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संबित पात्रा ने विपक्ष को दी चुनौती, बोले- खाली कागज लाओ, मैं साइन कर दूंगा, जानें क्या है पूरा मामला

बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने महाभियोग और संसद में इस मुद्दे को उठाने की मांग को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि अगर महाभियोग की कार्रवाई के लिए समर्थन चाहिए तो “खाली कागज लाओ, मैं साइन कर दूंगा.” उन्होंने कहा कि बीजेपी किसी व्यक्ति को बचाने की कोशिश नहीं कर रही, बल्कि हिंदुस्तान के लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर फैलाए जा रहे “दुर्भावनापूर्ण प्रचार” का जवाब देने की कोशिश कर रही है. संबित पात्रा ने कहा कि संबंधित लोग पहले ही सुप्रीम कोर्ट का रुख कर चुके हैं और उन्हें ऐसा करने से किसी ने नहीं रोका है. उन्होंने महाभियोग या संसद में इस मुद्दे को उठाने की बात पर विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि वे सिर्फ एक खाली कागज लेकर आएं, जिस पर वह हस्ताक्षर कर देंगे. ये भी पढ़ें: CEC-EC की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, 5 जजों की बेंच को भेजा मामला ‘विंटर सेशन एक दिन भी नहीं चलने देंगे’ बीजेपी सांसद ने संसद के आगामी विंटर सेशन को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जब संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होगा तो विपक्ष एक दिन भी सदन नहीं चलने देगा. उनके मुताबिक, विपक्षी नेता संसद के बाहर हंगामा और नारेबाजी करते नजर आएंगे. संबित पात्रा ने कहा कि बीजेपी का मकसद किसी खास व्यक्ति को बचाना नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ फैलाए जा रहे कथित गलत प्रचार का मुकाबला करना है. उनका यह बयान चुनाव आयुक्त को हटाने को लेकर महाभियोग की मांग और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर चल रही नेतृत्वक बहस के बीच आया है. The post संबित पात्रा ने विपक्ष को दी चुनौती, बोले- खाली कागज लाओ, मैं साइन कर दूंगा, जानें क्या है पूरा मामला appeared first on Naya Vichar.

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लंदन से दिल्ली आ रहे इंडिगो विमान में तकनीकी खराबी, 1 घंटे आसमान में चक्कर काटने के बाद वापस लौटा

लंदन से नई दिल्ली रही इंडिगो की फ्लाइट 6E 04 में टेक-ऑफ के तुरंत बाद तकनीकी खराबी आ गई, जिसके बाद एयरक्राफ्ट को वापस लंदन ले जाएगा और सुरक्षित लैंडिंग कराई गई. एएनआई न्यूज के अनुसार विमान के पायलटों ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर को फाॅलो करते हुए, खराबी आने के पायलटों ने वापस लौटने का फैसला किया. एयरक्राफ्ट को लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड कराया. एयरक्राफ्ट का मेंटेनेंस चेक जारी इंडिगो एयरलाइंस के अधिकारियों ने यह जानकारी दी है कि एयरक्राफ्ट का मेंटेनेंस चेक जारी है और सभी जरूरी मंजूरी मिलने के बाद यह फिर से ऑपरेशन शुरू कर देगा.पीटीआई न्यूज एजेंसी के अनुसार उड़ान निगरानी वेबसाइट फ्लाइटरडार24 डॉट कॉम पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लंदन हीथ्रो से दिल्ली के लिए संचालित उड़ान संख्या 6E 04 का बोइंग 787-9 विमान करीब एक घंटे तक हवा में रहने के बाद वापस लौट गया. विमान ने 12 बजकर 40 मिनट पर उड़ान भरा था इंडिगो की ओर से तकनीकी समस्या के बारे में संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है. विमान में सवार यात्रियों की संख्या का भी अभी पता नहीं चल सका है. विमान ने बुधवार को हिंदुस्तानीय समयानुसार करीब 12 बजकर 40 मिनट पर उड़ान भरी थी और लगभग दो बजे लंदन हीथ्रो लौट आया. ये भी पढ़ें: कार के डिवाइडर से टकराते ही लगी आग, जिंदा जले प्राइवेट हाॅस्पिटल के न्यूरोसर्जन The post लंदन से दिल्ली आ रहे इंडिगो विमान में तकनीकी खराबी, 1 घंटे आसमान में चक्कर काटने के बाद वापस लौटा appeared first on Naya Vichar.

