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May 9, 2026

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होर्मुज स्ट्रेट के पास नौका में लगी आग, एक भारतीय नाविक की मौत, 17 बचाए गए

Strait of Hormuz: सामान लेकर जा रही नौका आग लगने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के पास पलट गई. इस पर हिंदुस्तानीय चालक दल के 18 सदस्य सवार थे. इस घटना में नौका पर सवार एक हिंदुस्तानीय की मौत हो गई, जबकि चार लोग झुलस गए. घायलों का दुबई में उपचार किया जा रहा है और उनकी हालत स्थिर है. चालक दल के सदस्यों को उस क्षेत्र से गुजर रहे एक जहाज ने बचाया. आग लगने के सही कारण का अभी पता लगाया जा रहा है. होर्मुज में तनाव जारी आग लगने की घटना ऐसे समय हुई है जब होर्मुज स्ट्रेट में तनाव जारी है. ईरान और अमेरिका के बीच स्थिति और बिगड़ी नजर आ रही है. फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित होर्मुज स्ट्रेट एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया की तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. हिंदुस्तानीय नागरिकों के संपर्क में हिंदुस्तान हिंदुस्तानीय महावाणिज्यदूतावास के अधिकारियों ने शुक्रवार रात बचाए गए हिंदुस्तानीय नागरिकों से मुलाकात की. पीटीआई की समाचार के अनुसार हिंदुस्तानीय वाणिज्य दूतावास नौका के मालिक के संपर्क में है और हरसंभव सहायता प्रदान कर रहा है. ये भी पढ़ें: चीन-हांगकांग की कंपनियों पर अमेरिका का शिकंजा, ईरान को ड्रोन-मिसाइल सप्लाई का आरोप होर्मुज में हमले के बाद ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, बोले- इस बार जवाब और ज्यादा खतरनाक होगा The post होर्मुज स्ट्रेट के पास नौका में लगी आग, एक हिंदुस्तानीय नाविक की मौत, 17 बचाए गए appeared first on Naya Vichar.

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ललपनिया के ‘लाल’ का भारतीय वन सेवा में चयन, ऑल इंडिया में 22वां रैंक

ललपनिया से रामदुलार पंडा की रिपोर्ट Success Story: झारखंड के बोकारो जिला के ललपनिया में पले-बढ़े और बिहार के भोजपुर जिला के बेरथ गांव के मूल निवासी कुमार विवेकानंद ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्रतिष्ठित हिंदुस्तानीय वन सेवा (आईएफएस) परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 22 हासिल कर क्षेत्र, राज्य और परिवार का नाम रोशन किया है. उनकी इस शानदार सफलता से ललपनिया समेत पूरे इलाके में खुशी और गर्व का माहौल है. परिवार, मित्र, शिक्षक और स्थानीय लोग लगातार उन्हें बधाई दे रहे हैं. उनकी उपलब्धि को क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा माना जा रहा है. डीएवी ललपनिया से शुरू हुई सफलता की यात्रा कुमार विवेकानंद की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, ललपनिया से हुई. छात्र जीवन से ही वे बेहद मेधावी और अनुशासित रहे. पढ़ाई के प्रति उनकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने आठवीं कक्षा में राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा (एनटीएसई) भी उत्तीर्ण की थी. स्कूल के शिक्षकों के अनुसार विवेकानंद हमेशा से लक्ष्य केंद्रित छात्र रहे और हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करते थे. उनकी प्रारंभिक शिक्षा ने ही आगे की सफलता की मजबूत नींव रखी. परिवार और शिक्षकों का सहयोग भी उन्हें लगातार मिलता रहा, जिसने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया. आईआईटी खड़गपुर से की उच्च शिक्षा स्कूल शिक्षा पूरी करने के बाद कुमार विवेकानंद ने आईआईटी प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की और देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी खड़गपुर में दाखिला लिया. वहां उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद औद्योगिक प्रबंधन में मास्टर्स डिग्री भी हासिल की. तकनीकी शिक्षा के दौरान उनके सामने कॉरपोरेट और तकनीकी क्षेत्र में बेहतर करियर के कई अवसर मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अलग रास्ता चुना. उनका मानना था कि समाज और लोगों से सीधे जुड़कर काम करने का अवसर सिविल सेवा में अधिक मिलता है. यही सोच आगे चलकर उनके जीवन की दिशा बन गयी. समाजसेवा की सोच ने सिविल सेवा की ओर किया प्रेरित कुमार विवेकानंद ने बताया कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की. इस दौरान उन्हें कई चुनौतियों और संघर्षों का सामना करना पड़ा. उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में करियर की संभावनाओं को समझा और अनुभव भी प्राप्त किया, लेकिन अंततः उनका लक्ष्य समाज और देश के लिए काम करना ही रहा. उन्होंने कहा कि सिविल सेवा की तैयारी केवल परीक्षा पास करने की प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह व्यक्ति के धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास की भी परीक्षा होती है. लंबे समय तक निरंतर मेहनत और सकारात्मक सोच के बल पर उन्होंने हिंदुस्तानीय वन सेवा में यह बड़ी सफलता हासिल की. परिवार बना सबसे बड़ी ताकत कुमार विवेकानंद के पिता संतोष कुमार टीवीएनएल के टीटीपीएस ललपनिया में सहायक कार्यपालक अभियंता के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता मंजू सिंह गृहिणी हैं. दो भाई और दो बहनों वाले परिवार में विवेकानंद मँझले हैं. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों और मित्रों को दिया है. विवेकानंद का कहना है कि परिवार से मिले संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक माहौल ने उन्हें हर कठिन परिस्थिति में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. तैयारी के कठिन दौर में परिवार का सहयोग उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बना. इसे भी पढ़ें: जैक इंटर आर्ट्स में थर्ड पोजिशन लाने वाली मजदूर की बेटी अंशु को मिला सम्मान पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में करना चाहते हैं काम हिंदुस्तानीय वन सेवा में चयन के बाद कुमार विवेकानंद अब पर्यावरण संरक्षण, वन प्रबंधन और समाजहित से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान देना चाहते हैं. उनका कहना है कि देश में पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा आज सबसे बड़ी जरूरतों में शामिल है और वे इस दिशा में पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ काम करना चाहते हैं. उनकी सफलता के बाद ललपनिया और आसपास के क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है. स्थानीय लोगों ने कहा कि कुमार विवेकानंद ने यह साबित कर दिया है कि छोटे शहरों और कस्बों से निकलकर भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं. उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी. इसे भी पढ़ें: हजारीबाग के प्रशासनी गर्ल्स स्कूल में फीस के नाम पर अतिरिक्त वसूली, अभिभावक नाराज The post ललपनिया के ‘लाल’ का हिंदुस्तानीय वन सेवा में चयन, ऑल इंडिया में 22वां रैंक appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल के इतिहास में पहली बार कोई मुस्लिम मंत्री नहीं, ममता बनर्जी सरकार में थे 7

