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LPU Protest: रेप के दावे से शुरू हुआ प्रदर्शन कैसे पहुंचा हिंसा तक? 10 प्वाइंट में समझें पूरा मामला

LPU Protest: पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में छात्रों का प्रदर्शन रविवार को हिंसक हो गया. यह विवाद एक छात्रा से कथित दुष्कर्म की सोशल मीडिया पर चल रही समाचारों से शुरू हुआ. इसके बाद कैंपस में तोड़फोड़, आगजनी और पुलिस के साथ झड़प की स्थिति बन गई. प्रदर्शनकारियों ने जालंधर-फगवाड़ा नेशनल हाईवे भी जाम कर दिया. हालांकि, दुष्कर्म के दावों की अभी पुष्टि नहीं हुई है. LPU ने इन दावों को झूठा और निराधार बताया है. वहीं, छात्रों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है. पुलिस CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है. कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद? पुलिस के अनुसार, छात्राओं के हॉस्टल के पास शनिवार रात से विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ. छात्रों का आरोप था कि गर्ल्स हॉस्टल-3 में रहने वाली एक छात्रा के साथ कुछ दिन पहले एक प्लंबर ने कथित तौर पर दुष्कर्म किया. छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि हॉस्टल वार्डन को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई. बाद में यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया. अफवाहों के बीच अलग-अलग दावे सामने आने लगे. पुलिस ने छात्रों की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया है, लेकिन प्राथमिकी में किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं बनाया गया है. तेलंगाना की छात्रा की मौत का मुद्दा भी उठा प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने करीब दो सप्ताह पहले हुई तेलंगाना की एक छात्रा की मौत का मामला भी उठाया. पुलिस के मुताबिक, छात्रा की मौत आत्महत्या के तौर पर सामने आई थी. छात्रों ने इस मौत को लेकर भी सवाल उठाए और किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका जताई. पुलिस ने बताया कि छात्रा के माता-पिता LPU पहुंचे थे और उसका मोबाइल फोन फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. ये भी पढ़ें: LPU में बवाल पर पंजाब DGP बोले- ‘कम से कम बल’ के इस्तेमाल से सुलझाया मामला; हिंसा करने वालों पर होगी कार्रवाई प्रदर्शन ने लिया हिंसक रूप मामला बढ़ने के बाद छात्रों ने जालंधर-फगवाड़ा नेशनल हाईवे को जाम कर दिया. इससे पंजाब के साथ हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की ओर जाने वाले यातायात पर भी असर पड़ा. कैंपस में कुछ प्रशासनिक इमारतों और वाहनों में तोड़फोड़ की गई. कुछ वाहनों को आग के हवाले किए जाने की भी जानकारी सामने आई. इसके बाद पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया. जवाब में प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव किया गया. कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है. पुलिस ने बनाई SIT जालंधर रेंज के DIG नवीन सिंगला के अनुसार, छात्रों की शिकायत पर FIR दर्ज की गई है और मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है. जांच में CCTV फुटेज, फोरेंसिक साक्ष्य और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच की जाएगी. पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी. फिलहाल किसी व्यक्ति को मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है. LPU ने क्या कहा? LPU प्रशासन ने दुष्कर्म के आरोपों को खारिज किया है. यूनिवर्सिटी की रजिस्ट्रार मोनिका गुलाटी ने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से झूठी और निराधार अफवाहें फैलाई जा रही हैं. यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा कि जांच में वह पुलिस का पूरा सहयोग करेगी. प्रशासन की ओर से छात्रों और अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें और आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें. 10 दिन के लिए कक्षाएं स्थगित हिंसा के बाद LPU ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित कर दी हैं. मिड-टर्म परीक्षाएं भी अगले आदेश तक टाल दी गई हैं. कई छात्र अपने घर लौटने लगे हैं. सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कैंपस में 2,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है. अधिकारियों के मुताबिक स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया है. छात्रों की क्या मांग है? प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने हॉस्टल की सुरक्षा और व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए. छात्रों की मांगों में हॉस्टल स्टाफ में केवल स्त्री कर्मचारियों की तैनाती और मामले की निष्पक्ष जांच जैसी बातें शामिल हैं. छात्रों ने LPU के संस्थापक-कुलपति और राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर उनकी मांगों पर आश्वासन देने की भी मांग की. फिलहाल पुलिस जांच जारी है. दुष्कर्म से जुड़े दावों और तेलंगाना की छात्रा की मौत को लेकर लगाए गए अन्य आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी. अब हाईवे और कैंपस की स्थिति क्या है? पुलिस के मुताबिक, NH-44 पर यातायात बहाल हो चुका है और स्थिति नियंत्रण में है. सोमवार को स्थिति शांतिपूर्ण रही. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित कर दी हैं. मिड-टर्म परीक्षाएं भी अगले आदेश तक टाल दी गई हैं. इसके बाद कई छात्र अपने घर लौटते दिखाई दिए. छात्रों की सुरक्षा को लेकर यूनिवर्सिटी ने क्या कहा? LPU ने छात्रों को अपने माता-पिता या अभिभावकों से सलाह लेकर घर जाने की अनुमति दी है. जो छात्र कैंपस में रहेंगे, उन्हें सुरक्षा के मद्देनजर हॉस्टल या अपने निवास स्थान पर रहने, अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलने और किसी भी प्रदर्शन या हंगामे में शामिल नहीं होने की सलाह दी गई है. रवनीत सिंह बिट्टू ने क्या आरोप लगाए? भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने LPU में हुए प्रदर्शन को लेकर पंजाब की आम आदमी पार्टी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. बिट्टू ने दावा किया कि 30 सितंबर को जालंधर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्रस्तावित रैली से पहले प्रशासन ने LPU में उपद्रवियों को भेजा और हिंसा को रोकने के लिए पुलिस ने पर्याप्त कार्रवाई नहीं की. उन्होंने इसे रैली में व्यवधान डालने की कथित साजिश से जोड़ा. ये भी पढ़ें: LPU Protest: कथित दुष्कर्म के दावे और प्रदर्शन के बीच यूनिवर्सिटी मॉल में लूटपाट? वीडियो वायरल The post LPU Protest: रेप के दावे से शुरू हुआ प्रदर्शन कैसे पहुंचा हिंसा तक? 10 प्वाइंट में समझें पूरा मामला appeared first on Naya Vichar.

