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Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

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बिना BTech के भी बन सकते हैं डेटा साइंटिस्ट, बस सीखें ये स्किल्स

How to become a Data Scientist: आज के डिजिटल दौर में डेटा ही सबकुछ है. बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने डिसीजन डेटा के बेसिस पर लेती हैं, और यही काम करता है एक डेटा साइंटिस्ट. अगर आप भी इस फील्ड में करियर बनाना चाहते हैं, तो आपको सही पढ़ाई और स्किल्स की जरूरत होगी. आइए जानते हैं डेटा साइंटिस्ट बनने के लिए क्या पढ़ाई करनी पड़ती है.  डेटा साइंटिस्ट क्या करता है? डेटा साइंटिस्ट बड़ी मात्रा में डेटा को समझता है, उसका एनालिसिस करता है और उससे जरूरी इंफॉर्मेशन निकालता है. इससे कंपनियों को सही डिसीजन लेने में मदद मिलती है.  12वीं के बाद कौन सा स्ट्रीम चुनें? अगर आप शुरू से ही डेटा साइंस में जाना चाहते हैं, तो 12वीं में साइंस (मैथ्स के साथ) लेना सबसे बेहतर होता है. क्योंकि इसमें आपको मैथ्स, स्टैटिस्टिक्स और कंप्यूटर की बेसिक डिटेल्स मिलती हैं. ये तीनों चीजें डेटा साइंस के लिए बहुत जरूरी हैं.  ग्रेजुएशन में क्या पढ़ें? 12वीं के बाद आपको ऐसी डिग्री चुननी चाहिए जो डेटा साइंस से जुड़ी हो, जैसे: BTech (कंप्यूटर साइंस / IT): ये सबसे पॉपुलर ऑप्शन है.  इसमें आपको प्रोग्रामिंग, डेटा स्ट्रक्चर और AI की जानकारी मिलती है. BSc (मैथमैटिक्स / स्टेटिस्टिक्स / डेटा साइंस): अगर आपको मैथ्स पसंद है, तो ये भी अच्छा ऑप्शन है.  BCA: इसमें आप कंप्यूटर और कोडिंग की अच्छी समझ बना सकते हैं.  How to become a Data Scientist: कौन-कौन सी स्किल्स जरूरी हैं? सिर्फ डिग्री से काम नहीं चलेगा, आपको कुछ जरूरी स्किल्स भी सीखनी होंगी: प्रोग्रामिंग लैंग्वेज  स्टेटिस्टिक्स और मैथ्स  मशीन लर्निंग  डेटा विजुलाइजेशन   SQL क्या बिना BTech के भी बन सकते हैं डेटा साइंटिस्ट? अगर आपने BSc, BCA या किसी और फील्ड से पढ़ाई की है, तब भी आप ऑनलाइन कोर्स और प्रैक्टिस से डेटा साइंटिस्ट बन सकते हैं. आजकल कई प्लेटफॉर्म हैं जहां से आप सीख सकते हैं: ऑनलाइन कोर्स यूट्यूब प्रोजेक्ट बनाकर प्रैक्टिस How to become a Data Scientist: शुरुआत कैसे करें? Python सीखना शुरू करें.  बेसिक स्टैटिस्टिक्स समझें.  छोटे-छोटे प्रोजेक्ट बनाएं.  Kaggle जैसी साइट पर प्रैक्टिस करें.  इंटर्नशिप के लिए अप्लाई करें.  सैलरी और करियर स्कोप डेटा साइंटिस्ट आज के समय की सबसे हाई डिमांड जॉब्स में से एक है. फ्रेशर की सैलरी लगभग 4 से 8 लाख सलाना हो सकती है. वहीं एक्सपीरियंस के बाद सैलरी 10 से 25 लाख या उससे ज्यादा भी हो सकती है. आईटी, बैंकिंग, हेल्थकेयर, ई-कॉमर्स हर जगह इसकी जरूरत है. यह भी पढ़ें: कंप्यूटर चलाना जानते हैं? ये 5 प्रशासनी नौकरियां दिलाएंगी शानदार करियर The post बिना BTech के भी बन सकते हैं डेटा साइंटिस्ट, बस सीखें ये स्किल्स appeared first on Naya Vichar.

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अभिषेक बनर्जी का VVIP रसूख खत्म, घर और दफ्तर की सुरक्षा घटी, अब आम आदमी की तरह होगा मूवमेंट

