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Pakistan Gold Silver Rate: पाकिस्तान में सोना 7,900 रुपये महंगा, प्रति तोला रेट ₹4,57,236 के पार

Pakistan Gold Silver Rate: ऑल पाकिस्तान सराफा जेम्स एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अनुसार, बुधवार को देश में सोने की कीमतों में 7,900 रुपये प्रति तोला की बढ़ोतरी हुई, जिससे 24 कैरेट सोने की कीमत 449,336 रुपये से बढ़कर 457,236 रुपये हो गई. सोने की कीमत में बदलाव (एक तोला = 11.6638 ग्राम) 24 कैरेट सोना (प्रति तोला): ₹7,900 की बड़ी बढ़त के साथ कीमत ₹4,49,336 से बढ़कर ₹4,57,236 हो गई. 24 कैरेट सोना (प्रति 10 ग्राम): ₹6,773 का उछाल आया, जिससे भाव ₹3,85,233 से बढ़कर ₹3,92,006 हो गया. 22 कैरेट सोना (प्रति 10 ग्राम): ₹6,208 की तेजी के साथ नई कीमत ₹3,53,143 से बढ़कर ₹3,59,351 दर्ज की गई. चांदी के नए दाम 24 कैरेट चांदी (प्रति तोला): ₹140 की तेजी के साथ भाव ₹6,802 से बढ़कर ₹6,942 हो गया. 24 कैरेट चांदी (प्रति 10 ग्राम): ₹120 की बढ़ोतरी के साथ दाम ₹5,831 से बढ़कर ₹5,951 पर पहुंचे. ग्लोबल मार्केट का हाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती के कारण घरेलू कीमतों में यह तेजी देखी गई है. ग्लोबल मार्केट में सोना $79 चढ़कर $4,347 प्रति औंस (पुराना भाव: $4,268) पर पहुंच गया. वहीं, अंतरराष्ट्रीय चांदी $1.40 की बढ़त के साथ $64.64 प्रति औंस (पुराना भाव: $63.23) पर पहुंच गई. The post Pakistan Gold Silver Rate: पाकिस्तान में सोना 7,900 रुपये महंगा, प्रति तोला रेट ₹4,57,236 के पार appeared first on Naya Vichar.

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दिवंगत नेता सुदिव्य कुमार सोनू को श्रद्धांजलि देने पहुंचे कई मंत्री, जानें द्वादश कार्यक्रम में कौन-कौन हुए शामिल

गिरिडीह. दिवंगत मंत्री एवं गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के द्वादश कार्यक्रम में गुरुवार को राज्य प्रशासन के कई मंत्री और नेतृत्वक नेता पहुंचे. मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, दीपिका पांडेय सिंह, दीपक बिरुआ, इरफान अंसारी और हफीजुल हसन समेत अन्य नेताओं ने दिवंगत सुदिव्य कुमार सोनू को श्रद्धांजलि अर्पित की. नेताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया और शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक, शुभचिंतक और स्थानीय लोग भी पहुंचे. सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर लोगों के आने का सिलसिला जारी रहा. दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने पहुंचे लोगों के कारण पूरे कार्यक्रम स्थल पर शोक का माहौल रहा. ये भी पढ़ें: Giridih Traffic Rules: दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार के श्राद्ध पर गिरिडीह में बदला ट्रैफिक रूट, 17 सितंबर को भारी वाहनों पर 15 घंटे की नो-एंट्री मंत्रियों ने परिजनों से की मुलाकात कार्यक्रम में पहुंचे मंत्रियों और अन्य नेताओं ने सुदिव्य कुमार सोनू के परिजनों से मुलाकात की. उन्होंने परिवार के प्रति संवेदना जतायी और इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े रहने की बात कही. नेताओं ने दिवंगत मंत्री के नेतृत्वक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने गिरिडीह और झारखंड की नेतृत्व में अपनी अलग पहचान बनायी थी. नेताओं के अनुसार, सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ गिरिडीह की जनता को भी गहरा आघात पहुंचा है. कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों और स्थानीय लोगों ने भी दिवंगत नेता को याद किया और श्रद्धांजलि अर्पित की. सुबह से पहुंचते रहे नेता और समर्थक द्वादश कार्यक्रम को लेकर सुबह से ही नेतृत्वक नेताओं और समर्थकों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था. राज्य प्रशासन के मंत्रियों के अलावा विभिन्न नेतृत्वक दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों के भी कार्यक्रम में पहुंचने की जानकारी दी गयी. कार्यक्रम स्थल पर लोगों की मौजूदगी को देखते हुए आयोजन से जुड़े लोगों की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की गयीं. श्रद्धांजलि देने पहुंचे मंत्री व विधायक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत कई प्रमुख नेताओं के कार्यक्रम में पहुंचने की चर्चा के बीच सुरक्षा और व्यवस्था के भी इंतजाम किये गये. हालांकि, उपलब्ध जानकारी में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने की पुष्टि नहीं है. श्रद्धांजलि के साथ याद किया गया योगदान द्वादश कार्यक्रम में पहुंचे नेताओं और समर्थकों ने सुदिव्य कुमार सोनू के सार्वजनिक जीवन और नेतृत्वक योगदान को याद किया. श्रद्धांजलि देने के दौरान परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की गयी. कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों के बीच दिवंगत नेता को लेकर भावुक माहौल बना रहा. द्वादश कार्यक्रम में मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों और पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने सुदिव्य कुमार सोनू के प्रति नेतृत्वक और सामाजिक स्तर पर व्यक्त की जा रही संवेदनाओं को सामने रखा. ये भी पढ़ें: कस्तूरबा विद्यालय गांडेय में PGT शिक्षकों के लिए निकली भर्ती, जानिए 24 सितंबर तक कैसे करें आवेदन The post दिवंगत नेता सुदिव्य कुमार सोनू को श्रद्धांजलि देने पहुंचे कई मंत्री, जानें द्वादश कार्यक्रम में कौन-कौन हुए शामिल appeared first on Naya Vichar.

