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Breaking News : सूडान में सोने की खदान ढहने से कम से कम 67 लोगों की मौत

सूडान के सुदूर इलाके में स्थित एक सोने की खदान ढहने से कम से कम 67 लोगों की मौत हो गई है. यह जानकारी एक चिकित्सा समूह और जीवित बचे लोगों के हवाले से न्यूज एजेंसी एपी ने दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूडान के वेस्ट कोर्डोफन स्टेट में स्थित सोने की खदान में यह दुर्घटना हुई. खदान ढहने की घटना मंगलवार देर रात हुई यह हादसा वेस्ट कोर्डोफान प्रांत के नूहूद शहर में अल-जारा सोने की खदान में हुआ. यह इलाका अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज के नियंत्रण में है, जो पिछले तीन साल से ज्यादा समय से देश की सेना के साथ लड़ाई लड़ रही है. हादसे में बचे हुए लोगों ने बताया कि खदान ढहने की घटना मंगलवार देर रात हुई और कई लोग अब भी लापता हैं. चिकित्साकर्मियों के समूह ने कहा कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि मलबे में दबे लोगों या जीवित बचे लोगों की तलाश के लिए खोज और बचाव अभियान अभी जारी है. ये भी पढ़ें: मक्का के पास ड्रोन को लेकर बढ़ा तनाव, हिंदुस्तान ने जताई चिंता, सऊदी और हूतियों के दावे अलग The post Breaking News : सूडान में सोने की खदान ढहने से कम से कम 67 लोगों की मौत appeared first on Naya Vichar.

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‘बांग्लादेश वाले बयान’ पर ममता बनर्जी को राहत, कलकत्ता हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

Mamata Banerjee Bangladesh Statement High Court: कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के बांग्लादेश से जुड़े बयान के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है. बुधवार को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी घुगे की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए याचिका को खारिज करन दिया. हाईकोर्ट ने यह फैसला राज्य प्रशासन द्वारा सौंपी गयी उस रिपोर्ट के बाद सुनाया, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि मुख्यमंत्री के बयान से कोई भी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) नहीं हुआ है. राज्य प्रशासन की रिपोर्ट बनी आधार हाईकोर्ट ने 1 सितंबर को इस मामले में सुनवाई करते हुए ममता बनर्जी के बयान के संदर्भ में राज्य प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी. बुधवार को राज्य प्रशासन की ओर से अदालत में रिपोर्ट पेश की गयी. रिपोर्ट देखने के बाद चीफ जस्टिस रवींद्र वी घुगे की पीठ ने याचिका को खारिज कर दिया. ‘क्या हर बात पर अदालत आयेंगे?’ जनहित याचिका दायर करने वाले अभ्रतनु प्रशासन को चीफ जस्टिस ने जमकर फटकार लगायी. याचिका की ग्राह्यता (Admissibility) पर कोर्ट ने पहले भी सवाल उठाये थे. मामले की सुनवाई के दौरान तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती ने कहा था- जो भी व्यक्ति कुछ बोलेगा, क्या अदालत को वही सुनना पड़ेगा? इसे जनहित याचिका के रूप में क्यों स्वीकार किया जाये? कोर्ट ने कहा था कि आजकल जनहित याचिका को एक विशेष ‘टूल’ या हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. ये भी पढ़ें: ममता बनर्जी की टिप्पणी के खिलाफ पीआईएल, हाईकोर्ट ने कहा- हथियार की तरह हो रहा जनहित याचिकाओं का इस्तेमाल पूर्व सांसद तापस पाल केस का भी जिक्र सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद दिवंगत तापस पाल के खिलाफ दर्ज पुराने मामले का भी उल्लेख किया. पीठ ने कहा कि तापस पाल मामले में पुलिस की अकर्मण्यता पर सवाल उठे थे, जहां उकसावे वाले बयान का आरोप लगा था. 2 जून को ममता ने क्या कहा था? धर्मतला के वाई चैनल पर 2 जून 2026 को आयोजित धरना के मंच से ममता बनर्जी ने बांग्लादेश के मुद्दे पर टिप्पणी की थी. उन्होंने किसी का नाम लिये बिना कहा था- बांग्लादेश के एक बड़े अपराधी को एसटीएफ (STF) ने गिरफ्तार किया था. याद रखिए, जिसे लेकर बांग्लादेश में काफी उथल-पुथल हुई थी. मैं किसी दूसरे देश के बारे में बात नहीं कर रही हूं, मुझे उसका अधिकार नहीं है. लेकिन मुख्य बात यह है कि वह व्यक्ति मेघालय के रास्ते बंगाल में दाखिल हुआ था. जब वह बंगाल आया, तब हमारी एसटीएफ ने उसे पकड़ा. यह एसटीएफ की बड़ी सफलता थी. ये भी पढ़ें: ममता बनर्जी का बड़ा दावा: बांग्लादेश में हुई हत्या पर गृह मंत्री ने करवाया फोन; मामला दबाने को कहा ममता बनर्जी ने आगे कहा- इसके बाद खुद गृह मंत्री ने मुझे फोन किया. इतने दिनों तक मैंने इस पर मुंह नहीं खोला था. लेकिन अब अत्याचार की सीमा पार हो चुकी है. मैं शिष्टाचार के नाते नाम नहीं ले रही हूं, वरना बांग्लादेश के लोग उत्तेजित हो जायेंगे. मैं ऐसा नहीं चाहती, क्योंकि मैं देश से प्यार करती हूं. ममता बनर्जी ने यह भी कहा था कि देश हित में वह नाम का खुलासा नहीं करेंगी. उनके पास सभी तथ्यों का भंडार है. 2 जून से 16 सितंबर तक तिथि घटनाक्रम 02 जून ममता बनर्जी ने धर्मतला सभा से बांग्लादेश और STF कार्रवाई पर बयान दिया. अगस्त अभ्रतनु प्रशासन द्वारा हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गयी. 01 सितंबर हाईकोर्ट ने याचिका की ग्राह्यता पर सवाल उठाये और राज्य से रिपोर्ट मांगी. बुधवार राज्य प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने PIL खारिज की. The post ‘बांग्लादेश वाले बयान’ पर ममता बनर्जी को राहत, कलकत्ता हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका appeared first on Naya Vichar.

