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Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

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548 रुपये में 84 दिन चलेगा रिचार्ज, कॉलिंग के साथ डेटा भी

548 रुपये का एक ऐसा रिचार्ज प्लान इन दिनों काफी चर्चा में है, जो उन यूजर्स के लिए खास साबित हो सकता है जिन्हें लंबी वैलिडिटी चाहिए लेकिन ज्यादा डेटा की जरूरत नहीं पड़ती. एयरटेल का यह प्लान पूरे 84 दिनों तक चलता है और इसमें कॉलिंग, एसएमएस के साथ कुछ अतिरिक्त डिजिटल फायदे भी दिए जा रहे हैं. खास बात यह है कि कम खर्च में तीन महीने तक नंबर एक्टिव रखने का यह एक आसान विकल्प बनकर सामने आया है. ऐसे यूजर्स जो घर या ऑफिस में वाई-फाई इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए यह प्लान काफी उपयोगी माना जा रहा है. 84 दिन तक मिलेगा रिचार्ज का फायदा एयरटेल का 548 रुपये वाला प्रीपेड प्लान 84 दिनों की वैलिडिटी के साथ आता है. यानी एक बार रिचार्ज कराने के बाद करीब तीन महीने तक अलग से चिंता नहीं करनी पड़ेगी. यह प्लान उन लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है जो ज्यादा डेटा यूज नहीं करते लेकिन लंबी वैलिडिटी और अनलिमिटेड कॉलिंग चाहते हैं. कॉलिंग और रोमिंग का भी पूरा फायदा इस प्लान में देशभर में अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग की सुविधा मिलती है. इसके साथ नेशनल रोमिंग भी शामिल है. ऐसे में यूजर्स कहीं भी यात्रा करें, उन्हें अलग से रोमिंग चार्ज की चिंता नहीं करनी पड़ेगी. एयरटेल ने इसमें कुल 900 एसएमएस भी शामिल किए हैं, जो बेसिक यूजर्स के लिए पर्याप्त माने जा सकते हैं. कम डेटा यूजर्स के लिए बेहतर ऑप्शन 548 रुपये वाले इस प्लान में कुल 7GB डेटा मिलता है. यह डेली डेटा प्लान नहीं है, बल्कि पूरी वैलिडिटी के लिए एकमुश्त डेटा दिया जाता है. ऐसे लोग जो ज्यादातर समय ब्रॉडबैंड या वाई-फाई इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए यह प्लान काफी किफायती साबित हो सकता है. कम डेटा इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को इससे अनावश्यक खर्च भी नहीं करना पड़ेगा. फ्री मिलेगा प्रीमियम सब्सक्रिप्शन एयरटेल इस प्लान के साथ कुछ अतिरिक्त फायदे भी दे रहा है. इसमें 12 महीने के लिए अडोब एक्सप्रेस प्रीमियम का ऐक्सेस दिया जा रहा है, जिसकी कीमत हजारों रुपये तक मानी जाती है. इसके अलावा यूजर्स को फ्री हेलो ट्यून सुविधा भी मिलती है, जिससे वे 30 दिनों तक अपनी पसंद की कॉलर ट्यून लगा सकते हैं. किन लोगों के लिए सही है यह प्लान? आजकल कई यूजर्स सिर्फ नंबर एक्टिव रखने, कॉलिंग और बेसिक इंटरनेट जरूरतों के लिए सस्ता और लंबी वैलिडिटी वाला प्लान ढूंढते हैं. ऐसे लोगों के लिए एयरटेल का यह 548 रुपये वाला रिचार्ज एक अच्छा विकल्प बन सकता है. खासकर बुजुर्ग यूजर्स, सेकेंडरी नंबर इस्तेमाल करने वाले लोग और वाई-फाई आधारित यूजर्स को इससे ज्यादा फायदा मिल सकता है. ध्यान रहे, ऊपर बताये गए पैक में बदलाव संभव है. ऐसे में कोई भी रिचार्ज पैक चुनने से पहले ऑफिशियल वेबसाइट से जरूर कंफर्म कर लें. यह भी पढ़ें: Airtel ₹1798 रिचार्ज प्लान: 84 दिन तक हाई स्पीड डेटा, कॉलिंग और Netflix फ्री The post 548 रुपये में 84 दिन चलेगा रिचार्ज, कॉलिंग के साथ डेटा भी appeared first on Naya Vichar.

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इंटेलिजेंस ब्यूरो में ASO बनने का मौका, सैलरी होगी 1.4 लाख से ज्यादा

