नेहा ने एक पॉडकास्ट में बताया है कि उनके नेतृत्वक विचारों को लेकर घर में लंबे समय से मतभेद रहे हैं. मां भी उनके आंदोलन और अनशन के फैसले से खुश नहीं थीं और उन्हें प्रदर्शन से दूर रहने के लिए समझाती थीं. जब नेहा जंतर-मंतर पर अनशन कर रही थीं, तब उनकी मां को शुरुआत में इसकी जानकारी नहीं थी. जानकारी मिलने के बाद वह बरेली से दिल्ली पहुंचीं और जंतर-मंतर पर बेटी से मिलीं. बता दें कि उनकी मां गृहिणी हैं और उनका परिवार बरेली में रहता है.
नेहा बोरा ने खुद एक पॉडकास्ट में बताया कि अनशन के 22वें दिन उसे बताया गया कि कोई स्त्री उनसे मिलने आई है और खुद को उनकी मां बता रही है. नेतृत्वक मतभेद होने के कारण पहले नेहा को यकीन नहीं हुआ. जिसके बाद बताया गया कि वह बरेली से आईं है. बरेली का नाम सुनकर नेहा को यकीन हुआ कि वह सच में उनकी मां हो सकती हैं. फिर जब नेहा उस स्त्री से मिली तो वह मां ही थीं.
जंतर मंतर पहुंच मां ने गोद में रखा बेटी का सिर
जंतर-मंतर पहुंचकर मां लीला बोरा ने अपनी बेटी को उस हालत में देखा, जिसमें वह लगातार भूख हड़ताल कर रही थीं. नेहा के मुताबिक मां ने उनकी पीठ की हड्डियां देखी, उनका सिर अपनी गोद में रखा और उनकी मालिश करने लगीं. यही वह पल था, जब कई साल से चले आ रहे नेतृत्वक मतभेद कुछ देर के लिए पीछे छूट गए. नेहा ने बाद में इस मुलाकात को अपने और माता-पिता के रिश्ते में एक बड़े बदलाव के तौर पर बताया.
नेहा के मुताबिक, उनकी मां ने जंतर-मंतर पर मौजूद दूसरे छात्रों और अनशन कर रहे लोगों को भी देखा. अगले दिन वहां हुए पुलिस एक्शन की घटनाओं की वह प्रत्यक्षदर्शी बनीं. नेहा ने बताया कि उनकी मां ने उन छात्रों को भी देखा, जिनके साथ वह आंदोलन कर रही थीं और जो जमीन पर सो रहे थे. पहले जिन लोगों से दूर रहने के लिए मां बेटी को समझाती थीं, अब वह उन्हें करीब से देख रही थीं.
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद दी बधाई
इसके बाद इस कहानी में एक और बदलाव आया. जब तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की समाचार आई, तो नेहा की मां ने उन्हें फोन किया और अपने साथियों को बधाई देने के लिए कहा. नेहा ने इसे अपने आंदोलन का ही नहीं, बल्कि अपने परिवार के भीतर आए बदलाव का भी हिस्सा माना.
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नेहा के पिता हिंदुस्तानीय सेना में रह चुके हैं. नेहा ने बताया था कि शुरुआत में नेतृत्वक मतभेद घर की बातचीत और डाइनिंग टेबल तक ही सीमित थे. लेकिन समय के साथ ये मतभेद बढ़े और उनके शब्दों में परिवार के भीतर एक तरह का फ्रैकचर (fracture) पैदा हो गया. लेकिन मानो जंतर मंतर के प्रोटेस्ट ने उनके मतभेद दूर कर दिए.
CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर अब प्रदर्शन कर रही हैं नेहा बोरा
नेहा बोरा JNU की PhD स्कॉलर और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. 2026 में जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन के दौरान वह 23 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठीं और इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनीं. इसके बाद झारखंड समेत दूसरे राज्यों में छात्र और युवा आंदोलनों में भी एक्टिव हैं. फिलहाल नेहा बोरा इन दिनों दिल्ली में SIR यानी मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर प्रदर्शन कर रही हैं. प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
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