No Muslim Minister in Bengal Cabinet: पश्चिम बंगाल में नयी प्रशासन ने शपथ ले ली है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और 5 अन्य विधायकों ने शपथ ली. ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में जिन लोगों को शपथ दिलायी गयी, उनमें स्त्री, आदिवासी और मतुआ समुदाय के लोग हैं, लेकिन कोई मुस्लिम नहीं है. पश्चिम बंगाल के इतिहास में यह पहला मौका है, जब प्रशासन में कोई मुस्लिम मंत्री नहीं बना है. ममता बनर्जी ने मुस्लिम समाज के 4 कैबिनेट और 4 राज्यमंत्री बनाये थे वर्ष 2021 में जब ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आयी थी, तब मुस्लिम समाज से लोगों को 7 मंत्री बनाया गया था. इनमें से 4 को कैबिनेट मंत्री और 3 को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया था. ममता की प्रशासन में फिरहाद हकीम, मो गुलाम रब्बानी, जावेद अहमद खान, मौलाना सिद्दीकुल्ला चौधरी, अखरुज्जमान और सबीना यासमीन को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था. बीजेपी ने नहीं दिया था किसी मुस्लिम को टिकट अब सवाल उठता है कि जब शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पहली बार बंगाल में हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रशासन ने शपथ ली, तो मंत्रिमंडल में कोई मुस्लिम क्यों नहीं है. इस सवाल का जवाब यह है कि भाजपा ने बंगाल विधानसभा चुनाव 2007 में किसी मुस्लिम को टिकट ही नहीं दिया था. इसलिए उसके 207 विधायकों में एक भी मुस्लिम एमएलए नहीं है. इसे भी पढ़ें : लाठी चलाने में माहिर और ड्रैगन फ्रूट की खेती का विचार, जानें बीजेपी के ‘गेमचेंजर’ दिलीप घोष की अनसुनी दास्तां शुभेंदु के साथ इन 5 मंत्रियों ने ली शपथ शुभेंदु अधिकारी के साथ खड़गपुर सदर विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए भाजपा के फायरब्रांड नेता दिलीप घोष, आसनसोल दक्षिण की एमएलए अग्निमित्रा पॉल, मतुआ समाज के अशोक किर्तनिया, आदिवासी समाज से खुदीराम टुडू और राजवंशी समुदाय से आने वाले नीशीथ प्रमाणिक ने मंत्री के रूप में शपथ ली. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 207 सीटें जीतकर सत्ता में आयी भाजपा बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में चुनाव हुए थे. 4 मई को जब नतीजे आये, तो भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस की 15 साल पुरानी प्रशासन को सत्ता से बेदखल कर दिया. ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गयी. भाजपा ने पहली बार 207 सीटें जीतकर दो तिहाई बहुमत के साथ प्रशासन का गठन किया है. इसे भी पढ़ें बंगाल में भाजपा राज, ब्रिगेड में शुभेंदु अधिकारी की शपथ के गवाह बने पीएम मोदी और एनडीए शासित राज्यों के सीएम शुभेंदु कैबिनेट में संघ का प्रभाव, स्त्री और आदिवासी के साथ मतुआ को भी जगह Video: शुभेंदु के शपथ में डॉ श्यामा प्रसाद के अंतिम साथी माखनलाल प्रशासन, पीएम मोदी ने पैर छूकर लिया आशीर्वाद कौन हैं नंदीग्राम के ‘जायंट किलर’ शुभेंदु अधिकारी, जिन्होंने ममता बनर्जी को 2 बार हराया और ढाह दिया टीएमसी का अभेद्य किला The post बंगाल के इतिहास में पहली बार कोई मुस्लिम मंत्री नहीं, ममता बनर्जी प्रशासन में थे 7 appeared first on Naya Vichar.