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सुप्रीम कोर्ट ने ECI को दिया निर्देश- टीएमसी के दो गुटों के बीच चुनाव चिह्न के विवाद पर 3 महीने के अंदर फैसला करे आयोग

सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) को निर्देश दिया है कि वह ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के दो गुटों के बीच पार्टी चुनाव चिह्न विवाद पर विरोधी गुट के जवाब दाखिल करने के तीन महीने के अंदर फैसला करे. ममता बनर्जी की याचिका पर हुई सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और AITC नेता ममता बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया है, जिसमें उन्होंने आने वाले उपचुनावों के लिए पार्टी के सिंबल को फ्रीज करने के ECI के आदेश को चुनौती दी थी. कमीशन ने विवाद पर अपना आखिरी फैसला आने तक अंतरिम उपाय के तौर पर सिंबल को फ्रीज कर दिया था. सुनवाई के दौरान, ECI ने एक चार्ट सौंपा जिसमें दिखाया गया था कि पहले भी इसी तरह के पार्टी सिंबल विवादों पर फैसला करने में उसे कितना समय लगा था. कमीशन ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब वह इस तरह के विवाद से निपट रहा है और संकेत दिया कि मौजूदा मामले पर भी इसी समय-सीमा में फैसला किया जा सकता है. विरोधी गुट को जवाब दाखिल करने के लिए दिया गया 4 सप्ताह का समय कोर्ट ने कहा कि ममता बनर्जी की तरफ से जवाब पहले ही दाखिल कर दिया गया था, जबकि विरोधी गुट के जवाब का अभी भी इंतजार है. उसने विरोधी गुट को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया और ECI को उसके बाद तीन महीने के अंदर विवाद पर फैसला करने का निर्देश दिया है. ये भी पढ़ें: सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर : 22 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले पर विचार करेगा SC, नोटिस जारी किया The post सुप्रीम कोर्ट ने ECI को दिया निर्देश- टीएमसी के दो गुटों के बीच चुनाव चिह्न के विवाद पर 3 महीने के अंदर फैसला करे आयोग appeared first on Naya Vichar.

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सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर : 22 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले पर विचार करेगा SC, नोटिस जारी किया

सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर हिंदुस्तान के चर्चित पुलिस एनकाउंटर में से एक है. मामला 2005 में सोहराबुद्दीन शेख की मौत, उनकी पत्नी कौसर बी की हत्या और 2006 में उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की मौत से जुड़ा है. इसे अभियोजन पक्ष ने फर्जी एनकाउंटर और कथित आपराधिक साजिश का मामला बताया था. हालांकि, मुकदमे में आरोप साबित नहीं हो सके और सभी 22 आरोपी बरी हो गए. मई 2026 में बंबई हाईकोर्ट ने भी इन्हें बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा. क्या था सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर ? 23 नवंबर 2005 के आसपास सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति हैदराबाद से महाराष्ट्र जा रहे थे.पीड़ितों का आरोप था कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें एक लग्जरी बस से उतारकर हिरासत में लिया और गुजरात ले गए. बाद में पुलिस ने यह जानकारी दी कि सोहराबुद्दीन अहमदाबाद के पास एनकाउंटर में मारा गया. अभियोजन का आरोप था कि यह वास्तविक मुठभेड़ नहीं यह फर्जी एनकाउंटर था. पीड़ित पक्ष ने यह आरोप भी लगाया कि इसके बाद कौसर बी की भी हत्या कर दी गई और उनके शव को जला दिया गया. बाद में तुलसीराम प्रजापति की मौत दिसंबर 2006 में गुजरात-राजस्थान सीमा के पास पुलिस एनकाउंटर में हुई. हालांकि अभियोजन ने इसे भी साजिश का हिस्सा बताया था. इसी वजह से मामले की सीबीआई जांच हुई थी. सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर की जांच CBI ने की सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर पर अभियोजन के आरोपों के बाद इसकी जांच गुजरात सीआईडी कर रही थी. बाद में सुप्रीम कोर्टने जांच CBI को सौंपने और मुकदमे को गुजरात से मुंबई ट्रांसफर करने का निर्देश दिया. 2013 में सोहराबुद्दीन और तुलसीराम से जुड़े मामलों को भी एक साथ जोड़ दिया गया. CBI ने कुल 38 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. बाद में 22 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई, हालांकि 2018 में सभी आरोपी बरी हो गए. इसकी वजह यह थी कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को साबित नहीं कर सका. बंबई हाईकोर्ट ने क्या कहा? 7 मई 2026 को बंबई हाईकोर्ट ने विशेष CBI अदालत के 2018 के फैसले को बरकरार रखते हुए 22 आरोपियों की बरी कर दिया. हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन का मामला मुख्यतः परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था और उसमें कई कड़ियां टूटी हुई थीं. अदालत ने यह भी कहा कि सोहराबुद्दीन और कौसर बी के कथित अपहरण और अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं थे. हाईकोर्ट फैसले के खिलाफ सोहराबुद्दीन के भाई नायबुद्दीन शेख ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. ये भी पढ़ें: 2,000 रुपये से अधिक UPI भुगतान पर MDR: SC ने पूछा- चार्ज से किसे होगा फायदा? केंद्र-RBI से मांगा जवाब The post सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर : 22 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले पर विचार करेगा SC, नोटिस जारी किया appeared first on Naya Vichar.

