Noodles Food Safety: शाम को हल्की भूख लगी हो या बच्चों के लिए जल्दी कुछ बनाना हो, नूडल्स एक आसान ऑप्शन लगता है. खासकर इंस्टेंट नूडल्स कुछ ही मिनटों में तैयार हो जाते हैं. लेकिन इन्हें बनाते समय क्या आप पैकेट की एक्सपायरी डेट देखते हैं? क्या बचे हुए नूडल्स को फ्रिज में रखते हैं या किचन में ही छोड़ देते हैं? ऐसी छोटी-छोटी बातें खाने की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं.
हाल ही में उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में परिवार के पांच सदस्यों की मौत का मामला सामने आया. शुरुआती जानकारी में बताया गया कि परिवार ने पिछली रात चाय और नूडल्स खाए थे. इस मामले में फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई गई. ऐसे में आइए, इस लेख में आपको बताते हैं कि नूडल्स खाते समय किन गलतियों से बचना चाहिए और इन्हें सही तरीके से बनाने व रखने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
नूडल्स कितने तरह के होते हैं?
बाजार में कई तरह के नूडल्स मिलते हैं. इनके बनाने का तरीका और इस्तेमाल होने वाली सामग्री अलग-अलग हो सकती है.
- इंस्टेंट नूडल्स: इन्हें कम समय में तैयार किया जा सकता है. इनके साथ अक्सर मसाले का पैकेट भी मिलता है.
- सूखे नूडल्स: इन्हें पकाने से पहले पानी में उबालना पड़ता है.
- चावल के नूडल्स: इन्हें चावल से बनाया जाता है. इनका स्वाद और बनावट गेहूं के नूडल्स से अलग हो सकती है.
- साबुत गेहूं के नूडल्स: इन्हें साबुत गेहूं के आटे से बनाया जा सकता है. इनमें फाइबर की मात्रा इस्तेमाल की गई सामग्री पर निर्भर करती है.
नूडल्स खरीदते समय पैकेट पर लिखी सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी जरूर पढ़ें. केवल नाम देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि कौन-सा नूडल्स ज्यादा पौष्टिक है.
क्या रोज नूडल्स खाना सही है?
1. पैकेट की एक्सपायरी डेट देखना न भूलें
नूडल्स खरीदते समय पैकेट पर लिखी एक्सपायरी डेट जरूर देखें. अगर पैकेट फटा हो, उसकी सील खुली हो या उसमें नमी दिख रही हो, तो उसे न खरीदें. घर में नूडल्स को सूखी और साफ जगह पर रखें. WHO की खाने को सुरक्षित रखने से जुड़ी गाइडलाइन में भी एक्सपायरी डेट देखने और सही चीजें चुनने की सलाह दी गई है.
2. साफ पानी और बर्तनों का इस्तेमाल करें
नूडल्स बनाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह धो लें. जिस बर्तन में नूडल्स बना रहे हैं, वह भी साफ होना चाहिए. इन्हें बनाने के लिए पीने लायक साफ पानी का इस्तेमाल करें. अगर नूडल्स में सब्जियां डाल रहे हैं, तो उन्हें भी साफ पानी से अच्छी तरह धो लें.
WHO के मुताबिक, हाथों, बर्तनों और किचन की गंदी सतहों से कीटाणु खाने तक पहुंच सकते हैं. इसलिए खाना बनाने से पहले और कच्ची चीजें छूने के बाद हाथ धोना जरूरी है.
3. नूडल्स को अच्छी तरह पकाएं
नूडल्स बनाते समय पैकेट पर दिए गए निर्देशों का पालन करें. अगर इनमें अंडा, चिकन या जल्दी खराब होने वाली दूसरी चीजें मिला रहे हैं, तो उन्हें भी अच्छी तरह पकाएं. कच्ची चीजें काटने के लिए इस्तेमाल किए गए चाकू और कटिंग बोर्ड को साफ किए बिना पके हुए खाने के लिए इस्तेमाल न करें.
WHO की सलाह है कि खाने को अच्छी तरह पकाना चाहिए. साथ ही, कच्चे और पके हुए खाने को अलग रखना चाहिए. इससे कच्ची चीजों के कीटाणु पके हुए खाने में पहुंचने का खतरा कम होता है.
4. मसाले का पूरा पैकेट डालना जरूरी नहीं
इंस्टेंट नूडल्स के साथ मिलने वाले मसाले में सोडियम यानी नमक की मात्रा हो सकती है. इसलिए पैकेट पर दी गई पोषण से जुड़ी जानकारी जरूर पढ़ें. अगर आप कम नमक खाना चाहते हैं, तो मसाले की मात्रा कम रख सकते हैं. ऊपर से नमक या सोया सॉस डालते समय भी ध्यान दें, क्योंकि इनमें भी नमक होता है.
WHO के मुताबिक, ज्यादा नमक खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है. इसलिए दिनभर में आप कितना नमक खा रहे हैं, इसका ध्यान रखना जरूरी है.
5. पके हुए नूडल्स को घंटों बाहर न छोड़ें
नूडल्स पकाने के बाद उन्हें किचन में घंटों खुला न छोड़ें. WHO की गाइडलाइन के मुताबिक, पके हुए खाने को कमरे के तापमान पर दो घंटे से ज्यादा नहीं रखना चाहिए. अगर नूडल्स बाद में खाने हैं, तो उन्हें जल्द से जल्द फ्रिज में रख दें. फ्रिज का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से कम रखना बेहतर है.