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नक्सल का अंतिम किला ध्वस्त : आम ग्रामीण बनकर छिपा था एक करोड़ का इनामी नक्सली असीम मंडल, ललाट गांव से गिरफ्तार

घाटशिला : प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के सेंट्रल कमेटी सदस्य और कथित तौर पर एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली असीम मंडल को कोलकाता पुलिस की एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है. एसटीएफ ने उसे पूर्वी मेदिनीपुर जिले के पोटाशपुर थाना क्षेत्र के ललाट गांव से पकड़ा. पुलिस के अनुसार, असीम मंडल पिछले कुछ दिनों से आम ग्रामीण के रूप में गांव में रह रहा था. फूलचक गांव का रहने वाला है असीम बताया जा रहा है कि असीम मंडल का मूल घर मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना थाना क्षेत्र के फूलचक गांव में है. पुलिस को उसके ललाट गांव में छिपे होने की सूचना मिली थी. इसके बाद एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया. सूत्रों के अनुसार, असीम मंडल ने ललाट गांव में हथियार छिपाकर रखे थे. गिरफ्तारी के बाद गांव और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. उससे बरामदगी और उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों के बारे में पूछताछ की जा रही है. जिला मुख्यालय में जारी है पूछताछ गिरफ्तारी के बाद उसे मेदिनीपुर जिला मुख्यालय लाकर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आयी है. जांच एजेंसियां उसके ठिकानों, संपर्कों और कथित माओवादी नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही हैं. झारखंड, बंगाल और ओडिशा में 100 से अधिक मामले असीम मंडल के खिलाफ झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 100 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले, विस्फोट तथा अन्य हिंसक घटनाओं से जुड़े मामले शामिल बताए जा रहे हैं. असीम मंडल का नाम सांसद सुनील महतो हत्याकांड में भी नामजद होने की बात कही जा रही है. इसके अलावा झारखंड के सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में हुई कई नक्सली घटनाओं में भी उसकी कथित भूमिका की जांच होती रही है. सर्च करती पुलिस. गुवा थाना पर हमले में भी सामने आया था नाम गुवा थाना पर हमले से लेकर घाटशिला लैंडमाइंस विस्फोट तक पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, असीम मंडल का नाम वर्ष 2003 में गुवा थाना क्षेत्र में हुए हमले से जुड़े मामले में भी सामने आया था. वहीं, 30 अगस्त 2008 को पूर्वी सिंहभूम के घाटशिला क्षेत्र के बुरुडीह में हुए लैंडमाइंस विस्फोट में एक दरोगा समेत 11 पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी. इस मामले में भी असीम मंडल का नाम जांच के दौरान सामने आने की बात कही जाती रही है. कोल्हान में माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा घटनाक्रम असीम मंडल की गिरफ्तारी को झारखंड-बंगाल सीमा क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. खासकर कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहे माओवादी संगठन के शीर्ष स्तर के एक सदस्य की गिरफ्तारी से सुरक्षा एजेंसियों को संगठन की गतिविधियों और नेटवर्क के संबंध में अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है. फिलहाल पश्चिमी मेदिनीपुर के ललाट गांव में तलाशी अभियान जारी है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गांव में असीम मंडल के संपर्क में कौन-कौन लोग थे और वहां हथियार या अन्य सामान कहां छिपाकर रखा गया था. The post नक्सल का अंतिम किला ध्वस्त : आम ग्रामीण बनकर छिपा था एक करोड़ का इनामी नक्सली असीम मंडल, ललाट गांव से गिरफ्तार appeared first on Naya Vichar.

