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शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 890 अंक टूटा, क्रूड और बॉन्ड यील्ड ने बिगाड़ा खेल

Indian Stock Market: सुबह 9:41 बजे तक सेंसेक्स 891 अंक गिरकर 73,005 पर आ गया, जबकि निफ्टी50 270 अंक टूटकर 22,867 पर कारोबार कर रहा था. कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 896 अंक तक लुढ़का. निफ्टी50 ने 23,000 का अहम स्तर तोड़ दिया और 22,856 के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंचा. बाजार क्यों गिरा? इसकी दो बड़ी वजहें हैं: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड: अमेरिका में 10 साल के बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 5.2% पर पहुंच गई, जो करीब 20 साल का सबसे ऊंचा स्तर है. कच्चा तेल: ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1% से ज्यादा चढ़कर 105.64 डॉलर प्रति बैरल हो गया. अमेरिकी यील्ड बढ़ने से हिंदुस्तान पर असर क्यों? आसान भाषा में समझें तो जब अमेरिकी प्रशासनी बॉन्ड पर ज्यादा कमाई मिलने लगती है, तो निवेशक कम जोखिम में अच्छा रिटर्न पाना चाहते हैं. ऐसे में पैसा हिंदुस्तान जैसे उभरते बाजारों के शेयरों से निकलकर अमेरिकी बॉन्ड में जाने लगता है. विश्लेषकों के मुताबिक इससे हिंदुस्तानीय एसेट्स कम आकर्षक लगने लगते हैं. तेल की कीमतों के पीछे मिडिल-ईस्ट का तनाव है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान का शांति प्रस्ताव ठुकरा दिया, जिसका मकसद दोनों देशों का विवाद सुलझाना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलना था. ईरान ने यह प्रस्ताव पिछले हफ्ते न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में रखा था और कतर के मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया था. हालांकि रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने रविवार को एक्सियोस से कहा कि इस हफ्ते अमेरिकी वार्ताकार और बातचीत करेंगे. किन सेक्टर और शेयरों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी? गिरावट हर तरफ दिखी. एनएसई के सभी बड़े सेक्टर इंडेक्स लाल निशान में रहे. इंडेक्स गिरावट निफ्टी बैंक 1.3% निफ्टी मिडकैप 100 1.06% निफ्टी स्मॉलकैप 100 1.12% निफ्टी मेटल, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो, एफएमसीजी, पीएसयू बैंक, प्राइवेट बैंक, रियल्टी और ऑयल एंड गैस इंडेक्स भी 0.8% से 1.5% तक टूटे. निफ्टी50 के बड़े नुकसान वाले शेयर: हिंडाल्को सबसे बड़ा लूजर रहा। यह 2.5% गिरकर ₹952 पर आ गया. मैक्स हेल्थकेयर, कोटक महिंद्रा बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, अदाणी एंटरप्राइजेज, एचडीएफसी बैंक और हिंदुस्तान इलेक्ट्रॉनिक्स 1.5% से 2.2% तक फिसले. राहत देने वाले शेयर: डॉ. रेड्डीज लैब्स, कोल इंडिया, टीसीएस, एसबीआई लाइफ और एचसीएल टेक्नोलॉजीज बढ़त में रहे. आम निवेशक के लिए इसका क्या मतलब है? बाजार में डर का माहौल साफ दिख रहा है. इंडिया वीआईएक्स, यानी बाजार में उतार-चढ़ाव की उम्मीद मापने वाला पैमाना, 11.5% उछलकर 13.54 पर पहुंच गया. एनएसई पर 2,360 शेयर गिर रहे थे, जबकि सिर्फ 708 चढ़ रहे थे. एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2% और चीन का शंघाई कंपोजिट 1.1% टूटा, जबकि जापान का निक्केई मामूली 0.02% फिसला. आगे बाजार की चाल पर इन बातों पर नजर रखना काम आएगा: अमेरिका-ईरान की बातचीत में क्या प्रगति होती है कच्चे तेल की कीमत 105 डॉलर के ऊपर टिकती है या नहीं अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ऊपर जाती है या नहीं ये भी पढ़ें: शेयर बाजार में IPO की बंपर बहार, इस हफ्ते आ रहे 20 नए इश्यू, देखें पूरी लिस्ट The post शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 890 अंक टूटा, क्रूड और बॉन्ड यील्ड ने बिगाड़ा स्पोर्ट्स appeared first on Naya Vichar.

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यूक्रेन का दावा, रूस से जंग में रोबोट सैनिकों ने 3000 रूसी सैनिक मार गिराए; भारत भी बना रहा ऐसी तकनीक

