Bankipur By Election: जन सुराज पार्टी के संस्थापक और सूत्रधार प्रशांत किशोर पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में खुद मैदान में उतर सकते हैं. प्रशांत किशोर ने साफ संकेत दिए हैं कि भाजपा का 40-45 साल पुराना किला तोड़ने के लिए वह खुद प्रत्याशी बन सकते हैं. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि बांकीपुर में बीजेपी को हराने के लिए जो कुछ भी करना पड़ेगा, वो किया जाएगा. अगर जरूरत पड़ी तो वह खुद चुनाव लड़ेंगे.
भाजपा का सबसे मजबूत गढ़ है बांकीपुर सीट
पटना शहर की बांकीपुर विधानसभा सीट को हिंदुस्तानीय जनता पार्टी का सबसे अजेय किला माना जाता है. साल 1995 से लगातार यहां सिर्फ और सिर्फ भाजपा का ही कमल खिलता आ रहा है. इस सीट पर लंबे समय से नितिन नवीन के परिवार का कब्जा रहा है.
पहले उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा यहां से लगातार 4 बार विधायक चुने गए. उनके निधन के बाद साल 2006 के उपचुनाव में नितिन नवीन जीते और तब से वह लगातार यहां से विधायक बनते आ रहे थे. कांग्रेस, राजद और वाम दल जैसे बड़े-बड़े गठबंधन भी आज तक इस किले को भेद नहीं पाए हैं.
क्यों खाली हुई यह सीट और कब होगा चुनाव?
नितिन नवीन के भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने और फिर राज्यसभा चले जाने के बाद यह सीट खाली हुई है. राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद नितिन नवीन ने मार्च 2026 में बिहार विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. चुनाव नियमों के मुताबिक, सीट खाली होने के 6 महीने के भीतर यानी अक्टूबर 2026 से पहले यहां उपचुनाव कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है.
पिछले चुनाव का समीकरण और त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
साल 2025 में हुए पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन ने आरजेडी की प्रत्याशी रेखा कुमारी को 51 हजार से ज्यादा भारी वोटों के अंतर से हराया था. उस चुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने वंदना कुमारी को टिकट दिया था, जिन्हें महज 7717 वोट ही मिल सके थे. लेकिन इस बार उपचुनाव में माहौल पूरी तरह बदल चुका है.
भाजपा जहां नितिन नवीन के उत्तराधिकारी के रूप में किसी मजबूत चेहरे की तलाश में है, वहीं प्रशांत किशोर खुद जमीन पर उतरकर व्यापारियों और बुद्धिजीवियों के साथ बैठकें कर रहे हैं. इसके अलावा महागठबंधन भी इस सीट पर अपनी मजबूत दावेदारी ठोकने की तैयारी में है.
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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और नितिन नवीन के लिए बड़ा इम्तिहान
बिहार में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य में यह पहला विधानसभा उपचुनाव होने जा रहा है. चूंकि यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का गृह क्षेत्र है, इसलिए इस चुनाव पर न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश की नेतृत्वक नजरें टिकी हुई हैं. प्रशांत किशोर के खुद मैदान में उतरने की चर्चा ने इस मुकाबले को बेहद रोमांचक और त्रिकोणीय बना दिया है.
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