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‘उर्दू में तिरंगा’: PM मोदी के पॉकेट स्क्वायर पर पवन खेड़ा का तंज पड़ा उल्टा, यूजर ने समझा दिया कैमरा एंगल

समारोह के दौरान पीएम मोदी ने सफेद कुर्ता-पायजामा, चॉकलेट-ब्राउन रंग की जैकेट और लाल रंग का पारंपरिक बांधनी साफा पहना था. उनकी जैकेट की जेब में हरा, सफेद और केसरिया रंग का पॉकेट स्क्वायर दिखाई दे रहा था. ‘उर्दू में तिरंगा या आयरलैंड का स्वतंत्रता दिवस?’ कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पीएम मोदी की तस्वीर और वीडियो शेयर करते हुए तंज कसा. उन्होंने लिखा, “लगता है साहब ने उर्दू में तिरंगा पहना है. या फिर हिंदुस्तान की जगह आयरलैंड का इंडिपेंडेंस डे मना रहे हैं.” खेड़ा का यह तंज हिंदुस्तानीय तिरंगे और आयरलैंड के राष्ट्रीय ध्वज के रंगों के क्रम को लेकर था. हिंदुस्तानीय तिरंगे में रंगों का क्रम ऊपर से नीचे-केसरिया, सफेद और हरा होता है, जबकि आयरलैंड के झंडे में बाएं से दाएं- हरा, सफेद और नारंगी (केसरिया) रंग होता है. कांग्रेस का दावा था कि पॉकेट स्क्वायर में दिख रहा रंगों का क्रम आयरलैंड के झंडे जैसा लग रहा है. सोशल मीडिया पर यूजर्स ने पवन खेड़ा को दिया जवाब पवन खेड़ा के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें आड़े हाथों ले लिया और कैमरा एंगल और देखने के नजरिए का फर्क समझाया @StrategistHarsh नाम के यूजर ने लिखा, “पवन खेड़ा जी, तिरंगे में रंगों का क्रम क्या है? सबसे ऊपर केसरिया, फिर सफेद, फिर हरा. मोदी जी की जेब में भी यही क्रम है: सबसे ऊपर केसरिया, फिर सफेद, फिर हरा. मतलब, आप कोई भी तर्क ले आइए, अपनी किसी भी जानकारी का इस्तेमाल कर लीजिए, लेकिन भाई, कम से कम थोड़ी अक्ल तो साथ लाइए.”@HulkSanatani यूजर ने चुटकी लेते हुए लिखा, “तारक मेहता का उल्टा चश्मा पता है ना.” @alokkmohan ने टिप्पणी की, “अब आप लोग बीजेपी के स्टाइल में ही बोलने लगे हैं.”एक अन्य यूजर ने तंज कसते हुए कहा, “पवन जी, पहले थोड़ा फैशन सेंस तो सीख लो.” ये भी पढ़ें: लाल किले से भाषण के दौरान अटके पीएम मोदी, विपक्ष ने कहा- ‘बिना टेलीप्रॉम्प्टर के महामानव’ ये भी पढ़ें: पीएम मोदी ने लाल किले से पेश किया ‘सप्तधारा’ विजन, क्या है विकसित हिंदुस्तान के लिए 7 शक्तियों का पूरा प्लान? The post ‘उर्दू में तिरंगा’: PM मोदी के पॉकेट स्क्वायर पर पवन खेड़ा का तंज पड़ा उल्टा, यूजर ने समझा दिया कैमरा एंगल appeared first on Naya Vichar.

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स्वतंत्रता दिवस के जश्न में मातम, संभल में कार्यक्रम के बीच गिरा स्कूल का छज्जा, 8 साल के बच्चे की मौत, कई मासूम घायल

UP News: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान दर्दनाक हादसा हो गया. असमोली थाना क्षेत्र के मदाला फतेहपुर गांव स्थित एक निजी स्कूल के मुख्य गेट पर बना छज्जा अचानक भरभराकर गिर गया. हादसे में मलबे के नीचे दबने से 8 वर्षीय शिशु की मौत हो गई, जबकि अन्य कई शिशु घायल हो गए. दोनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है. हादसे की CCTV फुटेज भी सामने आई है, जिसमें छज्जा गिरने का पूरा मंजर कैद हुआ है. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. कार्यक्रम के दौरान अचानक गिरा छज्जा सोशल मीडिया पर वायरल वीडियों के अनुसार, स्कूल में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया था. कार्यक्रम देखने के लिए आसपास के घरों से भी शिशु पहुंचे थे. इसी दौरान कुछ शिशु स्कूल के मुख्य गेट के ऊपर बने छज्जे पर चढ़ गए. अचानक अधिक वजन पड़ने से छज्जा भरभराकर नीचे गिर गया. हादसा होते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई. मलबे में दबने से मासूम की मौत छज्जा गिरने के दौरान वहां मौजूद कई शिशु उसकी चपेट में आ गए. मलबे में दबने से 8 वर्षीय निजामुद्दीन गंभीर रूप से घायल हो गया. आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. हादसे में दो अन्य शिशु भी घायल हुए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है. CCTV में कैद हुआ हादसे का खौफनाक मंजर स्कूल में हुए इस हादसे का CCTV वीडियो भी सामने आया है. फुटेज में कार्यक्रम के दौरान बच्चों के छज्जे के पास और ऊपर मौजूद होने के कुछ ही देर बाद अचानक संरचना गिरती दिखाई दे रही है. छज्जा गिरते ही वहां मौजूद लोग बच्चों को बचाने के लिए दौड़ पड़ते हैं. हादसे का यह वीडियो अब सामने आया है. DM और SP ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया. संभल के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक समेत प्रशासन तथा शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और हादसे के कारणों की जानकारी ली. अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर हरसंभव सहायता का भरोसा भी दिलाया. करीब 20 साल पुरानी बताई जा रही स्कूल की बिल्डिंग प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, स्कूल की बिल्डिंग करीब 19 से 20 साल पुरानी बताई जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, छज्जे पर अधिक वजन पड़ने की वजह से उसके गिरने की आशंका है. हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह और स्कूल भवन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जांच की जा रही है. असमोली थाना क्षेत्र का मामला यह दर्दनाक हादसा संभल जिले के असमोली थाना क्षेत्र के मदाला फतेहपुर गांव में हुआ. घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है. हादसे में एक शिशु की मौत के बाद परिवार में मातम पसरा है, वहीं पूरे गांव में भी शोक का माहौल है. यह भी पढ़ें: भगवा झंडे, कांवरियों का वेश और शराब की खेप… बलिया बॉर्डर पर तस्करों की चाल हुई फेल, 10 करोड़ की शराब जब्त The post स्वतंत्रता दिवस के जश्न में मातम, संभल में कार्यक्रम के बीच गिरा स्कूल का छज्जा, 8 साल के शिशु की मौत, कई मासूम घायल appeared first on Naya Vichar.

