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Asian Games 2026: जापान में बिहार के 11 सितारे दिखाएंगे दम, ईशान-वैभव समेत इन खिलाड़ियों पर रहेगी नजर

Asian Games 2026: जापान के आइची-नागोया में होने वाले 20वें एशियन गेम्स में बिहार की भी मजबूत मौजूदगी देखने को मिलेगी. 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक चलने वाले इस बड़े स्पोर्ट्स आयोजन में बिहार के 11 खिलाड़ी हिंदुस्तानीय दल का हिस्सा हैं. इनमें क्रिकेट के ईशान किशन और युवा स्टार वैभव सूर्यवंशी के अलावा पैरा बैडमिंटन, पैरा एथलेटिक्स, पैरा पावरलिफ्टिंग, पैरा स्वीमिंग, रग्बी और सेपकटाकरा के खिलाड़ी शामिल हैं. पैरा स्पोर्ट्स में कई बड़े नाम बाएं से— सोमन राणा, झंडू कुमार, मो. शम्स आलम, शैलेश कुमार (फोटो—सोशल मीडिया) जमुई के सोमन राणा पारा एथलेटिक्स में हिंदुस्तान की चुनौती पेश करेंगे. सेना में सूबेदार सोमन ने राष्ट्रमंडल स्पोर्ट्स 2026 में शॉटपुट में गोल्ड मेडल जीता था. वहीं नालंदा के झंडू कुमार पारा पावरलिफ्टिंग में हिंदुस्तान की टीम का हिस्सा हैं. वह राष्ट्रमंडल स्पोर्ट्सों में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं. जमुई के ही शैलेश कुमार से भी पदक की उम्मीद रहेगी. हाई जंप में शैलेश एशियन पैरा गेम्स का गोल्ड और विश्व चैंपियनशिप का सिल्वर अपने नाम कर चुके हैं. मधुबनी के मोहम्मद शम्स आलम पारा स्वीमिंग में तीसरी बार एशियाई स्पोर्ट्सों में हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व करेंगे. ये भी पढ़ें: Duleep Trophy 2026: 13 साल बाद ईस्ट जोन बना चैंपियन, बिहार के इन 4 क्रिकेटरों ने लिखी जीत की कहानी क्रिकेट में ईशान और वैभव पर रहेंगी नजरें बिहार से क्रिकेट में ईशान किशन और वैभव सूर्यवंशी हिंदुस्तानीय दल में शामिल हैं. पटना के ईशान किशन लंबे समय से हिंदुस्तानीय क्रिकेट का हिस्सा रहे हैं. विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाते हैं. वनडे क्रिकेट में उनके नाम सबसे तेज दोहरा शतक का रिकॉर्ड भी दर्ज है. वहीं अभी वे टी-20 रैंकिंग में दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाज है. दूसरी ओर, समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है. कम उम्र में रणजी ट्रॉफी डेब्यू करने के बाद उन्होंने आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स की ओर से भी प्रभावी प्रदर्शन किया. जुलाई 2026 में हिंदुस्तान के लिए टी20 इंटरनेशनल डेब्यू करने के साथ वह सबसे कम उम्र में हिंदुस्तान के लिए टी20I स्पोर्ट्सने वाले हिंदुस्तानीय बने. स्पोर्ट्स खिलाड़ी क्रिकेट ईशान किशन, वैभव सूर्यवंशी पैरा बैडमिंटन प्रमोद भगत, उमेश विक्रम कुमार पैरा एथलेटिक्स सोमन राणा, शैलेश कुमार पैरा पावरलिफ्टिंग झंडू कुमार पैरा स्वीमिंग मोहम्मद शम्स आलम रग्बी गुड़िया कुमारी, आरती कुमारी सेपकटाकरा बॉबी ये भी पढ़ें: Richest Cricket Board: आखिर कौन है दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड? देखें टॉप-10 की पूरी लिस्ट रग्बी में बिहार की 2 बेटियां आरती कुमारी और गुड़िया कुमारी (फोटो—सोशल मीडिया) स्त्री रग्बी में बिहार की गुड़िया कुमारी और आरती कुमारी हिंदुस्तानीय टीम का हिस्सा हैं. मुजफ्फरपुर की गुड़िया और नवादा की आरती दोनों एशियन स्तर पर पदक जीत चुकी हैं. दोनों की स्पोर्ट्स शैली में तेजी और मजबूत टैकलिंग अहम भूमिका निभाती है. आरती कुमारी को ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत दारोगा की नौकरी मिली है, जबकि गुड़िया कुमारी को निम्न वर्गीय लिपिक के पद पर नियुक्ति मिली है. अब दोनों की नजरें एशियन गेम्स में हिंदुस्तानीय टीम के प्रदर्शन पर होंगी. सेपकटाकरा में बॉबी पेश करेंगे चुनौती सेपकटाकरा में पटना के बॉबी हिंदुस्तान की ओर से उतरेंगे. बॉबी 2024 में बिहार के राजधानी पटना में आयोजित विश्व कप की गोल्ड मेडल जीतने वाली रेगू टीम का हिस्सा रहे थे. इस साल उन्होंने विश्व कप के क्वाड वर्ग में सिल्वर मेडल भी जीता है. एशियन गेम्स में उनका अनुभव हिंदुस्तानीय टीम के लिए अहम हो सकता है. ये भी पढ़ें: Duleep Trophy: दलीप ट्रॉफी का चैंपियन बना ईस्ट जोन, जानें किसने बनाए सबसे ज्यादा रन और किसने लिए सबसे ज्यादा विकेट The post Asian Games 2026: जापान में बिहार के 11 सितारे दिखाएंगे दम, ईशान-वैभव समेत इन खिलाड़ियों पर रहेगी नजर appeared first on Naya Vichar.