Intelligence Bureau ASO Recruitment: अगर आप ग्रेजुएशन के बाद किसी दमदार प्रशासनी नौकरी की तलाश में हैं तो आपके लिए बड़ी खुशसमाचारी है. SSC CGL 2026 के जरिए इंटेलिजेंस ब्यूरो में Assistant Section Officer यानी ASO बनने का मौका मिल रहा है. देश की सबसे प्रतिष्ठित एजेंसियों में गिने जाने वाले इंटेलिजेंस ब्यूरो में नौकरी करना लाखों युवाओं का सपना होता है. इस भर्ती के जरिए उम्मीदवारों को शानदार सैलरी, प्रशासनी सुविधाएं और बेहतरीन करियर ग्रोथ मिलेगी. SSC CGL 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया 21 मई 2026 से शुरू हो चुकी है. उम्मीदवार 22 जून 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. फीस जमा करने की आखिरी तारीख 23 जून 2026 तय की गई है. वहीं फॉर्म में सुधार करने का मौका 29 जून से 1 जुलाई 2026 तक मिलेगा. Intelligence Bureau ASO Recruitment: ऐसे करें आवेदन इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को SSC की ऑफिशियल वेबसाइट SSC Official Website पर जाना होगा. वहां जाकर SSC CGL 2026 का नोटिफिकेशन ओपन करें. इसके बाद रजिस्ट्रेशन करके आवेदन फॉर्म भरें. जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें और फीस जमा करके फॉर्म सबमिट कर दें. आखिर में फॉर्म का प्रिंटआउट जरूर निकाल लें. SSC CGL 2026 Intelligence Bureau Recruitment Notification Check Here General, OBC और EWS कैटेगरी के उम्मीदवारों को 100 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा. वहीं SC, ST, स्त्री और PH उम्मीदवारों के लिए आवेदन पूरी तरह फ्री रखा गया है. फीस का भुगतान डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग, IMPS और मोबाइल वॉलेट के जरिए किया जा सकता है. इतनी मिलेगी सैलरी इंटेलिजेंस ब्यूरो ASO पोस्ट को Pay Level-7 में रखा गया है. इसमें शुरुआती सैलरी 44,900 रुपये से शुरू होकर 1,42,400 रुपये तक जाती है. इसके अलावा DA, HRA, TA और दूसरी प्रशासनी सुविधाएं भी मिलती हैं. यही वजह है कि SSC CGL की यह पोस्ट सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली नौकरियों में शामिल रहती है. यह भी पढ़ें: CBI, इनकम टैक्स, मंत्रालय में नौकरी का मौका, SSC CGL 2026 में 12000 से ज्यादा वैकेंसी, देखें पूरी डिटेल्स The post इंटेलिजेंस ब्यूरो में ASO बनने का मौका, सैलरी होगी 1.4 लाख से ज्यादा appeared first on Naya Vichar.

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Raja Shivaji: रितेश देशमुख की मां बनने पर भाग्यश्री ने तोड़ी चुप्पी, कहा- मना करने का सवाल ही नहीं था

Raja Shivaji: रितेश देशमुख की मां बनने पर भाग्यश्री ने तोड़ी चुप्पी, कहा- मना करने का सवाल ही नहीं था। मराठी सिनेमा की बड़ी फिल्मों में शामिल हो चुकी ‘राजा शिवाजी’ बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है. करीब 100 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म में रितेश देशमुख ने छत्रपति शिवाजी महाराज का किरदार निभाया है. वहीं भाग्यश्री फिल्म में राजमाता जिजाबाई के रोल में नजर आईं. दिलचस्प बात यह है कि भाग्यश्री और रितेश की उम्र में सिर्फ 10 साल का अंतर है. ऐसे में कई लोगों ने इस कास्टिंग पर सवाल भी उठाए. अब भाग्यश्री ने एक इंटरव्यू में इस पर बात की. ‘इतिहास बनाने वाली भूमिका को मना नहीं कर सकती थी’ -भाग्यश्री ज़ूम को दिए इंटरव्यू में भाग्यश्री ने कहा, “जब आपको ऐसा किरदार निभाने का मौका मिलता है, जिसकी कहानियां सुनते हुए आप बड़े हुए हो, तब उसे मना करने का सवाल ही नहीं उठता. इसके अलावा जिजाऊ एक युवा मां थीं.” उन्होंने आगे कहा, “संतोष सिवन सर ने मुझे फोन करके कहा था, ‘सॉरी, मुझे कैमरे के जरिए आपको थोड़ा ज्यादा उम्र का दिखाना पड़ा, क्योंकि आप अब भी बहुत युवा लगती हैं. यह मेरे लिए बहुत बड़ा कॉम्प्लिमेंट है.” बचपन से सुनती आई हैं शिवाजी महाराज की कहानियां भाग्यश्री ने कहा, “शिवाजी महाराज की कहानियां हमें शायद गोल्डीलॉक्स या हैंसेल-ग्रेटल की कहानियों से भी पहले सुनाई जाती थीं. जहां शिशु समुद्र किनारे रेत के घर बनाते थे, हम मिट्टी से शिवाजी का किला बनाया करते थे.” बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है फिल्म ‘राजा शिवाजी’ 1 मई को मराठी, हिंदी और तेलुगु भाषाओं में रिलीज हुई थी. फिल्म ने अब तक दुनियाभर में करीब 111 करोड़ की कमाई कर ली है. फिल्म में रितेश देशमुख सिर्फ अभिनेता ही नहीं, बल्कि निर्देशक और को-प्रोड्यूसर भी हैं. फिल्म में संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, विद्या बालन, फरदीन खान, सचिन खेडेकर और जेनेलिया देशमुख जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं. यह भी पढें- Drishyam 3 Hindi Update: क्या अक्षय खन्ना को रिप्लेस कर रहे हैं प्रकाश राज? अभिनेता ने खुद बताई सच्चाई The post Raja Shivaji: रितेश देशमुख की मां बनने पर भाग्यश्री ने तोड़ी चुप्पी, कहा- मना करने का सवाल ही नहीं था appeared first on Naya Vichar.