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PM मोदी को दोस्त पुतिन ने खास अंदाज में किया विश, कहा- आपकी समझदारी और विजन कमाल का है

PM Modi Birthday : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उन्हें बधाई संदेश भेजा है. हिंदुस्तान में मौजूद रूसी दूतावास ने पुतिन की चिट्ठी साझा की. इसमें पुतिन ने कहा, “देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में लोग आपका बेहद सम्मान करते हैं. हिंदुस्तान और रूस के रिश्तों को नई ऊंचाई तक ले जाने में आपका रोल सबसे अहम रहा है.” दिल्ली में हुए स्वागत के लिए जताया शुक्रिया पुतिन ने पिछले हफ्ते के अपने हिंदुस्तान दौरे को याद करते हुए लिखा, “नई दिल्ली में मुझे और मेरे डेलिगेशन को जो प्यार और मान-सम्मान मिला, उसके लिए दिल से शुक्रिया. हमारे बीच हुई बातचीत सीधी, ठोस और बहुत काम की रही. आपसे बात करके हमेशा अच्छा लगता है, और इससे एक बार फिर आपकी जबरदस्त सूझबूझ और दूरदर्शिता साबित हुई है.” पुतिन ने आगे कहा कि दोनों देश आगे भी हर जरूरी मसले पर ऐसे ही मिलकर काम करते रहेंगे. दिल्ली में हुए ब्रिक्स सम्मेलन से रिश्तों को नई धार हाल ही में नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन से भी हिंदुस्तान और रूस की दोस्ती और पक्की हुई है. पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद दोनों देशों ने साफ कर दिया कि उनकी पटरी बिल्कुल सही बैठ रही है. सम्मेलन के दौरान तेल-गैस की सप्लाई, डॉलर के बजाय अपने रुपए-रूबल में कारोबार करने और नए कारोबारी रास्तों को लेकर बनी सहमति ने दिखा दिया कि दोनों देशों की साझेदारी पर किसी बाहरी दबाव का कोई असर नहीं पड़ने वाला. ये भी पढ़ें: VIDEO : ‘आशीर्वाद का दीया, 25 साल सेवा’; मोदी के जन्मदिन पर सुदर्शन पटनायक की सैंड आर्ट वायरल The post PM मोदी को दोस्त पुतिन ने खास अंदाज में किया विश, कहा- आपकी समझदारी और विजन कमाल का है appeared first on Naya Vichar.

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PHOTO: चंद्रमा में मिला 728 फुट चौड़ा और 141 फुट गहरा नया गड्ढा, रोम के कोलोसियम से भी है बड़ा

नासा के वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की सतह पर 728 फुट चौड़ा और 141 फुट गहरा नया ‘प्रभाव-गड्ढे’ (इम्पैक्ट क्रेटर) की खोज की है, जो रोम के ऐतिहासिक कोलोसियम से भी बड़ा है. दो साल पहले किसी क्षुद्रग्रह या धूमकेतु के टुकड़े की शक्तिशाली टक्कर से बना यह गड्ढा सौर मंडल में दर्ज की गई सबसे बड़ी खगोलीय घटना है. नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (एलआरओ) ने इसकी तस्वीरें खींची हैं. ‘साइंस एडवांसेज’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने इसे सांख्यिकीय रूप से एक बेहद दुर्लभ और लगभग “जीवन में एक बार होने वाला अवलोकन” करार दिया है. खोज की मुख्य बातें विशाल आकार: यह नया गड्ढा लगभग 728 फुट (222 मीटर) चौड़ा और 141 फुट (43 मीटर) गहरा है. 132 साल में एक बार वाली घटना: शोधकर्ताओं का अनुमान है कि चंद्रमा पर इतनी बड़ी टक्कर की घटना औसतन 132 वर्षों में केवल एक बार ही होती है. पुराना रिकॉर्ड टूटा: यह गड्ढा एलआरओ द्वारा करीब एक दशक पहले खोजे गए पिछले सबसे बड़े रिकॉर्डधारी गड्ढे से आकार में तीन गुना बड़ा है. थॉमस मैकगेटचिन नामकरण: इस गड्ढे का नाम ‘लूनर एंड प्लैनेटरी इंस्टीट्यूट’ के पूर्व निदेशक दिवंगत थॉमस मैकगेटचिन के सम्मान में रखा गया है. अगस्त 2025 में हुई पहचान, अब हुई पुष्टि यह टक्कर दो साल पहले हुई थी, लेकिन पृथ्वी या अंतरिक्ष की दूरबीनें उस वक्त इसका तुरंत पता नहीं लगा सकीं. मई 2024 में एलआरओ ने चंद्रमा के पृथ्वी की ओर वाले हिस्से की तस्वीरें ली थीं. आंकड़ों के विशाल भंडार का विश्लेषण करते हुए अगस्त 2025 में वैज्ञानिकों ने इस गड्ढे की पहचान की. इसके बाद पिछले साल शरद ऋतु में विस्तृत तस्वीरें ली गईं और अब जाकर इस ऐतिहासिक खोज की आधिकारिक पुष्टि की गई है. 100 किमी तक फैली धूल, 7 किमी का ठंडा क्षेत्र ‘इंट्यूटिव मशीन्स’ और एलआरओ कैमरा टीम के प्रमुख वैज्ञानिक मार्क रॉबिन्सन के अनुसार, इस टक्कर का असर चंद्रमा की सतह पर 100 किलोमीटर से अधिक के दायरे में देखा गया. धूल और चट्टानी मिट्टी अनुमान से ज्यादा ऊंचे कोण पर दूर तक उछली. वहीं, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (UCLA) के वैज्ञानिक डेविड पेज के दूसरे अध्ययन में इस गड्ढे के चारों ओर 7 किलोमीटर चौड़ा ठंडा क्षेत्र पाया गया, जिससे चंद्रमा की ऊपरी सतह की ढीली मिट्टी का पता चलता है. अपोलो यात्रियों के पैरों के निशान मिटना तय इस खोज से यह भी साफ हुआ है कि बाहर से आने वाले खगोलीय पिंडों के कारण चंद्रमा की ऊपरी 2 सेंटीमीटर मिट्टी हर 80,000 साल में पूरी तरह उलट-पुलट हो जाती है—जो पहले के अनुमान से काफी तेज गति है. वैज्ञानिक मार्क रॉबिन्सन ने स्पष्ट किया कि इस निरंतर प्रक्रिया के कारण अपोलो मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों के चंद्रमा पर छोड़े गए ऐतिहासिक पैरों के निशान हमेशा बने नहीं रहेंगे, बल्कि एक निश्चित समय में पूरी तरह मिट चुके होंगे. नासा के मून बेस के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज? नासा वर्तमान में चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों के रहने के लिए ‘चंद्र आधार’ (मून बेस) बनाने की तैयारी कर रहा है. इस खोज से वैज्ञानिकों को यह समझने का दुर्लभ अवसर मिला है कि ऐसी टक्करों से उड़ने वाले मलबे से मून बेस को कितना खतरा हो सकता है. यह डेटा इंजीनियरों को भविष्य में अधिक मजबूत और सुरक्षित चंद्र संरचनाएं डिजाइन करने में मदद करेगा. ये भी पढ़ें: हिंदुस्तानीय युद्धपोत से भिड़ने के बाद पाकिस्तानी जहाज का हाल बेहाल, देखें टक्कर का VIDEO The post PHOTO: चंद्रमा में मिला 728 फुट चौड़ा और 141 फुट गहरा नया गड्ढा, रोम के कोलोसियम से भी है बड़ा appeared first on Naya Vichar.