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भारतीय युद्धपोत से टकराया PNS Hunain, नुकसान के बाद पाकिस्तानी जहाज लौटा बंदरगाह

India-Pakistan Warship Collision: उत्तरी अरब सागर में हिंदुस्तान और पाकिस्तान के नौसैनिक जहाजों के बीच टक्कर हुई है. न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक यह घटना 15 सितंबर की शाम उस समय हुई, जब हिंदुस्तानीय नौसेना का एक अग्रिम युद्धपोत इलाके में नियमित निगरानी अभियान पर था. इसी दौरान पाकिस्तानी नौसेना का जहाज PNS Hunain तेज रफ्तार में हिंदुस्तानीय युद्धपोत के करीब आया. रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी जहाज तेज रफ्तार में हिंदुस्तानीय युद्धपोत के करीब आया और गैर-पेशेवर तरीके से घूमने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों जहाजों के बीच टक्कर हो गई. टक्कर के बाद पाकिस्तानी जहाज को नुकसान एएनआई की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि टक्कर के बाद PNS Hunain को नुकसान पहुंचा और उसे अपने बंदरगाह की ओर जाते देखा गया. हालांकि विदेश मंत्रालय ने जहाजवार नुकसान का विवरण नहीं दिया और केवल इतना कहा कि घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ. हिंदुस्तान ने घटना के बाद पाकिस्तान के राजनयिक को तलब कर कड़ा विरोध भी दर्ज कराया. हिंदुस्तान ने पाकिस्तान के राजनयिक को किया तलब घटना के एक दिन बाद हिंदुस्तान ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के प्रभारी उच्चायुक्त को विदेश मंत्रालय में तलब किया और कड़ा विरोध दर्ज कराया. विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के व्यवहार को अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर बताया. हिंदुस्तान ने कहा कि समुद्र में पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के आचरण के कारण हिंदुस्तानीय नौसेना के जहाज के साथ टक्कर हुई. 1991 के समझौते का भी किया जिक्र विदेश मंत्रालय के मुताबिक पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज का आचरण हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच अप्रैल 1991 में हुए सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिक गतिविधियों की अग्रिम सूचना से जुड़े समझौते के अनुच्छेद 10 के खिलाफ था. हिंदुस्तान ने पाकिस्तान के प्रभारी उच्चायुक्त से कहा कि वह अपने देश के संबंधित अधिकारियों तक यह संदेश पहुंचाएं कि सैन्य इकाइयों को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए और दोनों देशों के बीच लागू समझौतों का पालन करना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो. हिंदुस्तान ने इस्लामाबाद में अपने प्रभारी उच्चायुक्त को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने इसी मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने का निर्देश दिया है. Also Read: अरब सागर में पाकिस्तानी जंगी पोत ने हिंदुस्तानीय जहाज को मारी टक्कर: हिंदुस्तान ने पाक अधिकारी को चेताया The post हिंदुस्तानीय युद्धपोत से टकराया PNS Hunain, नुकसान के बाद पाकिस्तानी जहाज लौटा बंदरगाह appeared first on Naya Vichar.

