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October 3, 2026

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नेहा बोरा को प्रदर्शन से दूर रखना चाहतीं थी मां, फिर कैसे बदले लीला बोरा के विचार? जानें पूरी कहानी

नेहा ने एक पॉडकास्ट में बताया है कि उनके नेतृत्वक विचारों को लेकर घर में लंबे समय से मतभेद रहे हैं. मां भी उनके आंदोलन और अनशन के फैसले से खुश नहीं थीं और उन्हें प्रदर्शन से दूर रहने के लिए समझाती थीं. जब नेहा जंतर-मंतर पर अनशन कर रही थीं, तब उनकी मां को शुरुआत में इसकी जानकारी नहीं थी. जानकारी मिलने के बाद वह बरेली से दिल्ली पहुंचीं और जंतर-मंतर पर बेटी से मिलीं. बता दें कि उनकी मां गृहिणी हैं और उनका परिवार बरेली में रहता है. नेहा बोरा ने खुद एक पॉडकास्ट में बताया कि अनशन के 22वें दिन उसे बताया गया कि कोई स्त्री उनसे मिलने आई है और खुद को उनकी मां बता रही है. नेतृत्वक मतभेद होने के कारण पहले नेहा को यकीन नहीं हुआ. जिसके बाद बताया गया कि वह बरेली से आईं है. बरेली का नाम सुनकर नेहा को यकीन हुआ कि वह सच में उनकी मां हो सकती हैं. फिर जब नेहा उस स्त्री से मिली तो वह मां ही थीं. जंतर मंतर पहुंच मां ने गोद में रखा बेटी का सिर जंतर-मंतर पहुंचकर मां लीला बोरा ने अपनी बेटी को उस हालत में देखा, जिसमें वह लगातार भूख हड़ताल कर रही थीं. नेहा के मुताबिक मां ने उनकी पीठ की हड्डियां देखी, उनका सिर अपनी गोद में रखा और उनकी मालिश करने लगीं. यही वह पल था, जब कई साल से चले आ रहे नेतृत्वक मतभेद कुछ देर के लिए पीछे छूट गए. नेहा ने बाद में इस मुलाकात को अपने और माता-पिता के रिश्ते में एक बड़े बदलाव के तौर पर बताया. नेहा के मुताबिक, उनकी मां ने जंतर-मंतर पर मौजूद दूसरे छात्रों और अनशन कर रहे लोगों को भी देखा. अगले दिन वहां हुए पुलिस एक्शन की घटनाओं की वह प्रत्यक्षदर्शी बनीं. नेहा ने बताया कि उनकी मां ने उन छात्रों को भी देखा, जिनके साथ वह आंदोलन कर रही थीं और जो जमीन पर सो रहे थे. पहले जिन लोगों से दूर रहने के लिए मां बेटी को समझाती थीं, अब वह उन्हें करीब से देख रही थीं. शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद दी बधाई इसके बाद इस कहानी में एक और बदलाव आया. जब तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की समाचार आई, तो नेहा की मां ने उन्हें फोन किया और अपने साथियों को बधाई देने के लिए कहा. नेहा ने इसे अपने आंदोलन का ही नहीं, बल्कि अपने परिवार के भीतर आए बदलाव का भी हिस्सा माना. ये भी पढ़ें: CJP Protest: जंतर-मंतर पर स्पाइडर वुमन ने रोक दी पुलिस की गाड़ी, देखें वायरल वीडियो नेहा के पिता हिंदुस्तानीय सेना में रह चुके हैं. नेहा ने बताया था कि शुरुआत में नेतृत्वक मतभेद घर की बातचीत और डाइनिंग टेबल तक ही सीमित थे. लेकिन समय के साथ ये मतभेद बढ़े और उनके शब्दों में परिवार के भीतर एक तरह का फ्रैकचर (fracture) पैदा हो गया. लेकिन मानो जंतर मंतर के प्रोटेस्ट ने उनके मतभेद दूर कर दिए. CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर अब प्रदर्शन कर रही हैं नेहा बोरा नेहा बोरा JNU की PhD स्कॉलर और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. 2026 में जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन के दौरान वह 23 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठीं और इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनीं. इसके बाद झारखंड समेत दूसरे राज्यों में छात्र और युवा आंदोलनों में भी एक्टिव हैं. फिलहाल नेहा बोरा इन दिनों दिल्ली में SIR यानी मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर प्रदर्शन कर रही हैं. प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. The post नेहा बोरा को प्रदर्शन से दूर रखना चाहतीं थी मां, फिर कैसे बदले लीला बोरा के विचार? जानें पूरी कहानी appeared first on Naya Vichar.