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PM मोदी को दोस्त पुतिन ने खास अंदाज में किया विश, कहा- आपकी समझदारी और विजन कमाल का है

PM Modi Birthday : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उन्हें बधाई संदेश भेजा है. हिंदुस्तान में मौजूद रूसी दूतावास ने पुतिन की चिट्ठी साझा की. इसमें पुतिन ने कहा, “देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में लोग आपका बेहद सम्मान करते हैं. हिंदुस्तान और रूस के रिश्तों को नई ऊंचाई तक ले जाने में आपका रोल सबसे अहम रहा है.” दिल्ली में हुए स्वागत के लिए जताया शुक्रिया पुतिन ने पिछले हफ्ते के अपने हिंदुस्तान दौरे को याद करते हुए लिखा, “नई दिल्ली में मुझे और मेरे डेलिगेशन को जो प्यार और मान-सम्मान मिला, उसके लिए दिल से शुक्रिया. हमारे बीच हुई बातचीत सीधी, ठोस और बहुत काम की रही. आपसे बात करके हमेशा अच्छा लगता है, और इससे एक बार फिर आपकी जबरदस्त सूझबूझ और दूरदर्शिता साबित हुई है.” पुतिन ने आगे कहा कि दोनों देश आगे भी हर जरूरी मसले पर ऐसे ही मिलकर काम करते रहेंगे. दिल्ली में हुए ब्रिक्स सम्मेलन से रिश्तों को नई धार हाल ही में नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन से भी हिंदुस्तान और रूस की दोस्ती और पक्की हुई है. पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद दोनों देशों ने साफ कर दिया कि उनकी पटरी बिल्कुल सही बैठ रही है. सम्मेलन के दौरान तेल-गैस की सप्लाई, डॉलर के बजाय अपने रुपए-रूबल में कारोबार करने और नए कारोबारी रास्तों को लेकर बनी सहमति ने दिखा दिया कि दोनों देशों की साझेदारी पर किसी बाहरी दबाव का कोई असर नहीं पड़ने वाला. ये भी पढ़ें: VIDEO : ‘आशीर्वाद का दीया, 25 साल सेवा’; मोदी के जन्मदिन पर सुदर्शन पटनायक की सैंड आर्ट वायरल The post PM मोदी को दोस्त पुतिन ने खास अंदाज में किया विश, कहा- आपकी समझदारी और विजन कमाल का है appeared first on Naya Vichar.