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CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर उतरी कांग्रेस, पुलिस से हुई धक्का-मुक्की

नवीन शर्मा की रिपोर्ट CEC Resignation Demand: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर झारखंड कांग्रेस ने सोमवार को राजधानी रांची में प्रदर्शन किया. कांग्रेस के हजारों कार्यकर्ताओं ने पुराना विधानसभा मैदान से झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला. प्रदर्शन में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेताओं और विभिन्न प्रकोष्ठों के कार्यकर्ताओं के अलावा पार्टी के विधायक, मंत्री और वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए. कांग्रेस ने पहले ही 28 सितंबर को राज्यभर में प्रदर्शन और रांची में CEO कार्यालय के घेराव का ऐलान किया था. CEO कार्यालय के बाहर प्रदर्शन, गेट पर हुई धक्का-मुक्की पैदल मार्च के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने कार्यालय के गेट को तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गेट से पीछे हटाया. इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता गेट के पास ही धरने पर बैठ गए. प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार का पुतला भी जलाया. 26 सितंबर को तीनों चुनाव आयुक्तों की हुई बैठक इसी विवाद के बीच 26 सितंबर को CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की बैठक भी हुई. रिपोर्टों में बताया गया है कि यह बैठक उन मुद्दों के बीच हुई, जिन पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले महीनों में आपत्तियां दर्ज की थी. ये भी पढ़ें- झारखंड सड़क हादसों की गंभीरता के मामले में देश में तीसरे स्थान पर, आंकड़ों ने बढ़ायी चिंता SIR को लेकर पहले भी चुनाव आयोग को ज्ञापन दे चुकी है कांग्रेस झारखंड में कांग्रेस पहले भी SIR को लेकर चुनाव आयोग के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज करा चुकी है. 22 सितंबर को पार्टी ने झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन देकर SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चिंता जताई थी. अब CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर रांची में हुए प्रदर्शन से झारखंड में SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रही नेतृत्वक बहस और तेज हो गई है. The post CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर उतरी कांग्रेस, पुलिस से हुई धक्का-मुक्की appeared first on Naya Vichar.

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H-1B वीजा पर ट्रंप की सख्ती, न्यूयॉर्क अस्पताल के 82 में 80 डॉक्टरों पर होगी कार्रवाई