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लाल किले से भाषण के दौरान अटके पीएम मोदी, विपक्ष ने कहा- ‘बिना टेलीप्रॉम्प्टर के महामानव’

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने पीएम मोदी के भाषण का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सवाल खड़े किए. संबोधन के दौरान जब प्रधानमंत्री 2014 के बाद से हिंदुस्तान की जैव-वित्तीय स्थिति (बायो-इकोनॉमी) में हुई प्रगति का जिक्र कर रहे थे, तब वे बोलते-बोलते कुछ क्षणों के लिए रुके और उन्हें अपने लिखित नोट्स देखने पड़े. पवन खेड़ा ने कहा- ‘टेलीप्रॉम्प्टर के बिना महामानव’ पीएम मोदी के वीडियो क्लिप को साझा करते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तंज कसते हुए लिखा, “बिना टेलीप्रॉम्प्टर के महामानव.” खेड़ा ने अपने पोस्ट में रील वाले टेप को भी दिखाया, जिसमें टेप से रील बाहर निकला हुआ दिख रहा है. वहीं, आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने भी वीडियो साझा कर प्रधानमंत्री के आत्मविश्वास और संबोधन की शैली पर सवाल उठाए. पीएम मोदी ने पिछले 4 साल में दिया सबसे छोटा भाषण इस बार प्रधानमंत्री मोदी का स्वतंत्रता दिवस भाषण पिछले चार वर्षों में सबसे छोटा (लगभग 75 मिनट) रहा, जबकि 2023 में उन्होंने लगभग 90 मिनट का भाषण दिया था. संक्षिप्त होने के बावजूद, अपने इस संबोधन में उन्होंने आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, एमएसएमई (MSME), उच्च शिक्षा, कोचिंग संस्थानों और नक्सलवाद जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया. ये भी पढ़ें: पीएम मोदी ने लाल किले से पेश किया ‘सप्तधारा’ विजन, क्या है विकसित हिंदुस्तान के लिए 7 शक्तियों का पूरा प्लान? ये भी पढ़ें: दूसरे साल भी लाल किले के समारोह में शामिल नहीं हुए राहुल-खरगे, गिरिराज ने उठाए सवाल The post लाल किले से भाषण के दौरान अटके पीएम मोदी, विपक्ष ने कहा- ‘बिना टेलीप्रॉम्प्टर के महामानव’ appeared first on Naya Vichar.

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बिना लाइसेंस-रजिस्ट्रेशन के चला सकते हैं ये इलेक्ट्रिक स्कूटर, 80km+ रेंज और 24 लीटर स्टोरेज भी है खासियत