खास बातें खत्म हुआ अभिषेक का वीवीआईपी रसूख क्या-क्या बदला? ‘जेड’ श्रेणी सुरक्षा रहेगी जारी, पर रसूख में कमी बदले नेतृत्वक हालात का असर? Abhishek Banerjee Security Removed: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बीच तृणमूल कांग्रेस के दूसरे सबसे ताकतवर नेता और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी कटौती की गयी है. बुधवार सुबह कैमक स्ट्रीट स्थित उनके कार्यालय और हरीश मुखर्जी रोड स्थित आवास के बाहर से अतिरिक्त पुलिस फोर्स को हटा लिया गया. खत्म हुआ अभिषेक का वीवीआईपी रसूख समीक्षा के बाद सुरक्षा के लिए लगाये गये सिजर बैरिकेड्स भी हटा दिये गये. हालांकि, वे अब भी ‘जेड’ श्रेणी की सुरक्षा में रहेंगे, लेकिन सड़क पर मिलने वाला वो ‘वीवीआईपी’ रसूख अब इतिहास की बात हो गयी है. क्या-क्या बदला? क्षेत्रीय सुरक्षा समीक्षा के बाद नये निर्देशों के तहत अभिषेक बनर्जी के सुरक्षा प्रोटोकॉल में कुछ बड़े बदलाव हुए हैं. पहले अभिषेक बनर्जी के कहीं भी जाने से पहले पुलिस की गाड़ियां मार्ग की जांच करती थीं और यातायात रोक दिया जाता था. अब सड़क से अन्य वाहनों की आवाजाही को नहीं रोका जायेगा. हरीश मुखर्जी रोड स्थित उनके आवास के सामने फुटपाथ पर बैरिकेड्स तो रखे दिखे, लेकिन वहां तैनात रहने वाले पुलिसकर्मी अब गायब हैं. निर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के घरों के प्रवेश द्वार पर लगे धातु के मुड़ने वाले ‘सिजर बैरिकेड्स’ हटा लिये गये. घर के बाहर बना पुलिस केबिन अभी वहां मौजूद है, लेकिन वह अब पहले की तरह सुरक्षाकर्मियों से लैस नहीं है. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें Abhishek Banerjee Security Removed: ‘जेड’ श्रेणी सुरक्षा रहेगी जारी, पर रसूख में कमी सुरक्षा अधिकारियों ने साफ किया है कि अभिषेक बनर्जी की व्यक्तिगत सुरक्षा श्रेणी में कोई बदलाव नहीं हुआ है. उन्हें ‘जेड प्लस’ या ‘जेड’ स्तर की सुरक्षा मिलती रहेगी, लेकिन क्षेत्र प्रबंधन (Area Management) के नाम पर जो अतिरिक्त तामझाम और भारी पुलिस बल तैनात रहता था, उसे वापस बुला लिया गया है. इसे भी पढ़ें : पालटेचे एई बार, एलो बीजेपी प्रशासन…, बंगाल में भाजपा के विजय गान वीडियो में दिखा मोदी का जादू और जीत का जोश बदले नेतृत्वक हालात का असर? जानकारों का मानना है कि चुनाव परिणामों के बाद प्रशासन अब नयी प्रशासन के गठन की तैयारी में है. ऐसे में निवर्तमान प्रशासन के रसूखदार नेताओं के लिए जो विशेष इंतजाम किये गये थे, उन्हें सामान्य किया जा रहा है. मंगलवार को ममता बनर्जी के घर के पास से भी सुरक्षा घेरा कम किया गया था और अब अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में यह बदलाव संकेत दे रहा है कि बंगाल की नौकरशाही ने नयी व्यवस्था के अनुसार खुद को ढालना शुरू कर दिया है. इसे भी पढ़ें प्रणाम बंगाल! अंगार से निकलेगा उन्नत पश्चिम बंगाल, शुभेंदु अधिकारी ने फेसबुक पर लिखा भावुक पोस्ट ममता बनर्जी की जनादेश के खिलाफ मुख्यमंत्री बने रहने की जिद, संविधान विशेषज्ञों से जानें 7 मई को क्या होगा ममता बनर्जी बोलीं- इस्तीफा नहीं दूंगी, दीदी के बयान पर बंगाल के अधिकारी ले रहे मजे- हमें 2-2 सीएम मिलेंगे ममता बनर्जी की जिद पर भड़के जेठमलानी, कहा- इस्तीफा न दें, तो धक्के मारकर निकालें, वह अब ऑफिस में घुसपैठिया The post अभिषेक बनर्जी का VVIP रसूख खत्म, घर और दफ्तर की सुरक्षा घटी, अब आम आदमी की तरह होगा मूवमेंट appeared first on Naya Vichar.

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विजय के पास ‘जादुई आंकड़ा’ नहीं, राज्यपाल ने भंग की विधानसभा; शपथ ग्रहण पर संशय

Vijay Oath Ceremony: विजय ने बुधवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की और प्रशासन बनाने का दावा पेश किया. कांग्रेस का साथ मिलने के बाद विजय ने 107+5= 112 विधायकों का समर्थन वाला पत्र राज्यपाल को सौंपा है. हालांकि राज्यपाल ने विजय को 118 विधायकों के साथ दोबारा बुलाया है. राज्यपाल ने विधानसभा किया भंग शपथ ग्रहण पर सस्पेंस के बीच तमिलनाडु के राज्यपाल ने 16वीं तमिलनाडु विधानसभा को भंग कर दिया है. यह जानकारी लोक भवन की ओर से दी गई है. Governor of Tamil Nadu has dissolved the 16th Tamil Nadu Legislative Assembly with effect from 5th May 2026: Lok Bhavan pic.twitter.com/C4NgizLU3t — ANI (@ANI) May 6, 2026 7 मई को विजय की ताजपोशी पर सस्पेंस विजय के कल मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने की संभावना कम है, क्योंकि उनके पास पूर्ण बहुमत का आंकड़ा स्पष्ट नहीं है. TVK ने 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीती हैं. विजय द्वारा दो सीटों में से एक से इस्तीफा देने के बाद विधानसभा में TVK की प्रभावी संख्या 107 हो जाएगी. TVK सूत्रों का दावा: 7 मई को ही होगा शपथ ग्रहण इन अटकलों के बीच TVK सूत्रों ने दावा किया है कि विजय 7 मई को ही मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां तेजी से चल रही हैं. कांग्रेस ने टीवीके को दिया समर्थन कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन की सार्वजनिक घोषणा की है, लेकिन अभी यह पता नहीं चला है कि अन्य किस-किसने विजय की पार्टी को समर्थन की पेशकश की है. विधानसभा चुनाव में DMK ने 59, AIADMK ने 47, कांग्रेस ने 4, PMK ने चार, IUML ने दो, CPI ने दो, VCK ने दो, CPI(M) ने दो, वहीं BJP, DMDK तथा AMMK ने एक-एक सीट पर जीत दर्ज की है. ये भी पढ़ें: तमिलनाडु में कांग्रेस ने क्यों दिया डीएमके को गच्चा? जानिए 1971 से अबतक कैसा रहा गठबंधन… The post विजय के पास ‘जादुई आंकड़ा’ नहीं, राज्यपाल ने भंग की विधानसभा; शपथ ग्रहण पर संशय appeared first on Naya Vichar.