न्यूयॉर्क के रोचेस्टर जनरल हॉस्पिटल पर H-1B और J-1 वीजा से जुड़े कथित दुरुपयोग के आरोपों को लेकर अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल की नजर है. सोशल मीडिया पर किए गए एक दावे के मुताबिक, अस्पताल में नियुक्त 82 रेजिडेंट डॉक्टरों में से 80 विदेशी कर्मचारी थे, जिन्हें H-1B या J-1 वीजा के तहत नियुक्त किया गया. सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुई हलचल मामला तब सामने आया, जब ‘Expose H1B Fraud’ नाम के सोशल मीडिया अकाउंट ने दावा किया कि रोचेस्टर जनरल हॉस्पिटल ने 82 रेजिडेंट डॉक्टरों की नियुक्ति की, जिनमें 80 विदेशी नागरिक थे. पोस्ट में यह भी सवाल उठाया गया कि अमेरिकी उम्मीदवारों को रेजिडेंसी के लिए कितना अवसर मिला. इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी एस्पोसिटो ने पूछा- आंकड़े दिखाइए अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने 28 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस दावे का उल्लेख किया. उन्होंने लिखा, “हमें आंकड़े दिखाइए. कितने रेजिडेंसी स्लॉट एच-1बी और जे-1 वीजा धारकों को मिले? कितने अमेरिकी आवेदकों को उचित मौका मिला?” ट्रंप के कार्यकारी आदेश का भी किया जिक्र डी एस्पोसिटो ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश के बाद वीजा से जुड़े कथित दुरुपयोग पर बारीकी से नजर रखी जा रही है. उन्होंने संकेत दिया कि यदि व्यवस्था का गलत इस्तेमाल किया गया है, तो उनका कार्यालय उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की व्हाइट हाउस फ्रॉड टास्क फोर्स के साथ मिलकर काम कर सकता है. टेक सेक्टर से आगे हेल्थकेयर में भी H-1B की जांच यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब ट्रंप प्रशासन एच-1बी वीजा कार्यक्रम की जांच को पारंपरिक टेक्नोलॉजी सेक्टर से आगे बढ़ा रहा है. अब विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े दूसरे क्षेत्रों पर भी प्रशासन की नजर है. 2027 तक बढ़ाई गईं कुछ H-1B पाबंदियां 18 सितंबर को ट्रंप प्रशासन ने कुछ एच-1बी कर्मचारियों से जुड़ी पाबंदियों को एक और साल के लिए बढ़ा दिया. ये प्रतिबंध 21 सितंबर 2027 तक लागू रहेंगे. नियम के तहत अमेरिका से बाहर मौजूद कुछ एच-1बी कर्मचारियों के प्रवेश के लिए उनकी याचिका के साथ 1 लाख अमेरिकी डॉलर के भुगतान की आवश्यकता है, हालांकि इसमें कुछ अपवाद भी निर्धारित किए गए हैं. डी एस्पोसिटो बोले- एक साल में बदल सकते है H-1B के रूल एच-1बी वीजा कार्यक्रम को लेकर डी’एस्पोसिटो ने अमेरिकी कमेंटेटर और यूट्यूबर बेनी जॉनसन के साथ एक इंटरव्यू में भी सख्त रुख का संकेत दिया. उन्होंने कहा कि एक साल बाद एच-1बी वीजा कार्यक्रम का स्वरूप “बहुत अलग” हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन कथित विदेशी श्रम धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई के लिए मामला तैयार कर रहा है. डी एस्पोसिटो ने कहा-हम मामला तैयार कर रहे हैं डी एस्पोसिटो ने कहा कि व्हाइट हाउस और प्रशासन का मौजूदा फोकस अमेरिकी जनता के सामने पूरी तस्वीर रखने की दिशा में है. उन्होंने कथित तौर पर कहा, “हम मामला तैयार कर रहे हैं.” उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन की ओर से कार्रवाई के लिए तैयारी की जा रही है. H-1B नियम तोड़ने पर कार्रवाई के संकेत इंस्पेक्टर जनरल ने कथित विदेशी श्रम धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई के संकेत देते हुए कहा कि प्रशासन के पास कार्रवाई के लिए जरूरी कदम उठाने की तैयारी है. हालांकि, रोचेस्टर जनरल हॉस्पिटल के मामले में 82 में 80 विदेशी डॉक्टरों वाला आंकड़ा फिलहाल सोशल मीडिया पर किए गए दावे के रूप में सामने आया है. क्या है H-1B वीजा? एच-1बी वीजा अमेरिकी कंपनियों और संस्थानों को विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है. हर वित्तीय वर्ष में नए एच-1बी वीजा की सामान्य वार्षिक सीमा 65,000 है. इसके अलावा अमेरिकी उच्च शिक्षण संस्थान से मास्टर डिग्री या उससे अधिक योग्यता रखने वाले लोगों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा की छूट उपलब्ध है. ये भी पढ़ें: होर्मुज खोलने के बदले ईरान ने मांगे अरबों डॉलर के फ्रीज फंड? अमेरिका ने ठुकराया प्रस्ताव, ट्रंप बोले- जल्द जीतेंगे जंग The post H-1B वीजा पर ट्रंप की सख्ती, न्यूयॉर्क अस्पताल के 82 में 80 डॉक्टरों पर होगी कार्रवाई appeared first on Naya Vichar.

