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ADR Report : 4 साल में 111 सांसदों-विधायकों ने बदला पाला, 26% की पहली पसंद बनी BJP

ADR Report : ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (ADR) और ‘नेशनल इलेक्शन वॉच’ के एक नए विश्लेषण में देश की नेतृत्व में दल-बदल का चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है. 2022 से 2026 के बीच हुए चुनावों और उपचुनावों के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट के अनुसार, 111 मौजूदा सांसदों और विधायकों ने चुने जाने के बाद अपनी नेतृत्वक पार्टियां बदलीं. इनमें 26 लोकसभा सांसद, 7 राज्यसभा सांसद और 78 विधायक (MLA) शामिल हैं. दल बदलने वाले सबसे ज्यादा नागालैंड से यह दल-बदल देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हुआ. इसमें सबसे ज्यादा नागालैंड के 32, पश्चिम बंगाल के 20, तेलंगाना के 9, जबकि गोवा और पंजाब के 8-8 जनप्रतिनिधि शामिल हैं. एडीआर ने स्पष्ट किया है कि इस गिनती में सिर्फ सामान्य दलबदल ही नहीं, बल्कि पार्टियों का विलय, इस्तीफा देकर उपचुनाव जीतने वाले और अयोग्य ठहराए जाने के बाद दूसरी पार्टी से जीतकर आने वाले जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं. ADR को जानिए चुनाव आयोग के व्यवस्थित और आसानी से उपलब्ध डेटा की कमी के कारण यह सूची पूरी तरह अंतिम नहीं भी हो सकती है. बता दें कि एडीआर 1999 में आईआईएम अहमदाबाद के प्रोफेसरों द्वारा बनाई गई एक गैर-पक्षपाती संस्था है, जिसकी कानूनी लड़ाई की बदौलत सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीदवारों के लिए अपने आपराधिक रिकॉर्ड, संपत्ति और शिक्षा का खुलासा अनिवार्य किया था. 29 नेता बीजेपी में गए, इनमें 7 राज्यसभा सांसद और 22 विधायक ADR और नेशनल इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के हवाले से इंडिया टुडे ने बताया कि दलबदल करने वाले 111 जनप्रतिनिधियों में से 29 (26%) बीजेपी में शामिल हुए. इसके साथ ही बीजेपी दूसरे दलों के नेताओं को अपने पाले में लाने वाली दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई. हालांकि, एडीआर के डेटा के मुताबिक कोई भी लोकसभा सांसद सीधे बीजेपी में नहीं गया. बीजेपी में 7 राज्यसभा सांसद और 22 विधायक शामिल हुए. दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी में शामिल होने वाले सभी सातों राज्यसभा सदस्य आम आदमी पार्टी (AAP) से चुनकर आए थे. इनमें स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राघव चड्ढा, संदीप कुमार पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजिंदर गुप्ता के नाम दर्ज हैं. वहीं, बीजेपी में शामिल होने वाले विधायकों में गोवा कांग्रेस के 8 विधायक, गुजरात कांग्रेस के 4 विधायक और हिमाचल प्रदेश के 2 विधायक शामिल हैं. इसके अलावा मणिपुर से जेडीयू (JDU) के 5 विधायक भी बीजेपी में गए. उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी के विधायक मनोज कुमार पांडे, मध्य प्रदेश से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे और कर्नाटक के विधायक जी. जनार्दन रेड्डी (जिनकी पार्टी कल्याणा राज्य प्रगति पक्ष का बीजेपी में विलय हुआ) भी इस सूची में शामिल हैं. गुजरात के कांग्रेस विधायक सीजे चावड़ा, अर्जुन मोढवाडिया, अरविंद लदानी और चिराग पटेल ने इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थामा और बाद में उपचुनाव लड़े. 2 विधायकों वाली NPF को कैसे मिले नागालैंड के 32 विधायक? संख्या के मामले में बीजेपी पहले नंबर पर नहीं है. सबसे ज्यादा 32 जनप्रतिनिधि (29%) नागालैंड की नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) में शामिल हुए, लेकिन ऐसा विधायकों के व्यक्तिगत दलबदल की जगह पूरी पार्टी के विलय (Merger) की वजह से हुआ. नागालैंड में कुल 60 विधानसभा सीटें हैं. मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के नेतृत्व वाली नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (NDPP) के पास 32 विधायक थे, जबकि एनपीएफ के पास सिर्फ 2 विधायक थे. नेफ्यू रियो पहले एनपीएफ में ही थे, लेकिन 2017 में उन्होंने एनडीपीपी बनाई थी. नागालैंड में एनडीपीपी और बीजेपी (12 विधायक) मिलकर बिना विपक्ष वाली प्रशासन चला रहे थे. अक्टूबर 2025 में एनडीपीपी का एनपीएफ में विलय हो गया और नेफ्यू रियो एनपीएफ विधायक दल के नेता चुने गए. रियो ने इसे नगा आकांक्षाओं को पूरा करने और नगा नेतृत्वक मुद्दे के हल के लिए ‘एक मजबूत क्षेत्रीय पार्टी’ बनाने का कदम बताया था. 20 बागी लोकसभा सांसदों ने बनाई नई राह, किस पार्टी को क्या मिला? इस फेहरिस्त में एनपीएफ (32) और बीजेपी (29) के बाद तीसरे नंबर पर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) रही, जिसे 20 जनप्रतिनिधि (18%) मिले. 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद, पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने बगावत कर दी. कानूनी पचड़ों से बचने के लिए उन्होंने 14 जून को एनसीपीआई में अपने विलय का एलान किया और लोकसभा में बीजेपी नीत एनडीए को समर्थन दे दिया. एनसीपीआई का इससे पहले कोई राष्ट्रीय जनाधार नहीं था और उसने 2023 के त्रिपुरा चुनाव से शुरुआत की थी, जहां उसे एक भी सीट नहीं मिली थी. इसके अलावा कांग्रेस में 9, शिवसेना में 8, एनपीपी (NPP) में 6 और पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल में 4 जनप्रतिनिधि शामिल हुए. वहीं नुकसान उठाने वाली पार्टियों में सबसे ऊपर एनडीपीपी (25), तृणमूल कांग्रेस (20) और कांग्रेस (19) रहीं. इन तीनों पार्टियों से ही कुल 64 (58%) जनप्रतिनिधियों का पलायन हुआ. एडीआर के अनुसार, लोकसभा के कुल 543 सांसदों में से 26 (लगभग 5%), राज्यसभा के 233 में से 7 (3%) और 4,100 विधायकों में से 78 (लगभग 2%) ने पाला बदला है. ADR की मांग: दल-बदल कानून हो सख्त, स्पीकर से छीने जाएं अधिकार इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद एडीआर ने देश के दल-बदल विरोधी कानून (एंटी-डिफेक्शन लॉ) में कड़े बदलाव की सिफारिश की है. एडीआर ने मांग की है कि संविधान की 10वीं अनुसूची में संशोधन किया जाए, ताकि सांसदों की अयोग्यता पर फैसला राष्ट्रपति और विधायकों की अयोग्यता पर फैसला राज्यपाल चुनाव आयोग की सलाह पर लें, न कि सदन के पीठासीन अधिकारी (स्पीकर). इसके साथ ही, दल-बदल करने वालों के सार्वजनिक पद संभालने पर रोक लगाने और अयोग्यता याचिकाओं पर फैसले के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करने की सिफारिश भी की गई है. एडीआर ने इसे “सुविधा और निजी स्वार्थ की नेतृत्व” करार देते हुए कहा कि नेताओं को इसकी जगह “विश्वास, साहस और सहमति की नेतृत्व” करनी चाहिए. हालांकि, यह देखना बाकी है कि नेतृत्वक दल इन सिफारिशों पर कितना अमल करते हैं, क्योंकि लगभग सभी प्रमुख दलों की प्रशासनें कभी न कभी इस दलबदल का लाभ उठा चुकी हैं. ये भी पढ़ें: LPU में बवाल : छात्रा से रेप की समाचार फैलते ही फूटा छात्रों का गुस्सा, कैंपस में लगाई आग; फगवाड़ा-जालंधर हाईवे जाम ये भी