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SRH vs PBKS: पंजाब किंग्स ने जीता टॉस, हैदराबाद पहले करेगी बल्लेबाजी; ऐसी है दोनों टीमों की प्लेइंग-11

SRH vs PBKS: पंजाब किंग्स इस मुकाबले में एक बदलाव के साथ उतरी है. शशांक सिंह की टीम में वापसी हुई है. वहीं सनराइजर्स हैदराबाद की टीम में नीतीश रेड्डी की वापसी हुई है. पंजाब किंग्स की टीम 9 में से 6 मुकाबले जीतकर पॉइटंस टेबल में शीर्ष पर मौजूद है. जबकि सनराइजर्स हैदराबाद 10 में से 6 मुकाबले जीतकर पॉइंट्स टेबल में तीसरे पायदान पर है. ऐसे ही दोनों टीमों की प्लेइंग-11 सनराइजर्स हैदराबाद: अभिषेक शर्मा, ट्रेविस हेड, ईशान किशन (विकेटकीपर), हेनरिक क्लासेन, सलिल अरोड़ा, स्मरण रविचंद्रन, नीतीश कुमार रेड्डी, पैट कमिंस (कप्तान), शिवांग कुमार, ईशान मलिंगा, साकिब हुसैन. इम्पैक्ट सब : अनिकेत वर्मा, प्रफुल हिंगे, लियाम लिविंगस्ट, हर्ष दुबे और हर्षल पटेल. पंजाब किंग्स: प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), कूपर कोनोली, श्रेयस अय्यर (कप्तान), शशांक सिंह, सूर्यांश शेडगे, मार्कस स्टोइनिस, मार्को जानसन, लॉकी फर्ग्यूसन, विजयकुमार विशाक, अर्शदीप सिंह, युजवेंद्र चहल. इम्पैक्ट सब : प्रियांश आर्य, हरप्रीत बरार, जेवियर बार्टलेट, विष्णु विनोद और मुशीर ख़ान. 🚨Toss update from Hyderabad🚨@PunjabKingsIPL won the toss and elected to bowl first against @Sunrisers Updates ▶️ https://t.co/8L0gAuxW78#TATAIPL | #KhelBindaas | #SRHvPBKS pic.twitter.com/eGTrGlyQfb — IndianPremierLeague (@IPL) May 6, 2026 टॉस जीतने के बाद श्रेयस अय्यर ने क्या कहा? पंजाब किंग्स के कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया. उन्होंने टॉस जीतने के बाद कहा कि जिन भी मैचों में हमें हार मिली है, उससे हमने काफी कुछ सीखा है. ट्रैवलिंग को लेकर हमें अभी तक कोई शिकायत नहीं है. हर कोई चीजों को बेहद प्रोफेशनल तरीके से हैंडल कर रहा है. पिछले मैच में हैदराबाद ने चेज किया था, इसलिए मैंने सोचा कि पहले गेंदबाजी करूं और उन्हें पहले बल्लेबाजी करने का मौका दूं. The post SRH vs PBKS: पंजाब किंग्स ने जीता टॉस, हैदराबाद पहले करेगी बल्लेबाजी; ऐसी है दोनों टीमों की प्लेइंग-11 appeared first on Naya Vichar.

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रवींद्र जयंती पर 9 मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ लेंगे भाजपा के नये सीएम, मौजूद रहेंगे पीएम मोदी और शाह