अगर आप कम बजट में एक इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने का सोच रहे हैं, तो Ampere Reo Vyb आपके लिए एक ऑप्शन हो सकता है. इसकी कीमत 71,999 रुपये (एक्स-शोरूम) रखी गई है. Ampere ने Reo Vyb को खासतौर पर रोजमर्रा के शहर के सफर को ध्यान में रखकर तैयार किया है. कम स्पीड वाला यह इलेक्ट्रिक स्कूटर छोटी दूरी के सफर के लिए ज्यादा बेहतर नजर आता है. तो क्या Ampere Reo Vyb अपने बजट के हिसाब से वाकई पैसा वसूल स्कूटर है? इसकी रेंज कितनी है, बैटरी और चार्जिंग में क्या खास मिलता है और डेली यूज में यह कितना काम का है? आइए जानते हैं. कीमत और बिना लाइसेंस चलाने का फायदा Ampere Reo Vyb को खरीदने की सबसे बड़ी वजह इसकी लो-स्पीड कैटेगरी है. कंपनी के मुताबिक, इस इलेक्ट्रिक स्कूटर को चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं पड़ती. ऐसे में जो लोग रोजमर्रा के छोटे-मोटे कामों के लिए आसान लोकल मोबिलिटी चाहते हैं, उनके लिए इसकी ओनरशिप थोड़ी आसान हो सकती है. कीमत की बात करें तो Ampere Reo Vyb की एक्स-शोरूम कीमत 71,999 रुपये है. हालांकि, जरूरी एक्सेसरीज के लिए अलग से पैसे देने होंगे. कंपनी फाइनेंस का ऑप्शन भी दे रही है, जिसमें EMI 2,500 रुपये प्रति महीने से शुरू होती है. ब्याज दर 6.99% से शुरू बताई गई है, हालांकि यह शर्तों पर डिपेंड करेगी. ये भी पढ़ें: 145km की रेंज, रिमूवेबल बैटरी और स्टाइलिश डिजाइन, Gen-Z के लिए मार्केट में आया नया इलेक्ट्रिक स्कूटर Reo Vyb को नॉर्मल हाई-स्पीड इलेक्ट्रिक स्कूटर समझकर न खरीदें. इसकी टॉप स्पीड 25 kmph है. इसलिए यह स्लो स्पीड वाली शहरी सड़कों और कम दूरी के सफर के लिए ज्यादा सही बैठता है. रेंज, बैटरी और चार्जिंग टाइम डिटेल्स स्पेसिफिकेशन बैटरी कैपेसिटी 1.44 kWh बैटरी टाइप LFP (लिथियम आयरन फॉस्फेट) रियल वर्ल्ड रेंज 80 km से ज्यादा चार्जिंग टाइम करीब 4 घंटे (0 से 80%) बैटरी लाइफ 1,00,000 km तक कर्ब वेट 74 kg प्रैक्टिकलिटी फीचर्स 2.4 kW पीक पावर 50 Nm पीक टॉर्क 125 mm ग्राउंड क्लीयरेंस 3.5 इंच कलर LCD क्लस्टर 10 इंच के पहिए रिवर्स मोड रिमूवेबल बैटरी 24 लीटर स्टोरेज स्पेस 3 साल या 30,000 किमी की वारंटी किन लोगों के लिए ये स्कूटर परफेक्ट रहेगा? अगर आप रोज के छोटे-मोटे कामों के लिए एक सस्ती और आसान इलेक्ट्रिक स्कूटर लेना चाहते हैं, तो Ampere Reo Vyb आपके काम आ सकती है. इसकी कीमत ज्यादा नहीं है. साथ ही, एक बार चार्ज करने पर यह रोज के जरूरी कामों के लिए ठीक-ठाक दूरी तय कर सकती है. इसमें सामान रखने के लिए भी अच्छी जगह दी गई है. इसकी एक और खासियत है कि इसे चलाने के लिए लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं पड़ती. वहीं, सिर्फ 74 किलो वजन होने की वजह से इसे पार्क करना और कम स्पीड पर संभालना भी आसान रहता है. हालांकि, खरीदने से पहले अपनी जरूरत समझना जरूरी है. इसकी 25 kmph की टॉप स्पीड इसे तेज रफ्तार वाली सड़कों और लंबे डेली कम्यूट के लिए सही ऑप्शन नहीं बनाती. ये भी पढ़ें: 30 से ज्यादा नए फीचर्स के साथ ये इलेक्ट्रिक स्कूटर हुआ अपडेट, 142km की रेंज भी, कितनी है कीमत? The post बिना लाइसेंस-रजिस्ट्रेशन के चला सकते हैं ये इलेक्ट्रिक स्कूटर, 80km+ रेंज और 24 लीटर स्टोरेज भी है खासियत appeared first on Naya Vichar.

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80वें स्वतंत्रता दिवस पर चंडीगढ़ में तनाव: कौमी इंसाफ मोर्चे के प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले

Chandigarh Protest : आज देशभर में 80वां स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है. इसी बीच चंडीगढ़ में कौमी इंसाफ मोर्चे के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बन गई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया. कौमी इंसाफ मोर्चा लंबे समय से जेल में बंद सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहा है. मोर्चे ने 15 अगस्त को पंजाब के गवर्नर हाउस के घेराव का एलान किया था. इसी को लेकर चंडीगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है. हाईकोर्ट में दायर हुई थी जनहित याचिका कौमी इंसाफ मोर्चे के 15 अगस्त को पंजाब के गवर्नर हाउस के घेराव के एलान के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी. मामले की सुनवाई करते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस अश्वनी मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन कानून व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है. हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन और पंजाब प्रशासन को निर्देश दिया था कि प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था न बिगड़े और सार्वजनिक संपत्ति को किसी तरह का नुकसान न हो. 20 अगस्त को होगी अगली सुनवाई अदालत ने चंडीगढ़ प्रशासन और पंजाब प्रशासन से प्रदर्शन को लेकर किए गए सुरक्षा इंतजामों की जानकारी स्टेटस रिपोर्ट के जरिए देने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी. याचिकाकर्ता विवेक सिंगला ने अदालत में आशंका जताई थी कि कौमी इंसाफ मोर्चे के समर्थक चंडीगढ़ में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे कानून व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. फिलहाल, स्वतंत्रता दिवस के मौके पर चंडीगढ़ में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस की कार्रवाई जारी है. पुलिस की ओर से आंसू गैस और वाटर कैनन के इस्तेमाल के बीच इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है. Also read : PHOTOS : PM मोदी की ‘बंधेज पगड़ी’ और बच्चों से उभरा वंदे मातरम; तस्वीरों में देखिए लाल किले के खूबसूरत नजारे The post 80वें स्वतंत्रता दिवस पर चंडीगढ़ में तनाव: कौमी इंसाफ मोर्चे के प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले appeared first on Naya Vichar.