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जामताड़ा पुलिस ने 5 साइबर अपराधियों को दबोचा, बैंक अधिकारी बनकर करते थे ठगी

जामताड़ा से उमेश कुमार की रिपोर्ट Jamtara News: साइबर अपराध पर लगातार शिकंजा कस रही जामताड़ा पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. एसपी शंभु कुमार सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि साइबर थाना प्रभारी राजेश मंडल के नेतृत्व में छापेमारी कर करमाटांड़ और नारायणपुर थाना क्षेत्र से पांच साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है.  मट्टांड़ गांव में रंगे हाथ पकड़े गए आरोपी  प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि करमाटांड़ थाना क्षेत्र के गांव मट्टांड़ स्थित विष्णु मंडल के घर पर छापेमारी के दौरान दो अपराधियों को साइबर ठगी करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया. वहीं सियाटॉड और झिलुवा जंगल क्षेत्र से एक अन्य आरोपी को पकड़ा गया. दूसरी ओर नारायणपुर थाना क्षेत्र के लोकनियां गांव में किशोर दास के घर पर छापेमारी कर दो अन्य साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया. आरोपियों की पहचान  गिरफ्तार आरोपियों में विष्णु मंडल, सचिन मंडल, सागर नायक, किशोर दास और विश्वजीत दास शामिल हैं. विश्वजीत दास मूल रूप से पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर का निवासी है, जो वर्तमान में लोकनियां गांव में रह रहा था. पुलिस ने आरोपियों के पास से 15 मोबाइल फोन, 14 सिम कार्ड, 4 एटीएम कार्ड, 2 लैपटॉप और 50 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं.    बैंक अधिकारी बनकर करते थे ठगी  एसपी ने कहा कि बरामद सामान के आधार पर पुलिस को बड़े साइबर नेटवर्क के संचालन की आशंका है. जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी खुद को बैंक अधिकारी बताकर लोगों को क्रेडिट और डेबिट कार्ड बंद होने का झांसा देते थे. इसके बाद वे लोगों से बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी हासिल कर फोनपे और गूगल पे के माध्यम से ठगी की वारदात को अंजाम देते थे. इसके अलावा बिजली विभाग का अधिकारी बनकर बिजली बिल भुगतान नहीं होने पर कनेक्शन काटने की धमकी देकर भी लोगों को ठगते थे. इस मामले में साइबर अपराध थाना में कांड संख्या 29/26 एवं 30/26 दर्ज किया गया है. कहा कि गिरफ्तार अपराधियों का नेटवर्क देश के विभिन्न राज्यों तक फैला हुआ है. वहीं आरोपी सागर नायक और किशोर दास पूर्व के साइबर अपराध मामलों में भी आरोप पत्रित रह चुके हैं. यह भी पढ़ें: भीषण गर्मी में बिजली आपूर्ति दुरुस्त रखने का निर्देश, JBVNL निदेशक ने किया सबस्टेशनों का निरीक्षण यह भी पढ़ें: झारखंड में बालू को लेकर बड़ा स्पोर्ट्स, स्टॉक यार्ड में बालू ही नहीं तो नीलामी का टेंडर कैसे निकाला The post जामताड़ा पुलिस ने 5 साइबर अपराधियों को दबोचा, बैंक अधिकारी बनकर करते थे ठगी appeared first on Naya Vichar.

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पाकिस्तान: बलूचिस्तान में रेलवे ट्रैक पर धमाका, उड़े ट्रेन के परखच्चे; कई मौतों की आशंका