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Mothers Day Special: डिजाइनर आउटफिट नहीं, मां और सास की निशानी में सजीं ये बॉलीवुड ब्राइड्स

Mothers Day Special 2026: मदर्स डे हर साल मां के प्रति प्यार और सम्मान जाहिर करने का दिन होता है. बॉलीवुड की कई ऐसी एक्ट्रेसेस हैं, जिन्होंने अपनी शादी जैसे सबसे खास दिन पर अपनी मां या सास की पुरानी चीजों को पहनकर इस दिन को और भी इमोशनल बना दिया. महंगे डिजाइनर के कपड़ों को छोड़कर इन एक्ट्रेसेस ने अपनी मां की साड़ी या सास के गहनों को चुना. कल यानी 10 मई को मदर्स डे के मौके पर, आइए नजर डालते हैं इन खूबसूरत दुल्हनों पर. सोनाक्षी सिन्हा साल 2024 में अपनी शादी के मौके पर सोनाक्षी सिन्हा ने किसी बड़े डिजाइनर का लहंगा नहीं, बल्कि अपनी मां पूनम सिन्हा की शादी की साड़ी पहनी थी. लाल रंग की इस सिल्क साड़ी में सोनाक्षी बेहद प्यारी लग रही थीं. उन्होंने अपनी मां की इस विरासत को पहनकर साबित कर दिया कि पुरानी यादों की चमक कभी कम नहीं होती. करीना कपूर खान करीना कपूर ने अपनी शादी में अपनी सास शर्मिला टैगोर को खास सम्मान दिया. उन्होंने अपनी शादी में वही मशहूर शाही गरारा पहना, जो शर्मिला टैगोर ने 1968 में अपनी शादी में पहना था. इस ऐतिहासिक ड्रेस को दोबारा तैयार करवाया गया था. करीना का यह लुक आज भी सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले वेडिंग लुक्स में से एक है. कृति खरबंदा एक्ट्रेस कृति खरबंदा ने भी अपनी शादी में परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाया. उन्होंने अपने खास दिन पर अपनी मां का पुराना शादी वाला दुपट्टा और अपनी नानी का हार पहना था. कृति का मानना था कि इन पुरानी चीजों में उनके बुजुर्गों का ढेर सारा आशीर्वाद छिपा है. सोनम कपूर बॉलीवुड की फैशन आइकन सोनम कपूर ने अपनी शादी में अपनी मां सुनीता कपूर के गहनों को अहमियत दी. उन्होंने अपने अलग-अलग फंक्शन्स में अपनी मां के कलेक्शन से लिए हुए भारी हार और मांगटीका पहनकर अपना लुक पूरा किया था. इन पुश्तैनी गहनों ने उनकी खूबसूरती में चार चांद लगा दिए थे. प्रियंका चोपड़ा प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस की शादी में भी एक बहुत प्यारा रिश्ता देखने को मिला. प्रियंका ने अपनी व्हाइट वेडिंग ड्रेस के लंबे घूंघट में अपनी सास की शादी की ड्रेस का एक छोटा सा टुकड़ा जुड़वाया था. इसके जरिए उन्होंने अपनी सास के प्रति अपना प्यार और सम्मान दिखाया, जिसने सबका दिल जीत लिया था. यह भी पढ़ें: क्या लक्ष्य संग नई फिल्म बना रहे हैं संदीप रेड्डी वांगा? करण जौहर ने पोस्ट शेयर कर दिया हिंट The post Mothers Day Special: डिजाइनर आउटफिट नहीं, मां और सास की निशानी में सजीं ये बॉलीवुड ब्राइड्स appeared first on Naya Vichar.