यूक्रेन ने दावा किया है कि रूस के खिलाफ जारी जंग में रोबोट सैनिकों की मदद से 15,700 से ज्यादा मिशन पूरे किए और 3000 सैनिक मारे गए. इसके साथ-साथ रोबोट सैनिकों ने करीब 3,300 टन सामानों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भी पहुंचाया. अगर रूस का दावा सही है तो इसका संकेत ये है कि रूस-यूक्रेन युद्ध में अब जमीनी रोबोट युद्ध का हिस्सा बनते जा रहे हैं. यूक्रेन की थर्ड आर्मी कॉर्प्स ने दावा किया है कि उसने ‘ऑपरेशन विवाल्डी’ के दौरान बड़े पैमाने पर मानवरहित जमीनी वाहनों यानी सुसाइड रोबोट का इस्तेमाल किया. इन रोबोट को ड्रोन की मदद से रूसी सेना के कब्जे वाले इलाकों के भीतर पहुंचाया गया और फिर उन्हें अलग-अलग सैन्य अभियानों में लगाया गया. कॉर्प्स का कहना है कि कई इलाकों में रोबोट ने सैनिकों की जगह खतरनाक काम किए. क्या है ऑपरेशन विवाल्डी? यूक्रेन के मुताबिक, ‘ऑपरेशन विवाल्डी’ (Operation Vivaldi) डोनेट्स्क क्षेत्र के उत्तरी हिस्से में चलाया गया सैन्य अभियान है. इसका मकसद रूसी घुसपैठ को रोकना और कुछ इलाकों पर दोबारा नियंत्रण हासिल करना था. यूक्रेनी कमांडर आंद्री बिलेत्स्की ने इस अभियान में ड्रोन और जमीनी रोबोट के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को आधुनिक युद्ध की नई दिशा बताया है. कैसे काम करते हैं सुसाइड रोबोट? सुसाइड रोबोट असल में छोटे मानवरहित जमीनी वाहन (Robot Soldiers) होते हैं. इन्हें ऑपरेटर दूर बैठकर नियंत्रित कर सकता है. रोबोटों में विस्फोटक लगाए जाते हैं, जिन्हें लक्ष्य के पास पहुंचाकर विस्फोट किया जाता है। यूक्रेन में ऐसे रोबोटों को भारी ड्रोन की मदद से रूसी मोर्चे के पीछे पहुंचाने की रणनीति भी सामने आई है. रोबोट में लगे कैमरे आसपास का दृश्य दिखाते हैं. इससे सैनिकों को सीधे खतरनाक इलाके में भेजने की जरूरत कम हो सकती है. जानकारी के लिए बता दें कि यह पूरी तरह ‘अपने आप लड़ने वाले रोबोट’ नहीं है, इन्हें चलाने, लक्ष्य चुनने और कार्रवाई का फैसला लेने में इंसान की भूमिका होती है. यूक्रेनी थर्ड आर्मी कॉर्प्स के अनुसार, रोबोट का इस्तेमाल केवल हमले के लिए नहीं हुआ. इन्हें गोला-बारूद और दूसरे जरूरी सामान की सप्लाई, घायल सैनिकों को निकालने और बारूदी सुरंग वाले इलाकों में रास्ता साफ करने जैसे कामों में भी लगाया गया. कॉर्प्स का दावा है कि कुछ इलाकों में जमीनी रोबोट ने करीब 30 किलोमीटर रास्ते साफ किए. यूक्रेन का कहना है कि इससे सैनिकों का जोखिम कम हुआ. ये भी पढ़ें: UNSC में हिंदुस्तान की परमानेंट सदस्यता को रूस का समर्थन, जापान का किया विरोध, कहा-संगठन में और पश्चिमी देशों की जरूरत नहीं रोबोट्स की सेना तैयार कर रही यूक्रेन! मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक,रूस-यूक्रेन जंग में लाखों सैनिक मारे गए है. हालांकि, संख्याओं को लेकर कोई अधिकारिक जानकारी सामने नहीं है. ऐसे में,यूक्रेन अब युद्ध के मैदान में सैनिकों की जान बचाने के लिए रोबोट का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. पूर्व रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव ने ल्वीव में हुए आईटी एरीना कार्यक्रम में ‘आर्मी ऑफ रोबोट्स’ शुरू करने का ऐलान किया है. इस योजना के तहत ऐसी मशीनें तैयार की जाएगी, जो युद्ध के दौरान उन कामों को कर सकें, जिनमें सैनिकों की जान को सबसे ज्यादा खतरा रहता है. यह पहला मौका नहीं है जब जंग में यूक्रेन तकनीक का इस्तेमाल कर रहा. यूक्रेन ने 2022 में आर्मी ऑफ ड्रोन अभियान शुरू किया था. जिसके बाद उसका ध्यान जमीन पर चलने वाले रोबोट पर है. इन रोबोट का इस्तेमाल कई तरह के कामों में किया जा सकता है. मसलन, घायल सैनिकों को सुरक्षित जगह तक पहुंचाना, गोला-बारूद और जरूरी सामान पहुंचाना, दुश्मन के इलाके की निगरानी करना और बारूदी सुरंगों वाले खतरनाक इलाकों में काम करना.. रोबोट को केवल हमला करने वाली मशीन के तौर पर तैयार नहीं किया जा रहा. यूक्रेन ऐसी तकनीक विकसित करना चाहता है, जो युद्ध के दौरान सैनिकों का जोखिम कम कर सके. मसलन, अगर किसी इलाके में गोलीबारी हो रही है और वहां सामान पहुंचाना मुश्किल है, तो रोबोट वहां भेजा जा सकता है. इसी तरह घायल सैनिक को निकालने के लिए भी मानव रहित वाहन का इस्तेमाल किया जा सकता है. ये भी पढ़ें: UAPA में गिरफ्तारी से बेल तक…कौन है मैथ्यू? जिसके अमेरिका लौटने पर घिरी मोदी प्रशासन हिंदुस्तान भी बना रहा है सुसाइड रोबोट जमीनी रोबोट की तकनीक पर सिर्फ यूक्रेन ही काम नहीं कर रहा है. उसके अलावा रूस, चीन, इजराइल और हिंदुस्तान भी इस तकनीक पर काम कर रहा है. हिंदुस्तान में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO भी मानवरहित जमीनी वाहनों (सुसाइड रोबोट) के लिए एआई आधारित नियंत्रण, स्वचालित नेविगेशन, सेंसर और स्वार्म तकनीक पर काम चल रहा है. डीआरडीओ से जुड़ी जानकारी के मुताबिक सुसाइड रोबोट को निगरानी, विस्फोटक पहुंचाने और खतरनाक उपकरणों को दूर से नष्ट करने जैसे कामों के लिए डिजाइन किया जा रहा है.  रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदुस्तान ने ‘एक्सप्लोडर’ नाम का एक ऐसा रोबोट वाहन तैयार किया है, जो ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने में सक्षम है. इसके साथ-साथ, निगरानी करने और विस्फोटकों से जुड़े खतरनाक काम करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. रूस में रोबोट सैनिकों का इस्तेमाल हथियार और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए हो रहा है. चीन ऐसे रोबोट पर काम कर रहा है, जो जंग के दौरान हथियार ले जाने और आम सैनिकों के साथ मिलकर काम करने में सक्षम हो तो वहीं, इजराइल रोबोट से चलने वाले लड़ाकू वाहन डेवलप कर रहा है.  The post यूक्रेन का दावा, रूस से जंग में रोबोट सैनिकों ने 3000 रूसी सैनिक मार गिराए; हिंदुस्तान भी बना रहा ऐसी तकनीक appeared first on Naya Vichar.

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न शादी हुई, न मोहब्बत मुकम्मल… फिर क्यों लता मंगेशकर की मांग में दिखता था सिंदूर?

