12 अक्टूबर 2026 को विपक्ष का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च चल रहा था. कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस मार्च का नेतृत्व कर रहे थे. इसी दौरान उन्होंने एक 29 वर्षीय लड़की के कंधे पर हाथ रखा और आगे बढ़ने लगे. यह लड़की कभी पुलिस की बैरिकेडिंग पर चढ़ती नजर आईं, तो कभी रास्ता रोक रही पुलिस से भिड़ती दिखीं.
राहुल गांधी से हाथ मिलाने और उनके साथ मार्च में शामिल होने के बाद यह लड़की चर्चा में हैं. टीवी के प्राइम टाइम शो से समाचारों की हेडलाइन में जगह पाने वाली इस लड़की का नाम नेहा बोरा है. नेहा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की नेशनल प्रेसिडेंट हैं.
अटकलें लगाई जा रही हैं कि कन्हैया कुमार की तरह वह भी जल्द ही कांग्रेस में शामिल हो सकती हैं. लेकिन, इन अटकलों में कितनी सच्चाई है? इस स्टोरी में इसी का जवाब जानेंगे.
आइए पहले राहुल गांधी के साथ नेहा बोरा की तस्वीर देखते हैं-
’दिल्ली में है इसलिए नेहा बोरा चमक रहीं हैं’
‘’नेहा बोरा के कांग्रेस में जाने को लेकर जो सोशल मीडिया में कयास लगाये जा रहे हैं, उसमें दम नहीं है’’ यह बात नया विचार से बातचीत में पॉलिटिकल एक्सपर्ट अविनाश कल्ला ने कही है.
उन्होंने कहा कि नेहा बोरा के दिल्ली में होने की वजह से उनकी चर्चा पूरे देश में हो रही है. कुछ दिन पहले वह झारखंड की राजधानी रांची में हुए छात्र आंदोलन में भी शामिल हुई थीं. उस दौरान उन पर स्याही फेंकी गई थी. लेकिन तब इस घटना की चर्चा ज्यादा दिनों तक नहीं चली.
कल्ला ने कहा कि कन्हैया कुमार कांग्रेस में आने से पहले CPI में थे. वह भी दिल्ली में रहते थे और उनकी चर्चा होती रहती थी. आज कांग्रेस में उनकी क्या स्थिति है, यह किसी से छिपा नहीं है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस से बाहर रहकर नेहा बोरा ज्यादा स्पेस ले सकतीं हैं.
नेतृत्वक एक्सपर्ट के मुताबिक, वामपंथी विचारधारा को मानने वालों की संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है. केरल में कांग्रेस ने वामपंथी प्रशासन को हराकर सत्ता हासिल की. वहीं, त्रिपुरा में 3 मार्च 2018 को चुनाव नतीजे आने के बाद 25 साल पुराना वामपंथी शासन खत्म हो गया. इसके बाद 9 मार्च को बीजेपी के बिप्लब कुमार देब ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
‘राहुल गांधी लड़ाई धीरे-धीरे लड़ रहे हैं’
पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई इस मामले में कहते हैं, ‘हम बहुत जल्दी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहते हैं. राहुल गांधी जो हैं, वो पीएम मोदी, भाजपा और एनडीए के खिलाफ जंग छेड़ी है. राहुल ये लड़ाई धीरे-धीरे लड़ रहे हैं. उन्हें कोई जल्दबाजी नहीं हैं.’
उन्होंने कहा कि हम पीछे मुड़कर देखेंगे तो हमें कई आंदोलन नजर आएंगे. चाहे वो जेपी आंदोलन हो या इंडिया अगेंस्ट करप्शन, हर जगह युवा नेतृत्व में सक्रियता दिखलाते हैं और व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाते हैं. विपक्ष के नेतृत्वक दल ऐसे युवाओं का इस्तेमाल करते हैं.
किदवई ने कहा कि सिर्फ राहुल गांधी के साथ दिखने के आधार पर यह मान लेना कि नेहा बोरा कांग्रेस में शामिल हो जाएंगी, जल्दबाजी होगी. राहुल गांधी उन नेताओं और लोगों को भी साथ लेकर चलना चाहते हैं, जो बीजेपी और एनडीए के खिलाफ लड़ रहे हैं. वह गठबंधन के बाहर के लोगों को भी साथ जोड़ने की कोशिश करते हैं. युवाओं को साथ लेकर चलने की उनकी रणनीति गुजरात में भी दिख चुकी है. वहां हार्दिक पटेल के साथ अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी जैसे युवा नेता भी कांग्रेस के करीब आए थे.
वाम दलों से निकलने वाले छात्र नेता कांग्रेस में क्यों चले जाते हैं?
नेतृत्व एक्सपर्ट के मुताबिक, वामपंथी छात्र नेतृत्व से जुड़े नेताओं के कांग्रेस में जाने के पीछे वाम दलों में घटते नेतृत्वक अवसरों को एक वजह बताया गया है. बिहार के नेतृत्वक विश्लेषक और समाजशास्त्र के प्रोफेसर नवल किशोर चौधरी ने एक इंटरव्यू में कन्हैया कुमार के कांग्रेस में शामिल होने पर कहा था कि कांग्रेस को बिहार में युवा नेतृत्व की जरूरत थी. उनके मुताबिक, कन्हैया को कांग्रेस में एक बड़ा नेतृत्वक मंच मिला. यही वजह है कि ज्यादातर वाम दलों से निकलने वाले छात्र नेता कांग्रेस ज्वाइन कर लेते हैं.
कन्हैया कुमार समेत वामपंथी छात्र नेतृत्व से निकले ये 8 नेता कांग्रेस में हुए शामिल
| नाम | छात्र संगठन / दल | कांग्रेस में मिली जिम्मेदारी |
| कन्हैया कुमार | AISF, CPI | NSUI के राष्ट्रीय प्रभारी |
| सैयद नासिर हुसैन | SFI | कांग्रेस से राज्यसभा सदस्य बने |
| डीपी त्रिपाठी | SFI | कांग्रेस के बाद NCP में गए |
| शकील अहमद खान | SFI | कांग्रेस से विधायक बने |
| संदीप सिंह | AISA | प्रियंका गांधी की टीम में शामिल |
| अकबर चौधरी | AISA | कांग्रेस इलेक्शन कोर टीम में शामिल |
| मोहित पांडे | AISA | कांग्रेस पार्टी और प्रियंका गांधी की कोर टीम में शामिल |
| प्रसेनजीत बोस | SFI | कांग्रेस में शामिल होकर चुनावी नेतृत्व में आए |
छात्र आंदोलनों से कैसे मिली नेहा बोरा को पहचान?
नेहा बोरा 29 साल की हैं. वह उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली हैं. वह जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में पीएचडी की पढ़ाई कर रही हैं. उनकी पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी से शुरू हुई. इसके बाद उन्होंने डॉ. बीआर आंबेडकर यूनिवर्सिटी, दिल्ली में भी पढ़ाई की. थिएटर से जुड़ाव ने भी उन्हें सामाजिक और नेतृत्वक मुद्दों को समझने का मौका दिया.
नेहा बोरा ने 2019-20 में नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान छात्र नेतृत्व में सक्रिय भूमिका निभाई. इसके बाद वह छात्रों के अधिकार, परीक्षा में गड़बड़ी और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर आवाज उठाती रही हैं. 2026 में वह शिक्षा से जुड़े मुद्दों और छात्र अधिकारों को लेकर हुए प्रदर्शनों में भी शामिल रहीं. सोनम वांगचुक के साथ जंतर-मंतर पर हुई भूख हड़ताल में उनकी भागीदारी भी चर्चा में रही.
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