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CAG Report: झारखंड को 327 करोड़ का राजस्व घाटा, 1.60 लाख करोड़ के खर्च का कोई हिसाब नहीं

CAG Report: प्रशासनी योजनाओं और राजस्व व्यवस्था की निगरानी में चूक का खामियाजा राज्य को भुगतना पड़ रहा है. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की मंगलवार को विधानसभा के पटल पर रखी गयी रिपोर्ट में विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किये गये हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में नियमों को दरकिनार कर 18 साल से कम उम्र के युवाओं को गियर वाली बाइक चलाने का लाइसेंस दे दिया गया. मनरेगा के पैसे से गाड़ियों की मरम्मत करायी गयी. पीएम आवास योजना में 6.32 लाख पात्र परिवारों को लक्ष्य नहीं मिला. जबकि, 2.90 लाख अपात्र लोगों के नाम लाभुक सूची में शामिल कर दिये गये. मनरेगा में 50 लाख से अधिक काम अधूरे पड़े हैं. कई विभागों की व्यवस्था में खामियां रिपोर्ट में सीएजी की रिपोर्ट में परिवहन, वाणिज्य कर, ग्रामीण विकास, पेयजल एवं स्वच्छता और उत्पाद विभाग की व्यवस्था में कई स्तर पर खामियां चिह्नित की गयी हैं. वित्तीय प्रबंधन पर भी रिपोर्ट ने सवाल उठाये हैं. बताया गया है कि मार्च 2025 तक 1.60 लाख करोड़ से अधिक की राशि से जुड़े उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित थे. खजाने से पैसा निकला, हिसाब बाकी राज्य की वित्तीय स्थिति पर सीएजी की रिपोर्ट में पूंजीगत व्यय को लेकर चिंता जतायी गयी है. वर्ष 2024-25 में पूंजीगत व्यय पिछले साल की तुलना में 2,160 करोड़ कम हुआ. इसका असर परिसंपत्तियों के निर्माण और विकास योजनाओं की गति पर पड़ा. सबसे बड़ा सवाल उपयोगिता प्रमाण-पत्रों को लेकर है. मार्च 2025 तक 1,60,565.80 करोड़ की राशि से जुड़े उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित थे. यानी, बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद संबंधित विभाग यह प्रमाणित नहीं कर पाये थे कि राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुसार हुआ है. मनरेगा : 50 लाख से ज्यादा काम अधूरे रिपोर्ट ने मनरेगा में काम की रफ्तार और उसे पूरा करने की स्थिति को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. 2019-24 के दौरान प्रस्तावित कार्यों में केवल 27 फीसदी काम पूरे हो सके. करीब 49 फीसदी यानी 50.21 लाख काम अधूरे रह गये. इन कार्यों पर 2,633 करोड़ खर्च हो चुके थे. काम अधूरे रहने के साथ मजदूरी भुगतान में भी देरी हुई. मार्च 2025 तक मजदूरों की 321.84 करोड़ की मजदूरी लंबित थी. रिपोर्ट में मनरेगा की राशि से वाहनों की मरम्मत और आउसोर्सिंग एजेंसियों के कर्मियों को भुगतान करने के मामले भी पकड़े गये. जल जीवन मिशन : 24 फीसदी गांवों में एक भी नल नहीं जल जीवन मिशन में भी लक्ष्य और उपलब्धि के बीच बड़ा अंतर मिला. राज्य के केवल 55 फीसदी ग्रामीण घरों तक नल से जल पहुंच पाया था. राष्ट्रीय औसत करीब 80 फीसदी है. वहीं, 24 फीसदी गांवों में एक भी घर में नल का कनेक्शन नहीं था. यानी योजना के बावजूद बड़ी आबादी अभी भी पाइप से पानी की सुविधा से दूर रही. शराब दुकानदारों पर नहीं लगा 8.35 करोड़ का जुर्माना