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बिहार के ये बीजेपी विधायक जाएंगे मॉस्को, रूस के संसदीय चुनाव में निभाएंगे खास जिम्मेदारी, जानें क्यों आया बुलावा

Bihar News: बिहार के एक विधायक की चर्चा अब पटना से लेकर मॉस्को तक हो रही है. मधुबनी के राजनगर से बीजेपी विधायक सुजीत पासवान को रूस से खास बुलावा आया है. वह रूस के संसदीय चुनाव में सिर्फ मेहमान बनकर नहीं जाएंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय चुनाव पर्यवेक्षक की भूमिका में नजर आएंगे. 18 से 20 सितंबर तक मॉस्को में रहकर वह रूस की संसद यानी स्टेट डूमा के चुनाव की प्रक्रिया को करीब से देखेंगे. सुजीत पासवान को रूस की Civic Chamber of the Russian Federation की ओर से आमंत्रित किया गया है. उनके साथ दूसरे देशों से पहुंचे पर्यवेक्षक और सिविल सोसाइटी से जुड़े प्रतिनिधि भी चुनावी प्रक्रिया का अवलोकन करेंगे. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सुजीत पासवान कौन हैं? उनका नेतृत्वक सफर कैसा रहा है और रूस में उन्हें क्या जिम्मेदारी दी गई है? राजनगर से विधानसभा तक पहुंचने का सफर सुजीत पासवान मधुबनी जिले की राजनगर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक हैं. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें इस सीट से उम्मीदवार बनाया था. चुनाव में जीत के बाद वह पहली बार विधानसभा पहुंचे. राजनगर मिथिलांचल की महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों में शामिल है. विधायक बनने के बाद सुजीत पासवान की नेतृत्वक पहचान सिर्फ क्षेत्रीय नेतृत्व तक सीमित नहीं रही. वह बिहार बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं. यानी एक तरफ वह विधानसभा में राजनगर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. दूसरी तरफ पार्टी संगठन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. छात्र नेतृत्व से शुरू हुआ नेतृत्वक सफर सुजीत पासवान का नेतृत्वक सफर सीधे विधानसभा से शुरू नहीं हुआ. उनकी सक्रियता छात्र नेतृत्व से जुड़ी रही है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वह 2010 में अखिल हिंदुस्तानीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े थे. संगठन में रहते हुए उन्होंने अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं. छात्र नेतृत्व के दौरान संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रियता बढ़ती गई. इसके बाद उनका जुड़ाव बीजेपी से मजबूत हुआ. 2020 में बीजेपी के सक्रिय सदस्य बनने के बाद उन्होंने पार्टी के युवा संगठन में भी जिम्मेदारी संभाली. आगे चलकर उन्हें बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली. इस तरह छात्र संगठन से शुरू हुआ सफर धीरे-धीरे पार्टी संगठन तक पहुंचा और फिर 2025 में वह विधानसभा के सदस्य बने. बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी सुजीत पासवान की मौजूदा नेतृत्वक भूमिका दो स्तरों पर है. वह राजनगर से बीजेपी विधायक हैं. साथ ही बिहार बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं. इस जिम्मेदारी के तहत पार्टी के अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े संगठनात्मक कामों में भी उनकी भूमिका रहती है. इसके अलावा वह ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के सिंडिकेट सदस्य भी हैं. यानी उनकी सक्रियता नेतृत्व, संगठन और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े दायित्वों तक फैली हुई है. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें रूस में क्या करेंगे सुजीत पासवान? अब सबसे अहम सवाल यही है कि रूस में सुजीत पासवान की भूमिका क्या होगी? दरअसल, वह रूस में किसी चुनाव में उम्मीदवार बनकर नहीं जा रहे हैं. न ही वह किसी नेतृत्वक दल के प्रतिनिधि के तौर पर वहां पहुंचेंगे. उन्हें अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक चुनाव पर्यवेक्षक के तौर पर आमंत्रित किया गया है. रूस में स्टेट डूमा के चुनाव 18 से 20 सितंबर 2026 के बीच होने हैं. इस दौरान सुजीत पासवान मॉस्को स्थित सिचुएशनल सेंटर में विदेशी सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों और दूसरे अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के साथ चुनावी प्रक्रिया को देखेंगे. उनकी भूमिका चुनावी प्रक्रिया का अवलोकन और मॉनिटरिंग करने की होगी. यानी मतदान किस तरह हो रहा है, चुनावी प्रक्रिया किस तरह संचालित की जा रही है और उससे जुड़े इंतजाम कैसे हैं, इन चीजों को वह दूसरे पर्यवेक्षकों के साथ करीब से देखेंगे. रूस से क्यों आया खास निमंत्रण? रूसी संघ की Civic Chamber अलग-अलग देशों के निर्वाचित प्रतिनिधियों, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और सिविल सोसाइटी से जुड़े प्रतिनिधियों को चुनावी प्रक्रिया के सार्वजनिक पर्यवेक्षण के लिए आमंत्रित कर रही है. इसी क्रम में बिहार के राजनगर विधायक सुजीत पासवान को भी मॉस्को आने का निमंत्रण मिला है. इस भूमिका का मतलब किसी उम्मीदवार या पार्टी के पक्ष में प्रचार करना नहीं है. पर्यवेक्षक के तौर पर उनकी जिम्मेदारी चुनावी प्रक्रिया को करीब से देखने की है. यही वजह है कि राजनगर के एक मौजूदा विधायक का नाम अब रूस के संसदीय चुनाव से भी जुड़ गया है. Also Read: ‘अब खुलेगा सुशांत सिंह राजपूत की मौत का राज’, दिशा सालियान केस में CBI की FIR के बाद एक्टर के भाई बोले- उद्धव प्रशासन ने मामले को दबाया The post बिहार के ये बीजेपी विधायक जाएंगे मॉस्को, रूस के संसदीय चुनाव में निभाएंगे खास जिम्मेदारी, जानें क्यों आया बुलावा appeared first on Naya Vichar.

