Hot News

October 3, 2026

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

सारण में बाढ़ से हाहाकार: 100 करोड़ से अधिक का नुकसान, 300 से ज्यादा मकान तबाह; 33 पंचायतों के 170 गांव प्रभावित

Chapra Flood : नेपाल से आये छह लाख क्यूसेक से अधिक पानी ने सारण के छह प्रखंडों में बाढ़ की स्थिति गंभीर कर दी है. बाढ़ से अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का अनुमान लगाया गया है. 100 से अधिक कच्चे और पक्के मकान बह गये हैं, जबकि 200 से अधिक झोपड़ियां भी बाढ़ की चपेट में आकर तबाह हो गयी हैं. बाढ़ का पानी अभी भी कई नये इलाकों में फैल रहा है और बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हैं. सारण में बाढ़ से तबाही: गांव पानी में डूबा 14 राहत केंद्रों में 40 हजार लोगों को मिला आश्रय बाढ़ प्रभावित और विस्थापित लोगों के लिए 14 राहत केंद्र संचालित किये जा रहे हैं. इन केंद्रों में करीब 40 हजार लोगों को आश्रय उपलब्ध कराया गया है. वहीं, 46 सामुदायिक रसोई के माध्यम से अब तक 50,550 लोगों को भोजन कराया जा चुका है. 2,540 नावें और 20 चिकित्सा शिविर राहत कार्य में जुटे प्रभावित क्षेत्रों में 2,540 नावों का परिचालन किया जा रहा है. स्वास्थ्य सुविधा के लिए 20 चिकित्सा शिविर और पांच मोबाइल मेडिकल टीम सक्रिय हैं. पशुओं के लिए आठ पशु चिकित्सा शिविर चलाये जा रहे हैं, जहां अब तक 370 पशुओं का इलाज किया गया है. पशुपालकों के बीच 153.5 क्विंटल पशु चारा भी वितरित किया गया है. राहत सामग्री के साथ पॉलिथीन शीट भी बांटी गयी बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच अब तक 2,650 फूड पैकेट और ड्राई राशन पैकेट वितरित किये गये हैं. प्रशासन के गोदाम में 14,275 पॉलिथीन शीट उपलब्ध हैं. अंचलों को 10,550 पॉलिथीन शीट उपलब्ध करायी गयी हैं, जबकि 9,947 पॉलिथीन शीट का वितरण किया जा चुका है. सारण में बाढ़ से तबाही से घर डूबा दो-तीन दिनों में पानी घटने की उम्मीद बाढ़ प्रमंडल, सारण के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर ने बताया कि पानी आने की रफ्तार में कमी आयी है. पूरी संभावना है कि अगले दो-तीन दिनों में पानी घटने लगेगा. जिन इलाकों में पानी प्रवेश कर गया है, वहां से पानी निकालने का प्रयास किया जा रहा है. फिलहाल टूटे हुए बांध की मरम्मत का काम भी कराया जा रहा है. सारण में नदियों का वर्तमान जलस्तर, 2 अक्टूबर 2026 नदी खतरे का निशान वर्तमान जलस्तर स्थिति गंगा, गांधी घाट 48.60 मीटर 49.69 मीटर 2 सेमी वृद्धि, खतरे के निशान से 1.09 मीटर ऊपर गंडक, हाजीपुर 50.32 मीटर 50.00 मीटर 2 सेमी कमी, खतरे के निशान से 30 सेमी नीचे गंडक, रेवा 54.41 मीटर 55.03 मीटर 47 सेमी कमी, खतरे के निशान से 0.62 मीटर ऊपर सरयू/घाघरा, सिसवन 57.04 मीटर 57.24 मीटर 22 सेमी वृद्धि, खतरे के निशान से 20 सेमी ऊपर घाघरा, छपरा 53.68 मीटर 52.22 मीटर जलस्तर स्थिर, खतरे के निशान से 1.46 मीटर नीचे Also Read : सारण में बाढ़ का विकराल रूप, तटबंध टूटने से कई गांवों का संपर्क टूटा; सेना हेलीकॉप्टर से गिराया जा रहा राशन The post सारण में बाढ़ से हाहाकार: 100 करोड़ से अधिक का नुकसान, 300 से ज्यादा मकान तबाह; 33 पंचायतों के 170 गांव प्रभावित appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

पांच देशों से गया जी पहुंचे विदेशी श्रद्धालु, किसी ने दोस्त तो किसी ने बेटे की आत्मा की शांति के लिए किया पिंडदान