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भारत-बांग्लादेश सीमा से 3 संदिग्ध पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार, खुफिया दस्तावेज और बांग्लादेशी पासपोर्ट बरामद

Pakistani Spies Arrested in Bengal: पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिले कूचबिहार से 3 संदिग्ध पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार किये गये हैं. इनकी गिरफ्तारी हिंदुस्तान-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास से विशेष खुफिया अभियान के तहत हुई है. सीमा सुरक्षा बल (BSF) और पश्चिम बंगाल पुलिस की संयुक्त टीम ने इन्हें पकड़ा है. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी को भेजने वाले थे सूचनाएं शुरुआती जांच में पता चला है कि तीनों संदिग्ध जासूस हिंदुस्तानीय रक्षा प्रतिष्ठानों, सीमावर्ती सुरक्षा व्यवस्था और बीएसएफ की गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां और नक्शे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी को भेजने की फिराक में थे. बांग्लादेशी पासपोर्ट और फर्जी दस्तावेजों का सहारा सुरक्षा एजेंसियों को लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय सीमा से जासूसी गिरोह के सक्रिय होने की गुप्त सूचना मिल रही थी. गिरफ्तार आरोपियों के पास से संदिग्ध बांग्लादेशी पासपोर्ट, फर्जी हिंदुस्तानीय पहचान पत्र और कई मोबाइल फोन बरामद हुए हैं. फॉरेंसिक और कॉल डिटेल जांच में पता चला है कि आरोपी लगातार एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिये पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर्स के संपर्क में थे. ये भी पढ़ें: हिंदुस्तान-पाकिस्तान में हमलों की साजिश रच रहा था बंगाल का असाफुल मलिक, बेंगलुरु पुलिस ने किया गिरफ्तार, TTP से जुड़े तार अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने की फिराक में थे आरोपी जांच अधिकारियों ने बताया है कि पकड़े गये तीनों आरोपी बांग्लादेश के रास्ते पाकिस्तान भागने या वहां से नये निर्देश प्राप्त करने की योजना बना रहे थे. तभी सुरक्षा बलों ने उन्हें धर दबोचा. ये भी पढ़ें: बंगाल में तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान मॉड्यूल तैयार कर रहा था हमीम मंडल, निशाने पर थे 6 मंत्री सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर, पूछताछ जारी इस गिरफ्तारी के बाद हिंदुस्तान-बांग्लादेश सीमा पर सीमा सुरक्षा बल और राज्य पुलिस ने गश्त बढ़ा दी है. सर्च ऑपरेशन भी तेज कर दिया है. केंद्रीय जांच एजेंसियां और एसटीएफ (STF) आरोपियों से किसी अज्ञात स्थान पर पूछताछ कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने हिंदुस्तान में किस-किस इलाके की संवेदनशील जानकारी हासिल की थी. स्थानीय स्तर पर उनके कौन-कौन से मददगार (Local Modules) हैं. ये भी पढ़ें: बंगाल में ISI और जैश-ए-मोहम्मद के राज खोलेगी अर्पिता प्रशासन! हमीम ने सौंपा था हनीट्रैप का जिम्मा The post हिंदुस्तान-बांग्लादेश सीमा से 3 संदिग्ध पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार, खुफिया दस्तावेज और बांग्लादेशी पासपोर्ट बरामद appeared first on Naya Vichar.

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महिला आरक्षण से दिमागी नक्सल तक, लाल किले से PM मोदी के भाषण की खास बातें