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दूसरे कमरे में गए और भूल गए क्या करने आए थे, क्या आपके साथ भी होता है ऐसा? जानिए इसके पीछे का कारण

Doorway Effect: क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है? आप अपने ड्राइंग रूम में बैठे-बैठे सोचते हैं कि चलो किचन से पानी की बोतल लेकर आते हैं, या फिर बगल वाले कमरे से फोन का चार्जर ले आते हैं. लेकिन जैसे ही आप अपनी जगह से उठकर किचन या बगल वाले कमरे में जाते हैं, वहां पहुंचते ही आप शांत खड़े होकर सोचने लग जाते हैं. आप सोचते हैं कि आखिर मैं यहां किस काम से आया था? काफी देर खड़े होकर आप अपने दिमाग पर जोर डालते रहते हैं, लेकिन फिर भी कुछ याद नहीं आता है. आखिर में आप हार मानकर वापस अपने कमरे में आ जाते हैं. लेकिन सबसे मजेदार बात तो यह है कि जैसे ही आप अपनी कुर्सी या बिस्तर पर जाकर बैठते हैं, तुरंत आपको याद आ जाता है कि आप किस काम से दूसरे कमरे में गए थे. अगर आपके साथ भी हर बार ऐसा होता है, तो आपको टेंशन लेने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है. इस चीज से सिर्फ आप अकेले परेशान नहीं हैं. इस परेशानी से दुनिया का लगभग हर इंसान जूझता है. साइंस की भाषा में इसे “डोरवे इफेक्ट” कहते हैं. यह कोई बीमारी नहीं है और न ही इससे यह पता चलता है कि आपकी याददाश्त कमजोर हो रही है. यह सिर्फ हमारे दिमाग के काम करने का एक मजेदार तरीका है, जिसके बारे में हम में से बहुत कम लोग जानते हैं. आज इस आर्टिकल में हम आपको डोरवे इफेक्ट के बारे में कुछ बेहद दिलचस्प बातें बताने जा रहे हैं, तो चलिए जानते हैं इनके बारे में. डोरवे इफेक्ट क्या है और यह क्यों होता है? हमारा दिमाग एक ही समय में बहुत सारी चीजों और ख्यालों को हैंडल कर रहा होता है. जब आप किसी कमरे में बैठे हुए होते हैं, तो आपका दिमाग वहां की लाइट, वहां रखी चीजों, टीवी की आवाज और माहौल को एक साथ समझ रहा होता है. लेकिन जैसे ही आप उस कमरे के दरवाजे को पार करते हैं और किसी दूसरे कमरे में कदम रखते हैं, तो आपका दिमाग उस दरवाजे को एक बाउंड्री समझ लेता है. साइंटिफिक रिसर्च के अनुसार हमारे दिमाग की एक आदत होती है. जैसे ही हम एक नया दरवाजा पार करते हैं, हमारा दिमाग पिछले कमरे की बातों को समेटकर एक फाइल बना लेता है. फिर वह उसे दिमाग के पिछले हिस्से में स्टोर कर देता है. हमारा दिमाग ऐसा इसलिए करता है ताकि नए कमरे के माहौल को समझने के लिए वह थोड़ी जगह बना सके. इसी वजह से जो छोटा सा काम आप दूसरे कमरे में करने गए थे, वह पुरानी फाइल के साथ आपके दिमाग के बैकग्राउंड में शिफ्ट हो जाता है और आप चीजें भूल जाते हैं. दिमाग की वर्किंग मेमोरी अगर बात करें अपने दिमाग की तो इसके पास एक वर्किंग मेमोरी होती है. इसे आप एक तरह से छोटी सी डायरी या फिर रफ कॉपी भी समझ सकते हैं. इसमें आप एक बार में सिर्फ थोड़ी सी जानकारी ही स्टोर करके रख सकते हैं. जब आप सोचते हैं कि मुझे बगल वाले कमरे से जाकर चार्जर लेकर आना है या फिर किचन से पानी की बोतल लेकर आनी है, तो यह बात दिमाग की उस रफ कॉपी में लिख जाती है. लेकिन जब आप रास्ते में चल रहे होते हैं और उसी समय आपका फोन रिंग कर जाता है, या कोई आपसे कुछ पूछ लेता है, या रास्ते में पड़ी किसी चीज पर आपका ध्यान चला जाता है, तो आपका दिमाग तुरंत चार्जर और पानी वाली बात को मिटाकर उस नयी चीज को रफ कॉपी में लिखकर रख लेता है. इसी का नतीजा होता है कि आप दूसरे कमरे में पहुंचकर पूरी तरह से ब्लैंक हो जाते हैं. वापस पुरानी जगह आते ही सब याद क्यों आ जाता है? जब आप बगल वाले कमरे से खाली हाथ वापस अपने पुराने कमरे में लौट आते हैं, तो आपका दिमाग फिर से उसी माहौल में पहुंच जाता है जहां आपने पहली बार चार्जर या फिर पानी की बोतल लाने के बारे में सोचा था. वहां का माहौल, वहां रखी चीजें और आपके बैठने की जगह आपके दिमाग के लिए बिल्कुल एक हिंट या सिग्नल की तरह काम करती हैं. इससे आपका दिमाग तुरंत उस पुरानी फाइल को खोल लेता है. और फिर आपको यह याद आ जाता है कि आप किस काम के लिए अपने कमरे से दूसरे कमरे में गए थे. इस भूलने की आदत से कैसे बचें? अगर आप चाहते हैं कि आपके साथ ऐसा बार बार न हो, तो आप ये बहुत ही आसान तरीके अपना सकते हैं. जब आप इन तरीकों को अपनाना शुरू कर देंगे, तो आपको फर्क खुद ही महसूस होने लग जाएगा. बोल-बोल कर याद रखें: जब आप किसी काम से दूसरे कमरे में जाने लगें, तो मन ही मन में या धीरे से उस काम का नाम दोहराते रहें. जैसे कि चार्जर लाना है, चार्जर लाना है. ऐसा करने से आपका दिमाग भटकता नहीं है. दिमाग में फोटो बनाएं: सिर्फ शब्द सोचने के बजाय, अपने दिमाग में एक छोटी सी फोटो या फिल्म बना लें कि आप जाकर चार्जर उठा रहे हैं. हमारा दिमाग शब्दों से ज्यादा फोटो को याद रखता है. एक बार में एक ही काम करें: चलते समय फोन मत चलाइए और न ही बहुत सारी चीजें एक साथ सोचिए. जब ध्यान भटकता है, तभी आप बात और चीजों को भूलते हैं. पुरानी जगह को याद करें: अगर आप दूसरे कमरे में जाकर भूल जाएं, तो घबराएं नहीं. बस जिस दरवाजे से आप आए थे, उसकी तरफ देखें या सोचें कि आप कहां बैठे थे. ऐसा करते ही आपके दिमाग को तुरंत हिंट मिल जाएगा. ये भी पढ़ें: पार्टनर की तारीफ करने से रिश्ते पर क्या पड़ता है असर? रिसर्च में सामने आई ये दिलचस्प बातें The post दूसरे कमरे में गए और भूल गए क्या करने आए थे, क्या आपके साथ भी होता है ऐसा? जानिए इसके पीछे का कारण appeared first on Naya Vichar.

