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पटना जंक्शन के चांदनी मार्केट में वेल्डिंग के दौरान लगी आग, गोदाम में रखे झूमर व PVC लाइट जलकर खाक

Chandni Market Patna Fire : पटना जंक्शन के चांदनी मार्केट स्थित एक इलेक्ट्रिक दुकान के तीसरे और चौथे मंजिल पर बने गोदाम में शुक्रवार को अचानक भीषण आग लग गयी. गोदाम से धुआं और आग की लपटें उठती देख आसपास के दुकानदारों और स्थानीय लोगों में अफरातफरी मच गयी. सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का अभियान शुरू किया. पानी की बौछार से आग बुझाने में जुटे दमकलकर्मी अग्निशमन कर्मियों ने लगातार पानी की बौछार कर आग पर काबू पाने का प्रयास किया. आग की लपटें और घना धुआं निकलने के कारण आसपास के इलाके में दहशत का माहौल बन गया. घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गये. गोदाम में झूमर और पीवीसी लाइट रखे थे मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि चांदनी मार्केट में सुपर लाइट दुकान के गोदाम का निर्माण कराया जा रहा था.इ और आगामी त्योहार को लेकर दुकानदार अपने गोदाम में कई तरह के लाइटों का जैसे झूमर, रुफ लाइट, आदि का स्टॉक कर रहे थे. आग लगने से गोदाम रखी लाइटे पूरी तरह जल गयी. प्रशासन आकलन करने में जुटे हैं. यह पता लगाया जा रहा है कि कितने का नुकसान हुआ है. वेल्डिंग के दौरान निकली चिंगारी से लगी आग स्थानीय लोगों ने बताया कि गोदाम का निर्माण का काम चल रहा था. दुकानदार स्टॉक भी कर रहे थे. मजदूर गोदाम निर्माण के दौरान वेल्डिंग का काम कर रहे थे. इसी दौरा वेल्डिंग से निकले चिंगारी से लाइटों में आग लग गयी. देखते देखते आग विकराल रूप ले लिया. लोगों ने इसकी जानकारी अग्निश्मन विभाग को दी. आग बुझाने के लिए आयी दमकल गली सकीर्ण होने से नहीं पहुंची दमकल, पाइप से बुझा रहे आग आग बुझाने के लिए मौके पर दमकल की गाड़ी पहुंची लेकिन गली सकीर्ण होने के कारण घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकी. अग्निश्मन कर्मियों पाइप के माध्यम से आग बुझाने में जुट गये. झूमर, पीवीसी लाइट में लगी आग और भयानक हो गयी. दूसरे तरफ गाड़ी अंदर तक नहीं जाने को लेकर भी लोग चर्चा कर रहे हैं. इलेक्ट्रिक सामान के कारण आग बुझाने में परेशानी गोदाम में बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रिक सामान रखे होने के कारण आग बुझाने में दमकल कर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. आग को आसपास की दुकानों और अन्य हिस्सों में फैलने से रोकने के लिए अग्निशमन विभाग की टीम लगातार प्रयास कर रही है. View on Instagram आग लगने के कारण और नुकसान का पता नहीं फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है. घटना में कितने का नुकसान हुआ है और कोई व्यक्ति हताहत हुआ है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. अग्निशमन विभाग की टीम आग पर पूरी तरह काबू पाने में जुटी हुई है. आग बुझने के बाद ही नुकसान का आकलन और घटना के कारणों की स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी. इसे भी पढ़ें : पटना में SIR पर INDIA ब्लॉक का प्रदर्शन, गांधी मूर्ति से उठी CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग The post पटना जंक्शन के चांदनी मार्केट में वेल्डिंग के दौरान लगी आग, गोदाम में रखे झूमर व PVC लाइट जलकर खाक appeared first on Naya Vichar.