BJP Government Oath Ceremony: पश्चिम बंगाल की नेतृत्व में एक नये युग का सूर्योदय होने जा रहा है. 15 साल के ममता बनर्जी शासन के अंत के बाद अब हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) अपनी पहली प्रशासन के गठन के लिए तैयार है. ब्रिगेड मैदान में होगा भव्य समारोह प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने बुधवार को ऐलान किया कि नयी प्रशासन का भव्य शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत दिल्ली के कई दिग्गज नेता इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनेंगे. खास बात यह है कि इस तारीख का चयन भाजपा ने बेहद सोच-समझकर किया है. रवींद्र जयंती और शपथ ग्रहण भाजपा का बड़ा सांस्कृतिक दांव 9 मई की तारीख बंगाल के लिए बेहद खास है. बांग्ला पंचांग के अनुसार, यह बैसाख का 25वां दिन है. इसे पूरे विश्व में रवींद्र जयंती (कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती) के रूप में मनाया जाता है. टीएमसी अक्सर भाजपा को ‘बाहरी लोगों की पार्टी’ और बंगाली संस्कृति से अलग बताती रही है. रवींद्र जयंती के दिन शपथ ग्रहण कर भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि वह बंगाल के लोकाचार और बौद्धिक विरासत के साथ गहराई से जुड़ी है. इसे भी पढ़ें : पालटेचे एई बार, एलो बीजेपी प्रशासन…, बंगाल में भाजपा के विजय गान वीडियो में दिखा मोदी का जादू और जीत का जोश कौन होगा बंगाल का मुख्यमंत्री? सस्पेंस बरकरार भले ही शपथ ग्रहण की तारीख तय हो गयी हो, लेकिन ‘कैप्टन’ के नाम पर अभी भी पर्दा गिरा हुआ है. नवनिर्वाचित विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक 8 मई की शाम को बुलायी गयी है. इसी बैठक में औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगेगी. पार्टी आलाकमान ने अभी तक किसी एक नाम को आगे नहीं किया है, जिससे नेतृत्वक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें शपथ ग्रहण समारोह में होगा दिग्गजों का जमावड़ा बंगाल के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के अलावा भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की भी उम्मीद है. इसे भी पढ़ें : ममता बनर्जी की जिद पर भड़के जेठमलानी, कहा- इस्तीफा न दें, तो धक्के मारकर निकालें, वह अब ऑफिस में घुसपैठिया BJP Government Oath Ceremony: ऐतिहासिक जीत, भव्य शुरुआत भाजपा ने बंगाल में वर्षों के कड़े संघर्ष के बाद प्रचंड जीत हासिल की है. 207 सीटों के साथ बहुमत प्राप्त करने के बाद अब पार्टी राज्य में सुशासन और सोनार बांग्ला के अपने वादे को जमीन पर उतारने के लिए तैयार है. सुबह 10 बजे से शुरू होने वाला यह कार्यक्रम बंगाल की नेतृत्व में भाजपा के स्थायी उदय को स्थापित करने वाला मील का पत्थर साबित होगा. इसे भी पढ़ें : बंगाल में खिला कमल, बीजेपी ने जनता को कहा- शुक्रिया, शुभेंदु अधिकारी बोले- विकास ने डर को हराया, सुशासन के नये युग की शुरुआत शपथ ग्रहण से पहले कोलकाता को भगवा झंडों से पाटा भाजपा प्रशासन के शपथ ग्रहण से पहले ही पूरी कोलकाता नगरी को भगवा झंडों से पाट दिया गया है. सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं. अब सबकी निगाहें 8 मई की विधायक दल की बैठक पर टिकी हैं, जब बंगाल के नये ‘मुख्यमंत्री’ के नाम से पर्दा उठेगा. इसे भी पढ़ें सत्ता छिनते ही TMC के अस्तित्व पर संकट, जानें क्यों अब ममता बनर्जी के लिए वापसी की राह है कठिन ममता बनर्जी बोलीं- इस्तीफा नहीं दूंगी, दीदी के बयान पर बंगाल के अधिकारी ले रहे मजे- हमें 2-2 सीएम मिलेंगे बंगाल में बीजेपी की जीत मैनेजमेंट नहीं जनादेश है, कोलकाता में ढहा दीदी का मुस्लिम किला, बोले अमित मालवीय बंगाल में भाजपा की जीत से ढाका में हड़कंप, बांग्लादेशी मीडिया ने बताया ‘बड़ा संकट’, सांसद को डराने लगा शरणार्थी संकट The post रवींद्र जयंती पर 9 मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ लेंगे भाजपा के नये सीएम, मौजूद रहेंगे पीएम मोदी और शाह appeared first on Naya Vichar.

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डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ तगड़ा: 61 पैसे की शानदार बढ़त के साथ ₹94.57 के स्तर पर पहुंचा, जानें क्या है वजह

Rupee vs Dollar : हिंदुस्तानीय मुद्रा ‘रुपये’ के लिए आज का दिन काफी राहत भरा रहा. बुधवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 61 पैसे की बड़ी मजबूती के साथ 94.57 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ. पिछले कुछ समय से दबाव झेल रहे रुपये के लिए यह एक बड़ी रिकवरी मानी जा रही है. रुपये की मजबूती के 3 मुख्य कारण कच्चे तेल में भारी गिरावट: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ समझौते के संकेत देने के बाद वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड (कच्चा तेल) 8% से ज्यादा टूट गया और 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया. हिंदुस्तान के लिए कच्चा तेल सस्ता होने का सीधा मतलब है कम डॉलर बाहर जाना, जिससे रुपये को मजबूती मिलती है. ट्रंप का ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट : ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत में “बड़ी प्रगति” हुई है. उन्होंने जहाजों को सुरक्षा देने वाला ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ भी रोक दिया है. इस शांति की समाचार से दुनिया भर की मुद्राओं के मुकाबले डॉलर थोड़ा कमजोर हुआ, जिसका फायदा रुपये को मिला. RBI की ‘अप्रत्यक्ष’ रणनीति: बाजार के जानकारों के मुताबिक, हिंदुस्तानीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये को सहारा देने के लिए नई तकनीक अपना रहा है. सीधे तौर पर विदेशी मुद्रा भंडार खर्च करने के बजाय, प्रशासन बैंकों को ‘विदेशी मुद्रा बॉन्ड’ के जरिए डॉलर जुटाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है ताकि बाजार में डॉलर की सप्लाई बनी रहे. आज के कारोबार का उतार-चढ़ाव शुरुआत: रुपया डॉलर के मुकाबले 95.00 पर खुला. दिन का निचला स्तर: कारोबार के दौरान यह 95.18 तक भी गया. अंतिम स्थिति: 61 पैसे की छलांग लगाकर 94.57 पर बंद हुआ. पिछला बंद भाव: मंगलवार को रुपया 95.18 पर था. शेयर बाजार और डॉलर इंडेक्स रुपये के साथ-साथ आज सेंसेक्स में भी 940 अंकों की जोरदार तेजी देखी गई. वहीं, दुनिया की प्रमुख 6 मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती दिखाने वाला ‘डॉलर इंडेक्स’ भी 0.66% गिरकर 97.79 पर आ गया, जिसने हिंदुस्तानीय मुद्रा की राह आसान कर दी. आम आदमी पर क्या होगा असर ? रुपये के मजबूत होने से विदेशों से आयात होने वाली चीजें (जैसे मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कच्चा तेल) सस्ती होने की संभावना बढ़ती है. साथ ही, यह विदेशी निवेशकों का भरोसा भी बढ़ाता है. Also Read : अमेरिका-ईरान के बीच ‘शांति’ की समाचार से सेंसेक्स 941 अंक उछला, कच्चा तेल हुआ सस्ता The post डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ तगड़ा: 61 पैसे की शानदार बढ़त के साथ ₹94.57 के स्तर पर पहुंचा, जानें क्या है वजह appeared first on Naya Vichar.