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टाटा संस में चेयरमैन की कुर्सी पर फिर घमासान! चंद्रशेखरन की नियुक्ति को ट्रस्ट्स ने बताया गैरकानूनी

जमशेदपुर: टाटा संस में एन चंद्रशेखरन की दोबारा चेयरमैन नियुक्ति को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और कंपनी के बोर्ड के बीच विवाद बढ़ गया है. टाटा संस के बोर्ड ने 17 सितंबर को चंद्रशेखरन को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला किया था. बोर्ड में प्रस्ताव के पक्ष में 4 और विरोध में 1 वोट पड़ा. इसके बाद टाटा ट्रस्ट्स ने इस फैसले की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रस्ताव कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में तय शर्तों को पूरा नहीं करता. ट्रस्ट्स ने कहा- जरूरी समर्थन नहीं मिला टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि टाटा संस के नियमों के तहत चेयरमैन की नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति के लिए ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों के बहुमत का सकारात्मक समर्थन जरूरी है. बोर्ड में ट्रस्ट्स के दो नामित निदेशक हैं. ट्रस्ट्स के मुताबिक इनमें से एक निदेशक ने प्रस्ताव के पक्ष में और दूसरे ने विरोध में मतदान किया. इसलिए जरूरी सकारात्मक समर्थन की शर्त पूरी नहीं हुई. ट्रस्ट्स ने इसी आधार पर प्रस्ताव को कानूनी प्रभावहीन बताया है. कास्टिंग वोट पर भी ट्रस्ट्स को आपत्ति टाटा ट्रस्ट्स ने बोर्ड बैठक में इस्तेमाल किये गये कास्टिंग वोट के तर्क को भी खारिज किया है. ट्रस्ट्स का कहना है कि चेयरमैन का निर्णायक मत सामान्य तौर पर पूरे बोर्ड में बराबरी की स्थिति में लागू होता है. उनके अनुसार यह विशेष शर्त को पूरा करने के लिए ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों की आवश्यक सहमति का विकल्प नहीं हो सकता. ट्रस्ट्स ने कहा कि इसे बोर्ड में गतिरोध की स्थिति मानना भी सही नहीं है. साइरस मिस्त्री मामले का भी दिया हवाला टाटा ट्रस्ट्स ने अपने ताजा बयान में साइरस मिस्त्री विवाद का भी उल्लेख किया है. ट्रस्ट्स के अनुसार टाटा संस ने पहले सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपने आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों के विशेष मतदान अधिकारों का बचाव किया था और अदालत ने भी उन प्रावधानों को बरकरार रखा था. ट्रस्ट्स का तर्क है कि पहले जिन नियमों को कंपनी ने वैध बताया था, उन्हीं नियमों को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. टाटा संस की ओर से 17 सितंबर को जारी बयान में कहा गया था कि बोर्ड के आग्रह पर चंद्रशेखरन ने दोबारा चेयरमैन पद के लिए विचार करने पर सहमति दी और इसके बाद बोर्ड ने बहुमत से उनके पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव को मंजूरी दी. इस घटनाक्रम के बीच टाटा संस बोर्ड ने आरबीआई की लिस्टिंग संबंधी आवश्यकताओं के अनुपालन की दिशा में भी कदम उठाने का फैसला किया है. The post टाटा संस में चेयरमैन की कुर्सी पर फिर घमासान! चंद्रशेखरन की नियुक्ति को ट्रस्ट्स ने बताया गैरकानूनी appeared first on Naya Vichar.

