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DUSU Election Result 2026: तीसरे राउंड के बाद बदली तस्वीर, अध्यक्ष पद पर ABVP को पछाड़ NSUI आगे, वाइस प्रेसिडेंट में निर्दलीय का दबदबा

DUSU Election Result 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) चुनाव के लिए वोटों की गिनती चल रही है. तीसरे राउंड की गिनती के बाद तस्वीर पूरी तरह से बदल गई है. NSUI के विजय शंकर मीणा ने AVBP के यश डबास को पीछे छोड़ दिया है और 400 से अधिक वोटों से आगे चल रहे हैं. जबकि वाइस प्रेसिडेंट के पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ABVP के ईशु मौर्य को पीछे छोड़ 2000 वोटों से आगे चल रहे हैं. पहले राउंड में ABVP ने प्रेसिडेंट और सेक्रेटरी पद पर बनाई थी बढ़त गिनती का पहला राउंड पूरा हो चुका है, जिसमें ABVP दो अहम पदों – प्रेसिडेंट और सेक्रेटरी – पर आगे है. जबकि वाइस-प्रेसिडेंट और जॉइंट सेक्रेटरी के पदों पर निर्दलीय उम्मीदवार आगे चल रहे हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव (DUSU Election 2026) के लिए वोटों की गिनती नॉर्थ कैंपस स्थित यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के मल्टीपर्पज हॉल में चल रही है. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के चार केंद्रीय पदों के नतीजे आज घोषित किए जाने की उम्मीद है. 20 उम्मीदवार मैदान में DUSU के चार केंद्रीय पदों के लिए कुल 20 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे. अध्यक्ष पद के लिए 7, उपाध्यक्ष के लिए 5, जबकि सचिव और संयुक्त सचिव पद के लिए 4-4 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा. प्रमुख छात्र संगठनों में ABVP, NSUI और AISA-SFI गठबंधन शामिल हैं. AVBP के प्रत्याशी अध्यक्ष पद – यश डबास उपाध्यक्ष पद – इशू मौर्य सचिव पद – रिया छावड़ी संयुक्त सचिव – लक्ष्य राज सिंह NSUI के प्रत्याशी अध्यक्ष- विजय शंकर मीणा उपाध्यक्ष- वीर चतरथ सचिव- नम्रता चौधरी संयुक्त सचिव- गोपाल चौधरी AISA-SFI के संयुक्त उम्मीदवार अध्यक्ष- अनन्या रतूड़ी (आइसा) उपाध्यक्ष- अक्षत शिखर (आइसा) सचिव- स्टैनजिन डेस्क्योंग (SFI) संयुक्त सचिव- बी पारिजात (SFI) 40.46 प्रतिशत हुआ था मतदान दिल्ली यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को मतदान हुआ था. चुनाव में 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है. 2025 में मतदान प्रतिशत 39.5 रहा था. इस बार मतदान दिल्ली यूनिवर्सिटी के 52 केंद्रों पर दो चरणों में कराया गया. सुरक्षा के कड़े इंतजाम DUSU के मुख्य चुनाव अधिकारी डॉ राजेश सिंह कहते हैं, “वोटों की गिनती के लिए हमने जो इंतजाम किए हैं, वे पूरी तरह से पुख्ता हैं. दिल्ली पुलिस हमारे साथ मिलकर काम कर रही है और उन्होंने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. ये भी पढ़ें: DUSU Election Result 2026: कौन बनेगा दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ का अध्यक्ष? ABVP-NSUI के बीच फाइट; विजय जुलूस पर रोक The post DUSU Election Result 2026: तीसरे राउंड के बाद बदली तस्वीर, अध्यक्ष पद पर ABVP को पछाड़ NSUI आगे, वाइस प्रेसिडेंट में निर्दलीय का दबदबा appeared first on Naya Vichar.

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त्योहारों से ठीक पहले ₹8 महंगा हो सकता है दूध, कर्नाटक सरकार को 3 दिन का अल्टीमेटम

Milk Price Hike: कर्नाटक में त्योहारों से पहले आम लोगों पर महंगाई का एक और असर पड़ सकता है. राज्य के दूध उत्पादक संघों ने दूध की कीमत में 8 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी की मांग की है. यह मांग बेंगलुरु प्रेस क्लब में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाई गई. उत्पादकों का कहना है कि पशु चारा, कच्चे माल, ईंधन और ट्रांसपोर्टेशन की बढ़ती लागत के कारण डेयरी किसानों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है. दूध उत्पादकों ने राज्य प्रशासन को इस मामले में 3 दिन का समय दिया है. उनका कहना है कि अगर इस दौरान कैबिनेट बैठक बुलाकर उनकी मांग पर फैसला नहीं लिया गया, तो वे विरोध तेज करते हुए विधान सौध तक मार्च निकाल सकते हैं. दूध की कीमत बढ़ाने की मांग क्यों उठी? कर्नाटक मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के मुताबिक, किसानों की लागत बढ़ रही है, जबकि दूध के लिए उन्हें मिलने वाली कीमत उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है. संघों ने दूध की खरीद कीमत में 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के साथ प्रशासन से मिलने वाले इंसेंटिव को भी बढ़ाने की मांग की है. फिलहाल प्रशासन की ओर से दूध उत्पादकों को 5 रुपये प्रति लीटर इंसेंटिव दिया जाता है. संघ इसे बढ़ाकर 8 रुपये प्रति लीटर करने की मांग कर रहे हैं. उत्पादकों का दावा है कि बामुल, चामुल, मांड्या मिल्क और तुमकुर समेत राज्य के कई बड़े दूध संघ इस मांग के समर्थन में हैं. चारा और पशु आहार की बढ़ती लागत का कितना असर? डेयरी संघों ने दूध उत्पादन की लागत बढ़ने के पीछे कई वजहें बताई हैं. उनके मुताबिक, कम बारिश और सूखे जैसे हालात के कारण हरे चारे की कमी हुई है. इसके अलावा पशु आहार में इस्तेमाल होने वाले मक्का, चोकर और शीरे जैसे कच्चे माल की कीमत करीब 25% तक बढ़ी है. बछड़ों के बिछावन के सामान के साथ-साथ ईंधन और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी बढ़ने की बात कही गई है. उत्पादकों का कहना है कि इन बढ़ती लागतों के कारण किसानों के लिए मवेशियों को पालना मुश्किल होता जा रहा है. क्या कर्नाटक में दूध का उत्पादन भी घटा है? दूध उत्पादक संघों ने उत्पादन में गिरावट का भी मुद्दा उठाया है. उनके मुताबिक, कर्नाटक में पहले रोजाना करीब 1.11 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन होता था, जो अब घटकर करीब 1.05 करोड़ से 1.06 करोड़ लीटर प्रतिदिन रह गया है. बामुल मिल्क यूनियन के प्रेसिडेंट नागराज के मुताबिक, डेयरी संघ पिछले 8 महीनों से राज्य प्रशासन से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है. उनका कहना है कि लागत बढ़ने और उत्पादन घटने का असर आगे चलकर दूध की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है. अगर 8 रुपये बढ़े तो आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा? अगर प्रशासन इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो कर्नाटक में दूध के दाम बढ़ सकते हैं. इसका सीधा असर रोजाना दूध खरीदने वाले परिवारों के बजट पर पड़ेगा. खासकर नवरात्रि और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान इसका असर केवल पैकेट वाले दूध तक सीमित नहीं रह सकता. दूध से बनने वाली मिठाई, खोया और दूसरे डेयरी उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव पड़ सकता है. फिलहाल राज्य प्रशासन की ओर से इस मांग पर अंतिम फैसला आना बाकी है. कर्नाटक के दूध उत्पादक संघों की नजर अब अगले तीन दिनों में प्रशासन की प्रतिक्रिया पर है. ये भी पढ़ें: मुर्गी पालन शुरू करना है? प्रशासन देगी 25 लाख तक की सब्सिडी, जानें आवेदन का पूरा तरीका The post त्योहारों से ठीक पहले ₹8 महंगा हो सकता है दूध, कर्नाटक प्रशासन को 3 दिन का अल्टीमेटम appeared first on Naya Vichar.