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IND vs PAK Final LIVE Update: संजू के रूप में गिरा भारत का दूसरा विकेट, अभिषेक और श्रैयस अय्यर क्रीज पर

एशियन गेम्स 2026 के मेंस क्रिकेट का फाइनल मैच हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच स्पोर्ट्सा जाएगा. हमारे साथ लाइव ब्लॉग में जुड़कर पढ़े मैच से जुड़ी पल-पल की लाइव अपडेट. विमेंस टीम पहले ही श्रीलंका को हराकर गोल्ड मेडल जीत चुकी है. अब हिंदुस्तानीय पुरुष टीम से गोल्ड मेडल आने की उम्मीद है. The post IND vs PAK Final LIVE Update: संजू के रूप में गिरा हिंदुस्तान का दूसरा विकेट, अभिषेक और श्रैयस अय्यर क्रीज पर appeared first on Naya Vichar.

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‘रिम्स में डिस्काउंट के नाम पर कैंसर मरीजों से लूट’: 30% छूट का झांसा देकर 4 गुना ज्यादा दाम, प्रभात खबर के स्टिंग में खुलासा

रांची: झारखंड के सबसे बड़े प्रशासनी मेडिकल संस्थान ‘रिम्स’ (RIMS) के कैंसर वार्ड में बेबस और लाचार मरीजों की जेब पर सरेआम डाका डाला जा रहा है. निजी अस्पतालों के बाद अब राज्य के प्रीमियर प्रशासनी अस्पताल रिम्स में भी कैंसर रोधी दवाइयों पर कमीशनखोरी का बड़ा स्पोर्ट्स सामने आया है. मैक्सिमम रिटेल प्राइस (MRP) पर 30 से 40 प्रतिशत डिस्काउंट का झांसा देकर मरीजों से वास्तविक खरीद दर से दो से चार गुना अधिक कीमत वसूली जा रही है. इस अवैध नेटवर्क को चलाने के लिए दवा कंपनियों ने बाकायदा रिम्स के कैंसर विंग में अपने प्रतिनिधि (MR) तैनात कर रखे हैं, जो सीधे डॉक्टरों के साथ मिलकर दवाओं की कीमतें और अपना कमीशन तय करते हैं. नया विचार की पड़ताल : आइसीयू और वार्ड तक MR की सीधी पहुंच सच्चाई का पता लगाने के लिए नया विचार संवाददाता ने कैंसर वार्ड में एक मरीज के परिजन का सहारा लेकर पड़ताल शुरू की. वार्ड में भर्ती मरीजों के टेबल पर मिली दवाओं की वास्तविक कीमत और मरीजों से ऐंठी गई रकम में बड़ा अंतर मिला, पड़ताल के दौरान जब संवाददाता ने दवा प्रतिनिधि को कॉल किया, तो उसने साफ कहा, “दवा तो मिल जाएगी, एमआरपी पर 30-40% छूट देंगे. डॉक्टर साहब ने ही इतने में कीमत तय की है, न इससे कम करेंगे और न ज्यादा लेंगे.” रोजाना 4 से 5 मरीजों को दवाइयां देकर प्रतिनिधि 10,000 से 12,000 रुपये का अवैध कमीशन आपस में बांट रहे हैं. इतना ही नहीं, मरीजों को कोई वैध बिल न देकर फर्जी तरीके से किसी स्टॉकिस्ट/दुकान के नाम से रसीद थमा दी जाती है. ये भी पढ़ें: आज रांची का मौसम रहेगा सुहाना, 29 डिग्री तक पहुंचेगा पारा; जानें पूरे झारखंड का हाल ‘कर्ज लेकर खरीद रहे दवा’: चरवा उरांव का छलका दर्द रिम्स कैंसर वार्ड में भर्ती बेड़ो निवासी चरवा उरांव ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि उन्हें 16,500 रुपये में दो वायल इंजेक्शन दिए गए, जिन्हें दवा प्रतिनिधि ने सीधे वार्ड के पास लाकर दिया. चरवा ने बताया कि उन्होंने किसी तरह मजदूरी व कर्ज का इंतजाम कर ये पैसे दिए हैं, जबकि डॉक्टरों व कंपनियों के लिए उस दवा की असल थोक कीमत महज 3,800 से 4,000 रुपये के बीच है. रिम्स जैसे प्रशासनी अस्पताल में गरीब मरीजों से इस तरह की खुली लूट प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है. रिम्स कैंसर वार्ड में दवाओं की वसूली का सच दवा का नाम / कंपोजिशन वास्तविक खरीद कीमत (₹) मरीजों से ली गई कीमत (₹) दवा पर छपी MRP (₹) डेनोसुमैब (60 मिग्रा/मिली) 3,800–4,000 8,500 16,401.55 ऑक्सालीप्लेटिन (100 मिग्रा) 1,500–1,600 3,700 5,354.00 पारासिटामोल इंजेक्शन 40–50 350 462.66 ये भी पढ़ें: 500, 1000 या 2000 रुपये में दुर्गा पूजा की कितनी शॉपिंग होगी? रांची बाजार का पूरा हिसाब The post ‘रिम्स में डिस्काउंट के नाम पर कैंसर मरीजों से लूट’: 30% छूट का झांसा देकर 4 गुना ज्यादा दाम, नया विचार के स्टिंग में खुलासा appeared first on Naya Vichar.

