Hot News

क्या आप भी बच्चे की हर जिद पर कहते हैं ‘हां’? जानिए कब जरूरी है ‘ना’ कहना

Parenting Tips: अगर आप अपने बच्चों की सही परवरिश करना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको सिर्फ उन्हें प्यार देना काफी नहीं होता है बल्कि उन्हें डिसिप्लिन सिखाना भी उतना ही जरूरी हो जाता है. कई बार तो ऐसा भी होता है कि बच्चों को खुश रखने के लिए माता-पिता उसकी हर बात पर हैं कह देते हैं, बिना यह सोचे कि बार-बार ऐसा करने का नतीजा आगे चलकर क्या हो सकता है. बता दें अगर आप हर बार सिर्फ ‘हां’ ही कहते रहेंगे, तो यह बिलकुल भी सही नहीं होगा आपक शिशु के लिए. कुछ ऐसे हालात भी होते हैं जिनमें आपको अपने शिशु को ‘ना’ भी कहना सीखना चाहिए. आपके शिशु की भलाई के लिए यह काफी जरूरी हो जाता है. जब आप शिशु से ‘ना’ कहते हैं, तो उसे यह सीख मिलती है कि उसकी हर इच्छा पूरी नहीं हो सकती और उसे पेशेंस रखना भी सीखना चाहिए.

कब जरूरी है शिशु से ना कहना?

अगर आपका बच्चा इस तरह की चीजों के लिए जिद करता है जो उसकी सेहत या फिर आदतों के लिए ठीक नहीं, तो आपको उसे ‘ना’ कह देना चाहिए. अक्सर शिशु जंक फूड्स, देर टाक रात को जागकर फ़ोन चलाने की या फिर वीडियो गेम्स स्पोर्ट्सने की जिद करते हैं. एक पैरेंट होने के नाते इन हालातों में आपको उसे ‘ना’ काफी जरूरी हो जाता है. इसके अलावा अगर आपका बच्चा दूसरों से गलत तरीके से बात करता है, झूठ बोलने लगता है या फिर जिद्दी व्यवहार करने लगता है, तो आपको उसे उसी समय रोकना चाहिए ताकि उसे सही और गलत के बीच का अंतर् समझ में आने लग जाए.

यह भी पढ़ें: क्या बिना ट्यूशन आपका बच्चा नहीं कर सकता क्लास में टॉप? यह आर्टिकल बदल देगा आपकी सोच

सही समय की पहचान कैसे करें?

‘ना’ कहने का सबसे सही समय वही होता है, जब आपका बच्चा गलत दिशा में बढ़ने लगे या फिर किसी गलत आदत को अपनाने लगे. जब आप शुरूआती दौर में ही उसपर रोक लगा देते हैं, तो यह आपके और शिशु दोनों के लिए आसान होता है. एक बार अगर किसी चीज की आदत शिशु को लग जाए, तो उसे बदल पाना काफी ज्यादा मुश्किल हो जाता है.

ना कहने का सही तरीका क्या है?

आप शिशु को किस तरह से ‘ना’ कहते हैं उसका तरीका भी काफी ज्यादा मायने रखता है. अगर आप शिशु को गुस्से में आकर या फिर डांटकर मना करेंगे, तो वह डर जाएगा और समय में आगे चलकर और भी जिद्दी बन जाएगा. अपने शिशु को हमेशा शांत और प्यार से चीजों को समझाने की कोशिश करें. उदहारण के लिए अगर आपका बच्चा स्मार्टफोन का इस्तेमाल करना चाहता ह, तो आपको उसे डांटने की जगह सीधा मना करना चाहिए और उसे समझाना चाहिए कि अगर वह स्मार्टफोन में घुसा रहेगा, तो उसकी आंखों पर और पढ़ाई पर काफी बुरा असर पड़ सकता है. आपके लिए बेहतर होगा कि आप शिशु को किसी और अच्छी एक्टिविटी के लिए मोटिवेट करें.

यह भी पढ़ें: पढ़ाई करते समय बार-बार भटक जाता है शिशु का ध्यान? स्टडी टेबल से तुरंत हटाएं ये 4 चीजें

The post क्या आप भी शिशु की हर जिद पर कहते हैं ‘हां’? जानिए कब जरूरी है ‘ना’ कहना appeared first on Naya Vichar.

Spread the love

विनोद झा
संपादक नया विचार

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top