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408 साल पुराना मथुरा विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट में टली सुनवाई, समझें कैसे शुरू हुआ कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह का मसला

Krishna Janmabhoomi Dispute : कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद पर सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा स्थगित कर दी गई है. न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी. विवाद से जुड़े कई मुकदमें दर्ज हैं जिनमें से किसे मुख्य मामला माना जाए, इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट फंस गई थी. अगस्त में ही सुप्रीम कोर्ट की ओर से संकेत दिया गया था कि इस उलझन को इलाहाबाद हाईकोर्ट ही सुलझाएगी. ये तो वर्तमान में हुए डेवलपमेंट हैं, आइए जान लें कि राम जन्मभूमि विवाद सुलझने के बाद तेजी से सुर्खियों में आया कृष्ण जन्मभूमि विवाद क्या है. क्या है कृष्ण जन्मभूमि विवाद? मथुरा का कृष्ण जन्मभूमि विवाद मुख्य रूप से 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर है. जिस पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर (करीब 11 एकड़ जमीन पर) और शाही ईदगाह मस्जिद दोनों बने हुए हैं. हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने 1670 में यहां स्थित प्राचीन केशवदेव मंदिर को तुड़वाकर उसके ऊपर मस्जिद का निर्माण करवाया था. हिंदू पक्ष का मानना है कि मस्जिद का मुख्य हिस्सा (गर्भ गृह) वही सटीक स्थान है जहां भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. हिंदू पक्ष का दावा हिंदू पक्ष का कहना है कि विवादित जमीन पर पूरा हक हिंदुओं का है. उनका कहना है कि मस्जिद की दीवारों और खंभों पर आज भी हिंदू धार्मिक चिन्ह, जैसे कमल के फूल और शेषनाग की आकृतियां मौजूद हैं. उनकी मांग है कि मस्जिद को वहां से हटाकर जमीन मंदिर ट्रस्ट को सौंपी जाए. मुस्लिम पक्ष का तर्क मुस्लिम पक्ष यानी शाही ईदगाह कमेटी का कहना है कि यह मस्जिद सदियों पुरानी है और 1968 में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हो चुका था. जिसके तहत मस्जिद की जगह पर उनका अधिकार माना गया था. हाईकोर्ट के 2025 के आदेश को दूसरे हिंदू पक्ष ने दी थी चुनौती यह पूरा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के 18 जुलाई, 2025 के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें एक वादी की अर्जी मंजूर करते हुए उसके मुकदमे को अन्य सभी मुकदमों के लिए ‘प्रतिनिधि मुकदमा’ (Representative Action) मान लिया गया था और तय किया गया था कि इस पर फैसला पहले होगा. हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ एक अन्य हिंदू वादी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. याचिकाकर्ता की दलील है कि जब मथुरा जिला अदालत से सभी मुकदमे हाईकोर्ट ट्रांसफर हुए थे, तब उनका मुकदमा मुख्य था, ऐसे में बिना बाकी पक्षों को सुने किसी दूसरे वादी को सभी कृष्ण भक्तों का प्रतिनिधि दर्जा देना पूरी तरह गलत है. शाही ईदगाह परिसर को लेकर लंबित हैं 20 से अधिक मुकदमे मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद परिसर के मालिकाना हक को लेकर 20 से ज्यादा दीवानी मुकदमे चल रहे हैं. हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने जन्मभूमि पर बने प्राचीन मंदिर को तोड़कर वहां मस्जिद बनवाई थी, जिसके निशान आज भी परिसर में मौजूद हैं. शुरुआत में ये सभी मामले मथुरा की निचली अदालत में दाखिल हुए थे, जिन्हें बाद में हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में भी मस्जिद कमेटी और हिंदू पक्षों की कई अर्जियां लंबित हैं, जिनमें से एक याचिका पर शीर्ष अदालत ने जनवरी 2024 में विवादित परिसर के कोर्ट कमिश्नर सर्वे कराने के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी. समझिए विवाद का इतिहास और कानूनी मोड़ श्रीकृष्ण जन्मभूमि सेवा संघ और शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी के बीच 1968 में एक समझौता हुआ था, जिसमें मस्जिद के वजूद को स्वीकारा गया था. हालांकि मौजूदा याचिकाओं में हिंदू पक्ष इस समझौते को अवैध और धोखाधड़ी बताकर खारिज करने की मांग कर रहा है. इसके बाद साल 1991 में प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट लाया जाता है. मुस्लिम पक्ष इस कानून का हवाला देते हैं. जिसके अनुसार 15 अगस्त 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस रूप में था, उसे बदला नहीं जा सकता. वहीं हिंदू पक्ष का तर्क है कि यह कानून इस मामले पर लागू नहीं होता है क्योंकि जमीन के मालिकाना हक पर विवाद बहुत पहले से चलता आ रहा है. 1618 या 1670 कब से हुई विवाद की शुरुआत ओरछा के राजा वीर सिंह देव बुंदेला ने 1618 में भव्य केशवदेव मंदिर का निर्माण कराया था. जिसकी भव्यता को देखने दूर-दूर से लोग आते थे. जहांगीर और बाद के मुगल शासकों को भी केशवदेव मंदिर का इतनी ऊंचाई पर और भव्य निर्माण किया जाना पसंद नहीं आया. फिर बाद में 1670 में जाकर मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर को तुड़वा दिया था. जिसका जिक्र शाही इतिहासकार साकी मुस्तैद खान की पुस्तक मासिर-ए-आलमगीरी में मिलता है. 1618 से सुलगता आ रहा विवाद 408 साल पुराना हो चुका है. हालांकि 1670 के दशक में मंदिर गिराए जाने के बाद खून-खराबे का जिक्र इतिहास में मिलता है, लेकिन अयोध्या में 1992 के घटनाक्रम जैसी कोई भी हिंसक घटना या ढांचा गिराने जैसी स्थिति मथुरा में नहीं देखी गई. दोनों पक्षों के श्रद्धालु और नमाजी अपने-अपने निर्धारित हिस्सों में बिना किसी टकराव के आते-जाते हैं. ये भी पढ़ें: मध्य प्रदेश का मौसम: 19 सितंबर को MP में फिर बरसेंगे बादल, भोपाल-इंदौर समेत कई इलाकों में बारिश के आसार The post 408 साल पुराना मथुरा विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट में टली सुनवाई, समझें कैसे शुरू हुआ कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह का मसला appeared first on Naya Vichar.