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वियतनाम से आज झारखंड पहुंचेंगे राजा और विनय के शव, सड़क हादसे में गई थी जान

रांची. वियतनाम में सड़क हादसे में रांची के योग शिक्षक राजा कुमार वर्मा और जमशेदपुर के विनय राय की जान चली गई. उनके शव शनिवार को झारखंड पहुंचेंगे. शुक्रवार को वियतनाम में श्रद्धांजलि देने के बाद दोनों के शवों को हिंदुस्तान के लिए रवाना किया गया. आज दोपहर एक बजे दोनों शव कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचेंगे विनय राय के पिता रमेश राय ने बताया कि शनिवार दोपहर करीब एक बजे दोनों शव कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचेंगे. वहां से सड़क मार्ग से राजा कुमार वर्मा का शव रांची और विनय राय का शव जमशेदपुर लाया जायेगा. राजा कुमार के परिवार ने शवों को हिंदुस्तान वापस लाने के लिए अथक प्रयास किए, जिसमें उनके एक मामा वियतनाम में मौजूद थे और उनके भाई ने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की. वहीं सांसद संजय सेठ ने विदेश मंत्रालय से संपर्क कर शव वापस लाने का प्रयास किया. वियतनाम में 25 सितंबर को हुई थी हादसा 25 सितंबर को वियतनाम के दा-लाट शहर में बाइक अनियंत्रित होकर कार की चपेट में आ गयी थी. हादसे में राजा कुमार वर्मा की मौके पर ही मौत हो गयी थी, जबकि विनय राय ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था. दोनों काम खत्म कर अपने संस्थान लौट रहे थे, तभी ये दुखद हादसा हो गया. इस घटना ने उनके परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है. ये भी पढ़ें: जितिया पर्व को लेकर बाजारों में बढ़ी चहल-पहल, नहाय-खाय के साथ व्रत शुरू The post वियतनाम से आज झारखंड पहुंचेंगे राजा और विनय के शव, सड़क हादसे में गई थी जान appeared first on Naya Vichar.

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Asian Games Day 14 LIVE: 17 साल की कुमकुम मोहोड़ ने रचा इतिहास, रिकर्व तीरंदाजी में भारत के लिए जीता गोल्ड मेडल

Asian Games Live: एशियन गेम्स में हिंदुस्तान ने 13वें दिन इतिहास रच दिया. एक ही दिन में हिंदुस्तान ने 6 गोल्ड मेडल जीत लिए. स्त्री हॉकी में 44 साल बाद स्वर्ण, तीरंदाजी और कुश्ती में भी जलवा देखने को मिला. 14वें दिन हिंदुस्तान को क्रिकेट में गोल्ड तो अन्य स्पोर्ट्सों में भी मेडल आने की उम्मीद है. स्पोर्ट्सों की लाइव अपडेट के लिए जुड़े हमारे ब्लॉग के साथ. The post Asian Games Day 14 LIVE: 17 साल की कुमकुम मोहोड़ ने रचा इतिहास, रिकर्व तीरंदाजी में हिंदुस्तान के लिए जीता गोल्ड मेडल appeared first on Naya Vichar.

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Agnipath Scheme: अगले महीने पूरा होगा पहले बैच का 4 साल का कार्यकाल, 75% अग्निवीरों के पास आगे क्या विकल्प?