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अस्पताल के मलबे से निकाले गए ईरान के सुप्रीम लीडर! ट्रंप बोले- वह मरे नहीं; US- इजराइली हमले में 3 अस्पताल हुए थे तबाह

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को तेहरान के एक अस्पताल के मलबे से निकालने का दावा किया गया है. यह दावा ईरान की Assembly of Experts के सदस्य मोहसेन हैदरी ने किया है. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, हैदरी ने कतर के टीवी नेटवर्क अल अराबी को दिए एक इंटरव्यू में यह जानकारी दी. हैदरी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि घायल होने के बाद मोजतबा खामेनेई को अस्पताल ले जाया गया था. इसके बाद तेहरान के तीन अस्पतालों को निशाना बनाया गया. हैदरी के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई तीसरे अस्पताल में मौजूद थे, जहां हमले के बाद उन्हें मलबे से बाहर निकाला गया. ट्रंप ने कहा था- ‘वह मरे नहीं हैं’ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने अमेरिकी कमेंटेटर ग्लेन बेक के साथ बातचीत में कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि मुजतबा खामेनेई की मौत हुई है. ट्रंप ने कहा था कि ईरानी नेता गंभीर रूप से घायल हुए थे और उनके शरीर के बाएं हिस्से हाथ और पैर पर गंभीर चोटें आई थीं. मलबे से निकलने के बाद कहां हैं मोजतबा? न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, अस्पताल के मलबे से निकाले जाने के बाद मोजतबा खामेनेई कथित तौर पर किसी अज्ञात स्थान पर चले गए. इसके बाद से वह सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं और उनके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है. उनकी स्थिति को लेकर लगातार अटकलें लगाई जाती रही हैं. कैसे बने ईरान के सुप्रीम लीडर? मोहसेन हैदरी ने मोजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर चुने जाने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 8 मार्च को Assembly of Experts की बैठक में मोजतबा खामेनेई के नाम पर फैसला हुआ. उन्होंने दावा किया गया कि मोजतबा को खुद तब तक इसकी जानकारी नहीं थी, जब तक ईरान के प्रशासनी टेलीविजन पर उनके चयन की घोषणा नहीं की गई. Assembly of Experts के ठिकाने पर भी हमला रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम लीडर के चयन की संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने वाली Assembly of Experts भी हमलों की चपेट में आई थी. न्यूयॉर्क पोस्ट ने दावा किया कि क़ोम स्थित इसके सचिवालय पर हुए हमले में आठ लोगों की मौत हुई और नए सुप्रीम लीडर के चयन से जुड़े दस्तावेज तथा सिफारिशें नष्ट हो गईं. गुप्त कमरे में हुआ था चयन हैदरी के अनुसार, दस्तावेज नष्ट होने के बाद Assembly of Experts के सदस्यों ने अपने वोट कागज पर लिखे. इसके बाद उन्हें चयन प्रक्रिया के लिए एक गुप्त कमरे में बुलाया गया. हैदरी ने दावा किया कि मुजतबा खामेनेई के नाम का प्रस्ताव रखने वाले वह पहले सदस्य थे. 59 में से 50 वोट मिलने का दावा रिपोर्ट में हैदरी के हवाले से कहा गया है कि मोजतबा खामेनेई को कुल 59 में से 50 वोट मिले. वहीं, अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को 8 वोट मिले और एक सदस्य ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. हालांकि, ये विवरण उसी इंटरव्यू और मीडिया रिपोर्ट पर आधारित हैं. ‘मैन ऑफ द शैडोज’ के तौर पर पहचान मोहसेन हैदरी ने मुजतबा खामेनेई को ‘मैन ऑफ द शैडोज’ भी बताया. रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम लीडर बनने से पहले उन्होंने ईरानी प्रशासन में कोई प्रमुख नेतृत्वक पद नहीं संभाला था. हालांकि, वह अपने पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के सलाहकार के तौर पर काम कर चुके थे. अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में गंभीर चोट का दावा मुजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर पहले भी कई तरह की समाचारें सामने आती रही हैं. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में उन्हें हमलों के दौरान गंभीर रूप से घायल और चेहरे पर गंभीर चोटों से प्रभावित बताया गया था. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है. ट्रंप ने कहा था- ‘वह मरे नहीं हैं’ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने अमेरिकी कमेंटेटर ग्लेन बेक के साथ बातचीत में कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि मुजतबा खामेनेई की मौत हुई है. ट्रंप ने कहा था कि ईरानी नेता गंभीर रूप से घायल हुए थे और उनके शरीर के बाएं हिस्से हाथ और पैर पर गंभीर चोटें आई थीं. ईरानी राष्ट्रपति ने बताया- ‘पूरी तरह स्वस्थ’ वहीं, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इस सप्ताह फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में मुजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर अलग दावा किया. उन्होंने कहा कि मुजतबा ‘पूरी तरह स्वस्थ’ हैं. पेजेश्कियन के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच पिछले महीने करीब सात घंटे तक मुलाकात और बातचीत हुई थी. ये भी पढ़ें: UNSC में हिंदुस्तान की परमानेंट सदस्यता को रूस का समर्थन, जापान का किया विरोध, कहा-संगठन में और पश्चिमी देशों की जरूरत नहीं The post अस्पताल के मलबे से निकाले गए ईरान के सुप्रीम लीडर! ट्रंप बोले- वह मरे नहीं; US- इजराइली हमले में 3 अस्पताल हुए थे तबाह appeared first on Naya Vichar.