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सरकार ने EPFO की वेतन सीमा को 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपए किया, जानिए ; आपके वेतन और पेंशन पर क्या होगा असर

नौकरीपेशा लोगों के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सुखद फैसला लिया है. सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रशासन ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा को 15,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह करने को मंजूरी दे दी है. मौजूदा 15,000 की सीमा सितंबर 2014 से लागू थी. EPFO की वेतन सीमा में 12 साल बाद किया गया बदलाव प्रशासन ने यह बदलाव 12 साल बाद किया है. EPFO की वेतन सीमा को पिछली बार सितंबर 2014 में 6,500 से बढ़ाकर 15,000 रुपए किया गया था. इससे पहले 2004 से 2014 के बीच यह सीमा नहीं बदली गई थी. प्रशासन की ओर से कहा गया है कि इस अवधि के दौरान वेतन स्तर, आय और औपचारिक रोजगार के दायरे में काफी बदलाव आया है, इसलिए EPFO की सीमा को भी मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप किया गया है. आखिर 25 हजार की सीमा का मतलब क्या है? EPFO की व्यवस्था के तहत अब तक 15,000 से अधिक मासिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाले कर्मचारी अपने आप अनिवार्य EPF कवरेज में नहीं आते थे. नई सीमा लागू होने के बाद 15,000 से 25,000 तक वेतन पाने वाले बड़ी संख्या में कर्मचारी EPFO की अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल होंगे. इसका मतलब यह है कि इस आय वर्ग के कर्मचारियों को EPFO के तहत मिलने वाले PF बचत, कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और EPF से जुड़ी बीमा सुरक्षा यानी EDLI का लाभ मिलने का रास्ता खुलेगा, हालांकि इन योजनाओं के अपने अलग-अलग नियम और पात्रता शर्तें लागू होंगी. क्या आपकी सैलरी से ज्यादा PF कटेगा? यहां यह समझना जरूरी है कि 25,000 की नयी सीमा का अर्थ यह नहीं है कि हर कर्मचारी का PF योगदान सीधे 25,000 के आधार पर ही तय होगा. यह फैसला मुख्य रूप से अनिवार्य EPFO कवरेज की वेतन सीमा बढ़ाने से जुड़ा है. वास्तविक PF योगदान किस सैलरी सोर्स और किस सीमा के आधार पर होगा, इसका निर्धारण नियमों के आधार पर होगा. जिन कर्मचारियों का वेतन 15,000 से ऊपर है, उनके लिए इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि उनकी इन-हैंड सैलरी तुरंत किसी निश्चित रकम से कम हो जाएगी. योगदान की वास्तविक गणना लागू EPFO नियमों के अनुसार होगी. प्रशासन पर कितना बढ़ेगा खर्च? ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- CJP प्रोटेस्ट के दौरान छात्रों के साथ हुई बर्बरता की जांच के लिए बनाई गई कमेटी का दोबारा नहीं होगा गठन, आरोप निराधार The post प्रशासन ने EPFO की वेतन सीमा को 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपए किया, जानिए ; आपके वेतन और पेंशन पर क्या होगा असर appeared first on Naya Vichar.