Agnipath Scheme: अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के जवान अब चार साल की सेवा पूरी करने की ओर बढ़ रहे हैं. पहले नौसेना और वायुसेना के अग्निवीरों का कार्यकाल नवंबर 2026 में पूरा होने की जानकारी है. वहीं, सेना के पहले बड़े बैच के जवानों का कार्यकाल दिसंबर 2026 और जनवरी 2027 के आसपास पूरा होने की उम्मीद है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि चार साल की सेवा के बाद अग्निवीरों के लिए आगे क्या रास्ता होगा. मौजूदा नियमों के मुताबिक, प्रत्येक बैच के अधिकतम 25% अग्निवीरों को उनकी योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर नियमित कैडर में लिया जा सकता है. 25% रिटेंशन पर अभी क्या स्थिति? अभी तीनों सेनाओं में नियमित सेवा के लिए 25% तक अग्निवीरों को रखने का प्रावधान है. हालांकि, इस प्रतिशत को बढ़ाने को लेकर सेनाओं की ओर से चर्चा की समाचारें सामने आई हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, नौसेना करीब 75% तक रिटेंशन चाहती है, जबकि थलसेना और वायुसेना में इसे करीब 50% तक बढ़ाने की मांग की बात सामने आई है, लेकिन ये सिर्फ प्रस्ताव हैं. मौजूदा नियम में 25% तक अग्निवीरों को नियमित सेवा में रखने का प्रावधान ही लागू है. 75% अग्निवीरों के लिए क्या है रोजगार का रास्ता? चार साल पूरे करने वाले अग्निवीरों के लिए केंद्र प्रशासन ने सेना से बाहर रोजगार के कई विकल्पों का प्रावधान किया है. इनमें सबसे बड़ा बदलाव केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों यानी CAPF और असम राइफल्स में हुआ है. The post Agnipath Scheme: अगले महीने पूरा होगा पहले बैच का 4 साल का कार्यकाल, 75% अग्निवीरों के पास आगे क्या विकल्प? appeared first on Naya Vichar.

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जिसे मां ने फिल्मों में जाने से रोका, वही बना ‘बाहुबली’ का कटप्पा, Botany की पढ़ाई से Sathyaraj के पैन-इंडिया स्टार बनने तक की कहानी

