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दिल्ली में इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदना हुआ सस्ता, रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फी माफ, बस करना होगा यह काम

इस नीति का मकसद गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को कम करना और दिल्ली में स्वच्छ परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है. हाइब्रिड वाहनों के लिए कोई प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा. नीति के तहत, 30 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाले सभी इलेक्ट्रिक चार पहिया वाहनों के लिए रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फी में 100 प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी.

दिल्ली प्रशासन की नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने पर सब्सिडी दी जाएगी. जो इस प्रकार होगी.

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (स्कूटर/बाइक) खरीदने पर छूट

पहले साल: 30,000 रुपये की छूट
दूसरे साल: 20,000 रुपये की छूट
तीसरे साल: 10,000 रुपये की छूट

इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (ऑटो/तिपहिया) खरीदने पर छूट

पहले साल: 50,000 रुपये की छूट
दूसरे साल: 40,000 रुपये की छूट
तीसरे साल: 30,000 रुपये की छूट

इलेक्ट्रिक कमर्शियल ट्रक (N1 कैटेगरी) खरीदने पर छूट

जो लोग माल ढोने वाले छोटे इलेक्ट्रिक ट्रक (N1 श्रेणी) खरीदेंगे, उन्हें प्रशासन की तरफ से सीधे 1 लाख रुपये तक का फायदा मिलेगा.

एक अप्रैल 2028 से केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का पंजीकरण

नीति के तहत एक जनवरी, 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक ऑटोरिक्शा पंजीकृत किए जाएंगे, जबकि नए पेट्रोल और सीएनजी दोपहिया वाहनों का पंजीकरण चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया जाएगा और एक अप्रैल, 2028 से केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का पंजीकरण किया जाएगा.

दिल्ली में पुरानी गाड़ियों के लिए स्क्रैप पॉलिसी

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली की सड़कों से पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने के लिए प्रशासन एक शानदार योजना लेकर आई है. अगर आप अपनी पुरानी गाड़ी को कबाड़ (स्क्रैप) में देते हैं, तो प्रशासन आपको नई गाड़ी खरीदने के लिए नगद छूट (स्क्रैपिंग इंसेंटिव) देगी.

पुरानी बाइक या स्कूटर (दोपहिया): 10,000 की छूट
पुराना ऑटो (तिपहिया): 25,000 की छूट
ग्रामीण सेवा वाहन: 15,000 की छूट
पुराना छोटा ट्रक (N-1 कैटेगरी): 50,000 की छूट
पुरानी कार (चार पहिया): सीधे 1,000,000 (1 लाख) की बंपर छूट

ईवी वाहन नीति में खर्च होंगे 15000 करोड़ रुपये

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि दिल्ली में इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) को बढ़ावा देने और प्रदूषण कम करने के लिए प्रशासन ने एक प्लान तैयार किया है. इस योजना के तहत, अगले 4 सालों में करीब 15,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इस पैसे का इस्तेमाल प्रशासनी निवेश, टैक्स में छूट देने और जगह-जगह ई-वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन (बुनियादी ढांचा) जैसी सुविधाएं तैयार करने में किया जाएगा.

मार्च 2030 तक 30 फीसदी स्कूल बसें होंगी इलेक्ट्रिक

इलेक्ट्रिक वाहन नीति में प्रस्तावित है कि मार्च 2030 तक दिल्ली के स्कूल की 30 फीसदी बसें इलेक्ट्रिक होनी चाहिए. यह नीति शून्य-उत्सर्जन परिवहन के माध्यम से दिल्ली को प्रदूषण मुक्त राजधानी में बदलना चाहती है और 31 मार्च 2030 तक लागू रहेगी.

कुल पीएम 2.5 प्रदूषण में 50 प्रतिशत योगदान वाहनों का

दिल्ली के पीएम 2.5 का सबसे बड़ा स्रोत गाड़ियों से होना वाला उत्सर्जन है. कुल पीएम 2.5 प्रदूषण में लगभग 50 प्रतिशत योगदान वाहनों से निकलने वाले धुएं और उनसे जुड़े उत्सर्जन का है. ेपिछले साल 31 दिसंबर में जारी सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, गत वर्ष सर्दियों में सबसे ज्यादा प्रदूषण अवधि के दौरान, वाहनों ने शहर के स्थानीय पीएम 2.5 स्तरों में लगभग 46 प्रतिशत से 53 प्रतिशत का योगदान दिया था.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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