Lata Mangeshkar की आवाज में दर्द सुनकर करोड़ों लोग रोए होंगे. उन्होंने मोहब्बत के ऐसे नगमे गाए, जिनमें बिछड़ना था, इंतजार था, तड़प थी और किसी अपने के खो जाने का दर्द था. लेकिन उनकी अपनी जिंदगी में भी शायद एक ऐसी कहानी थी, जिसे उन्होंने कभी पूरा शब्द नहीं दिया. एक ऐसी कहानी, जिसमें शादी नहीं थी, लेकिन मांग में सिंदूर था. एक ऐसा रिश्ता था, जिसका नाम दुनिया जानती थी, लेकिन उसकी पूरी सच्चाई शायद सिर्फ दो दिल जानते थे. और एक ऐसा करियर था, जिसने धीरे-धीरे उनकी पूरी जिंदगी को अपने नाम कर लिया. बिना शादी के मांग में सिंदूर, उठने लगे सवाल लता मंगेशकर की मांग में सिंदूर देखकर अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता था- आखिर वह किसके नाम का सिंदूर लगाती हैं? शादी तो उन्होंने कभी की नहीं. फिर एक दिन अभिनेत्री तबस्सुम ने सीधे उनसे यही सवाल पूछ लिया. लता जी ने सवाल सुना, मुस्कुराईं और तबस्सुम को प्यार से चपत लगाई. फिर ऐसा जवाब दिया, जिसने उनकी पूरी जिंदगी का राज जैसे एक ही वाक्य में खोल दिया. उनके लिए संगीत ही परमेश्वर था, भगवान था, गॉड था. यानी उनकी मांग का सिंदूर किसी पति के नाम का नहीं, संगीत के नाम का था. जब सिंदूर को संगीत से जोड़ दिया जिस समाज में किसी स्त्री की मांग में सिंदूर देखते ही लोग उसके पति का नाम तलाशने लगते हैं, वहां लता मंगेशकर ने अपने सिंदूर का रिश्ता किसी इंसान से नहीं, अपने संगीत से जोड़ दिया. लेकिन क्या सचमुच उनकी जिंदगी में प्रेम नहीं था? यह सवाल यहीं से और दिलचस्प हो जाता है. वो नाम, जिसे दुनिया प्यार से जोड़ती रही लता मंगेशकर की जिंदगी में राज सिंह डूंगरपुर का नाम लंबे समय तक जुड़ा रहा. राज सिंह डूंगरपुर राजस्थान के राजघराने से थे और हिंदुस्तानीय क्रिकेट से भी उनका गहरा रिश्ता रहा. दोनों की नजदीकियों की चर्चा 1960 के दशक से होती रही. कहा गया कि दोनों एक-दूसरे को पसंद करते थे. शादी की बातें भी हुईं. लेकिन शादी नहीं हुई. अधूरे रिश्ते की वजह क्या थी, सच्चाई कभी सामने नहीं आई इस रिश्ते को लेकर वर्षों तक कई कहानियां सामने आती रहीं. सबसे ज्यादा चर्चित कहानी यही थी कि राज सिंह के परिवार को यह रिश्ता मंजूर नहीं था. लेकिन इस दावे पर सार्वजनिक स्रोतों में पूरी तरह एकमत तस्वीर नहीं मिलती. शायद इसलिए लता जी ने भी कभी इस रिश्ते की पूरी कहानी दुनिया के सामने नहीं रखी. ‘कुछ बातें सिर्फ दिल जानता है’ जब उनसे प्यार के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने एक ऐसी बात कही, जो उनके व्यक्तित्व के बिल्कुल मुताबिक थी. दिल की कुछ बातें सिर्फ दिल जानता है. बस. इतना कहकर उन्होंने उस दरवाजे को फिर बंद कर दिया. न कोई शिकायत. न किसी पर आरोप. न कोई सफाई. सिर्फ एक अधूरा सा जवाब. राज सिंह ने भी माना था- वो चीज बस हो नहीं पाई राज सिंह डूंगरपुर ने भी 2004 में अपने रिश्ते को लेकर बात की थी. उन्होंने कहा था कि दोनों अलग सामाजिक पृष्ठभूमि से आते थे और दोनों अपने-अपने परिवारों से बहुत जुड़े हुए थे. उनके शब्दों में, वह चीज बस हो नहीं पाई. शायद यही इस कहानी का सबसे दर्दनाक हिस्सा है. कुछ रिश्ते टूटते नहीं हैं. बस पूरे नहीं हो पाते. लेकिन लता की कहानी सिर्फ अधूरे प्यार की कहानी नहीं थी लता मंगेशकर की कहानी को सिर्फ एक अधूरी प्रेम कहानी कहना भी उनके साथ नाइंसाफी होगी. क्योंकि उनकी जिंदगी में जिम्मेदारियां प्यार से बहुत पहले आ गई थीं. जब वह सिर्फ 13 साल की थीं, उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया. घर में परिवार की जिम्मेदारी अचानक उनके कंधों पर आ गई. 13 की उम्र से ही कंधे पर आया परिवार का बोझ लता ने काम शुरू किया. फिल्मों में अभिनय किया. गाने गाए. स्टूडियो के चक्कर लगाए. और उस उम्र में काम किया, जिस उम्र में बाकी शिशु स्कूल और स्पोर्ट्स की दुनिया में होते हैं. उनकी शुरुआती जिंदगी में पैसे की इतनी कमी थी कि उन्होंने खुद बताया था कि वह बस का किराया बचाने के लिए पैदल चलती थीं. जिंदगी का पहला गाना ही फिल्म से कट गया था जिस आवाज ने आगे चलकर दुनिया को मंत्रमुग्ध किया, उसकी पहली playback recording तक फिल्म से काट दी गई थी. यानी जिस आवाज को बाद में लोग देवी का स्वर कहेंगे, उसे शुरुआत में खुद अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा. शायद इसी संघर्ष ने उनकी जिंदगी का रास्ता तय कर दिया. एक तरफ परिवार, दूसरी तरफ संगीत बीच में आया प्यार एक तरफ परिवार था. दूसरी तरफ संगीत. और बीच में शायद प्यार भी आया. लेकिन जिंदगी ने किसी एक चीज को चुनने का आसान विकल्प नहीं दिया. लता मंगेशकर ने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने 13 साल की उम्र से काम शुरू कर दिया था और परिवार की जिम्मेदारी इतनी बड़ी थी कि शादी के बारे में सोचने का समय ही नहीं मिला. उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें अकेले रहने का अफसोस नहीं था. शादी क्यों नहीं की? लता ने खुद दिया था जवाब दुनिया उनकी जिंदगी में इस सवाल का जवाब तलाशती रही- लता जी ने शादी क्यों नहीं की? लेकिन शायद लता जी के लिए सवाल कुछ और था- क्या हर जिंदगी को पूरा होने के लिए शादी जरूरी है? उन्होंने इस सवाल का जवाब अपने तरीके से दिया. उन्होंने शादी नहीं की. लेकिन उन्होंने करोड़ों लोगों के दिल में ऐसी जगह बनाई, जिसे शायद कोई रिश्ता छीन नहीं सकता था. जिन गानों में दुनिया ने अपना प्यार खोजा, उनमें लता की कहानी भी थी उन्होंने मोहब्बत के हजारों गीत गाए. “अजीब दास्तां है ये…” “लग जा गले…” “आपकी नजरों ने समझा…” “कहीं दीप जले कहीं दिल…” दुनिया ने इन गीतों में अपना प्यार खोजा. लेकिन शायद बहुत कम लोगों ने यह सोचा कि इन गीतों को गाने वाली औरत अपने भीतर क्या लेकर गा रही थी. अधूरी कहानी थी या संगीत ही उनका सबसे बड़ा प्रेम? क्या कोई अधूरी कहानी थी? क्या कोई ऐसा नाम था जिसे उन्होंने कभी सार्वजनिक नहीं किया? या फिर