Sathyaraj Birthday Special: यह कहानी सिर्फ सिनेमा के एक किरदार की नहीं है. यह कहानी उस जुनून की है, जब इंसान ठान ले तो अपनी बंद किस्मत का ताला भी खुद ही खोल देता है. जब भी हिंदुस्तानीय सिनेमा के सबसे यादगार और बड़े किरदारों की बात होती है, तो ‘बाहुबली’ के वफादार योद्धा कटप्पा का नाम सबसे पहले दिमाग में आता है. हाथ में चमचमाती तलवार, चेहरे पर गंभीरता और बाहुबली के प्रति वफादारी, इस किरदार को पर्दे पर यादगार बनाने वाले बेहतरीन एक्टर सत्यराज का आज यानी 3 अक्टूबर को जन्मदिन है. लेकिन जिस एक्टर को आज पूरा देश कटप्पा के नाम से जानता है, उनके इस बड़े मुकाम के पीछे एक ऐसा दौर भी छुपा है जब घर में खाने के लाले पड़े थे और मां रोते-रोते फिल्मों में न जाने की भीख मांगती थी. मां चाहती थी नौकरी, पर बेटे के सिर पर था सिनेमा का भूत कहानी शुरू होती है 3 अक्टूबर 1954 से, जब तमिलनाडु के कोयंबटूर में रंगाराज सुब्बैया का जन्म हुआ. यही रंगाराज आगे चलकर सत्यराज के नाम से मशहूर हुए. बचपन से ही उन्हें फिल्मों का काफी शौक था. वह उस दौर के बड़े एक्टर्स एमजीआर और शिवाजी गणेशन की नकल किया करते थे. सत्यराज, फोटो – इंस्टाग्राम इसी दौर में उन्होंने अपना नाम बदलकर ‘सत्यराज’ रख लिया. लेकिन असली संघर्ष तो अभी बाकी था. 1978 से 1985 के बीच सत्यराज ने करीब 75 फिल्मों में काम किया और लगभग हर फिल्म में उन्हें खौफनाक विलेन बनाकर पर्दे पर लाया गया. लोग उन्हें पर्दे पर देखते ही गालियां देते थे. पर सवाल यह था कि क्या वह जिंदगी भर सिर्फ गुंडों की मार ही खाते रहेंगे? ‘वेदम पुदिधु’ से बदली पहचान, फिर बने साउथ के नंबर-1 हीरो सत्यराज जानते थे कि सोने को निखरने के लिए आग में तपना ही पड़ता है. 1980 के दशक के आखिर में फिल्म ‘वेदम पुदिधु’ आई और लोगों की आँखें फटी रह गईं. जिस सत्यराज को लोग सिर्फ मारधाड़ करते देखते थे, उसकी संजीदा एक्टिंग देखकर हर कोई हैरान रह गया. इसके बाद 1990 के दशक में वह तमिल सिनेमा के सबसे बड़े लीड हीरो बनकर उभरे: ‘अमैधि पदई’ में सत्यराज ने पिता और बेटे का डबल रोल निभाया था. खास बात यह है कि वह शुरुआत में इस फिल्म को करने को लेकर हिचक रहे थे, क्योंकि पिता का किरदार नेगेटिव था. इसके बावजूद उन्होंने यह रोल किया और फिल्म उनके करियर की यादगार फिल्मों में शामिल हो गई. इसके बाद ‘नडिगन’ और ‘वाल्टर वेत्रीवेल’ जैसी फिल्मों ने भी उनकी पहचान को और मजबूत किया. 1995 में खुद बने डायरेक्टर, एक ही फिल्म में निभाए 3-3 रोल सत्यराज की कहानी की सबसे अनोखी बात यह है कि उन्होंने खुद को सिर्फ एक्टिंग तक सीमित नहीं रखा. 1995 में उन्होंने ‘विल्लादी विलेन’ नाम की एक फिल्म डायरेक्ट की. पर असली सस्पेंस यह था कि इस फिल्म में उन्होंने खुद ही 3 अलग-अलग किरदार निभाए, एक चालाक वकील, एक रोड रोलर ड्राइवर और एक अलग लुक वाला कैरेक्टर. फिल्म ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई. लेकिन करियर की इस ऊंचाई के बाद भी उनके जीवन का सबसे बड़ा धमाका होना अभी बाकी था. 60 की उम्र में लिया वो एक फैसला, जिसने पूरे देश को चौंका दिया उम्र 60 के पार पहुँच चुकी थी. लोग इस उम्र में रिटायरमेंट की सोचने लगते हैं, लेकिन तभी एंट्री हुई महान डायरेक्टर एस.एस. राजामौली की. 2015 में राजामौली ने जब ‘बाहुबली: द बिगनिंग’ के लिए सत्यराज को चुना, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि आगे क्या होने वाला है. सत्यराज ने ‘कटप्पा’ का किरदार बहुत शानदार तरीके से निभाया. और जब फिल्म के आखिरी सीन में उन्होंने बाहुबली की पीठ में तलवार घोंपी, तो पूरा देश सन्न रह गया. 2 सालों तक हिंदुस्तान के कोने-कोने में सिर्फ एक ही सवाल गूंजता रहा: “कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?” 2017 में ‘बाहुबली 2’ आई और इस एक रोल ने 60 साल के सत्यराज को पूरे हिंदुस्तान का सबसे बड़ा पैन-इंडिया स्टार बना दिया. मजेदार राज: परिवार से भी छुपाकर रखा बाहुबली का सबसे बड़ा सस्पेंस ‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?’ का राज सिर्फ आम जनता से ही नहीं छुपाया गया था. सत्यराज ने मार्च 2017 के बाहुबली 2 प्री-रिलीज इवेंट में खुद खुलासा किया था कि उन्होंने अपने घर वालों तक को फिल्म का सच नहीं बताया था. जब भी घर वाले रात को खाने की टेबल पर उनसे पूछते, तो वह हंसकर कह देते- “राजामौली ने सच छुपाने के अलग से पैसे दिए हैं, इसलिए चुपचाप खाना खाओ” शाहरुख खान के फैन बनकर की ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ सत्यराज की हिंदी फिल्मों से जुड़ी एक और बड़ी दिलचस्प कहानी है. जब रोहित शेट्टी ने उन्हें ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ ऑफर की, तो कहानी सुनने के बाद सत्यराज को लगा कि उनका रोल बहुत बड़ा नहीं है. उन्होंने यह बात रोहित शेट्टी और शाहरुख खान को बताई भी. लेकिन फिर भी उन्होंने फिल्म की, जानते हैं क्यों? क्योंकि वह शाहरुख खान की एक्टिंग के बहुत बड़े फैन थे और उनके साथ स्क्रीन शेयर करना चाहते थे. 2013 में आई इस फिल्म में उन्होंने दीपिका पादुकोण के सख्त पिता का रोल निभाकर हिंदी दर्शकों का दिल भी जीत लिया. ये भी पढ़ें: ‘आज वोटर लिस्ट से नाम गायब, कल छीन लेंगे आपकी पहचान…’ CJP के प्रदर्शन में क्यों भड़कीं शबाना आजमी? ये भी पढ़ें: ‘गो ज्ञानू गो’… CEC के खिलाफ आंदोलन में उतरे विशाल ददलानी, बोले- इस्तीफे तक लड़ाई जारी The post जिसे मां ने फिल्मों में जाने से रोका, वही बना ‘बाहुबली’ का कटप्पा, Botany की पढ़ाई से Sathyaraj के पैन-इंडिया स्टार बनने तक की कहानी appeared first on Naya Vichar.