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DUSU Election Result 2026: कौन बनेगा दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ का अध्यक्ष? ABVP-NSUI के बीच फाइट; विजय जुलूस पर रोक

दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव (DUSU Election 2026) के लिए वोटों की गिनती शनिवार को शुरू हो गई है. नॉर्थ कैंपस स्थित यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के मल्टीपर्पज हॉल में मतगणना चल रही है. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के चार केंद्रीय पदों के नतीजे आज घोषित किए जाने की उम्मीद है. दिल्ली यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को मतदान हुआ था. चुनाव में 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है. 2025 में मतदान प्रतिशत 39.5 रहा था. इस बार मतदान दिल्ली यूनिवर्सिटी के 52 केंद्रों पर दो चरणों में कराया गया. 20 उम्मीदवार मैदान में DUSU के चार केंद्रीय पदों के लिए कुल 20 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे. अध्यक्ष पद के लिए 7, उपाध्यक्ष के लिए 5, जबकि सचिव और संयुक्त सचिव पद के लिए 4-4 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा. प्रमुख छात्र संगठनों में ABVP, NSUI और AISA-SFI गठबंधन शामिल हैं. अध्यक्ष पद पर ABVP ने यश डबास और NSUI ने विजय शंकर मीणा को उम्मीदवार बनाया था. उपाध्यक्ष पद के लिए ABVP की ओर से इशू मौर्य, जबकि NSUI की ओर से वीर छत्रथ मैदान में थे. ABVP ने 4-0 से जीत का किया दावा ABVP की DUSU वाइस प्रेसिडेंट पद की उम्मीदवार इशू मौर्य ने न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा, “हमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों पर भरोसा है. हमें पूरा यकीन है कि अखिल हिंदुस्तानीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) 4-0 से जीत हासिल करेगी. अगर तुलना करें, तो इस बार वोटिंग पिछले साल के मुकाबले ज्यादा हुई है… उन्हें ABVP के हर उम्मीदवार और खुद संगठन पर भरोसा है. इसीलिए मुझे पूरा यकीन है कि इस बार ABVP निर्णायक बहुमत से जीतेगी.” 1,000 EVM की हुई थी व्यवस्था चुनाव के लिए कुल 1,000 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की व्यवस्था की गई थी. इनमें से 960 मशीनों का इस्तेमाल मतदान के लिए किया गया, जबकि 40 को रिजर्व में रखा गया था. पहले चरण में सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक मतदान हुआ. शाम के छात्रों के लिए दूसरे चरण में दोपहर 3 बजे से शाम 7:30 बजे तक वोट डाले गए. कॉलेज चुनावों में ABVP के जीत के दावे केंद्रीय नतीजों से पहले ABVP ने कई कॉलेजों में अपने उम्मीदवारों की जीत का दावा किया है. संगठन के मुताबिक, अदिति महाविद्यालय, श्री अरबिंदो कॉलेज (मॉर्निंग), डॉ बीआर आंबेडकर कॉलेज, हिंदुस्तानी कॉलेज और शिवाजी कॉलेज में उसके उम्मीदवारों ने प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की है. ABVP के अनुसार, श्री अरबिंदो कॉलेज (मॉर्निंग) में उसके पैनल ने 6-0 से जीत दर्ज की। हिंदुस्तानी कॉलेज में सभी आठ और शिवाजी कॉलेज में सभी छह पदों पर उसके उम्मीदवार विजयी रहे. हालांकि, ये दावे संगठन की ओर से जारी जानकारी पर आधारित हैं. दिल्ली हाईकोर्ट ने विजय जुलूस पर लगाई रोक DUSU चुनाव के नतीजों से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने जीत के बाद किसी भी तरह के विजय जुलूस पर रोक लगा दी थी. यह रोक सड़कों के साथ-साथ यूनिवर्सिटी कैंपस और हॉस्टल में भी लागू होगी. कोर्ट ने सभी छात्र संगठनों और चुनाव लड़ रहे 140 उम्मीदवारों को नोटिस जारी कर चुनाव आचार नियमों के कथित उल्लंघन पर जवाब भी मांगा है. अदालत ने दिल्ली पुलिस और दिल्ली यूनिवर्सिटी को Lyngdoh Committee की सिफारिशों और पहले के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है. ये भी पढ़ें: यूपी में कृषि निदेशालय में नौकरी पाने का मौका, सैलरी होगी 45000 से ज्यादा The post DUSU Election Result 2026: कौन बनेगा दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ का अध्यक्ष? ABVP-NSUI के बीच फाइट; विजय जुलूस पर रोक appeared first on Naya Vichar.

