India GDP : हिंदुस्तानीय वित्तीय स्थिति के लिए एक बहुत ही शानदार समाचार आई है. देश की इकोनॉमी ने पूरे साल यानी वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में 7.7% की रफ्तार से तरक्की की है. वहीं, अगर आखिरी तिमाही (जनवरी-मार्च) की बात करें, तो इस दौरान जीडीपी (GDP) ग्रोथ 7.8% दर्ज की गई है.
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा 5 जून को जारी किए गए ये आंकड़े प्रशासन के अपने पुराने अनुमान (7.6%) से भी बेहतर रहे हैं. इस शानदार बढ़त के साथ ही प्रशासन ने जीडीपी को मापने के तरीके और पैमाने में भी एक ऐतिहासिक बदलाव किया है.
मैन्युफैक्चरिंग में सुस्ती, पर GVA की रफ्तार बरकरार
तिमाही-दर-तिमाही के आधार पर देखें तो विकास दर में थोड़ी सी नरमी आई है, जिसकी मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार का धीमा पड़ना है. तीसरी तिमाही में जो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 12.8% के ऊंचे स्तर पर था, वह चौथी तिमाही में घटकर 7.3% पर आ गया. हालांकि, देश की ग्रॉस वैल्यू ऐडेड (GVA) ग्रोथ पूरे साल और चौथी तिमाही दोनों में 7.9% की मजबूत स्थिति पर बनी हुई है.
अगले साल थोड़ी धीमी हो सकती है रफ्तार
सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़ों से ठीक पहले हिंदुस्तानीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी अगले वित्त वर्ष (2026-27) के लिए अपने अनुमान जारी किए हैं. आरबीआई के मुताबिक, अगले साल आर्थिक विकास की यह रफ्तार थोड़ी धीमी पड़कर 6.6% रह सकती है.
वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए तिमाही आधार पर अनुमान

क्यों बदला गया जीडीपी नापने का पैमाना ?
प्रशासन ने इस बार जीडीपी के आंकड़ों को नए बेस ईयर 2022-23 के पैमाने पर कैलकुलेट किया है. इससे पहले तक साल 2011-12 को आधार वर्ष (Base Year) माना जाता था.
- क्यों था जरूरी: पुराना पैमाना 14 साल पुराना हो चुका था. उस समय आज की तरह यूपीआई (UPI), जोमैटो, ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स और गिग इकोनॉमी जैसी चीजें मुख्यधारा में नहीं थीं.
- क्या-क्या नया जुड़ा: आर्थिक तरक्की की सटीक तस्वीर देखने के लिए अब जीडीपी की नई सीरीज में जीएसटी नेटवर्क, ई-वाहन (E-Vehicles) डेटाबेस और घरों में काम करने वाले कुक, ड्राइवर व घरेलू नौकरों की सेवाओं से जुड़ा डेटा भी शामिल किया गया है.
- 2022-23 ही क्यों चुना: यह साल पूरी तरह से ‘सामान्य’ था. कोरोना महामारी खत्म हो चुकी थी, वित्तीय स्थिति स्थिर थी और डिजिटल इंडिया पूरी तरह स्थापित हो चुका था.
क्या होता है बेस ईयर और कैसे निकलती है GDP?
बेस ईयर (Base Year): यह वह साल होता है जिसकी कीमतों को फिक्स मानकर आज की तरक्की को मापा जाता है. इससे पता चलता है कि देश में उत्पादन (Production) सच में बढ़ा है या सिर्फ चीजें महंगी (महंगाई की वजह से) हुई हैं.
जीडीपी निकालने का गणित: अर्थशास्त्र में जीडीपी की गणना करने के लिए एक खास फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जाता है.

आम आदमी पर क्या होगा असर?
इस बदलाव का आपकी जेब पर तुरंत कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा. लेकिन सही और सटीक आंकड़ों की मदद से प्रशासन बेहतर नीतियां और योजनाएं बना सकेगी. जब सही जगह पैसा लगेगा, तो देश में विदेशी निवेश (Foreign Investment) बढ़ेगा और नए रोजगार पैदा होंगे, जिसका फायदा घूम-फिरकर आने वाले समय में देश के हर नागरिक को मिलेगा.
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