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NIT के लिए नहीं हैं पूरे मार्क्स? इस इंजीनियरिंग कॉलेज में लें एडमिशन, CSE में 65 लाख का प्लेसमेंट 

IIIT Bangalore Admission 2026: जेईई परीक्षा के बाद बहुत से स्टूडेंट इंजीनियरिंग कॉलेज की तलाश में हैं. अगर आपको NIT नहीं मिल पा रहा है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है, आप IIIT Bangalore में भी एडमिशन ले सकते हैं. ये इंजीनियरिंग के लिए बेस्ट संस्थान हैं. NIRF Ranking 2025 के अनुसार, इसे इंजीनियरिंग कैटेगरी में 69वां स्थान हासिल है. आइए जानते हैं कि IIIT Bangalore में एडमिशन कैसे मिलता है और यहां का प्लेसमेंट कैसा है. टेक्नोलॉजी और साइंस की पढ़ाई के लिए फेमस IIIT Bangalore टेक्नोलॉजी और साइंस की पढ़ाई के लिए जाना जाता है. यहां अंडर ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और इंटीग्रेटेड पीएचडी तक की पढ़ाई होती है. यहां कंप्यूटर साइंस, Digital Humanities, साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन एंड इंजीनियरिंग और एप्लाइड साइंस जैसे कई कोर्सेज ऑफर किए जाते हैं. Iiit bangalore ranking (pc-ऑफिशियल वेबसाइट) कैसे मिलता है IIIT Bangalore में एडमिशन? IIIT बैंगलुरु में एडमिशन कुछ इस प्रकार मिलता है- अंडर ग्रेजुएट कोर्सेज- JEE Main और जोसा काउंसलिंग के आधार पर मिलता है. BE/BTech कोर्सेज के लिए कॉलेज की ऑफिशियल वेबसाइट admissions.iiitb.net पर जाकर अप्लाई करना होता है. पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेज- गेट परीक्षा के अनुसार एडमिशन मिलता है. IIIT Bangalore के टॉप रिक्रूटर्स इंफोसिस Accenture Amazon HSBC HP IBM इंटेल टाटा पावर IBM Qualcomm Samsung Walmart Paytm Flipkart LinkedIn Iiit bangalore प्लेसमेंट की जानकारी (pc-ऑफिशियल वेबसाइट) कैसा है IIIT Bangalore का प्लेसमेंट? कॉलेज की वेबसाइट पर दिए 2023-24 के प्लेसमेंट के अनुसार इस संस्थान का प्लेसमेंट काफी शानदार है. संस्थान के iMTech और MTech प्रोग्राम्स में छात्रों को बड़े टेक कंपनियों से हाई पैकेज ऑफर मिले हैं. रिपोर्ट के अनुसार iMTech CSE और ECE दोनों में Highest Package 65 LPA तक पहुंचा, जबकि MTech ECE में Highest Package करीब 52.05 LPA रहा. MTech Placement 2023-24 CSE ECE Highest Package (LPA) 65 52.05 Average Package (LPA) 22.13 29.64 Median Package (LPA) 18.9 36.4 Highest Internship Stipend (₹ हजार/माह) 110 60 Average Internship Stipend (₹ हजार/माह) 55.1 44.6 Median Internship Stipend (₹ हजार/माह) 50 45 Average Package की बात करें तो iMTech ECE छात्रों को लगभग 36.2 LPA और iMTech CSE छात्रों को करीब 33.4 LPA का औसत पैकेज मिला. वहीं MTech CSE का Average Package लगभग 21.8 LPA और MTech ECE का करीब 29.2 LPA रहा. यही नहीं इंटर्नशिप स्टाइपेंड भी आकर्षक है. यह भी पढ़ें- जेईई मेन पेपर 2 का रिजल्ट हुआ जारी, जानिए किस Rank पर मिलेगा टॉप आर्किटेक्चर कॉलेज में एडमिशन The post NIT के लिए नहीं हैं पूरे मार्क्स? इस इंजीनियरिंग कॉलेज में लें एडमिशन, CSE में 65 लाख का प्लेसमेंट  appeared first on Naya Vichar.