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राज्यों में 2027 चुनाव से पहले BJP ने बनाए नए प्रभारी, स्मृति ईरानी को हरियाणा-छत्तीसगढ़, देखें किसे मिला कौन सा राज्य

BJP New State Incharges: बीजेपी ने बुधवार को कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नए प्रभारी और सह-प्रभारियों की घोषणा की है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इन नियुक्तियों को मंजूरी दी है. स्मृति ईरानी को हरियाणा और छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि सुनील बंसल पश्चिम बंगाल और तेलंगाना का काम देखेंगे. विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश और राम माधव को उत्तराखंड का प्रभारी बनाया गया है. किस नेता को मिला कौन सा राज्य? बीजेपी ने संगठन में कई वरिष्ठ नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को दो राज्यों हरियाणा और छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया है. वहीं पार्टी के रणनीतिकार सुनील बंसल को पश्चिम बंगाल और तेलंगाना की जिम्मेदारी सौंपी गई है. उत्तर प्रदेश में विनोद तावड़े को पार्टी का प्रभारी बनाया गया है. वहीं उत्तराखंड की जिम्मेदारी राम माधव को मिली है. उत्तराखंड में बांसुरी स्वराज को सह-प्रभारी बनाया गया है. स्मृति ईरानी – हरियाणा और छत्तीसगढ़ सुनील बंसल – पश्चिम बंगाल और तेलंगाना विनोद तावड़े – उत्तर प्रदेश राम माधव – उत्तराखंड बांसुरी स्वराज – उत्तराखंड की सह-प्रभारी इन नियुक्तियों का मकसद अलग-अलग राज्यों में पार्टी के संगठन को मजबूत करना और जमीनी स्तर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाना है. आने वाले चुनावों को देखते हुए राज्यों में वरिष्ठ नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियां दी गई हैं. 25 सितंबर को उत्तराखंड बीजेपी की अहम बैठक नई जिम्मेदारियों के ऐलान के बीच 25 सितंबर को उत्तराखंड बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक भी होने वाली है. इस बैठक की अध्यक्षता बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन करेंगे. बैठक में उत्तराखंड से होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर चर्चा होने की संभावना है. पार्टी के वरिष्ठ नेता राज्यसभा उम्मीदवार के संभावित नामों पर विचार कर सकते हैं. इसके साथ ही चुनाव से जुड़े संगठनात्मक और नेतृत्वक मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है. उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट पर होना है चुनाव उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर भी चुनाव होगा. पश्चिम बंगाल की एक खाली राज्यसभा सीट के लिए इसी दिन उपचुनाव कराया जाएगा. इस तरह 16 अक्टूबर को कुल 12 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया होगी. 29 सितंबर से शुरू होगी नामांकन प्रक्रिया चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक राज्यसभा चुनाव के लिए 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी. उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे. 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे. मतदान 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा. वोटों की गिनती भी उसी दिन की जाएगी. 2027 के चुनावों से पहले संगठन में बदलाव उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे समय में बीजेपी की ओर से राज्यों के प्रभारी और सह-प्रभारियों की जिम्मेदारी तय किए जाने को पार्टी की संगठनात्मक तैयारियों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है. नई टीम के जरिए अलग-अलग राज्यों में पार्टी के संगठन और चुनावी तैयारियों के बीच तालमेल पर फोकस रहेगा. Also Read: बिहार BJP के नए प्रभारी बने हरीश द्विवेदी, दीपक प्रकाश के लिए MLC पद छोड़ने वाले देवेश कुमार को मिली ये जिम्मेदारी The post राज्यों में 2027 चुनाव से पहले BJP ने बनाए नए प्रभारी, स्मृति ईरानी को हरियाणा-छत्तीसगढ़, देखें किसे मिला कौन सा राज्य appeared first on Naya Vichar.

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Bank Open on Sunday: 27 सितंबर को रविवार के दिन भी खुलेंगे बैंक, निपटा लें जरूरी काम, अगले 3 दिन हड़ताल