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बेटे के एक आइडिया ने ड्राइवर बाप को बनाया लखपति, जानिए जामताड़ा के इस ट्रक ड्राइवर की कितनी है कमाई

Success Story Rajesh Rawani: झारखंड के जामताड़ा के रहने वाले राजेश रावनी की कहानी सिर्फ एक ट्रक ड्राइवर के सोशल मीडिया स्टार बनने की कहानी नहीं है. यह इस बात का उदाहरण भी है कि किसी आम नौकरी या रोजमर्रा के काम से जुड़े हुनर को सही तरीके से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पेश किया जाए, तो उससे कमाई का नया रास्ता बनाया जा सकता है. करीब 25 साल से देशभर में ट्रक चलाने वाले राजेश आज ‘R Rajesh Vlogs’ नाम से यूट्यूब चैनल चलाते हैं. हाईवे पर खाना बनाने से शुरू हुआ उनका कंटेंट अब लाखों लोगों तक पहुंच चुका है. इसी डिजिटल सफर के साथ उन्होंने अपने ट्रक को भी इस तरह कस्टमाइज कराया है कि वह उनके लिए सफर, काम और कंटेंट तीनों का हिस्सा बन गया है. शुरुआत कैसे हुई? राजेश लंबे सफर के दौरान सड़क किनारे खुद खाना बनाते थे. चिकन, मटन, मछली और पनीर जैसी चीजें बनाकर वह उनकी तस्वीरें और छोटे वीडियो परिवार के साथ शेयर करते थे. 2021 में उनके बेटे सागर रावनी ने इन वीडियो में संभावनाएं देखीं. उन्होंने वीडियो एडिट करके यूट्यूब पर डालना शुरू किया. शुरुआत में यह बस रोजमर्रा की जिंदगी को दिखाने वाला कंटेंट था, लेकिन धीरे-धीरे लोगों की दिलचस्पी बढ़ने लगी. खास बात यह रही कि दर्शक सिर्फ खाना बनाने के वीडियो नहीं देखना चाहते थे. वे उस ट्रक ड्राइवर के बारे में जानना चाहते थे जो यह सब कर रहा था. राजेश के फेस-रिवील वीडियो को कथित तौर पर 24 घंटे में करीब 4.5 लाख व्यू मिले. कमाई का मॉडल कैसे बदला? राजेश ने पहले अपनी कमाई को ट्रक ड्राइविंग से जोड़ा था. उनके मुताबिक, उस समय उन्हें करीब ₹25,000-₹30,000 महीने की कमाई होती थी. यूट्यूब चैनल लोकप्रिय होने के बाद उनकी आय में बड़ा बदलाव आया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी मासिक कमाई करीब ₹4-5 लाख तक पहुंच गई, जबकि कुछ महीनों में यह आंकड़ा ₹18 लाख तक भी गया. उनके “लग्जरी ट्रक” में ऐसा क्या खास है? राजेश रवानी की लग्जरी ट्रक की रील: View on Instagram राजेश रवानी का यह नया ट्रक केवल एक वाहन नहीं, बल्कि उनकी सफलता और सहूलियत का एक चलता-फिरता ठिकाना है. इसे लंबी यात्राओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर कस्टमाइज किया गया है: अपग्रैडेड इंटीरियर: आरामदायक सीटें और रहने के लिए विस्तारित जगह (Expanded living space). मोबाइल किचन: समर्पित कुकिंग एरिया, ताकि वे सफर के दौरान अपना पसंदीदा खाना बनाना जारी रख सकें. आधुनिक सुविधाएं: एयर कंडीशनिंग (AC), रेफ्रिजरेशन (फ्रीज) और सामान रखने के लिए स्टोरेज कैबिनेट्स. ये भी पढ़ें: ₹158 करोड़ की कमाई और ₹98 करोड़ का घर, जानें कितनी है N Chandrasekaran की नेट वर्थ The post बेटे के एक आइडिया ने ड्राइवर बाप को बनाया लखपति, जानिए जामताड़ा के इस ट्रक ड्राइवर की कितनी है कमाई appeared first on Naya Vichar.

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WhatsApp पर ‘जय माता दी’ लिखने से मुफ्त में मिलेगा iPhone 17! जानिए 22 सितंबर से शुरू हो रहे फ्री आईफोन लंगर की पूरी डिटेल