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भागलपुर में बनेगा मॉडर्न ई-बस टर्मिनल, वर्कशॉप बिल्डिंग, चार्जिंग प्वाइंट समेत मिलेंगी ये सुविधाएं

E-Bus Terminal: बिहार के भागलपुर में प्रधानमंत्री इलेक्ट्रिक बस योजना के तहत मॉडर्न ई-बस टर्मिनल का निर्माण किया जाएगा. इसके लिए डीपीआर तैयार कर लिया गया है और जल्द ही निर्माण को लेकर योजना बनाई जाएगी. जिले में मॉडर्न ई-बस टर्मिनल को तिलकामांझी स्थित प्रशासनी बस स्टैंड में बनाया जाएगा, जहां यात्रियों की सुविधा को देखते हुए कई तरह की व्यवस्था रहेगी. ई-बस टर्मिनल की लागत बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के अंतर्गत बनने वाले बस टर्मिनल को लगभग 6.78 करोड़ की लागत से बनाया जाएगा. इसमें से करीब 1.45 करोड़ रुपये सिर्फ सिविल वर्क पर खर्च किए जायेंगे. इसके साथ ही संभावना जताई जा रही है कि ई-बस डिपो का शिलान्यास कर जुलाई महीने से काम शुरू हो सकता है. यात्रियों को क्या-क्या मिलेंगी सुविधा? ई-बस टर्मिनल में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बताया गया कि यहां 10 चार्जिंग प्वाइंट बनाए जायेंगे. इसके साथ ही यात्रियों की सुविधा को देखते हुए जी प्लस वन प्रशासनिक भवन, वॉशिंग रैप, वर्कशॉप बिल्डिंग और सुरक्षा चौकियां भी होंगी. लगभग 25 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की व्यवस्था होगी. इसके अलावा 10 डीजल और सीएनजी बसों को चलानों को लेकर भी प्रावधान किया गया है. भागलपुर में चलाई जायेंगी 50 इलेक्ट्रिक बसें जानकारी के मुताबिक, बिहार को प्रधानमंत्री इलेक्ट्रिक बस योजना के तहत 400 इलेक्ट्रिक बसों का तोहफा दिया जाएगा. इनमें 50 बसें भागलपुर जिले के लिए होंगी. यात्रियों के लिए पार्किंग की व्यवस्था के बारे में बताया गया कि ऑटो, टू व्हीलर और फोर व्हीलर के लिए अलग-अलग व्यवस्था होगी. नए ई-बस टर्मिनल को 9.66 एरिया में बनाया जाएगा. इसमें पार्किंग एरिया लगभग 5.6 एकड़ में फैला होगा. सुरक्षित परिवहन की मिलेगी सुविधा इस तरह से भागलपुर जिले के लिए यह बेहद खास पहल मानी जा रही है. इससे यातायात सुगम होने के साथ-साथ सुरक्षित परिवहन की सुविधा भी मिल सकेगी. इससे पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा. इसके साथ ही रोजगार को भी बढ़ावा मिल सकेगा. इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने को लेकर प्रशासन की ओर से लक्ष्य तय किया गया है. Also Read: बिहार में 12 मई से 30 जून तक चलेगा महाअभियान, किसानों को मिलेगा फायदा The post भागलपुर में बनेगा मॉडर्न ई-बस टर्मिनल, वर्कशॉप बिल्डिंग, चार्जिंग प्वाइंट समेत मिलेंगी ये सुविधाएं appeared first on Naya Vichar.

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तमिलनाडु में किंगमेकर की भूमिका में VCK, शनिवार शाम खोलेगी अपना पत्ता ; उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर नजर

