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बिहार DGP की रेस में प्रीता वर्मा का नाम सबसे आगे, वरिष्ठता के साथ इन समीकरणों की भी हो रही है चर्चा

Bihar DGP बिहार में स्थायी DGP की नियुक्ति को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गयी है. कार्यवाहक DGP प्रीता वर्मा को एक्सटेंशन मिलने के बाद उनके स्थायी DGP बनने की चर्चा भी तेज हो गयी है. प्रीता वर्मा बिहार पुलिस के इतिहास में DGP की जिम्मेदारी संभालने वाली पहली स्त्री IPS अधिकारी हैं. हालांकि, इस पद की दौड़ में 1992 बैच के बी. श्रीनिवासन, जितेंद्र कुमार और जेएस गंगवार समेत कई वरिष्ठ IPS अधिकारियों के नाम भी चर्चा में हैं. प्रीता वर्मा 1991 बैच की IPS अधिकारी हैं और मूल रूप से राजस्थान की रहने वाली हैं. फिलहाल वह बिहार की कार्यवाहक DGP की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. प्रशासन ने उन्हें अगले आदेश तक इस पद का अतिरिक्त प्रभार संभालने की अनुमति दी है. इसके बाद माना जा रहा है कि स्थायी DGP के लिए उनके नाम पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. विनय कुमार के इस्तीफे के बाद बढ़ी हलचल 1991 बैच के IPS अधिकारी विनय कुमार के DGP पद से इस्तीफा देने के बाद बिहार में नये DGP की नियुक्ति को लेकर कवायद शुरू हुई. बिहार कैडर के अधिकारी विनय कुमार ने IIT खड़गपुर से पढ़ाई की थी. उन्होंने दिसंबर 2024 में बिहार DGP की जिम्मेदारी संभाली थी. उनका दो साल का कार्यकाल 13 दिसंबर को पूरा होना था, लेकिन उन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद से इस्तीफा दे दिया. विनय कुमार के इस्तीफे के बाद DGP पद के लिए कई वरिष्ठ IPS अधिकारियों के नामों पर चर्चा शुरू हुई. इनमें प्रीता वर्मा के अलावा बी. श्रीनिवासन, जितेंद्र कुमार और जेएस गंगवार समेत अन्य अधिकारी भी शामिल हैं. बिहार से जुड़ी अन्य ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें.. प्रीता वर्मा के नाम के पीछे क्या है नेतृत्वक गणित? IPS अधिकारी अरविंद पांडेय के मुताबिक, प्रीता वर्मा बिहार की वरिष्ठ IPS अधिकारी हैं. उनकी वरिष्ठता को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें कार्यवाहक DGP की जिम्मेदारी दी है. हालांकि, उनके मुताबिक इस फैसले के पीछे नेतृत्वक समीकरण भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं. अरविंद पांडेय का कहना है कि राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में प्रीता वर्मा की पृष्ठभूमि को भी नेतृत्वक नजरिये से देखा जा रहा है. उनका दावा है कि प्रीता वर्मा जिस जाति और समुदाय से आती हैं, उसकी राजस्थान में करीब आठ प्रतिशत और झारखंड में करीब 36 प्रतिशत आबादी है. उनके मुताबिक, इसी सामाजिक समीकरण को देखते हुए प्रशासन प्रीता वर्मा को बिहार का स्थायी DGP बनाने पर विचार कर सकती है. हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. बिहार की पहली स्त्री DGP बनने की राह में प्रीता वर्मा अगर प्रीता वर्मा को स्थायी DGP बनाया जाता है, तो वह बिहार पुलिस की पहली स्त्री स्थायी DGP होंगी. वह राज्य की वरिष्ठ स्त्री पुलिस अधिकारियों में शामिल हैं. इससे पहले वह DG ट्रेनिंग के पद पर भी रह चुकी हैं. केंद्र में प्रतिनियुक्ति के दौरान प्रीता वर्मा ने खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की CEO की जिम्मेदारी भी संभाली थी. वर्ष 2023 में उन्हें विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था. 2028 में रिटायर होंगी प्रीता वर्मा प्रीता वर्मा की सेवा के अभी करीब दो वर्ष बाकी हैं. वह वर्ष 2028 में सेवानिवृत्त होंगी. ऐसे में स्थायी DGP के तौर पर उनकी नियुक्ति होने पर उन्हें करीब दो साल तक इस पद पर काम करने का मौका मिल सकता है. बिहार में नए DGP की तलाश तेज, इन नामों पर चर्चा नाम बैच वर्तमान तैनाती प्रीता वर्मा 1991 वर्तमान प्रभारी डीजीपी (सबसे वरिष्ठ अधिकारी) बी. श्रीनिवासन 1992 डीजी, एनएसजी (राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड) जितेंद्र सिंह गंगवार 1993 डीजी, विजिलेंस (निगरानी) जितेंद्र कुमार 1993 डीजी रैंक के अधिकारी कुंदन कृष्णन 1994 डीजी, एसटीएफ और स्पेशल ब्रांच डॉ. परेश सक्सेना 1994 डीजी रैंक के अधिकारी निर्मल कुमार आजाद 1994 डीजी रैंक के अधिकारी 12 लाख रुपये बैंक में कैश जमा वर्ष 2025 में दिये गये संपत्ति और देनदारी के विवरण के मुताबिक, प्रीता वर्मा के पास 35 हजार रुपये नकद थे. वहीं, बैंक और वित्तीय संस्थानों में करीब 12.08 लाख रुपये जमा होने की जानकारी दी गयी थी. घोषणा के अनुसार, उनके पास करीब 60 तोला सोने के आभूषण हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 35 लाख रुपये बतायी गयी है. इसके अलावा करीब तीन किलो चांदी के जेवरात और अन्य सामान भी दर्ज हैं, जिनकी कीमत करीब 1.80 लाख रुपये बतायी गयी है. संपत्ति विवरण में LIC की कई पॉलिसियों और SBI की एक फिक्स्ड डिपॉजिट का भी उल्लेख है. अचल संपत्ति, मकान/अपार्टमेंट और जमीन से संबंधित कॉलम में कोई राशि दर्ज नहीं की गयी है. आयकर के तौर पर 9,32,788 रुपये की राशि का उल्लेख संपत्ति विवरण में किया गया है. Also Read बिहार MLC चुनाव से पहले NDA-महागठबंधन में बगावत, कई सीटों पर अपनों ने ही अपनों के खिलाफ खोला मोर्चा The post बिहार DGP की रेस में प्रीता वर्मा का नाम सबसे आगे, वरिष्ठता के साथ इन समीकरणों की भी हो रही है चर्चा appeared first on Naya Vichar.