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सिंगल चार्ज में 348km रेंज कंफर्म, 45 लीटर बूट स्पेस और फीचर्स की भरमार… डेली यूज के लिए परफेक्ट है ये इलेक्ट्रिक स्कूटर

आजकल हिंदुस्तानीय बाजार में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है. अगर आप अपने रोजाना के काम के लिए एक मजबूत इलेक्ट्रिक स्कूटर तलाश रहे हैं, तो Komaki SE आपके लिए एकदम सही साबित हो सकता है. इसमें आपको सिंगल चार्ज में 348 किमी की बेहतरीन रेंज और 45 लीटर का बड़ा बूट स्पेस मिलता है. यह स्कूटर कम लागत में रोजाना सफर को आसान बनाने के लिए आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया गया है. आइए इसके बारे में हम आपको पूरी जानकारी देते हैं.  Komaki SE: शानदार रेंज और पावरफुल बैटरी इस इलेक्ट्रिक स्कूटर की सबसे बड़ी खासियत इसकी दमदार बैटरी और लंबी रेंज है. इसमें आधुनिक लिथियम-आयन बैटरी पैक का इस्तेमाल किया गया है जो एक बार फुल चार्ज होने पर 348 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है. शहर में रोजाना ऑफिस जाने वाले लोगों या लंबे सफर पर जाने वालों के लिए यह रेंज बेहद फायदेमंद है. इसके साथ ही इसमें फास्ट चार्जिंग की सुविधा भी दी गई है, जिससे यह स्कूटर बेहद कम समय में चार्ज हो जाता है. इसकी बैटरी तकनीक को सुरक्षा और लंबे जीवन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.  Komaki SE: 45 लीटर का बड़ा बूट स्पेस स्टोरेज के मामले में यह इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार के बाकी वाहनों को पीछे छोड़ देता है. इसमें 45 लीटर का बड़ा बूट स्पेस दिया गया है, जो इस सेगमेंट में काफी अनोखा है. इस बड़े बूट स्पेस में आप आसानी से अपना फुल फेस हेलमेट, ऑफिस का बैग, राशन का सामान या अन्य जरूरी वस्तुएं रख सकते हैं. रोजाना के काम निपटाने वाले लोगों और परिवार के लिए यह जगह बहुत उपयोगी साबित होती है. अब आपको सामान ले जाने के लिए अलग से झंझट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. ये भी पढ़ें: सिंगल चार्ज में 343km रेंज का दावा, 130kmph टॉप-स्पीड… फिर भी बिक्री में टॉप-5 से बाहर हुई ये इलेक्ट्रिक स्कूटर कंपनी  Komaki SE: आधुनिक फीचर्स और स्मार्ट कनेक्टिविटी सवारी को सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए इसमें कई डिजिटल और स्मार्ट फीचर्स शामिल किए गए हैं. स्कूटर में एक बड़ा डिजिटल डिस्प्ले मिलता है जो राइडर को स्पीड, बैटरी लेवल, ट्रिप मीटर और रेंज की सटीक जानकारी देता है. इसके अलावा स्मार्टफोन कनेक्टिविटी और ब्लूटूथ नेविगेशन की सुविधा भी मौजूद है. सुरक्षा के लिए इसमें कॉम्बी ब्रेकिंग सिस्टम, फ्रंट डिस्क्स ब्रेक, एलईडी हेडलाइट और एंटी थेफ्ट अलार्म जैसे आधुनिक फीचर्स दिए गए हैं. इसमें रिवर्स मोड भी है जो पार्किंग के समय काफी मदद करता है. ये भी पढ़ें: न लाइसेंस, न RTO रजिस्ट्रेशन, 25kmph की टॉप स्पीड भी, स्कूल-ट्यूशन जाने वाले बच्चों के लिए बेस्ट है ये इलेक्ट्रिक स्कूटर  Komaki SE: कीमत और एक्स शोरूम वैल्यू किफायती बजट में प्रीमियम फीचर्स देने के कारण यह स्कूटर ग्राहकों को काफी आकर्षित कर रहा है. इसकी एक्स शोरूम कीमत हिंदुस्तानीय ग्राहकों की जेब को ध्यान में रखकर तय की गई है, जो इसे बेहद किफायती बनाती है. पेट्रोल स्कूटरों की तुलना में इसका रनिंग कॉस्ट न के बराबर है. हर किलोमीटर पर बहुत ही मामूली खर्च आता है, जिससे हर महीने फ्यूल के पैसों की बड़ी बचत होती है. इसके साथ ही कंपनी बैटरी पर लंबी वारंटी भी दे रही है जो ग्राहकों का भरोसा और बढ़ाती है. डेली यूज के लिए सबसे बेहतरीन ऑप्शन  कुल मिलाकर देखा जाए तो यह इलेक्ट्रिक स्कूटर डेली के इस्तेमाल के लिए एक सही बैलेंस पेश करता है. इसकी स्ट्रॉंग बिल्ड क्वालिटी, आरामदायक सीटिंग और बेहतरीन सस्पेंशन खराब सड़कों पर भी राइडर को सुगम अनुभव प्रदान करते हैं. अगर आप पेट्रोल के बढ़ते दामों से परेशान हैं और एक टिकाऊ, ज्यादा स्टोरेज वाला और लंबी दूरी तय करने वाला वाहन चाहते हैं, तो यह इलेक्ट्रिक स्कूटर आपकी सभी जरूरतों को पूरा करता है. The post सिंगल चार्ज में 348km रेंज कंफर्म, 45 लीटर बूट स्पेस और फीचर्स की भरमार… डेली यूज के लिए परफेक्ट है ये इलेक्ट्रिक स्कूटर appeared first on Naya Vichar.