ऐपल का नया स्मार्टफोन खरीदने के लिए जहां एक तरफ लोग दुकानों के बाहर लंबी कतारों में लग रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पंजाब में एक अनोखे आयोजन की समाचार ने इंटरनेट पर हलचल मचा दी है. अमृतसर के जाने-माने कारोबारी और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर राकेश त्रेहान (राजा डी किंग) ने चंडीगढ़ और मोहाली में ‘आईफोन लंगर’ आयोजित करने का औपचारिक ऐलान किया है. न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इस अनोखे गिवअवे इवेंट के तहत लोगों को मुफ्त में प्रीमियम आईफोन बांटे जाएंगे. सोशल मीडिया पर इस ऐलान के सामने आने के बाद से ही ट्राइसिटी (चंडीगढ़ + मोहाली + पंचकूला) के युवाओं और गैजेट लवर्स के बीच जबरदस्त उत्सुकता देखने को मिल रही है. 22 सितंबर से लाइव इवेंट की शुरुआत, जनता और मीडिया के सामने निकलेंगे लकी ड्रॉ राकेश त्रेहान के मुताबिक, यह आयोजन पूरी तरह से पारदर्शी रहेगा और इसका वितरण जनता तथा मीडिया की मौजूदगी में लाइव किया जाएगा. इवेंट की आधिकारिक शुरुआत 22 सितंबर से चंडीगढ़ के उसी स्थान पर होगी जहां पहले एक कार्यक्रम की योजना बनाई गई थी. शुरुआत में 1,000 लोगों के ग्रुप को इस गिवअवे में शामिल करने की व्यवस्था की जा रही है. पहले चरण में चुने गए भाग्यशाली विजेताओं के नाम का पर्चा सबके सामने निकाला जाएगा और उन्हें ऑन-द-स्पॉट ही नया आईफोन सौंप दिया जाएगा. सोशल मीडिया पोस्ट यहां देखें सिर्फ iPhone 17 और उससे ऊपर के मॉडल बांटे जाएंगे: मॉडल के चयन का दिलचस्प कारण आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि इस गिवअवे में सिर्फ आईफोन 17 और उसके बाद के लेटेस्ट मॉडल्स ही बांटे जाएंगे, जबकि पुराने iPhone 16 जैसे वेरिएंट्स को इससे बाहर रखा गया है. इसके पीछे का कारण बताते हुए राकेश त्रेहान ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर किसी को पुराना मॉडल मिलता तो वह शिकायत करता कि उसे कमतर फोन क्यों दिया गया. इसलिए सभी विजेताओं के लिए केवल प्रीमियम iPhone 17 सीरीज के फोन की ही व्यवस्था की जा रही है. चंडीगढ़ में 100 और मोहाली में 200 फोन बांटने का शुरुआती लक्ष्य रखा गया है. व्हाट्सऐप ग्रुप में नियम: प्रतिदिन लिखना होगा ‘जय माता दी’ इस गिवअवे में शामिल होने की शर्त बेहद अलग और दिलचस्प रखी गई है. पार्टिसिपेट करने वाले लोगों के लिए एक विशेष व्हाट्सऐप ग्रुप तैयार किया गया है. ग्रुप के सदस्यों को हर रोज बिना भूले नियम से ‘जय माता दी’ मैसेज टाइप करना होगा. यदि कोई व्यक्ति किसी दिन मैसेज लिखना भूल जाता है, तो उसे अगले दिन दो बार यह मैसेज लिखकर इसकी भरपाई करनी होगी. आयोजकों की टीम इस ग्रुप एक्टिविटी पर निगरानी रखेगी, और जो सदस्य इस नियम का पालन नहीं करेंगे, उन्हें लकी ड्रॉ प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाएगा. कौन हैं राकेश त्रेहान और क्या रहा है उनका पुराना ट्रैक रिकॉर्ड? अमृतसर के रहने वाले राकेश त्रेहान ‘राजा डी किंग’ के नाम से भी जाने जाते हैं और मुख्य रूप से क्रिप्टो ट्रेडिंग तथा रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े हैं. इससे पहले भी वे अपनी इसी अनोखी दरियादिली और सामाजिक गिवअवे आयोजनों के कारण सुर्खियों में आ चुके हैं. इससे पूर्व उन्होंने चंडीगढ़ में टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के लिए ₹500 तथा फोर-व्हीलर चालकों के लिए ₹1,000 के फ्री ‘पेट्रोल लंगर’ का ऐलान किया था. हालांकि, भारी भीड़ और अचानक बारिश के कारण सुरक्षा कारणों से उस पेट्रोल पंप को बंद करना पड़ा था और कार्यक्रम टाल दिया गया था. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: चंडीगढ़ में ‘आईफोन लंगर’ का आयोजन कब और कहां होगा? उत्तर: इस गिवअवे का पहला लाइव इवेंट 22 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ में मीडिया और जनता की मौजूदगी में आयोजित किया जाएगा. Q2: मुफ्त आईफोन पाने के लिए क्या मुख्य शर्त रखी गई है? उत्तर: इसके लिए बनाए गए विशेष व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़ना होगा और प्रतिदिन ‘जय माता दी’ मैसेज भेजना अनिवार्य होगा. Q3: इस गिवअवे में ऐपल के कौन से मॉडल बांटे जाएंगे? उत्तर: आयोजकों के अनुसार केवल iPhone 17 और उससे ऊपर के लेटेस्ट मॉडल्स ही विजेताओं को दिए जाएंगे. ये भी पढ़ें: iPhone 18 Pro या Pro Max? जानिए ₹15,000 के अंतर में आपको क्या ज्यादा मिलता है ये भी पढ़ें: ₹1.64 लाख के फोन के लिए रात भर कतार में खड़े रहे लोग! जानिए iPhone 18 Pro सीरीज में ऐसा क्या है खास The post WhatsApp पर ‘जय माता दी’ लिखने से मुफ्त में मिलेगा iPhone 17! जानिए 22 सितंबर से शुरू हो रहे फ्री आईफोन लंगर की पूरी डिटेल appeared first on Naya Vichar.

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रांची में भारत-वेस्टइंडीज टी20 मैच: कब से मिलेगा टिकट? बुकिंग का डेट आया सामने

IND vs WI Ranchi T20 Ticket: रांची के क्रिकेट प्रेमियों के लिए अक्टूबर में एक बार फिर इंटरनेशनल क्रिकेट का रोमांच लौटने वाला है. हिंदुस्तान और वेस्टइंडीज के बीच टी-20 सीरीज का दूसरा मुकाबला 9 अक्टूबर 2026 को जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम में स्पोर्ट्सा जाएगा. शाम 7 बजे से शुरू होने वाले इस मुकाबले को लेकर फैंस में अभी से उत्साह है. वहीं, मैच के टिकटों की बिक्री को लेकर भी अहम जानकारी सामने आई है. टिकट बिक्री की प्रक्रिया को लेकर जेएससीए की ओर से तैयारियां चल रही हैं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 5 या 6 अक्टूबर से टिकटों की बिक्री शुरू होने की संभावना है. हालांकि, अभी जेएससीए ने टिकट बिक्री की अंतिम तारीख और कीमतों का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है. टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद टिकट बिक्री की तारीख और अन्य जानकारी जारी की जाएगी. ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से मिलेंगे टिकट हिंदुस्तान-वेस्टइंडीज मुकाबले के लिए दर्शकों को टिकट खरीदने के लिए ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन विकल्प भी मिल सकता है. जेएससीए सचिव सौरभ तिवारी के बताया कि दर्शकों की सुविधा के लिए स्टेडियम में छह टिकट काउंटर बनाए जाएंगे. दर्शकों के पास ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन टिकट खरीदने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी. टिकट की बिक्री जल्द ही अक्टूबर के पहले सप्ताह के शुरुआत में हो सकती है. ये भी पढ़ें: झारखंड के क्रिकेट फैंस के लिए बुरी समाचार: रांची से छिन सकती है ऑस्ट्रेलिया टेस्ट की मेजबानी? कितनी होगी टिकट की कीमत? मैच के टिकट की कीमत को लेकर अभी दर्शकों का इंतजार खत्म नहीं हुआ है. अलग-अलग कैटेगरी के टिकट कितने रुपये में मिलेंगे, इसकी आधिकारिक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है. हालांकि, टिकट की शुरुआत 500 से 1000 रुपये होंगे. टिकटिंग से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जेएससीए की ओर से टिकटों की कीमत घोषित किए जाने की उम्मीद है. हिंदुस्तान बनाम वेस्टइंडीज रांची टी-20 मैच की जरूरी जानकारी जानकारी डिटेल क्या है हिंदुस्तान vs वेस्टइंडीज किसका मैच दूसरा टी-20 इंटरनेशनल कब होगा 9 अक्टूबर 2026 समय शाम 7 बजे कहां होगा JSCA इंटरनेशनल स्टेडियम, रांची टिकट कब से 5 या 6 अक्टूबर से शुरू होने की संभावना कैसे खरीदें ऑनलाइन और ऑफलाइन ऑफलाइन काउंटर 6 टिकट की कीमत अभी आधिकारिक घोषणा बाकी करीब साढ़े तीन साल बाद रांची में टीम इंडिया का टी-20 मैच रांची में टीम इंडिया का टी-20 इंटरनेशनल देखने के लिए फैंस को लंबा इंतजार करना पड़ा है. यहां आखिरी टी-20 इंटरनेशनल 27 जनवरी 2023 को हिंदुस्तान और न्यूजीलैंड के बीच स्पोर्ट्सा गया था. उस मुकाबले में न्यूजीलैंड ने हिंदुस्तान को 21 रन से हराया था. अब करीब साढ़े तीन साल बाद रांची में टीम इंडिया फिर टी-20 मुकाबला स्पोर्ट्सेगी. इससे पहले जेएससीए स्टेडियम में चार पुरुष टी-20 इंटरनेशनल स्पोर्ट्से जा चुके हैं. इनमें हिंदुस्तान ने तीन मुकाबले जीते हैं, जबकि 2023 में न्यूजीलैंड के खिलाफ उसे हार मिली थी. 9 अक्टूबर का हिंदुस्तान-वेस्टइंडीज मुकाबला रांची में स्पोर्ट्सा जाने वाला पांचवां पुरुष टी-20 इंटरनेशनल होगा. ये भी पढ़ें: IND-AFG T20 Black Marketing: हिंदुस्तान-अफगानिस्तान T20 मैचों के बीच टिकट बेचने के आरोप में देर रात 19 गिरफ्तार The post रांची में हिंदुस्तान-वेस्टइंडीज टी20 मैच: कब से मिलेगा टिकट? बुकिंग का डेट आया सामने appeared first on Naya Vichar.