Bank Open on Sunday: अगर आपका बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम बाकी है तो उसे आप इस रविवार (27 सितंबर) को भी पूरा कर सकते हैं. रविवार होने के बावजूद 27 सितंबर को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक खुले रहेंगे. 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय बैंक हड़ताल को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. हिंदुस्तानीय रिजर्व बैंक ने भी सभी बैंक शाखाओं, कार्यालयों, एटीएम से जुड़ी शाखाओं और करेंसी चेस्ट को इस दिन खोलने की अनुमति दे दी है. यानी ग्राहक रविवार को भी बैंक जाकर अपने जरूरी काम निपटा सकेंगे. वित्त मंत्रालय की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, प्रस्तावित तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल (28 से 30 सितंबर) से पहले निर्बाध बैंकिंग सेवाएं जारी रखने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक रविवार (27 सितंबर) को खुले रहेंगे और सामान्य रूप से कार्य करेंगे. 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित है बैंक हड़ताल यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 28, 29 और 30 सितंबर को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है. इससे पहले 26 सितंबर शनिवार और 27 सितंबर रविवार है. ऐसे में अगर 27 सितंबर को भी बैंक बंद रहते, तो ग्राहकों को कई दिनों तक बैंकिंग सेवाओं में दिक्कत हो सकती थी. इसी वजह से प्रशासन ने रविवार को बैंक खोलने का फैसला किया है, ताकि ग्राहकों को हड़ताल शुरू होने से पहले एक अतिरिक्त कार्यदिवस मिल सके. बैंक कर्मचारी क्यों कर रहे हैं हड़ताल? बैंक यूनियनों की प्रमुख मांगों में पांच दिन का बैंकिंग सप्ताह लागू करना और प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन (Performance Linked Incentive, PLI) स्कीम को वापस लेना शामिल है. प्रशासन का कहना है कि बैंक यूनियनों से बातचीत के बाद PLI योजना को फिलहाल स्थगित रखा गया है. हालांकि पांच दिन के बैंकिंग सप्ताह की मांग पर अभी विचार किया जा रहा है. 30 सितंबर को बैंकों की हाफ ईयरली क्लोजिंग भी प्रस्तावित बैंक हड़ताल का तीसरा दिन 30 सितंबर है. इसी दिन बैंकों की अर्धवार्षिक अवकाश भी होती है. इस दौरान बैंकों में खातों का मिलान, प्रोविजनिंग, ट्रेजरी और मार्केट से जुड़े कई अहम काम किए जाते हैं. प्रशासन का मानना है कि इस समय हड़ताल होने से बैंकिंग व्यवस्था के कई जरूरी काम प्रभावित हो सकते हैं. Also Read: Bank Strike: 26-30 सितंबर तक लगातार 5 दिन बंद रहेंगे बैंक, 25 सितंबर को ही निपटा लें काम; देखें पूरी लिस्ट प्रशासन ने यूनियनों से की हड़ताल टालने की अपील प्रशासन और बैंक प्रबंधन ने यूनियनों से बातचीत के जरिए बाकी मांगों का समाधान निकालने और प्रस्तावित हड़ताल को टालने की अपील की है. प्रशासन ने कहा है कि ग्राहकों की सुविधा उसकी प्राथमिकता है और जरूरी बैंकिंग सेवाओं को चालू रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. 27 सितंबर को निपटा लें जरूरी बैंकिंग काम अगर आपको बैंक शाखा जाकर चेक जमा करना है, कैश से जुड़ा कोई काम करना है, दस्तावेज जमा करने हैं या बैंक से जुड़ा कोई दूसरा जरूरी काम है तो 27 सितंबर को इसे पूरा कर लेना बेहतर होगा. इसके बाद 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं. (एजेंसी इनपुट) Also Read: LPG Rule Change: 1 अक्टूबर से गैस सब्सिडी पर नया नियम, रिफिल के लिए करना होगा यह काम The post Bank Open on Sunday: 27 सितंबर को रविवार के दिन भी खुलेंगे बैंक, निपटा लें जरूरी काम, अगले 3 दिन हड़ताल appeared first on Naya Vichar.

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आकाश आनंद OUT, ईशान IN, मायावती ने BSP में सौंपी राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी, UP चुनाव से पहले बदला समीकरण