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मुजफ्फरपुर: आम का पेड़ बना क्लासरूम, जुगाड़ का ब्लैक बोर्ड, 10 साल से ऐसे चल रहा 60 बच्चों वाला सरकारी स्कूल

ग्राउंड रिपोर्ट: पेड़ की छांव, जमीन पर बिछी चटाई और लोहे की रॉड से बना जुगाड़ का ब्लैकबोर्ड, यही व्यवस्था मुजफ्फरपुर के औराई प्रखंड स्थित महुआरा गांव के प्राथमिक विद्यालय की पहचान बन गई है. पिछले 10 वर्षों से भूमिहीन और भवनहीन यह विद्यालय खुले आसमान के नीचे संचालित हो रहा है. इसके बावजूद चार शिक्षक कक्षा एक से पांच तक के करीब 60 बच्चों को पढ़ाने में जुटे हैं. बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बीच यहां के शिशु रोजाना पढ़ने पहुंचते हैं और शिक्षक सीमित संसाधनों के बावजूद उनके भविष्य को संवारने की कोशिश कर रहे हैं. आम के पेड़ की छांव में चलती हैं कक्षाएं विद्यालय में पर्याप्त कमरे नहीं होने के कारण बच्चों की कक्षाएं खुले में आम के पेड़ की छांव में लगती हैं. ब्लैक बोर्ड के लिए भी स्थायी व्यवस्था नहीं है. लोहे के रॉड से तैयार जुगाड़ के बोर्ड के सहारे शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हैं. फर्नीचर और अन्य शैक्षणिक सामग्री की कमी के कारण विद्यार्थी जमीन पर चटाई बिछाकर बैठते हैं. विद्यालय में पढ़ने वाले शिशु अल्पसंख्यक और दलित समुदाय से आते हैं. शिक्षकों का कहना है कि सीमित संसाधनों में नियमित पढ़ाई कराना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए शिक्षक लगातार प्रयास करते हैं. शौचालय नहीं, बच्चों को भेजना पड़ता है घर विद्यालय की प्रधान शिक्षिका अफसाना खातून के अनुसार, सबसे बड़ी समस्या शौचालय की है. स्कूल में शौचालय नहीं होने के कारण बच्चों को जरूरत पड़ने पर घर भेजना पड़ता है. कई बार शिशु घर जाने के बाद वापस स्कूल नहीं लौटते. ऐसी स्थिति में शिक्षकों को खुद उनके घर जाकर बच्चों को वापस लाना पड़ता है. शिक्षकों का कहना है कि स्कूल में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों तो बच्चों की पढ़ाई और उपस्थिति दोनों बेहतर हो सकती हैं. बाढ़ के बाद 10 साल से अस्थायी संचालन शिक्षक मो अनीश, विश्वजीत कुमार और अहमद रजा ने बताया कि विद्यालय पहले बागमती बांध के अंदर संचालित होता था. बाढ़ के कारण विस्थापन के बाद करीब 10 वर्षों से यह दक्षिणी बांध के पास एक ग्रामीण की जमीन पर अस्थायी रूप से चल रहा है. ग्रामीण मतीन अशरफ ने बताया कि बच्चों की परेशानी को देखते हुए ग्रामीणों ने विद्यालय के लिए जमीन दान भी की है. इसके बावजूद कुछ कागजी अड़चनों के कारण अब तक भवन निर्माण शुरू नहीं हो सका है. कागजी अड़चन दूर होने का इंतजार विद्यालय भवन का निर्माण नहीं होने से बच्चों को मौसम की मार भी झेलनी पड़ती है. गर्मी, बारिश और अन्य परिस्थितियों में खुले में पढ़ाई करना शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए मुश्किल हो जाता है. सीओ धीरज कुमार ने मामले की जांच कर जल्द समाधान निकालने का आश्वासन दिया है. अब ग्रामीणों और विद्यालय परिवार को उम्मीद है कि कागजी प्रक्रिया पूरी होगी और बच्चों को जल्द अपना स्कूल भवन मिल सकेगा. दस साल से अस्थायी व्यवस्था में चल रहे इस विद्यालय के बच्चों को आखिर कब स्थायी छत मिलेगी, यह सवाल अब भी बना हुआ है. ये भी पढ़ें: लापरवाही: जान जोखिम में डाल मालगाड़ी के नीचे से ट्रैक पार कर रहे यात्री, हो सकता है हादसा The post मुजफ्फरपुर: आम का पेड़ बना क्लासरूम, जुगाड़ का ब्लैक बोर्ड, 10 साल से ऐसे चल रहा 60 बच्चों वाला प्रशासनी स्कूल appeared first on Naya Vichar.