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तमिलनाडु में कांग्रेस ने क्यों दिया डीएमके को गच्चा? जानिए 1971 से अबतक कैसा रहा गठबंधन…

Congress- DMK alliance : तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद जो परिणाम सामने आए हैं, वो प्रदेश में बदलाव का संकेत दे रही है. इस बदलाव में जनता ने टीवीके (Tamilaga Vettri Kazhagam) के नेता विजय के हाथों में प्रदेश की कमान सौंप दी है. इस बदली हुई परिस्थिति में कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़कर टीवीके की ओर अपना हाथ बढ़ाया और उसे प्रशासन बनाने में अपना समर्थन देने की बात कही है. चूंकि डीएमके और कांग्रेस का साथ बहुत पुराना है और दोनों ने एक साथ कई चुनाव भी लड़े हैं, यह सवाल लाजिमी है कि आखिर कांग्रेस ने डीएमके से ब्रेकअप क्यों किया और इनके संबंधों का इतिहास क्या है? कांग्रेस-डीएमके गठबंधन का इतिहास इंदिरा गांधी के साथ एम करुणानिधि कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन काफी पुराना है. हालांकि डीएमके का उदय कांग्रेस विरोध से हुआ था, लेकिन 1967 में कांग्रेस का विरोध करने वाली डीएमके 1971 में उनके साथ गठबंधन कर चुकी थी. 1969 में जब कांग्रेस का विभाजन हुआ, तो इंदिरा गुट ने खुद को मजबूत करने के लिए डीएमके साथ समझौता किया था.उस वक्त दोनों का गठबंधन लोकसभा चुनाव और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए बना था. उस वक्त एम करुणानिधि पार्टी के सर्वेसर्वा थे. 2004 में जब बीजेपी के खिलाफ विपक्ष गोलबंद हुआ, तो यूपीए में डीएमके भी शामिल था. 2004 जब कांग्रेस की प्रशासन केंद्र में बनी तो डीएमके प्रशासन में शामिल था. यह गठबंधन 2014 तक खूब मजबूती से चला, लेकिन फिर श्रीलंका में तमिलों के मुद्दे को लेकर यह गठबंधन टूटा. उस वक्त डीएमके यह चाहती थी कि केंद्र की यूपीए प्रशासन तमिलों के मुद्दे पर श्रीलंका प्रशासन के साथ सख्ती करे, लेकिन यूपीए की प्रशासन ने स्थिति का सामना नरमी से किया था. 2016 में दोनों फिर साथ आए और 2021 के विधानसभा चुनाव में भी दोनों साथ लड़े और प्रदेश में प्रशासन बनाई. स्टालिन पहले ऐसे नेता थे, जिन्होंने राहुल गांधी का प्रधानमंत्री के तौर पर समर्थन किया था. 10 साल बाद यह गठबंधन एक बार फिर टूट गया है. आखिर कांग्रेस ने डीएमके का साथ क्यों छोड़ा? लगातार 10-10 सालों के गठबंधन के बाद कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़ा है. (2004 से 2014 और फिर 2016 से 2026). यहां गौर करने वाली बात यह है कि कांग्रेस और डीएमके के बीच दरार अचानक नहीं आई है. इन दोनों पार्टियों के रिश्ते सामान्य नहीं चल रहे थे, तनातनी थी. कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर की पार्टी और उसके अपने हित हैं और वैसे ही नेतृत्व उसको करनी होती है, जबकि डीएमके एक क्षेत्रीय पार्टी है, जो सिर्फ अपने हित के लिए नीतियां बनाती हैं. उसकी नेतृत्व द्रविड़ आइडेंडिटी और हिंदी विरोध पर आधारित है. कई बार कांग्रेस को इस वजह से परेशानी होती है. इतना ही नहीं कांग्रेस यह चाहती है कि उसे तमिलनाडु में ज्यादा सीटें मिले, क्योंकि उसकी पहचान राष्ट्रीय है,लेकिन डीएमके हमेशा कांग्रेस पर हावी रहना चाहती है. अब जबकि प्रदेश में नेतृत्व बदली है, कांग्रेस अपना हित देखते हुए टीवीके साथ जाना चाहती है. कांग्रेस भी मोदी युग में अपनी पहचान के लिए लगातार जूझ रही है, ऐसे में उसे टीवीके आशा की नई किरण के रूप में नजर आई है और उसने पाला बदलते हुए डीएमके को छोड़कर टीवीके का दामन थाम लिया है.तमिलनाडु के इंचार्ज कांग्रेस लीडर गिरीश चोडणकर ने मीडिया को दिए बयान में कहा कि यह अलायंस – जो दोनों पार्टियों के बीच आपसी सम्मान, सही हिस्सेदारी और मिली-जुली जिम्मेदारी पर बना है, वह न सिर्फ इस प्रशासन को बनाने के लिए है, बल्कि यह भविष्य को देखते हुए बनाया गया है. लोकल बॉडी ऑर्गनाइजेशन, लोकसभा और राज्यसभा चुनावों में भी यह गठबंधन कायम रहेगा. कई बार पहले भी टूट चुका है कांग्रेस और डीएमके गठबंधन कांग्रेस ने जब टीवीके को समर्थन देने की घोषणा की तो डीएमके ने इसे पीठ पर छुरा घोंपने की नेतृत्व कहा. गौर करने वाली बात यह है कि दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन कई बार हुआ और टूटा भी है. 1969 में जब कांग्रेस दो गुटों में टूट गई थी उस वक्त एक गुट का नेतृत्व इंदिरा गांधी कर रही थीं और दूसरा तमिलनाडु कांग्रेस के दिग्गज के कामराज के नेतृत्व में था. उस वक्त डीएमके ने 1971 के आम चुनाव के लिए इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाले गुट के साथ गठबंधन करने का फैसला किया. लेकिन एक साल बाद एम जी रामचंद्रन (MGR) के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बनने के साथ ही इंदिरा गांधी ने जल्दी ही नई पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया. इमरजेंसी के बाद हुए 1977 के आम चुनाव में, इस नए गठबंधन ने राज्य में भारी जीत हासिल की, जबकि इंदिरा केंद्र में सत्ता खो बैठीं. यह गठबंधन 1979 में टूट गया, जब एमजी रामचंद्रन ने तंजावुर में संसदीय उपचुनाव के जरिए लोकसभा में वापसी के लिए इंदिरा की कोशिश का समर्थन करने से इनकार कर दिया. 1980 में, कांग्रेस ने आम चुनाव के लिए फिर से डीएमके के साथ गठबंधन किया, लेकिन चार साल बाद फिर एआईएडीएमके के साथ वापस चली गई, जिसके साथ वह 1987 में एमजीआर के निधन तक रही. बाद में भी कांग्रेस कभी डीएमके तो कभी एआईएडीएमके साथ रही. ये भी पढ़ें : प्लेयर ऑफ द मैच बनने के बाद बोले संजू सैमसन-मुझे चेट्टा से ज्यादा संजू कहलाना पसंद सत्ता छिनते ही TMC के अस्तित्व पर संकट, जानें क्यों अब ममता बनर्जी के लिए वापसी की राह है कठिन The post तमिलनाडु में कांग्रेस ने क्यों दिया डीएमके को गच्चा? जानिए 1971 से अबतक कैसा रहा गठबंधन… appeared first on Naya Vichar.