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रक्षा मंत्री बोले- दुश्मन से निपटने के लिए सेना को खुली छूट, आतंकियों और उनके आकाओं के बीच कोई फर्क नहीं होगा

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ हिंदुस्तान की नीति को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि आतंकवादी ढांचे को खत्म करने के रास्ते में कोई सीमा बाधा नहीं बनेगी. आतंकियों और उनका समर्थन करने वालों के बीच भी कोई अंतर नहीं किया जाएगा. रक्षा मंत्री ने कहा कि हिंदुस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति स्पष्ट कर दी है, जो यह दर्शाता है कि दुश्मन को उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा जिसे वह समझता है. सेना को खुली छूट, दुश्मन को उसी भाषा में मिलेगा जवाब राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंदुस्तानीय सेना को दुश्मन से निपटने के लिए खुली छूट दी गई है. उन्होंने कहा कि जिसे जिस भाषा में समझ आता है, हिंदुस्तानीय सेना उसी भाषा में जवाब देने के लिए तैयार है. रक्षा मंत्री के मुताबिक, देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों में सेना को आवश्यक कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता है. पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान को लेकर सख्त संदेश रक्षा मंत्री ने कहा कि पहलगाम में आतंकी हमला कर पाकिस्तान ने लक्ष्मण रेखा पार कर दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवादी ढांचे को खत्म करने के रास्ते में अब कोई सीमा बाधा नहीं बनेगी. उनके बयान में आतंकवाद के खिलाफ हिंदुस्तान के सख्त रुख को रेखांकित किया गया. आतंकियों के साथ मददगार भी निशाने पर राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंदुस्तान आतंकियों और उनका साथ देने वालों के बीच कोई अंतर नहीं करेगा. यानी आतंकवाद को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देने वालों को भी हिंदुस्तान की नीति के दायरे में रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिए हिंदुस्तान पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुका है, जिसका मतलब है कि अब किसी भी मददगार को बख्शा नहीं जाएगा. अब परमाणु ब्लैकमेल बर्दाश्त नहीं करेगा हिंदुस्तान रक्षा मंत्री ने कहा कि हिंदुस्तान अब परमाणु ब्लैकमेल को स्वीकार नहीं करेगा. उनका यह बयान पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के संदर्भ में हिंदुस्तान की सुरक्षा नीति को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सिंधु जल संधि पर भी दो टूक राजनाथ सिंह ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के निलंबन के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि इसका आधार स्पष्ट था. खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते. उन्होंने इस फैसले को आतंकवाद के खिलाफ हिंदुस्तान के व्यापक रुख से जोड़कर पेश किया. ‘डिटरेंस बाय पनिशमेंट’ की ओर बढ़ चुका है हिंदुस्तान रक्षा मंत्री ने कहा कि हिंदुस्तान अब ‘डिटरेंस बाय पनिशमेंट’ यानी कार्रवाई के जरिए प्रतिरोध की नीति की ओर बढ़ चुका है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश मजबूती से खड़ा है और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर हिंदुस्तान अपने हितों की रक्षा के लिए दृढ़ है. ये भी पढ़ें: EC विवाद पर भड़के एकनाथ शिंदे: “राहुल गांधी देश से मांगें माफी, झूठ पर टिकी है INDIA गठबंधन की नेतृत्व” The post रक्षा मंत्री बोले- दुश्मन से निपटने के लिए सेना को खुली छूट, आतंकियों और उनके आकाओं के बीच कोई फर्क नहीं होगा appeared first on Naya Vichar.

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LPU में बवाल : छात्रा से रेप की खबर फैलते ही फूटा छात्रों का गुस्सा, कैंपस में लगाई आग; फगवाड़ा-जालंधर हाईवे जाम

LPU Violence : पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) परिसर में देर रात भारी तनाव पैदा हो गया. सोशल मीडिया और कैंपस में एक छात्रा के साथ कथित गैंगरेप या खुदकुशी की अपुष्ट समाचारें फैलने के बाद करीब 2,000 छात्र गर्ल्स हॉस्टल के पास इकट्ठा हो गए. देखते ही देखते छात्रों का गुस्सा बेकाबू हो गया. गुस्साए छात्रों ने यूनिवर्सिटी कैंपस के बाहर नेशनल हाईवे को जाम कर दिया और यातायात पूरी तरह ठप कर दिया. इसके बाद भीड़ ने यूनिवर्सिटी परिसर के भीतर जमकर उत्पात मचाया. इमारतों में आगजनी, खिड़कियों के शीशे और गमले तोड़े इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार विरोध प्रदर्शन ने थोड़ी ही देर में हिंसक रूप ले लिया. उपद्रव कर रहे छात्रों ने यूनिवर्सिटी की इमारतों के शीशे तोड़ दिए, ईंट-पत्थर और गमले फेंके और परिसर के कुछ हिस्सों में आग लगा दी. हालात बिगड़ते देख भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा. पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद हाईवे से छात्रों को हटाकर यातायात बहाल कराया और कैंपस में स्थिति को नियंत्रण में लिया. अफवाह से पैदा हुई गलतफहमी! कपूरथला के सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) गौरव तूरा ने स्पष्ट किया कि छात्रों के दावे गलतफहमी और अफवाहों पर आधारित हैं. उन्होंने बताया, “कैंपस के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के पास चार-पांच दिन पहले एक लड़की ने खुदकुशी की थी, लेकिन उस घटना का छात्रों के बीच चल रहे रेप के दावों से कोई संबंध होने की शिकायत पुलिस को नहीं मिली है.” पुलिस अधिकारी ने कहा कि न तो कथित पीड़िता की पहचान हुई है और न ही किसी आरोपी की. सोशल मीडिया पर एक कर्मचारी के शामिल होने के आरोप भी लगाए जा रहे थे, जिसकी पुलिस ने कोई पुष्टि नहीं की है. “छवि खराब करने की साजिश” यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें “झूठा, बेबुनियाद और मनगढ़ंत” करार दिया है. LPU की रजिस्ट्रार डॉ. मोनिका गुलाटी ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया के जरिए छात्रों में भ्रम फैलाने और कैंपस का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने इसे संस्थान की साख को नुकसान पहुंचाने की सोची-समझी कोशिश बताया और छात्रों व अभिभावकों से किसी भी तरह की अफवाहों पर यकीन न करने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की. फिलहाल पुलिस और प्रशासन छात्रों के साथ बातचीत कर तनाव सुलझाने में जुटे हैं. ये भी पढ़ें: EC विवाद पर भड़के एकनाथ शिंदे: “राहुल गांधी देश से मांगें माफी, झूठ पर टिकी है INDIA गठबंधन की नेतृत्व” The post LPU में बवाल : छात्रा से रेप की समाचार फैलते ही फूटा छात्रों का गुस्सा, कैंपस में लगाई आग; फगवाड़ा-जालंधर हाईवे जाम appeared first on Naya Vichar.