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महज 12 रन पर साउथ अफ्रीका के सामने ऑलआउट हो गई ऑस्ट्रेलिया टीम, जानिए क्या है Viral Video की सच्चाई

Australia All Out on 12 Runs Video: सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटे से क्रिकेट का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के बीच मुकाबला होता दिखाई दे रहा है. मैच में ऑस्ट्रेलिया की टीम पहले बल्लेबाजी कर रही है. वायरल क्लिप में दावा किया जा रहा है कि ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम महज 4.2 ओवर में 12 रन बनाकर ऑलआउट हो गई. वीडियो सामने आने के बाद क्रिकेट फैंस हैरान हैं. लोगों को यकीन नहीं हो रहा कि दुनिया की मजबूत क्रिकेट टीमों में शामिल ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम आखिर इतनी कम गेंदों में कैसे पवेलियन लौट सकती है. केप टाउन में स्पोर्ट्सा जा रहा मैच वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के बीच मुकाबला केप टाउन के स्टेडियम में स्पोर्ट्सा जा रहा है. ऑस्ट्रेलियाई टीम पहले बल्लेबाजी करती दिखाई देती है. ट्रेविस हेड और रेनशॉ पारी की शुरुआत करने आते हैं, जबकि साउथ अफ्रीका की ओर से मार्को यानसन गेंदबाजी की शुरुआत करते दिखते हैं. वीडियो के मुताबिक, मैच की पहली ही गेंद पर ट्रेविस हेड आउट हो जाते हैं. इसके बाद दूसरे ओवर में रेनशॉ भी पवेलियन लौट जाते हैं. एक ओवर में दो हैट्रिक वायरल वीडियो में इसके बाद जो दिखाया गया है, वह और भी चौंकाने वाला है. साउथ अफ्रीका की ओर से तीसरा ओवर डालने केशव महाराज आते हैं. वीडियो में ऐसा दिखाया गया है कि वह ओवर की लगभग हर गेंद पर विकेट हासिल कर रहे हैं. क्लिप के मुताबिक, ओवर की पहली गेंद पर मार्श, दूसरी गेंद पर ग्रीन और तीसरी गेंद पर इंग्लिस आउट होते हैं. चौथी गेंद पर नाथन एलिस, पांचवीं गेंद पर कॉनॉली और ओवर की आखिरी गेंद पर जाम्पा को आउट दिखाया गया है. इसके बाद कॉर्बिन बॉश गेंदबाजी करने आते हैं. उनके ओवर की पहली और दूसरी गेंद पर एडवर्ड्स और हेजलवुड के आउट होने के साथ ही ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम 12 रन पर ऑलआउट दिखाई जाती है. ये भी पढ़ें: 6 मेडन, 5 विकेट… कभी हिंदुस्तान को डराता था यह तेज गेंदबाज, आज टीम इंडिया का बॉलिंग कोच 9 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है वीडियो यह फर्जी वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर @7official1 नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है. देखते ही देखते यह क्लिप तेजी से वायरल हो गई और इसे 9 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं. क्या है वायरल वीडियो का सच? ग्रॉक एआई पर वीडियो का किया गया फैक्ट चेक जब इस वीडियो की पड़ताल की गई तो यह दावा फर्जी पाया गया. वीडियो में दिखाया गया मैच असली नहीं है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल हो रहे इस वीडियो में अलग-अलग क्रिकेट मैचों और खिलाड़ियों के फुटेज को जोड़कर उसके ऊपर फर्जी स्कोरबोर्ड और ग्राफिक्स लगाए गए हैं. वीडियो की पड़ताल के दौरान Grok AI से भी इसके दावे को क्रॉस-चेक किया गया. जांच में सामने आया कि वीडियो में स्कोरबोर्ड अलग-अलग फ्रेम में अचानक बदलता दिखाई देता है. एक जगह 5-1, फिर 9-3, उसके बाद 9-7 और आगे 12-8 जैसे स्कोर दिखाई देते हैं. यह स्कोरिंग पैटर्न भी वीडियो के एडिटेड होने की ओर इशारा करता है. इसके अलावा हेजलवुड, स्टार्क, बॉश, यानसेन, महाराज, मिलर समेत कई खिलाड़ियों के अलग-अलग क्लिप्स को जोड़कर एक नया वीडियो तैयार किया गया है. इसके ऊपर ऑस्ट्रेलिया के 12 रन पर ऑलआउट होने का फर्जी स्कोरबोर्ड लगाया गया है. ये भी पढ़ें: IND vs WI: फ्री में कैसे-कहां देखें हिंदुस्तान और वेस्टइंडीज का पहला T20 मैच? पढ़ें पूरी डिटेल वीडियो में दिन से रात होने का भी दावा वायरल वीडियो को ध्यान से देखने पर एक और बड़ी गड़बड़ी नजर आती है. मैच की शुरुआत में मुकाबला दिन के समय, यानी सूरज की रोशनी में स्पोर्ट्सा जाता दिखाई देता है. लेकिन महज 4.2 ओवर में ऑस्ट्रेलिया के सभी 10 विकेट गिरने तक वीडियो में दिन से रात हो जाती है. इतने कम समय और केवल 4.2 ओवर के भीतर मैच के दौरान इस तरह दिन से रात में बदल जाना संभव नहीं है. यह भी इस बात का संकेत है कि वीडियो में अलग-अलग समय और मैचों के फुटेज को जोड़कर एक फर्जी कहानी बनाई गई है. अभी ऑस्ट्रेलिया-साउथ अफ्रीका के बीच कोई मैच नहीं वायरल दावे की सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि इस समय ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के बीच ऐसा कोई मुकाबला नहीं स्पोर्ट्सा जा रहा है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया 12 रन पर ऑलआउट हुई हो. साउथ अफ्रीका-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज 9 अक्टूबर 2026 से डरबन में शुरू होगी. सितंबर के हालिया वनडे में ऑस्ट्रेलिया ने 230, 333 और 322/9 रन बनाए थे. ऑस्ट्रेलिया का सबसे कम वनडे स्कोर 70 रन और टेस्ट में 36 रन है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया के 12 रन पर ऑलआउट होने का कोई रिकॉर्ड नहीं है. ये भी पढ़ें: मुंबई रणजी टीम में 19 साल के आयुष म्हात्रे को मिली बड़ी जिम्मेदारी, सूर्यकुमार यादव को नहीं मिली जगह The post महज 12 रन पर साउथ अफ्रीका के सामने ऑलआउट हो गई ऑस्ट्रेलिया टीम, जानिए क्या है Viral Video की सच्चाई appeared first on Naya Vichar.