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बिल गेट्स की चेतावनी, कहा- 100 करोड़ मौतों की वजह बन सकती है AI, कड़े कानून की सख्त जरूरत

आर्टिफिशियली इंटेलिजेंट (AI) तकनीकों के तेजी से हो रहे विकास ने जहां एक तरफ पूरी दुनिया में इंसानी जीवन और कामकाज को आसान बनाया है, वहीं दूसरी तरफ इसके संभावित खतरों ने टेक विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है. माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने एआई को लेकर एक अत्यंत गंभीर और चौंकाने वाली चेतावनी दी है. अमेरिकी न्यूज चैनल एनबीसी (NBC News) को दिए एक साक्षात्कार में गेट्स ने कहा कि बिना कड़े नियमों और निगरानी के अगर यह तकनीक गलत हाथों में पड़ गई, तो यह भयानक तबाही का कारण बन सकती है. उन्होंने अमेरिकी सांसदों से एआई कंपनियों के लिए तुरंत सख्त कानून और सुरक्षा ढांचा तैयार करने की जोरदार अपील की है. विनाशकारी साबित हो सकती है AI – जानिए बिल गेट्स ने ऐसा क्यों कहा इंटरव्यू के दौरान बिल गेट्स ने स्पष्ट किया कि एआई का खतरा केवल नौकरियां जाने या सामान्य तकनीकी गलतियों तक सीमित नहीं है. अगर खतरनाक इरादे रखने वाले लोग एआई के सबसे एडवांस्ड मॉडल का इस्तेमाल गलत काम के लिए करते हैं, तो यह वैश्विक तबाही मचा सकती है. गेट्स के मुताबिक, एआई में इतनी क्षमता है कि यह भविष्य में करीब 100 करोड़ (1 अरब) लोगों की जान ले सकने वाली घटनाओं का जरिया बन सकती है. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे यह दावा नहीं कर रहे हैं कि ऐसा होगा ही, बल्कि वे इस बात पर जोर दे रहे हैं कि एआई की क्षमता में इतनी ताकत है कि इसका दुरुपयोग महाविनाश ला सकता है. कंपनियों की स्वेच्छा पर न रहे प्रशासन, कानून बनाना है बेहद जरूरी बिल गेट्स ने अमेरिकी प्रशासन और वाशिंगटन के नीति-निर्माताओं को सलाह दी है कि वे एआई सुरक्षा का जिम्मा पूरी तरह से टेक कंपनियों की ‘ऐच्छिक प्रतिबद्धताओं’ (Voluntary Commitments) पर न छोड़ें. उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और राजनेताओं को खुद आगे आकर यह तय करना होगा कि सुरक्षा मानक और निगरानी तंत्र कैसा होना चाहिए. गेट्स का मानना है कि कंपनियों पर नियामक कानून लागू करने से उनका काम थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन इससे एआई के विकास या रिसर्च की रफ्तार पर कोई असर नहीं पड़ेगा. एआई सुरक्षा को लेकर टेक दिग्गजों में बंट चुके हैं दो धड़े एआई के तेजी से बढ़ते कदम और सुरक्षा नियमों को लेकर वैश्विक टेक जगत में राय दो हिस्सों में बंट गई है. एक तरफ एंथ्रोपिक (Anthropic) के सीईओ डारियो अमोदेई और ओपनएआई (OpenAI) के सीईओ सैम ऑल्टमैन जैसे दिग्गज एआई सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के कड़े नियमों, जोखिम मूल्यांकन और इंसानी निगरानी की वकालत कर रहे हैं. वहीं माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष ब्रैड स्मिथ ने भी रेस के बजाय सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही है. दूसरी ओर, मेटा (Meta) के सीईओ मार्क जकरबर्ग का मानना है कि एआई कंपनियों को बाहरी प्रशासनी हस्तक्षेप या उद्योग-व्यापी समन्वय के बजाय सुरक्षा मुद्दों को अपने आंतरिक स्तर पर हल करना चाहिए. अमेरिका में कानून की स्थिति और अमेरिकी राज्यों का रुख अमेरिकी संसद के स्पीकर माइक जॉनसन ने राष्ट्रीय सुरक्षा पहलुओं को ध्यान में रखते हुए बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में कानून बनाने के खिलाफ चेतावनी दी है. हालांकि, संघीय स्तर पर देरी के बीच अमेरिकी राज्यों ने खुद कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. कैलिफोर्निया राज्य ने एआई सुरक्षा कानूनों की समीक्षा और सिफारिशों के लिए विशेषज्ञों का बोर्ड गठित किया है, जबकि मैरीलैंड और न्यूयॉर्क जैसे राज्यों ने एआई कंपनियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अपनी पहल शुरू कर दी है. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) 1. क्या बिल गेट्स ने यह कहा है कि एआई से 100 करोड़ लोगों की मौत होना निश्चित है? नहीं, बिल गेट्स ने यह नहीं कहा कि 100 करोड़ लोग मरेंगे ही. उनका तात्पर्य यह था कि एआई में ऐसी विनाशकारी क्षमता मौजद है, जिसका यदि गलत हाथों में दुरुपयोग हुआ तो वह इतने बड़े पैमाने पर तबाही का कारण बन सकती है. 2. एआई रेग्युलेशन को लेकर बिल गेट्स का मुख्य सुझाव क्या है? गेट्स का कहना है कि प्रशासनों को एआई सुरक्षा का जिम्मा केवल टेक कंपनियों के स्वैच्छिक वादों पर नहीं छोड़ना चाहिए. इसके लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों और प्रशासन को मिलकर सख्त नियम और निगरानी तंत्र बनाना चाहिए. 3. क्या सभी बड़ी टेक कंपनियां एआई पर प्रशासनी कानून का समर्थन कर रही हैं? नहीं, एंथ्रोपिक और ओपनएआई जैसी कंपनियां कड़े सुरक्षा मानकों और वैश्विक नियमों का समर्थन कर रही हैं, जबकि मेटा के मार्क जकरबर्ग का मानना है कि कंपनियों को खुद अपनी सुरक्षा जांच करनी चाहिए. ये भी पढ़ें: Claude AI से मिसाइल तक पहुंचा आतंकी नेटवर्क? यमन के हथियार प्रोजेक्ट ने दुनिया के लिए बजाया खतरे का सायरन The post बिल गेट्स की चेतावनी, कहा- 100 करोड़ मौतों की वजह बन सकती है AI, कड़े कानून की सख्त जरूरत appeared first on Naya Vichar.