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Shani Gochar 2027: साल 2027 में शनि बदलेंगे चाल, जानें किन लोगों को मिलेगी साढ़ेसाती से मुक्ति और किन्हें रहना होगा सतर्क

Shani Gochar 2027: साल 2027 में शनि का गोचर बेहद खास है. ज्योतिष शास्त्र की गणना के अनुसार शनि 3 जून को मीन से मेष राशि में प्रवेश करेगा. इसके बाद 20 अक्टूबर को मीन राशि में वक्री यानी उल्टी चाल शुरू करेगा. ऐसे में शनि के इस गोचर से साढ़ेसाती और ढैय्या का समीकरण भी बदलेगा. आइए, जानते हैं कि साल 2027 में शनि के डबल गोचर से किन राशि के जातकों को साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति मिलेगी. साथ ही, किन राशियों से संबंधित जातकों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या शुरू होगी. 2027 में कब-कब होगा शनि का राशि परिवर्तन द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2027 में शनि दो बार राशि परिवर्तन करेगा. शनि 3 जून 2027, गुरुवार को सुबह 6 बजकर 23 मिनट पर मेष राशि में प्रवेश करेगा. इस राशि में शनि 20 अक्टूबर सुबह 6 बजकर 4 मिनट तक रहेगा. इसके बाद मीन राशि में वक्री (उल्टी चाल) हो जाएगा. साल 2027 में शनि का डबल गोचर क्यों खास है साल 2027 के जून महीने की 3 तारीख को शनि देव मेष राशि में प्रवेश करेंगे. शनि का यह गोचर इसलिए खास है क्योंकि इससे कुछ राशि के जातकों की साढ़ेसाती खत्म होगी. जबकि, कुछ राशि वाले जातकों पर शनि की साढ़ेसाती शुरू होगी. इसके अलावा शनि के इस गोचर के ढैय्या का समीकरण भी बदलेगा. कुछ राशि से संबंधित लोगों पर शनि की ढैय्या शुरू होगी. वहीं, कुछ राशि के जातकों को ढैय्या से राहत मिलेगी. 2027 में किन राशि के जातकों को मिलेगी शनि की ढैय्या से मुक्ति ज्योतिषाचार्य पं. धनंजय पांडेय ने बताया कि 3 जून 2027 को जब शनि मीन से मेष राशि में प्रवेश करेंगे, तो कन्या और मकर राशि के जातकों पर शनि की ढैय्या शुरू होगी. जबकि, सिंह और धनु राशि से संबंधित जातकों को ढैय्या से छुटकारा मिल जाएगा. साल 2027 में किन राशि वालों को मिलेगा साढ़ेसाती से छुटकारा ज्योतिषाचार्य पं. धनंजय पांडेय के अनुसार, जब 3 जून 2027 को शनि मीन राशि में प्रवेश करेंगे, तो कुंभ राशि से संबंधित लोगों को साढ़ेसाती से छुटकारा मिल जाएगा. जबकि, वृषभ राशि के लोगों पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण शुरू होगा. वहीं, मेष और मीन राशि के जातकों के लिए 2027 में शनि की साढ़ेसाती का दूसरा और तीसरा चरण शुरू होगा. शनि गोचर 2027 इंफोग्रफिक्स (Image- AI Generated) शनि-गोचर के दौरान क्या करें उपाय शनिवार को किसी शनि मंदिर में शनि देव के सामने सरसों तेल का दीया जलाने से शनि दोष का प्रभाव कम होने की मान्यता है. शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव को कम करने के लिए प्रत्येक शनिवार शाम के समय पीपल वृक्ष के नीचे दीपक जलाना चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है. मान्यतानुसार, मंगलवार को हनुमान जी की पूजा, हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से शनि ग्रह का प्रकोप कम होता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, काले कुत्ते या कौए को खिलाने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है. इसके परिणामस्वरूप शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का कष्ट कम होता है. शनि देव की कृपा पाने के लिए काले तिल, काली उड़द, काला छाता, लोहा और काले कपड़े दान करने की परंपरा भी है. मान्यता है कि ऐसा करने से साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है. ये भी पढ़ें: Mercury Transit: तुला राशि में बुध का गोचर, इन 5 राशियों के खुलेंगे किस्मत के द्वार; मिलेगा बंपर धनलाभ The post Shani Gochar 2027: साल 2027 में शनि बदलेंगे चाल, जानें किन लोगों को मिलेगी साढ़ेसाती से मुक्ति और किन्हें रहना होगा सतर्क appeared first on Naya Vichar.

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SIR में चुनाव आयुक्त एसएस संधू समेत कई बड़े अधिकारियों को नोटिस, रिकॉर्ड में गड़बड़ी का मामला