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बाइक बेचने की सोच रहे हैं? इन 5 बाइक्स की सेकंड हैंड मार्केट में मिल सकती है बेहतर कीमत

नई बाइक खरीदते समय हम अक्सर लुक्स और माइलेज के चक्कर में Resale Value को भूल जाते हैं. क्या आपको पता है कि शोरूम से निकलते ही गाड़ी की कीमत 20% तक गिर जाती है? लेकिन कुछ बाइक और स्कूटर ऐसे हैं जिनकी सेकंड हैंड मार्केट वैल्यू लंबे समय तक बनी रहती है. इससे इन्हें कुछ साल बाद बेचने पर भी बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है. आइए जानते हैं वो बाइक्स कौन सी है? बाइक की रीसेल वैल्यू क्यों जरूरी है? बाइक खरीदने के बाद उसकी कीमत समय के साथ कम होती है. इसे Depreciation कहा जाता है. हालांकि, ये जरूरी नहीं है कि, हर बाइक की कीमत तेजी से कम हो. कुछ बाइक्स की मांग सेकंड हैंड मार्केट में भी बनी रहती है. बाइक की रिसेल रीसेल वैल्यू मुख्य तौर पर इन चीजों पर डिपेंड करती है: ब्रांड की लोकप्रियता मॉडल की डिमांड सर्विस और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता माइलेज और मेंटेनेंस कॉस्ट बाइक की कंडीशन सर्विस हिस्ट्री और डॉक्यूमेंट्स ये भी पढ़ें: झारखंड में JLR India की एंट्री, Ranchi में खुला पहला 3S सेंटर, Sales से लेकर Service तक मिलेगी पूरी सुविधा किन बाइक्स पर मिलती है सबसे अच्छी रिसेल वैल्यू?  Royal Enfield Classic 350 Classic 350 का नाम हाई रीसेल डिमांड वाली बाइक्स में अक्सर लिया जाता है. इसकी लोकप्रियता सिर्फ नए बाजार तक सीमित नहीं है. अच्छी कंडीशन वाली पुरानी Classic 350 को सेकंड हैंड मार्केट में भी खरीदार मिल जाते हैं. हालांकि, किसी बाइक की कीमत कितनी मिलेगी, यह उसकी उम्र, किलोमीटर, कंडीशन और शहर के सेकंड हैंड मार्केट पर डिपेंड करता है. Hero Splendor Plus Hero Splendor Plus देश की सबसे लोकप्रिय कम्यूटर बाइक्स में से एक है. इसकी सबसे बड़ी ताकत है कम मेंटेनेंस, अच्छी माइलेज और आसान सर्विस. यही वजह है कि नई के साथ-साथ पुरानी Splendor की भी काफी डिमांड रहती है. छोटे शहरों और कस्बों में इसके खरीदार आसानी से मिल जाते हैं. गांवों में इसके स्पेयर पार्ट्स की आसानी से मिल जाते हैं, जिसकी वजह से इसे सेकंड हैंड खरीदारों के लिए आकर्षक माना जाता है. Honda Activa रीसेल वैल्यू की बात सिर्फ मोटरसाइकिलों तक सीमित नहीं है. Honda Activa लंबे समय से हिंदुस्तानीय स्कूटर बाजार में लोकप्रिय है. इसका इस्तेमाल परिवार के कई सदस्य कर सकते हैं, जिससे सेकंड हैंड मार्केट में इसकी मांग बनी रहती है. पुराना Activa खरीदने वाला ग्राहक अक्सर ब्रांड भरोसे, आसान इस्तेमाल और सर्विस नेटवर्क को प्राथमिकता देता है. लेकिन पुराना स्कूटर खरीदते या बेचते समय उसकी कंडीशन और सर्विस हिस्ट्री जरूर जांचनी चाहिए. Yamaha R15 स्पोर्ट्स बाइक सेगमेंट में Yamaha R15 की अलग पहचान है. युवाओं के बीच इसकी लोकप्रियता और स्पोर्टी डिजाइन के कारण सेकंड हैंड मार्केट में भी इसकी मांग देखने को मिलती है. हालांकि, इस्तेमाल की गई स्पोर्ट्स बाइक में कीमत तय करते समय बाइक की राइडिंग हिस्ट्री और कंडीशन बेहद जरूरी हो जाती है. अगर बाइक को ज्यादा तेज चलाया गया है या उसमें मॉडिफिकेशन किए गए हैं, तो इसका असर रीसेल कीमत पर पड़ सकता है. Bajaj Pulsar Series Bajaj Pulsar हिंदुस्तान के सबसे पहचाने जाने वाले मोटरसाइकिल नामों में से एक है. Pulsar 150 और Pulsar 220F जैसे मॉडल लंबे समय से बाजार में लोकप्रिय रहे हैं. इनके स्पेयर पार्ट्स और सर्विस आसानी से उपलब्ध होने से सेकंड हैंड खरीदारों के लिए भी यह व्यावहारिक विकल्प बनते हैं. पुरानी Pulsar की कीमत मॉडल, वर्ष, किलोमीटर और कंडीशन के हिसाब से काफी अलग हो सकती है. बाइक बेचते समय अच्छी कीमत के लिए क्या करें? रीसेल वैल्यू सिर्फ बाइक के मॉडल से तय नहीं होती. आपकी बाइक की हालत भी उतनी ही जरूरी है. बाइक बेचने से पहले इन बातों का ध्यान रखें: समय पर सर्विस कराएं. सर्विस और रिपेयर के बिल संभालकर रखें. बाइक के ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स सुरक्षित रखें. इंजन, टायर और ब्रेक की स्थिति अच्छी रखें. बहुत ज्यादा आफ्टरमार्केट मॉडिफिकेशन से बचें. बाइक को साफ-सुथरा और अच्छी कॉस्मेटिक कंडीशन में रखें. खरीद-बिक्री के समय RC, इंश्योरेंस और PUC जैसे जरूरी दस्तावेज अपडेट रखें. सिर्फ रीसेल वैल्यू देखकर बाइक न खरीदें रीसेल वैल्यू जरूरी है, लेकिन बाइक खरीदने का फैसला सिर्फ इसी आधार पर नहीं होना चाहिए. आपके लिए माइलेज, सेफ्टी, इस्तेमाल, सर्विस कॉस्ट और बजट भी उतने ही जरूरी हैं. मिसाल के तौर पर रोज ऑफिस जाने वाले व्यक्ति की जरूरत स्पोर्ट्स बाइक से अलग हो सकती है. वहीं लंबी दूरी या हाईवे राइडिंग करने वाले ग्राहक की प्राथमिकताएं अलग होंगी. ये भी पढ़ें: इलेक्ट्रिक स्कूटर को रातभर चार्ज पर रखते हैं? भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, बढ़ सकता है आग लगने का खतरा The post बाइक बेचने की सोच रहे हैं? इन 5 बाइक्स की सेकंड हैंड मार्केट में मिल सकती है बेहतर कीमत appeared first on Naya Vichar.