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पीएम मोदी ने घायल भारतीय पायलट से की बात, स्मित मच्छार बोले-मुसीबत में पढ़ता हूं हनुमान चालीसा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को फ्लाईदुबई के हिंदुस्तानीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार से फोन पर बात की. प्रधानमंत्री ने उनकी बहादुरी की सराहना की और जल्द स्वस्थ होने की कामना की. बता दें कि कैप्टन मच्छार ने दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट में अपने सह-पायलट के हमले में घायल हुए थे. कैप्टन स्मित मच्छार ने गंभीर चोटों के बीच कॉकपिट का दरवाजा खोलने की उस रात को याद करते हुए बताया कि उन्हें कैसे हिम्मत मिली. कैप्टन मच्छार ने कहा कि वह उस वक्त लगातार हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे और खुद से कह रहे थे कि अगर वह नहीं उठे तो उनकी जान चली जाएगी. पीएम मोदी ने उनकी बहादुरी, सूझबूझ और धैर्य की तारीफ करते हुए कहा कि पूरे देश को उन पर गर्व है. ‘मुसीबत में पढ़ता हूं हनुमान चालीसा’ फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के दौरान भावुक हो गए. उन्होंने घटना के बारे में बताते हुए कहा, “आप मेरे सबसे बड़े आदर्श हैं. आज जिस तरह से आप मेरा हौसला बढ़ा रहे हैं, मुझे इस पर गर्व महसूस हो रहा है. मुझे कई चोटें लगी थीं, लेकिन मैंने खुद से कहा कि मुझे उठना है और उस समय मैंने खुद को कॉकपिट का दरवाजा खोलने के लिए मजबूर किया.” प्रधानमंत्री मोदी से बात करते हुए कैप्टन स्मित मच्छार ने कहा, “जब भी मुसीबत में होता हूं, तो मैं हनुमान चालीसा का पाठ करता हूं. उस समय भी मैं लगातार हनुमान चालीसा का पाठ कर रहा था. आज आपका एक फोन मेरे लिए बहुत गर्व की बात है. मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे आपसे बात करने का मौका मिलेगा.” प्रधानमंत्री मोदी ने कैप्टन मच्छार से कहा, “आपने पूरे देश को गौरवान्वित किया है. हिंदुस्तान आपका स्वागत करने के लिए उत्सुक है. कल देशभर में आपकी सेहत के लिए विशेष प्रार्थनाएं की गईं.” इसके साथ ही पीएम मोदी ने फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार से कहा, “मैं सऊदी अरब और यूएई की प्रशासनों का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने आपकी देखभाल की. मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि जब भी आपको मेरी जरूरत होगी, मैं सिर्फ एक फोन कॉल की दूरी पर हूं.” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार से कहा, “आपने दुनिया को दिखाया है कि ‘अहिंसा’ क्या होती है. मैंने सोशल मीडिया पर कई कमेंट पढ़े हैं, जिनमें लोग कह रहे थे कि अगर हालात कुछ अलग होते तो हिंदुस्तान के बारे में लोग क्या कहते. आपने बहुत बड़ा काम किया है और सभी की जान बचाई है.” घायल होने के बावजूद खोला था कॉकपिट का दरवाजा फ्लाईदुबई की फ्लाइट एफजेड1073 बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रही थी. विमान में 174 यात्री सवार थे. उड़ान के दौरान सह-पायलट ने कथित तौर पर कैप्टन मच्छार पर चाकू से हमला किया. इसके बाद विमान अचानक करीब 14 हजार फीट नीचे आया. मच्छार ने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया. इसके बाद यात्रियों ने कॉकपिट में पहुंचकर हमलावर को काबू किया. ये भी पढ़ें: कटा हाथ, खून से लथपथ कैप्टन, नीचे गिरने लगा विमान तो प्लंबर और दुश्मन देशों के पायलटों ने संभाली कमान, ऐसे बची 174 लोगों की जान विमान को बाद में सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट की ओर मोड़ा गया और वहां सुरक्षित लैंड कराया गया. घटना के बाद कैप्टन मच्छार का सऊदी अरब में इलाज कराया गया. उनकी हालत स्थिर बताई गई है. फिलहाल इस घटना की जांच भी चल रही है. संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों ने यह पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए हैं कि घटना का संबंध किसी आतंकी गतिविधि या पहले से बनाई गई साजिश से था या नहीं. The post पीएम मोदी ने घायल हिंदुस्तानीय पायलट से की बात, स्मित मच्छार बोले-मुसीबत में पढ़ता हूं हनुमान चालीसा appeared first on Naya Vichar.