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Google 28th Anniversary: 27 सितंबर को ही क्यों बर्थडे मनाता है गूगल? BackRub से लेकर विंटेज डूडल तक की दिलचस्प कहानी

दुनिया का सबसे लोकप्रिय सर्च इंजन गूगल (Google) आज अपनी स्थापना की 28वीं सालगिरह मना रहा है. इस खास मौके पर गूगल ने अपने होमपेज पर एक रेट्रो और नॉस्टैल्जिक डूडल पेश किया है, जिसमें कंपनी का 1998 वाला ओरिजिनल लोगो और एक इंटरेक्टिव हिस्टोरिकल ट्रिविया क्विज दिखाई दे रहा है. इंटरनेट पर राज करने वाले इस टेक दिग्गज की शुरुआत स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक रिसर्च प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी. लेकिन क्या आप जानते हैं कि 4 सितंबर को कंपनी के रूप में रजिस्टर होने वाला गूगल हर साल 27 सितंबर को ही अपना आधिकारिक जन्मदिन क्यों मनाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह और गूगल के गैराज से ग्लोबल ब्रांड बनने की पूरी कहानी. 4 सितंबर को डाली गई नींव, फिर 27 सितंबर को क्यों मनता है जन्मदिन? गूगल की स्थापना की आधिकारिक तारीख को लेकर अक्सर लोगों में कन्फ्यूजन रहता है. गूगल के संस्थापकों लैरी पेज (Larry Page) और सर्गेई ब्रिन (Sergey Brin) ने सन माइक्रोसिस्टम्स के सह-संस्थापक एंडी बेक्टोलशाइम से 1,000,000 डॉलर का पहला निवेश मिलने के बाद 4 सितंबर 1998 को औपचारिक रूप से गूगल इंक (Google Inc.) का गठन किया था. हालांकि, साल 2006 से कंपनी ने आधिकारिक तौर पर 27 सितंबर को अपना जन्मदिन मनाना तय किया. इस तारीख को चुनने के पीछे एक ऐतिहासिक वजह थी. 27 सितंबर 2006 को गूगल ने अपने वेब सर्च इंडेक्स में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी का ऐलान किया था. इस बड़ी तकनीकी छलांग के साथ ही गूगल ने प्रतिस्पर्धी सर्च इंजनों के मुकाबले प्रोसेसिंग क्षमता में बढ़त दर्ज की और होमपेज से पेज-काउंटर को हटा दिया था. तब से ही 27 सितंबर को गूगल का ऑफिशियल बर्थडे माना जाता है. ‘BackRub’ से शुरू हुआ था सफर, एक गलती से बना ‘Google’ नाम गूगल का शुरुआती सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. जब लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया था, तब इसका नाम ‘बैककब’ (BackRub) रखा गया था. ऐसा इसलिए था क्योंकि यह सर्च इंजन वेबसाइट्स के बैकलिंक्स का विश्लेषण करके नतीजों की रैंकिंग तय करता था. बाद में संस्थापकों ने इसका नाम बदलकर गणितीय शब्द Googol (गुगोल) पर रखने का फैसला किया, जिसका अर्थ होता है 1 के पीछे 100 शून्य (1 followed by 100 zeros). लेकिन जब स्टैनफोर्ड के छात्र शॉन एंडरसन डोमेन नेम की स्पेलिंग सर्च कर रहे थे, तो उनसे गलती से ‘Googol’ की जगह ‘Google’ टाइप हो गया. यह स्पेलिंग मिस्टेक दोनों संस्थापकों को इतनी पसंद आई कि उन्होंने यही नाम फाइनल कर दिया और इस तरह एक टाइपोग्राफिकल मिस्टेक से दुनिया का सबसे बड़ा ब्रांड अस्तित्व में आया. गूगल डूडल (Google Doodle) की अनोखी शुरुआत गूगल होमपेज पर हर खास मौके पर दिखने वाले ‘डूडल’ की शुरुआत भी एक बेहद दिलचस्प घटना से हुई थी. अगस्त 1998 में लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन अमेरिका के नेवाडा में आयोजित ‘बर्निंग मैन फेस्टिवल’ (Burning Man Festival) में हिस्सा लेने जा रहे थे. यूजर्स को यह बताने के लिए कि संस्थापक ऑफिस से बाहर हैं, उन्होंने गूगल के लोगो में दूसरे ‘o’ के पीछे एक साधारण स्टिक फिगर (Stick Figure) ड्राइंग बना दी. यह एक तरह का “आउट ऑफ ऑफिस” मैसेज था. एक साधारण स्टेटस अपडेट के रूप में शुरू हुआ यह प्रयोग आज एक ग्लोबल डिजिटल परंपरा बन चुका है. पिछले 28 सालों में गूगल ने दुनिया भर की महान हस्तियों, ऐतिहासिक घटनाओं और सांस्कृतिक त्योहारों पर हजारों डूडल तैयार किए हैं. 28वीं सालगिरह का खास डूडल और ऑफर्स अपनी 28वीं सालगिरह के अवसर पर गूगल ने होमपेज पर 1998 वाले अपने विंटेज लोगो का इस्तेमाल किया है, जो यूजर्स को 90 के दशक की यादों में ले जाता है. इसके साथ ही एक ट्रिविया क्विज जोड़ा गया है जहां यूजर्स गूगल के इतिहास से जुड़े सवालों के जवाब देकर अपनी जानकारी परख सकते हैं. एक गैराज से शुरू हुई कंपनी आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और स्मार्टफोन टेक्नोलॉजी की दुनिया में अग्रणी बन चुकी है. सर्च इंजन से लेकर जेमिनी एआई (Gemini AI) तक, गूगल ने हमारी दैनिक जिंदगी और इंटरनेट इस्तेमाल करने के तरीके को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है. FAQs: गूगल की सालगिरह से जुड़े मुख्य सवाल 1. गूगल की स्थापना कब हुई थी और इसका पहला नाम क्या था? गूगल की औपचारिक स्थापना 4 सितंबर 1998 को हुई थी. शुरुआत में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्च प्रोजेक्ट के तौर पर इसका नाम ‘BackRub’ रखा गया था. 2. गूगल हर साल 27 सितंबर को ही अपना बर्थडे क्यों मनाता है? 27 सितंबर 2006 को गूगल ने अपने सर्च इंडेक्स में रिकॉर्ड तोड़ विस्तार की घोषणा की थी और होमपेज से पेज काउंटर हटाया था. इसी मील के पत्थर की याद में 2006 से हर साल 27 सितंबर को ही आधिकारिक जन्मदिन मनाया जाता है. 3. पहला गूगल डूडल किसलिए बनाया गया था? पहला डूडल अगस्त 1998 में बना था, जब संस्थापकों ने बर्निंग मैन फेस्टिवल में जाते वक्त यूजर्स को अपने “आउट ऑफ ऑफिस” होने की सूचना देने के लिए लोगो में एक स्टिक फिगर बनाया था. ये भी पढ़ें: आखिर इंटरनेट के ट्रेंड के साथ क्यों बदल जाता है Google का लोगो? जानिए Doodle की पूरी कहानी The post Google 28th Anniversary: 27 सितंबर को ही क्यों बर्थडे मनाता है गूगल? BackRub से लेकर विंटेज डूडल तक की दिलचस्प कहानी appeared first on Naya Vichar.