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छोटे-छोटे UPI पेमेंट खाली कर रहे जेब? महीने भर के खर्चों का ऐसे रखें हिसाब

Money Saving Tips: आज के समय में पैसे खर्च करना जितना आसान हो गया है, उतना ही मुश्किल यह समझना हो गया है कि आखिर पैसा गया कहां. पहले जेब से कैश निकलता था, तो खर्च का अंदाजा आसानी से लग जाता था. लेकिन अब UPI से 20-50 रुपये का पेमेंट भी कुछ सेकंड में हो जाता है. ऐसे छोटे-छोटे खर्च महीने के अंत तक बड़ी रकम बन सकते हैं. इसलिए कमाई के साथ-साथ खर्चों का हिसाब रखना भी जरूरी है. कैश और UPI के खर्च अलग-अलग लिखें महीने की शुरुआत में फोन के नोट्स या किसी डायरी में दो हिस्से बना लें. एक में कैश से होने वाले खर्च और दूसरे में UPI से किए गए पेमेंट लिखें. सब्जी, दूध, ऑटो, चाय या छोटी खरीदारी जैसे कैश खर्च तुरंत नोट करें. वहीं ऑनलाइन शॉपिंग, रिचार्ज, बिल, खाना ऑर्डर करने और दूसरे डिजिटल पेमेंट को UPI वाले हिस्से में दर्ज करें. 10-20 रुपये के खर्च भी लिखें अक्सर लोग बड़े खर्च तो याद रखते हैं, लेकिन छोटी रकम को नजरअंदाज कर देते हैं. यही आदत बजट बिगाड़ सकती है. रोज की चाय, स्नैक्स, डिलीवरी चार्ज या छोटी ऑनलाइन खरीदारी भले ही मामूली लगे, लेकिन पूरे महीने में इन पर काफी पैसा खर्च हो सकता है. इसलिए रकम छोटी हो या बड़ी, हर खर्च को लिस्ट में शामिल करें. सिर्फ रकम नहीं, वजह भी लिखें खर्च लिखते समय यह भी बताएं कि पैसा किस चीज पर खर्च हुआ. इसके लिए खाने-पीने, यात्रा, घर का सामान, बिल, शॉपिंग और मनोरंजन जैसी अलग-अलग कैटेगरी बना सकते हैं. महीने के अंत में जब आप इनका कुल जोड़ देखेंगे, तो आसानी से समझ पाएंगे कि सबसे ज्यादा पैसा किस जगह जा रहा है. महीने के आखिर में करें खर्चों की समीक्षा महीना खत्म होने पर कैश और UPI दोनों खर्चों का कुल जोड़ निकालें. फिर इसे अपनी मासिक कमाई से मिलाकर देखें. अगर किसी गैर-जरूरी चीज पर लगातार ज्यादा पैसा जा रहा है, तो अगले महीने उसमें कटौती की जा सकती है. इससे बिना जरूरत खर्च करने की आदत पर भी कंट्रोल मिलेगा. बचत के लिए महीने की शुरुआत में ही रकम निकालें बचत के लिए महीने के अंत का इंतजार न करें. कमाई आते ही एक तय रकम अलग रख दें और बाकी पैसों से पूरे महीने का खर्च चलाएं. जब आपके पास हर खर्च का रिकॉर्ड होगा, तो बजट बनाना आसान होगा और महीने के आखिर में पैसे कहां चले गए, यह सोचने की जरूरत भी कम होगी. यह भी पढ़ें:  फ्रिज को समझ लिया है हर चीज का ठिकाना? इन 6 चीजों को अंदर रखना पड़ सकता है भारी The post छोटे-छोटे UPI पेमेंट खाली कर रहे जेब? महीने भर के खर्चों का ऐसे रखें हिसाब appeared first on Naya Vichar.