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पिता बेचते थे चाय, एक कमरे में बचपन गुजारने वाली लवलीना ने जीता गोल्ड; जानें मैरी कॉम की बराबरी करने वाली इस बेटी की कहानी

Lovlina Borgohain Wins Gold: असम के एक छोटे से गांव में पली-बढ़ी लवलीना बोरगोहेन के लिए बड़े सपने देखना कभी आसान नहीं था. घर की आर्थिक स्थिति साधारण थी, गांव में स्पोर्ट्सों की सुविधाएं नहीं थीं और जिंदगी की जरूरतें ही इतनी थीं कि उससे आगे के बारे में सोचना भी मुश्किल लगता था. लेकिन लवलीना ने परिस्थितियों को अपने सपनों के रास्ते में नहीं आने दिया. उन्होंने सपना देखा कि एक दिन वह ओलंपिक में हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व करेंगी और दुनिया के बड़े मंच पर देश का नाम रोशन करेंगी. आज अपने 29वें जन्मदिन के दिन उन्होंने एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीतकर अपने सफर को एक और यादगार मुकाम दिया. 75 किग्रा वर्ग के फाइनल में लवलीना ने चीन की बाओ जियी को 5-0 से हराया. इस जीत के साथ वह एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली हिंदुस्तान की दूसरी स्त्री बॉक्सर बन गईं. उनसे पहले यह उपलब्धि दिग्गज मुक्केबाज मैरी कॉम ने 2014 के इंचियोन एशियन गेम्स में हासिल की थी. छोटे से घर में पलीं, लेकिन सपने छोटे नहीं रखे लवलीना का जन्म 2 अक्टूबर 1997 को असम के गोलाघाट जिले के बारोमुखिया गांव में हुआ. उनका परिवार साधारण पृष्ठभूमि से आता था. परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि स्पोर्ट्सों के लिए महंगे संसाधन आसानी से जुटाए जा सकें. उनके पिता चाय बागान में काम करने के साथ चाय की दुकान भी चलाते थे, जिससे परिवार की जरूरतें पूरी होती थीं. लवलीना ने खुद बताया है कि गांव में बड़े सपने देखने का माहौल नहीं था. परिवार की जरूरतें पूरी करना, खेती-किसानी और रोजमर्रा की जिंदगी ही प्राथमिकता थी. ऐसे माहौल में किसी शिशु का ओलंपिक जैसे मंच का सपना देखना अपने आप में बड़ी बात थी. बॉक्सिंग से पहले सीखी मार्शल आर्ट्स लवलीना की स्पोर्ट्सों से शुरुआत सीधे बॉक्सिंग से नहीं हुई थी. उन्होंने पहले थाई मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग ली. इसी दौरान बॉक्सिंग के प्रति उनका आकर्षण बढ़ा. एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें अपने बड़े भाई के साथ बॉक्सिंग ट्रेनिंग कैंप जाने का मौका मिला. वहां कोच पदुम बोरो ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें बॉक्सिंग जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया. गांव में सुविधाओं की कमी के बावजूद उन्होंने ट्रेनिंग जारी रखी और धीरे-धीरे स्थानीय प्रतियोगिताओं से राष्ट्रीय स्तर तक अपनी जगह बनाई. गांव से बाहर निकलीं तो सामने आईं नई मुश्किलें जब लवलीना आगे की ट्रेनिंग के लिए गुवाहाटी पहुंचीं और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के हॉस्टल में रहने लगीं, तो उनके सामने एक अलग तरह की चुनौतियां थीं. भाषा की परेशानी, आर्थिक दबाव और नए माहौल में खुद को ढालना आसान नहीं था. गांव में पली-बढ़ी लवलीना के लिए शहर की जिंदगी और प्रतिस्पर्धी स्पोर्ट्स की दुनिया बिल्कुल नई थी. लेकिन उनके दिमाग में एक सपना लगातार बना रहा-ओलंपिक में जाना. ये भी पढ़ें: Asian Games 2026: अंकिता, कीर्ति और कुमकुम की तिकड़ी ने तीरंदाजी में रचा इतिहास, 10 बार की चैंपियन टीम को हराकर जीता गोल्ड ओलंपिक मेडल ने बदल दी गांव की तस्वीर लवलीना की मेहनत का सबसे बड़ा फल टोक्यो ओलंपिक 2021 में मिला. उन्होंने स्त्री बॉक्सिंग में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा और असम की पहली स्त्री ओलंपिक पदक विजेता बनीं. लेकिन इस उपलब्धि का असर सिर्फ बॉक्सिंग रिंग तक सीमित नहीं रहा. लवलीना ने बताया कि जब वह ओलंपिक से मेडल लेकर अपने गांव लौटीं, तब उनके घर तक पक्की सड़क बन चुकी थी. गांव में पानी की सुविधा भी पहुंची. जिस गांव में कभी स्पोर्ट्स सुविधाओं का अभाव था, वहां एक बेटी की उपलब्धि ने बदलाव की एक नई तस्वीर खड़ी कर दी. जन्मदिन पर गोल्ड, फाइनल में बाओ जियी को 5-0 से हराया अब लवलीना ने अपने जन्मदिन को भी यादगार बना दिया है. एशियन गेम्स 2026 के स्त्री 75 किग्रा वर्ग के फाइनल में उन्होंने चीन की बाओ जियी को 5-0 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया. फाइनल तक पहुंचने के लिए लवलीना ने सेमीफाइनल में कजाकिस्तान की नतालिया बोगदानोवा को 3-2 से हराया था. इसके साथ ही वह लगातार दो एशियन गेम्स के फाइनल में पहुंचने वाली पहली हिंदुस्तानीय स्त्री मुक्केबाज बनी थीं. हांगझोऊ एशियन गेम्स में उन्हें सिल्वर मेडल मिला था. इस बार उन्होंने मेडल का रंग बदलते हुए गोल्ड अपने नाम कर लिया. मैरी कॉम के क्लब में शामिल हुईं लवलीना लवलीना के गोल्ड मेडल की सबसे खास बात यह है कि इसके साथ उन्होंने हिंदुस्तानीय स्त्री बॉक्सिंग के दिग्गज नाम मैरी कॉम की एक खास उपलब्धि की बराबरी कर ली है. मैरी कॉम ने 2014 के इंचियोन एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था. अब लवलीना भी एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली हिंदुस्तान की दूसरी स्त्री बॉक्सर बन गई हैं. ये भी पढ़ें: किसान की बेटी, रिंग में दुनिया को दी चुनौती… अब जन्मदिन पर गोल्ड जीतकर रच सकती हैं इतिहास The post पिता बेचते थे चाय, एक कमरे में बचपन गुजारने वाली लवलीना ने जीता गोल्ड; जानें मैरी कॉम की बराबरी करने वाली इस बेटी की कहानी appeared first on Naya Vichar.