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2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर MDR का मामला: SC ने केंद्र और RBI से मांगा जवाब, रोक से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने 2,000 रुपये से अधिक के निर्धारित यूपीआई व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) लेनदेन पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MDR) लगाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सोमवार को केंद्र, हिंदुस्तानीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य पक्षों से जवाब मांगा. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी मोहना की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. हालांकि, अदालत ने MDR लागू करने के केंद्र के फैसले पर फिलहाल किसी तरह की अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया. केंद्र ने कहा- 96 फीसदी UPI यूजर्स दायरे से बाहर केंद्र प्रशासन की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमण ने पीठ को बताया कि UPI पर MDR की नई व्यवस्था से करीब 96 प्रतिशत यूजर्स के लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे. प्रशासन ने कहा कि 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर प्रस्तावित MDR सभी UPI लेनदेन पर लागू नहीं होगा. 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर MDR नई व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के पात्र Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाना है. प्रति लेनदेन MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है. MDR वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान से जुड़े लेनदेन में मर्चेंट की ओर से भुगतान सेवा से जुड़े पक्षों को दिया जाता है. इस व्यवस्था को लेकर यह सवाल भी उठाया गया है कि इसका असर व्यापारियों और डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल पर किस तरह पड़ेगा. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है. अब मामले की अगली सुनवाई में प्रशासन और अन्य पक्षों के जवाब के आधार पर अदालत आगे की कार्यवाही पर विचार करेगी. 15 अक्टूबर से लागू हुआ MDR प्रशासन ने करीब छह साल तक पूरी तरह नि:शुल्क रही यूपीआई भुगतान व्यवस्था में बदलाव करते हुए 15 अक्टूबर से व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के कुछ यूपीआई भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया है. हालांकि, व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) भुगतान और छोटे मूल्य के लेनदेन को शुल्क से बाहर रखा गया है. 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है. इन क्षेत्रों में तय शुल्क रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि आदानों जैसे आवश्यक तथा कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक लेनदेन पर पांच रुपये का तय MDR लिया जाएगा. वहीं, म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों और शेयर ब्रोकर या डीलर के माध्यम से किए जाने वाले भुगतान पर 0.02 प्रतिशत MDR लगेगा. इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी. P2P भुगतान पर शुल्क नहीं व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) यूपीआई हस्तांतरण पर लेनदेन की राशि चाहे जितनी हो, कोई शुल्क नहीं लगेगा. ऐसे लेनदेन यूपीआई की कुल मात्रा का करीब 37 प्रतिशत और कुल मूल्य का लगभग 70 प्रतिशत हैं. ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा MDR केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले कहा था कि MDR का बोझ UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा. उन्होंने कहा था कि यह शुल्क भुगतान सेवा से जुड़े ऑपरेटरों के बीच रहेगा. सीतारमण ने यह भी स्पष्ट किया था कि MDR कोई टैक्स या सेस नहीं है और इससे मिलने वाली राशि हिंदुस्तान की संचित निधि में जमा नहीं होगी. उनके मुताबिक, यह भुगतान प्रणाली को बेहतर बनाने और सेवा उपलब्ध कराने के लिए सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच लगाया जाने वाला शुल्क है. The post 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर MDR का मामला: SC ने केंद्र और RBI से मांगा जवाब, रोक से इनकार appeared first on Naya Vichar.

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एक बार चार्ज करने पर 153 km की रेंज, 3 घंटे से कम में चार्ज, कीमत ₹1 लाख से भी नीचे, लोगों को खूब पसंद आ रहा है ये इलेक्ट्रिक स्कूटर