Prime Minister Narendra Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए स्त्री आरक्षण, युवाओं की भूमिका, नक्सलवाद, आत्मनिर्भर हिंदुस्तान, स्पोर्ट्स, रक्षा और विकसित हिंदुस्तान के लक्ष्य समेत कई मुद्दों पर बात की. अपने करीब 75 मिनट के संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि हिंदुस्तान को अब छोटे सपनों से आगे बढ़कर बड़े लक्ष्य तय करने होंगे और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प को पूरा करना होगा. स्त्री आरक्षण पर सभी दलों से समर्थन की अपील प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा और विधानसभाओं में स्त्री आरक्षण लागू करने के लिए सभी नेतृत्वक दलों से सहयोग मांगा. उन्होंने कहा कि स्त्री आरक्षण को अब नेतृत्वक विवाद का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए. पीएम मोदी ने कहा कि सभी दल मिलकर स्त्रीओं को उनका अधिकार दिलाने में सहयोग करें और इस काम का श्रेय भी लें. उन्होंने इसे स्त्रीओं के सम्मान और अधिकार से जुड़ा मुद्दा बताया. पीएम मोदी ने युवाओं से नेतृत्व संभालने की अपील प्रधानमंत्री ने युवाओं से वित्तीय स्थिति और समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में नेतृत्व की भूमिका निभाने की अपील की. उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित हिंदुस्तान बनाने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी. पीएम मोदी ने कहा कि देश के युवा नए विचार, तकनीक और इनोवेशन के जरिए हिंदुस्तान को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं. हथियारी नक्सल के बाद दिमागी नक्सल से किया सतर्क नक्सलवाद पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि प्रशासन ने पिछले कुछ सालों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी सफलता हासिल की है. उन्होंने दावा किया कि कभी जिन इलाकों में गोलियां चलती थीं, वहां अब विकास और विश्वास का माहौल बन रहा है. इस बीच प्रधानमंत्री ने आगाह किया कि चुनौती पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि जंगलों में हथियारी नक्सल के खिलाफ सफलता मिली है, लेकिन अब दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं. पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि ऐसे तत्व समाज में हिंसा और अराजकता फैलाने की कोशिश कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को पहचानकर अलग करना और युवाओं को विकसित हिंदुस्तान की मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है. शक्ति की सप्तधारा का बताया रोडमैप पीएम मोदी ने हिंदुस्तान के विकास के लिए शक्ति की सप्तधारा का भी जिक्र किया. इसके तहत उन्होंने सात प्रमुख क्षेत्रों को देश की ताकत बताया. इनमें मैन्युफैक्चरिंग शक्ति, कृषि और फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी तथा हिंदुस्तान की सॉफ्ट पावर शामिल हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सात क्षेत्रों को मजबूत कर हिंदुस्तान आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक रूप से आगे बढ़ सकता है. रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने हिंदुस्तान को रक्षा निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने की बात कही. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान को आधुनिक रक्षा तकनीक में दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. उन्होंने हाइपरसोनिक तकनीक, ड्रोन और अगली पीढ़ी की रक्षा प्रणालियों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दिया. छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का ऐलान पीएम मोदी ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि कोचिंग पर होने वाला भारी खर्च गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए बोझ बन जाता है. प्रशासन चाहती है कि युवाओं को बेहतर तैयारी का मौका मिले और परिवारों पर आर्थिक दबाव कम हो. 2036 ओलंपिक के लिए खिलाड़ियों की तलाश प्रधानमंत्री ने 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए हिंदुस्तान की दावेदारी का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि देशभर में पांच से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों के बीच प्रतिभा खोज अभियान चलाया जाएगा. इस अभियान का उद्देश्य कम उम्र से ही प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करना और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देना होगा. मोदी ने उन स्पोर्ट्सों में भी हिंदुस्तान की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया, जिनमें देश अब तक ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाया है. 2047 तक विकसित हिंदुस्तान का संकल्प पीएम मोदी ने एक बार फिर 2047 तक हिंदुस्तान को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य दोहराया. उन्होंने कहा कि पिछले 12 सालों में देश ने नई गति पकड़ी है और अब 140 करोड़ देशवासियों की ताकत और संकल्प को रोकना मुश्किल है. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान को अब छोटे सपने नहीं देखने चाहिए. देश को बड़े लक्ष्य तय करने होंगे और उन्हें हासिल करने के लिए मिलकर काम करना होगा. 25 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर आने का दावा प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 सालों में देश के अलग-अलग वर्गों ने हिंदुस्तान को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है. उन्होंने दावा किया कि इसी सामूहिक प्रयास के कारण करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं. फ्रैजाइल फाइव से तेजी से बढ़ती वित्तीय स्थिति तक प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हिंदुस्तान कभी फ्रैजाइल फाइव देशों में गिना जाता था, लेकिन अब दुनिया की तेजी से बढ़ती बड़ी वित्तीय स्थितिओं में शामिल है. उन्होंने इसे पिछले कुछ सालों में हुए आर्थिक और नीतिगत बदलावों का परिणाम बताया. इसे भी पढ़ें: लाल किले से PM मोदी का ऐलान, 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा, पांच नए रिएक्टर आत्मनिर्भर हिंदुस्तान और वोकल फॉर लोकल पर फोकस पीएम मोदीने कहा कि हिंदुस्तान को दूसरे देशों पर निर्भर रहकर आगे नहीं बढ़ना चाहिए. देश को अपने हितों की रक्षा खुद करनी होगी. उन्होंने आत्मनिर्भर हिंदुस्तान, मेक इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल जैसे अभियानों को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई. सेमीकंडक्टर सेक्टर का भी किया जिक्र प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर उद्योग में हिंदुस्तान की प्रगति का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि लंबे समय तक देश में इस क्षेत्र में बड़े संयंत्र नहीं बन पाए, लेकिन अब तीन सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में बने सेमीकंडक्टर का निर्यात भी शुरू हो गया है और यह तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित परिवारों के साथ देश पीएम मोदी ने हाल के दिनों में देश के कुछ हिस्सों में आई बाढ़ और भूस्खलन का भी जिक्र किया. उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताई और कहा कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है. अपने संबोधन के जरिए प्रधानमंत्री ने स्त्री सशक्तिकरण, युवाओं

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Ind Vs Sl LIVE: 600वें टेस्ट मैच में भारत ने जीता टॉस, पहले बैटिंग करने का फैसला, यशस्वी और देवदत्त पडिक्कल क्रीज पर

हिंदुस्तान और श्रीलंका के बीच गॉल में दो टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला आज से शुरू हो रहा है. हिंदुस्तानीय कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया है. यह मुकाबला वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 के लिहाज से बेहद अहम है. The post Ind Vs Sl LIVE: 600वें टेस्ट मैच में हिंदुस्तान ने जीता टॉस, पहले बैटिंग करने का फैसला, यशस्वी और देवदत्त पडिक्कल क्रीज पर appeared first on Naya Vichar.

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क्या वंदे मातरम् को बनाया जा सकता था राष्ट्रगान? जन गण मन पर अंतिम फैसला आखिर कैसे हुआ?

