CJP Protest Timeline : कॉकरोच जनता पार्टी ने 10 अक्टूबर को लोगों से जंतर-मंतर पहुंचने का आह्वान किया था. द इंडियन एक्सप्रेस की सीईसी ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी की गई इंवेस्टिगेटिव रिपोर्ट के बाद मामला चर्चा में आया. देश भर के अलग-अलग हिस्सों से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठने लगी.
वहीं 10 अक्टूबर को दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड करते ही दिल्ली पुलिस ने विमान के अंदर से ही दीपके, रांका और सौरभ दास को हिरासत में ले लिया. फिर कोर्ट के आदेश पर रिहाई हुई और 16 अक्टूबर को ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले उन्हें दोबारा हिरासत में ले लिया गया. आइए जानते हैं, 10 से 17 अक्टूबर तक इस पूरे घटनाक्रम में क्या-क्या हुआ.
10 अक्टूबर: दिल्ली पहुंचते ही विमान में हिरासत
CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था. पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के SIR में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग कर रही थी. विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि मतदाता सूची में बदलाव से कुछ वर्गों के मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं. हालांकि, चुनाव आयोग ने किसी नेतृत्वक दल के पक्ष में काम करने के आरोपों को खारिज किया है.
प्रदर्शन में शामिल होने के लिए CJP संस्थापक अभिजीत दीपके और पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास व आशुतोष रांका मुंबई से दिल्ली पहुंचे. 10 अक्टूबर को विमान के उतरते ही दिल्ली पुलिस के जवान विमान के अंदर पहुंचे और तीनों को हिरासत में ले लिया. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिसकर्मी यात्रियों के विमान से उतरने से पहले ही अंदर पहुंच गए थे.
11 अक्टूबर: कोर्ट के आदेश पर तीनों रिहा
हिरासत के बाद मामला अदालत पहुंचा. 11 अक्टूबर को कोर्ट ने दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा करने का आदेश दिया. रिहाई के लिए उन्हें शांति बनाए रखने की शर्त पर अंडरटेकिंग देनी पड़ी.
रिहा होने के बाद दीपके ने साफ किया कि उन्होंने प्रदर्शन नहीं करने का कोई बॉन्ड नहीं भरा है. उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन जारी रहेगा. इस बीच दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए. पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जबकि अलग-अलग शहरों में भी आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन हुए. रॉयटर्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को हिरासत में लिए गए लोगों में से ज्यादातर को उसी रात छोड़ दिया था.
12-13 अक्टूबर: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर टकराव
अगले दिनों में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर विवाद बढ़ गया. पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रदर्शन से जुड़े प्रतिबंध लगाए. इसके बावजूद CJP के कार्यकर्ताओं ने वहां पहुंचने की कोशिश की. इस दौरान बैरिकेडिंग और प्रदर्शनकारियों को हटाने को लेकर तनाव की समाचारें सामने आईं.
CJP नेताओं का विरोध जारी रहा. पार्टी का आरोप था कि प्रदर्शन करने के अधिकार को दबाया जा रहा है. वहीं, पुलिस की ओर से सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और प्रतिबंधों का पालन कराने पर जोर दिया गया.
14 अक्टूबर: सौरव दास और आशुतोष रांका जेल भेजे गए
14 अक्टूबर को CJP के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को फिर गिरफ्तार किया गया. दोनों पर जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रतिबंधों का उल्लंघन करने का आरोप था. अदालत में पेश किए जाने के बाद उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
दोनों नेताओं की गिरफ्तारी के बाद दीपके ने अपने साथियों के समर्थन में नए प्रदर्शन का ऐलान किया. उन्होंने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च निकालने की अपील की.
15 अक्टूबर: ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च की तैयारी
दीपके ने लोगों से 16 अक्टूबर को शाम पांच बजे सेंट्रल पार्क पहुंचकर तिरंगा फहराने की अपील की. उनका कहना था कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना कोई अपराध नहीं है. पार्टी इस मार्च के जरिए अपने गिरफ्तार साथियों की रिहाई और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाना चाहती थी.
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने मार्च को लेकर आपत्ति जताई. पुलिस ने सार्वजनिक सुरक्षा, ट्रैफिक और कनॉट प्लेस में कारोबार करने वाले दुकानदारों को होने वाली परेशानी का हवाला देते हुए दीपके को कार्यक्रम नहीं करने का नोटिस दिया.
16 अक्टूबर: मार्च से पहले दीपके और नेहा बोरा हिरासत में
16 अक्टूबर को दीपके जब कनॉट प्लेस की ओर जाने के लिए घर से निकले, तो पुलिस ने उन्हें रोक लिया. CJP की ओर से साझा किए गए वीडियो में दीपके पुलिस से कहते सुनाई दिए, “मैं अकेला हूं, फिर उल्लंघन कैसे किया?” पुलिस ने उन्हें एहतियातन हिरासत में लेने की बात कही.
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इसी दिन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया गया. इसके बावजूद कनॉट प्लेस में तिरंगा लेकर प्रदर्शनकारी जुटे. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, करीब 2,000 लोग प्रदर्शन में पहुंचे और पुलिस ने प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप में 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया. इलाके में भारी पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी.
17 अक्टूबर: दीपके गिरफ्तार, नेहा बोरा रिहा
17 अक्टूबर को दीपके की हिरासत के बाद उन्हें शांति भंग होने की आशंका के आधार पर औपचारिक रूप से गिरफ्तार किए जाने की समाचार आई. उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना था. दूसरी ओर, नेहा बोरा को पुलिस ने रिहा कर दिया.
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इस कार्रवाई के बाद CJP आंदोलन और पुलिस की भूमिका को लेकर नेतृत्वक बहस तेज हो गई. विपक्षी दलों ने दीपके और बोरा की हिरासत पर सवाल उठाए. अब इस पूरे घटनाक्रम में आगे की कानूनी कार्रवाई और CJP के आंदोलन की अगली रणनीति पर नजर बनी हुई है.
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