SIR यानी वोटर लिस्ट की विशेष गहन जांच के दौरान कई मौजूदा और रिटायर्ड IAS अधिकारियों को नोटिस भेजे गए हैं. अधिकारियों के रिकॉर्ड में कुछ जानकारी का मिलान नहीं होने या पुराने रिकॉर्ड से लिंक नहीं मिलने की वजह से ये नोटिस जारी किए गए. वहीं, चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू समेत कुछ बड़े अधिकारियों के नाम में भी रिकॉर्ड से जुड़ी गड़बड़ी मिली है. SIR की जांच के दौरान कई बड़े अधिकारियों के नाम पुराने वोटर रिकॉर्ड से नहीं जुड़ पाए. इनमें विदेश सचिव विक्रम मिस्री, सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे, प्रधानमंत्री के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद, स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला, मत्स्य सचिव अभिलक्ष लिखी, उनकी पत्नी सुकृति लिखी, उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्रा और भूमि संसाधन सचिव नरेंद्र भूषण शामिल हैं. ये भी पढ़ें: SIR पर महागठबंधन का बड़ा आरोप, भाजपा कार्यकर्ताओं के पास पहले से भरे Form-7 मिलने का दावा द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इन अधिकारियों के नाम पुराने SIR रिकॉर्ड से ‘मैप’ नहीं मिले. इसी वजह से उन्हें रिकॉर्ड में गड़बड़ी और पुराने रिकॉर्ड से लिंक नहीं होने को लेकर नोटिस भेजे गए हैं. नाम में गड़बड़ी मिलने पर नोटिस पाने वाले अधिकारियों में व्यय सचिव ( Expenditure Secretary) वुमलुनमंग वुअलनाम भी शामिल हैं. वहीं, पूर्व IAS अधिकारी और हिंदुस्तान के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के. संजय मूर्ति को माता-पिता के नाम में अंतर मिलने पर नोटिस भेजा गया है. अरविंद पनगढ़िया सहित इनको भी मिला नोटिस SIR की जांच के दौरान कई रिटायर्ड अधिकारियों को भी रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने पर नोटिस भेजे गए हैं. इनमें नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया, JNU के पूर्व कुलपति और UGC के पूर्व चेयरमैन एम. जगदीश कुमार, पूर्व पशुपालन सचिव अलका उपाध्याय और पूर्व उपभोक्ता मामले सचिव रोहित कुमार सिंह शामिल हैं. उनकी पत्नी और CISF की पूर्व महानिदेशक नीना सिंह, पूर्व रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने और पूर्व पर्यावरण सचिव लीना नंदन को भी नोटिस मिला है. ये भी पढ़ें: SIR में दस्तावेजों को लेकर CEO का निर्देश, नहीं मांगें जायेंगे अतिरिक्त कागजात; उपलब्ध रिकॉर्ड से होगी पात्रता की जांच इन अधिकारियों के नाम दिल्ली कैंट विधानसभा क्षेत्र के न्यू मोती बाग पोलिंग बूथ की उस सूची में शामिल हैं, जहां रिकॉर्ड में गड़बड़ी को लेकर नोटिस जारी किए गए हैं. न्यू मोती बाग इलाके में कई बड़े अधिकारियों के प्रशासनी आवास हैं. इस पोलिंग बूथ पर कुल 593 लोगों को अलग-अलग वजहों से नोटिस भेजे गए हैं. SIR में दिल्ली के 33 लाख वोटर, नोटिस वाली सूची में CM रेखा गुप्ता समेत कई बड़े नाम द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, SIR के दौरान दिल्ली के 33 लाख मतदाताओं के नाम ऐसे लोगों की सूची में आए हैं, जिन्हें अपनी वोट देने की पात्रता साबित करने के लिए नोटिस मिल सकता है. इनमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, नई दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज और दिल्ली बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार सचदेवा के नाम भी शामिल हैं.  The post SIR में चुनाव आयुक्त एसएस संधू समेत कई बड़े अधिकारियों को नोटिस, रिकॉर्ड में गड़बड़ी का मामला appeared first on Naya Vichar.

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Deepika-Ranveer Baby Girl: ‘पहले लक्ष्मी आईं, अब सरस्वती भी…’, ‘धुरंधर’ डायरेक्टर आदित्य धर का खास मैसेज

बॉलीवुड के स्टार कपल दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के घर एक बार फिर खुशियों ने दस्तक दी है. 19 सितंबर को दोनों ने अपनी दूसरी बेटी के जन्म की खुशसमाचारी फैंस के साथ शेयर की. समाचार सामने आते ही बॉलीवुड सेलेब्स ने कपल को बधाइयां देनी शुरू कर दीं. ‘धुरंधर’ के डायरेक्टर आदित्य धर से लेकर करीना कपूर, कृति सेनन और रवीना टंडन तक कई सितारों ने सोशल मीडिया पर दीपिका और रणवीर को शुभकामनाएं दीं. दोनों की बड़ी बेटी दुआ का जन्म भी सितंबर में ही हुआ था. दूसरी बेटी के जन्म पर आदित्य धर ने दी खास बधाई दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के दूसरी बार माता-पिता बनने की समाचार के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें लगातार बधाइयां मिल रही हैं. ‘धुरंधर’ के डायरेक्टर आदित्य धर ने भी कपल को खास अंदाज में शुभकामनाएं दीं. उन्होंने लिखा, “पहले लक्ष्मी आईं, अब सरस्वती भी आ गईं!!” इसके साथ ही उन्होंने बच्ची को परिवार की एक और नन्ही परी बताते हुए उसके लिए प्यार और खुशियों की कामना की. दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की दूसरी बेटी के जन्म पर आलिया भट्ट, कृति सेनन, जैकलीन फर्नांडीज और करीना कपूर ने दी बधाई सितंबर में ही हुआ था दुआ का जन्म दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह ने 2024 में पहली बार पैरेंट्स बनने की खुशसमाचारी दी थी. दोनों ने 8 सितंबर 2024 को अपनी पहली बेटी का स्वागत किया, जिसका नाम उन्होंने दुआ पादुकोण सिंह रखा. अब 19 सितंबर 2026 को कपल ने अपनी दूसरी बेटी का स्वागत किया है. खास बात यह है कि दोनों बेटियों का जन्म सितंबर महीने में हुआ है. दुआ का जन्म 8 सितंबर को हुआ था, जबकि उनकी छोटी बहन का जन्म 19 सितंबर को हुआ. दूसरी बेटी के जन्म के बाद दीपिका और रणवीर को बॉलीवुड सेलेब्स और फैंस लगातार बधाइयां दे रहे हैं. ये भी पढ़ें: Bigg Boss 20 PROMO: काजी का सिग्नेचर स्टेप देख बेकाबू हुए सलमान खान, छाती पकड़कर सीधे जमीन पर ढेर ये भी पढ़ें: Deepika Padukone-Ranveer Singh Second Baby: दूसरी बार पैरेंट्स बने दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह, जानें बेबी गर्ल हुई या बेबी बॉय? The post Deepika-Ranveer Baby Girl: ‘पहले लक्ष्मी आईं, अब सरस्वती भी…’, ‘धुरंधर’ डायरेक्टर आदित्य धर का खास मैसेज appeared first on Naya Vichar.

