किसी फिल्म की किस्मत अगर बॉक्स ऑफिस पर स्क्रीन की संख्या से तय होती है, तो ‘हनुमान अंश’ की कहानी शायद कुछ और होती. 1.9 करोड़ रुपये के बजट में बनी यह फिल्म रिलीज के बाद एक वक्त सिर्फ 25 स्क्रीन तक सिमट गई थी. मेकर्स को लगने लगा था कि अब फिल्म का सफर खत्म होने वाला है. हार मानने की बजाय, उन्होंने फिल्म को सड़क पर उतारा डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने हार मानने के बजाय फिल्म को लेकर सड़क का रास्ता पकड़ लिया. शहर-शहर घूमे. लोगों से फिल्म देखने की अपील की. थिएटर मालिकों से स्क्रीन बढ़ाने की गुजारिश की. जगह-जगह भंडारे किए और लोगों के बीच फिल्म को लेकर जागरूकता बढ़ाई. आज विशाल कहते हैं कि फिल्म 1200 से 1500 स्क्रीन तक पहुंच चुकी है और इसके शोज की संख्या 5000 के पार जा चुकी है. दरअसल, ‘हनुमान अंश’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि विशाल चतुर्वेदी के लिए एक लंबी और मुश्किल यात्रा रही है. इसकी शुरुआत एक ऐसे अनुभव से हुई, जिसे वह खुद चमत्कार मानते हैं. उनके साथ हुई एक घटना के बाद उनके मन में नीम करोली बाबा को लेकर फिल्म बनाने का विचार आया. कहानी पर काम शुरू हुआ. ड्राफ्ट तैयार हुआ और इसके बाद वह फिल्म को बड़े प्रोड्यूसर्स और मेकर्स के पास लेकर पहुंचे. जब इंडस्ट्री ने कहा – ‘फिल्म स्लो है, ये क्या बना दिया?’ लेकिन यहां से मुश्किलें शुरू हो गईं. किसी ने कहा कि कहानी नहीं चलेगी. किसी ने कहानी को अपने हिसाब से बदलने की सलाह दी. विशाल के मुताबिक, कुछ लोगों ने तो उनकी कहानी की क्रेडिबिलिटी तक पर सवाल खड़े कर दिए. विशाल कहते हैं, “कई लोगों ने मेरी कहानी को डिसक्रेडिट कर दिया. कहा कि इसमें प्रोडक्शन वैल्यू नहीं है. फिल्म बहुत स्लो है. ये क्या बना दिया. इस तरह के लोग भी मिले.” ‘नए मेकर्स खुद अपनी फिल्म मुश्किल बना देते हैं’ विशाल मानते हैं कि नए फिल्ममेकर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ कहानी नहीं, बल्कि उसे सही बजट में पर्दे तक पहुंचाना है. उनका मानना है कि नए टैलेंट को मौका देकर इस मुश्किल को काफी हद तक आसान किया जा सकता है. वह कहते हैं, “मैं फिल्ममेकर्स से यही कहना चाहूंगा कि जो नए मेकर्स हैं, वो खुद ही अपनी फिल्म को मुश्किल बना देते हैं. इसे आसान बनाने का एक बेहद सिंपल तरीका है. आप नए लोगों और टैलेंट के साथ काम करें. नए टैलेंट को बड़ी जिम्मेदारी देने की हिम्मत होनी चाहिए. इससे बजट कंट्रोल करने में बड़ा फायदा मिलता है. टीम में ज्यादा टैंट्रम थ्रो करने वालों को दरकिनार करें, तो राहें आसान हो जाती हैं.” ‘हनुमान अंश’ की टीम ने भी इसी सोच के साथ काम किया. विशाल के मुताबिक, फिल्म की टीम ने ऐसे बजट में काम किया, जहां कई फिल्मों में थर्ड और फोर्थ एडी तक काम करने से मना कर देते हैं. बावजूद इसके टीम से जुड़े लोगों ने फिल्म को पूरी शिद्दत से पूरा किया. फिल्म में महाराज की पत्नी का किरदार निभाने वाली पूर्णिमा कुमारी ने कोई फीस नहीं ली. सौभिनव को भी कोई बड़ा अमाउंट नहीं दिया गया. विशाल बताते हैं कि फिल्म को महज 1.9 करोड़ रुपये के बजट में तैयार किया गया. 