WHO के अनुसार, कमरे के तापमान पर रखे खाने में कीटाणु तेजी से बढ़ सकते हैं. इसलिए सिर्फ खाना ढक देने से वह लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रहता.
6. बचे हुए नूडल्स को सही तरीके से रखें
कोशिश करें कि जितने नूडल्स खाने हैं, उतने ही बनाएं. अगर कुछ नूडल्स बच जाएं, तो उन्हें साफ और ढके हुए डिब्बे में रखकर जल्द फ्रिज में रख दें. दोबारा खाने से पहले उन्हें अच्छी तरह गर्म करें. लेकिन अगर नूडल्स लंबे समय तक बाहर रखे रहे हों या उन्हें सही तरीके से नहीं रखा गया हो, तो सिर्फ गर्म करने से उनके सुरक्षित होने की गारंटी नहीं मिलती.
WHO की गाइडलाइन में भी बचे हुए पके खाने को जल्द फ्रिज में रखने और दोबारा खाने से पहले अच्छी तरह गर्म करने की सलाह दी गई है.
7. बच्चों को नूडल्स खिलाते समय इन बातों का ध्यान रखें
अगर बच्चों को नूडल्स पसंद हैं, तो उन्हें कभी-कभार खिला सकते हैं. लेकिन रोज के खाने में नूडल्स को दूसरी चीजों की जगह न दें. इनके साथ सब्जियां और प्रोटीन वाली चीजें भी शामिल करें. छोटे बच्चों को नूडल्स खिलाते समय उनकी उम्र के हिसाब से खाने के टुकड़ों का आकार रखें, ताकि उन्हें खाने में परेशानी न हो.
WHO के मुताबिक, संतुलित खाने में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन वाली अलग-अलग चीजें शामिल होनी चाहिए. इसलिए बच्चों को सिर्फ नूडल्स खिलाने के बजाय उन्हें तरह-तरह की चीजें खाने की आदत डालें.
8. खाने की गंध और रंग देखकर ही फैसला न करें
कई बार खाना देखने और सूंघने में ठीक लगता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह खाने के लिए सुरक्षित भी है. कुछ कीटाणुओं का पता सिर्फ रंग या गंध से नहीं लगाया जा सकता. अगर नूडल्स लंबे समय तक बाहर रखे रहे हों, पैकेट खराब हो या उन्हें सही तरीके से रखने को लेकर शक हो, तो उन्हें खाने से बचें.
WHO के मुताबिक, खाने को सुरक्षित रखने के लिए साफ-सफाई और सही तापमान का ध्यान रखना जरूरी है. इसलिए सिर्फ देखकर या सूंघकर यह तय नहीं करना चाहिए कि खाना खाने लायक है या नहीं.
मैगी को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
मई 2015 में मैगी नूडल्स में तय सीमा (2.5 PPM) से ज्यादा लेड (सीसा) पाए जाने का आरोप लगा था. साथ ही, इसमें मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG) की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे थे. इसके बाद FSSAI ने पूरे देश में मैगी की बिक्री पर रोक लगा दी थी. नेस्ले इंडिया ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मैसूर के केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकीय अनुसंधान संस्थान (CFTRI) ने मैगी के पैकेट की जांच की. जांच में मैगी को सुरक्षित पाया गया और उसमें लेड की मात्रा भी तय सीमा के अंदर मिली. इसके बाद नवंबर 2015 में मैगी की बाजार में वापसी हुई. करीब 11 साल तक चले इस मामले में अगस्त 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट ने नेस्ले इंडिया के अधिकारियों के खिलाफ चल रहे सभी मामलों को रद्द कर दिया.
नूडल्स खाने के बाद फूड पॉइजनिंग के लक्षण क्या हो सकते हैं?
दूषित खाना खाने के बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, जी मिचलाना और बुखार जैसे लक्षण हो सकते हैं. ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) के मुताबिक, फूड पॉइजनिंग के लक्षण कुछ घंटों बाद भी शुरू हो सकते हैं और कुछ मामलों में कई दिन लग सकते हैं.
अगर उल्टी या दस्त हो रहे हैं, तो शरीर में पानी की कमी से बचना जरूरी है. बार-बार उल्टी होने, पानी न पी पाने, पेशाब कम होने, मल में खून आने या तेज बुखार होने पर डॉक्टर से संपर्क करें. छोटे बच्चों और बुजुर्गों में इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
नूडल्स खाते समय इन बातों का रखें ध्यान
नूडल्स खाने से ही फूड पॉइजनिंग होती है, ऐसा कहना सही नहीं होगा. खाने में गड़बड़ी दूषित सामग्री, साफ-सफाई की कमी या गलत तरीके से पकाने और रखने के कारण भी हो सकती है. WHO की सलाह के मुताबिक, किसी भी भोजन को सुरक्षित रखने के लिए हाथ और बर्तन साफ रखें, खाने को अच्छी तरह पकाएं और उसे सही तापमान पर स्टोर करें. इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर खाने से जुड़ी कई परेशानियों का खतरा कम किया जा सकता है.
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