Uttar Pradesh Politics: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में हुई राष्ट्रीय स्तर की बैठक में अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया. बैठक में उत्तर प्रदेश समेत उत्तराखंड और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों और संगठन की स्थिति पर भी चर्चा हुई. ईशान आनंद ने एलएलएम और कानून की पढ़ाई की है. उनके राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने की पुष्टि कई रिपोर्टों में हुई है. अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी पर जोर बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की रणनीति पर चर्चा हुई. BSP की ओर से कहा गया कि पार्टी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. इसके लिए मजबूत उम्मीदवारों के चयन के साथ संगठन में जरूरी बदलाव किए जाएंगे. मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने और चुनावी तैयारियों में जुटने की बात कही. मायावती ने BJP पर लगाए कई आरोप बैठक में मायावती ने देश और उत्तर प्रदेश की मौजूदा नेतृत्वक स्थिति पर भी अपनी बात रखी. BSP की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, उन्होंने गरीबी, बेरोजगारी, पिछड़ेपन, पलायन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों का जिक्र किया. पार्टी ने BJP को लेकर कई आरोप भी लगाए और दावा किया कि उसकी नीतियों से आम लोगों में निराशा है. अयोध्या में चंदे से जुड़े विवाद और ब्राह्मण समाज से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए भी मायावती ने BJP पर निशाना साधा. ये सभी दावे BSP की ओर से किए गए नेतृत्वक आरोप हैं. पांचवीं बार UP में प्रशासन बनाने का लक्ष्य मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से उत्तर प्रदेश में BSP को दोबारा सत्ता में लाने के लिए लगातार काम करने की अपील की. उन्होंने पार्टी के पांचवीं बार प्रशासन बनाने और दूसरी बार पूर्ण बहुमत हासिल करने के लक्ष्य का भी जिक्र किया. बैठक में डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों और मतदान के अधिकार के महत्व को लेकर भी चर्चा हुई. मायावती ने आर्थिक विकास के लाभ आम लोगों तक पहुंचने से जुड़े सवाल भी उठाए. ईशान आनंद ने मायावती का जताया आभार राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने के बाद ईशान आनंद ने मायावती के प्रति आभार जताया और पार्टी के लिए पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करने की बात कही. उनका यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब पिछले कुछ दिनों में BSP के संगठन में कई अहम बदलाव हुए हैं. इससे पहले उनके बड़े भाई आकाश आनंद को पार्टी की जिम्मेदारियों से हटाया गया था. अब ईशान आनंद को राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी दी गई है. Must Read: ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से UP के इन शहरों से बिहार की दूरी होगी कम, दिल्ली-NCR से पटना का सफर भी होगा आसान, जानें पूरा रूट The post आकाश आनंद OUT, ईशान IN, मायावती ने BSP में सौंपी राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी, UP चुनाव से पहले बदला समीकरण appeared first on Naya Vichar.

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CEC-EC की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, 5 जजों की बेंच को भेजा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को 5 जजों की संविधान पीठ के पास भेज दिया. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ इन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. याचिकाओं में मुख्य न्यायाधीश (CJI) को CEC और EC की नियुक्ति करने वाली हाई-लेवल कमेटी से बाहर रखने वाले कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है. क्या है पूरा मामला? एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR), कांग्रेस नेता जया ठाकुर और अन्य लोगों ने CEC और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 को चुनौती दी है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CJI को नियुक्ति वाली कमेटी से बाहर रखने वाला यह कानून स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की व्यवस्था को प्रभावित करता है. उनका दावा है कि इस कानून से चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर भी असर पड़ सकता है और प्रशासन को अपनी पसंद के व्यक्ति को नियुक्त करने का अधिक अधिकार मिल जाता है. केंद्र ने क्या दलील दी? मामले की पिछली सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि इसमें संविधान की व्याख्या से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उठते हैं. इसलिए संविधान के अनुच्छेद 145(3) के तहत इस मामले की सुनवाई कम से कम 5 जजों की बेंच को करनी चाहिए. ये भी पढ़ें: शरजील इमाम को 7 दिन की अंतरिम जमानत, दो कजिन की शादी में शामिल होने की मिली अनुमति संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत संसद को चुनाव आयुक्तों की सेवा शर्तों से जुड़े कानून बनाने का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने 2023 के एक फैसले में कहा था कि आजादी के बाद से CEC और EC की नियुक्ति को लेकर ऐसा कानून नहीं बनाया गया था. इसके बाद कोर्ट ने नियुक्ति के लिए एक चयन समिति बनाने का निर्देश दिया था. उस समय कोर्ट ने CBI निदेशक और केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (CVC) की नियुक्ति जैसी व्यवस्था के आधार पर चयन समिति बनाने की बात कही थी. इन दोनों नियुक्तियों वाली समितियों में CJI भी शामिल होते हैं. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने संसद के कानून बनाने के अधिकार को भी माना था. The post CEC-EC की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, 5 जजों की बेंच को भेजा मामला appeared first on Naya Vichar.