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दिल्ली में आज बारिश के साथ आंधी-तूफान की संभावना, जानिए अगले 5 दिनों का मौसम

Delhi Weather Today, 19 September 2026: मौसम विभाग (IMD) के अनुसार दिल्ली में आज यानी 19 सितंबर को आसमान आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है. इसके साथ ही कहीं-कहीं या कुछ जगहों पर बारिश के साथ आंधी-तूफान और बिजली गिरने की संभावना है. 18 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी हवा सुबह के समय मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम दिशा से हवा चलने की संभावना है, जिसकी रफ्तार 15 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है. दोपहर में उत्तर दिशा से हवा की गति बढ़कर 18 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. शाम और रात में उत्तर-पूर्व दिशा से हवा चलने की संभावना है और इसकी रफ्तार करीब 15 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है. अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है. दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.6 से 3 डिग्री सेल्सियस कम रहने की संभावना है. वहीं, अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास रह सकता है. 20 सितंबर 2026 को कैसा रहेगा दिल्ली का मौसम मौसम विभाग के अनुसार, 20 सितंबर को दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है. अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है. ज्यादातर इलाकों में न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.6 से 3 डिग्री सेल्सियस कम रहेगा, जबकि अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास रहने की संभावना है. सुबह पूर्व दिशा से हवा चल सकती है, जिसकी रफ्तार 15 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहेगी. दोपहर में उत्तर दिशा से हवा की गति बढ़कर 18 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. शाम और रात में उत्तर-पूर्व दिशा से हवा चलेगी और इसकी रफ्तार करीब 15 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है. 21 सितंबर 2026 को दिल्ली का मौसम कैसा रहेगा? आईएमडी के अनुसार, दिल्ली में मुख्य रूप से आसमान साफ रहने की संभावना है. जबकि बारिश की कोई संभावना नहीं है. अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है. ज्यादातर इलाकों में न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.6 से 3 डिग्री सेल्सियस कम रहेगा, जबकि अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास रहने की संभावना है. सुबह दक्षिण-पूर्व दिशा से हवा चल सकती है, जिसकी रफ्तार 15 किलोमीटर प्रति घंटे तक होगी. दोपहर में उत्तर-पश्चिम दिशा से हवा की गति बढ़कर 20 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. शाम और रात में दक्षिण-पश्चिम दिशा से हवा चलेगी और इसकी रफ्तार घटकर करीब 15 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है. 22 सितंबर को कैसा रहेगा दिल्ली का मौसम? आईएमडी के अनुसार , दिल्ली में मुख्य रूप से आसमान साफ रहने की संभावना है. जबकि बारिश की कोई संभावना नहीं है. अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 से 23 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है. सुबह दक्षिण-पश्चिम दिशा से हवा चल सकती है, जिसकी रफ्तार 15 किलोमीटर प्रति घंटे तक होगी. दोपहर में उत्तर की दिशा से हवा की गति 15 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहेगी. शाम और रात में पूर्व की दिशा से हवा चलेगी और इसकी रफ्तार 15 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है. 23 सितंबर को दिल्ली में कैसा रहेगा मौसम का हाल? मौसम विभाग के अनुसार, दिल्लीमें 23 सितंबर को आसमान मुख्यत: साफ रहेंगे. जबकि बारिश की कोई संभावना नहीं है. अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 से 23 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है. सुबह उत्तर-पश्चिम दिशा से हवा चल सकती है, जिसकी रफ्तार 5-10 किलोमीटर प्रति घंटे तक होगी. दोपहर में पूर्व की दिशा से हवा की गति 10-15 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहेगी. शाम और रात में दक्षिण-पूर्व की दिशा से हवा चलेगी और इसकी रफ्तार10-15 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है. 24 सितंबर को कैसा रहेगा दिल्ली का मौसम? मौसम विभाग के अनुसार, 24 सितंबर को दिल्ली में आसमान मुख्यत: साफ रहेगा. जबकि बारिश की कोई संभावना नहीं है. अधिकतम तापमान 33 से 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है. सुबह दक्षिण-पूर्व दिशा से हवा चल सकती है, जिसकी रफ्तार 5-10 किलोमीटर प्रति घंटे तक होगी. दोपहर में उत्तर पश्चिम की दिशा से हवा की गति 15-20 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहेगी. शाम और रात में दक्षिण-पूर्व की दिशा से हवा चलेगी और इसकी रफ्तार10-15 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है. ये भी पढ़ें: 19 सितंबर को इन राज्यों में बदलेगा मौसम, भारी बारिश का अलर्ट, IMD ने जारी किया पूर्वानुमान The post दिल्ली में आज बारिश के साथ आंधी-तूफान की संभावना, जानिए अगले 5 दिनों का मौसम appeared first on Naya Vichar.