Vande Mataram vs National Anthem : आजादी के समय हिंदुस्तान के सामने सिर्फ देश चलाने की चुनौती नहीं थी, बल्कि अपनी राष्ट्रीय पहचान तय करने का सवाल भी था. वंदे मातरम् अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन की आवाज बन चुका था, जबकि जन गण मन नए हिंदुस्तान के राष्ट्रगान के लिए सामने था. दोनों के पीछे इतिहास, भावनाएं और अपनी अलग ताकत थी. फिर ऐसा क्या हुआ कि एक राष्ट्रगान बना और दूसरे को राष्ट्रगीत का दर्जा मिला? वंदे मातरम् कैसे बना आजादी की लड़ाई की आवाज वंदे मातरम् की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी. जिसका पहली बार प्रकाशन 1875 में हुआ. बाद में इसे उनके उपन्यास आनंदमठ में 1896 में शामिल किया गया. इसी साल हिंदुस्तानीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में इसे पहली बार गाया गया और धीरे-धीरे यह स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा बन गया. 1905 में लॉर्ड कर्जन ने बंगाल का विभाजन किया तो इसके खिलाफ देशभर में विरोध शुरू हुआ. स्वदेशी आंदोलन के दौरान वंदे मातरम् अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन का प्रमुख नारा और गीत बनकर उभरा. सभाओं और जुलूसों में इसकी गूंज सुनाई देने लगी और यह नेतृत्वक चेतना का प्रतीक बन गया. महात्मा गांधी भी वंदे मातरम् के राष्ट्रीय और ऐतिहासिक महत्व को समझते थे. हालांकि, समय के साथ इसके कुछ हिस्सों को लेकर आपत्तियां सामने आईं. खासकर बाद के अंतरों में धार्मिक प्रतीकों और देवी की कल्पना के इस्तेमाल को लेकर मुस्लिम नेताओं के एक हिस्से ने सवाल उठाए. 1937 में क्यों शुरू हुआ विवाद 1937 तक वंदे मातरम् राष्ट्रीय आंदोलन का बेहद लोकप्रिय गीत बन चुका था. लेकिन कांग्रेस के सामने यह सवाल आया कि क्या पूरे गीत को हर राष्ट्रीय अवसर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए. जवाहरलाल नेहरू ने भी इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाया. उनका मानना था कि वंदे मातरम् राष्ट्रीय आंदोलन और राष्ट्रीय जीवन का इतना महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है कि उसे पूरी तरह हटाया नहीं जा सकता. साथ ही, गीत के बाद के हिस्सों में मौजूद धार्मिक कल्पना को लेकर उनकी चिंता थी, जिसे हिंदुस्तान के सभी समुदाय समान रूप से स्वीकार नहीं कर सकते थे. इसलिए रास्ता निकाला गया कि राष्ट्रीय कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के शुरुआती हिस्से को प्राथमिकता दी जाए. यानी उद्देश्य वंदे मातरम् को खत्म करना नहीं, बल्कि उसे ऐसा राष्ट्रीय प्रतीक बनाए रखना था जिसे अलग-अलग समुदाय सहजता से स्वीकार कर सकें. जन गण मन की कहानी रवींद्रनाथ टैगोर की रचना जन गण मन पहली बार 27 दिसंबर 1911 को हिंदुस्तानीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाई गई. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इसका भी महत्वपूर्ण स्थान बना. वंदे मातरम् जहां स्वतंत्रता संघर्ष और ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रतिरोध की भावना से जुड़ा था, वहीं जन गण मन में हिंदुस्तान की व्यापक राष्ट्रीय पहचान और एकता की भावना दिखाई देती थी. आजादी के बाद यह अंतर और महत्वपूर्ण हो गया. अब सवाल सिर्फ यह नहीं था कि कौन सा गीत लोगों को ज्यादा भावुक करता है. राष्ट्रगान ऐसा होना था जिसे प्रशासनी समारोहों, सैन्य बैंड और विदेशों में हिंदुस्तानीय प्रतिनिधित्व के दौरान भी आसानी से प्रस्तुत किया जा सके. इसी कसौटी पर जन गण मन को ज्यादा उपयुक्त माना गया. क्या नेहरू वंदे मातरम् के खिलाफ थे? नेहरू वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व को अच्छी तरह समझते थे. वे जानते थे कि स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. लेकिन राष्ट्रगान के लिए उनकी प्राथमिकता अलग थी. उनका मानना था कि राष्ट्रगान की धुन ऐसी होनी चाहिए जिसे ऑर्केस्ट्रा और मिलिट्री बैंड आसानी से प्रस्तुत कर सकें. इसे प्रशासनी समारोहों के साथ-साथ विदेशों में भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाना था. इस कसौटी पर उन्हें जन गण मन ज्यादा उपयुक्त लगा. इसलिए वंदे मातरम् को राष्ट्रगान न चुने जाने की पूरी कहानी सिर्फ धार्मिक विवाद तक सीमित नहीं थी. धार्मिक स्वीकार्यता के साथ-साथ धुन, आधिकारिक प्रस्तुति और सैन्य बैंड के लिए उपयुक्तता जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण थे. आजादी की रात भी दोनों गीत साथ थे 15 अगस्त 1947 की आधी रात हिंदुस्तान आजाद होने वाला था. दिलचस्प बात यह है कि आजादी के समारोह को लेकर जवाहरलाल नेहरू के सुझावों में वंदे मातरम् और जन गण मन दोनों मौजूद थे. नेहरू ने राजेंद्र प्रसाद को लिखे एक पत्र में आजादी की रात संविधान सभा की बैठक में वंदे मातरम् के पहले अंतरे को शामिल करने का सुझाव दिया था. इसके साथ जन गण मन और सारे जहां से अच्छा को भी कार्यक्रम में जगह देने की बात थी. यानी आजाद हिंदुस्तान की पहली रात ही इन दोनों गीतों को राष्ट्रीय स्मृति में साथ रखा गया. लेकिन अब सवाल था कि औपचारिक राष्ट्रगान कौन होगा. 24 जनवरी 1950 को आया ऐतिहासिक फैसला 1948 में राष्ट्रगान को लेकर विचार करते समय वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व को स्वीकार किया गया, लेकिन जन गण मन को आधिकारिक प्रस्तुतियों के लिए अधिक उपयुक्त माना गया. 1949 में भी संविधान सभा में राष्ट्रगान को लेकर चर्चा हुई और कुछ सदस्य वंदे मातरम् को राष्ट्रगान बनाने के पक्ष में थे. आखिरकार 24 जनवरी 1950 को, हिंदुस्तान के गणराज्य बनने से ठीक दो दिन पहले, संविधान सभा की बैठक हुई. डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की कि जन गण मन हिंदुस्तान का राष्ट्रगान होगा. इसके साथ ही उन्होंने वंदे मातरम् को लेकर भी महत्वपूर्ण घोषणा की. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है और इसे जन गण मन के समान सम्मान और समान दर्जा दिया जाएगा. इस तरह हिंदुस्तान ने अपने इतिहास के महत्वपूर्ण गीत को किनारे नहीं किया. जन गण मन राष्ट्रगान बना और वंदे मातरम् को राष्ट्रगीत के रूप में सम्मानित स्थान मिला. 24 जनवरी 1950 को दोनों गीत गाए गए 24 जनवरी 1950 की संविधान सभा की कार्यवाही का खास पहलू यह था कि सदस्यों ने खड़े होकर जन गण मन गाया. इसके बाद वंदे मातरम् भी गाया गया. यानी जिस गीत ने आजादी के आंदोलन में लोगों की आवाज को ताकत दी थी और जिस गीत को नए हिंदुस्तान के राष्ट्रगान के रूप में चुना गया था, दोनों को एक ही दिन संविधान सभा में सम्मान मिला. क्या वंदे मातरम् राष्ट्रगान बन सकता था? वंदे मातरम् को लेकर गंभीर चर्चा हुई थी और