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Bigg Boss के इन कंटेस्टेंट्स ने मोल ली मुसीबत, सलमान खान से लिया पंगा ; करियर हुआ चौपट

Bigg Boss Controversial Contestants: बिग बॉस का घर बाहर से जितना ग्लैमरस दिखता है, अंदर की कहानी उतनी ही उलझी हुई होती है. कैमरे, कंट्रोवर्सी, लड़ाई, दोस्ती और हर दिन बदलते रिश्ते… शो खत्म होने तक कई कंटेस्टेंट्स स्टार बन जाते हैं, लेकिन असली कहानी तो घर से बाहर निकलने के बाद शुरू होती है. किसी को शो ने ऐसी पहचान दी कि करियर चमक उठा, तो कुछ कंटेस्टेंट्स ऐसे भी रहे, जिनकी लाइफ बर्बाद हो गई. प्रियंका जग्गा The post Bigg Boss के इन कंटेस्टेंट्स ने मोल ली मुसीबत, सलमान खान से लिया पंगा ; करियर हुआ चौपट appeared first on Naya Vichar.

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चॉकलेट खाई, बोली ‘नहाने जा रही हूं’… और बाथरूम के दरवाजे पर ही हो गई 23 साल की वर्षा की मौत

बेंगलुरु से अपने दोस्तों के साथ घूमने निकली 23 वर्षीय युवती की एक लॉज में बेहद रहस्यमयी हालात में जान चली गई. मृतका की पहचान वर्षा के रूप में हुई है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, वर्षा 11 सितंबर को अपने एक कजिन (चचेरे भाई) और एक दोस्त के साथ बेंगलुरु से करीब 190 किलोमीटर दूर हासन जिले के खूबसूरत पर्यटन स्थल सकलेशपुर घूमने आई थी और वहीं एक लॉज में ठहरी हुई थी. चॉकलेट खाई, बाथरूम की ओर बढ़ी और वहीं ढेर हो गई हासन के पुलिस अधीक्षक (SP) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, घटना के वक्त वर्षा अपने कमरे में मौजूद थी. उसने एक चॉकलेट खाई और अपने साथियों से कहा कि वह नहाने जा रही है. लेकिन बाथरूम के दरवाजे तक पहुंचते-पहुंचते वह अचानक लड़खड़ाकर फर्श पर गिर पड़ी और अचेत हो गई. कमरे में मौजूद साथी जब तक कुछ समझ पाते और मदद का इंतजाम करते, तब तक वर्षा की नब्ज थम चुकी थी. शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं, साथियों से पूछताछ जारी घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची. शुरुआती मुआयने में पुलिस और डॉक्टरों को वर्षा के शरीर पर किसी तरह के बाहरी घाव या चोट के निशान नहीं मिले हैं. पुलिस ने उसके साथ ट्रिप पर आए दोनों साथियों को हिरासत में लेकर विस्तार से पूछताछ की है. हासन एसपी ने स्पष्ट किया कि वर्षा के परिवार को इस ट्रिप की पूरी जानकारी थी और वे जानते थे कि वह अपने दोस्तों के साथ हासन गई हुई है. अस्वाभाविक मौत का केस दर्ज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी नजर सकलेशपुर पुलिस ने मामले में अस्वाभाविक मौत (Unnatural Death) का मुकदमा दर्ज कर लिया है. मौत की असल वजह का पता लगाने के लिए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि क्या चॉकलेट में कोई जहरीला पदार्थ था, या फिर कार्डियक अरेस्ट अथवा किसी अचानक आई अंदरूनी मेडिकल इमरजेंसी के चलते यह जान गई. इन तमाम सवालों के सटीक जवाब विसरा और पोस्टमार्टम की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सकेंगे. ये भी पढ़ें: IND-NZ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर संसद की मुहर: हिंदुस्तानीय उत्पादों को न्यूजीलैंड में मिलेगी 100% ड्यूटी-फ्री एंट्री ये भी पढ़ें: MP Farmers Update : दमोह में मखाना-अश्वगंधा की नई पहल, धान-बाजरा बेचने के लिए 10 अक्टूबर से पहले कराएं रजिस्ट्रेशन ये भी पढ़ें: 16 सितंबर का मौसम: दिल्ली-UP से बिहार-झारखंड तक बदलेगा मौसम, MP-गुजरात में भी बारिश; जानें आज कहां कैसा रहेगा हाल The post चॉकलेट खाई, बोली ‘नहाने जा रही हूं’… और बाथरूम के दरवाजे पर ही हो गई 23 साल की वर्षा की मौत appeared first on Naya Vichar.