Pakistan Balochistan Train Blast: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में रविवार को बड़ा विस्फोट हुआ, जिसके बाद एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई. पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस घटना में कम से कम 7 लोगों की मौत और 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए. घटना दक्षिण-पश्चिम पाकिस्तान के क्वेटा शहर में हुई, जो बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी है. रिपोर्ट्स के अनुसार धमाका रेलवे ट्रैक पर किया गया था और निशाना उस मालगाड़ी को बनाया गया, जो क्वेटा के कैंटोनमेंट इलाके की तरफ जा रही थी. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, धमाका इतना तेज था कि पास खड़ी एक ट्रेन की तीन बोगियां पटरी से उतर गईं, जबकि दो डब्बे पलट गए. रेल ट्रैक के पास खड़े वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा और पास के घर भी क्षतिग्रस्त हो गए. यह हादसा क्वेटा स्टेशन के चमन फाटक के पास हुआ. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना के बाद इलाके में फायरिंग की भी आवाज सुनी गई. हालांकि शुरुआती रिपोर्ट्स में यह साफ नहीं हो पाया कि फायरिंग किसने की और उसका धमाके से सीधा संबंध था या नहीं सोशल मीडिया में इस घटना का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें देखा जा सकता है कि एक ट्रेन में आग लगी हुई है और धुएं का गुबार ऊपर तक उठ रहा है. आप भी देखें- کوئٹہ ٹرین پر دھماکہ اس وقت جب وہ کوئٹہ – کینٹ سے مسافروں کو ریلوے اسٹیشن لے جارہی تھی۔ دھماکے میں بڑے پیمانے پر جانی نقصانات کی اطلات#Quetta #Balochistan pic.twitter.com/LSC7vpfqNI — Bàhot باھوٹ (@bahott_baloch) May 24, 2026 राहत बचाव के साथ-साथ जांच में जुटीं एजेंसियां स्थिति को देखते हुए अस्पताल में इमरजेंसी घोषित कर दी गई, ताकि घायलों को तुरंत चिकित्सा सहायता दी जा सके. बलूचिस्तान के गृह विभाग के विशेष सहायक बाबर यूसुफजई ने पत्रकारों को बताया कि धमाके की सूचना मिलते ही सुरक्षा बल और रेस्क्यू टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं. उन्होंने कहा कि पुलिस फिलहाल विस्फोट की प्रकृति और उसके पीछे की वजह का पता लगाने में जुटी हुई है. सेना और पुलिस बल मामले की छानबीन कर रहे हैं. हालांकि, अधिकारियों ने हादसे की वजह और धमाके की वजह से हुए जानमाल के नुकसान के बारे में आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है. क्यों संवेदनशील माना जाता है बलूचिस्तान? घटना के कई घंटे बाद तक किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली थी। हालांकि बलूचिस्तान लंबे समय से उग्रवाद और अलगाववादी हिंसा से प्रभावित रहा है. यहां कई सशस्त्र समूह सक्रिय हैं, जो प्रांत की आजादी की मांग करते रहे हैं. इससे पहले भी पाकिस्तान के इस इलाके में जाफर एक्सप्रेस नाम की ट्रेन को लगातार निशाना बनाया जाता रहा है. बलूचिस्तान पाकिस्तान का खनिज संपदा से भरपूर इलाका माना जाता है. यही क्षेत्र चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी चीन पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का अहम मार्ग भी है. अरबों डॉलर की इस परियोजना को चीन और पाकिस्तान दोनों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी वजह से इस इलाके में सुरक्षा चुनौतियां लंबे समय से बनी हुई हैं. ये भी पढ़ें:- अमेरिका के सामने ईरान का सरेंडर! परमाणु यूरेनियम छोड़ने को तैयार तेहरान, यूएस अधिकारियों का दावा- पीस डील पर बनी बात ये भी पढ़ें:- पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा के जनाजे में ‘धुरंधर’ का खौफ, AK-47 की फौज के साथ पहुंचे कई आतंकी सीपीईसी के लिए बातचीत करने चीन में हैं पाक पीएम पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इन दिनों चीन के दौरे पर हैं. अपने भारी-भरकम डेलिगेशन के साथ बीजिंग की यात्रा पर निकले शरीफ चीन के साथ इस कॉरिडोर के दूसरे चरण की फंडिंग की बात करने वाले हैं. हालांकि, सुरक्षा के लिए चुनौती बने इस अशांत क्षेत्र में चीन कितना निवेश करेगा, यह जल्द ही सामने आ जाएगा. हाल ही में पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने यहां का दौरा किया था. उन्होंने इस क्षेत्र में तैनात सैन्य कर्मियों से बात की थी. आए दिन पाकिस्तान आर्मी की ओर से इस जगह पर कंट्रोल करने के लिए ऑपरेशन किए जाते हैं, लेकिन अपनी आजादी के लिए जान को जोखिम में डालने वाले बलोच विद्रोही इसका बखूबी जवाब देते रहे हैं. The post पाकिस्तान: बलूचिस्तान में रेलवे ट्रैक पर धमाका, उड़े ट्रेन के परखच्चे; कई मौतों की आशंका appeared first on Naya Vichar.

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अमेरिका के सामने ईरान का सरेंडर! परमाणु यूरेनियम छोड़ने को तैयार तेहरान, यूएस अधिकारियों का दावा- पीस डील पर बनी बात