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80वां स्वतंत्रता दिवस 2026 विशेष: 1947 से अब तक हर साल की एक बड़ी उपलब्धि, जिसने बदला भारत

Independence Day 2026: 15 अगस्त 2026 को हिंदुस्तान अपनी आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है. 1947 में एक नए स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में शुरू हुई हिंदुस्तान की यात्रा आज 79 पूरे वर्षों का सफर तय कर चुकी है. इन वर्षों में देश ने सिर्फ अपनी सीमाओं और संस्थाओं को मजबूत नहीं किया, बल्कि विज्ञान, तकनीक, कृषि, शिक्षा, रक्षा, वित्तीय स्थिति, अंतरिक्ष, स्पोर्ट्स और डिजिटल क्षेत्र में भी दुनिया के सामने अपनी एक अलग पहचान बनाई है. हिंदुस्तान ने अब तक कई ऐसे पड़ाव हासिल किए हैं, जिन्होंने आधुनिक हिंदुस्तान की तस्वीर बदल दी. 140 करोड़ से ज्यादा लोगों के देश- हिंदुस्तान के लिए यह सफर सिर्फ बीते वर्षों की गिनती नहीं है. हिमालय से लेकर समुद्र तक फैले इस विशाल देश ने इन दशकों में संस्थाओं का निर्माण किया, लोकतंत्र को मजबूत किया, नई तकनीकों को अपनाया और दुनिया के सामने अपनी क्षमताओं का विस्तार किया. दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान रखने वाला हिंदुस्तान आज एक मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ दुनिया की प्रमुख वित्तीय स्थितिओं में शामिल है. इन 79 वर्षों में 28,856 दिन बीत चुके हैं. हर दिन की अपनी कोई न कोई कहानी और उपलब्धि रही है. हर उपलब्धि को एक साथ समेटना संभव नहीं, लेकिन हर साल की कुछ ऐसी बड़ी उपलब्धि को जरूर देखा जा सकता है, जिसने उस दौर के हिंदुस्तान पर अपनी खास छाप छोड़ी. हमने अपने नजरिए से 1947 से 2026 तक हर साल की एक प्रमुख उपलब्धि चुनी है. तो आइए, 1947 से 2026 तक के ऐतिहासिक सफर पर चलते हैं और देखते हैं कि हर साल हिंदुस्तान ने कौन-सा बड़ा पड़ाव हासिल किया. 1947-1959: राष्ट्र निर्माण, लोकतंत्र और संस्थागत नींव 1947: आजादी और रियासतों का एकीकरण: 15 अगस्त को हिंदुस्तान स्वतंत्र हुआ. सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में 500 से अधिक रियासतों का हिंदुस्तान में एकीकरण हुआ. 1948: पहला ओलंपिक स्वर्ण: स्वतंत्र हिंदुस्तान ने लंदन ओलंपिक में ब्रिटेन को हराकर पुरुष हॉकी में स्वर्ण पदक जीता. 1949: संविधान को अपनाया गया: संविधान सभा ने 26 नवंबर को हिंदुस्तान के संविधान को औपचारिक रूप से अपनाया. 1950: गणराज्य की स्थापना: 26 जनवरी को संविधान लागू हुआ और हिंदुस्तान एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बना. 1951: पहली पंचवर्षीय योजना और पहला संविधान संशोधन: देश ने आर्थिक नियोजन की शुरुआत की और पहला संविधान संशोधन किया गया, जिसमें भूमि सुधारों की सुरक्षा के लिए नौवीं अनुसूची जोड़ी गई. हिंदुस्तान की पहले IIT की स्थापना हुई. देश में उच्च तकनीकी शिक्षा के लिए हिंदुस्तानीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर की स्थापना हुई. 1952: पहला आम चुनाव: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर हिंदुस्तान में दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव कराया गया. 1953: नागरिक उड्डयन का राष्ट्रीयकरण: एयर इंडिया इंटरनेशनल और इंडियन एयरलाइंस के जरिए नागरिक विमानन को व्यवस्थित किया गया. 