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दिवाली से पहले कर लें शॉपिंग, 1 अक्टूबर से बढ़ेंगे AC-TV के दाम

Home Appliances Price Hike: त्योहारों के मौसम में घर के लिए AC, LED TV या वॉशिंग मशीन खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह समाचार आपके काम की है. कई बड़ी कंपनियां 1 अक्टूबर से दाम बढ़ा रही हैं. PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल यह तीसरी बार है जब कंपनियां कीमतें बढ़ा रही हैं. AC के दाम तुरंत 5-8% चढ़ेंगे, जबकि वॉशिंग मशीन, फ्रिज और LED TV 3-4% महंगे होंगे. दाम क्यों बढ़ रहे हैं? वजह है कच्चे माल की महंगाई. तांबा, स्टील, एल्युमिनियम और कच्चे तेल से बनने वाली चीजें महंगी हुई हैं. माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ा है. इसके पीछे पश्चिम एशिया का तनाव और करेंसी में उतार-चढ़ाव भी है. ब्लू स्टार के MD बी. त्यागराजन के मुताबिक, जंग की वजह से सारी कमोडिटी महंगी हो गई है. हायर इंडिया के प्रेसिडेंट एन.एस. सतीश ने बताया कि तांबा पिछले साल के 8,000-9,000 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 14,500 डॉलर पर पहुंच गया है. एक AC में 3-4 किलो तांबा लगता है. डाइकिन के CMD कंवलजीत जावा का कहना है कि तांबा 25-35% चढ़ा है और कंपनियों पर भारी दबाव है. किस कंपनी ने कितना बढ़ाया? कंपनी क्या हो रहा है डाइकिन 16 सितंबर से 8-10% बढ़ोतरी शुरू हायर 1 अक्टूबर से AC 5% और LED TV व वॉशिंग मशीन 2-3% महंगे ब्लू स्टार AC और डीप फ्रीजर 5-8% महंगे हो चुके हैं LG, बॉश होम कम्फर्ट (हिताची) AC करीब 5% महंगे किए गोदरेज सभी कैटेगरी में 5-7% बढ़ोतरी, अक्टूबर या नवंबर से SPPL (थॉमसन, कोडक, ब्लौपुंक्ट) उपकरण 4-5% बढ़े, अक्टूबर के बाद TV में 7% बढ़ोतरी का लक्ष्य पैनासोनिक हालात देखकर फैसला करेगी हायर का कहना है कि जनवरी तक कुल बढ़ोतरी 15% तक पहुंच सकती है. कुल मिलाकर बड़ी कंपनियों ने 4-10% तक के बदलाव या तो किए हैं या पक्के कर दिए हैं. क्या दिवाली पर जेब पर असर पड़ेगा? फिलहाल राहत की बात है. अगस्त-सितंबर में कंपनियों और डीलरों ने पुराने रेट पर काफी माल पहले ही मंगवा लिया था. इसलिए दिवाली तक दुकानों में ज्यादातर पुराने रेट का स्टॉक रहेगा और खुदरा कीमतें लगभग स्थिर रह सकती हैं. गोदरेज के कमल नंदी भी मानते हैं कि दिवाली का काम ज्यादातर पुराने स्टॉक से चल जाएगा, पर दिवाली के बाद नए दाम पक्के तौर पर लागू होंगे. ब्लू स्टार के त्यागराजन के मुताबिक, लागत पिछले साल के त्योहारी सीजन से करीब 15% ऊपर है. लेकिन करीब 10% GST लाभ के चलते खरीदार पर असल असर लगभग 5% ही रहेगा. अभी खरीदें या इंतजार करें? समाचार से जो बातें निकलती हैं, वे यही हैं: अगर खरीदना तय है, तो दिवाली से पहले खरीदना फायदे का सौदा हो सकता है, क्योंकि पुराने रेट का स्टॉक तभी तक मिलेगा. दिवाली के बाद दाम बढ़ना लगभग तय है, और गोदरेज जैसी कंपनियां इसे जरूरी बता रही हैं. AC की कीमतें सबसे तेज बढ़ी हैं, इसलिए इसे खरीदना है तो देर न करें. दुकान पर जाने से पहले अलग-अलग ब्रांड के रेट पूछ लें, क्योंकि हर कंपनी का समय और प्रतिशत अलग है. ओणम से दशहरा और दिवाली तक का त्योहारी दौर अपार्टमेंट और घरेलू उपकरणों की सालाना बिक्री का 30-40% हिस्सा होता है. इसलिए कंपनियों के सामने चुनौती है कि बढ़ती लागत संभालें, पर ग्राहक भी न खोएं. पैनासोनिक के अभिषेक वर्मा ने कहा, इंडस्ट्री पर लागत का दबाव अभूतपूर्व है. ये भी पढ़ें: LPG New Rule: 1 अक्टूबर से बदल जाएगा नियम, सब्सिडी वाला सिलेंडर लेने से पहले चेक कर लें ये जरूरी काम The post दिवाली से पहले कर लें शॉपिंग, 1 अक्टूबर से बढ़ेंगे AC-TV के दाम appeared first on Naya Vichar.

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लोकसभा 46 दिन से स्थगित, 1987-89 के बाद मोदी सरकार में सबसे लंबा ब्रेक