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109 साल बाद भी खड़ी है गांधी की वो कुटिया, जिसे अंग्रेजों ने की जलाने की कोशिश, जानें भितिहरवा की कहानी

भितिहरवा गांधी आश्रम: पश्चिम चंपारण के भितिहरवा गांव में खड़ी एक पुरानी कुटिया आज भी उस दौर की कहानी सुनाती है, जब अंग्रेजी हुकूमत के सामने एक ऐसा आंदोलन खड़ा हुआ था, जिसके पास न हथियार थे और न सेना. हथियार था सत्य और रास्ता था अहिंसा. 1917 में महात्मा गांधी के चंपारण आगमन ने नील किसानों की पीड़ा को देश के सामने रखा. लेकिन भितिहरवा में गांधी का मिशन सिर्फ अंग्रेजी सत्ता के विरोध तक सीमित नहीं रहा. यहां शिक्षा, स्वच्छता और सामाजिक जागरूकता की मुहिम भी शुरू हुई. राजकुमार शुक्ल की जिद से चंपारण पहुंचे गांधी नील की जबरन खेती से परेशान किसान अपनी आवाज उठाना चाहते थे. चंपारण के किसान राजकुमार शुक्ल लगातार महात्मा गांधी से यहां आने का आग्रह करते रहे. आखिरकार गांधी चंपारण पहुंचे. 27 अप्रैल 1917 को वे नरकटियागंज आए और अमोलवा में रात बितायी. इसके बाद गांव-गांव जाकर किसानों की शिकायतें सुनने और उनकी स्थिति समझने का सिलसिला शुरू हुआ. गांधी ने महसूस किया कि किसानों की परेशानी केवल नील की खेती तक सीमित नहीं है. अशिक्षा, गंदगी और सामाजिक पिछड़ापन भी ग्रामीणों की मुश्किलों की बड़ी वजह थे. भितिहरवा में खुली पाठशाला भितिहरवा गांधी आश्रम | Naya Vichar Network अंग्रेजी हुकूमत को शायद लगा था कि कुटिया को जला देने से गांधी की गतिविधियों पर असर पड़ेगा. लेकिन ग्रामीण पीछे नहीं हटे. उन्होंने मिलकर कुटिया को फिर खड़ा किया. गांधी ने भी इसके निर्माण में श्रमदान किया. आज यही स्थान भितिहरवा आश्रम के प्रमुख स्मारकों में शामिल है. जांता, मेज और घंटी में सुरक्षित है इतिहास भितिहरवा गांधी आश्रम में रका चरखा | Naya Vichar Network चंपारण सत्याग्रह ने गांधी को हिंदुस्तानीय स्वतंत्रता आंदोलन के केंद्र में ला दिया. वहीं भितिहरवा ने इस आंदोलन को एक अलग आयाम दिया. यहां संघर्ष केवल अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ नहीं था, बल्कि अशिक्षा, गंदगी और सामाजिक पिछड़ेपन के खिलाफ भी था. आज भितिहरवा आश्रम गांधी सर्किट का महत्वपूर्ण हिस्सा है. दूर-दूर से लोग उस कुटिया को देखने पहुंचते हैं, जहां कभी गांधी ने चंपारण के किसानों के साथ खड़े होकर बदलाव की नींव रखी थी. 1917 की वह छोटी सी कुटिया आज 109 साल बाद भी सत्य, अहिंसा और सामाजिक परिवर्तन की कहानी कह रही है. ये भी पढ़ें: Success Story: सेल्फ स्टडी से टॉप की BPSC परीक्षा, बेतिया के अभिनव बने DSP The post 109 साल बाद भी खड़ी है गांधी की वो कुटिया, जिसे अंग्रेजों ने की जलाने की कोशिश, जानें भितिहरवा की कहानी appeared first on Naya Vichar.

