ने उस दौर में खूब सुर्खियां बटोरी थीं. इंडिया टुडे की 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉस्ट्यूम को लेकर दोनों के बीच विवाद की समाचारें सामने आई थीं. रिपोर्ट में बताया गया कि बिपाशा को करीना के डिजाइनर विक्रम फडनिस ने मदद की थी, जिसके बाद दोनों के बीच कथित बहस हुई. इसी दौरान करीना द्वारा बिपाशा को ‘काली बिल्ली’ कहे जाने और उन्हें थप्पड़ मारने की बात भी रिपोर्ट्स के हवाले से सामने आई थी. हालांकि, दोनों अभिनेत्रियों के इस मामले पर अलग-अलग बयान भी रहे. रिपोर्ट के अनुसार, बिपाशा ने 2001 में फिल्मफेयर से कहा था कि असल समस्या उनके और करीना के बीच नहीं, बल्कि करीना और डिजाइनर के बीच थी, जबकि करीना ने 2002 में बिपाशा के इस दावे को खारिज किया था. View on Instagram ‘प्रेग्नेंसी बाइबल’ नाम ने खड़ा किया कानूनी विवाद करीना कपूर ने अपनी प्रेग्नेंसी जर्नी पर अदिति शाह भीमजानी के साथ किताब लिखी थी, जिसका नाम ‘करीना कपूर खान्स प्रेग्नेंसी बाइबल’ था. किताब के नाम में ‘बाइबल’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर आपत्ति जताई गई थी. साल 2024 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में करीना कपूर को नोटिस जारी किया था. याचिका में आरोप लगाया गया था कि किताब के नाम से ईसाई समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं. बाद में करीना ने कानूनी नोटिस का जवाब देते हुए कहा था कि किताब के जरिए किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का उनका इरादा नहीं था. सैफ अली खान के होटल विवाद ने भी खींचा था ध्यान साल 2012 में सैफ अली खान के मुंबई के एक होटल में एक एनआरआई शख्स से विवाद की समाचार सामने आई थी. उस दौरान करीना कपूर भी वहां मौजूद थीं. उस समय की रिपोर्टों में एनआरआई शख्स की ओर से सैफ पर मारपीट और धमकी देने के आरोप लगाए गए थे. वहीं, विवाद की वजह को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए थे. इसलिए इस मामले को आरोपों और रिपोर्टों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए. View on Instagram विवादों से अलग किरदारों ने बनाई करीना की पहचान करीना कपूर का फिल्मी सफर सिर्फ विवादों तक सीमित नहीं रहा. ‘कभी खुशी कभी गम’ की ‘पू’, ‘जब वी मेट’ की ‘गीत’ और ‘चमेली’ जैसे किरदारों ने उन्हें दर्शकों के बीच अलग पहचान दिलाई. करीना ने अपने करियर में ग्लैमरस भूमिकाओं के साथ कई चुनौतीपूर्ण किरदार भी निभाए. यही वजह है कि उनके फिल्मी सफर से जुड़े पुराने विवादों के अलावा उनकी फिल्मों और अभिनय की भी लगातार चर्चा होती रही. ये भी पढ़ें: Bigg Boss 20 PROMO: काजी का सिग्नेचर स्टेप देख बेकाबू हुए सलमान खान, छाती पकड़कर सीधे जमीन पर ढेर ये भी पढ़ें: आज जो कपड़े-घड़ी पहनता हूं वो विजय की वजह से है… Atlee ने थलापति को दिया अपनी कामयाबी का क्रेडिट, फिर सुनाया ‘जवान’ का किस्सा The post Kareena Kapoor Birthday Special: बैकलेस पोस्टर से ‘काली बिल्ली’ तक, करीना के इन विवादों ने मचाया था खूब बवाल appeared first on Naya Vichar.