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Gemstone Astrology: हर किसी के लिए शुभ नहीं होता पुखराज, पहनने से पहले जान लें ये 9 जरूरी बातें

Gemstone Astrology: ज्योतिष शास्त्र में हर ग्रह से जुड़े अलग-अलग रत्न बताए गए हैं. पुखराज भी इन्हीं प्रमुख रत्नों में से एक है. इसका संबंध बृहस्पति यानी गुरु ग्रह से माना जाता है. यह पीले रंग का रत्न होता है. गुरु को ज्ञान, शिक्षा, विवाह, संतान, धन और करियर से जुड़े मामलों का कारक माना जाता है. पुखराज पहनने से पहले कुंडली में गुरु की स्थिति देखना जरूरी होता है. केवल किसी की सलाह पर या किसी दूसरे व्यक्ति को देखकर यह रत्न नहीं पहनना चाहिए. इस धारण करने के लिए लग्न, भाव और दूसरे ग्रहों के साथ गुरु की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है. आइए ज्योतिषाचार्य डॉ एन के बेरा से जानते हैं कि पुखराज किसे पहनना चाहिए, इसके क्या फायदे हैं और इसे पहनने की विधि क्या है. पुखराज रत्न का इन्फोग्राफिक (एआई तस्वीर) किन लोगों को पुखराज नहीं पहनना चाहिए? ज्योतिषाचार्य डॉ एन के बेरा के अनुसार, मकर, कुंभ और मिथुन लग्न वाले लोगों को पुखराज नहीं पहनना चाहिए. इसके अलावा, अगर कुंडली में गुरु छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो, तो पुखराज धारण नहीं करना चाहिए. इन भावों को त्रिक भाव कहा जाता है. पुखराज किस लग्न के लिए शुभ है? धनु और मीन लग्न वालों के लिए पुखराज विशेष रूप से लाभदायक माना जाता है. इसके अलावा मेष, कर्क, सिंह और वृश्चिक लग्न में भी कुंडली की स्थिति देखकर पुखराज पहना जा सकता है. ये भी पढ़ें: Gemstone Astrology: शुभ रत्न भी दे सकते हैं उल्टा असर, पहनने से पहले जानें 7 जरूरी बातें पुखराज किस उंगली में पहनना चाहिए? पुखराज को दाएं हाथ की तर्जनी उंगली में पहनना चाहिए. पुखराज किस धातु में पहनना चाहिए? पुखराज को सोने की अंगूठी में पहनना शुभ माना जाता है. अगर किसी कारण से सोने की अंगूठी में पहनना संभव नहीं है, तो इसे पंचधातु में भी धारण किया जा सकता है. पुखराज किस दिन पहनना चाहिए? पुखराज को शुक्ल पक्ष की पंचमी, सप्तमी, अष्टमी, दशमी या द्वादशी तिथि को आने वाले गुरुवार के दिन सुबह पहनना शुभ माना जाता है. पुखराज धारण करने की विधि पुखराज रत्न की सांकेतिक तस्वीर (एआई) गुरुवार की सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें. पुखराज को पहले दूध से साफ करें और फिर साफ पानी से धो लें. एक छोटी कटोरी में दूध लेकर उसमें पुखराज रखें. पुखराज पर हल्दी और कुमकुम अर्पित करें. भगवान गणेश और गुरु ग्रह का ध्यान करें. ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ मंत्र का जाप करें. इसके बाद पुखराज को दाएं हाथ की तर्जनी उंगली में धारण करें. पुखराज पहनने से पहले इन बातों का रखें ध्यान पुखराज खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए. रत्न पहनने से पहले कुंडली में गुरु की स्थिति जरूर जांच लें. अगर पहले से कोई दूसरा रत्न पहना हुआ है, तो पुखराज उसके साथ अनुकूल है या नहीं, यह भी देखना जरूरी है. पुखराज का चुनाव हमेशा कुंडली के आधार पर करना चाहिए. रत्न धारण करने से पहले किसी ज्योतिष विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ये भी पढ़ें: Gemstone Astrology: पन्ना रत्न किसे पहनना चाहिए और किसे नहीं? जानें शुभ लग्न, फायदे, और धारण करने की विधि The post Gemstone Astrology: हर किसी के लिए शुभ नहीं होता पुखराज, पहनने से पहले जान लें ये 9 जरूरी बातें appeared first on Naya Vichar.