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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, 5 हजार जवान तैनात; दिल्ली के 11 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट बंद

नई दिल्ली में 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली मेट्रो के 11 स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बंद कर दिए गए हैं. दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के अनुसार, इन स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रहेगी. बंद किए गए स्टेशनों में जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, आईएनए, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली शामिल हैं. कहा गया है कि अगले आदेश तक ये नियम लागू होंगे. प्रदर्शन में करीब 4 हजार लोगों के पहुंचने की आशंका प्रदर्शन शुक्रवार सुबह 11 बजे जंतर-मंतर पर प्रस्तावित है. पुलिस के मुताबिक, करीब 3,000 से 4,000 लोगों के पहुंचने की आशंका है, जिसके चलते नई दिल्ली इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 5,000 पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है और जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है. दिल्ली पुलिस ने लोगों की आवाजाही और यातायात को लेकर भी प्रतिबंध लगाए हैं. CEC के खिलाफ है प्रदर्शन इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक यह प्रदर्शन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए), राज्यसभा सांसद मनोज झा और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण समेत सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों की ओर से बुलाया गया है. प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ है. ये भी पढ़ें: क्या CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रोटेस्ट से पहले हिरासत में लिए गए दीपके? जानें क्या है पूरी सच्चाई एआईएसए के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस सप्ताह की शुरुआत में संसद मार्ग पुलिस को प्रदर्शन की सूचना दी थी. प्रतिनिधिमंडल में प्रशांत भूषण, मनोज झा, एआईएसए अध्यक्ष नेहा बोरा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे और शिक्षाविद नंदिता नारायण शामिल थे. प्रदर्शनकारी विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर ज्ञानेश कुमार को उनके पद हटाने की मांग कर रहे हैं. वहीं, दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है. The post CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, 5 हजार जवान तैनात; दिल्ली के 11 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट बंद appeared first on Naya Vichar.

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‘कैंसर दवाओं में बड़ा फर्जीवाड़ा’: 900 की दवा 10 हजार में बेच रहे अस्पताल, प्रभात खबर का बड़ा खुलासा