सीएजी को उत्पाद विभाग में भी राजस्व वसूली में चूक मिली है. निर्धारित न्यूनतम स्टॉक नहीं रखने वाले शराब विक्रेताओं पर 8.35 करोड़ का जुर्माना नहीं लगाया गया. नियमों के उल्लंघन के बावजूद विभाग ने दंडात्मक कार्रवाई नहीं की, जिससे प्रशासन को राजस्व का नुकसान हुआ. पांच जिलों में 305 नाबालिगों को बाइक का लाइसेंस परिवहन विभाग में नियमों की अनदेखी के मामले सामने आये हैं. ऑडिट के दौरान पांच जिलों में 18 वर्ष से कम उम्र के 305 आवेदकों को गियर वाली मोटरसाइकिल चलाने का लाइसेंस जारी किये जाने का पता चला. सारथी सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण जिस उम्र में कानून गियर वाली बाइक चलाने की अनुमति नहीं होती, उस उम्र में विभाग ने लाइसेंस जारी कर दिया. अस्थायी पंजीकरण (टीआर) की वैधता छह महीने के बजाय केवल एक महीने रखे जाने के कारण 327.35 करोड़ के राजस्व पर असर पड़ा. ऑडिट में 6,640 ऐसे वाहन भी मिले, जिनका अस्थायी पंजीकरण होने के बाद स्थायी पंजीकरण नहीं कराया गया. उन वाहनों से कर वसूली नहीं की जा रही है. इसके अलावा 1.24 लाख वाहनों का टैक्स बकाया मिला. इससे 11.24 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व वसूली प्रभावित हुई. 28 फीसदी पात्र लाभुकों को नहीं मिला पीएम आवास प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण की ऑडिट ने लाभुकों के चयन और लक्ष्य निर्धारण दोनों पर सवाल खड़े किये हैं. राज्य ने 22.34 लाख पात्र परिवारों की पहचान की थी. लेकिन केंद्र से 16.02 लाख परिवारों का ही लक्ष्य मिला. यानी 6.32 लाख पात्र परिवारों को योजना का लाभ नहीं मिल सका. यह संख्या कुल पात्र परिवारों की करीब 28 फीसदी है. दूसरी तरफ, लाभुकों के चयन में भी बड़ी चूक हुई. एक ओर पात्र परिवार योजना के दायरे से बाहर रह गये, दूसरी ओर अपात्र लोगों के नाम सूची में पहुंच गये. सूची में 2.90 लाख अपात्र लोगों को शामिल कर दिया गया. बाद में इन नामों को हटाया गया. रिपोर्ट में बताया गया है कि योजना के तहत पूर्ण हो चुके करीब आठ फीसदी आवासों में शौचालय की सुविधा नहीं मिली. यह स्थिति तब है, जब राज्य को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है. इसे भी पढ़ें: विधानसभा में सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान, 14वीं JPSC और दो बैकलॉग परीक्षाएं होंगी रद्द जीएसटी में आंकड़ों का स्पोर्ट्स, 343.58 करोड़ की विसंगति वाणिज्य कर विभाग में जीएसटी और ई-वे बिल के आंकड़ों की जांच में 343.58 करोड़ की कर देयता और आइटीसी से संबंधित विसंगतियां सामने आयी हैं. रिटर्न में घोषित कारोबार और ई-वे बिल के आंकड़ों में कई मामलों में मेल नहीं था. ऑडिट में 23 बड़े करदाताओं का भी मामला सामने आया. इन करदाताओं ने आयकर रिटर्न में 95.43 करोड़ की बिक्री दिखायी, लेकिन जीएसटी के तहत उनका पंजीकरण नहीं था. विभाग इन मामलों की समय पर पहचान कर कार्रवाई नहीं कर सका. इसे भी पढ़ें: मेदिनीनगर एयरपोर्ट से जल्द शुरू होगी उड़ान सेवा, सांसद वीडी राम ने लोकसभा में उठाया मुद्दा The post CAG Report: झारखंड को 327 करोड़ का राजस्व घाटा, 1.60 लाख करोड़ के खर्च का कोई हिसाब नहीं appeared first on Naya Vichar.