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प्रभात खबर इंपैक्ट: झारखंड में हर बड़े सरकारी अस्पताल में खुलेंगे जन औषधि केंद्र, लोगों को मिलेगी सस्ती दवा

झारखंड के स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और जरूरी दवा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है. सोमवार को स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक हुई. इसमें राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों की संबंधित बिल्डिंग में जन औषधि केंद्र और अमृत फार्मेसी शुरू करने का निर्देश दिया गया. सभी सदर अस्पतालों, अनुमंडल अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी 15 दिनों के भीतर जन औषधि केंद्र खोलने को कहा गया है. दवाओं और चिकित्सकीय उपकरणों की खरीद तथा अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता की समीक्षा का भी निर्देश सभी जिलों को दिया गया है. अधिकारियों को आवश्यक दवाओं की सूची तैयार कर पर्याप्त स्टॉक रखने और नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया गया. 15 दिनों में मेडिकल कॉलेजों में शुरू होंगे दवा केंद्र राज्य के जिन मेडिकल कॉलेजों में जन औषधि केंद्र या अमृत फार्मेसी नहीं है, वहां 15 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी कर इसका संचालन शुरू करने का निर्देश दिया गया है. रिम्स में मुख्य अस्पताल के अलावा ट्रॉमा सेंटर, नेत्र संस्थान और दंत चिकित्सा संस्थान जैसी संबंधित बिल्डिंग में भी जरूरत के अनुसार ये सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है. दवा केंद्र ऐसे स्थानों पर खोलने को कहा गया है, जहां मरीज और उनके परिजन आसानी से पहुंच सकें. रिसेप्शन, मुख्य प्रवेश द्वार या निकास द्वार के आसपास के स्थान को प्राथमिकता देने को कहा गया है. अस्पतालों में जरूरी दवाओं के स्टॉक की लगातार निगरानी होगी. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि मरीज को इलाज के दौरान जरूरी दवा उपलब्ध हो और प्रशासनी व्यवस्था के बाहर से महंगी दवा खरीदने की मजबूरी कम हो. जनऔषधि दुकानों में दवाओं की निगरानी के लिए बनी कमेटी राज्य के मेडिकल कॉलेजों और सदर अस्पतालों में संचालित प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्रों में दवाओं की उपलब्धता की निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमेटी का गठन कर दिया है. कमेटी अभियान निदेशक की अध्यक्षता में इसकी पूरी रूपरेखा तैयार कर अपनी रिपोर्टस्वास्थ्य सचिव को सौंपेगी. कमेटी यह देखेगी कि जनऔषधि की दुकानों में दवाओं की उपलब्धता कितनी है, किन दवाओं की मांग सबसे अधिक है. उस हिसाब से दवाएं उपलब्ध करायी जायेगी. यह भी पढ़ें : दवा नहीं सांसों का सौदा: जनऔषधि केंद्र में 90 फीसद तक सस्ती दवाएं, फिर भी RIMS में मरीजों को महंगी ब्रांडेड दवाएं खरीदने की मजबूरी; सप्लाई ने बढ़ाई परेशानी जनऔषधि केंद्रों पर एक माह में मिलने लगेगी कैंसर की दवा झारखंड की जनऔषधि की दुकानों में एक से डेढ़ महीने में कैंसर की दवाएं उपलब्ध हो जायेंगी. इसके लिए केंद्र प्रशासन के मिनिस्ट्री ऑफ केमिकल एंड फर्टिलाइजर्स के अंतर्गत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्युटिकल्स ने प्रयास शुरू कर दिया है. पहले चरण में जनऔषधि के मेडिसिन बास्केट में उपलब्ध 69 दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करायी जायेगी. इसके बाद आने वाले दिनों में 30 से 40 अन्य कैंसर की दवाओं को भी इसमें जोड़ा जायेगा. प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना के सीइओ शांतनु कुमार अग्रहरि ने बताया कि ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से दवाओं में उपयोग होने वाले रसायनों की कमी हो गयी थी यह भी पढ़ें : नया विचार खुलासा: दवाओं की MRP के स्पोर्ट्स में आयुष्मान योजना पर ‘डाका’, अस्पतालों को मोटा कमीशन, मरीज बेबस The post नया विचार इंपैक्ट: झारखंड में हर बड़े प्रशासनी अस्पताल में खुलेंगे जन औषधि केंद्र, लोगों को मिलेगी सस्ती दवा appeared first on Naya Vichar.

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दिल्ली पुलिस ने मीडिया गाइडलाइन जारी की, बोले अभिजीत दीपके- ‘पहले अपना नेम टैग लगाओ’