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‘रामायण’ के राम का रावण जैसा अहंकार, मिस्टर बीस्ट के लिए रणबीर कपूर ने किया मीडिया का अपमान, गुस्से में कहा – ‘जिसको जाना है जाओ’

Media Walkout on Ranbir’s Ramayana Event: रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश स्टारर फिल्म ‘रामायण’ को लेकर फैंस के बीच जबरदस्त उत्सुकता है. फिल्म की भव्यता और स्टारकास्ट के बाद अब इसका प्रमोशनल इवेंट भी चर्चा में आ गया है, लेकिन इस बार वजह कुछ और है. मुंबई में फिल्म के एक खास इवेंट के दौरान मीडिया को कई घंटों तक इंतजार करना पड़ा. इसके बाद नाराज मीडियाकर्मियों ने कार्यक्रम से वॉकआउट कर दिया. मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब पब्लिसिटी टीम के कथित रवैये और रणबीर कपूर के कथित बयान को लेकर सवाल उठने लगे. 1:30 बजे होना था इवेंट, घंटों तक इंतजार मुंबई में ‘रामायण’ का प्रमोशनल इवेंट दोपहर करीब 1:30 बजे शुरू होना था. इसके लिए बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी पहले से पहुंच गए थे. हालांकि, तय समय बीतने के बाद भी कार्यक्रम शुरू नहीं हुआ. रिपोर्ट के मुताबिक, करीब दो घंटे से ज्यादा समय तक मीडिया को देरी की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई. काफी देर इंतजार करने के बाद जब मीडिया ने कार्यक्रम में हो रही देरी की वजह पूछी, तब बताया गया कि इंटरनेशनल कंटेंट क्रिएटर और यूट्यूबर मिस्टरबीस्ट की प्राइवेट फ्लाइट मिस हो गई थी. उनके समय पर नहीं पहुंच पाने की वजह से इवेंट का पूरा शेड्यूल बिगड़ गया. पब्लिसिटी टीम के रवैये से बढ़ी नाराजगी देरी के बीच मीडियाकर्मी लगातार अपडेट का इंतजार करते रहे, जब कुछ मीडिया वाले ने इस स्थिति पर सवाल उठाए तो पब्लिसिटी टीम की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि जिन लोगों को इंतजार नहीं करना है, वे जा सकते हैं. The ruler of all 3 worlds, Ravana. pic.twitter.com/J6nnalQ5Vm — The World Of Ramayana (@WorldOfRamayana) September 26, 2026 “> इस जवाब के बाद वहां मौजूद मीडिया में नाराजगी बढ़ गई. आखिरकार कई पत्रकारों ने कार्यक्रम से बाहर निकलने का फैसला किया. यह पूरा घटनाक्रम इतना बढ़ गया कि एक घंटे के लिए तय किया गया प्रेस सेशन महज कुछ मिनटों में ही खत्म करना पड़ा. रणबीर कपूर के कथित बयान की भी चर्चा मीडिया के वॉकआउट की जानकारी जब रणबीर कपूर तक पहुंची, तो रिपोर्ट के मुताबिक अभिनेता ने कथित तौर पर कहा, “आप लोगों को जाना है तो चले जाओ. इस कथित बयान के बाद मामला और चर्चा में आ गया. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मेकर्स या रणबीर कपूर की ओर से कोई अलग विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है. दिलचस्प बात यह रही कि जिस इवेंट को करीब एक घंटे तक चलना था, वह आखिरकार लगभग दस मिनट के सेशन में सिमट गया. इस दौरान फिल्म को लेकर कोई बड़ा आधिकारिक ऐलान भी नहीं किया जा सका. रणबीर ने उठाया शिव धनुष कम समय में हुए इस कार्यक्रम में रणबीर कपूर ने भगवान राम के किरदार से जुड़े एक खास पल को जरूर दिखाया. एक्टर ने मंच पर रखा शिव धनुष उठाया. इससे पहले उन्होंने हाथ जोड़कर प्रार्थना की और फिर धनुष को उठाया. इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया. View on Instagram इसके बाद रणबीर ने मिस्टरबीस्ट से भी बातचीत की. मिस्टरबीस्ट ने फिल्म की तारीफ की और कार्यक्रम में अपने अनुभव को लेकर उत्साह जताया. एक वीडियो में रणबीर उन्हें ‘जय श्री राम’ बोलने में मदद करते भी नजर आए. ये भी पढ़ें: बिहार की बेटी ने मारी बाजी, रणबीर कपूर की ‘Ramayana’ में गूंजेगी Deepali Sahay की आवाज, AR Rahman ने दिया मौका देर रात मेकर्स ने जारी किए दो पोस्टर इवेंट में भले ही ज्यादा जानकारी सामने नहीं आ सकी, लेकिन देर रात मेकर्स ने फिल्म से जुड़े दो नए पोस्टर जारी किए. इनमें एक पोस्टर में यश रावण के किरदार में नजर आए, जबकि दूसरे में रणबीर कपूर के राम, साई पल्लवी की सीता और रवि दुबे के लक्ष्मण के वनवास से जुड़े लुक की झलक दिखाई गई. दो हिस्सों में आएगी ‘रामायण’ नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही ‘रामायण’ दो हिस्सों में रिलीज होगी. फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और यश रावण की भूमिका में हैं. वहीं सनी देओल हनुमान, रवि दुबे लक्ष्मण, लारा दत्ता कैकेयी, रकुल प्रीत सिंह शूर्पणखा, काजल अग्रवाल मंदोदरी और अरुण गोविल राजा दशरथ के किरदार में नजर आएंगे. पहला भाग दिवाली 2026 में रिलीज होने की योजना है, जबकि दूसरा हिस्सा 2027 में आएगा. ये भी पढ़ें: MrBeast ने बोला ‘जय श्री राम’, रणबीर कपूर ने सिखाया मतलब, Ramayana इवेंट में छा गई ये जोड़ी… The post ‘रामायण’ के राम का रावण जैसा अहंकार, मिस्टर बीस्ट के लिए रणबीर कपूर ने किया मीडिया का अपमान, गुस्से में कहा – ‘जिसको जाना है जाओ’ appeared first on Naya Vichar.