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नरेंद्र मोदी के बारे में गूगल पर क्या सर्च करते हैं लोग? जानिए उनकी जिंदगी से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब

आज, यानी 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है. मोदी आज 76 साल के हो गए हैं. वैसे तो उनके बारे में ज्यादातर जानकारी इंटरनेट पर आसानी से मिल जाती है, लेकिन उनकी निजी दिनचर्या, भाषण तैयार करने के तरीके और फोन के इस्तेमाल को लेकर आज भी लोगों के मन में कई सवाल हैं. इन सवालों के जवाब जानने के लिए लोग सिर्फ गूगल का सहारा नहीं लेते, बल्कि कई बार आरटीआई के जरिए भी जानकारी मांग लेते हैं. हालांकि इन सवालों से जुड़े कुछ जवाब प्रशासनी रिकॉर्ड में तो मिलते हैं लेकिन कुछ जानकारियां मीडिया रिपोर्ट्स और अलग-अलग लोगों के बयानों पर आधारित हैं. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि कौन सा जवाब सही है? और कौन सा गलत? कौन लिखता है PM मोदी का भाषण ? साल 2021 में प्रधानमंत्री कार्यालय से सूचना के अधिकार (RTI)के तहत यह सवाल पूछा गया था कि प्रधानमंत्री के भाषण कौन लिखता है? इसे तैयार करने में कौन-कौन लोग शामिल होते हैं? PMO के जवाब के मुताबिक, किसी कार्यक्रम की प्रकृति के आधार पर अलग-अलग व्यक्ति, अधिकारी, विभाग, संस्थाएं और संगठन भाषण के लिए इनपुट देते हैं. इसके बाद भाषण को अंतिम रूप प्रधानमंत्री खुद देते हैं. यानी अपना हर भाषण पूरी तरह प्रधानमंत्री खुद शुरू से लिखते हैं, लेकिन भाषण तैयार करने की प्रक्रिया में कई स्रोतों से कंटेंट और सुझाव लेते हैं. कौन-सा फोन इस्तेमाल करते हैं PM मोदी ? इंटरनेट पर प्रधानमंत्री के फोन को लेकर भी लोग काफी कुछ सर्च करते हैं. जिसमे ये सवाल सबसे ज्यादा पुछा जाता है कि PM मोदी कौन-सा फोन इस्तेमाल करते हैं? इसको लेकर इंटरनेट पर कई दावे मिलते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि कि संवेदनशील प्रशासनी बातचीत के लिए PM मोदी सामान्य स्मार्टफोन के बजाय सुरक्षित संचार प्रणाली का इस्तेमाल करते हैं. इनमें RAX यानी रेस्ट्रिक्टेड एरिया एक्सचेंज का नाम सामने आता है. कई मीडिया रिपोर्ट्स में RAX फोन की सुरक्षा को लेकर दावा किया जाता है कि इसे ‘हैक या ट्रैक नहीं किया जा सकता. हालांकि ऐसे दावे की स्वतंत्र प्रशासनी तकनीकी पुष्टि सार्वजनिक रूप से आसानी से उपलब्ध नहीं है. इसके इतर सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री को आईफोन जैसे स्मार्टफोन के साथ जरूर देखा गया है. कई रिपोर्ट्स का कहना है कि PM मोदी ऐसे फोन का इस्तेमाल तस्वीरें लेने के लिए करते हैं. ये भी पढ़ें: PM Modi Birthday: राहुल का वन-लाइनर, खरगे-अखिलेश का खास संदेश, जानें किसने क्या लिखा विदेश यात्रा के दौरान कैसी रहती है PM मोदी की दिनचर्या? प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं का आधिकारिक विवरण पीएमओ की वेबसाइट पर उपलब्ध है, जिसमें यात्रा की तारीख, देश और अवधि जैसी जानकारी दर्ज की जाती है. उनकी यात्रा और दिनचर्या को लेकर रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अलग-अलग समय क्षेत्रों में जाने के दौरान वे अपनी दिनचर्या को मेजबान देश के समय के अनुरूप रखने की कोशिश करते हैं.लेकिन वो सुबह जल्दी उठना, योग और ध्यान करना आदि दैनिक कामों को प्राथमिकता देते हैं. हालांकि, फ्लाइट के दौरान हर यात्रा में वे ठीक कितने घंटे सोते हैं या क्या करते हैं, इसका कोई नियमित आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं है. क्या PM मोदी में सच में कभी छुट्टी नहीं लेते अक्टूबर 2016 में दायर एक RTI के जवाब में PMO ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पद संभालने के बाद कोई छुट्टी नहीं ली थी. उसी जवाब में पीएमओ ने कहा था कि प्रधानमंत्री को हर समय ड्यूटी पर माना जा सकता है. हालांकि इसे आज की तारीख तक का रिकॉर्ड मानना सही नहीं है, क्योंकि यह जवाब 2016 में दिया गया था. इलके अवाला इन सवालों के लिए भी गूगल करते हैं लोग पीएम मोदी कितने बजे सोते और उठते हैं? वह नाश्ते और खाने में क्या पसंद करते हैं? क्या पीएम मोदी चाय या कॉफी पीते हैं? प्रधानमंत्री अपने कपड़े खुद चुनते हैं या उनकी टीम? क्या प्रधानमंत्री अपना सोशल मीडिया अकाउंट खुद चलाते हैं? पीएम मोदी दिनभर में कितने घंटे काम करते हैं? क्या प्रधानमंत्री स्क्रिप्ट देखकर पढ़ते हैं अपना भाषण ? प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट कौन तैयार करता है? पीएम मोदी के काफिले में कितनी गाड़ियां होती हैं और उनकी सुरक्षा कैसे तय होती है? पीएम मोदी की विदेश यात्राओं का खर्च कितना आता है? ये भी पढ़ें: Numerology: नरेंद्र मोदी से निया शर्मा और आर अश्विन तक, 17 सितंबर को जन्मे लोगों में होती हैं ये खास खूबियां The post नरेंद्र मोदी के बारे में गूगल पर क्या सर्च करते हैं लोग? जानिए उनकी जिंदगी से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब appeared first on Naya Vichar.