Foreign Devotees Gaya Pind Daan : पितृपक्ष मेला महासंगम 2026 में पहली बार शुक्रवार को पांच देशों के 22 विदेशी श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मा की शांति व मोक्ष प्राप्ति की कामना के लिए फल्गु नदी के देवघाट पर पिंडदान, श्राद्ध कर्म और तर्पण का कर्मकांड गया पाल पंडा जी के निर्देशन में संपन्न किया. इन विदेशी सैलानियों के साथ चल रहे पुरोहित लोकनाथ गौड़ ने बताया कि जर्मनी, स्पेन, इटली, डच और पुर्तगाल से आए 48 में से 22 विदेशी श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी और विष्णुपद क्षेत्र में अपने पूर्वजों का पिंडदान और तर्पण किया. ये सभी लोग ईसाई और इस्लाम धर्म छोड़कर सनातन धर्म स्वीकार कर चुके हैं. तीन अलग-अलग ग्रुपों में पहुंचे हैं विदेशी श्रद्धालु सनातन धर्म प्रचारक लोकनाथ गौड़ ने बताया कि 48 विदेशी श्रद्धालु तीन अलग-अलग ग्रुपों में पहुंचे हैं. इनमें पहले ग्रुप के 22 विदेशी श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी के देवघाट पर अपने पितरों के उद्धार के लिए पिंडदान व तर्पण किया और इसके बाद विष्णुपद मंदिर में दर्शन व पूजा-अर्चना की. देवघाट पर पिंडदान करते विदेशी श्रद्धालु इस हादसे के बाद वे काफी अशांत थीं. स्त्री श्रद्धालु मरीना ने बताया कि उनके बेटे की मृत्यु हो गई थी, और बेटे ने अंतिम समय में कुछ अलग रास्ते पर जाने की बात कही थी, जिसके बाद मां बेहद दुखी थीं. इन सभी ने अपने पितरों और अपनों की आत्मा की शांति के लिए यहां पहुंचकर पिंडदान का कर्मकांड पूरा किया. View on Instagram पहले ग्रुप में कर्मकांड करने वाले विदेशी श्रद्धालु इस दल के पहले ग्रुप में नादेज़्दा, पाल्तागुर्तोव्ना, दुर्सुनोवा, लारिसा वैलेंटिनोव्ना, ब्रिनेवा, ओल्गा, अलेक्सेयेवना रादी, विक्टोरिया थून, एकातेरिना, अनातोल्येव्ना, पावलोवा, मास्सिमो बोराक्की, अलेक्ज़ान्द्रा खोमेंको, ओक्साना, अलेक्ज़ान्द्रोव्ना, बुरेएवा, अल्बिना, निकोलायेव्ना, गिमातदिनोवा, लिडिया श्वाब, नालिनिया कोया हुंड, यूगोनिया मुहेलर, अन्ना सायरबु बेलेवच, एरिना मिसल राजसनोवा, याट जना कोयनेव अंकेलोवा, क्रिस्टिना एरहेल्म, नदेझ्दा नेवेलिका ओमिगाव, लर्टीबस पुसिन्यका ओलेसजा, कायना सिफतासी, सवेरलाना इक्स, तथा नातालिया कुरीलोवा सहित 22 विदेशी श्रद्धालु शामिल थे, जिनमें 21 स्त्रीएं थीं. Also Read : WATCH VIDEO : गया जी पहुंचीं जर्मनी की विक्टोरिया, बोलीं- यहां आकर महसूस होती है अलग ऊर्जा; 5 साल से कर रही हूं हिंदू धर्म को फॉलो The post पांच देशों से गया जी पहुंचे विदेशी श्रद्धालु, किसी ने दोस्त तो किसी ने बेटे की आत्मा की शांति के लिए किया पिंडदान appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

CJP का आंदोलन: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की लड़ाई या मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता का सवाल? SIR से जुड़े 5 सवालों के जवाब जरूरी