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अनप्रेडिक्टेबल चिराग: बॉलीवुड के फ्लॉप हीरो से लेकर दिल्ली-पटना के सबसे सस्पेंसफुल खिलाड़ी तक की पूरी कहानी

Chirag Paswan Biography: बिहार की नेतृत्व में कुछ नेता अपनी विचारधारा के लिए पहचाने जाते हैं, कुछ अपने सामाजिक आधार के लिए और कुछ अपने नेतृत्वक फैसलों के लिए. चिराग पासवान की पहचान इन तीनों के बीच कहीं बनती है. वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक हैं, दलित नेतृत्व में अपनी जगह मजबूत करना चाहते हैं और अपनी पार्टी को बिहार से बाहर भी ले जाने की कोशिश कर रहे हैं. उनकी नेतृत्व को समझने के लिए सिर्फ उनके बयानों को सुनना काफी नहीं है. यह भी देखना पड़ता है कि उन्होंने किस समय क्या फैसला लिया, उसके पीछे नेतृत्वक परिस्थिति क्या थी और उस फैसले का परिणाम क्या निकला. चिराग की कहानी में फिल्मी दुनिया की नाकामी, पिता की विरासत, परिवार में नेतृत्वक टकराव, चुनावी जोखिम, गठबंधन की मजबूरियां और अपनी पहचान बनाने की जिद है. पीएम मोदी और चिराग पसवान मोदी से नजदीकी और हनुमान वाली पहचान चिराग पासवान की नेतृत्व में नरेंद्र मोदी के साथ उनकी नजदीकी का बड़ा स्थान है. 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में यह रिश्ता खास तौर पर चर्चा में आया. उस समय चिराग ने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली JDU के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया, लेकिन बीजेपी और नरेंद्र मोदी के प्रति अपना समर्थन जताते रहे. इसी दौरान उन्होंने खुद को नरेंद्र मोदी का ‘हनुमान’ कहा. इस बयान का मतलब था कि वह मोदी के प्रति अपनी निष्ठा दिखाना चाहते थे, जबकि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व से उनकी असहमति थी. यानी चिराग ने केंद्र में बीजेपी से अपनी नजदीकी बनाए रखते हुए बिहार में अलग चुनावी रास्ता चुना. यह फैसला जोखिम भरा था. LJP ने उस चुनाव में सिर्फ एक विधानसभा सीट जीती. दूसरी ओर, JDU की सीटों की संख्या में गिरावट आई. चिराग की रणनीति का चुनावी समीकरण पर कितना असर पड़ा, इस पर नेतृत्वक विश्लेषण अलग-अलग रहे हैं. लेकिन इस चुनाव ने चिराग की पहचान जरूर बना दी. उन्होंने दिखाया कि गठबंधन में रहना और गठबंधन के हर फैसले को स्वीकार करना उनके लिए एक ही बात नहीं है. वह किसी बड़े नेता का समर्थन करते हुए भी राज्य के स्तर पर अपना अलग नेतृत्वक रास्ता चुन सकते हैं. अमित शाह के साथ चिराग पासवान बीजेपी के करीबी, लेकिन हर मुद्दे पर एक जैसी राय नहीं चिराग पासवान को बीजेपी का करीबी सहयोगी माना जाता है. वह नरेंद्र मोदी के समर्थन में खुलकर बोलते हैं और NDA में बने हुए हैं. लेकिन उनकी नेतृत्व का एक दूसरा पहलू भी है. कुछ मुद्दों पर वह अपनी पार्टी की अलग राय सामने रखते हैं. इसका एक उदाहरण 2024 में केंद्र प्रशासन की नौकरशाही में लैटरल एंट्री से जुड़ा विवाद था. UPSC के जरिए कुछ वरिष्ठ पदों पर सीधे भर्ती के विज्ञापन को लेकर आरक्षण के सवाल उठे. चिराग ने इस व्यवस्था में आरक्षण को लेकर चिंता जताई और कहा कि सामाजिक न्याय के सिद्धांतों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए. इसके बाद केंद्र प्रशासन ने UPSC से विज्ञापन वापस लेने को कहा. यहां चिराग की नेतृत्व का एक महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है. वह केंद्र प्रशासन के मंत्री होते हुए भी ऐसे मुद्दे उठा सकते हैं, जिन पर उनकी पार्टी को अपने सामाजिक आधार के सामने जवाब देना पड़ता है. इससे यह साबित नहीं होता कि वह बीजेपी से दूरी बना रहे हैं, लेकिन यह जरूर दिखता है कि गठबंधन के भीतर अपनी अलग पहचान बनाए रखना उनके लिए अहम है. आरक्षण पर चिराग का रुख और नेतृत्वक महत्व आरक्षण चिराग पासवान के नेतृत्वक संदेश का प्रमुख हिस्सा है. उनके पिता रामविलास पासवान भी दलित अधिकारों और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर लंबे समय तक सक्रिय रहे. चिराग इसी नेतृत्वक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं. अगस्त 2024 में अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चिराग ने आरक्षण से जुड़े सवाल उठाए थे. उनका कहना था कि आरक्षण की व्यवस्था में बदलाव करते समय उन समुदायों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए, जिनके लिए यह संवैधानिक सुरक्षा दी गई है. 24 अगस्त 2026 को भी उन्होंने आरक्षण को संवैधानिक अधिकार बताया. उन्होंने आरक्षण से जुड़े कानूनों को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग का समर्थन किया, ताकि उन्हें न्यायिक समीक्षा से बचाने का रास्ता मिले. यह उनकी नेतृत्वक मांग है; इस पर संवैधानिक और कानूनी बहस अलग विषय है. आरक्षण पर चिराग की मुखरता का नेतृत्वक महत्व भी है. इससे वह अपने पारंपरिक समर्थक वर्ग के सामने अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हैं. साथ ही, उन्हें यह संतुलन भी रखना होता है कि गठबंधन के दूसरे नेताओं की राय और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर उनका अपना रुख हमेशा एक जैसा नहीं हो सकता. चिराग पासवान चिराग पासवान को अनप्रेडिक्टेबल क्यों कहा जाता है? चिराग की नेतृत्व में कुछ ऐसे फैसले हैं, जिनकी वजह से उन्हें अप्रत्याशित नेता के रूप में देखा जाता है. 2020 में NDA से अलग होकर चुनाव लड़ना, मोदी के प्रति समर्थन बनाए रखना, 2021 में पार्टी टूटने के बाद संगठन खड़ा करना और 2024 में पांचों लोकसभा सीटें जीतना- ये घटनाएं उनके सफर के अलग-अलग मोड़ हैं. अब वह बिहार में गठबंधन प्रशासन की आलोचना करते हैं, आरक्षण पर मुखर रहते हैं और उत्तर प्रदेश में विस्तार की तैयारी करते हैं. इन फैसलों को एक ही नजर से देखना मुश्किल है. कहीं वह गठबंधन के भीतर अपनी जगह मजबूत करना चाहते हैं, कहीं अपने सामाजिक आधार को संदेश देते हैं और कहीं पार्टी का नया विस्तार तलाशते हैं. उनकी नेतृत्व में जोखिम लेने की प्रवृत्ति जरूर दिखाई देती है. लेकिन हर फैसला सफल रहा, ऐसा भी नहीं है. 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को केवल एक सीट मिली थी. इसके बावजूद चिराग ने अपनी नेतृत्वक पहचान को कायम रखा और कुछ साल बाद लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया. इसलिए उन्हें सिर्फ ‘मोदी का हनुमान’ कहना उनकी नेतृत्व को छोटा कर देगा. वह मोदी के समर्थक हैं, लेकिन साथ ही अपनी पार्टी के नेता भी हैं. उन्हें अपने समर्थकों, विधायकों, गठबंधन और भविष्य की चुनावी योजनाओं के बीच संतुलन बनाना पड़ता है. आगे की राह: सहयोगी भी, अपनी अलग पहचान भी चिराग पासवान के सामने आने वाले समय में