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पलामू का वो पौधा, जिसने खींचा ट्रैवलर और इंफ्लूएंसर का ध्यान, जानें कास घास से जुड़े 20 GK सवाल-जवाब

Kash Phool Gk Questions: झारखंड का कास  का पौधा इन दिनों Gen Z के बीच सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. सफेद रेशमी फूलों वाली यह घास नदी किनारे, खेतों और खाली मैदानों में दूर तक फैली नजर आती है. दूर से एक लाइन में उगी हुई इन पौधों को अगर आप देखें तो ऐसा लगता है मानों जैसे प्रकृति ने सफेद चादर सी बिछा दी हो धरती पर. अपनी इसी प्राकृतिक खूबसूरती के कारण यह ट्रैवलर और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स का ध्यान खींच रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कास का पौधा सिर्फ सुंदरता के लिए ही खास नहीं है, बल्कि इसका पर्यावरण और स्थानीय जीवन में भी महत्व है. आइए, जानते हैं कास  के पौधे से जुड़े जनरल नॉलेज के सवाल-जवाब.  कास के पौधे के बारे में जानें कास एक तरह की जंगली घास है, जिसका वैज्ञानिक नाम Saccharum Spontaneum है. इसे अंग्रेजी में Kans Grass कहा जाता है. इसके सफेद और रेशमी फूल शरद ऋतु में खास तौर पर दिखाई देते हैं. हिंदुस्तान के कई हिस्सों में कास के फूलों को मानसून के कमजोर होने और शरद ऋतु के आगमन से जोड़कर देखा जाता है. झारखंड (Jharkhand News) के पलामू में भी कास के फूलों का खिलना लोकल लेवल पर मौसम के बदलाव के रूप में देखा जाता है.  कास के फूल का साइंटिफिक महत्व  लेकिन कास का महत्व केवल प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है. यह नदी, नाले और अन्य वाटर बॉडी के किनारे मिट्टी को बांधने में मदद करता है. इसकी घनी जड़ें मिट्टी के कटाव को कम करने में सहायक हो सकती हैं. इसके झुरमुट पानी के साथ बहकर आने वाली मिट्टी और गाद को रोकने में भी भूमिका निभाते हैं.  कास के फूल से जुड़ी जानकारी (AI Generated Image) कमाई का सोर्स है कास का फूल  झारखंड में इस फूल से बिजनेस भी होता है. इनसे स्त्रीएं हैंडमेड टी कोस्टर, चटाई और टोकरी आदि तैयार करती हैं और फिर उन्हें लोकल मार्केट में बेचती हैं.  ये भी पढ़ें: AIIMS देवघर में MBBS स्टूडेंट्स को मिलता है कैसा खाना? सैंडविच से छोले-भटूरे तक, देखें पूरा मेन्यू कास के पौधे से जुड़े 20 General Knowledge सवाल-जवाब 1. कास के पौधे का वैज्ञानिक नाम क्या है? जवाब: कास के पौधे का वैज्ञानिक नाम Saccharum spontaneum है. 2. कास किस प्रकार का पौधा है? जवाब: कास एक प्रकार की जंगली घास है. 3. कास के फूल किस रंग के होते हैं? जवाब: कास के फूल आमतौर पर सफेद और रेशमी दिखाई देते हैं. 4. कास को अंग्रेजी में क्या कहा जाता है? जवाब: कास को अंग्रेजी में Kans Grass कहा जाता है. 5. झारखंड के किस जिले में कास घास चर्चा में है? जवाब: झारखंड के पलामू जिले में कास घास चर्चा में है. 6. कास का पौधा मुख्य रूप से कहां उगता है? जवाब: यह नदी-नालों के किनारे, खेतों और खाली मैदानों में उगता है. 7. कास के फूलों का खिलना किस मौसम के बदलाव का संकेत माना जाता है? जवाब: कास के फूलों का खिलना मानसून के कमजोर पड़ने और शरद ऋतु के आगमन का संकेत माना जाता है. 8. कास के फूल सामान्य तौर पर किस ऋतु में दिखाई देते हैं? जवाब: कास के फूल शरद ऋतु में प्रमुखता से दिखाई देते हैं. 9. कास की जड़ें पर्यावरण के लिए कैसे उपयोगी हैं? जवाब: इसकी घनी जड़ें मिट्टी को बांधने और मिट्टी के कटाव को कम करने में मदद करती हैं. 10. कास जलस्रोतों के लिए किस तरह उपयोगी हो सकता है? जवाब: इसके झुरमुट पानी के साथ आने वाली मिट्टी और गाद को रोकने में मदद कर सकते हैं. 11. कास का उपयोग किन हस्तशिल्प उत्पादों को बनाने में किया जाता है? जवाब: कास से टी कोस्टर, चटाई, टोकरी और अन्य हस्तशिल्प उत्पाद बनाए जाते हैं. 12. पलामू में कास से जुड़ा कौन सा प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है? जवाब: पलामू में स्त्रीओं को रोजगार से जोड़ने के लिए ‘प्रोजेक्ट कांस’ चलाया जा रहा है. 13. कास से जुड़े हस्तशिल्प काम से किसे रोजगार मिल रहा है? जवाब: कास से हस्तशिल्प बनाने के काम से ग्रामीण स्त्रीओं को रोजगार मिल रहा है. 14. कास किस तरह की जगहों पर तेजी से फैल सकता है? जवाब: कास नदी किनारे, खाली जमीन और खुले मैदानों जैसी जगहों पर फैल सकता है. 15. कास के पौधे की सबसे आसानी से पहचानी जाने वाली विशेषता क्या है? जवाब: इसके सफेद, रेशमी और गुच्छेदार फूल इसकी प्रमुख पहचान हैं. 16. कास को पारंपरिक रूप से मौसम से क्यों जोड़ा जाता है? जवाब: इसके फूलों के खिलने को बारिश के मौसम के कमजोर पड़ने और शरद ऋतु की शुरुआत से जोड़ा जाता है. 17. कास मिट्टी के कटाव को रोकने में कैसे मदद करता है? जवाब: इसकी घनी जड़ें मिट्टी को मजबूती से पकड़कर रखने में मदद करती हैं. 18. कास के झुरमुट जलस्रोतों के किनारे किस काम आ सकते हैं? जवाब: वे पानी के साथ आने वाली मिट्टी और तलछट को रोकने में सहायक हो सकते हैं. 19. कास का पौधा किस वजह से सोशल मीडिया पर आकर्षण का केंद्र बना है? जवाब: इसके सफेद फूलों और दूर तक फैले खूबसूरत झुरमुटों की वजह से यह ट्रैवलर और रील क्रिएटर्स को आकर्षित कर रहा है. 20. कास के पौधे का महत्व किन क्षेत्रों से जुड़ा है? जवाब: कास का महत्व प्राकृतिक सुंदरता, पर्यावरण, पारंपरिक मौसम संकेत और ग्रामीण रोजगार से जुड़ा है. ये भी पढ़ें: 11वीं-13वीं JPSC नियुक्ति रद्द करने पर प्रशासन की दलील, ‘दोषी और निर्दोष को अलग करना मुश्किल’ कास घास से जुड़े FAQ {“type”:”faq”,”question”:”1. कास घास क्या है?”,”answer”:”कास एक जंगली घास है, जिसका वैज्ञानिक नाम Saccharum spontaneum है. इसके सफेद रेशमी फूल इसकी खास पहचान हैं.”}{“type”:”faq”,”question”:”2. कास के फूल कब खिलते हैं?”,”answer”:”कास के फूल मुख्य रूप से शरद ऋतु में दिखाई देते हैं. इनके खिलने को मानसून के कमजोर पड़ने के प्राकृतिक संकेत के तौर पर भी देखा जाता है.”}{“type”:”faq”,”question”:”3. पलामू में कास क्यों चर्चा में है?”,”answer”:”पलामू में कास के सफेद फूलों से बने खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य ट्रैवलर और सोशल मीडिया क्रिएटर्स को आकर्षित कर रहे हैं.”}{“type”:”faq”,”question”:”4. क्या कास पर्यावरण के लिए उपयोगी है?”,”answer”:”हां. जलस्रोतों के किनारे इसकी