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चांदी की बिछिया खरीदने की है तैयारी? ये 4 डिजाइन हैं बेहद खूबसूरत

Silver Bichiya Designs: चांदी की बिछिया सिर्फ पैरों की उंगलियों की खूबसूरती बढ़ाने वाला गहना नहीं, बल्कि स्त्रीओं के पारंपरिक श्रृंगार का भी खास हिस्सा है. बदलते फैशन के साथ अब बिछिया के डिजाइन में भी काफी बदलाव देखने को मिल रहा है. बाजार में बेहद सिंपल से लेकर नाजुक कारीगरी और स्टाइलिश पैटर्न वाली कई बिछिया मौजूद हैं. अगर आप भी रोजाना पहनने या किसी खास मौके के लिए नई बिछिया लेने की सोच रही हैं, तो इन खूबसूरत डिजाइनों पर नजर डाल सकती हैं. 1. सिंपल गोल बिछिया थोड़ी आकर्षक बिछिया पसंद करने वाली स्त्रीएं फूल-पत्ती वाले डिजाइन को चुन सकती हैं. इसमें छोटे फूल, पत्तियों या बेल की आकृति बनाई जाती है, जिससे बिछिया को पारंपरिक लुक मिलता है. यह डिजाइन पैरों में पहनने के बाद काफी सुंदर नजर आता है और खास मौकों पर भी पहना जा सकता है. 3. मोती वाली चांदी की बिछिया कई स्त्रीएं चाहती हैं कि पैरों में पहनी जाने वाली पायल और बिछिया का डिजाइन एक-दूसरे से मेल खाए. ऐसे में पायल से मैचिंग बिछिया एक अच्छा विकल्प हो सकती है. इसमें पायल जैसी ही नक्काशी, छोटी घंटियां या पैटर्न देखने को मिल सकते हैं. शादी, त्योहार या किसी खास कार्यक्रम के लिए यह डिजाइन काफी सुंदर लग सकता है. यह भी पढ़ें: चांदी की पायल खरीदने का है प्लान? ये 5 खूबसूरत डिजाइन देखकर आप भी कहेंगी- यही चाहिए The post चांदी की बिछिया खरीदने की है तैयारी? ये 4 डिजाइन हैं बेहद खूबसूरत appeared first on Naya Vichar.

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Deep Sea Life: समुद्र के नीचे गहरा अंधेरा, जबरदस्त दबाव फिर भी जिंदगी से भरी है दुनिया; जानें वहां कैसे रहते हैं जीव