रांची : झारखंड में कैसर अस्पताल मरीजों से दवाइयों के नाम पर मनमाना पैसा वसूल कर रहे हैं. दवा कंपनियों से अस्पतालों को कैंसर की दवाइयां 900 से 1,050 रुपये (वास्तविक कीमत) में मिल जाती हैं. लेकिन इसके बाद वही दवाइयां मरीजों को 9,000 रुपये (एमआरपी) पर दी जाती हैं. यानी कि वास्तविक कीमत से छह से 10 गुना ज्यादा पैसा कैसर मरीजों के परिजनों से भुगतान करावा जाता है. अस्पतालों और डॉक्टरों को मुनाफा पहुंचाने के लिए कंपनियों के बीच सांठगांठ रहती है. इस स्पोर्ट्स में आम लोग पिस रहे हैं. नया विचार ने की अस्पतालों की पड़ताल मामले की तह तक जाने के लिए नया विचार संवाददाता ने कैंसर अस्पतालों में पहुंच कर पड़ताल की. वहां पर दवाइयां उपलब्ध कराने पर अस्पताल राजी तो हुए, लेकिन डॉक्टर की पर्ची मांगने लगे. जब सिर्फ दवाइयों को दिखाने का आग्रह किया गया, तो अस्पतालों द्वारा दवाइयां उपलब्ध करायी गयीं. इसके बाद कीमतों की जानकारी मिली. फिर कैंसर दवाओं के स्टॉकिस्ट के पास जाकर अस्पतालों को उपलब्ध करानेवाली कीमतों का पता लगाया गया, तो छह से 10 गुना ज्यादा पैसा वसूले जाने की जानकारी मिली. नया विचार के पास इससे संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं. बोले रोगी के परिजन : लोग दवाइयां खरीद कर बन रहे कर्जदार रांची के कांके रोड स्थित एक कैंसर रोगी के परिजन ने बताया कि कैंसर का पता चलने के बाद परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है. इंश्योरेंस कंपनियां भी पीछा छुड़ाने लगती है. लोग दवाइयां खरीद कर ही कर्जदार हो जाते हैं. हम तो थोड़े सक्षम हैं, तो अभी तक चल रहा है. कीमत में बहुत मार्जिन है, लेकिन अस्पताल कुछ भी नहीं छोड़ते हैं. जांच से लेकर इलाज तक की प्रक्रिया में परिवार बिक जाता है. ये भी पढ़ें: दुर्गा पूजा में 15 दिन शेष, रांची की एक दर्जन से अधिक प्रमुख सड़कें बदहाल; गड्ढों से बढ़ा हादसों का खतरा बोले जिम्मेदार हिंदुस्तान प्रशासन के राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) में निदेशक अमर हिंदुस्तानी बताते हैं कि वर्ष 2019 में 45 कैसर की दवाओं को शेड्यूल दवाओं की श्रेणी में लाया गया था, लेकिन एक साल बाद ही कंपनियों ने ब्रांड का नाम बदलकर दवाइया बनानी शुरू कर दी. इससे एनपीपीए में आने की अधिसूचना बेकार हो गयी. 81% नॉन-शेड्यूल दवाओं पर प्रशासन का नियंत्रण नहीं है, हमारे नियंत्रण में सिर्फ 19% दवाइयां ही है. एमआरपी से अधिक नहीं लेते, इसलिए बच जा रहे अस्पताल अस्पताल एमआरपी से अधिक कीमत नहीं वसूलते हैं, इसलिए वह नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी के दायरे में नहीं आते हैं. ऐसे में राज्य औषधि निदेशालय इन पर कार्रवाई नहीं करता है. औषधि निदेशालय को पूरी जानकारी, पर नियम के बाहर अधिकार दवाइयां ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (डीपीसीओ) में आती हैं. पहली शिड्यूल दवाइयां (ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1945), दूसरी नॉन शिड्यूल दवाइयां (दवाइयों की वार्षिक कीमत 10% से अधिक नहीं बढ़नी चाहिए), तीसरी नयी दवाइयां (निर्माता कंपनी को चार साल का एकाधिपत्य रहरता है) जिसे चार साल के बाद दूसरी कंपनी बना सकती है. औषधि निरीक्षक सिर्फ इसी नियम के तहत काम करते हैं. ये भी पढ़ें: पूर्वी सिंहभूम में ‘खाट पर सिस्टम’! सड़क के अभाव में गर्भवती को खटिया पर 2 किमी पहाड़ी रास्ते से ढोकर ले गए ग्रामीण The post ‘कैंसर दवाओं में बड़ा फर्जीवाड़ा’: 900 की दवा 10 हजार में बेच रहे अस्पताल, नया विचार का बड़ा खुलासा appeared first on Naya Vichar.