CJP Protest: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) अभियान के विरोध में और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुंबई के शिवाजी पार्क और आम आदमी पार्टी एवं लेफ्ट के स्टूडेंट विंग आइशा ने दिल्ली में जोरदार आंदोलन किया. हजारों लोग आंदोलन में शामिल हुए. मुंबई में आंदोलन को नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी और विशाल ददलानी जैसी फिल्मी हस्तियों का समर्थन मिला. गांधी जयंती पर आयोजित इस विरोध-प्रदर्शन में महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी भी शामिल हुए. संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ आंदोलन के दौरान कभी ‘जन गण मन’ गाया गया, तो कभी ‘वंदेमातरम्’ के नारे लगाये गये. आंदोलन में आये सिंगर विशाल ददलानी ने कहा कि वे लोकतंत्र को बचाने के लिए यहां आये हैं. सभी नेतृत्वक दलों को आंदोलन का समर्थन करना चाहिए. एसएफआई समेत कई संगठन आंदोलन में हुए शामिल शिवाजी पार्क के आसपास रहने वाले लोगों के विरोध और दादर स्टेशन तक भारी सुरक्षा-व्यवस्था के बावजूद प्रदर्शनकारी क्रांतिकारी नारों, गांधी के उद्धरणों और ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग वाले पोस्टर थामे नजर आये. तिरंगे के साथ ‘ज्ञानू, तुझा डेमोक्रेसी वर भरोसा नाय के?’, ‘ज्ञानेश ब्रो, जस्ट रिजाइन’ और ‘गद्दार ज्ञानू मस्ट गो’ जैसे नारे लिखे पोस्टर लिये स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) समेत विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में युवा इलाके में जुटे. ये भी पढ़ें: CJP Jail Bharo Andolan: मुंबई में खत्म हुआ सीजेपी का विरोध प्रदर्शन, दीपके ने मुंबई पुलिस को कहा ‘थैंक यू’ मुंबई से जंतर-मंतर पर फिर से आंदोलन की चेतावनी शिवाजी पार्क में जुटी भीड़ को संबोधित करते हुए सीजेपी के नेता अभिजीत दीपके ने चेतावनी दी कि अगर ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया, तो जंतर-मंतर पर फिर से आंदोलन शुरू किया जायेगा. दीपके ने हिंदुस्तानीय जनता पार्टी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की जमकर आलोचना की. अभिजीत दीपके का दावा है कि वर्ष 2024 में भाजपा ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव ‘चुरा लिया’, क्योंकि मतदाता सूची में 40 लाख मतदाताओं के नाम जोड़े गये थे. सीजेपी ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई समेत निम्नलिखित 5 मांगें रखीं. ये भी पढ़ें: Jantar Mantar Protest : ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहीं नेहा बोरा हिरासत में, घसीटकर ले गई दिल्ली पुलिस; देखें Video सीजेपी की 5 प्रमुख मांगें ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए. जनवरी 2025 की मतदाता सूची को फिर से लागू करो. SIR विवाद खत्म होने तक देश में कहीं न हो चुनाव. SIR की जांच के लिए कमेटी बने. मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए 2023 का कानून खत्म कर नया कानून बनाया जाये. चुनाव आयोग पर सीजेपी के आरोप 2 वर्षों में 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिये गये. 2024 में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 97 करोड़ थी. 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए और ‘इंडिया’ गठबंधन के बीच वोट का अंतर 2 प्रतिशत था. चुनाव से 15 दिन पहले ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति ‘अंतर बढ़ाने’ के लिए की गयी. ये भी पढ़ें: ‘ज्ञानेश ब्रो, जस्ट रिजाइन’ चुनाव से जुड़े सवालों की तख्तियां लेकर पहुंचे प्रदर्शनकारी, देखें तस्वीरें 5 ज्वलंत सवाल एसआईआर के मुद्दे पर ममता बनर्जी, कांग्रेस और अब कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के बाद सवाल है कि यह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की लड़ाई है या मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता का सवाल. SIR से जुड़े इन 5 सवालों के जवाब हैं जरूरी. क्या SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी? एसआईआर के दौरान कितने मतदाताओं के नाम काटे गये. किन वजहों से उनके नाम वोटर लिस्ट से हटाये गये. कितने लोगों के नाम दोबारा जोड़े गये. कितने मामलों में आपत्तियां आयीं, इस बारे में चुनाव आयोग की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए. पश्चिम बंगाल के संदर्भ में बात करें, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कितने अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिये थे, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाये गये. चुनाव आयोग के भीतर उठी आपत्तियों पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण क्यों नहीं? इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियों का जिक्र है. हालांकि, इस पर चुनाव आयोग की ओर से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा गया है कि आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से होते हैं. यह भी कहा गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने सचिव को जो चिट्ठी भेजी है, वह एक अधिकारी से संबंधित है, न कि चुनाव आयोग के कामकाज से. हालांकि, इस पर आधिकारिक रूप से अब तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त या दोनों चुनाव आयुक्तों ने कोई बयान नहीं दिया है. क्या मतदाता सूची के डिजिटल सिस्टम और डेटा एक्सेस को लेकर उठे सवालों का स्वतंत्र ऑडिट होना चाहिए? चुनाव आयोग के केंद्रीयकृत सॉफ्टवेयर, डेटा तक पहुंच और संशोधन की प्रक्रिया की पारदर्शिता के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए, ताकि किसी संदेह की कोई गुंजाइश न रहे. CEC के इस्तीफे की मांग के पीछे CJP के पास कौन-से ठोस दस्तावेजी सबूत हैं? कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अभी नेतृत्वक आरोप लगा रही है. उसे यह बताना चाहिए कि आरोपों से अलग, उसके पास कौन-से रिकॉर्ड हैं, जिनके आधार पर वह मुख्य निर्वाचन आयुक्त की जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है. अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तो CJP का अगला कदम क्या होगा और आंदोलन की कानूनी सीमा क्या होगी? सीजेपी ने देशभर में प्रदर्शन और दिल्ली में जंतर-मंतर पर आंदोलन करने का ऐलान किया है. ऐसे आंदोलन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन, पुलिस अनुमति और कानून-व्यवस्था को लेकर उसकी क्या रणनीति है, इसके बारे में भी जनता को बताना चाहिए. ये भी पढ़ें: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन में दीपके को याद आया पीएम मोदी का फैशन सेंस और स्क्रीन केयर The post CJP का आंदोलन: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की लड़ाई या मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता का सवाल? SIR से जुड़े 5 सवालों के जवाब जरूरी appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

क्या आपके RO का TDS भी 25 से कम है? जानें कितना TDS वाला पानी है सेहत के लिए सुरक्षित