‘पहले अपना नेम टैग लगाओ’, अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस के पोस्ट को शेयर करते हुए यह बात एक्स पर लिखी. अब बात करते हैं कि आखिर दिल्ली पुलिस ने ऐसा क्या लिखा एक्स पर जिसपर दीपके भड़क गये. दरअसल, पुलिस की ओर से एक पोस्ट शेयर करते हुए मीडिया वालों को कुछ ध्यान रखने को कहा गया. दिल्ली पुलिस ने क्या अपील की मीडिया वालों से दिल्ली पुलिस ने पोस्ट शेयर करके क्या कहा विरोध प्रदर्शनों को कवर करने वाले सभी पत्रकारों को अपने संबंधित संस्थान द्वारा जारी किए गए वैध पहचान पत्र (ID cards) या नहीं तो वैध PIB/DIP मान्यता कार्ड अपने साथ रखने की सलाह दी जाती है. मौके पर मौजूद पुलिस या सुरक्षा में लगी एजेंसियों द्वारा आसानी से पहचाने जाने के लिए, पत्रकारों को अपने पहचान पत्र हर समय साफ तौर पर दिखने वाली जगह पर लगाने होंगे. पत्रकारों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उनके काम से पुलिस की कार्रवाई या सुरक्षाकर्मियों की आवाजाही में कोई रुकावट न आए. तनावपूर्ण स्थितियों में कवरेज और रिकॉर्डिंग करते समय पत्रकारों को एक उचित और सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए. उन्हें खुद को इस तरह से खड़ा करना चाहिए जिससे वे प्रदर्शनकारियों से साफ तौर से अलग दिखाई दें. ये भी पढ़ें: अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस को ललकारा, कहा- 10 अक्टूबर को एयरपोर्ट पर मिलते हैं अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस को चुनौती देते हुए क्या कहा 10 अक्टूबर को एयरपोर्ट पर पुलिस से मिलूंगा : अभिजीत दीपके इससे पहले 5 अक्टूबर को किए गये एक पोस्ट में दीपके ने पुलिस को चुनौती देते हुए लिखा- मैं अपने होम टाउन में हूं. 10 अक्टूबर को एयरपोर्ट पर अपने अधिकारियों को भेजें. 10 अक्टूबर को एयरपोर्ट पर पुलिस से मिलूंगा. The post दिल्ली पुलिस ने मीडिया गाइडलाइन जारी की, बोले अभिजीत दीपके- ‘पहले अपना नेम टैग लगाओ’ appeared first on Naya Vichar.

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Exclusive: देश ने पहचाना, बिहार ने नहीं! नेशनल अवॉर्ड के बाद संजय मिश्रा का अपने राज्य से सीधा सवाल, बोले- ‘थोड़ा दुख होता है’

जिस कलाकार को देश ने नेशनल अवॉर्ड से नवाजा, उसके मन में अपने ही बिहार को लेकर एक सवाल आज भी है- क्या राज्य ने अपने कलाकारों को वह सम्मान दिया, जिसके वे हकदार हैं? सवाल में शिकायत कम, अपनी मिट्टी से जुड़ी टीस ज्यादा है. 6 अक्टूबर को जन्मदिन के मौके पर ‘नया विचार’ से एक्सक्लूसिव बातचीत में संजय मिश्रा ने बिहार से अपने रिश्ते, छूटे बचपन, बदलते पटना और राज्य की सांस्कृतिक पहचान पर खुलकर बात की. उन्होंने शेखर सुमन, शत्रुघ्न सिन्हा और मनोज बाजपेयी जैसे कलाकारों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर बिहार प्रशासन ने नेशनल अवॉर्ड से पहले उन्हें सम्मानित किया होता, तो यह उनके लिए गर्व का पल होता. उनकी बात में एक ठहराव आता है- ‘थोड़ा दुख होता है.’ मगर यह कहानी सिर्फ सम्मान न मिलने की नहीं है. मुंबई ने संजय को पहचान दी, लेकिन बिहार आज भी उनके लिए बचपन, माता-पिता का प्यार और त्योहारों की उन यादों का नाम है, जिन्हें वह पीछे छोड़ आए. अगर उनकी जिंदगी की आखिरी फिल्म बिहार में शूट हो, तो वह किसी भव्य लोकेशन के बजाय संयुक्त परिवार, रूमाल में बंधी भिंडी और दशहरा की तैयारियां दिखाना चाहेंगे. यही संजय मिश्रा का बिहार है- जिससे वह दूर जरूर हुए, लेकिन जिसे अपने भीतर से कभी दूर नहीं कर पाए. नेशनल अवॉर्ड से पहले बिहार सम्मान देता तो गर्व होता संजय मिश्रा ने कभी पुरस्कार को लक्ष्य बनाकर काम नहीं किया. उनके लिए अभिनय का मतलब अपने काम के प्रति ईमानदार रहना है. अवॉर्ड मिल जाए तो वह इसे ‘सोने पे सुहागा’ मानते हैं. नेशनल अवॉर्ड उनके लिए देश की ओर से मिली बड़ी पहचान है. राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिलना वर्षों की मेहनत को राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किए जाने जैसा है. लेकिन इसी खुशी के बीच एक कमी उन्हें खटकती है. उनका कहना है कि कई राज्यों में वहां के कलाकारों को राज्य प्रशासन सम्मान देती है. अगर बिहार ने नेशनल अवॉर्ड से पहले उन्हें सम्मानित किया होता, तो वह उनके लिए बेहद गर्व का क्षण होता. वह अपनी बात को सिर्फ खुद तक सीमित नहीं रखते. शेखर सुमन, शत्रुघ्न सिन्हा और मनोज बाजपेयी का नाम लेते हुए सवाल करते हैं कि क्या बिहार ने अपने इन कलाकारों को वह राज्य सम्मान दिया, जिसके वे हकदार हैं? फिर कहते हैं- ‘थोड़ा दुख होता है.’ यह किसी पुरस्कार की मांग से ज्यादा उस कलाकार की इच्छा है कि जिस राज्य से वह निकला, वह भी उसकी उपलब्धि को अपना गौरव माने. बिहार से मुंबई आए तो क्या पीछे छूट गया? सफलता की दौड़ में अपने शहर और बचपन से दूर होना हर कलाकार की कहानी का हिस्सा है. संजय से पूछा गया कि बिहार से निकलते समय ऐसा क्या पीछे छूटा, जिसे आज भी महसूस करते हैं? उनका जवाब बेहद छोटा है- ‘वक्त. पीछे का वक्त.’ उस वक्त में बचपन है, रिश्ते हैं, माता-पिता का प्यार है और वह आजादी है जिसमें किसी पहचान की जरूरत नहीं थी. आज संजय जहां जाते हैं, लोग पहचान लेते हैं. कभी वह बिहार की गलियों में बिना किसी पहचान के घूम सकते थे. उस दौर को याद करते हुए वह कहते हैं- ‘पेरेंट्स का प्यार नहीं मिलेगा कभी.’ मुंबई ने उन्हें बहुत कुछ दिया, लेकिन बचपन का वह वक्त वापस नहीं दे सकती. जिंदगी की आखिरी फिल्म का सीन बिहार में हो तो? संजय मिश्रा से पूछा गया कि अगर उनकी जिंदगी पर फिल्म बने और आखिरी सीन बिहार में शूट करना हो, तो वह क्या दिखाना चाहेंगे? जवाब में कोई फिल्मी भव्यता नहीं, बल्कि घर का एक बेहद साधारण दृश्य आता है. एक संयुक्त परिवार. कोई रूमाल में भिंडी बांधकर ला रहा है. घर में दशहरा की तैयारियां चल रही हैं. आसपास उत्सव का माहौल है. बस, यही उनका बिहार है. वह चाहते हैं कि छठ, होली, अनंत चतुर्दशी, जिउतिया और सामा-चकेवा जैसे त्योहार फिर उनकी जिंदगी के फ्रेम में लौटें. उन्हें लगता है कि वक्त के साथ उनकी अपनी जिंदगी से भी कई त्योहार जैसे गायब हो गए. ‘छठ अब स्टार फेस्टिवल बन चुका है’ संजय मिश्रा की नजर में त्योहार भी किसी फिल्म के किरदारों की तरह हैं. वह जिउतिया को ‘कैरेक्टर एक्टर’ और गणपति को ‘स्टार एक्टर’ कहते हैं. वहीं छठ को वह ‘स्टार फेस्टिवल’ मानते हैं. उन्होंने बिहार से बाहर भी छठ का वही उत्साह देखा है. कोलकाता, मुंबई और बनारस तक. बनारस के घाटों पर गन्ने, उगते सूरज के वक्त शंख की आवाज और आस्था से भरा माहौल उन्हें खास तौर पर याद है. छठ बिहार से निकलकर देश के कई हिस्सों में पहुंच गया, लेकिन संजय के लिए इसकी जड़ें आज भी उसी मिट्टी में हैं. ‘वो पटना वाला दशहरा कहां गया?’ बिहार की बात करते हुए संजय मिश्रा पुराने पटना के दशहरे को भी याद करते हैं. गांधी मैदान, लंगर टोली और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का वह दौर, जब उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, उस्ताद विलायत खान, गिरिजा देवी और सितारा देवी जैसे दिग्गज कलाकारों को सुनने का मौका मिलता था. वह बताते हैं कि लोग रात-रात भर बैठकर शास्त्रीय संगीत सुनते थे. फिर एक सवाल सामने आता है- ‘वो कल्चर कहां गया?’ संजय की यह याद सिर्फ पुराने पटना की नहीं है. वह उस सांस्कृतिक माहौल को याद कर रहे हैं, जिसमें त्योहार मनोरंजन के साथ कला और संगीत से भी जुड़े होते थे. ‘बदलाव बिहार में नहीं, बिहारियों में हुआ है’ संजय बिहार में बदलाव से इनकार नहीं करते, लेकिन उनके लिए विकास का मतलब सिर्फ सड़क और इमारतें नहीं हैं. उनका कहना है- ‘बदलाव बिहार में नहीं हुआ है, बदलाव बिहारियों में हुआ है.’ पटना के रिवरफ्रंट का जिक्र करते हुए वह कहते हैं कि गंगा के किनारे बने इस इलाके का नाम ‘गंगा ड्राइव’ भी हो सकता था, लेकिन उसे ‘मरीन ड्राइव’ कहा गया. उनकी बात सिर्फ नाम तक सीमित नहीं है. वह नागरिक व्यवहार को भी बदलाव का हिस्सा मानते हैं. उनका कहना है- ‘स्मार्ट सिटी नहीं होता है, स्मार्ट सिटीजन होते हैं.’ शहर की सड़कें कितनी भी अच्छी क्यों न हों, अगर लोग चौराहों पर गाड़ियां रोककर खड़े हों, ट्रैफिक का ध्यान न रखें और सार्वजनिक जगहों पर अनुशासन न हो, तो बदलाव अधूरा है.