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आलू काटकर रखती हैं तो जरूर जानें ये टिप्स, नहीं पड़ेंगे जल्दी काले

How to Keep Cut Potatoes From Turning Black: काम की बात सीरीज में हम रोजमर्रा से जुड़ी ऐसी छोटी-छोटी परेशानियों के आसान तरीके बताते हैं, जो घर के काम को थोड़ा आसान बना सकते हैं. आज बात करेंगे कटे हुए आलू के काले पड़ने की. अक्सर आलू काटकर कुछ देर के लिए रख दें तो उनका रंग भूरा या काला नजर आने लगता है. इसकी वजह हवा के संपर्क में आने से होने वाला ऑक्सीडेशन है. हालांकि, सिर्फ रंग बदलने से आलू खराब नहीं हो जाते. अगर आप भी आलू पहले से काटकर रखते हैं, तो कुछ आसान तरीकों की मदद से उन्हें ज्यादा देर तक ताजा रखा जा सकता है. आइए, आपको इस काम की बात में बताते हैं कि कटे हुए आलू को काला पड़ने से कैसे बचाएं. आलू को काटकर ज्यादा देर खुला न रखें कटे हुए आलू को लंबे समय तक खुला छोड़ने से उनका रंग जल्दी बदल सकता है. इसलिए कोशिश करें कि आलू को खाना बनाने के ज्यादा देर पहले न काटें. अगर आपको पहले से तैयारी करनी है, तो काटने के बाद आलू को खुला रखने के बजाय किसी ऐसे तरीके से रखें, जिससे उनका हवा के साथ संपर्क कम हो. इससे रंग बदलने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है. कटे हुए आलू को ठंडे पानी में रखें कटे हुए आलू को काला होने से बचाने के लिए उन्हें ठंडे पानी में रखना आसान तरीका है. इसके लिए एक साफ बर्तन में ठंडा पानी लें और उसमें कटे हुए आलू डाल दें. पानी में रखने से आलू सीधे हवा के संपर्क में नहीं आते और उनका रंग जल्दी बदलने से बच सकता है. यह तरीका तब खास काम आता है, जब खाना बनाने में अभी थोड़ा समय बाकी हो. जिपलॉक बैग का कर सकते हैं इस्तेमाल अगर आपके पास जिपलॉक बैग है, तो उसमें कटे हुए आलू रख सकते हैं. आलू डालने के बाद बैग को अच्छी तरह बंद कर दें और कोशिश करें कि उसके अंदर ज्यादा हवा न रहे. इससे आलू का हवा के संपर्क में आना कम होगा और उनका रंग जल्दी बदलने की संभावना भी कम हो सकती है. हालांकि, उन्हें बहुत लंबे समय तक रखने के बजाय जल्द इस्तेमाल करना बेहतर है. फ्रिज में रखना भी है आसान तरीका कटे हुए आलू को कुछ समय के लिए फ्रिज में भी रखा जा सकता है. ठंडा तापमान ऑक्सीडेशन की रफ्तार को धीमा करने में मदद करता है. आलू को एक साफ और अच्छी तरह बंद होने वाले कंटेनर में रखें. आप चाहें तो कटे हुए आलू को ठंडे पानी में डालकर कंटेनर को फ्रिज में रख सकते हैं. इससे उन्हें खाना बनाने तक बेहतर तरीके से रखने में मदद मिल सकती है. सबसे आसान तरीका क्या है? अगर संभव हो तो आलू को जरूरत से बहुत पहले काटकर न रखें. खाना बनाने के करीब ही उन्हें छीलकर काटना सबसे आसान तरीका है. अगर पहले से काटना जरूरी हो, तो कटे हुए आलू को खुला न छोड़ें. उन्हें ठंडे पानी में रखें या किसी अच्छी तरह बंद कंटेनर में स्टोर करें. इस तरह आलू के रंग को ज्यादा देर तक बदलने से रोकने में मदद मिल सकती है. यह भी पढ़ें: कमरा साफ करना लगता है बड़ा काम? इन आसान टिप्स से मिनटों में करें सफाई The post आलू काटकर रखती हैं तो जरूर जानें ये टिप्स, नहीं पड़ेंगे जल्दी काले appeared first on Naya Vichar.

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