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बिहार BJP के नए प्रभारी बने हरीश द्विवेदी, दीपक प्रकाश के लिए MLC पद छोड़ने वाले देवेश कुमार को मिली ये जिम्मेदारी

Bihar BJP In Charge Harish Dwivedi: हिंदुस्तानीय जनता पार्टी ने बिहार संगठन में बड़ा बदलाव किया है. भाजपा ने हरीश द्विवेदी को बिहार का प्रदेश प्रभारी बनाया है. हरीश द्विवेदी उत्तर प्रदेश से आते हैं. वह भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भी हैं. इससे पहले वह असम के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. हरीश द्विवेदी के साथ बिहार के लिए दो सह प्रभारी भी नियुक्त किए गए हैं. उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सांसद संगीता यादव और कांग्रेस से भाजपा में आए रोहन गुप्ता को बिहार का सह प्रभारी बनाया गया है. भाजपा मुख्यालय ने बुधवार को प्रभारी और सह प्रभारी की पूरी सूची जारी की. भाजपा द्वारा जारी लिस्ट बस्ती से सांसद रह चुके हैं हरीश द्विवेदी हरीश द्विवेदी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के रहने वाले हैं. वह बस्ती से दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं. छात्र जीवन से ही वह भाजपा से जुड़े रहे हैं. संगठन में उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. हरीश द्विवेदी वर्ष 1991 में अखिल हिंदुस्तानीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े थे. इसके बाद 1993 से 1995 तक बस्ती के जिला प्रमुख रहे. वर्ष 1994 से 1996 तक भाजयुमो के प्रदेश सह मंत्री की जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद 2006 से 2010 तक प्रदेश उपाध्यक्ष रहे. 2010 से 2013 तक भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे. पहले असम के प्रभारी रह चुके हैं भाजपा ने इससे पहले हरीश द्विवेदी को असम की जिम्मेदारी दी थी. अब पार्टी ने उन्हें बिहार का प्रदेश प्रभारी बनाया है. बिहार में पार्टी संगठन से जुड़े कामों की जिम्मेदारी उनके पास होगी. रोहन गुप्ता और संगीता यादव को सह प्रभारी की जिम्मेदारी बिहार के लिए दो सह प्रभारी भी नियुक्त किए गए हैं. उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सांसद संगीता यादव को सह प्रभारी बनाया गया है. वहीं कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए रोहन गुप्ता को भी बिहार का सह प्रभारी नियुक्त किया गया है. मंगल पांडे को असम का प्रभारी बनाया भाजपा ने बिहार के कई नेताओं को भी नई जिम्मेदारी दी है. बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे को असम का प्रभारी बनाया गया है. वहीं भाजपा के पूर्व एमएलसी देवेश कुमार को अरुणाचल प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया है. देवेश कुमार ने हाल ही में एमएलसी पद से इस्तीफा दिया था. इसके बाद दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाया गया था. निवेदिता सिंह को झारखंड का सह प्रभारी भाजपा ने बिहार की एमएलसी निवेदिता सिंह को भी नई जिम्मेदारी दी है. उन्हें झारखंड का सह प्रभारी बनाया गया है. इस तरह बिहार भाजपा से जुड़े कई नेताओं को अलग-अलग राज्यों में संगठन की जिम्मेदारी सौंपी गई है. Also Read: बिहार दारोगा भर्ती: मेंस परीक्षा क्यों हुई कैंसिल? केंद्रों पर बार-बार कटी बिजली, जैमर बंद होने का शक, EOU की जांच में कई खुलासे The post बिहार BJP के नए प्रभारी बने हरीश द्विवेदी, दीपक प्रकाश के लिए MLC पद छोड़ने वाले देवेश कुमार को मिली ये जिम्मेदारी appeared first on Naya Vichar.

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कौन हैं गजेंद्र पटेल, जिन्हें भाजपा ने बनाया झारखंड का प्रभारी?