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FCRA बिल को JPC के पास भेजने की तैयारी, अल्पसंख्यक और ईसाई संगठनों में बढ़ी बेचैनी

मानसून सत्र के दौरान इस विधेयक को 12 अगस्त को लोकसभा में चर्चा और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किए जाने की संभावना थी. एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार नेतृत्वक दलों और ईसाई संगठनों द्वारा उठाए गए मुद्दों के बाद प्रशासन अब इसे जेपीसी को सौंपने पर विचार कर रही है. यह मूल विधेयक 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था, जो हिंदुस्तान में व्यक्तियों, संघों और कंपनियों द्वारा विदेशी योगदान की प्राप्ति और उपयोग को विनियमित करता है. क्या हैं विधेयक के प्रमुख प्रावधान? विदेशी फंड और संपत्ति की देखरेख: अगर किसी एनजीओ (NGO) या संस्था का विदेशी फंड लेने का लाइसेंस (FCRA रजिस्ट्रेशन) रद्द या खत्म हो जाता है, तो उसका बचा हुआ विदेशी पैसा और उससे खरीदी गई संपत्तियां फिलहाल एक प्रशासनी अधिकारी (नामित प्राधिकरण) के पास जमा करा दी जाएंगी. संपत्ति का फैसला (वापसी या जब्ती): अगर संस्था तय समय के अंदर अपना लाइसेंस दोबारा चालू करा लेती है, तो उसकी संपत्ति और पैसा उसे वापस मिल जाएगा. लेकिन अगर समय पर लाइसेंस रिन्यू नहीं हुआ, तो वह पूरी संपत्ति हमेशा के लिए प्रशासन के पास चली जाएगी. धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और कोर्ट जाने का हक: अगर जब्त की गई संपत्ति में कोई मंदिर, मस्जिद या पूजा-पाठ का स्थान शामिल है, तो उसका धार्मिक स्वरूप बदला नहीं जाएगा. इसके अलावा, अगर संस्था प्रशासनी फैसले से असहमत है, तो वह अदालत में अपील कर सकती है. कम सजा और केंद्र की मंजूरी: नियम तोड़ने पर मिलने वाली अधिकतम जेल की सजा 5 साल से घटाकर 1 साल कर दी गई है. साथ ही, अब राज्य की कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी केंद्र प्रशासन की पूर्व इजाजत के बिना इस कानून के तहत जांच शुरू नहीं कर सकती. गृह मंत्री अमित शाह से मिले प्रतिनिधिमंडल विधेयक के प्रावधानों को लेकर ईसाई और अल्पसंख्यक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी. मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने भी एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल (जिसमें ‘काउंसिल ऑफ चर्चेस इन मिजोरम’ के प्रतिनिधि शामिल थे) के साथ गृह मंत्री से मुलाकात कर क्षेत्रीय और धार्मिक चिंताएं रखीं. प्रतिनिधिमंडल की मांग है कि विधेयक को या तो वापस लिया जाए या फिर जेपीसी के पास भेजा जाए. ये भी पढ़ें: ‘वंदे मातरम्’ के अपमान पर होगी 3 साल तक की जेल, राष्ट्रपति मुर्मू ने विधेयक को दी मंजूरी ये भी पढ़ें: केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने वाला बिल लोकसभा से पास, हंगामे के बीच ध्वनिमत से मिली मंजूरी The post FCRA बिल को JPC के पास भेजने की तैयारी, अल्पसंख्यक और ईसाई संगठनों में बढ़ी बेचैनी appeared first on Naya Vichar.

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स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले दिल्ली में हाई अलर्ट, 19 आतंकवादियों के पोस्टर लगाए गए

मुख्य समारोह स्थल लाल किले की सुरक्षा के लिए मल्टी लेयर बैरिकेडिंग की गई है. यहां 15 अगस्त को वीआईपी और आम जनता की भारी मौजूदगी को देखते हुए दिल्ली पुलिस व अर्धसैनिक बलों के लगभग 15,000 से 20,000 जवानों की तैनाती की जाएगी. अत्याधुनिक तकनीक से निगरानी सुरक्षा में किसी भी चूक को टालने के लिए तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है. सीसीटीवी नेटवर्क: लाल किले और आसपास के इलाकों में चेहरा पहचान प्रणाली (FRS) से लैस लगभग 1,000 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. स्मारक के भीतर बने अत्याधुनिक कंट्रोल रूम से पुलिस और तकनीकी टीमें तीन किलोमीटर से अधिक के दायरे में हर गतिविधि पर नजर रख रही हैं. ‘अभिज्ञान’ ऐप और FRS वैन: भीड़भाड़ वाले इलाकों में अपराधियों की पहचान के लिए पुलिस ‘अभिज्ञान’ ऐप का इस्तेमाल कर रही है, जिसमें एक करोड़ से अधिक अपराधियों का डेटाबेस है. इसके अलावा, रणनीतिक जगहों पर हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों से लैस एफआरएस वैन तैनात हैं, जो भीड़ में चेहरों को स्कैन कर डेटाबेस से मिलान करती हैं. एंटी-ड्रोन सिस्टम और स्नाइपर्स: ऊंची इमारतों और रणनीतिक बिंदुओं पर स्नाइपर तैनात किए गए हैं. साथ ही, किसी भी अनधिकृत हवाई गतिविधि से निपटने के लिए ड्रोन रोधी प्रणालियां सक्रिय कर दी गई हैं. ड्रोन और पतंगबाजी पर पूर्ण प्रतिबंध संवेदनशील प्रतिष्ठानों, दिल्ली मेट्रो, बस टर्मिनलों, रेलवे स्टेशनों और बाजारों में सतर्कता बढ़ा दी गई है. लाल किले के आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा कारणों से पतंग और ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है. खुफिया इनपुट को देखते हुए पुलिस दिल्ली और आसपास के इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए है. ये भी पढ़ें: स्वतंत्रता दिवस समारोह: पहली बार लाल किले की प्राचीर से गाया जाएगा ‘वंदे मातरम’, मंच पर दिखेंगे Gen-Z The post स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले दिल्ली में हाई अलर्ट, 19 आतंकवादियों के पोस्टर लगाए गए appeared first on Naya Vichar.