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Ranchi में निजी स्कूल के हॉस्टल में 5वीं के छात्र से यौन उत्पीड़न; नौवीं कक्षा का नाबालिक आरोपी गिरफ्तार

गुलाम रब्बानी की रिपोर्ट Ranchi Crime: राजधानी रांची के पिठोरिया थाना क्षेत्र स्थित एक निजी आवासीय विद्यालय में कक्षा पांच के छात्र के साथ कक्षा नौ के छात्र द्वारा कथित तौर पर अप्राकृतिक यौनाचार (यौन उत्पीड़न) किए जाने का मामला सामने आया है. घटना के बाद पीड़ित छात्र ने अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी. इसके बाद परिजन पिठोरिया थाना पहुंचे और मामले की शिकायत दर्ज कराई. पीड़ित छात्र के पिता ने पुलिस को दिये आवेदन में आरोप लगाया है कि आरोपी छात्र ने उनके बेटे को डराने-धमकाने के बाद घटना को अंजाम दिया. आवेदन के अनुसार, 22 सितंबर को छात्र ने फोन पर रोते हुए परिजनों को घटना की जानकारी दी. इसके बाद परिजन स्कूल पहुंचे और मामले की जानकारी लेने के बाद पिठोरिया थाना में शिकायत दर्ज कराई. ये भी पढ़ें- India-West Indies T20: JSCA में इस बार नहीं बंटेंगे हजारों फ्री पास, सिर्फ 3800 का कोटा 21 सितंबर की रात की बताई जा रही घटना पुलिस के अनुसार, घटना 21 सितंबर की रात करीब 10:30 बजे की है. परिजनों की शिकायत के आधार पर पिठोरिया पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की है. पुलिस ने मामले में आरोपी नाबालिग छात्र को गिरफ्तार कर लिया है और पूरे मामले की जांच की जांच में जुट गई है. पुलिस शिकायत में पीड़ित के पिता ने आरोप लगाया है कि आरोपी छात्र ने उनके बेटे को डराया-धमकाया और इसके बाद उसके साथ घटना को अंजाम दिया. पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है. स्कूल-हॉस्टल प्रबंधन पर सूचना नहीं देने का आरोप परिजनों का आरोप है कि स्कूल और हॉस्टल प्रबंधन को घटना की जानकारी होने के बावजूद उन्हें और पुलिस को तत्काल इसकी सूचना नहीं दी गई. उनका कहना है कि 21 सितंबर की रात हुई घटना की जानकारी समय पर नहीं मिलने से वे नाराज हैं. वहीं, पुलिस ने बताया कि परिजनों की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया गया है. पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है. ये भी पढ़ें- Ranchi Airport: बारिश ने बिगाड़ा फ्लाइट शेड्यूल, 10 उड़ानें रद्द, कई घंटे परेशान रहे यात्री The post Ranchi में निजी स्कूल के हॉस्टल में 5वीं के छात्र से यौन उत्पीड़न; नौवीं कक्षा का नाबालिक आरोपी गिरफ्तार appeared first on Naya Vichar.

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न धुएं का झंझट, न भारी खर्च, साबरमती से आज दौड़ेगी देश की पहली LNG ट्रेन