1954: पंचशील समझौता: शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांतों को हिंदुस्तान की विदेश नीति का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया. इस साल हिंदुस्तान ने परमाणु ऊर्जा का संस्थागत विकास की नींव डाली, जिसके लिए परमाणु ऊर्जा विभाग की स्थापना हुई. 1955: हिंदुस्तानीय स्टेट बैंक की स्थापना: इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का राष्ट्रीयकरण कर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बनाया गया, जिससे बैंकिंग का विस्तार हुआ. इसी वर्ष हिंदू कोड कानून बना, जिसने विवाह, उत्तराधिकार और गोद लेने से जुड़े स्त्रीओं के अधिकारों में महत्वपूर्ण कानूनी सुधार किए गए. 1956: राज्यों का पुनर्गठन: भाषाई आधार पर राज्यों की सीमाओं का पुनर्गठन किया गया, जिससे आधुनिक हिंदुस्तानीय संघीय ढांचे की नींव मजबूत हुई. हिंदुस्तान के पहले अखिल हिंदुस्तानीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की स्थापना भी इसी साल हुई, जिसने चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 1957: दशमलव मुद्रा प्रणाली: हिंदुस्तान ने मुद्रा प्रणाली को दशमलव पद्धति में बदला. एशिया के पहले परमाणु अनुसंधान रिएक्टर ‘अप्सरा’ ने ट्रॉम्बे में काम करना शुरू किया. 1958: DRDO की स्थापना: स्वदेशी रक्षा अनुसंधान और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की स्थापना हुई. 1959: पंचायती राज की शुरुआत: राजस्थान के नागौर में पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत की गई. इसी साल टेलीविजन प्रसारण की शुरुआत: दिल्ली में प्रायोगिक टेलीविजन प्रसारण शुरू हुआ, जो आगे चलकर दूरदर्शन के विकास का आधार बना. ये भी पढ़ें:- क्यों नहीं रह पाया संयुक्त हिंदुस्तान? क्या थे वो फैसले जिसके कारण दो हिस्सों में बंट गया हिंदुस्तान 1960-1974: आत्मनिर्भरता, विज्ञान, रक्षा और भू-नेतृत्व 1960: सिंधु जल संधि: विश्व बैंक की मध्यस्थता में हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक जल बंटवारा समझौता हुआ. 1961: गोवा मुक्ति: ऑपरेशन विजय के जरिए पुर्तगाली शासन का अंत हुआ और गोवा, दमन और दीव हिंदुस्तान का हिस्सा बने. 1962: अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत: हिंदुस्तानीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (INCOSPAR) का गठन हुआ, जिसने आगे चलकर ISRO की नींव रखी. 1963: पहला रॉकेट प्रक्षेपण: केरल के थुंबा से हिंदुस्तान ने पहला साउंडिंग रॉकेट लॉन्च किया और अंतरिक्ष अनुसंधान की शुरुआत की. 1964: भाखड़ा बांध: भाखड़ा बांध राष्ट्र को समर्पित किया गया. इसे जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक हिंदुस्तान के “मंदिरों” में से एक बताया. 1965: 1965 का हिंदुस्तान-पाक युद्ध: हिंदुस्तान ने पाकिस्तान के साथ युद्ध में अपनी सैन्य क्षमता और संप्रभुता की रक्षा की. 1966: हरित क्रांति: उच्च उपज वाली फसल किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा दिया गया, जिससे हिंदुस्तान खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा. 1967: नाथू ला और चो ला संघर्ष: सिक्किम क्षेत्र में चीनी सैन्य दबाव का हिंदुस्तानीय सेना ने मुकाबला किया और सीमा की रक्षा की. 1968: INS नीलगिरि: हिंदुस्तान में निर्मित प्रमुख युद्धपोतों के निर्माण की दिशा में INS नीलगिरि एक महत्वपूर्ण पड़ाव बना. 1969: ISRO की स्थापना: हिंदुस्तानीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का औपचारिक गठन हुआ. इसी साल बैंकों का राष्ट्रीयकरण भी हुआ, जिसके तहत 14 बड़े वाणिज्यिक बैंकों को नेशनलाइज किया गया, जिससे ग्रामीण और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ऋण की पहुंच बढ़ी. 1970: ऑपरेशन फ्लड: श्वेत क्रांति के तहत दुनिया के सबसे बड़े डेयरी विकास कार्यक्रमों में से एक शुरू हुआ. 1971: बांग्लादेश मुक्ति: हिंदुस्तान ने 1971 के युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का गठन हुआ. इस साल 26वां संविधान संशोधन भी हुआ, जिससे पूर्व रियासतों के शासकों को मिलने वाले प्रिवी पर्स को समाप्त किया गया. 1972: शिमला समझौता: हिंदुस्तान और पाकिस्तान ने विवादों को द्विपक्षीय बातचीत के जरिए सुलझाने

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