vck : तमिलनाडु में सत्ता का जो सस्पेंस बरकरार है, उसका अंत आज शाम संभव है. पीटीआई न्यूज एजेंसी ने यह जानकारी दी है कि टीवीके को प्रशासन बनाने के लिए अपना समर्थन देने के मुद्दे पर वीसीके (विदुथलाई चिरुथाइगल काची) अपना रुख आज शाम को स्पष्ट करेगी. टीवीके को समर्थन देने के बदले में प्रशासन में अहम पद चाहती है वीसीके वीसीके, टीवीके प्रशासन को अपना समर्थन देने के मामले में अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं कर रही है. न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है कि वीसीके प्रशासन में अहम पद चाहती है. जबतक उसे इस बात का भरोसा नहीं मिल जाता है कि उसे प्रशासन में अहम पद मिलेगा वह समर्थन के बारे में अपना फैसला नहीं सुनाएगी. सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है कि वीसीके उपमुख्यमंत्री का पद या फिर कोई अहम मंत्रालय चाहती है. वीसीके और टीवीके के बीच वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए मीटिंग हुई है. तिरुचिरापल्ली सीट चाहती है वीसीके ऐसी सूचना भी सामने आ रही है कि वीसीके तिरुचिरापल्ली सीट पर अपना उम्मीदवार देना चाहती है. अभी यह सीट वीसीके के पास है और विजय यहां से चुनाव जीते हैं. हालांकि ऐसी उम्मीद है कि वे चेन्नई की पेरंबूर सीट अपने पास रखेंगे. अगर विजय तिरुचिरापल्ली पूर्व विधानसभा सीट छोड़ते हैं, तो वीसीके चाहती है कि उस सीट से थोल थिरुमावलवन को चुनाव मैदान में उतारा जाए. उन्होंने यह भी बताया कि शुक्रवार शाम थिरुमावलवन की अध्यक्षता में डिजिटल माध्यम से हुई बैठक में सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर चर्चा हुई. सूत्र के अनुसार, बैठक में वीसीके के लिए दो या तीन महत्वपूर्ण पदों की मांग पर विचार किया गया. इसमें थिरुमावलवन के लिए उपमुख्यमंत्री पद और पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों के लिए कैबिनेट मंत्री पद की मांग भी शामिल थी. वीसीके के पास दो सीट है. जाति आधारित भेदभाव कम करना चाहती है वीसीके विदुथलाई चिरुथाइगल काची (vck) पार्टी के अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन हैं. पार्टी की स्थापना एम मलालचमी के नेतृत्व में 1982 में कुछ दलितों ने की थी. वे पेशे से एक वकील हैं. इनका उद्देश्य जाति आधारित भेदभाव को मिटाना और सामाजिक आंदोलन करना है. ये भी पढ़ें : तमिलनाडु में सत्ता पर सस्पेंस: बहुमत के दावे के बावजूद विजय को क्यों नहीं मिला राज्यपाल का बुलावा?  सिनेमा से सत्ता तक: कैसे विजय थलपति बने तमिलनाडु की नेतृत्व के नए मास स्टार The post तमिलनाडु में किंगमेकर की भूमिका में VCK, शनिवार शाम खोलेगी अपना पत्ता ; उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर नजर appeared first on Naya Vichar.

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जंगलमहल को लाल से भगवा करने में खुदीराम टुडू की रही अहम भूमिका, अब बने शुभेंदु कैबिनेट में मंत्री

मुख्य बातें संथाली भाषा में शपथ ली आदिवासी समुदाय के अधिकारों के लिए जीवन समर्पित Ministers of West Bengal:कोलकाता: आज जंगलमहल में उत्सव का माहौल है. खुदीराम टुडू ने ब्रिगेड में मंत्री पद की शपथ ली है. खुदीराम टुडू जंगलमहल का एक बहुत ही महत्वपूर्ण चेहरा हैं. बांकुड़ा का रानीबांध आदिवासी बहुल विधानसभा क्षेत्र है. माओवादी कभी इस जंगलमहल में सक्रिय थे. इस जंगलमहल में एक के बाद एक कई शव गिरे हैं. यह इलाका कभी सीपीएम का गढ़ हुआ करता था. खुदीराम टुडू ने इस क्षेत्र में लंबे समय तक सीपीएम के खिलाफ लड़ाई लड़ी है. वे हर विधानसभा चुनाव लड़ते थे, लेकिन हार जाते थे. फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी. संथाली भाषा में शपथ ली खुदीराम टुडू को कैबिनेट में जगह देकर जंगलमहल और पिछड़े समुदाय को यह संदेश दिया गया कि भाजपा उन पर भी नजर रख रही है. उनके विकास पर भी जोर दिया जा रहा है. आज शपथ लेने वाले पांच लोगों में खुदीराम टुडू भी शामिल हैं. खुदीराम ने आज जंगलमहल के प्रतिनिधि के रूप में संथाली भाषा में शपथ ली. इस चुनाव में खुदीराम के खिलाफ तृणमूल की उम्मीदवार तनुश्री हांसदा थीं. खुदीराम टुडू को 1,31,145 वोट मिले. उन्होंने 52,269 वोटों के अंतर से यह चुनाव जीता. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें आदिवासी समुदाय के अधिकारों के लिए जीवन समर्पित खुदीराम टुडू मुख्य रूप से हिंदुस्तान ज़कात मांझी परगना महल (बीजेएमपीएम) नामक सामाजिक संगठन से जुड़े हैं और आदिवासी समुदाय के अधिकारों और संताली भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण के आंदोलन में एक जाना-पहचाना चेहरा हैं. आदिवासी समुदाय में उनकी काफी लोकप्रियता है. वे पेशे से शिक्षक भी हैं. आदिवासी समुदाय में समाज निर्माण में वे माहिर हैं. आज मंच पर खुदीराम टुडू ने मंत्री पद की शपथ ली. बंगाल की नेतृत्व में इसे एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. Also Read: शुभेंदु कैबिनेट में संघ का प्रभाव, स्त्री और आदिवासी के साथ मतुआ को भी जगह The post जंगलमहल को लाल से भगवा करने में खुदीराम टुडू की रही अहम भूमिका, अब बने शुभेंदु कैबिनेट में मंत्री appeared first on Naya Vichar.