Iran Enriched Uranium Nuclear Deal: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अपने उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को छोड़ने के लिए तैयार हो गया है. इसे अमेरिका की अगुआई में तैयार हो रहे उस व्यापक समझौते का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका मकसद मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को रोकना है. द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि यह घटनाक्रम हालिया कूटनीतिक कोशिशों में सबसे बड़ा मोड़ माना जा रहा है. हालांकि अभी यह पूरी तरह तय नहीं हुआ है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार को किस प्रक्रिया के तहत छोड़ेगा. इस पर अंतिम समझौते के बाद विस्तार से बातचीत की जाएगी. अभी तय नहीं हुआ यूरेनियम हटाने का तरीका रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल समझौता शुरुआती स्तर पर है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार को किस तरीके से छोड़ेगा. अधिकारियों ने कहा कि यूरेनियम को किसी दूसरे देश भेजा जा सकता है, उसका संवर्धन स्तर कम किया जा सकता है, या उसे इस तरह निष्क्रिय बनाया जा सकता है ताकि उसका इस्तेमाल हथियार बनाने में न हो सके. इन तकनीकी पहलुओं पर आगे होने वाली परमाणु वार्ताओं में विस्तार से चर्चा होने की संभावना है. कितना यूरेनियम है ईरान के पास? अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अनुसार ईरान के पास इस समय लगभग 400 किलोग्राम ऐसा यूरेनियम मौजूद है, जिसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया जा चुका है. यह स्तर हथियार-ग्रेड यूरेनियम के काफी करीब माना जाता है. इजरायली अधिकारियों का लंबे समय से दावा रहा है कि इस सामग्री को और परिष्कृत करके कई परमाणु बम तैयार किए जा सकते हैं. 2015 वाले परमाणु समझौते जैसा मॉडल भी चर्चा में बातचीत में एक विकल्प उस मॉडल को भी माना जा रहा है जो 2015 के परमाणु समझौते के दौरान अपनाया गया था. तब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में ईरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम का बड़ा हिस्सा रूस भेज दिया था. अब भी ऐसी संभावना पर चर्चा चल रही है कि यूरेनियम को किसी तीसरे देश में भेजा जाए या उसका संवर्धन स्तर इतना कम कर दिया जाए कि वह हथियार बनाने लायक न रहे. बातचीत में सबसे बड़ी अड़चन बना था यही मुद्दा रिपोर्ट्स के अनुसार यूरेनियम भंडार का मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में सबसे कठिन बिंदुओं में शामिल था. ईरानी प्रतिनिधि चाहते थे कि इस पर फैसला बाद के चरणों में लिया जाए, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने साफ कर दिया कि शुरुआती समझौते में कम से कम सिद्धांत रूप में प्रतिबद्धता जरूरी होगी. अमेरिकी अधिकारियों ने कथित तौर पर मध्यस्थों के जरिए ईरान को यह संदेश भी दिया कि अगर शुरुआती समझौते में यूरेनियम भंडार को लेकर सहमति नहीं बनी, तो बातचीत टूट सकती है और सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है. ये भी पढ़ें:- कौन हैं जनरल अहमद वाहिदी? इंटरपोल का वांटेड तय करेगा ईरान का फ्यूचर! ये भी पढ़ें:- खुद को जीसस मानता था व्हाइट हाउस के बाहर फायरिंग करने वाला शख्स, सामने आई पहचान ट्रंप ने कहा था- समझौते के करीब हैं दोनों देश यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका और ईरान युद्ध खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा सामान्य बनाने के लिए एक अहम समझौते के करीब पहुंच चुके हैं. हालांकि ट्रंप ने प्रस्तावित डील की शर्तों का खुलासा नहीं किया था. उनके मुताबिक यह प्रस्तावित समझौता केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई क्षेत्रीय देश भी शामिल हैं. बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ईरान ने सिद्धांत रूप में अपने लगभग हथियार-स्तर तक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को छोड़ने की सहमति जताई है. आगे की बातचीत में क्या होगा? अरबों डॉलर की संपत्ति भी हो सकती है रिलीज अगले दौर की वार्ता में ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम के भविष्य पर भी चर्चा होने की उम्मीद है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका लंबे समय तक संवर्धन गतिविधियों पर रोक चाहता है, जबकि ईरान अपेक्षाकृत कम अवधि का प्रस्ताव दे रहा है. प्रस्तावित समझौते में विदेशों में फंसी ईरान की अरबों डॉलर की संपत्तियों को जारी करने का मुद्दा भी शामिल बताया जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार पुनर्निर्माण सहायता से जुड़े अधिकांश फंड तभी जारी किए जाएंगे, जब अंतिम परमाणु समझौता पूरा हो जाएगा. The post अमेरिका के सामने ईरान का सरेंडर! परमाणु यूरेनियम छोड़ने को तैयार तेहरान, यूएस अधिकारियों का दावा- पीस डील पर बनी बात appeared first on Naya Vichar.

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इबोला अलर्ट: भारत सरकार ने जारी की ट्रैवल एडवाइजरी, कई देशों की यात्रा से बचने की सलाह

Ebola Outbreak : विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इबोला फैलने को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किए जाने के बाद हिंदुस्तान प्रशासन भी सतर्क हो गई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों को कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, युगांडा और दक्षिण सूडान जैसे इबोला प्रभावित देशों की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है. प्रशासन ने कहा है कि इन देशों में संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा है. A press release by Ministry of Health and Family Welfare reads: “In light of the reported outbreaks of Ebola Disease in the Democratic Republic of the Congo (DRC) and Uganda, the World Health Organization (WHO), under the International Health Regulations (IHR), 2005, on 17 May… pic.twitter.com/ss7JL9JxNJ — Press Trust of India (@PTI_News) May 24, 2026 केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार (24 मई) को कहा कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में इबोला के बढ़ते मामलों को देखते हुए WHO ने 17 मई 2026 को इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है. मंत्रालय ने कहा कि WHO ने यह फैसला इंटरनेशनल हेल्थ रेगुलेशंस (IHR) 2005 के तहत लिया है. The post इबोला अलर्ट: हिंदुस्तान प्रशासन ने जारी की ट्रैवल एडवाइजरी, कई देशों की यात्रा से बचने की सलाह appeared first on Naya Vichar.

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सोनू-मोनू गैंग ने अनंत सिंह के समर्थक पर चलाई गोली, फेसबुक पोस्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद, समझिए पूरा मामला