Deep Sea Life: समुद्र की सतह से नीचे उतरते ही दुनिया तेजी से बदलने लगती है. करीब 200 मीटर की गहराई के बाद रोशनी कम होने लगती है और 1,000 मीटर के नीचे सूरज की रोशनी लगभग पूरी तरह गायब हो जाती है. इसके बावजूद समुद्र की इन गहराइयों में मछलियां, झींगे, जेलीफिश और कई अनोखे जीव अपना जीवन जीते हैं. अमेरिका की The National Oceanic and Atmospheric Administration (NOAA) के मुताबिक आम तौर पर समुद्र में 200 मीटर से ज्यादा गहराई को डीप ओशन यानी गहरा समुद्र माना जाता है. 200 मीटर के बाद रोशनी तेजी से कम होने लगती है. 1,000 मीटर से नीचे की गहराई में सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती और वहां प्रकाश संश्लेषण भी नहीं हो सकता. यानी वहां पेड़-पौधों की तरह सूरज की रोशनी से भोजन बनाने की सामान्य प्रक्रिया काम नहीं करती. वहां कितना ठंडा होता है पानी? गहरे समुद्र में सिर्फ अंधेरा ही नहीं होता, बल्कि तापमान भी बहुत कम रहता है. NOAA के अनुसार करीब 200 मीटर से नीचे समुद्री पानी का औसत तापमान लगभग 4 डिग्री सेल्सियस होता है. इसलिए वहां रहने वाले जीवों को अंधेरे और कम भोजन के साथ बेहद ठंडे वातावरण में भी खुद को ढालना पड़ता है. गहराई बढ़ने के साथ बढ़ता जाता है दबाव समुद्र की गहराई में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक पानी का दबाव है. हर करीब 10 मीटर नीचे जाने पर दबाव लगभग एक वायुमंडल बढ़ जाता है. उदाहरण के लिए करीब 2,000 मीटर की गहराई पर दबाव लगभग 200 वायुमंडल तक पहुंच सकता है. इंसान या ऐसे जीव जिनके शरीर में हवा से भरी जगह होती है, वहां सामान्य तरीके से जीवित नहीं रह सकते. फिर समुद्री जीव इतना दबाव कैसे सह लेते हैं? कई गहरे समुद्री जीवों के शरीर में इंसानों जैसे हवा से भरे फेफड़े या दूसरी बड़ी गैस वाली जगह नहीं होती. उनके शरीर का बड़ा हिस्सा पानी से बना होता है. पानी आसानी से दबता नहीं है, इसलिए ऐसे जीव बहुत ज्यादा दबाव को इंसानों की तुलना में बेहतर तरीके से सह लेते हैं. कुछ समुद्री प्रजातियां रोज करीब 1,000 मीटर तक ऊपर-नीचे भी जाती हैं. अंधेरे में खुद रोशनी बनाते हैं जीव समुद्र की गहराई की सबसे हैरान करने वाली चीजों में बायोल्यूमिनेसेंस शामिल है. इसमें जीव अपने शरीर के अंदर होने वाली रासायनिक क्रिया से खुद रोशनी पैदा करते हैं. NOAA के मुताबिक 200 से 1,000 मीटर की गहराई के बीच रहने वाले करीब 80 प्रतिशत जानवर बायोल्यूमिनेसेंट हैं. इनमें मछलियां, स्क्विड, जेलीफिश और दूसरे समुद्री जीव शामिल हैं. समुद्र के अंदर का जीवन, फोटो-एएआई यहां भोजन सूरज से नहीं, रसायनों से बनता है हाइड्रोथर्मल वेंट के आसपास जीवन का आधार प्रकाश संश्लेषण नहीं बल्कि केमोसिंथेसिस है. यहां कुछ बैक्टीरिया रासायनिक ऊर्जा का इस्तेमाल करके भोजन बनाते हैं. यही बैक्टीरिया आगे कई दूसरे जीवों की भोजन श्रृंखला का आधार बनते हैं. NOAA के मुताबिक इन जगहों पर ऐसे जीवों के समुदाय पाए जाते हैं जो पृथ्वी पर दूसरी जगहों के जीवों से काफी अलग हो सकते हैं. वैज्ञानिकों ने 1977 में देखी थी ऐसी दुनिया NOAA के मुताबिक वैज्ञानिकों ने पहली बार 1977 में समुद्र की गहराई में हाइड्रोथर्मल वेंट के आसपास फलता-फूलता जीव समुदाय देखा था. यह खोज बेहद महत्वपूर्ण थी, क्योंकि इससे पता चला कि जीवन को हर जगह सीधे सूरज की रोशनी पर निर्भर होना जरूरी नहीं है. बाद में दुनिया के अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में ऐसे और समुदाय पाए गए. समुद्र के अंदर का जीवन, फोटो-एएआई समुद्र की गहराई में अब भी छिपे हैं कई रहस्य गहरा समुद्र पृथ्वी के सबसे कम समझे गए जीवित वातावरणों में शामिल है. यहां सी-माउंट, गहरे समुद्री कैन्यन, कोरल, स्पंज, हाइड्रोथर्मल वेंट और कोल्ड सीप जैसे कई अलग-अलग ठिकाने मौजूद हैं. NOAA का कहना है कि हर नई समुद्री खोज के साथ वैज्ञानिक ऐसे जीवों और परिस्थितियों को समझ रहे हैं, जो अंधेरे, ठंड, कम भोजन और बहुत ज्यादा दबाव के बावजूद जीवन को संभव बनाते हैं. The post Deep Sea Life: समुद्र के नीचे गहरा अंधेरा, जबरदस्त दबाव फिर भी जिंदगी से भरी है दुनिया; जानें वहां कैसे रहते हैं जीव appeared first on Naya Vichar.

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हरमनप्रीत कौर और निगर सुल्ताना ने मिलाया हाथ, क्या भारत-बांग्लादेश महिला क्रिकेट में खत्म हुआ हैंडशेक विवाद?