Ideal TDS Level: अगर आपके घर में RO लगा है, तो आपने कभी न कभी उसके पानी का TDS जरूर चेक कराया होगा. मीटर पर 20, 50, 100 या 300 जैसी रीडिंग देखकर मन में सवाल आया होगा कि आखिर इनमें से कौन-सा TDS पीने के पानी के लिए सही है. कम TDS देखकर जहां कुछ लोग पानी को ज्यादा साफ मान लेते हैं, वहीं कुछ लोगों को डर लगता है कि कहीं पानी से जरूरी मिनरल्स तो कम नहीं हो गए. ऐसे में सिर्फ TDS की संख्या देखकर फैसला करना सही नहीं है. तो आखिर पीने के पानी का TDS कितना होना चाहिए और बहुत कम TDS वाला पानी सेहत के लिए कैसा है. लेकिन सबसे पहले जानते हैं कि आखिर यह TDS क्या बला है. TDS क्या है? TDS यानी Total Dissolved Solids पानी में घुले हुए ठोस पदार्थों की कुल मात्रा को दर्शाता है. इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, पोटैशियम और कई तरह के खनिज लवण शामिल हो सकते हैं. हालांकि, TDS की रीडिंग यह नहीं बताती कि पानी में कौन-सा पदार्थ कितनी मात्रा में मौजूद है और पानी में बैक्टीरिया, दूसरे सूक्ष्मजीव या कुछ हानिकारक रासायनिक तत्व मौजूद हैं या नहीं, यह जानने के लिए अलग जांच की जरूरत होती है. 25 से कम TDS वाला पानी कितना सुरक्षित है? अगर आपके RO से निकलने वाले पानी का TDS 25 mg/L से कम है, तो यह रीडिंग काफी कम मानी जाती है. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में ISIC Multispeciality Hospital के डॉ. उदित गुप्ता ने कहा कि 25 mg/L से कम TDS वाला पानी बहुत कम मिनरल्स वाला हो सकता है और अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक कम मिनरल्स वाला पानी पीता है, तो उसे अपने खाने में कैल्शियम और मैग्नीशियम की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करनी चाहिए. ज्यादा TDS होने पर क्या परेशानी हो सकती है? पानी में TDS बहुत ज्यादा होने पर उसका स्वाद बदल सकता है. पानी में खारापन या अलग तरह का स्वाद महसूस हो सकता है. ज्यादा TDS के कारण पाइप, हीटर और दूसरे घरेलू उपकरणों में मिनरल्स की परत जमने की समस्या भी बढ़ सकती है. Ideal TDS Level: TDS कैसे चेक करें? घर पर पानी का TDS जानने के लिए डिजिटल TDS मीटर का इस्तेमाल किया जा सकता है. एक साफ गिलास में पानी भरें. डिजिटल TDS मीटर को पानी में डालें. कुछ सेकंड रुककर स्क्रीन पर दिखाई देने वाली रीडिंग देखें. रीडिंग आमतौर पर ppm या mg/L में दिखाई देती है. अलग-अलग पानी के सैंपल की तुलना करते समय मीटर को साफ रखना जरूरी है. सिर्फ TDS देखकर पानी की सुरक्षा तय न करें अगर घर के पानी का TDS बहुत ज्यादा या बहुत कम आ रहा है, तो सिर्फ उसी नंबर के आधार पर फैसला न लें. पानी की सुरक्षा के लिए माइक्रोबायोलॉजिकल और केमिकल जांच भी जरूरी हो सकती है. खासकर अगर पानी बोरवेल, हैंडपंप या किसी स्थानीय स्रोत से आता है, तो समय-समय पर पानी की लैब टेस्टिंग कराना बेहतर रहता है. वहीं, RO का इस्तेमाल करने वाले लोगों को उसकी नियमित सर्विसिंग और फिल्टर की स्थिति का भी खासा ध्यान रखना चाहिए. यह भी पढ़ें: क्या आप भी खा रहे हैं नकली या खराब अंडा? FSSAI के इस आसान पानी वाले टेस्ट से मिनटों में पहचानें The post क्या आपके RO का TDS भी 25 से कम है? जानें कितना TDS वाला पानी है सेहत के लिए सुरक्षित appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Sunderkand Path: शनिवार को सुंदरकांड पाठ क्यों है खास? जानें पूजा विधि, लाभ और धार्मिक मान्यताएं