Sonu-Monu Gang Vs Anant Singh: बिहार के नौरंगा जलालपुर गांव में एक बार फिर बाहुबली नेतृत्व और गैंगवार का तनाव देखने को मिला है. इस बार सोनू-मोनू गैंग ने कथित तौर पर अनंत सिंह के समर्थक और सरपंच पति मुकेश कुमार पर फायरिंग कर दी. घटना शनिवार की बताई जा रही है. फायरिंग के बाद इलाके में दहशत फैल गई और पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा. सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद यह विवाद एक फेसबुक पोस्ट से शुरू हुआ है. अनंत सिंह के समर्थक मुकेश कुमार ने 22 मई को एक पोस्ट डाली थी, जिसमें उन्होंने पुलिस की तारीफ की थी. इसी पोस्ट को लेकर सोनू-मोनू के परिवार में नाराजगी फैल गई. आरोप है कि सोनू–मोनू के पिता प्रमोद सिंह ने मुकेश से पोस्ट को लेकर सवाल किया और उसे हटाने के लिए कहा. मुकेश का कहना है कि उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया था, बल्कि केवल पंचायत और थाना पुलिस की सराहना की थी. लेकिन इसी बात पर दोनों पक्षों में बहस बढ़ गई. बहस से बढ़ा मामला, फिर चली गोलियां मुकेश कुमार ने मीडिया से बातचीत में बताया कि विवाद इतना बढ़ गया कि प्रमोद सिंह ने अपने बेटों सोनू और मोनू को मौके पर बुला लिया. आरोप है कि इसके बाद दोनों भाई अपने साथियों के साथ वहां पहुंचे और फायरिंग शुरू कर दी. मुकेश का दावा है कि उस पर दो राउंड गोलियां चलाई गईं, लेकिन वह किसी तरह बच गया. घटना पंचमहला थाना क्षेत्र के नौरंगा जलालपुर गांव की है. घटना के समय मुकेश पास के एक व्यक्ति के साथ पंचायत के काम से जा रहे थे, तभी रास्ते में यह विवाद हो गया. पुलिस पहुंची तो घर पर हुआ हंगामा फायरिंग की सूचना मिलते ही मुकेश ने तुरंत पुलिस को फोन किया. पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो सोनू–मोनू के घर पर काफी हंगामा देखने को मिला. बताया जा रहा है कि घर के बाहर मौजूद स्त्रीओं ने पुलिस को अंदर जाने से रोक दिया. करीब आधे घंटे तक गेट पर ही बहस चलती रही. इसी दौरान मौका पाकर सोनू और मोनू कथित तौर पर पीछे के रास्ते से फरार हो गए. कई थानों की पुलिस ने की छापेमारी घटना के बाद इलाके में पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है. हाथीदह, मरांची और पंचमहला सहित कई थानों की पुलिस ने सोनू–मोनू की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी है. पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और आगे की कार्रवाई की जा रही है. पहले भी हो चुका है बड़ा गोलीकांड यह पहली बार नहीं है जब इस इलाके में सोनू–मोनू और अनंत सिंह के समर्थकों के बीच टकराव हुआ हो. इससे पहले नौरंगा गोलीकांड में भी दोनों पक्ष आमने-सामने आ चुके हैं. 22 जनवरी 2025 को हुए उस विवाद में करीब 100 राउंड फायरिंग होने की बात सामने आई थी. उस घटना में अनंत सिंह और सोनू–मोनू दोनों पक्षों पर गंभीर आरोप लगे थे और कई लोग जेल भी गए थे. ग्रामीणों के मुताबिक उस दिन शाम को गांव में अचानक तनाव बढ़ा और गोलियां चलने लगीं. पुराने विवाद की जड़ क्या थी? पुराने विवाद की वजह जमीन और मजदूरी भुगतान से जुड़ा मामला बताया जाता है. जानकारी के अनुसार, ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले मुकेश कुमार से जुड़े पैसों को लेकर विवाद शुरू हुआ था. आरोप था कि बकाया पैसे को लेकर दबाव बनाया गया और इसी दौरान मारपीट और ताला लगाने जैसी घटनाएं हुईं. बाद में यह विवाद इतना बढ़ गया कि नेतृत्वक और बाहुबली गुट भी इसमें शामिल हो गए. पुलिस की जांच जारी, गांव में तनाव ताजा घटना के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है. अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपों की जांच की जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी. फिलहाल गांव में पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है. स्थानीय लोगों में डर और तनाव का माहौल बना हुआ है. Also Read: JDU से RJD और अब BJP का दामन थामेंगी रितु जायसवाल, ऐसा रहा बिहार की नेतृत्व में उनका सफर The post सोनू-मोनू गैंग ने अनंत सिंह के समर्थक पर चलाई गोली, फेसबुक पोस्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद, समझिए पूरा मामला appeared first on Naya Vichar.

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कौन हैं जनरल अहमद वाहिदी? इंटरपोल का वांटेड तय करेगा ईरान का फ्यूचर!