Jharkhand BJP Incharge: हिंदुस्तानीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने विभिन्न राज्यों के लिए प्रभारी और सह प्रभारी की नई सूची जारी की है. इस सूची में झारखंड की संगठनात्मक जिम्मेदारी मध्य प्रदेश के वरिष्ठ आदिवासी नेता और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री गजेंद्र पटेल को सौंपी गई है. उनके साथ सौरभ सिंह और बिहार की निवेदिता सिंह को झारखंड का सह प्रभारी बनाया गया है. पार्टी ने दिल्ली, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, केरल, लद्दाख और लक्षद्वीप समेत कई राज्यों में भी नई जिम्मेदारियां तय की हैं. गजेंद्र पटेल की नियुक्ति को झारखंड में संगठन को मजबूत करने और आगामी नेतृत्वक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. बड़वानी के रहने वाले हैं गजेंद्र पटेल गजेंद्र सिंह पटेल का जन्म 16 फरवरी 1975 को मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में हुआ था. उनके पिता उमराव सिंह पटेल और माता सुशीला बाई पटेल हैं. उन्होंने बीए और एलएलबी की पढ़ाई की है. पेशे से कृषि से जुड़े गजेंद्र पटेल लंबे समय से सक्रिय नेतृत्व में हैं. उनकी पत्नी का नाम बसंती पटेल है और उनके दो पुत्र हैं. संघ की शाखा से शुरू हुआ नेतृत्वक सफर गजेंद्र पटेल का नेतृत्वक जीवन सीधे चुनावी नेतृत्व से शुरू नहीं हुआ. वे बचपन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा से जुड़े रहे. 1990 में अखिल हिंदुस्तानीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के माध्यम से उन्होंने संगठनात्मक काम शुरू किया. इसके बाद युवा मोर्चा, वनवासी कल्याण परिषद और भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा में सक्रिय भूमिका निभाई. यही लंबा संगठनात्मक अनुभव उन्हें भाजपा के महत्वपूर्ण नेताओं में शामिल करता है. संगठन में लगातार बढ़ती गई जिम्मेदारी गजेंद्र पटेल ने भाजपा संगठन में कई अहम पद संभाले. 2017 में वे मध्य प्रदेश भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने. इसके बाद प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाई. वर्ष 2021-22 के दौरान वे भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री भी रहे और आदिवासी क्षेत्रों में संगठन विस्तार में सक्रिय भूमिका निभाई. खरगोन से लगातार दूसरी बार सांसद 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें मध्य प्रदेश की खरगोन (अनुसूचित जनजाति आरक्षित) सीट से उम्मीदवार बनाया और वे पहली बार सांसद चुने गए. 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने इसी सीट से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर 18वीं लोकसभा में प्रवेश किया. इससे पहले वे भगवानपुरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रह चुके हैं. संसद में 97% उपस्थिति गजेंद्र पटेल संसद में सक्रिय सांसदों में गिने जाते हैं. उपलब्ध संसदीय रिकॉर्ड के अनुसार, 13 अगस्त 2026 तक उनकी उपस्थिति करीब 97% रही. उन्होंने खरगोन और बड़वानी क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी, खंडवा-अलीराजपुर-खरगोन रेल परियोजना, मोबाइल नेटवर्क, पीएम किसान योजना, आदिवासी क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेज, सिकल सेल एनीमिया, टीबी नियंत्रण, जैविक खेती, शिक्षा और सड़क जैसी आधारभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दे संसद में उठाए. 2026 में उन्होंने बड़वानी में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने की मांग भी रखी. राष्ट्रीय महामंत्री बनने के बाद बढ़ी जिम्मेदारी 17 अगस्त 2026 को भाजपा ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा की, जिसमें गजेंद्र सिंह पटेल को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया. यह भाजपा संगठन के सबसे महत्वपूर्ण पदों में से एक माना जाता है. मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र से आने वाले आदिवासी नेता के रूप में उनकी पहचान अब केवल खरगोन के सांसद तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक फैसलों में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं. इसे भी पढ़ें: झारखंड में क्या खतरे की घंटी बजा रहा रूबेला वायरस? जानें क्या कहते हैं डॉ अनुज मयूर शेखर झारखंड में संगठन संभालेंगे गजेंद्र पटेल भाजपा नेतृत्व ने अब उन्हें झारखंड का प्रभारी बनाकर संगठन को नई दिशा देने की जिम्मेदारी सौंपी है. उनके साथ संतोष सिंह और निवेदिता सिंह सह प्रभारी के रूप में काम करेंगे. माना जा रहा है कि लंबे संगठनात्मक अनुभव और आदिवासी क्षेत्रों में मजबूत पकड़ के कारण उन्हें झारखंड जैसी नेतृत्वक रूप से महत्वपूर्ण इकाई की जिम्मेदारी दी गई है, जहां पार्टी संगठन को और मजबूत करने की तैयारी में जुटी है. इसे भी पढ़ें: JSSC-CGL और JPSC में 500 करोड़ के घोटाले का दावा, राज्यसभा चुनाव पर भी योगेंद्र साव ने उठाए सवाल The post कौन हैं गजेंद्र पटेल, जिन्हें भाजपा ने बनाया झारखंड का प्रभारी? appeared first on Naya Vichar.