Sunderkand Path: शनिवार का दिन हनुमान जी और शनिदेव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है. इस दिन कई भक्त हनुमान जी की आराधना के साथ सुंदरकांड का पाठ करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि सुंदरकांड का पाठ मन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का भाव पैदा करता है. सुंदरकांड में हनुमान जी के पराक्रम, भक्ति, बुद्धि और भगवान श्रीराम के प्रति उनके समर्पण का वर्णन मिलता है. ऐसे में शनिवार को श्रद्धा के साथ सुंदरकांड का पाठ करना भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है. शनिवार को सुंदरकांड पाठ की पूजा विधि सुंदरकांड का पाठ करने से पहले सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़ककर उसे स्वच्छ कर लें. इसके बाद हनुमान जी की तस्वीर या प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं. चाहें तो पूजा स्थान पर भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की तस्वीर भी रख सकते हैं. सबसे पहले भगवान गणेश, श्रीराम और हनुमान जी का स्मरण करें. इसके बाद हनुमान जी को फूल, सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित किया जा सकता है. हालांकि, पूजा में सभी सामग्री होना जरूरी नहीं है. श्रद्धा और स्वच्छ मन से की गई पूजा को ही प्रमुख माना जाता है. इसके बाद शांत मन से सुंदरकांड का पाठ शुरू करें. पाठ के दौरान हनुमान जी के समुद्र पार करने, माता सीता की खोज करने, लंका पहुंचने और श्रीराम का संदेश देने जैसे प्रसंगों को ध्यान से पढ़ें और सुनें. सुंदरकांड केवल हनुमान जी के पराक्रम की कथा नहीं, बल्कि विश्वास, भक्ति और साहस का भी संदेश देता है. सुंदरकांड पूरा होने के बाद हनुमान चालीसा का पाठ करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है. इसके बाद हनुमान जी को गुड़-चना, फल या अपनी श्रद्धा के अनुसार सात्विक भोग लगाएं. अंत में हनुमान जी की आरती करें और भगवान श्रीराम व हनुमान जी से सुख-शांति और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें. सुंदरकांड पाठ को लेकर क्या कहते हैं पंडित जी? पंडित अमित झा बताते हैं कि शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करने से शनि, राहु, केतु और मंगल जैसे क्रूर ग्रहों का प्रभाव शांत होता है. इससे जीवन की सभी विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और शारीरिक, पारिवारिक, आर्थिक तथा सामाजिक समस्याओं पर विजय प्राप्त होती है. सुंदरकांड का पाठ मनोकामना सिद्धि और इच्छाओं की पूर्ति के लिए भी किया जाता है. सुंदरकांड में हनुमान जी की वीरता और पराक्रम का वर्णन है. हनुमान जी की प्रशंसा और गुणगान करने से वे प्रसन्न होते हैं और मनचाहा वर प्रदान करते हैं. सुंदरकांड का मुख्य आध्यात्मिक संदेश यह है कि जैसे इसका नाम ‘सुंदर’ है, वैसा ही यह जीवन को मंगलमय और आनंदमय बनाता है. यह पाठ मनुष्य के जीवन से सभी विघ्न-बाधाओं को समाप्त कर एक कष्टमुक्त और सुखद जीवन जीने की प्रेरणा देता है. सुंदरकांड पाठ के क्या लाभ हैं? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुंदरकांड का पाठ करने से व्यक्ति को मानसिक मजबूती और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस मिलता है. हनुमान जी के चरित्र से भक्तों को यह प्रेरणा मिलती है कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी लक्ष्य से विचलित नहीं होना चाहिए. नियमित रूप से धार्मिक पाठ करने से मन को एकाग्र करने और सकारात्मक भाव बनाए रखने में भी मदद मिलती है. भक्त सुंदरकांड का पाठ विशेष रूप से संकट या कठिन समय में आध्यात्मिक सहारे के रूप में करते हैं. शनिवार को ही सुंदरकांड पढ़ना कितना जरूरी है? शनिवार को हनुमान जी की पूजा करने की परंपरा काफी प्रचलित है. इसी वजह से इस दिन सुंदरकांड, हनुमान चालीसा और राम नाम का जाप करने वाले भक्तों की संख्या भी अधिक होती है. कुछ लोग शनिवार की सुबह गंगाजल में अक्षत और काला तिल डालकर ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र के जाप के साथ शनिदेव को जल अर्पित करते हैं और शाम को शनिदेव का स्मरण कर सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं. साथ ही जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, काले तिल, उड़द या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करते हैं. सुंदरकांड का सार: भक्ति के साथ जीवन में उतारें हनुमान जी के गुण सुंदरकांड का पाठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि हनुमान जी के साहस, भक्ति, समर्पण और सेवा के भाव को समझने का भी एक माध्यम है. शनिवार को श्रद्धा के साथ सुंदरकांड का पाठ करने के बाद यदि हम हनुमान जी के इन्हीं गुणों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें, तो यही इस साधना का सबसे सुंदर और सार्थक भाव होगा. इसलिए पाठ के अंत में सिर्फ अपनी मनोकामना ही नहीं, बल्कि सही मार्ग पर चलने, कठिन समय में धैर्य रखने और दूसरों की सेवा करने की शक्ति भी मांगें. यही हनुमान भक्ति का वास्तविक संदेश माना जाता है. The post Sunderkand Path: शनिवार को सुंदरकांड पाठ क्यों है खास? जानें पूजा विधि, लाभ और धार्मिक मान्यताएं appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Mahindra Thar Roxx vs Jeep Wrangler: देखने में फर्क सिर्फ ‘उन्नीस-बीस’ का, फिर भी कीमत में ₹50 लाख का अंतर क्यों?