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LIVE: INDIA ब्लॉक का मार्च आज, संसद मार्ग से चुनाव आयोग तक कड़ी सुरक्षा

INDIA Bloc March Live: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विपक्ष का आंदोलन जारी है. इसी सिलसिले में मंगलवार (6 अक्तूबर) को INDIA ब्लॉक के नेता और सांसद सड़क पर उतर रहे हैं. विपक्षी दलों के सांसद संसद भवन से चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करेंगे. प्रदर्शन से जुड़ी हर बड़ी और पल-पल की अपडेट के लिए बने रहें नया विचार डॉट कॉम के साथ. The post LIVE: INDIA ब्लॉक का मार्च आज, संसद मार्ग से चुनाव आयोग तक कड़ी सुरक्षा appeared first on Naya Vichar.

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JPSC घोटाला : TDPL से आयोजित सभी 21 परीक्षाएं जांच के घेरे में, 462 नियुक्त अफसरों को समन की तैयारी

 JPSC Scam. झारखंड में JPSC की परीक्षाओं में कथित मेधा घोटाले की जांच का दायरा अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है, जिससे राज्य की भर्तियों पर सवाल खड़े हो गए हैं. अब तक तीन परीक्षाओं में शामिल सफल अभ्यर्थियों की जांच और गिरफ्तारी हो रही थी, लेकिन अब CID 18 और परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को पूछताछ के लिए समन भेजने की तैयारी में है. अब तक JPSC 14वीं, FRO और ACF परीक्षा की जांच जारी थी. अब फूड सेफ्टी ऑफिसर, CDPO और सिविल सेवा परीक्षा 2023 की परीक्षा की भी जांच शुरू हो रही है. इन तीन परीक्षाओं के माध्यम से 462 पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं. CID नियुक्त हो चुके अधिकारियों को समन भेजने की तैयारी कर रहा है. पेपर लीक से OMR में हेराफेरी तक, कई आरोपों की जांच मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के माध्यम से आयोजित JPSC की सभी 21 परीक्षाएं अब जांच के दायरे में हैं. CID ने इन परीक्षाओं से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. CID पेपर लीक, OMR शीट में हेराफेरी और कथित सेटिंग के जरिये अभ्यर्थियों को पास कराने के आरोपों की जांच कर रही है. 18 और परीक्षाओं के सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ की तैयारी अब जांच के अगले चरण में झारखंड सिविल सेवा संयुक्त परीक्षा 2023, सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा 2023 और 2025 के सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ की तैयारी है. विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति, सहायक निदेशक, सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर और ड्रग इंस्पेक्टर नियुक्ति से जुड़ी परीक्षाएं भी जांच के दायरे में हैं. इसके अलावा इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में प्राध्यापकों की नियुक्ति से जुड़ी 2025 और 2026 की परीक्षाओं की भी जांच होगी. सिविल जज जूनियर डिविजन नियुक्ति परीक्षा 2023 तथा ACF-FRO नियुक्ति परीक्षा 2024 की फाइलें भी खंगाली जा रही हैं. सहायक लोक अभियोजक, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO), झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) 2024 और छठी सीमित उपसमाहर्ता परीक्षा 2018 के सफल अभ्यर्थी भी CID की जांच के दायरे में हैं. अब तक 27 आरोपित जेल भेजे गये मामले में CID अब तक 27 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. इनमें JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल खियांग्ते और उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता समेत अन्य शामिल हैं. अब तक की कार्रवाई मुख्य रूप से तीन परीक्षाओं पर केंद्रित थी. 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में कथित सेटिंग के जरिए सफल होने के आरोप में सुमन सौरभ, दीपक राणा, ओमप्रकाश राणा, उमाकांत उरांव, रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार और रक्षक सिंह को गिरफ्तार किया गया है. वहीं, सहायक वन संरक्षक (ACF) और वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO) परीक्षा के सफल अभ्यर्थी ऋतिक रौशन और पंकज प्रसून्न भी जेल भेजे जा चुके हैं. छात्र आंदोलन की क्राउड फंडिंग की शिकायत भी CID तक पहुंची JPSC-JSSC नियुक्ति घोटाले की जांच कर रही CID को छात्र आंदोलन की फंडिंग से जुड़ी शिकायत भी मिली है. शिकायत में आंदोलन के लिए करोड़ों रुपये जुटाये जाने और उनके स्रोत व खर्च की जांच की मांग की गयी है. हालांकि, CID ने इस शिकायत की पुष्टि नहीं की है और न ही इस संबंध में जांच शुरू होने की जानकारी दी है. ये भी पढ़ें: चतरा में कोयला लदे वाहन की चपेट में आने से एक की मौत, दो गंभीर; गुस्साए ग्रामीणों ने चतरा-सिमरिया पथ किया जाम The post JPSC घोटाला : TDPL से आयोजित सभी 21 परीक्षाएं जांच के घेरे में, 462 नियुक्त अफसरों को समन की तैयारी appeared first on Naya Vichar.

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Aaj Ki Taza Khabar: असम से बंगाल तक वोटिंग, 1 लोकसभा और 5 विधानसभा सीटों पर मतदान जारी

Aaj Ki Taza Khabar LIVE: 6 अक्टूबर की ताजा समाचारों और दिनभर के बड़े अपडेट्स के लिए हमारे साथ जुड़े रहें. इस लाइव अपडेट में आपको पल-पल की हर जरूरी जानकारी आसान भाषा में मिलेगी. The post Aaj Ki Taza Khabar: असम से बंगाल तक वोटिंग, 1 लोकसभा और 5 विधानसभा सीटों पर मतदान जारी appeared first on Naya Vichar.

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तेज अर्थव्यवस्था, कमजोर शेयर बाजार,पढ़ें-प्रभु चावला का आलेख