अगर आप इन दिनों बाहर रोड पर निकलेंगे तो आपको कहीं न कहीं Bajaj Chetak जरूर खड़ा दिख जाएगा. पुराने दौर का यह नया स्कूटर अब कंपनी की पहचान बन चुका है. फिलहाल चेतक के C2501, C3001, C3501, C3502 और C3503 मॉडल बाजार में उपलब्ध हैं. कीमत की बात करें तो शुरुआती मॉडल की कीमत ₹95,802 से शुरू हो जाती है, जो टॉप वेरिएंट के लिए ₹1,52,140 तक जाती है. मॉडल्स के आधार पर कीमत और रेंज मॉडल एक्स-शोरूम कीमत रेंज (फुल चार्ज) खासियत Chetak C2501 ₹95,802 113 किमी 2.5 kWh बैटरी, 60 किमी/घंटा टॉप स्पीड, रिवर्स मोड, फ्रंट डिस्क ब्रेक Chetak C3001 ₹1,14,270 131 किमी 3 kWh बैटरी, 70 किमी/घंटा टॉप स्पीड, Bluetooth कनेक्टिविटी, Eco और Sports मोड Chetak C3503 ₹1,24,157 151 किमी 3.5 kWh बैटरी, 70 किमी/घंटा टॉप स्पीड, Bluetooth कनेक्टिविटी Chetak C3502 ₹1,36,939 153 किमी 3.5 kWh बैटरी, 80 किमी/घंटा टॉप स्पीड, फुल ऐप कनेक्टिविटी, 200 mm फ्रंट डिस्क Chetak C3501 ₹1,52,140 153 किमी 3.5 kWh बैटरी, 80 किमी/घंटा टॉप स्पीड, फुल ऐप कनेक्टिविटी, 5-इंच TFT टचस्क्रीन, सीक्वेंशियल ब्लिंकर नोट: यह कंपनी के जरिए बताई गई IDC रेंज है जो वास्तविक रेंज से अलग हो सकती है. वास्तविक रेंज राइडिंग मोड, स्पीड, ट्रैफिक और मौसम जैसी स्थितियों पर निर्भर करती है. ये भी पढ़ें: सिंगल चार्ज में 212 km की रेंज की गारंटी, ₹5,000 तक PM E-DRIVE का फायदा और ₹0.18/किमी की रनिंग कॉस्ट, 2026 में खूब खरीदा गया TVS iQube 24 कलर ऑप्शन चेतक 5 मॉडल में आती है, जिसमें 24 कलर ऑप्शन मिलते हैं. सभी मॉडल्स में सबसे ज्यादा कलर ऑप्शन Chetak C2501 में मिलते हैं. मॉडल उपलब्ध कलर ऑप्शन Chetak C2501 Ocean Teal, Classic White, Racing Red, Misty Yellow, Opalescent Silver, Brooklyn Black Chetak C3001 Brooklyn Black, Racing Red, Azure Blue, Lime Yellow, Cyber White Chetak C3503 Brooklyn Black, Coarse Grey, Indigo Metallic, Classic White Chetak C3502 Brooklyn Black, Coarse Grey, Indigo Metallic, Classic White Chetak C3501 Brooklyn Black, Hazel Nut, Indigo Metallic, Matte Scarlett Red, Pista Green बिक्री में भी मजबूत पकड़ बजाज की FY2025-26 के दौरान घरेलू बिक्री 3,02,674 यूनिट रही, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 16% ज्यादा है. कंपनी की कुल बिक्री 7 लाख यूनिट पार कर चुकी है और FY26 में EV स्कूटर सेगमेंट में इसकी बाजार हिस्सेदारी 20.7% रही. चेतक की सफलता के पीछे इसकी मेटल बॉडी, बड़ा बूट, कई कीमतों में मॉडल, अच्छी रेंज और मजबूत बिक्री नेटवर्क है. कंपनी के पास 500 से ज्यादा एक्सपीरियंस सेंटर और 4,000 से ज्यादा टचपॉइंट हैं. इससे कंपनी को अलग-अलग तरह के ग्राहकों तक पहुंच बनाने में मदद मिलती है. यही वजह है कि चेतक आज बजाज के बड़े इलेक्ट्रिक स्कूटर ब्रांड के तौर पर अपनी जगह बना चुकी है. अन्य स्पेशिफिकेशंस रेंज, कलर और कीमत के अलावा भी ये स्कूटर फीचर्स की एक पूरी रेंज ऑफर करते हैं. तालिका में जानिए मॉडल के हिसाब से आपको हर चेतक स्कूटर में क्या फीचर्स मिलते हैं: स्पेसिफिकेशन C2501 C3001 C3503 C3502 C3501 बैटरी 2.5 kWh 3.0 kWh 3.5 kWh 3.5 kWh 3.5 kWh टॉप स्पीड 60 किमी/घंटा 70 किमी/घंटा 70 किमी/घंटा 80 किमी/घंटा 80 किमी/घंटा 0-80% चार्जिंग 2 घंटे 25 मिनट 2 घंटे 55 मिनट 3 घंटे 25 मिनट 3 घंटे 25 मिनट 3 घंटे डिस्प्ले LCD कलर LCD कलर LCD 5-इंच TFT 5-इंच TFT टच कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं Bluetooth Bluetooth Full App Connectivity Full App Connectivity फ्रंट ब्रेक डिस्क ड्रम ड्रम 200 mm डिस्क 200 mm डिस्क रियर ब्रेक ड्रम ड्रम ड्रम ड्रम ड्रम रिवर्स मोड हां हां हां हां हां बॉडी स्टील स्टील स्टील स्टील स्टील बूट स्पेस 25 लीटर 35 लीटर 35 लीटर 35 लीटर 35 लीटर कौन-सा मॉडल किसके लिए? बजाज चेतक अभी देश के टॉप सेलिंग स्कूटर्स में शुमार है. इसकी वजह इसमें मिलने वाले वैल्यू फॉर मनी फीचर्स और आफ्टर सेल्स सर्विस है. आइए जानते हैं सभी चेतक मॉडल में से आपको अपने जरूरत के हिसाब से कौन सा वेरिएंट चुनना चाहिए? C2501: यह सबसे कम बजट में आने वाला चेतक स्कूटर है तो बजट फ्रेंडली स्कूटर चाहने वालों के लिए ये परफेक्ट रहेगा. C3001: ये स्कूटर स्टूडेंट या काम पर रोजाना शहर में आने-जाने वालों के लिए अच्छा रहेगा. C3503: यह स्कूटर उनके लिए परफेक्ट रहेगा जो ज्यादा रेंज चाहते हैं. C3502: यह स्कूटर ज्यादा स्पीड और बेहतर फीचर्स चाहने वालों के लिए अच्छा रहेगा. C3501: ये चेतक का ज्यादा फीचर वाला टॉप मॉडल है. तो इसमें रेंज, स्पीड और फीचर्स सब देखने को मिलेंगे. इस गाइड से आपको अपनी जरूरत के हिसाब से आपका पसंदीदा मॉडल चुनने में मदद मिलेगी. ये भी पढ़ें: देश ही नहीं विदेशों में भी इन ‘Made in India’ इलेक्ट्रिक स्कूटर्स की धूम, एक्सपोर्ट 450% बढ़ा, TVS iQube सबसे आगे The post एक बार चार्ज करने पर 153 km की रेंज, 3 घंटे से कम में चार्ज, कीमत ₹1 लाख से भी नीचे, लोगों को खूब पसंद आ रहा है ये इलेक्ट्रिक स्कूटर appeared first on Naya Vichar.