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यूक्रेन जंग पर पुतिन ने की PM मोदी की पहल की तारीफ, बोले- ‘वॉर खत्म करने के लिए उनके पास बहुत अच्छे आइडिया’

Ukraine War: पुतिन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन विश्व नेताओं में शामिल हैं, जो रूस के साथ अच्छे और दोस्ताना रिश्ते होने के बावजूद यूक्रेन संघर्ष खत्म करने की बात लगातार उठाते हैं. उन्होंने कहा कि मोदी बार-बार इस सवाल पर जोर देते हैं कि यूक्रेन में चल रहे संघर्ष को कैसे खत्म किया जा सकता है. वाल्दाई क्लब फोरम में इस मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में पुतिन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूक्रेन संघर्ष का ऐसा समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर सकें. उन्होंने कहा कि मोदी इस दिशा में लगातार सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं. पुतिन ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी यूक्रेन संघर्ष को लेकर लगातार रुचि दिखा रहे हैं. उनके पास ऐसे अच्छे सुझाव हैं, जिनसे दोनों पक्षों के बीच कोई रास्ता निकाला जा सकता है. मोदी किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं कर रहे हैं, लेकिन चाहते हैं कि यह संघर्ष जल्द खत्म हो. हम उनके सुझावों के लिए उनका धन्यवाद करते हैं.” ये भी पढ़ें: यूक्रेन का दावा, रूस से जंग में रोबोट सैनिकों ने 3000 रूसी सैनिक मार गिराए; हिंदुस्तान भी बना रहा ऐसी तकनीक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आखिरी मुलाकात सितंबर में नई दिल्ली में हुए 18वें BRICS सम्मेलन के दौरान हुई थी. इस बैठक में दोनों नेताओं ने हिंदुस्तान-रूस के बीच व्यापार बढ़ाने पर चर्चा की. इसके अलावा 2030 तक आर्थिक सहयोग, इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी, तकनीक, रक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में मिलकर काम करने को लेकर भी बातचीत हुई थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार यूक्रेन युद्ध को खत्म कर शांति की अपील कर चुके हैं. हिंदुस्तान ने इस मामले में साफ कहा है कि उसका रुख इंसानियत और शांति पर आधारित है. हिंदुस्तान लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान निकालने की बात करता रहा है. बातचीत और कूटनीति से निकले समाधान : पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले कह चुके हैं कि रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर हिंदुस्तान का रुख शांति और इंसानियत पर आधारित है. रूस के राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की, दोनों ने उनसे इस युद्ध को लेकर अपनी-अपनी बात शेयर की है. The post यूक्रेन जंग पर पुतिन ने की PM मोदी की पहल की तारीफ, बोले- ‘वॉर खत्म करने के लिए उनके पास बहुत अच्छे आइडिया’ appeared first on Naya Vichar.

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Jail Bharo Andolan Live: धर्मेंद्र के बाद अब CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, शिवाजी पार्क से आज शुरू होगा दीपके का आंदोलन

Jail Bharo Andolan Live: मुंबई में गांधी जयंती के मौके पर कॉकरोच जनता पार्टी ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जेल भरो आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है. सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दूसरे नेतृत्वक दलों और आम लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है. जानें पल-पल का अपडेट… The post Jail Bharo Andolan Live: धर्मेंद्र के बाद अब CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, शिवाजी पार्क से आज शुरू होगा दीपके का आंदोलन appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल राज्य डेटा सेंटर पर साइबर हमला: क्या खतरे में है पुलिस का CCTNS डेटा, जानिए पूरा मामला