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बॉक्स ऑफिस पर किस फिल्म ने मारी बाजी? ‘राजा शिवाजी’ से ‘दादी की शादी’ तक जानें पूरा हाल

Box Office Collection: शुक्रवार को सिनेमाघरों में कई फिल्मों के बीच जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला. एक तरफ नई रिलीज फिल्में दादी की शादी और कृष्णावतारम पार्ट 1: द हार्ट थिएटरों में उतरीं, वहीं पहले से चल रही फिल्मों ने भी बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ बनाए रखी. हालांकि नई फिल्मों की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही. दूसरी ओर राजा शिवाजी और भूत बंगला जैसी फिल्मों ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में सफलता हासिल की. ‘कृष्णावतारम पार्ट 1’ की धीमी शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण की कहानी पर आधारित फिल्म ‘कृष्णावतारम पार्ट 1: द हार्ट’ शुक्रवार को रिलीज हुई. फिल्म को ओपनिंग डे पर दर्शकों से औसत रिस्पॉन्स मिला. पहले दिन फिल्म ने करीब 1.15 करोड़ रुपये का कारोबार किया. इससे पहले पेड प्रीव्यू से फिल्म लगभग 42 लाख रुपये कमा चुकी थी. ऐसे में इसकी कुल कमाई 1.57 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. ‘दादी की शादी’ नहीं दिखा पाई दम नीतू कपूर और कपिल शर्मा स्टारर ‘दादी की शादी’ की शुरुआत भी फीकी रही. फैमिली ड्रामा फिल्म पहले दिन घरेलू बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ 60 लाख रुपये ही कमा सकी. वहीं दुनियाभर में फिल्म की कमाई करीब 72 लाख रुपये रही. कम ऑक्यूपेंसी और कमजोर शुरुआती प्रतिक्रिया का असर फिल्म की कमाई पर साफ नजर आया. कई जगहों पर फिल्म के शोज में दर्शकों की संख्या काफी कम रही. ‘राजा शिवाजी’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा जारी रितेश देशमुख और जेनेलिया डिसूजा स्टारर ‘राजा शिवाजी’ लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है. शुक्रवार को फिल्म ने 3.20 करोड़ रुपये की कमाई की. अब तक इसका कुल कलेक्शन 55.85 करोड़ रुपये पहुंच चुका है. फिल्म में सलमान खान, अभिषेक बच्चन, संजय दत्त और विद्या बालन जैसे सितारे भी नजर आ रहे हैं, जिससे फिल्म को लगातार फायदा मिल रहा है. ‘एक दिन’ और ‘भूत बंगला’ का हाल एक दिन बॉक्स ऑफिस पर संघर्ष करती दिखाई दे रही है. जुनैद खान और साई पल्लवी की इस फिल्म ने शुक्रवार को सिर्फ 5 लाख रुपये का कलेक्शन किया. एक हफ्ते के भीतर ही फिल्म की रफ्तार काफी धीमी पड़ गई है. वहीं अक्षय कुमार स्टारर ‘भूत बंगला’ अब भी थिएटरों में मजबूती से टिकी हुई है. फिल्म ने शुक्रवार को 1.75 करोड़ रुपये कमाए और इसका कुल कलेक्शन 151.75 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. ‘धुरंधर 2’ की कमाई इसके अलावा ‘धुरंधर 2’ ने भी बॉक्स ऑफिस पर स्थिर प्रदर्शन करते हुए 42 लाख रुपये की कमाई की. फिल्म का कुल घरेलू कलेक्शन अब 1,141.09 करोड़ रुपये हो चुका है. यह भी पढ़ें- पहले दिन ही फुस्स हुई ‘दादी की शादी’, 1 करोड़ तक पहुंचना भी हुआ मुश्किल The post बॉक्स ऑफिस पर किस फिल्म ने मारी बाजी? ‘राजा शिवाजी’ से ‘दादी की शादी’ तक जानें पूरा हाल appeared first on Naya Vichar.