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बृजभूषण सिंह की बढ़ीं मुश्किलें: महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में कोर्ट ने फिर भेजा नोटिस

Female Wrestlers Sexual Harassment Case : हिंदुस्तानीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में नया मोड़ सामने आया है. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट की सेशंस कोर्ट ने बृजभूषण सिंह और अन्य आरोपियों को नोटिस जारी किया है. यह नोटिस मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा उन्हें बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर की गई अपील पर जारी हुआ है. 9 अक्टूबर को होगी मामले की अगली सुनवाई सेशंस कोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षों से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 अक्टूबर की तारीख निश्चित की है. स्त्री पहलवानों ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें बृजभूषण शरण सिंह को राहत दी गई थी. 3 अगस्त को कोर्ट ने किया था बरी बता दें कि इसी साल 3 अगस्त को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह और पूर्व WFI असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर को यौन उत्पीड़न के इस मामले में बरी कर दिया था. कोर्ट के इस फैसले से पहलवानों को बड़ा झटका लगा था. कोर्ट के फैसले को सेशंस कोर्ट में दी चुनौती मजिस्ट्रेट कोर्ट से बरी किए जाने के आदेश के खिलाफ अब स्त्री पहलवानों ने सेशंस कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. पहलवानों की अपील को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने अब बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर से जवाब मांगा है. 9 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में तय होगा कि इस मामले में आगे क्या कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी. ये भी पढ़ें: लैंडिंग के वक्त बंद हो सकता है ऑटोपायलट: बोइंग 737 MAX में आई खराबी, 96 हिंदुस्तानीय विमानों पर पड़ेगा असर! ये भी पढ़ें: Delhi GK-2 : सुलह के बहाने घर में घुसा एक्स-पार्टनर, शारीरिक संबंध बनाने से किया इनकार तो करने लगा मारपीट The post बृजभूषण सिंह की बढ़ीं मुश्किलें: स्त्री पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में कोर्ट ने फिर भेजा नोटिस appeared first on Naya Vichar.

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दिल्ली पार्क गैंगरेप पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- ‘पार्क, सड़क और बसें हाई-रिस्क जोन नहीं बन सकते’

दिल्ली के कालकाजी स्थित आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय किशोरी के कथित गैंगरेप मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार ( 28 सितंबर) को स्वतः संज्ञान लिया है. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक,अदालत ने दिल्ली-NCR में स्त्रीओं और नाबालिगों के खिलाफ हाल में सामने आये यौन अपराधों पर गंभीर चिंता जतायी. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पार्क, सड़क, बस, मेट्रो स्टेशन और सबवे जैसी सार्वजनिक जगहों को खराब पेट्रोलिंग और निगरानी की कमी के कारण ‘हाई-रिस्क जोन’ नहीं बनाया जा सकता. पीठ ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है. क्या 2012 के निर्भया कांड से सबक लिया गया? पीठ ने दिल्ली-NCR में नाबालिगों के खिलाफ लगातार सामने आ रही यौन हिंसा की घटनाओं पर चिंता जताते हुए 2012 के निर्भया कांड का भी उल्लेख किया. कोर्ट ने कहा कि इन घटनाओं को देखकर यह सवाल उठता है कि क्या उस घटना से जरूरी सबक लिया गया है. पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के साथ हिंसा-मुक्त जीवन के अधिकार को मौलिक गारंटी बताया. आस्था कुंज पार्क मामले में क्या हुआ? दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 17 वर्षीय लड़की अपने एक पुरुष मित्र के साथ कालकाजी मंदिर गयी थी. इसके बाद दोनों आस्था कुंज पार्क पहुंचे. आरोप है कि तीन लोगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर दोनों को रोका और लड़की को उसके दोस्त से अलग कर दिया. पुलिस के मुताबिक, इसके बाद पार्क के एक सुनसान हिस्से में लड़की के साथ कथित तौर पर यौन हिंसा की गयी. तीनों आरोपी गिरफ्तार पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच के दौरान CCTV फुटेज और तकनीकी इनपुट की मदद ली गयी. पुलिस के अनुसार, आरोपियों में से एक ने गिरफ्तारी के दौरान पुलिस टीम पर कथित तौर पर गोली चलायी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह घायल हुआ. LSR कॉलेज की छात्राओं ने भी उठाये थे सुरक्षा के सवाल आस्था कुंज पार्क के पास स्थित लेडी श्रीराम कॉलेज की छात्राओं की ओर से पहले भी इलाके में सुरक्षा और कथित यौन उत्पीड़न की घटनाओं को लेकर शिकायतें सामने आने की बात सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में रखी गयी. कोर्ट ने कहा कि ऐसी शिकायतों के बावजूद सुरक्षा संबंधी कमियों को दूर करने के लिए पर्याप्त निगरानी व्यवस्था मजबूत नहीं की गयी. पार्क में सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल घटना के बाद पार्क की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार पार्क के अंदर सीसीटीवी कैमरों की कमी थी और प्रवेश द्वारों पर लगे कई कैमरे काम नहीं कर रहे थे. इससे निगरानी व्यवस्था को लेकर चिंता और बढ़ी है. दिल्ली-NCR की अन्य घटनाओं पर भी कोर्ट की नजर सुप्रीम कोर्ट ने केवल कालकाजी की घटना पर ही नहीं, बल्कि स्वारूप नगर में नाबालिग के कथित गैंगरेप और ग्रेटर नोएडा से दिल्ली आ रही बस में एक अन्य नाबालिग के यौन उत्पीड़न की घटना का भी संज्ञान लिया है. पीठ ने इन घटनाओं को सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े व्यापक सवाल के तौर पर देखा है. अब दिल्ली पुलिस से जवाब तलब सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान के बाद दिल्ली पुलिस को इन घटनाओं और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जवाब देना होगा. अदालत की टिप्पणी से साफ है कि पार्क, सड़क, सार्वजनिक परिवहन और दूसरे सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा, पेट्रोलिंग और निगरानी व्यवस्था की भूमिका पर अब न्यायिक स्तर पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है. ये भी पढ़ें: राम मंदिर आंदोलन से सामाजिक एकता तक, पीएम मोदी ने अशोक सिंघल को किया याद, बोले- उनका जीवन परमार्थ की मिसाल The post दिल्ली पार्क गैंगरेप पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- ‘पार्क, सड़क और बसें हाई-रिस्क जोन नहीं बन सकते’ appeared first on Naya Vichar.