कोलकाता. बंगाल पुलिस के डेटा सेंटर पर साइबर हमले हुए हैं. पुलिस का सीसीटीवीएनएस सिस्टम प्रभावित हुआ है. साइबर हमले के कारण पुलिस का कई डेटा खो गया है. बंगाल पुलिस का साइबर सिस्टम लगभग ठप हो गया है. भवानी भवन द्वारा पूरे राज्य को संदेश भेजा गया है. अधिकारियों को सभी पुलिस वेबसाइटों से लॉग आउट करने के निर्देश दिए गए हैं. क्या आपके महत्वपूर्ण पुलिस दस्तावेज खो गए हैं? पुलिस का सीसीटीवीएनएस सिस्टम आमतौर पर कोलकाता पुलिस और राज्य पुलिस का मुख्य केंद्र होता है. यहीं पर राज्य पुलिस की सभी एफआईआर, चार्जशीट और अन्य विवरण रखे जाते हैं. सुप्रीम कोर्ट के दिशा–निर्देशों के अनुसार, महत्वपूर्ण जानकारी या दस्तावेज़ सीसीटीवीएनएस पर अपलोड किए जाते हैं. गुरुवार तड़के करीब 10 बजे राज्य के इसी डेटा सेंटर पर साइबर हमला होने की बात कही जा रही है.  “डेटा सुरक्षा और लॉगआउट के दिए गए निर्देश” जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि सीसीटीवीएनएस की जानकारी तक पहुंच बनाई गई है. आरोप है कि कोलकाता पुलिस और कलिम्पोंग जिला पुलिस की महत्वपूर्ण जानकारी तक पहुंच बनाई गई है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रशासनी धन भेजने वाली सभी पूजा समितियों की जानकारी भी पुलिस सर्वर पर मौजूद थी. जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि उस बैंक खाते की जानकारी भी साइबर हमलावरों के हाथ लग सकती है. एक महीने पहले भी हुए थे साइबर हमले  संयोगवश, एक महीने पहले कई साइबर हमले हुए थे. सुबह एक और साइबर हमले के बाद, पूरे राज्य पुलिस विभाग को अलर्ट पर रखा गया है. संबंधित कर्मियों को सभी पुलिस वेबसाइटों से लॉग आउट करने का आदेश दिया गया है. हाल ही में एसटीएफ ने जांच के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों से कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनमें से कुछ आरोपी पाकिस्तानी नागरिक हैं और कुछ पाकिस्तानी जासूस हैं. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें “साइबर सेल कर रही डेटा उल्लंघन के स्तर की जांच” जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि जांच की प्रगति की जानकारी इन साइबर हमलावरों तक पहुंच सकती है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इसमें किसी तरह पाकिस्तान की भूमिका है? राज्य पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने जांच शुरू कर दी है. यह पता लगाने के लिए जांच शुरू की गई है कि यह जानकारी कहां से प्राप्त हुई. Also Read: शुभेंदु अधिकारी ने ठुकराई विश्व हिंदू परिषद की मांग, बोले- दुर्गा पूजा में मांसाहार पर रोक नहीं The post बंगाल राज्य डेटा सेंटर पर साइबर हमला: क्या खतरे में है पुलिस का CCTNS डेटा, जानिए पूरा मामला appeared first on Naya Vichar.

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क्या CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रोटेस्ट से पहले हिरासत में लिए गए दीपके? जानें क्या है पूरी सच्चाई

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को गुरुवार शाम को मुंबई पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की सूचना सामने आई. हालांकि बाद में इसे कुछ मीडिया रिपोर्ट में खारिज किया गया. पीटीआई के मुताबिक अभिजीत दीपके को केवल कुछ देर के लिए हिरासत में लिया गया था. दीपके को मरीन ड्राइव पर तख्तियां लेकर समर्थकों के साथ खड़े होने के बाद पुलिस थाने ले गई थी. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि दीपके मरीन ड्राइव पर अपने कुछ समर्थकों के साथ तख्तियां लेकर पहुंचे थे. इसी दौरान एक स्त्री निरीक्षक समेत पुलिस की टीम वहां पहुंची और उन्हें एक वैन से मरीन ड्राइव थाने ले गई. अधिकारी के मुताबिक, थाने ले जाते समय स्त्री पुलिस अधिकारी ने दीपके से उनकी पहचान और गृह नगर के बारे में जानकारी ली. दीपके और उनके समर्थकों को कुछ देर के लिए थाने में रखा गया. ये भी पढ़ें: मुंबई से जंतर-मंतर तक CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP का प्रदर्शन, 2 अक्टूबर को जेल भरो आंदोलन बाद में वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने के लिए कहे जाने के बाद दीपके कुछ ही मिनटों में थाने से बाहर निकल आए. दीपके को कुछ देर हिरासत में लिए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया. वहीं, थाने से बाहर आने के बाद करीब साढ़े ग्यारह बजे रात अभिजीत दीपके ने एक सेल्फी भी शेयर की. CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन यह घटनाक्रम मुंबई में 2 अक्टूबर को प्रस्तावित सीजेपी के आंदोलन से पहले सामने आया है. सीजेपी ने चुनावी सूची में कथित गड़बड़ियों और ईसीआई के कामकाज में जवाबदेही की मांग को लेकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान किया है और इस्तीफे की मांग की है. The post क्या CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रोटेस्ट से पहले हिरासत में लिए गए दीपके? जानें क्या है पूरी सच्चाई appeared first on Naya Vichar.

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