18वीं लोकसभा का आठवां सत्र 46 दिनों से स्थगित है. इसके साथ ही यह संसद के इतिहास में किसी सत्र के स्थगित रहने का तीसरा सबसे लंबा अंतराल बन गया है. इससे पहले 1987 में 76 दिन और 1989 में 61 दिन तक लोकसभा की बैठक नहीं हुई थी. दोनों मामले आठवीं लोकसभा के दौरान हुए थे. इस बार मानसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ था और 13 अगस्त को लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. हालांकि, सत्र को अभी तक औपचारिक रूप से समाप्त यानी प्रोरोग नहीं किया गया है. इसी वजह से सदन तकनीकी रूप से उसी सत्र का हिस्सा बना हुआ है. मोदी प्रशासन के दौर में सबसे लंबा अंतराल 2014 में नरेंद्र मोदी प्रशासन के सत्ता में आने के बाद यह लोकसभा का अब तक का सबसे लंबा ऐसा अंतराल है, जब सदन को साइन डाई स्थगित करने के बाद प्रोरोग नहीं किया गया. इससे पहले 2015 में लोकसभा 28 दिनों और 2021 में करीब 20 दिनों तक स्थगित रहने के बाद प्रोरोग हुई थी. स्थगन और प्रोरोगेशन में क्या अंतर है? लोकसभा को ‘साइन डाई’ स्थगित करने का मतलब है कि सदन की बैठक खत्म हो गई, लेकिन अगली बैठक की तारीख तय नहीं हुई. इससे सत्र अपने आप खत्म नहीं होता. वहीं, प्रोरोगेशन के जरिए राष्ट्रपति संसद के सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त करते हैं. संविधान के अनुच्छेद 85(2) के तहत राष्ट्रपति यह कदम उठाते हैं और आम तौर पर यह प्रधानमंत्री की सलाह पर होता है. इसका मतलब यह है कि लोकसभा को साइन डाई स्थगित किए जाने के बावजूद स्पीकर जरूरत पड़ने पर सदन की बैठक दोबारा बुला सकते हैं. 1987 में 76 दिन तक नहीं हुई थी बैठक लोकसभा के इतिहास में सबसे लंबा ऐसा अंतराल 1987 में रहा. आठवीं लोकसभा के आठवें सत्र को 12 मई 1987 को साइन डाई स्थगित किया गया था. इसके बाद 27 जुलाई को सदन की बैठक दोबारा बुलाई गई. इस तरह दोनों बैठकों के बीच 76 दिनों का अंतर रहा. उस समय बोफोर्स सौदे को लेकर संसद में भारी नेतृत्वक टकराव चल रहा था. बाद में लोकसभा में बोफोर्स सौदे की जांच के लिए 30 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC बनाने का प्रस्ताव भी पारित हुआ. सत्र को अंततः 3 सितंबर 1987 को प्रोरोग किया गया. 1989 में 61 दिन का अंतराल दूसरा सबसे लंबा अंतराल 1989 में रहा. आठवीं लोकसभा के 14वें सत्र को 18 अगस्त को साइन डाई स्थगित किया गया और 11 अक्टूबर को दोबारा बैठक हुई. यानी 61 दिनों तक सदन की बैठक नहीं हुई. उस समय भी बोफोर्स मुद्दे को लेकर प्रशासन और विपक्ष के बीच तीखा टकराव था. करीब 100 विपक्षी सांसदों ने CAG की रिपोर्ट सदन में पेश किए जाने के बाद सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया था. इसके कुछ ही समय बाद राजीव गांधी प्रशासन सत्ता से बाहर हो गई और वीपी सिंह के नेतृत्व में नेशनल फ्रंट प्रशासन बनी. अक्टूबर में फिर बैठक की अटकलें मौजूदा स्थिति में लोकसभा के प्रोरोग न होने के कारण अक्टूबर में सदन की बैठक बुलाए जाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं. हालांकि, प्रशासन की ओर से ऐसी किसी बैठक को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है. रिपोर्ट के अनुसार, नेतृत्वक चर्चा में परिसीमन और स्त्री आरक्षण से जुड़े संवैधानिक संशोधन के लिए जरूरी संख्या को लेकर भी अटकलें हैं. इन चर्चाओं को फिलहाल स्थापित संसदीय फैसले के तौर पर नहीं देखा जा सकता. ये भी पढ़ें: अभिजीत दिपके ने दी जेल भरो आंदोलन की चेतावनी, मुंबई पुलिस ने 2 अक्टूबर के प्रदर्शन को नहीं दी अनुमति The post लोकसभा 46 दिन से स्थगित, 1987-89 के बाद मोदी प्रशासन में सबसे लंबा ब्रेक appeared first on Naya Vichar.

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गंडक ने बढ़ाई बिहार की टेंशन, बराज से छोड़ा गया 5.43 लाख क्यूसेक पानी, चंपारण के गांवों में घुसा पानी

Bihar Flood Alert: बिहार में बाढ़ का संकट एक बार फिर गहराने लगा है. नेपाल के तराई इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से गंडक नदी उफान पर है. वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 5 लाख 43 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया है. लगातार भारी डिस्चार्ज से नदी का जलस्तर खतरे के निशान के पार पहुंच गया है. इसका सबसे ज्यादा असर गंडक के तटवर्ती इलाकों में दिख रहा है. पूर्वी चंपारण के अरेराज अनुमंडल में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. वहीं, बगहा शहर में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है. अरेराज के दर्जनों गांवों पर बाढ़ और कटाव का खतरा दो दिनों से लगातार पानी छोड़े जाने के बाद अरेराज अनुमंडल के गंडक दियारा और तटीय इलाकों में स्थिति संवेदनशील हो गई है. सोमवार सुबह तक कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका है. सरेया, मिश्रौलिया, पुछरिया, बिंद टोली और नवादा समेत निचले इलाकों में पानी पहुंचने लगा है. खेतों में बाढ़ का पानी घुस गया है. बस्तियों में भी पानी आने का खतरा बना हुआ है. ग्रामीण मवेशियों और जरूरी सामान को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं. लोगों में चिंता और दहशत का माहौल है.` चंपारण से वैशाली तक तटबंधों की निगरानी जल संसाधन विभाग ने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया है. चंपारण से वैशाली तक तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है. अरेराज एसडीएम सुजीत कुमार खुद प्रभावित इलाकों का जायजा ले रहे हैं. उन्होंने संवेदनशील तटबंधों का स्थलीय निरीक्षण भी किया है. अधिकारियों को कटाव और रिसाव पर 24 घंटे नजर रखने का निर्देश दिया गया है. सीओ ने ग्रामीणों से की सुरक्षित जगह जाने की अपील अरेराज सीओ विनोद कुमार पाण्डेय राजस्व कर्मियों के साथ तटीय गांवों में लगातार संपर्क कर रहे हैं. वह ग्रामीणों से स्थिति की जानकारी ले रहे हैं. सीओ ने लोगों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है. निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया है. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें नावें रिजर्व, राहत-बचाव की तैयारी तेज संभावित बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासनी और निजी नावों को रिजर्व रखा गया है. प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक रसोई की तैयारी की जा रही है. शुद्ध पेयजल और मेडिकल टीमों की भी व्यवस्था की जा रही है. प्रशासन का कहना है कि हर स्थिति से निपटने के लिए तैयारी पूरी रखी गई है. बगहा के कई इलाकों में घरों में घुसा पानी पश्चिमी चंपारण में भी गंडक का असर तेज है. वाल्मीकिनगर, बगहा-2, बगहा-1, पिपरासी, मधुबनी, ठकराहा, भितहा, योगापट्टी, बैरिया और नौतन के दियारा क्षेत्रों में सैकड़ों घरों में पानी घुस गया है. बगहा-वाल्मीकिनगर पथ भी पानी में डूब गया है. इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है. VTR में भी फैला बाढ़ का पानी वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व यानी VTR के जंगल क्षेत्र में भी पानी फैल गया है. पानी बढ़ने के कारण जंगली जानवर जंगल से बाहर निकलकर सुरक्षित ठिकानों की तलाश कर रहे हैं. गंडक के साथ इन नदियों का भी बढ़ा जलस्तर गंडक के अलावा बागमती और कोसी नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा है. पूर्वी चंपारण, मधुबनी, दरभंगा, सुपौल और सहरसा के कई गांव प्रभावित हुए हैं. नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है. प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. Also Read: बिहार के इन 12 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 30 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, मौसम विभाग ने किया सावधान The post गंडक ने बढ़ाई बिहार की टेंशन, बराज से छोड़ा गया 5.43 लाख क्यूसेक पानी, चंपारण के गांवों में घुसा पानी appeared first on Naya Vichar.