Ahmad Vahidi Iran: ईरान में इस समय सत्ता का ढांचा काफी उलझा हुआ और कई स्तरों में बंटा हुआ दिखाई दे रहा है. आधिकारिक रूप से सबसे बड़ा फैसला अब भी सुप्रीम लीडर के दफ्तर से ही माना जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और पश्चिमी थिंक टैंकों के मुताबिक जमीनी स्तर पर असली प्रभाव अब कई ताकतवर गुटों में बंट चुका है. खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गॉर्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और कुछ चुनिंदा नेतृत्वक चेहरों के बीच. इनमें आज का सबसे चर्चित नाम अहमद वाहिदी का है.  ईरान में आज के समय में सबसे ज्यादा प्रभावशाली संस्था आईआरजीसी को माना जा रहा है. यही संगठन ईरान की मिसाइल, सुरक्षा, विदेश नीति के सैन्य हिस्से और क्षेत्रीय नेटवर्क को संभालता है. कई रिपोर्ट्स में इसे ‘डिफैक्टो कंट्रोल’ यानी व्यवहारिक रूप से सत्ता पर पकड़ बताया गया है. अहमद वाहिदी इसी के मुखिया हैं. 28 फरवरी तक मोहम्मद पकपोर आईआरजीसी के कमांडर थे, लेकिन इसी दिन अमेरिका और इजराइल के हमलों में वह मारे गए. इसके बाद इस संस्था की कमान वाहिदी के हाथ आई.  विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध और सुरक्षा संकट के कारण आईआरजीसी का प्रभाव बढ़ गया है, विदेश नीति और होर्मुज स्ट्रेट जैसे मुद्दों पर अंतिम शब्द अक्सर आईआरजीसी का माना जा रहा है. तेल शिपिंग, परमाणु नीति और क्षेत्रीय मिलिशिया नेटवर्क पर भी उसका गहरा नियंत्रण है. इसके साथ ही रणनीतिक परमाणु बातचीत सहित इन सब मामलों में आईआरजीसी की भूमिका बहुत मजबूत हो चुकी है.  ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ का नाम भी पिछले दिनों उनके बयानों की वजह से चर्चा में था, लेकिन वाहिदी के बयान को ईरानी शासन तंत्र में काफी तवज्जो दी जा रही है. सैन्य परिषद जैसे ढांचे में उनका असर बढ़ा है. उन्हें ईरान के कट्टर राष्ट्रवादी और सुरक्षा रणनीतिकारों में गिना जाता है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और रणनीतिक विश्लेषणों के मुताबिक, वाहिदी का रुख अमेरिका के प्रति बेहद सख्त माना जाता है. अमेरिकी प्रशासन पहले भी उनके खिलाफ प्रतिबंध लगा चुकी है. क्या वाहिदी अब ईरान के सबसे ताकतवर लोगों में शामिल हैं? एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया कि युद्ध शुरू होने के बाद ईरान के अंदर असली निर्णय लेने की प्रक्रिया काफी जटिल हो गई है और वाहिदी उन लोगों में हैं जो पर्दे के पीछे बड़ा प्रभाव रखते हैं. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि अहमद वाहिदी ने सुरक्षा और खुफिया पदों पर नियुक्तियों में दखल दिया, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की कई पसंदों को रोका गया और युद्धकाल में संवेदनशील फैसले आईआरजीसी के नियंत्रण में रखने की बात कही गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने बार-बार यह संदेश दिया कि ईरान दबाव में झुकने वाला नहीं है. कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में कहा गया कि वाहिदी अमेरिकी दबाव और सैन्य धमकियों के जवाब में आक्रामक रणनीति का समर्थन कर रहे हैं. क्रिटिकल थ्रेट्स प्रोजेक्ट की रिपोर्ट के अनुसार, वाहिदी का गुट अमेरिका के साथ समझौते में ज्यादा रियायत देने के खिलाफ माना जाता है. वहीं कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि वे यह मानते हैं कि अगर अमेरिका फिर हमला करता है तो ईरान को और कड़ी सैन्य प्रतिक्रिया देनी चाहिए. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकी पर उन्होंने कहा था कि अगर ईरान पर फिर से हमला हुआ तो यह युद्ध एक इलाके तक सीमित नहीं रहेगा. दुश्मनों को भारी तबाही झेलनी पड़ेगी. ये भी पढ़ें:- पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा के जनाजे में ‘धुरंधर’ का खौफ, AK-47 की फौज के साथ पहुंचे कई आतंकी पीस टॉक पर वाहिदी का क्या मत है? यही सबसे महत्वपूर्ण सवाल है. हाल के हफ्तों में अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में कई दौर की बातचीत हुई है. लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान के अंदर खुद इस बात पर मतभेद हैं कि अमेरिका के साथ कितना आगे बढ़ना चाहिए. कुछ रिपोर्टों के अनुसार संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ बातचीत के पक्ष में दिखाई दिए, जबकि अहमद वाहिदी अधिक सख्त रुख चाहते थे. इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर की रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों नेताओं के बीच अमेरिका से बातचीत को लेकर मतभेद सामने आए. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि वाहिदी पूरी तरह बातचीत के खिलाफ हैं. बल्कि रिपोर्ट्स बताती हैं कि वे ऐसी डील चाहते हैं जिसमें, ईरान की सैन्य ताकत कमजोर न हो, परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह अमेरिकी शर्तें न मानी जाएं, होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण बना रहे, आईआरजीसी की भूमिका कम न हो.  विश्लेषकों का मानना है कि वाहिदी जैसे सैन्य नेता यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि तेल मार्गों पर ईरान की पकड़ बनी रहे. इसके साथ ही उनका प्लान है कि अमेरिका को क्षेत्र में खुली छूट न मिले और युद्धविराम की स्थिति में भी सैन्य दबाव बरकरार रखा जाए फिलहाल, अहमद वाहिदी ईरान में बदलाव का बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं. हालांकि, ईरान की नेतृत्व बेहद जटिल है और वहां फैसले कई शक्ति केंद्रों के बीच होते हैं. इसलिए यह साफ कहना मुश्किल है कि अंतिम नियंत्रण सिर्फ वाहिदी के हाथ में है. लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष, शांति वार्ता और सुरक्षा नीति में उनका असर अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुका है. ये भी पढ़ें:- ईरान ने ट्रंप को किया ट्रोल: हमशक्ल भैंसे का वीडियो शेयर कर लिखा- ‘पुअर थिंग’ कौन हैं अहमद वाहिदी? अहमद वाहिदी आईआरजीसी से लंबे समय से जुड़े रहे हैं.  उनका असली नाम ‘वाहिद शाहचेराघी’ बताया जाता है. वह 1979 की  ईरान की इस्लामिक क्रांति के शुरुआती दौर से ही आईआरजीसी से जुड़े रहे हैं. 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान उन्होंने खुफिया और सैन्य भूमिकाओं में तेजी से पहचान बनाई. बाद में वे आईआरजीसी इंटेलिजेंस से जुड़े, कुद्स फोर्स के शुरुआती कमांडरों में शामिल रहे और विदेशों में ईरान के नेटवर्क बनाने में भूमिका निभाई. कासिम सुलेमानी से क्या रिश्ता था? रिपोर्ट्स के मुताबिक 1958 में शिराज में जन्मे वाहिदी 1988 से 1997 तक कुद्स फोर्स का नेतृत्व कर चुके थे. बाद में यह जिम्मेदारी कासिम सुलेमानी को मिली, जिन्होंने आगे चलकर पूरे मध्य पूर्व में ईरान का प्रभाव बढ़ाया. यानी सुलेमानी से पहले वाहिदी ही उस नेटवर्क के प्रमुख चेहरा थे. ‘ईरान