India’s First LNG Train: गुजरात के साबरमती में 27 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करीब 1,542 करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे. इसमें देश की पहली LNG से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाना भी शामिल है, साथ ही सुरक्षा और यातायात से जुड़े कई अहम प्रोजेक्ट भी लॉन्च होंगे. क्या-क्या मिलेगा साबरमती को? इस कार्यक्रम में कई परियोजनाएं एक साथ शुरू होंगी: WAG-12 लोकोमोटिव मेंटेनेंस शेड का उद्घाटन साबरमती-कलोल-भांडू मोतीदाऊ और साबरमती-सानंद-जाखवाड़ा सेक्शन पर ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम साबरमती-सरखेज रेल लाइन का दोहरीकरण अहमदाबाद-पालनपुर और अहमदाबाद-समाखियाली सेक्शन पर कवच सुरक्षा प्रणाली की आधारशिला WAG-12 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव और हिंदुस्तान की पहली LNG ट्रेन को झंडी कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी, राज्यमंत्री दर्शनाबेन वाघेला, सांसद हसमुखभाई पटेल और दिनेशभाई मकवाना, अहमदाबाद के मेयर हितेशभाई बारोट समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहेंगे. कवच सिस्टम से यात्रियों को क्या फायदा? रेल हादसों को रोकने के लिए अहमदाबाद डिवीजन में करीब 404 किलोमीटर के रेल नेटवर्क पर स्टैंडर्ड कवच सिस्टम लगाया जाएगा. इस पर लगभग 411 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें अहमदाबाद-पालनपुर सेक्शन के 157 किलोमीटर और अहमदाबाद-समाखियाली सेक्शन के 247 किलोमीटर हिस्से शामिल हैं. कवच एक स्वदेशी तकनीक है जो ट्रेनों की टक्कर रोकने, ओवरस्पीडिंग पर काबू पाने और इंसानी गलती से होने वाले हादसों को कम करने में मदद करती है. यानी सीधे तौर पर कहें तो इससे रेल सफर पहले से ज्यादा सुरक्षित होगा. इसके अलावा साबरमती-कलोल-भांडू मोतीदाऊ और साबरमती-सानंद-जाखवाड़ा के बीच 122.57 किलोमीटर हिस्से में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम पर करीब 118.83 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. इससे ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनी रहेगी और रूट की क्षमता भी बढ़ेगी. LNG ट्रेन क्यों है खास? साबरमती इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो में दो 1,400 HP डीजल पावर कार को डीजल-LNG डुअल-फ्यूल सिस्टम में बदला गया है. इसमें करीब 40 फीसदी डीजल की जगह LNG इस्तेमाल होगा। इससे न सिर्फ ईंधन का खर्च घटेगा, बल्कि कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों में भी कमी आएगी. यानी रेलवे अब पर्यावरण के लिहाज से भी ज्यादा जिम्मेदार बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. मालगाड़ियों और यात्रियों के लिए क्या बदलेगा? 700 करोड़ रुपये की लागत से बना नया WAG-12 मेंटेनेंस शेड 300 हाई-हॉर्सपावर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव को मेंटेन कर सकेगा. ये लोकोमोटिव करीब 12,000 HP क्षमता के हैं और भारी व लंबी मालगाड़ियों को ढोने के लिए बनाए गए हैं. वहीं 313.27 करोड़ रुपये की साबरमती-सरखेज लाइन दोहरीकरण परियोजना 21 किलोमीटर के हिस्से को कवर करेगी और मार्च 2028 तक पूरी होने का लक्ष्य है. इसमें साबरमती, गांधीग्राम, वस्त्रापुर और सरखेज स्टेशनों के साथ पुल और अंडरपास का काम भी शामिल है. इससे सरखेज-धोलेरा क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और इलाके में औद्योगिक गतिविधियों को भी रफ्तार मिलेगी. ये भी पढ़ें: दिवाली-दशहरा पर घर जाना होगा आसान, रेलवे चलाएगा 102 स्पेशल ट्रेनें, इस दिन से बुकिंग शुरू The post न धुएं का झंझट, न भारी खर्च, साबरमती से आज दौड़ेगी देश की पहली LNG ट्रेन appeared first on Naya Vichar.

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October School Holiday List 2026: अक्टूबर में स्कूलों में इतने दिन रहेगी छुट्टी, देखें बिहार-झारखंड की पूरी लिस्ट और बनाएं अपना प्लान

October School Holiday List 2026: सितंबर का महीना खत्म होने वाला है और अब छात्रों की नजर अक्टूबर में मिलने वाली छुट्टियों पर है. अक्टूबर में गांधी जयंती और दशहरा जैसे कई प्रमुख त्योहार पड़ रहे हैं, जिसके चलते यह महीना छुट्टियों के लिहाज से खास रहने वाला है. ऐसे में अभिभावकों के मन में यह सवाल जरूर होगा कि अक्टूबर में बच्चों के स्कूल कब-कब बंद रहेंगे, ताकि वे छुट्टियों को ध्यान में रखते हुए घूमने-फिरने या परिवार के साथ कहीं जाने का प्लान बना सकें. अगर आप भी अक्टूबर 2026 में स्कूलों की छुट्टियों की पूरी लिस्ट जानना चाहते हैं, तो इस आर्टिकल में छुट्टियों के लेटेस्ट अप्डेट देखें. Festivals in October 2026: देखें एक नजर में तारीख त्योहार 2 अक्टूबर 2026 गांधी जयंती 11 अक्टूबर 2026 कलश स्थापना 17 अक्टूबर 2026 दुर्गा पूजा – सप्तमी 18 अक्टूबर 2026 महाअष्टमी 19 अक्टूबर 2026 महानवमी 20 अक्टूबर 2026 विजयादशमी/दशहरा 29 अक्टूबर 2026 करवा चौथ ये भी पढ़ें: Cyclone Arnab क्या है, कहां बना और किन राज्यों में दिखा असर? समझें पूरी कहानी October School Holiday In Jharkhand 2026: जानिए इस महीने स्कूलों में कब-कब रहेगी छुट्टियां झारखंड में अक्टूबर महीने में त्योहारों की वजह से कई छुट्टियां रहेंगी. झारखंड प्रशासन की ओर से 2026 की छुट्टियों की जारी रिपोर्ट के अनुसार इस महीने 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती पर स्कूलों में छुट्टी रहेगी. इसके बाद दुर्गा पूजा को लेकर 19 और 20 अक्टूबर को स्कूल बंद रहेंगे. हालांकि कुछ स्कूलों में दुर्गा पूजा की छुट्टी सप्तमी से दे दी जाती है. अगर आप इन छुट्टियों में कहीं जाने का प्लान बना रहे हैं, तो पहले स्कूल की ओर से जारी नोटिस या सर्कुलर जरूर देख लें. October School Holiday In Jharkhand 2026 List Check Here ये भी पढ़ें: GATE 2027: बिना लेट फीस आवेदन करने का आखिरी मौका, DigiLocker में आ रही दिक्कत तो IIT मद्रास ने दी यह जरूरी राहत October School Holiday In Bihar 2026: बिहार में कौन-कौन से दिन बंद रहेंगे स्कूल? बिहार के प्रशासनी स्कूलों के 2026 अवकाश कैलेंडर के अनुसार अक्टूबर में कई छुट्टियां निर्धारित है. इस महीने 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती पर स्कूलों में छुट्टी रहेगी. इसके बाद 5 अक्टूबर को जिउतिया पर छुट्टी रहेगी. वहीं दशहरा के कलश स्थापना को लेकर 11 अक्टूबर को छुट्टी रहेगी और 17 से 21 अक्टूबर तक दुर्गा पूजा की छुट्टी रहेगी. October School Holiday In Bihar 2026 List Check Here Note: स्कूल की छुट्टियां राज्य, जिला और स्कूल के आधिकारिक कैलेंडर के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं. इसलिए छात्र छुट्टी से पहले अपने स्कूल की ओर से जारी नोटिस जरूर देख लें. ये भी पढ़ें: SSC CGL टियर-1 एग्जाम सिटी स्लिप जारी, 30 सितंबर से परीक्षा, ऐसे चेक करें अपना परीक्षा शहर The post October School Holiday List 2026: अक्टूबर में स्कूलों में इतने दिन रहेगी छुट्टी, देखें बिहार-झारखंड की पूरी लिस्ट और बनाएं अपना प्लान appeared first on Naya Vichar.