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चावल पर महंगाई की मार, बासमती से आम चावल के दामों में 25% तक का उछाल

Rice Price Hike: रसोई के बजट पर एक बार फिर दबाव बढ़ गया है. बासमती से लेकर आम नॉन-बासमती चावल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वित्तीय वर्ष 2026-27 (FY27) की पहली तिमाही में बासमती चावल के दाम पिछले साल के मुकाबले 15 से 20 फीसदी तक बढ़ चुके हैं, जबकि रोजमर्रा की नॉन-बासमती किस्मों की कीमतों में 20 से 25 फीसदी का उछाल आया है. व्यापारियों और निर्यातकों का कहना है कि जब तक अक्टूबर-नवंबर में नई फसल बाजार में नहीं आ जाती, तब तक कीमतें ऊंची बनी रहने की संभावना है. क्या हैं चावल की कीमतें बढ़ने के मुख्य कारण? कीमतों में इस उछाल के पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों तरह के कारण जिम्मेदार हैं: ग्लोबल डिमांड और तनाव: अमेरिका-इरान युद्ध के चलते कई देश अपना फूड सप्लाई सुरक्षित करने के लिए तेजी से चावल खरीद रहे हैं. खासतौर पर गल्फ देशों से हिंदुस्तानीय चावल की भारी मांग आ रही है. दक्षिण हिंदुस्तान में कम बारिश: आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों में कम बारिश के कारण पैदावार और सप्लाई प्रभावित हुई है. प्रशासनी खरीद (PDS): राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीवी कृष्णा राव के मुताबिक, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए तेलंगाना प्रशासन द्वारा की जा रही गैर-बासमती चावल की खरीद से भी बाजार में सप्लाई टाइट हुई है. आपकी जेब पर कितना असर पड़ा है? कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम परिवार के मासिक बजट पर पड़ रहा है. ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ की रिपोर्ट और राइसविला ग्रुप के सीईओ सूरज अग्रवाल के अनुसार, विभिन्न किस्मों के दाम इस प्रकार बढ़े हैं: चावल की किस्म पहले की कीमत (प्रति किग्रा) वर्तमान कीमत (प्रति किग्रा) बासमती (Biryani Rice) ₹85 ₹100 सोना मसूरा (Sona Masoori) ₹51 – ₹52 ₹63 – ₹64 क्या निर्यात की वजह से घरेलू बाजार में किल्लत है? केआरबीएल लिमिटेड के बल्क राइस एक्सपोर्ट्स हेड अक्षय गुप्ता के अनुसार, हिंदुस्तान ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में 154 देशों को रिकॉर्ड 65.2 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया, जिसमें सऊदी अरब सबसे बड़ा खरीदार रहा. गल्फ कॉरिडोर में पेमेंट और शिपिंग की रुकावटों के कारण सप्लाई थोड़ी धीमी हुई है, लेकिन मांग मजबूत बनी हुई है. हालांकि, गुप्ता का कहना है कि वर्ष 2025 की फसल तेजी से बिक गई और अक्टूबर की नई आवक से पहले बहुत कम स्टॉक बचा है. यानी घरेलू कीमतों में तेजी का मुख्य कारण बाजार में स्टॉक की कमी है, न कि केवल निर्यात. उपभोक्ताओं को कब तक मिलेगी राहत? फिलहाल जल्द राहत मिलने के आसार कम ही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि नई खरीफ फसल आने (अक्टूबर-नवंबर) तक कीमतें ऊंची रहेंगी. इसके अलावा, अमेरिका-इरान के बीच तनाव कम होने और गल्फ देशों की तरफ से खरीदारी की रफ्तार धीमी होने पर ही बाजार में स्थिरता आ पाएगी. तब तक आम उपभोक्ताओं को महंगे चावल के साथ ही तालमेल बिठाना होगा. ये भी पढ़ें: ₹5,000 भेजें या ₹1 लाख, UPI पर कितना कटेगा पैसा? दूर करें MDR चार्ज का सारा कंफ्यूजन The post चावल पर महंगाई की मार, बासमती से आम चावल के दामों में 25% तक का उछाल appeared first on Naya Vichar.

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