नब्बे साल पहले जॉन मेनार्ड कीन्स ने शेयर बाजार की तुलना अखबार में प्रकाशित होने वाली सौंदर्य प्रतियोगिता से की थी. पाठक जीतता इसलिए नहीं है कि वह सबसे सुंदर चेहरे को चुनता है, बल्कि इसलिए कि वह अनुमान लगा सके कि बाकी सभी लोग किस चेहरे को चुनेंगे. कीन्स समझ गये थे कि कीमतें तथ्यों की सूची नहीं, बल्कि विश्वास पर दिये गये फैसले होती हैं. हिंदुस्तान ने पिछले आठ सप्ताहों में यह सबक बहुत भारी कीमत चुकाकर फिर से सीखा है. अप्रैल से जून में हिंदुस्तानीय वित्तीय स्थिति 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी, जो प्रतिद्वंद्वी वित्तीय स्थितिओं से कहीं तेज थी. शेयर बाजार में सूचीबद्ध देश की 50 सबसे बड़ी कंपनियों का मुनाफा 18 फीसदी बढ़ा, जो दस तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि थी. फिर भी पिछले शुक्रवार को सेंसेक्स 71,910 पर बंद हुआ और लगातार आठवें सप्ताह गिरावट दर्ज की गयी. कोविड के दौर वाले 2020 के बाद यह गिरावट का सबसे लंबा सिलसिला था. पांच अगस्त से अब तक सूचकांक करीब 6,700 अंक गिर चुका है, यानी करीब 8.5 फीसदी की गिरावट. मोटे अनुमान के मुताबिक, 30 से 40 लाख करोड़ रुपये के बीच का बाजार पूंजीकरण खत्म हो चुका है. दो दशक से भी अधिक समय में हिंदुस्तान का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा है. इन आंकड़ों के पीछे वास्तविक लोग खड़े हैं. कानपुर में शेयर बाजार के एक कर्मचारी और कोच्चि की एक नर्स का उदाहरण लें. ये हर महीने कुछ हजार रुपये एसआइपी में लगाते रहे थे. इन्हें भरोसा दिलाया गया था कि धैर्य का फल मिलता है. पर इन्होंने थकाऊ हफ्तों के दौरान अपनी बचत को धीरे-धीरे खत्म होते देखा. इन्हीं हफ्तों में नैस्डैक ने रिकॉर्ड स्तर छुआ, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 7,000 के स्तर पर लौट आया और जापान का निक्केई अपने शिखर के आसपास बना रहा. पूरे 2026 में सियोल का बाजार करीब 68 प्रतिशत, टोक्यो का 29 फीसदी और न्यूयॉर्क का 13 प्रतिशत चढ़ा है. इसके मुकाबले सेंसेक्स रुपये में 12 प्रतिशत से अधिक और डॉलर में करीब 18 फीसदी गिर चुका है. इन सभी देशों ने एक ही युद्ध, कच्चे तेल की समान चुनौती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की समान नीतियों का सामना किया. वे फलते-फूलते रहे, जबकि हिंदुस्तान संघर्ष करता रहा. यह गिरावट तीन चरणों में सामने आयी. अगस्त में होर्मुज के आर-पार तनाव बढ़ने के साथ तेल की कीमतें ऊपर जाने लगीं. सितंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें बढ़ायीं, अमेरिकी बांड की प्रतिफल दर 2007 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गयी और रुपया डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर को पार कर गया. फिर 28 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान का शांति प्रस्ताव ठुकरा दिया. उस दिन निफ्टी के 50 में से 47 शेयर गिर गये. हिंदुस्तान ही इतनी बुरी तरह क्यों प्रभावित हुआ? दरअसल, लंबे समय से मरम्मत किये जाते और टाले जाते रहे तीन आर्थिक संकट एक साथ फूट पड़े. पहला संकट तेल का था. हिंदुस्तान जितना कच्चा तेल इस्तेमाल करता है, उसका अधिकांश आयात करता है. इसलिए तेल की कीमतों में हर उछाल से आयात बिल बढ़ता है, रुपया कमजोर होता है और महंगाई बढ़ती है. अगस्त में महंगाई 4.82 फीसदी तक पहुंच गयी. हिंदुस्तान की आर्थिक वृद्धि पर दांव लगा रही वाहन निर्माता कंपनियां, बंदरगाह और इंजीनियरिंग कंपनियां सबसे अधिक प्रभावित हुईं. दूसरा संकट एआइ का था, जो इस दशक की सोने की दौड़ बन चुकी है. सैमसंग और एसके हाइनिक्स द्वारा डाटा केंद्रों में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप की बिक्री के चलते आठ महीनों में दक्षिण कोरिया का चिप निर्यात करीब 170 फीसदी बढ़ गया. हिंदुस्तान दुनिया को इस तरह का हार्डवेयर लगभग नहीं बेचता. इसके बजाय हिंदुस्तान की दिग्गज सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों को स्वचालन के शिकार के रूप में देखा जा रहा है, न कि उसके लाभ उठाने वालों के रूप में. निवेशकों ने कमजोर होती खपत और ऐसे तेल संकट को देखा, जिसका अंत नजर नहीं आ रहा था. हिंदुस्तानीय रिजर्व बैंक ने भी वृद्धि दर के घटकर 6.4 से 6.8 फीसदी के बीच रहने का अनुमान लगाया था. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र में ईंधन, खाद्य, उर्वरक और वित्त के संकट की चेतावनी दी थी. अब आगे क्या होगा, यह आंशिक रूप से उन ताकतों पर निर्भर करेगा, जो नयी दिल्ली से बहुत दूर हैं. सात अक्तूबर को रिजर्व बैंक की बैठक में उसे रुपये को संभालने और कर्ज लेने वालों को राहत देने के बीच चुनाव करना होगा. खाड़ी क्षेत्र में युद्धविराम हिंदुस्तानीय शेयरों को बजट से कहीं अधिक तेजी से उबार सकता है. लेकिन असली सवाल यह है कि क्या हिंदुस्तान निवेशकों को वापस लौटने की कोई ठोस वजह दे सकता है. ऐसा संभव है, अगर वह एक साथ तीन स्तंभों पर काम करे. मोदी प्रशासन को घरेलू मांग बढ़ाने के लिए पर्याप्त मात्रा में धन उपलब्ध कराना होगा. हिंदुस्तानीय बचतकर्ताओं ने पहले ही अपनी मजबूती दिखा दी है. सितंबर के अंतिम सप्ताह में विदेशी निवेशकों ने करीब 11,500 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 16,400 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. दूसरा गति देने वाला कारक निवेश है. जून तिमाही में स्थिर पूंजी निवेश में करीब 12 फीसदी की वृद्धि हुई और अब इसे उन कमजोरियों पर सीधे केंद्रित करना होगा, जिन्हें सितंबर ने उजागर किया है. सौर ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और बिजली से चलने वाले परिवहन पर खर्च किया गया हर रुपया कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर हिंदुस्तान द्वारा चुकाये जाने वाले युद्ध-कर को कम करता है. तीसरा प्रोत्साहन भरोसा है, और इसे बनाना सबसे कठिन है. फरवरी में बजट के दिन सट्टेबाजी पर कर में अचानक वृद्धि ने दिखाया कि मनमाने फैसलों से पूंजी कैसे बाहर निकलती है. स्थिर कर व्यवस्था से निवेशकों द्वारा मांगा जाने वाला अतिरिक्त जोखिम प्रीमियम कम होगा. अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों के साथ तेज गति से व्यापार समझौते भी मदद करेंगे. इसी तरह ऐसी कूटनीति की जरूरत है, जो ऊर्जा की कीमतों पर अफसोस जताने के बजाय ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करे. हिंदुस्तान लंबे समय से दुनिया को बताता आया है कि वह अगला बड़ा बाजार है. अब उसे उसी तरह व्यवहार भी करना होगा. सबक बिल्कुल स्पष्ट है. पिछले आठ सप्ताहों

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