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UNSC में भारत की परमानेंट सदस्यता को रूस का समर्थन, जापान का किया विरोध, कहा-संगठन में और पश्चिमी देशों की जरूरत नहीं

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में हिंदुस्तान की स्थायी सदस्यता की मांग को एक बार फिर बड़ा कूटनीतिक समर्थन मिला है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदुस्तान और ब्राजील को सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट देने का समर्थन किया. साथ ही उन्होंने जर्मनी और जापान जैसे पश्चिमी देशों को नए स्थायी सदस्य के तौर पर शामिल करने का विरोध किया. रूस के अलावा मॉरीशस और पुर्तगाल ने भी हिंदुस्तान के समर्थन में अपनी बात रखी है. लावरोव ने हिंदुस्तान के समर्थन में क्या कहा? संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में रूस ने सुरक्षा परिषद के विस्तार को लेकर अपना रुख साफ किया. लावरोव ने कहा कि UNSC में नए सदस्यों के लिए, फोकस एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों की बेहतर भागीदारी पर होना चाहिए. रूसी विदेश मंत्री ने खास तौर पर हिंदुस्तान और ब्राजील की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया और जर्मनी-जापान को नए स्थायी सदस्यों के रूप में शामिल करने पर आपत्ति जताई. उन्होंने दोनों देशों को लेकर अपनी नेतृत्वक चिंताएं भी जाहिर की. मॉरीशस और पुर्तगाल ने भी हिंदुस्तान का साथ दिया हिंदुस्तान की दावेदारी को सिर्फ रूस का समर्थन नहीं मिला है. मॉरीशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफुल ने महासभा में कहा कि उनका देश हिंदुस्तान की स्थायी सीट की उम्मीदवारी का समर्थन करता है. उन्होंने हिंदुस्तान की वैश्विक भूमिका और रचनात्मक योगदान का भी उल्लेख किया. मॉरीशस ने जी-4 और एल-69 समूहों की ओर से सुरक्षा परिषद को ज्यादा प्रतिनिधित्व वाला बनाने की कोशिशों का समर्थन किया है. पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो ने भी सुरक्षा परिषद में स्थायी प्रतिनिधित्व बढ़ाने की जरूरत बताई. उन्होंने अफ्रीका, ब्राजील और हिंदुस्तान के लिए स्थायी सीटों की वकालत की. पुर्तगाल का कहना है कि परिषद की संरचना आज की वैश्विक वास्तविकताओं को बेहतर तरीके से प्रतिबिंबित करें. ये भी पढ़ें: डिजिटल अरेस्ट से ऑनलाइन फ्रॉड तक: साइबर अपराध पर साथ आए 91 देश, UN की संधि से क्या बदलेगा स्थायी सदस्यता को लेकर क्या है जापान-अफ्रीका का रुख दिलचस्प बात यह है कि जापान खुद भी सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का दावेदार है. प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि परिषद की संरचना को आज की दुनिया के मुताबिक बदला जाना चाहिए. जापान स्थायी और गैर-स्थायी, दोनों तरह की सदस्य संख्या बढ़ाने का समर्थन करता है. हिंदुस्तान, ब्राजील, जर्मनी और जापान जी-4 समूह का हिस्सा हैं. ये देश लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग कर रहे हैं. हालांकि सुरक्षा परिषद में सुधार की बहस सिर्फ हिंदुस्तान और जी-4 तक सीमित नहीं है. अफ्रीकी देशों की मांग भी लगातार तेज हो रही है. संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष ने भी कहा है कि अफ्रीका सुरक्षा परिषद में लंबे समय से कम प्रतिनिधित्व वाला क्षेत्र है और उसके प्रतिनिधित्व को सुधार प्रक्रिया में प्राथमिकता मिलनी चाहिए. ये भी पढ़ें: हिंदुस्तान की बेटी का शहबाज शरीफ को मुंहतोड़ जवाब: कौन हैं पेटल गहलोत…UN में उड़ाई PAK की धज्जियां UNSC में कैसे मिलेगी हिंदुस्तान को स्थायी सदस्यता सुरक्षा परिषद में इस समय पांच स्थायी सदस्य हैं,अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन. इन पांचों के पास वीटो पावर है. इसके अलावा 10 गैर-स्थायी सदस्य होते हैं, जिनका कार्यकाल दो साल का होता है. सबसे अहम बात यह है कि नियम के तहत किसी भी बड़े बदलाव के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन करना होता है. इसके लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत के साथ सदस्य देशों के दो-तिहाई हिस्से की मंजूरी जरूरी है और इसमें सभी पांच स्थायी सदस्यों की पुष्टि भी शामिल है. यानी हिंदुस्तान को मिल रहा अंतरराष्ट्रीय समर्थन उसकी दावेदारी को मजबूत करता है, लेकिन स्थायी सीट हासिल करने का अंतिम फैसला व्यापक वैश्विक सहमति और चार्टर में बदलाव की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा.  The post UNSC में हिंदुस्तान की परमानेंट सदस्यता को रूस का समर्थन, जापान का किया विरोध, कहा-संगठन में और पश्चिमी देशों की जरूरत नहीं appeared first on Naya Vichar.

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