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LPU Classes Suspended: 10 दिन बंद रहेंगी कक्षाएं, Mid-Term Exams भी पोस्टपोन

LPU Classes Suspended Notice 2026: लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) ने बीते दिनों हुई घटना के बाद छात्रों की सेफ्टी और सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए कक्षाओं और मिड-टर्म परीक्षाओं को लेकर जरूरी सूचना दी है. यूनिवर्सिटी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार 28 सितंबर 2026 से अगले 10 दिनों तक यूनिवर्सिटी की नियमित कक्षाएं स्थगित रहेंगी. वहीं, Mid-Term Examinations (MTT) को भी अगली सूचना तक पोस्टपोन कर दिया गया है. LPU Mid-Term Exam: परीक्षा को किया गया पोस्टपोन PTI रिपोर्ट के अनुसार LPU ने कक्षाओं के साथ Mid-Term Examinations को भी अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है. हालांकि फिलहाल यूनिवर्सिटी की ओर से परीक्षा के नए तारीख की घोषणा नहीं की गई है. LPU ने स्पष्ट किया है कि Revised Examination Schedule अलग से जारी किया जाएगा और इसकी जानकारी UMS के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाई जाएगी. ये भी पढ़ें: Chitkara University में दो छात्राओं की मौत का डर, रातभर सहमी रही पूरी यूनिवर्सिटी LPU Latest Update: यूनिवर्सिटी अथॉरिटी का निर्देश छात्रों को यूनिवर्सिटी अथॉरिटी की ओर से 10 दिनों की इस अवधि के दौरान अपने घर जाने की अनुमति भी दी गई है. PTI रिपोर्ट के अनुसार छात्र अपने माता-पिता या अभिभावकों से सलाह लेकर इस दौरान अपने घर जा सकते हैं. LPU Students Instruction: कैंपस में रुकने वाले छात्रों के लिए सलाह जो छात्र इस दौरान यूनिवर्सिटी परिसर में ही रहेंगे, उन्हें यूनिवर्सिटी अथॉरिटी की ओर से सलाह दी गई है कि वे अपने हॉस्टल या निवास स्थान के अंदर रहें और अनावश्यक आवाजाही से बचें. यूनिवर्सिटी ने छात्रों से किसी भी तरह की अशांति या Unrest Activities में शामिल नहीं होने को कहा है, ताकि उनकी सुरक्षा बनी रहे. ये भी पढ़ें: LPU Students Protest: गैंगरेप की अफवाह से LPU में हंगामा, हजारों छात्र जुटे, जमकर की तोड़फोड़ LPU UMS Update: UMS पर मिलेगी आगे की अपडेट LPU ने छात्रों से शांत रहने और यूनिवर्सिटी के आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है. साथ ही, आगे की सभी महत्वपूर्ण सूचनाओं के लिए UMS से जुड़े रहने को कहा गया है. परीक्षा की नई तारीख और अन्य अपडेट भी इसी माध्यम से जारी किए जाएंगे. LPU UMS क्या है? LPU UMS का मतलब University Management System है. यह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) का ऑनलाइन स्टूडेंट पोर्टल है. इस पोर्टल के माध्यम से छात्रों को पढ़ाई और यूनिवर्सिटी से जुड़ी जरूरी जानकारी मिलती है. ये भी पढ़ें: 2000 छात्र, एक रात और तबाह हुआ पूरा कैंपस, LPU की पूरी इनसाइड स्टोरी The post LPU Classes Suspended: 10 दिन बंद रहेंगी कक्षाएं, Mid-Term Exams भी पोस्टपोन appeared first on Naya Vichar.

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पंजाब: दुष्कर्म के दावे पर LPU में बवाल, FIR दर्ज; SIT करेगी पूरे मामले की जांच