हिंदुस्तानीय सड़कों पर जब Mahindra Thar Roxx और Jeep Wrangler Rubicon आमने-सामने खड़ी होती हैं, तो पहली नजर में दोनों के बीच फर्क सिर्फ ‘उन्नीस-बीस’ का ही लगता है. चौकोर बॉक्सी डिजाइन, ऊंचा और सीधा बोनट, गोल हेडलैम्प्स और पीछे टंगा स्पेयर व्हील- दोनों ही गाड़ियों को एक जैसा रफ-एंड-टफ और मस्कुलर 4×4 लुक देते हैं. लेकिन जैसे ही ध्यान इनकी कीमत पर जाता है, तो बड़ा झटका लगता है. महिंद्रा थार रॉक्स के टॉप 4×4 मॉडल की एक्स-शोरूम कीमत जहां लगभग ₹23.52 लाख है, वहीं जीप रैंगलर रुबिकॉन की कीमत करीब ₹70.80 लाख तक जाती है. यानी देखने में जो फर्क केवल उन्नीस-बीस का लगता है, उसकी कीमत में पूरे ₹47 से ₹50 लाख का भारी अंतर है. आइए समझते हैं कि डिजाइन में इतनी समानता होने के बावजूद जीप इतनी महंगी क्यों है और दोनों में असली फर्क कहां छुपा है. 1. डिजाइन : देखने में तो दोनों जुड़वां लगती हैं! दूर से देखने पर दोनों का सिल्हूट एक जैसा दिखता है, लेकिन इंजीनियरिंग और फिनिशिंग का फर्क साफ दिखता है: Jeep Wrangler: जीप को पूरी तरह से ओपन-एयर गाड़ी में बदला जा सकता है. इसके दरवाजे, छत (हार्डटॉप) और यहां तक कि सामने की विंडशील्ड को भी पूरी तरह से हटाया जा सकता है. Thar Roxx: महिंद्रा ने इसमें दरवाजे या छत हटाने का विकल्प तो नहीं दिया है, लेकिन हिंदुस्तानीय ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा पैनोरमिक सनरूफ दे दिया है. 2. इंजन और पावर : टर्बो पेट्रोल बनाम डीजल का मुकाबला Jeep Wrangler Rubicon: इसमें 2.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन मिलता है, जो 270 hp की पावर और 400 Nm का टॉर्क जनरेट करता है. इसके साथ 8-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स आता है, जो काफी तेज और स्मूथ है. Thar Roxx: इसमें 2.2-लीटर mHawk डीजल इंजन दिया गया है, जो 175 hp की पावर और 370 Nm का टॉर्क देता है. पावर के मामले में यह जीप से थोड़ी पीछे जरूर है, लेकिन इसका डीजल इंजन कम स्पीड पर जबरदस्त खिंचाव (टॉर्क) देता है, जो खराब रास्तों पर बहुत काम आता है. 3. ऑफ-रोड हार्डवेयर : यहीं छुपा है ₹50 लाख के अंतर का राज दोनों के लुक में फर्क भले ही उन्नीस-बीस का हो, लेकिन गाड़ी के नीचे लगे लोहे और ऑफ-रोड हार्डवेयर में जमीन-आसमान का अंतर है: Dana 44 हेवी-ड्यूटी एक्सल्स: जीप में बेहद मजबूत ‘डाना 44’ एक्सल दिए गए हैं. ये बहुत भारी झटके और बड़े पत्थरों पर गाड़ी कूदने के बावजूद आसानी से नहीं टूटते. 4:1 क्रॉल रेशियो (Rock-Trac): जीप का स्पेशल ट्रांसफर केस बहुत धीमी रफ्तार में भी पहियों को हैरतअंगेज ताकत देता है, जिससे गाड़ी सीधी और पथरीली चढ़ाइयों पर बिना फिसले आसानी से रेंगती हुई चढ़ जाती है. इलेक्ट्रॉनिक स्वे-बार डिस्कनेक्ट: एक बटन दबाते ही जीप के अगले सस्पेंशन का खिंचाव काफी बढ़ जाता है, जिससे उबड़-खाबड़ पत्थरों पर भी चारों पहिये जमीन से टिके रहते हैं. थार रॉक्स में भी इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग डिफ्रेंशियल, टेरेन मोड्स और महिंद्रा का 4XPLOR सिस्टम मिलता है. यह सामान्य से लेकर मुश्किल ऑफ-रोडिंग के लिए पूरी तरह सक्षम है, लेकिन जीप को दुनिया की सबसे खौफनाक और जानलेवा ऑफ-रोड ट्रेल पार करने के हिसाब से डिजाइन किया गया है. 