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खिलाड़ियों की चोट पर भड़के रविचंद्रन अश्विन, वरुण चक्रवर्ती का उदाहरण देकर कह दी बड़ी बात

R Ashwin on Team India: पूर्व हिंदुस्तानीय क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन ने हिंदुस्तानीय टीम के लगातार व्यस्त शेड्यूल और खिलाड़ियों की चोट को लेकर बड़ा मुद्दा उठाया है. उनका मानना है कि अब समय आ गया है जब हिंदुस्तान को टेस्ट, वनडे और टी20 के लिए अलग-अलग टीमें तैयार करनी चाहिए. अश्विन ने साथ ही खिलाड़ियों की चोट के प्रबंधन को लेकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए हैं. तीनों फॉर्मेट के लिए अलग टीम अपने यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए अश्विन ने कहा कि तीनों फॉर्मेट के लिए अलग टीम होने से खिलाड़ियों पर पड़ने वाला दबाव कम किया जा सकता है. हालांकि, जरूरत के मुताबिक एक-दो खिलाड़ी अलग-अलग फॉर्मेट की टीमों में शामिल हो सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि टेस्ट, वनडे और टी20 के लिए अलग-अलग टीमें हों. इनमें एक-दो खिलाड़ियों का क्रॉस-पॉलिनेशन हो सकता है. खिलाड़ियों की चोट के प्रबंधन को लेकर कहीं न कहीं जवाबदेही तय होनी चाहिए.’ ये भी पढ़ें: India Vs Japan T20I: आखिरी ओवर में अंपायर के फैसले पर क्यों छिड़ी बहस? जानें क्या कहता है ICC का नियम वरुण चक्रवर्ती की चोट का दिया उदाहरण वरुण चक्रवर्ती (एक्स) अश्विन ने अपनी बात समझाने के लिए स्पिनर वरुण चक्रवर्ती का उदाहरण दिया. चक्रवर्ती लंबे समय से चोट की समस्या से जूझ रहे हैं. इंग्लैंड दौरे के दौरान लगी चोट से वापसी के बाद उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के पहले टी20 मैच में मैदान पर वापसी की थी, लेकिन इसी मुकाबले में उन्हें एक बार फिर चोट लग गई. इसके बाद चक्रवर्ती को अफगानिस्तान के खिलाफ बाकी मैचों से बाहर कर दिया गया. शुरुआत में उन्हें एशियन गेम्स के लिए हिंदुस्तानीय टीम के साथ जाने की उम्मीद थी, लेकिन बाद में ये योजनाएं भी बदल गईं. चोट के कारण वह एशियन गेम्स और वेस्टइंडीज के खिलाफ हिंदुस्तान की घरेलू सीरीज से भी बाहर हो गए. अश्विन ने कहा कि चक्रवर्ती पिछले तीन-चार महीने से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में थे. उन्होंने बताया कि तमिलनाडु प्रीमियर लीग (TNPL) के लिए चक्रवर्ती को रिलीज करने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अश्विन ने कहा, ‘मुझे पता है कि वरुण चक्रवर्ती पिछले 3-4 महीने से NCA में थे. हम TNPL के लिए उनकी रिलीज की अनुमति मांग रहे थे, लेकिन उन्हें रिलीज नहीं किया गया. उन्हें एक महीने में वापस आ जाना चाहिए था, लेकिन वह 2-3 महीने तक वहीं रहे.’ अश्विन ने खिलाड़ियों को भी दी जिम्मेदारी की सलाह अश्विन ने यह भी कहा कि चोट से बचने के लिए सिर्फ सपोर्ट स्टाफ या मेडिकल टीम ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों को भी अपनी ट्रेनिंग और एक्सरसाइज को लेकर सतर्क रहना चाहिए. उन्होंने अपने करियर का उदाहरण देते हुए बताया कि करीब एक दशक पहले उन्हें ओलंपिक लिफ्टिंग के दौरान साइड स्ट्रेन की समस्या हुई थी. इसके बाद उन्होंने स्नैचिंग करना बंद कर दिया. अश्विन ने कहा कि ओलंपिक लिफ्टिंग से खिलाड़ी की ताकत और पावर प्रोडक्शन बढ़ सकता है, लेकिन हर एक्सरसाइज हर खिलाड़ी के शरीर के लिए उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है. उन्होंने आगे कहा, ‘एक खिलाड़ी के तौर पर आपको भी देखना होगा कि आपकी ट्रेनिंग का तरीका सही है या नहीं. क्या मैं सही एक्सरसाइज कर रहा हूं? मुझे 2015 में ओलंपिक लिफ्टिंग के कारण साइड स्ट्रेन हुआ था. इसके बाद मैंने स्नैचिंग करना बंद कर दिया.’ ये भी पढ़ें: Asian Games 2026: सुचिका तरियाल के साथ आखिर ऐसा क्यों हुआ? ड्रॉ के बाद 700 ग्राम वजन ने छीना फाइनल का टिकट The post खिलाड़ियों की चोट पर भड़के रविचंद्रन अश्विन, वरुण चक्रवर्ती का उदाहरण देकर कह दी बड़ी बात appeared first on Naya Vichar.