LPU Students Protest: पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में एक छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म के दावे को लेकर रविवार को जमकर हंगामा हुआ. छात्रों ने परिसर में तोड़फोड़ करने के साथ दिल्ली-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग-44 को भी जाम कर दिया. शाम को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए और पुलिस के कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए. पुलिस के मुताबिक, छात्रों की शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दुष्कर्म की प्राथमिकी दर्ज की गई है. मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है. पुलिस ने कहा है कि जांच में फोरेंसिक नमूने, CCTV फुटेज और कॉल रिकॉर्ड समेत अन्य साक्ष्यों की जांच की जाएगी. दुष्कर्म के दावे को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन प्रदर्शन रविवार तड़के करीब एक बजे गर्ल्स हॉस्टल के पास शुरू हुआ. कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि हॉस्टल में रहने वाली एक छात्रा के साथ तीन दिन पहले एक प्लंबर ने दुष्कर्म किया. छात्रों का यह भी आरोप था कि हॉस्टल वार्डन को इसकी जानकारी दी गई थी, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई. हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है. LPU के रजिस्ट्रार मोनिका गुलाटी ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व छात्रों के बीच “झूठे, निराधार और मनगढ़ंत” आरोप फैलाकर भ्रम पैदा कर रहे हैं. विश्वविद्यालय ने हॉस्टल की कुछ छात्राओं के वीडियो बयान भी जारी किए, जिसमें उन्होंने ऐसी किसी घटना की जानकारी होने से इनकार किया. NH-44 पर लगाया जाम, पुलिस से झड़प दोपहर तक बड़ी संख्या में छात्र NH-44 पर पहुंच गए और सड़क को जाम कर दिया. इससे हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. यातायात को वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया गया. शाम करीब 7.30 बजे पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सड़क खाली करने के लिए समझाने की कोशिश की. अधिकारियों के अनुसार, इसी दौरान कुछ छात्रों ने पुलिसकर्मियों पर पानी की बोतलें फेंकीं. इसके बाद पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया. स्थिति बिगड़ने पर प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया. अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस के चार से पांच वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं. दो वाहनों में आग लगाए जाने की भी जानकारी सामने आई है. हालात को काबू में करने के लिए कपूरथला, जालंधर ग्रामीण और होशियारपुर से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया. पुलिस ने कहा- जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई जालंधर रेंज के डीआईजी नवीन सिंगला ने बताया कि छात्रों के बयान के आधार पर FIR दर्ज की गई है और SIT का गठन किया गया है. उन्होंने कहा कि जांच में छात्रों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा. पुलिस अधिकारी ने कहा कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले फोरेंसिक सैंपल, CCTV फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण किया जाएगा. छात्रों की ओर से हॉस्टल में केवल स्त्री स्टाफ की तैनाती समेत कुछ अन्य मांगें भी रखी गई हैं. LPU ने 10 दिन के लिए कक्षाएं स्थगित कीं हंगामे को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार से 10 दिनों के लिए कक्षाएं निलंबित कर दी हैं. मध्यावधि परीक्षाएं भी अगले आदेश तक स्थगित कर दी गई हैं. दिनभर परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही. सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में छात्रों को परिसर की संपत्ति में तोड़फोड़ करते और कुछ जगह आग लगाते हुए देखा गया. हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. प्रदर्शन के दौरान एक छात्र को परिसर में रखे सेवा से हटाए गए MiG-23UM विमान पर चढ़ते देखा गया, जबकि कुछ अन्य छात्र सेना के एक टैंक पर भी चढ़ गए. छात्रों की कई मांगें प्रदर्शनकारी छात्र LPU के संस्थापक-कुलाधिपति और भाजपा के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के मौके पर पहुंचने की मांग कर रहे थे. छात्रों ने यह भी मांग की कि यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट सिस्टम तक उनकी पहुंच बंद न की जाए और प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कार्रवाई या प्रताड़ना न हो. कुलपति जसपाल सिंह संधू ने छात्रों को आश्वासन दिया कि उनकी वास्तविक शिकायतों पर ध्यान दिया जाएगा और जांच में विश्वविद्यालय सहयोग करेगा. कांग्रेस ने प्रशासन पर साधा निशाना घटना को लेकर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने आम आदमी पार्टी प्रशासन पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि छात्रों की शिकायतों का पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से जवाब मिलना चाहिए. उन्होंने NH-44 जाम रहने का हवाला देते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. फिलहाल पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है और मामले की जांच SIT को सौंप दी गई है. दुष्कर्म के आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी. The post पंजाब: दुष्कर्म के दावे पर LPU में बवाल, FIR दर्ज; SIT करेगी पूरे मामले की जांच appeared first on Naya Vichar.

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जानिए किन शहरों में सस्ता हुआ पेट्रोल-डीजल, यहां चेक करें ताजा लिस्ट

Petrol-Diesel Price Today: 28 सितंबर को देश के बड़े शहरों में पेट्रोल-डीजल के ताजा भाव जारी हो गए हैं. मुंबई में आज पेट्रोल ₹111.21 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर बिक रहा है. ज्यादातर शहरों में कल के मुकाबले दाम नहीं बदले, लेकिन बेगूसराय, भागलपुर और भोपाल में दोनों फ्यूल सस्ते हुए हैं.  आज पेट्रोल का भाव क्या है? बड़े शहरों में पेट्रोल सबसे महंगा कोलकाता में है, जहां भाव ₹113.51 प्रति लीटर है. बेंगलुरु में यह ₹111.68, चेन्नई में ₹107.76 और नई दिल्ली में ₹102.12 है. गुरुग्राम में पेट्रोल ₹102.97 पर मिल रहा है.  पेट्रोल के दाम: शहर आज का रेट (₹/लीटर) कल का रेट (₹/लीटर) बदलाव (₹) पटना 113.37 113.37 0.00 बेगूसराय 113.80 113.94 -0.14 भागलपुर 113.61 114.37 -0.76 दरभंगा 114.16 114.16 0.00 गया 114.31 114.31 0.00 मुजफ्फरपुर 114.10 114.10 0.00 देवघर 104.99 104.99 0.00 धनबाद 105.66 105.66 0.00 जमशेदपुर  105.28 105.28 0.00 रांची 106.19 106.19 0.00 लखनऊ 101.86 101.86 0.00 नोएडा 101.96 101.96 0.00 नई दिल्ली 102.12 102.12 0.00 कोलकाता 113.51 113.51 0.00 मुंबई 111.21 111.21 0.00 चेन्नई 107.76 107.76 0.00 गुरुग्राम 102.97 102.97 0.00 बेंगलुरु 111.68 111.68 0.00 भोपाल 114.45 114.54 -0.09 डीजल के दाम में क्या खास है? डीजल सबसे सस्ता नई दिल्ली में है, जहां एक लीटर ₹95.20 का मिल रहा है. कोलकाता में यह ₹99.82, चेन्नई में ₹99.55 और बेंगलुरु में ₹99.56 है. वहीं मुंबई में ये ₹97.83 में बिक रहा है.  डीजल के दाम: शहर आज का रेट (₹/लीटर) कल का रेट (₹/लीटर) बदलाव (₹) पटना 99.36 99.36 0.00 बेगूसराय 99.77 99.90 -0.13 भागलपुर 99.59 100.30 -0.71 दरभंगा 100.10 100.10 0.00 गया 100.26 100.26 0.00 मुजफ्फरपुर 100.05 100.05 0.00 देवघर 100.21 100.21 0.00 धनबाद 100.86 100.86 0.00 जमशेदपुर  100.48 100.48 0.00 रांची 101.31 101.31 0.00 लखनऊ 95.36 95.36 0.00 नोएडा 95.44 95.44 0.00 नई दिल्ली 95.20 95.20 0.00 कोलकाता 99.82 99.82 0.00 मुंबई 97.83 97.83 0.00 चेन्नई 99.55 99.55 0.00 गुरुग्राम 95.64 95.64 0.00 बेंगलुरु 99.56 99.56 0.00 भोपाल 99.55 99.64 -0.09 ये भी पढ़ें: Starbucks करेगा 250 स्टोर्स बंद, जानिए आखिर कंपनी को क्यों लेना पड़ा ये फैसला The post जानिए किन शहरों में सस्ता हुआ पेट्रोल-डीजल, यहां चेक करें ताजा लिस्ट appeared first on Naya Vichar.

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