4. केबिन और आराम की बात Thar Roxx: महिंद्रा ने इसके केबिन को रोजमर्रा की ड्राइविंग के लिए काफी आरामदायक और प्रीमियम बनाया है. इसमें 10.25-इंच की डुअल स्क्रीन, वेंटिलेटेड सीट्स, Harman Kardon साउंड सिस्टम, 360-डिग्री कैमरा और ADAS जैसे फीचर्स दिए गए हैं. Jeep Wrangler: इसमें लेदर सीट्स और Alpine साउंड सिस्टम के साथ-साथ ‘वॉश-आउट’ केबिन मिलता है. यानी अगर ऑफ-रोडिंग के दौरान केबिन में कीचड़ भर जाए, तो इसे सीधे पानी से धोया जा सकता है और नीचे लगे ड्रेन प्लग से पानी बाहर निकल जाता है. किस खरीदार के लिए कौन सी गाड़ी रहेगी सही? Mahindra Thar Roxx: अगर आपको रोज के इस्तेमाल, फैमिली के साथ सफर और वीकेंड पर ऑफ-रोडिंग के लिए एक दमदार और आधुनिक फीचर्स वाली SUV चाहिए, तो थार रॉक्स एक बहुत ही समझदारी भरा और किफायती विकल्प है. यह एक-तिहाई कीमत में पूरा भौकाल देती है. Jeep Wrangler Rubicon: अगर आपके पास बजट की कोई कमी नहीं है और आप बिना किसी समझौते के बेहद खतरनाक रास्तों पर गाड़ी चलाना चाहते हैं, तो जीप रैंगलर एक लीजेंडरी ऑफ-रोड मशीन के रूप में सबसे बेहतरीन पसंद है. ये भी पढ़ें: Bolero vs G-Wagon: महिंद्रा की SUV की क्यों होती है मर्सिडीज से तुलना? दिखने में एक जैसी, पर एक-दूसरे से कितनी अलग? ये भी पढ़ें: Thar Roxx बनाम Jimny बनाम Gurkha 5-डोर: असली ऑफ-रोडर कौन, फैमिली के लिए कौन परफेक्ट? Mahindra Thar Roxx vs Jeep Wrangler: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) {“type”:”faq”,”question”:”1. Mahindra Thar Roxx vs Jeep Wrangler: दोनों गाड़ियों की कीमत में कितना अंतर है?”,”answer”:”Thar Roxx के 4×4 मॉडल की एक्स-शोरूम कीमत लगभग ₹23.52 लाख है, जबकि Jeep Wrangler Rubicon की कीमत करीब ₹70.80 लाख है. दोनों में लगभग ₹47.28 लाख का अंतर है.”}{“type”:”faq”,”question”:”2. क्या Thar Roxx हर जगह जीप का मुकाबला कर सकती है?”,”answer”:”आम रास्तों, कीचड़, पानी और पहाड़ियों पर थार रॉक्स बहुत बढ़िया प्रदर्शन करती है. लेकिन बहुत ज्यादा मुश्किल और पथरीले ऑफ-रोड ट्रैक पर जीप का हेवी-ड्यूटी हार्डवेयर ज्यादा टिकाऊ और सक्षम साबित होता है.”}{“type”:”faq”,”question”:”3. डेली ड्राइविंग के लिए कौन सी गाड़ी ज्यादा प्रैक्टिकल है?”,”answer”:”डेली ड्राइविंग के लिए Thar Roxx ज्यादा आरामदायक है, क्योंकि इसमें सॉफ्ट सस्पेंशन, डीजल इंजन का ऑप्शन, सनरूफ और डेली यूज के हिसाब से मॉडर्न फीचर्स मिलते हैं.”} The post Mahindra Thar Roxx vs Jeep Wrangler: देखने में फर्क सिर्फ ‘उन्नीस-बीस’ का, फिर भी कीमत में ₹50 लाख का अंतर क्यों? appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