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तालाब का कचरा बना फैशन का खजाना, जमशेदपुर के गौरव ने जलकुंभी से तैयार की ईको-फ्रेंडली साड़ी, जानें उनकी कहानी

जमशेदपुर : जिस जलकुंभी को तालाब और नदी से निकालकर लोग कचरा समझकर फेंक देते हैं, वही अब साड़ी का खूबसूरत कपड़ा बन रही है. जमशेदपुर के गौरव आनंद ने जलकुंभी में छिपी इसी संभावना को पहचाना और कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़कर इसे फाइबर में बदलने का प्रयोग शुरू किया. इस पहल ने अब कारोबार के साथ स्त्रीओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं. जसकुंभी से बनाई जा रही साड़ी. जलकुंभी से फाइबर, फाइबर से कपड़ा और फिर साड़ी इस पूरी प्रक्रिया की कहानी भी काफी दिलचस्प है. जलकुंभी को जलस्रोतों से निकालने के बाद उससे फाइबर तैयार किया जाता है. इसके बाद फाइबर को कपास के साथ मिलाकर कपड़ा तैयार किया जाता है. यही कपड़ा आगे चलकर साड़ी और दूसरे उपयोगी उत्पादों का रूप लेता है. गौरव आनंद ने बताया – लगातार प्रयोग के बाद जलकुंभी से तैयार कपड़े को मुलायम और बेहतर गुणवत्ता वाला बनाने में सफलता मिली है. यानी तालाब से निकला एक ऐसा पौधा, जिसे आमतौर पर बेकार समझ लिया जाता है, अब फैशन उत्पाद का हिस्सा बन रहा है. सिर्फ साड़ी नहीं, स्त्रीओं के लिए रोजगार की कहानी भी इस पहल की खास बात केवल जलकुंभी से कपड़ा तैयार करना नहीं है. इसके साथ रोजगार का पहलू भी जुड़ा हुआ है. इस काम में स्त्रीओं को फाइबर तैयार करने, कपड़ा बनाने और उत्पाद तैयार करने जैसे अलग-अलग स्तरों पर काम के अवसर मिलने की बात कही जा रही है. इससे जलकुंभी को संसाधन में बदलने के साथ ग्रामीण और स्त्री रोजगार को बढ़ावा देने का प्रयास भी किया जा रहा है. यानी एक तरफ जलकुंभी से जलस्रोतों को होने वाली परेशानी कम करने की कोशिश, तो दूसरी तरफ उसी पौधे से आमदनी का रास्ता. जलकुंभी से बनाई जा रही साड़ी. ‘कचरा’ नहीं, संसाधन है – यही है इस प्रयोग का संदेश गौरव आनंद की पहल का मूल विचार यही है कि समाज जिस चीज को बेकार समझकर फेंक देता है, उसमें भी उपयोग और आर्थिक मूल्य तलाशा जा सकता है. जलकुंभी इसका एक उदाहरण है. जिस पौधे को हटाने के लिए खर्च करना पड़ता है, उसी से अगर फाइबर, कपड़ा और फैशन उत्पाद तैयार हो सकें तो यह वेस्ट से वैल्यू बनाने की दिशा में एक अलग मॉडल हो सकता है. अब कई राज्यों तक पहुंचाने की तैयारी जलकुंभी से फाइबर और कपड़ा तैयार करने की इस तकनीक को देश के दूसरे हिस्सों तक ले जाने की दिशा में भी काम किये जाने की बात कही गयी है. उद्देश्य यह है कि जलकुंभी जैसी समस्या को स्थानीय स्तर पर संसाधन में बदलते हुए रोजगार के अवसर तैयार किये जा सकें. गौरव आनंद की कहानी सिर्फ एक साड़ी के तैयार होने की कहानी नहीं है. यह उस सोच की कहानी है, जिसमें कचरे में भी अवसर तलाशने की कोशिश की गयी. The post तालाब का कचरा बना फैशन का खजाना, जमशेदपुर के गौरव ने जलकुंभी से तैयार की ईको-फ्रेंडली साड़ी, जानें उनकी कहानी appeared first on Naya Vichar.

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