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40 की उम्र के बाद क्यों बढ़ता है महिलाओं का सेक्सुअल कॉन्फिडेंस? सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा

लंबे समय से समाज में यह धारणा रही है कि स्त्रीओं की सेक्स लाइफ का सबसे अच्छा दौर कम उम्र में होता है और उम्र बढ़ने के साथ उनकी सेक्स की इच्छा धीरे-धीरे कम होने लगती है. लेकिन एक नए सर्वे के नतीजे इस सोच को चुनौती देते हैं. ‘एशले मैडिसन’ और ‘यूगोव’ की एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, 45% स्त्रीओं का मानना है कि उनका ‘सेक्सुअल प्राइम’ (सबसे बेहतरीन दौर) 40 साल की उम्र या उसके बाद शुरू होता है. 40 की उम्र के बाद क्यों बढ़ता है कॉन्फिडेंस? रिलेशनशिप और सेक्स थेरेपिस्ट डॉ. टैमी नेल्सन का कहना है कि जब स्त्रीएं किसी को इम्प्रेस करने, पार्टनर ढूंढने या परिवार बढ़ाने के सामाजिक दबाव से मुक्त होती हैं तो सेक्स का मुख्य मकसद केवल ‘खुद की खुशी’ बन जाता है. डॉ. टैमी नेल्सन के मुताबिक, जिंदगी में होने वाले बड़े बदलाव भी इसकी वजह बन सकते हैं. खासकर लंबे रिश्ते या शादी के खत्म होने के बाद कुछ स्त्रीओं को शुरुआत में दुख और अकेलेपन से गुजरना पड़ सकता है. लेकिन समय बीतने के साथ कुछ स्त्रीएं दोबारा डेटिंग और अपनी सेक्स लाइफ को लेकर नए अनुभवों के लिए तैयार हो सकती हैं. ऐसे में उन्हें अपनी पसंद के मुताबिक जिंदगी जीने और अपनी इच्छाओं को समझने की आजादी भी महसूस हो सकती है. यह भी पढ़ें: सिर्फ स्त्रीओं की नहीं है इंफर्टिलिटी की समस्या, पुरुषों से जुड़े कारण भी होते हैं जिम्मेदार फिल्मों और किताबों में भी बदल रही है तस्वीर स्त्रीओं की सेक्सुअलिटी को लेकर समाज में बातचीत भी पहले के मुकाबले ज्यादा खुली है. फिल्मों, किताबों और पॉप कल्चर में अब 40 की उम्र के बाद स्त्रीओं की इच्छाओं, रिश्तों और सेक्सुअल पहचान को भी जगह मिल रही है. इससे यह बात सामने आ रही है कि स्त्रीओं की सेक्स लाइफ को सिर्फ उम्र या शादी के आधार पर तय नहीं किया जा सकता. सेक्सुअल डिजायर की कोई ‘एक्सपायरी डेट’ नहीं होती ima इस सर्वे का सबसे अहम पहलू यह है कि स्त्रीओं की इच्छाओं और सेक्सुअल लाइफ की कोई निश्चित ‘एक्सपायरी डेट’ नहीं होती. उम्र के साथ अनुभव आता है, अनुभव से आत्म-विश्वास बढ़ता है और यही कॉन्फिडेंस स्त्रीओं को अपनी जिंदगी और अपने शरीर पर पूरा हक जताने की आजादी देता है. यह भी पढ़ें: बार-बार गर्म तेल में खाना बना रहे हैं? रोजाना की ये छोटी-छोटी गलती पड़ सकती है भारी! डॉक्टर सरीन ने दी चेतावनी The post 40 की उम्र के बाद क्यों बढ़ता है स्त्रीओं का सेक्सुअल कॉन्फिडेंस? सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा appeared first on Naya Vichar.

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