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शुभेंदु कैबिनेट में संघ का प्रभाव, महिला और आदिवासी के साथ मतुआ को भी जगह

Ministers of West Bengal: दिलीप घोष शुभेंदु अधिकारी के बाद दिलीप घोष ने मंत्री पद की शपथ ली. वही दिलीप घोष, जिन्हें बंगाल भाजपा के नए उदय के नेताओं में से एक माना जाता है. आरएसएस प्रचारक से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तक का उनका सफर अचानक रुक गया. विधानसभा चुनाव से पहले मोदी के मंच पर नजर आए दिलीप घोष को उनके पुराने मैदान में वापस लाया जा रहा है. खड़गपुर सदर से अपनी काबिलियत साबित कर चुके दिलीप अब बंगाल मंत्रिमंडल में शामिल होने जा रहे हैं. ऐसे में नेतृत्वक हलकों में यह माना जा रहा है कि दिलीप को संघ परिवार के प्रतिनिधि के तौर पर अधिक महत्व दिया गया है. Ministers of West Bengal: अग्निमित्र पाल ममता बनर्जी बंगाल की पहली स्त्री मुख्यमंत्री थीं. वो दिन अब बीत चुका हैं. नए मंत्रिमंडल में स्त्री चेहरों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे थे. हालांकि, शपथ ग्रहण समारोह में स्त्री मंत्री का नाम स्पष्ट हो गया. शुभेंदु और दिलीप के बाद तीसरा नाम अग्निमित्रा पाल का था, जो आसनसोल दक्षिण से विधायक हैं. अग्निमित्रा कभी फैशन डिजाइनर के रूप में बंगाल की एक लोकप्रिय हस्ती थीं. बाद में उन्होंने भाजपा से अपने नेतृत्वक करियर की शुरुआत की. अग्निमित्रा ने विधानसभा, सभाओं, जुलूसों और अपने निर्वाचन क्षेत्र के विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से दिन-प्रतिदिन अपनी नेतृत्वक पहचान बनाई. अब वह मंत्री हैं. Ministers of West Bengal: खुदीराम तुडू शपथ लेने वाले मंत्रियों में खुदीराम टुडू भी शामिल थे. वे राज्य की नेतृत्व में कोई जाना-पहचाना चेहरा नहीं हैं, न ही कोई प्रभावशाली नेता. दिलीप-अग्निमित्र के बाद उनके नाम की घोषणा की गई. आदिवासी नेता ने पूरे देश के नेताओं के सामने शपथ ली. उन्होंने बेहद अनौपचारिक तरीके से शपथ ग्रहण किया. भाजपा ने जंगलमहल के प्रतिनिधि और रानीबांध से विधायक को पूर्णकालिक मंत्री बना दिया. खुदीराम की शपथ कितनी महत्वपूर्ण है, यह कहना गलत नहीं होगा. Ministers of West Bengal: अशोक कीर्तनिया मंत्रिमंडल में एक चेहरा और एक चौंकाने वाला रहा. रानीबांध के बाद, बांगाओन उत्तर विधानसभा का नंबर आया. अशोक कीर्तनिया मंत्री बने हैं. वे मतुआ समुदाय के प्रतिनिधि हैं. तृणमूल ने उनकी नागरिकता पर सवाल उठाए थे. अब उन्हीं अशोक ने मंत्री पद की शपथ ली है. विश्लेषकों का मानना ​​है कि इसके पीछे भी भाजपा के कुछ विशेष कारण हो सकते हैं. भाजपा ने ठाकुरबाड़ी के सदस्य शांतनु ठाकुर को केंद्रीय मंत्री बनाकर मतुआगढ़ के लोगों का दिल जीत लिया है और अब उसी क्षेत्र के प्रतिनिधि अशोक राज्य मंत्रिमंडल में शामिल हो गए हैं. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें Ministers of West Bengal: निशिथ प्रमाणिक शुभेंदु अधिकारी की तरह, निशित भी तृणमूल से भाजपा में आये हैं. हालांकि, उनका उदय बहुत तेज़ी से हुआ है. विश्लेषकों का यह भी कहना है कि इस मामले में राजबोंगशी समुदाय को भी सम्मान दिया गया है. राजबोंगशी समुदाय में निशित की लोकप्रियता ने भाजपा की ताकत बढ़ाने में काफी मदद की है. इससे पहले, उन्हें अमित शाह के उप-प्रमुख के रूप में केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिली थी. और अब निशित राज्य मंत्री हैं. Also Read: Suvendu Adhikari: शुभेंदु के शपथ से पहले खुला केंद्र का खजाना, बंगाल को मिलेगा करोड़ों का बकाया The post शुभेंदु कैबिनेट में संघ का प्रभाव, स्त्री और आदिवासी के साथ मतुआ को भी जगह appeared first on Naya Vichar.

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