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आलापन बंद्योपाध्याय और एचके द्विवेदी ने भी ममता दीदी से किया किनारा, दे दिया इस्तीफा

Alapan Bandyopadhyay Resigns: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में बुरी तरह हारने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भले इस्तीफा नहीं देने पर अड़ी हों, लेकिन उनके बेहद करीबी रहे लोगों ने उनसे किनारा करना शुरू कर दिया है. 15 साल पुराने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन के अंत के साथ ही प्रशासनिक गलियारों में इस्तीफों की झड़ी लग गयी है. आलापन बंद्योपाध्याय और एचके द्विवेदी का इस्तीफा ममता बनर्जी के इस्तीफा नहीं देने के ऐलान के बाद निवर्तमान मुख्यमंत्री के 2 सबसे भरोसेमंद मुख्य सलाहकारों- आलापन बंद्योपाध्याय और एचके द्विवेदी ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया. दोनों ही पूर्व मुख्य सचिव रह चुके हैं और ममता के बेहद करीबी माने जाते थे. प्रशासन के आर्थिक सलाहकार और कानूनी सिपहसालारों ने भी नयी प्रशासन के शपथ ग्रहण से पहले अपने पद छोड़ दिये. इसे भी पढ़ें : ममता बनर्जी की जिद पर भड़के जेठमलानी, कहा- इस्तीफा न दें, तो धक्के मारकर निकालें, वह अब ऑफिस में घुसपैठिया मैदान छोड़कर ‘भागे’ नबान्न के 2 ‘पावर सेंटर’ राज्य सचिवालय (नबान्न) के सूत्रों के अनुसार, आलापन बंद्योपाध्याय और एचके द्विवेदी ने मंगलवार को ही अपना इस्तीफा सौंप दिया. आलापन बंद्योपाध्याय : 2021 में केंद्र और राज्य के बीच विवाद का मुख्य चेहरा रहे आलापन बंद्योपाध्याय को रिटायरमेंट के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने अपना मुख्य सलाहकार बना लिया था. उनका इस्तीफा नौकरशाही में एक बड़े युग के अंत जैसा है. एचके द्विवेदी : पूर्व मुख्य सचिव रहे एचके द्विवेदी भी सलाहकार के रूप में प्रशासनिक निर्णयों में बड़ी भूमिका निभा रहे थे. सत्ता परिवर्तन की आहट पाते ही उन्होंने पद छोड़ना ही बेहतर समझा. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें Alapan Bandyopadhyay Resigns: अर्थशास्त्री अभिरूप प्रशासन और महाधिवक्ता ने भी छोड़ी कुर्सी प्रशासनिक सर्जरी यहीं नहीं रुकी. प्रशासन के कई अन्य प्रमुख स्तंभ भी गिर गये हैं. प्रख्यात अर्थशास्त्री अभिरूप प्रशासन ने पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (WBIDC) और लघु उद्योग विकास निगम (WBSIDC) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) किशोर दत्ता ने पहले ही राज्यपाल आरएन रवि को अपना इस्तीफा सौंप दिया था. इन इस्तीफों को स्वीकार कर लिया गया है और अब रिक्त पदों को भरने की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. इसे भी पढ़ें : बंगाल में ममता बनर्जी के खास अफसरों पर गिरी गाज, रिटायर नौकरशाहों की दफ्तरों में एंट्री बैन, मुख्य सचिव का सख्त फरमान सत्ता परिवर्तन का असर, ‘क्लीन स्लेट’ की तैयारी भाजपा की 207 सीटों के साथ हुई प्रचंड जीत ने बंगाल की नौकरशाही में हड़कंप मचा दिया है. जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी के दौर में नियुक्त किये गये सलाहकार और अधिकारी अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. भाजपा ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार इन अधिकारियों पर ‘नेतृत्वक एजेंट’ के तौर पर काम करने का आरोप लगाया था. इसे भी पढ़ें बंगाल में खिला कमल, बीजेपी ने जनता को कहा- शुक्रिया, शुभेंदु अधिकारी बोले- विकास ने डर को हराया, सुशासन के नये युग की शुरुआत बंगाल में भाजपा की जीत से ढाका में हड़कंप, बांग्लादेशी मीडिया ने बताया ‘बड़ा संकट’, सांसद को डराने लगा शरणार्थी संकट प्रणाम बंगाल! अंगार से निकलेगा उन्नत पश्चिम बंगाल, शुभेंदु अधिकारी ने फेसबुक पर लिखा भावुक पोस्ट ममता बनर्जी की जनादेश के खिलाफ मुख्यमंत्री बने रहने की जिद, संविधान विशेषज्ञों से जानें 7 मई को क्या होगा The post आलापन बंद्योपाध्याय और एचके द्विवेदी ने भी ममता दीदी से किया किनारा, दे दिया इस्तीफा appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल में सरकार गठन की उल्टी गिनती शुरू, CEO ने राज्यपाल को सौंपी विधायकों की लिस्ट, क्या करेंगी ममता बनर्जी?