Harmanpreet Kaur Nigar Sultana handshake: हिंदुस्तान और बांग्लादेश की स्त्री क्रिकेट टीमों के बीच हैंडशेक को लेकर चला विवाद एशियन गेम्स 2026 के सेमीफाइनल में शांत होता नजर आया. रविवार, 20 सितंबर को करोगी स्पोर्ट्स पार्क, निस्शिन में टॉस के बाद हिंदुस्तानीय कप्तान हरमनप्रीत कौर और बांग्लादेश की कप्तान निगर सुल्ताना ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया. टॉस हरमनप्रीत कौर ने जीता और हिंदुस्तान ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया. इसके बाद जब दोनों कप्तान आमने-सामने आईं तो हरमनप्रीत ने हाथ आगे बढ़ाया और निगर सुल्ताना ने भी हाथ मिलाया. यह पल इसलिए खास रहा क्योंकि कुछ समय पहले ही दोनों के बीच हैंडशेक को लेकर काफी चर्चा हुई थी. ये भी पढ़ें: India Asian Games 2026: हिंदुस्तान ने शूटिंग में जीते 2 सिल्वर, मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में एक और मेडल पक्का; हिंदुस्तानीय स्त्री क्रिकेट टीम फाइनल में एशिया कप में नहीं मिलाया था हाथ एशिया कप 2026 के सेमीफाइनल के दौरान निगर सुल्ताना ने हरमनप्रीत कौर से हाथ नहीं मिलाया था. इस घटना ने क्रिकेट जगत में खूब सुर्खियां बटोरी थीं. बाद में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने इस मामले पर अपना बयान दिया था. BCB की स्त्री समिति के चेयरमैन रफीकुल इस्लाम बाबू ने कहा था कि हैंडशेक नहीं करने का फैसला बोर्ड की ओर से नहीं था, बल्कि यह निगर का निजी फैसला था. उन्होंने कहा था कि बोर्ड सभी देशों के साथ दोस्ताना रिश्ते रखना चाहता है और स्पोर्ट्स को देशों को करीब लाने वाला माध्यम मानता है. BCB ने निगर के फैसले से बनाई दूरी रफीकुल इस्लाम बाबू ने यह भी कहा था कि एशियन गेम्स के बाद टीम के प्रदर्शन और दूसरी शिकायतों पर चर्चा की जाएगी. उनके मुताबिक टीम में कई कमियां हैं और बड़े मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन के लिए टीम को मजबूत करने की जरूरत है. उन्होंने यह भी बता दिया था कि एशियन गेम्स के बाद टीम को लेकर जरूरी फैसले किए जा सकते हैं. हालांकि, निगर की कप्तानी में बदलाव को लेकर उस समय कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया था. ये भी पढ़ें: 2028 में BCCI के 100 साल पूरे होने पर India XI vs Rest of the World XI मैच संभव, तारीख और वेन्यू पर फैसला बाकी हिंदुस्तान-बांग्लादेश क्रिकेट में पहले भी हुआ है विवाद हरमनप्रीत कौर और निगर सुल्ताना का विवाद नया नहीं है. 2023 में बांग्लादेश दौरे के दौरान हिंदुस्तान और बांग्लादेश के बीच वनडे मैच में हरमनप्रीत अंपायरिंग को लेकर काफी नाराज नजर आई थीं. इसके बाद सीरीज खत्म होने पर ट्रॉफी समारोह के दौरान भी दोनों कप्तानों के बीच विवाद चर्चा में आया था. उस समय हरमनप्रीत ने अंपायरों को लेकर टिप्पणी की थी. अब एशियन गेम्स में क्या हुआ? एशियन गेम्स के सेमीफाइनल में तस्वीर अलग दिखाई दी. टॉस के बाद हरमनप्रीत ने निगार की तरफ हाथ बढ़ाया और दोनों ने हाथ मिलाया. इससे कम से कम इस मुकाबले में दोनों टीमों के बीच प्री-मैच की सामान्य परंपरा निभती नजर आई. हालांकि, इस एक घटना के आधार पर पुराने विवाद के कारणों या दोनों खिलाड़ियों के व्यक्तिगत रिश्ते को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा. अब सभी की नजरें सेमीफाइनल के मुकाबले और एशियन गेम्स के बाद BCB की अगली कार्रवाई पर हैं. The post हरमनप्रीत कौर और निगर सुल्ताना ने मिलाया हाथ, क्या हिंदुस्तान-बांग्लादेश स्त्री क्रिकेट में खत्म हुआ हैंडशेक विवाद? appeared first on Naya Vichar.

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Bihar Road Project: बिहार के इस बाजार में बनेगा 2 KM का फोरलेन फ्लाईओवर, NHAI ने निकाला टेंडर, खर्च होंगे 148.90 करोड़

Bihar Road Project: बिहार के सुपौल जिले के सिमराही बाजार में सड़क यातायात को बेहतर करने के लिए बड़ा काम होने जा रहा है. यहां एनएच-27 पर 2.04 किलोमीटर लंबा चार लेन का फ्लाईओवर बनाया जाएगा. हिंदुस्तानीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई ने इसके लिए निविदा जारी कर दी है. फ्लाईओवर के साथ सर्विस रोड भी बनेगी यह परियोजना सिर्फ फ्लाईओवर बनाने तक सीमित नहीं है. इसके साथ पहुंच मार्ग और सर्विस रोड भी तैयार की जाएगी. इससे सिमराही बाजार के इस हिस्से में आने-जाने वाले वाहनों को बेहतर रास्ता मिल सकेगा. परियोजना एनएच-27 के करीब 2.04 किलोमीटर हिस्से में बनाई जाएगी. 148.90 करोड़ की अनुमानित लागत एनएचएआई के निविदा दस्तावेज के अनुसार परियोजना की अनुमानित लागत ₹148.90 करोड़ है. यह राशि जीएसटी को छोड़कर है. निर्माण का काम इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण यानी ईपीसी तरीके से कराया जाएगा. दो साल में पूरा करना होगा काम एनएचएआई ने इस परियोजना को पूरा करने के लिए दो साल का समय तय किया है. इसके अलावा ठेकेदार को निर्माण पूरा होने के बाद 10 साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी जाएगी. बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें अभी निर्माण शुरू नहीं हुआ है फिलहाल यह परियोजना निविदा के चरण में है. एनएचएआई ने 17 सितंबर को निविदा जारी की है. इच्छुक कंपनियां 2 नवंबर 2026 तक अपनी तकनीकी और वित्तीय बोली जमा कर सकती हैं. इसके बाद 3 नवंबर को बोलियां खोली जाएंगी. सिमराही बाजार एनएच-27 पर स्थित है. यहां फ्लाईओवर के साथ सर्विस रोड और पहुंच मार्ग बनने से इस हिस्से में सड़क ढांचे को बेहतर करने की योजना है. इसे भी पढ़ें : Bihar Ka Mausam: बिहार में 30-40 KMPH की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, 26 सितंबर तक बदलेगा मौसम, 3 दिन सभी 38 जिलों में येलो अलर्ट The post Bihar Road Project: बिहार के इस बाजार में बनेगा 2 KM का फोरलेन फ्लाईओवर, NHAI ने निकाला टेंडर, खर्च होंगे 148.90 करोड़ appeared first on Naya Vichar.

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