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IND vs PAK Final से पहले जान लें ये दिलचस्प नियम, बिना खेले ही भारत कैसे जीत सकता है गोल्ड?

IND vs PAK Final Asian Games 2026 : एशियन गेम्स 2026 में हिंदुस्तानीय पुरुष क्रिकेट टीम गोल्ड मेडल से सिर्फ एक कदम दूर है. सेमीफाइनल में श्रीलंका को 124 रन से हराकर हिंदुस्तान ने फाइनल में जगह बनाई है. अब 3 अक्टूबर को उसका सामना पाकिस्तान से होगा. हिंदुस्तान-पाकिस्तान के इस फाइनल से पहले एक ऐसा नियम सामने आया है, जिसे जानकर हिंदुस्तानीय फैंस जरूर खुश होंगे. अगर बारिश या खराब मौसम के कारण फाइनल में एक भी गेंद नहीं फेंकी जा सकी और मैच का कोई नतीजा नहीं निकला, तो हिंदुस्तान और पाकिस्तान दोनों को गोल्ड मेडल दिया जाएगा. यानी हिंदुस्तान को गोल्ड जीतने के लिए मैदान पर उतरे बिना ही चैंपियन बनने का मौका मिल सकता है. बारिश में धुला फाइनल तो क्या होगा? अगर हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच होने वाला गोल्ड मेडल मैच पूरी तरह बारिश की वजह से रद्द हो जाता है और कोई नतीजा नहीं निकलता, तो दोनों टीमों को संयुक्त रूप से गोल्ड मेडल मिलेगा. किसी भी टीम को सिल्वर मेडल नहीं दिया जाएगा. इसका मतलब यह है कि हिंदुस्तान की बेहतर T20I रैंकिंग होने के बावजूद उसे अकेले गोल्ड नहीं मिलेगा. पूरी तरह मैच रद्द होने की स्थिति में दोनों टीमें गोल्ड साझा करेंगी. पिछले एशियन गेम्स से अलग है इस बार का नियम पिछले एशियन गेम्स में बारिश की वजह से हिंदुस्तान को रैंकिंग का फायदा मिला था. हांगझोउ में हिंदुस्तान और अफगानिस्तान के बीच पुरुष क्रिकेट का फाइनल बारिश के कारण पूरा नहीं हो पाया था. तब बेहतर ICC T20I रैंकिंग के आधार पर हिंदुस्तान को गोल्ड मेडल दिया गया था. लेकिन 2026 एशियन गेम्स में नियम अलग है. अगर हिंदुस्तान-पाकिस्तान फाइनल शुरू ही नहीं हो पाता और कोई परिणाम नहीं निकलता, तो दोनों टीमों को गोल्ड मेडल दिया जाएगा. मैच शुरू हुआ तो क्या होगा? अगर फाइनल शुरू हो जाता है और उसके बाद बारिश आती है, तो स्थिति अलग होगी. मुकाबले को छोटा करके DLS के तहत नतीजा निकालने की कोशिश की जाएगी. अगर निर्धारित शर्तों के तहत मैच का परिणाम निकल जाता है, तो विजेता टीम को गोल्ड और हारने वाली टीम को सिल्वर मेडल मिलेगा. ये भी पढ़ें: Asian Games 2026: गोल्ड के लिए आमने-सामने होंगे हिंदुस्तान-पाकिस्तान, जानें पिच-वेदर रिपोर्ट और T20 में किसका पलड़ा है भारी मैच टाई हुआ तो सुपर ओवर से फैसला अगर हिंदुस्तान-पाकिस्तान का फाइनल टाई होता है, तो विजेता तय करने के लिए सुपर ओवर स्पोर्ट्सा जाएगा. अगर बारिश के कारण सुपर ओवर भी नहीं हो पाता, तो प्रतियोगिता के निर्धारित टाई-ब्रेकर नियम लागू होंगे. ऐसी स्थिति में टीमों की T20I रैंकिंग महत्वपूर्ण हो सकती है. हिंदुस्तान की रैंकिंग पाकिस्तान से बेहतर होने के कारण उसे फायदा मिल सकता है. ब्रॉन्ज मेडल मैच का भी जान लें नियम गोल्ड मेडल मैच से पहले बांग्लादेश और श्रीलंका के बीच ब्रॉन्ज मेडल मुकाबला होगा. अगर यह मैच भी पूरी तरह बारिश में धुल जाता है और कोई नतीजा नहीं निकलता, तो दोनों टीमों को संयुक्त रूप से ब्रॉन्ज मेडल दिया जाएगा. हिंदुस्तान-पाकिस्तान फाइनल पर फैंस की नजर हिंदुस्तान ने सेमीफाइनल में श्रीलंका को 124 रन से हराकर फाइनल में जगह बनाई. हिंदुस्तानीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 169/7 रन बनाए, जिसके जवाब में श्रीलंका की टीम 45 रन पर ऑलआउट हो गई. अब हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच गोल्ड मेडल के लिए मुकाबला होगा. दोनों टीमों के फैंस की नजर मैच के साथ-साथ नागोया के मौसम पर भी रहेगी. ये भी पढ़ें: 44 साल का इंतजार खत्म, हिंदुस्तान की बेटियों ने चीन को हराकर जीता हॉकी गोल्ड; ओलंपिक 2028 का टिकट भी पक्का The post IND vs PAK Final से पहले जान लें ये दिलचस्प नियम, बिना स्पोर्ट्से ही हिंदुस्तान कैसे जीत सकता है गोल्ड? appeared first on Naya Vichar.

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3 अक्टूबर की टॉप-20 खबरें : मुंबई में जुटी CJP समर्थकों की भीड़, यूक्रेन जंग पर PM मोदी के प्रयासों की पुतिन ने की तारीफ, AAP नेताओं को दिल्ली पुलिस ने किया डिटेन

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Gold से पहले ही सिलवा ली DSP की वर्दी, Asian Games में 2 मेडल जीतकर लौटीं UP की बेटी प्राची, हुआ भव्य स्वागत Asian Games 2026: Asian Games 2026 में किसान परिवार की बेटी प्राची चौधरी ने 2 मेडल जीतकर इतिहास रचा. 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