लेटर में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने लिखा है कि सबसे पहले यह उल्लेख करना उचित होगा कि यहां जिन मुद्दों का संदर्भ दिया गया है, वे पहले से ही हिंदुस्तान के सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन हैं. इसलिए, इन मुद्दों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाना संवैधानिक संस्थाओं के अधिकारों के बंटवारे का उल्लंघन कर सकता है, जो संविधान की मूल संरचना के सिद्धांत का अभिन्न अंग है. जस्टिस ने पत्र में कहा है कि यह स्थापित न्यायिक नैतिकता तथा न्यायिक औचित्य के अनुरूप नहीं होगा.
जस्टिस सूर्यकांत ने अपने पत्र में उन मुद्दों का जिक्र भी किया है जिससे संबंधित मांग पत्र लेकर राहुल गांधी उनसे मिलना चाहते थे. वे मुद्दे थे-मुख्य चुनाव आयुक्त, छात्रों की गिरफ्तारी, मेट्रो स्टेशनों को बंद करना और ट्रेनों को रद्द करना.
जस्टिस सूर्यकांत का लेटर, जिसे कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट किया-
नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट प्रतिबद्ध
दूसरे पत्र में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मल्लिकार्जुन खरगे को संबोधित करते हुए लिखा है कि मैं यह याद दिलाना चाहता हूं कि हमारे संवैधानिक ढांचे के अंतर्गत, हिंदुस्तान के सर्वोच्च न्यायालय को आपके पत्र में उल्लिखित मुद्दों से निपटने के लिए कोई प्रशासनिक शक्तियां प्राप्त नहीं हैं. हालांकि, हमारे संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए, जिसमें न्यायिक समीक्षा सहित अन्य शक्तियां शामिल हैं, हम हिंदुस्तान के नागरिकों को प्रभावित करने वाले मुद्दों के न्यायिक पक्ष पर विचार करने के लिए कर्तव्यबद्ध हैं. जस्टिस सूर्यकांत ने लिखा है कि हिंदुस्तान का सर्वोच्च न्यायालय प्रत्येक नागरिक के मौलिक अधिकारों को संरक्षित और सुरक्षित रखने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है. प्रत्येक नागरिक कानून में निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से हर समय ऐसे अधिकारों के प्रवर्तन की मांग करने का हकदार है. मेरे विचार से, प्रशासनिक पक्ष के बजाय हिंदुस्तान के सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक शक्तियों का उपयोग करना अधिक बेहतर होगा.
सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खुले हैं
संयोगवश, इसी तरह के मुद्दों को उजागर करने वाले कुछ मामले 13.10.2026 को सुनवाई के लिए निर्धारित हैं. यदि आप चाहें, तो सोमवार को सुबह 10:30 बजे से अपराह्न 12:30 बजे के बीच या अपराह्न 4:30 बजे से 5 बजे के बीच सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका प्रस्तुत कर सकते हैं. वैकल्पिक रूप से, आप ई-फाइलिंग विकल्प का उपयोग कर सकते हैं, जिसके माध्यम से किसी भी दिन और किसी भी समय याचिका दाखिल की जा सकती है. आपको आश्वस्त किया जाता है कि ऐसी प्रत्येक याचिका पर कानून के अनुसार जल्द से जल्द सुनवाई की जाएगी.
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