खास बातें नयी प्रशासन बनाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे राज्यपाल निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी पूरी, अब राजभवन लेगा फैसला अब गेंद राज्यपाल के पाले में ममता बनर्जी की जिद और संवैधानिक संकट संवैधानिक चुनौती बहुमत बनाम अल्पमत का गणित WB CEO Gazette Notification: ममता बनर्जी के इस्तीफा देने से इनकार के बीच पश्चिम बंगाल में बुधवार को एक बड़ा संवैधानिक कदम उठाया गया. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार अग्रवाल ने लोक भवन जाकर राज्यपाल आरएन रवि से मुलाकात की. नयी प्रशासन बनाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे राज्यपाल इस दौरान उन्होंने नवनिर्वाचित विधायकों के नामों वाली आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना (Gazette Notification) राज्यपाल को सौंप दी. यह एक अनिवार्य वैधानिक प्रक्रिया है, जो चुनाव नतीजों के बाद नयी विधानसभा के गठन का रास्ता साफ करती है. अब सबकी नजरें राज्यपाल पर टिकी हैं, क्योंकि वे जल्द ही नयी प्रशासन बनाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी पूरी, अब राजभवन लेगा फैसला लोक भवन से बाहर निकलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि फालता विधानसभा सीट को छोड़कर बाकी राज्य में आयोग की भूमिका अब खत्म हो चुकी है. सीईओ ने बताया कि निर्वाचित विधायकों की सूची सौंपना एक संवैधानिक नियम है, जिसे आज पूरा कर लिया गया. इसे भी पढ़ें : बंगाल में ममता बनर्जी के खास अफसरों पर गिरी गाज, रिटायर नौकरशाहों की दफ्तरों में एंट्री बैन, मुख्य सचिव का सख्त फरमान अब गेंद राज्यपाल के पाले में मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा- अब विधानसभा का गठन करना और प्रशासन बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना लोक भवन का काम है. फालता निर्वाचन क्षेत्र में मतदान प्रक्रिया पूरी करने के अलावा निर्वाचन आयोग का काम अब समाप्त हो गया है. राजपत्र अधिसूचना सौंपने का मतलब है कि अब तकनीकी और कानूनी रूप से नयी विधानसभा अस्तित्व में आने के लिए तैयार है. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें ममता बनर्जी की जिद और संवैधानिक संकट लोक भवन में हुई इस हलचल ने बंगाल की नेतृत्व में सस्पेंस बढ़ा दिया है. भाजपा ने 294 में से 207 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया है, लेकिन निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अभी तक इस्तीफा नहीं दिया है. राजपत्र अधिसूचना मिलने के बाद अब राज्यपाल बहुमत वाली पार्टी (भाजपा) के नेता को प्रशासन बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं. इसे भी पढ़ें : दलबदलुओं के लिए भाजपा के दरवाजे बंद, देवजीत प्रशासन बोले- दागियों और असामाजिक तत्वों की नो एंट्री WB CEO Gazette Notification: संवैधानिक चुनौती जानकारों का मानना है कि यदि ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं, तो राज्यपाल इस राजपत्र अधिसूचना के आधार पर नयी विधानसभा गठित कर सकते हैं, जिससे पुरानी कैबिनेट स्वतः भंग मानी जायेगी. इसे भी पढ़ें : सत्ता छिनते ही TMC के अस्तित्व पर संकट, जानें क्यों अब ममता बनर्जी के लिए वापसी की राह है कठिन बहुमत बनाम अल्पमत का गणित इस चुनाव में भाजपा ने 15 साल पुराने तृणमूल शासन को उखाड़ फेंका है. तृणमूल कांग्रेस केवल 80 सीटों पर सिमट गयी है. अधिसूचना सौंपे जाने के बाद अब भाजपा के विधायक दल के नेता की घोषणा और शपथ ग्रहण समारोह की तारीखों को लेकर चर्चाएं तेज हो गयी हैं. बंगाल की जनता अब उस ऐतिहासिक पल का इंतजार कर रही है, जब राज्य में नयी प्रशासन कार्यभार संभालेगी. इसे भी पढ़ें ममता बनर्जी की जिद पर भड़के जेठमलानी, कहा- इस्तीफा न दें, तो धक्के मारकर निकालें, वह अब ऑफिस में घुसपैठिया मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का आदेश- कत्ल और तोड़फोड़ करने वालों को तुरंत गिरफ्तार करें मार्कंडेय काट्जू का दावा- बीजेपी में शामिल हो सकती हैं महुआ मोईत्रा, सागरिका और सायोनी घोष पालटेचे एई बार, एलो बीजेपी प्रशासन…, बंगाल में भाजपा के विजय गान वीडियो में दिखा मोदी का जादू और जीत का जोश The post बंगाल में प्रशासन गठन की उल्टी गिनती शुरू, CEO ने राज्यपाल को सौंपी विधायकों की लिस्ट, क्या करेंगी ममता बनर्जी? appeared first on Naya Vichar.