5G के जमाने में फिर लौटे 4G फोन, आखिर क्यों बदल गया मोबाइल बाजार?

कुछ साल पहले तक लग रहा था कि 5G आने के बाद 4G फोन धीरे-धीरे बाजार से गायब हो जाएंगे. कंपनियां लगातार नए 5G फोन लॉन्च कर रही थीं और ग्राहकों को भी लगने लगा था कि अब नया फोन लेना है तो 5G ही लेना चाहिए. लेकिन 2026 में कहानी थोड़ी पलट गई है. हिंदुस्तान में एक बार फिर 4G स्मार्टफोन की मांग बढ़ रही है. खासकर 10,000 से 15,000 रुपये वाले बजट में ग्राहक 5G के बजाय 4G फोन की तरफ देख रहे हैं. इसकी वजह सिर्फ ग्राहकों की पसंद नहीं है. इसके पीछे मोबाइल फोन की बढ़ती कीमत, मेमोरी चिप का महंगा होना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की बढ़ती मांग का बड़ा स्पोर्ट्स है. दिलचस्प बात ये है कि कंपनियां भी अब इस ट्रेंड को समझ चुकी हैं. यही वजह है कि 4G फोन सिर्फ पुराने मॉडल के रूप में नहीं, बल्कि नए मॉडल के तौर पर भी बाजार में वापस आ रहे हैं. 2026 में 4G फोन की बिक्री बढ़ने की वजह क्या है? मार्केट रिसर्च कंपनी काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुमान के मुताबिक, हिंदुस्तान में 2026 के दौरान 4G स्मार्टफोन की शिपमेंट में सालाना आधार पर 3 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है. अब इस आंकड़े को समझिए. 2025 में हिंदुस्तान में 4G स्मार्टफोन की शिपमेंट करीब 48 फीसदी गिर गई थी. यानी एक साल पहले तक 4G तेजी से पीछे जा रहा था. लेकिन 2026 में इसकी मांग फिर बढ़ती दिख रही है. अनुमान है कि हिंदुस्तानीय स्मार्टफोन बाजार में 4G फोन की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 13 फीसदी हो सकती है. इसकी एक बड़ी वजह 10,000 से 20,000 रुपये का सेगमेंट है. 2025 में इस कीमत वाले सेगमेंट में सिर्फ करीब 2 ब्रांड 4G मॉडल बेच रहे थे. 2026 में ऐसे ब्रांड्स की संख्या बढ़कर 12 हो गई है. यानी कंपनियां खुद भी मान रही हैं कि ऐसे ग्राहकों की कमी नहीं है जो कम कीमत में अच्छा फोन चाहते हैं, भले ही उसमें 5G न हो. असली स्पोर्ट्स एआई और मेमोरी चिप का है अब सवाल है कि आखिर 5G फोन महंगे क्यों पड़ रहे हैं? इसके पीछे एआई का भी बड़ा हाथ है. दुनिया भर में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. एआई चलाने वाले बड़े डेटा सेंटर और सर्वर बड़ी मात्रा में मेमोरी चिप का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में मेमोरी बनाने वाली कंपनियों की उत्पादन क्षमता का बड़ा हिस्सा एआई और सर्वर से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में जा रहा है. इसका असर स्मार्टफोन पर भी पड़ा है. फोन में इस्तेमाल होने वाली डीआरएएम और एनएएनडी फ्लैश स्टोरेज जैसी मेमोरी की कीमत तेजी से बढ़ी है. रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 के बाद से स्मार्टफोन मेमोरी की कीमतों में करीब चार गुना तक बढ़ोतरी हुई है. अब कंपनियों के लिए मुश्किल ये है कि फोन की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ाएं तो ग्राहक महंगा फोन नहीं खरीदेंगे और कीमत कम रखें तो कंपनी का मुनाफा दब जाएगा. यही वजह है कि 15,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन सेगमेंट पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है. 2026 की दूसरी तिमाही में इस सेगमेंट की स्मार्टफोन शिपमेंट में करीब 45 फीसदी गिरावट दर्ज होने की बात कही गई है. 5G के बजाय 4G फोन में ज्यादा फीचर्स देने की कोशिश मान लीजिए किसी कंपनी को 10,000 से 15,000 रुपये में फोन बेचना है. अगर वह फोन 5G वाला बनाती है तो उसे 5G चिपसेट के साथ रैम, स्टोरेज और बाकी हार्डवेयर पर भी खर्च करना होगा. ऊपर से मेमोरी की कीमत पहले ही बढ़ी हुई है. ऐसे में कंपनी के सामने दो रास्ते हैं. या तो फोन की कीमत बढ़ाए या फिर 5G हटाकर उसी बजट में बाकी हार्डवेयर बेहतर करे. कई कंपनियां दूसरा रास्ता चुन रही हैं. यानी 5G की जगह 4G कनेक्टिविटी, लेकिन साथ में बड़ी बैटरी, बेहतर डिस्प्ले और ज्यादा स्टोरेज. और यहां एक और बात समझने वाली है. हर ग्राहक को 5G की जरूरत भी नहीं है. बहुत से लोग फोन का इस्तेमाल कॉलिंग, व्हॉट्सऐप, सोशल मीडिया, यूपीआई पेमेंट, यूट्यूब और दूसरी रोजमर्रा की चीजों के लिए करते हैं. इन कामों के लिए 4G नेटवर्क अभी भी काफी है. ऐसे में अगर 5G के लिए 2-3 हजार रुपये ज्यादा देने पड़ें और उसी पैसे में 4G फोन में बेहतर डिस्प्ले या ज्यादा स्टोरेज मिल रहा हो, तो कुछ ग्राहक 4G को चुन रहे हैं. क्या 4G फोन की वापसी लंबे समय तक रहेगी? ये सबसे दिलचस्प सवाल है. काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुमान के मुताबिक, 2027 तक हिंदुस्तानीय स्मार्टफोन बाजार में 4G फोन की हिस्सेदारी करीब 15 फीसदी तक पहुंच सकती है. इसका मतलब ये नहीं है कि 4G फिर से 5G को पीछे छोड़ देगा. ऐसा भी नहीं है कि 5G फोन की मांग खत्म हो रही है. असल कहानी बजट सेगमेंट की है. जब तक मेमोरी और दूसरे सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स की कीमतों पर दबाव बना रहेगा, कंपनियों के लिए कम कीमत में 5G फोन बनाना चुनौती बना रह सकता है. आईडीसी की रिपोर्ट में भी मेमोरी की बढ़ती लागत का असर हिंदुस्तानीय स्मार्टफोन बाजार पर दिखने की बात कही गई है. औसत स्मार्टफोन बिक्री कीमत यानी एएसपी भी काफी ऊपर पहुंच गई है. ऐसे माहौल में 4G फोन कंपनियों के लिए भी एक रास्ता है और कम बजट वाले ग्राहकों के लिए भी. यानी 5G खत्म नहीं हो रहा है. बस 4G ने एक बार फिर याद दिला दिया है कि मोबाइल बाजार में पुरानी तकनीक भी तब लौट सकती है, जब उसकी कीमत और जरूरत दोनों का हिसाब ग्राहकों के पक्ष में बैठ जाए. ये भी पढ़ें: Redmi 17C 5G हिंदुस्तान में हुआ लॉन्च: 6,000mAh की दमदार बैटरी और 50MP कैमरे से लैस है यह बजट स्मार्टफोन, जानें कीमत और फीचर्स ये भी पढ़ें: 6000mAh बैटरी, 50MP कैमरा और 6 साल का अपडेट… Samsung ने ₹18,499 में उतारा नया फोन 4G vs 5G फोन: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल {“type”:”faq”,”question”:”1. क्या 2026 में 4G फोन की बिक्री बढ़ रही है?”,”answer”:”हां. काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुमान के मुताबिक, हिंदुस्तान में 2026 के दौरान 4G स्मार्टफोन शिपमेंट में करीब 3 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है. 4G की बाजार हिस्सेदारी करीब 13 फीसदी रहने का अनुमान

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top