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LPU Protest: आखिर रात में कैंपस में क्या हुआ? छात्रों ने बताया आंखों देखा हाल

LPU Students Experience: बीते दिनों LPU कैंपस में हुई घटना के बाद यूनिवर्सिटी की ओर से जरूरी निर्देश जारी किए गए हैं. इसके तहत नियमित कक्षाओं को 10 दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि Mid-Term Exam को अगली सूचना तक पोस्टपोन किया गया है. साथ ही, जो स्टूडेंट्स इस दौरान अपने घर जाना चाहते हैं, उन्हें इसकी अनुमति दी गई है. ऐसे में घर लौट रहे कई छात्रों ने कैंपस में हुई घटना के दौरान अपने अनुभव साझा किए हैं. आइए जानते हैं, उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्या कहा है. LPU Incident Update: मास्क पहने थे कई प्रदर्शनकारी LPU के छात्र विशाल कुमार ने कैंपस से घर जाते समय मीडिया को बताया कि सुबह तक सब नाॅर्मल था, स्टूडेंट्स सड़कों पर बैठकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. हालांकि जैसे ही रात हुई, बाहर से बड़ी संख्या में लोग मास्क पहनकर आए और स्थिति हिंसक हो गई. इसके बाद कैंपस में तोड़-फोड़ शुरू हाे गई. वे एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक जा रहे थे और हर चीज को तोड़-फोड़ रहे थे. रात के समय स्थिति काफी गंभीर हो गई थी. घटना के बाद कॉलेज अथॉरिटी ने क्लासेस सस्पेंड कर दी है. ये भी पढ़ें: 2000 छात्र, एक रात और तबाह हुआ पूरा कैंपस, LPU की पूरी इनसाइड स्टोरी LPU Notice For Students: काॅलेज की छात्रा ने बताया आंखों देखा हाल LPU कैंपस में चल रहा प्रोटेस्ट लड़कियों की सेफ्टी को लेकर था, मगर स्थिति ऐसी हो गई है की काॅलेज कैंपस में खुद लड़कियां ही सेफ नहीं हैं. यह बात काॅलेज की एक छात्रा खुशी चतुर्वेदी ने कही है. ANI की ओर से X पर जारी एक वीडियो पोस्ट में छात्रा ने कहा कि जो छात्र घर नहीं जा रहे हैं, वे अपने हॉस्टल के अंदर ही रहें. अगर वे विरोध करना चाहते हैं, तो शांतिपूर्ण तरीके से कर सकते हैं. ये भी पढ़ें: LPU Students Protest: गैंगरेप की अफवाह से LPU में हंगामा, हजारों छात्र जुटे, जमकर की तोड़फोड़ LPU Students Reaction: बिल्डिंग में लगाई आग और किया तोड़-फोड़ काॅलेज के एक स्टूडेंट ने आखों देखा हाल बताया कि स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि CS बिल्डिंग में आग लगाया गया और एडमिशन ब्लॉक को तोड़ दिया गया. उन्होंने बताया कि हंगामा अब थम गया है और काॅलेज कैंपस में शांति का माहौल है. पुलिस ने कैंपस को सुरक्षित कर लिया है. अभी तो हम सुरक्षित महसूस कर रहे हैं, लेकिन हमें पक्का नहीं पता कि 10 दिन बाद सब कुछ सामान्य होगा या नहीं. ऑनलाइन क्लास होंगी या नहीं, क्योंकि कल रात क्लासरूम में काफी तोड़-फोड़ की गई थी. LPU Room No. 504 Girls Comment: क्या कहा हाॅस्टल की छात्राओं ने? LPU ने हाॅस्टल के रूम नंबर 504 की छात्राओं का एक वीडियो जारी करके दावा किया था कि इसमें छात्राएं विवाद के बारे में सीधे तौर पर बात कर रही थीं और यह वीडियो उनकी “साफ मंजूरी” से पब्लिश किया गया था. हालांकि मीडिया में उन्ही लड़कियों के वायरल हो रहे वीडियो में उन्हें आरोप लगाते देखा जा रहा है कि उनके बयानों को एडिट किया गया है. उन्हें बताया गया कि क्या बोलना है और वीडियो उनकी मंजूरी के बिना पब्लिश किया गया. Note: नया विचार इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है. ये भी पढ़ें: LPU Classes Suspended: 10 दिन बंद रहेंगी कक्षाएं, Mid-Term Exams भी पोस्टपोन The post LPU Protest: आखिर रात में कैंपस में क्या हुआ? छात्रों ने बताया आंखों देखा हाल appeared first on Naya Vichar.

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