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‘कॉकरोच पार्टी’ का पाकिस्तान कनेक्शन! अभिजीत दीपके ने दिखाया डेटा

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शनिवार (23 मई) को एक स्क्रीन रिकॉर्डिंग एक्स पर शेयर किया. उन्होंने दावा किया कि अकाउंट “हैक” होने से पहले उनके इंस्टाग्राम ऑडियंस का 94 फीसदी से ज्यादा हिस्सा इंडिया से था. CJP अकाउंट्स को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ब्लॉक किए जाने के बाद विवाद बढ़ता नजर आ रहा है. कॉकरोच जनता पार्टी पिछले कई दिनों से ट्रेंड कर रहा है. मजाक के तौर पर शुरू हुई यह पार्टी देखते ही देखते सोशल मीडिया पर काफी फेमस हो गई. बड़ी संख्या में लोगों ने खुद को मजाकिया अंदाज में “कॉकरोच” कहना शुरू कर दिया. इसके बाद CJP सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स की संख्या बीजेपी से भी काफी आगे निकल गई. हालांकि, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने हाल ही में दावा किया कि पार्टी का X अकाउंट हिंदुस्तान में ब्लॉक कर दिया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि उनके इंस्टाग्राम अकाउंट और वेबसाइट के साथ भी इसी तरह की कार्रवाई की गई है. CJP के 94.1 फीसदी फॉलोअर्स इंडिया से अभिजीत दीपके ने X पर एक स्क्रीन रिकॉर्डिंग शेयर कर बताया कि CJP के इंस्टाग्राम अकाउंट को 22 अप्रैल से 21 मई के बीच 1.6 बिलियन व्यूज मिले. उन्होंने दावा किया कि इस दौरान पार्टी से करीब 1.2 करोड़ नए फॉलोअर्स जुड़े, जो इसकी तेजी से बढ़ती ऑनलाइन लोकप्रियता दिखाता है. स्क्रीन रिकॉर्डिंग में पार्टी के इंस्टाग्राम ऑडियंस का डेमोग्राफिक डेटा भी दिखाया गया. इसके मुताबिक, 94.1 फीसदी फॉलोअर्स इंडिया से थे, जबकि 1 फीसदी अमेरिका, 0.7 फीसदी ब्रिटेन और करीब 0.6-0.6 फीसदी फॉलोअर्स कनाडा और यूएई से जुड़े हुए थे. This is the screen recording of our audience demographic which we have shared with media before our account was hacked. More than 94% of the audience is from India. Why is a Union Minister @KirenRijiju labelling Indian youth as Pakistani? https://t.co/av0WnxIOui pic.twitter.com/W4YY1LL1IJ — Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) May 23, 2026 अभिजीत दीपके ने लिखा, “हमारी 94 फीसदी से ज्यादा ऑडियंस हिंदुस्तान से है. फिर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू हिंदुस्तानीय युवाओं को पाकिस्तानी क्यों बता रहे हैं? उन्होंने यह भी कहा कि स्क्रीन रिकॉर्डिंग में दिखाया गया डेटा इंस्टाग्राम अकाउंट “हैक” होने से पहले का है. किरेन रिजिजू ने एक्स पर क्या लिखा केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने एक्स पर लिखा कि मुझे उन लोगों पर तरस आता है जो सोशल मीडिया पर पाकिस्तान और जॉर्ज सोरोस गैंग से फॉलोअर्स जुटाने की कोशिश करते हैं. उनका यह बयान सोशल मीडिया पर चल रहे विवाद के बीच काफी चर्चा में आ गया. यूजर इसे CJP से जोड़कर देखने लगे. I pity those who seek their followers in social media from Pakistan & George Soros gang. — Kiren Rijiju (@KirenRijiju) May 23, 2026 The post ‘कॉकरोच पार्टी’ का पाकिस्तान कनेक्शन! अभिजीत दीपके ने दिखाया डेटा appeared first on Naya Vichar.

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