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ऑस्ट्रेलिया से बैठकर भारत में सर्जरी, 10 हजार किमी दूर से मरीज का ऑपरेशन कर भारतीय डॉक्टर ने रचा इतिहास

मेडिकल टेक्नोलॉजी ने एक और बड़ी छलांग लगाई है. हिंदुस्तान के प्रसिद्ध बैरियाट्रिक सर्जन डॉ मोहित भंडारी ने ऑस्ट्रेलिया के पर्थ से बैठकर हिंदुस्तान के इंदौर में मौजूद मरीज का सफल ऑपरेशन कर नया इतिहास बना दिया. करीब 10,000 किलोमीटर की दूरी पर की गई यह रोबोटिक सर्जरी दिखाती है कि अब इलाज की सीमाएं तेजी से खत्म हो रही हैं और डॉक्टर कहीं से भी मरीज तक पहुंच सकते हैं. कैसे हुआ 10,000 किमी दूर से ऑपरेशन? यह सर्जरी गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी प्रक्रिया के तहत की गई, जिसमें पेट को छोटी आंत के एक हिस्से से जोड़ा जाता है. डॉक्टर ने पर्थ में बैठे-बैठे एक हाई-टेक कंसोल के जरिए रोबोटिक आर्म्स को कंट्रोल किया, जो इंदौर में मरीज पर काम कर रहे थे. हर मूवमेंट रियल टाइम में ट्रांसफर हुआ और मशीन ने उसे बेहद सटीक तरीके से दोहराया. इस पूरी प्रक्रिया में देरी इतनी कम थी कि यह इंसानी पलक झपकने जितनी तेज मानी जा रही है. कौन सी तकनीक बनी इस चमत्कार की वजह? इस ऐतिहासिक सर्जरी में हिंदुस्तान में विकसित SSI Mantra और MantrAsana सिस्टम का इस्तेमाल किया गया. ये तकनीक SS Innovations International ने डेवलप की है, जो एडवांस रोबोटिक सर्जरी सॉल्यूशंस के लिए जानी जाती है. इस सिस्टम की खासियत यह है कि यह 0.1 मिलीमीटर तक की सटीकता के साथ काम कर सकता है, जो इंसानी हाथों से भी ज्यादा प्रिसाइज माना जाता है. हेल्थकेयर में क्या बदलेगा इस तकनीक से? यह उपलब्धि सिर्फ एक सर्जरी तक सीमित नहीं है, बल्कि हेल्थकेयर के भविष्य की दिशा तय करती है. अब बड़े शहरों के विशेषज्ञ डॉक्टर दूर-दराज के इलाकों में बैठे मरीजों का इलाज कर सकेंगे, बिना किसी यात्रा के. इससे खासतौर पर ग्रामीण हिंदुस्तान में रहने वाले मरीजों को बड़ा फायदा मिल सकता है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी रहती है. क्या यह तकनीक बनेगी गेम चेंजर? टेली-सर्जरी की यह सफलता दिखाती है कि आने वाले समय में अस्पतालों की परिभाषा बदल सकती है. अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर अपनाई जाती है, तो देश के किसी भी कोने में बैठे मरीज को वर्ल्ड-क्लास ट्रीटमेंट मिल सकता है. यह कदम न सिर्फ मेडिकल साइंस के लिए बड़ा बदलाव है, बल्कि लाखों लोगों के लिए नई उम्मीद भी है. यह भी पढ़ें: STAR तकनीक ने बदली तस्वीर: जहां मिलना नामुमकिन था, वहां अब छिपे स्पर्म्स ढूंढ़कर दे रही पितृत्व का मौका The post ऑस्ट्रेलिया से बैठकर हिंदुस्तान में सर्जरी, 10 हजार किमी दूर से मरीज का ऑपरेशन कर हिंदुस्तानीय डॉक्टर ने रचा इतिहास appeared first on Naya Vichar.

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