25 दिन की शूटिंग तय थी, 22 दिन में समेटनी पड़ी पैसे जुटाने से लेकर शूटिंग पूरी करने तक हर कदम पर चुनौती थी. विशाल ने ऐसे कलाकारों और क्रू मेंबर्स को टीम से जोड़ना शुरू किया, जिन्हें काम की तलाश थी लेकिन बड़ा प्लेटफॉर्म नहीं मिल रहा था. मामूली फीस पर लोगों ने फिल्म के साथ जुड़ना स्वीकार किया. शूटिंग का शेड्यूल 25 दिनों का तय किया गया था. लेकिन शूटिंग के दौरान ही बजट ओवर होने का डर सताने लगा. ऐसे में टीम ने अपनी रफ्तार बढ़ाई और 25 दिन के बजाय 22 दिनों में शूटिंग पूरी कर ली. कई लोगों ने अपनी फीस तक कम कर दी. विशाल के मुताबिक, इस पूरी यात्रा में मुश्किलें लगातार आती रहीं. लेकिन हर बार किसी न किसी तरह रास्ता निकलता गया. वह कहते हैं कि कई बार ऐसा लगा कि अब चीजें हाथ से निकल रही हैं, लेकिन अचानक कुछ ऐसा होता था कि सब ठीक होने लगता था. उनके लिए यही फिल्म की यात्रा का ‘मैजिक’ था. सेट पर नहीं चला शराब-मांस, हर शॉट से पहले पढ़ी हनुमान चालीसा फिल्म की शूटिंग के दौरान टीम ने कुछ नियमों का भी खास तौर पर पालन किया. विशाल बताते हैं कि पूरी शूटिंग के दौरान किसी ने शराब का सेवन नहीं किया और न ही नॉनवेज खाया. सेट पर गाली-गलौच से भी दूरी रखी गई. हर शॉट शुरू करने से पहले हनुमान चालीसा पढ़ी जाती थी. शूटिंग के दौरान एक घटना ने पूरी टीम को हैरान कर दिया. विशाल के मुताबिक, जहां बाबा जी के पास हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है, वहां अचानक एक लंगूर आया और महाराज जी के पास आकर बैठ गया. विशाल इसे महज संयोग नहीं मानते. वह कहते हैं कि शूटिंग के दौरान ऐसी कई घटनाएं हुईं, जिन्हें उन्होंने चमत्कार जैसा महसूस किया. धर्म पर फिल्म बनाने का डर भी था धर्म और धार्मिक गुरुओं से जुड़ी फिल्मों को लेकर दर्शकों की संवेदनशीलता किसी से छिपी नहीं है. कई बार ऐसी फिल्मों को लेकर विवाद भी खड़े हुए हैं. ऐसे में क्या विशाल को भी डर था कि कहीं ‘हनुमान अंश’ मिसफायर न कर जाए? इस पर वह साफ कहते हैं, “हां, बहुत डर था. लेकिन मैं मानता हूं कि बड़े ही स्वाभिमान के साथ डर होना जरूरी भी है. अगर वो डर नहीं होता, तो मैं इतने सेंसिटिवली फिल्म को हैंडल नहीं करता.” विशाल का मानना है कि शायद इसी सावधानी का असर फिल्म पर भी दिखा. वह बताते हैं कि बुक माय शो पर फिल्म को लेकर करीब 35 हजार कमेंट हैं और इनमें शायद ही एक-दो कमेंट ऐसे हों, जो पूरी तरह नकारात्मक हों. जब 250 स्क्रीन से 25 पर पहुंच गई फिल्म फिल्म की असली परीक्षा रिलीज के बाद हुई. विशाल बताते हैं कि ‘हनुमान अंश’ की रिलीज के समय उनके पास करीब 250 स्क्रीन थीं. अगले हफ्ते जब ‘बंटवारा’ और ‘आवारापन 2’ जैसी फिल्में रिलीज हुईं,