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बिहार में बाढ़ से 270 करोड़ की फसलें बर्बाद, जानिए कितना दिया जाएगा किसानों को अनुदान

Bihar Flood Farmers Compensation: बिहार में हर साल की तरह इस साल भी कई जिलों में बाढ़ की वजह से गंभीर स्थिति देखने के लिए मिली. लेकिन अब धीरे-धीरे पानी कम होने लगा है. इस बीच कृषि विभाग की ओर से एक रिपोर्ट जारी किया गया, जिसमें फसलों के नुकसान के बारे में बताया गया. टोटल 18 जिलों की आई रिपोर्ट जानकारी के मुताबिक, इस साल बाढ़ से लगभग 270 करोड़ रुपये की फसलें बर्बाद हुई हैं. कृषि विभाग ने 18 जिलों में फसल क्षति का रिपोर्ट जारी किया है. इसके साथ ही यह भी कहा गया कि जब बाढ़ का पानी पूरी तरह से खत्म हो जाएगा, उसके बाद ही नुकसान का वास्तविक आकलन किया जा सकेगा. आशंका जताई जा रही है कि नुकसान का आंकड़ा बढ़ सकता है. इन दो जिलों में सबसे ज्यादा नुकसान कृषि विभाग की रिपोर्ट की माने तो, सबसे ज्यादा फसल का नुकसान भागलपुर और पटना में हुआ है. बिहार के 102 प्रखंडों में लगभग 1.76 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई है. भागलपुर, भोजपुर, समस्तीपुर और बेगूसराय में 10 हजार हेक्टेयर से भी ज्यादा क्षेत्र में फसल लगी थी, जो बर्बाद हो चुकी है. अगस्त महीने में गंगा, पुनपुन, गंडक, सोन समेत कई नदियों में उफान देखा गया. इसे लेकर निचले और दियारा इलाके में पानी भर गया. इससे किसानों की फसलें बर्बाद हुईं. बिहार से जुड़ी अन्य ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें केंद्रीय मंत्री और सीएम किए थे निरीक्षण केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कुछ दिन पहले ही बाढ़ से नुकसान का निरीक्षण किया था. केंद्र की एक टीम भी इस दौरान मौजूद थी. निरीक्षण के दौरान नुकसान का आकलन किया गया. केंद्रीय मंत्री ने कहा था, लोगों की सहायता की जाएगी. किस फसल के लिए कितना दिया जाएगा अनुदान? किसानों को मिलने वाले अनुदान के बारे में बताया गया कि 33 प्रतिशत से अधिक फसल की क्षति होने पर किसानों को अनुदान दिया जाता है. जानकारी के मुताबिक, सबसे अधिक धान, मक्का, सब्जी, केला आदि फसलों को नुकसान हुआ है. ऐसे में कृषि विभाग आकस्मिक फसल योजना के तहत अगात मटर, आगत सरसों और रबी मक्का का बीज प्रभावित किसानों को नि:शुल्क देगा. इसके साथ ही आपदा राहत के प्रावधानों की माने तो, फसल नुकसान अगर असिंचित क्षेत्र में हुआ है तो प्रति हेक्टेयर 8500 मिलेंगे जबकि सिंचित क्षेत्र में क्षति पर 17 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर अनुदान दिया जाएगा. बहुवर्षीय फसल के लिए 22 हजार 500 रुपए प्रति हेक्टेयर अनुदान दिया जाएगा. गौर करने वाली बात यह है कि एक किसान को ज्यादा से ज्यादा दो हेक्टेयर के लिए अनुदान मिलता है. इस योजना की माने तो, सिंचित क्षेत्र के लिए कम से कम 2000 रुपये, असिंचित क्षेत्र के लिए कम से कम 1000 रुपये और बहुवर्षीय फसल के लिए न्यूनतम 2500 रुपये सहायता देने का अनुदान है. Also Read: बिहार का मौसम: राज्य में आज कहां होगी बारिश? इन 13 जिलों में IMD का अलर्ट, जानिए अपने शहर का हाल The post बिहार में बाढ़ से 270 करोड़ की फसलें बर्बाद, जानिए कितना दिया जाएगा किसानों को अनुदान appeared first on Naya Vichar.

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