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सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवादों के पीछे क्या है कारण ? जानिए सिस्टम में कहां है गड़बड़ी

झारखंड प्रशासन के साथ छात्रों की रविवार को कई दौर की बातचीत के बाद भी समाधान नहीं निकला. नतीजा यह हुआ कि छात्र सोमवार को रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से विधानसभा की ओर बढ़ गए. झारखंड में जारी छात्रों का यह आंदोलन प्रशासनी भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. लेकिन यह सिर्फ झारखंड की कहानी नहीं है. देश के दूसरे राज्यों में भी पेपर लीक, नकल, सॉल्वर गैंग, प्रश्न पत्र की गोपनीयता भंग होने और परीक्षा रद्द होने जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं. पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामलों ने भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल खड़े किए हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या समस्या सिर्फ पेपर लीक तक सीमित है? या भर्ती परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया में ही ऐसे लूपहोल हैं, जिनका बार-बार फायदा उठाया जाता है? कितना बड़ा है देश में भर्ती परीक्षाओं का संकट? इस सवाल का जवाब सिर्फ पेपर लीक की संख्या गिनकर नहीं मिलेगा. असली संकट तीन स्तरों पर दिखाई देता है. परीक्षा की विश्वसनीयता, भर्ती प्रक्रिया में लगने वाला समय और अभ्यर्थियों का व्यवस्था पर भरोसा पिछले कुछ वर्षों में प्रशासनी भर्ती परीक्षाओं के साथ-साथ प्रवेश और दूसरी सार्वजनिक परीक्षाओं में भी पेपर लीक, नकल और दूसरी अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं. केंद्र प्रशासन ने 2024 में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act लागू किया. इस कानून में पेपर लीक, उत्तर कुंजी से जुड़ी गड़बड़ी और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल जैसी गतिविधियों के खिलाफ सजा का प्रावधान किया गया है. यह कानून UPSC, SSC, रेलवे भर्ती बोर्ड, NTA और केंद्र प्रशासन की दूसरी अधिसूचित सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होता है. 2026 में प्रशासन ने इस कानून को और सख्त करने के लिए संशोधन विधेयक भी लोकसभा में पेश किया है. इसमें सजा बढ़ाने, जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स, जांच पूरी करने की समयसीमा और मामलों के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसे प्रावधान प्रस्तावित हैं. लेकिन कानून सख्त होने के बावजूद एक सवाल अपनी जगह बना हुआ है. तो क्या सख्त कानून से व्यवस्था भरोसेमंद हो जाएगी? क्योंकि पेपर लीक होने के बाद दोषी को सजा देना जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी यह समझना है कि पेपर लीक कैसे हुआ  ? तो गड़बड़ आखिर है कहां ? अगर पूरी प्रक्रिया को देखें तो समस्या किसी एक जगह नहीं है. पेपर लीक उसका सबसे ज्यादा दिखाई देने वाला हिस्सा है. लेकिन उसके पीछे प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, बाहरी एजेंसियों की जवाबदेही, डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा, रिजल्ट प्रक्रिया, शिकायत निवारण और भर्ती में होने वाली देरी जैसे कई सवाल जुड़े हुए हैं. इसलिए हर बार सिर्फ एक आरोपी को पकड़ लेने या परीक्षा दोबारा करा देने से समस्या खत्म नहीं होती. जरूरत यह देखने की है कि जिस सिस्टम में गड़बड़ी हुई, वह गड़बड़ी होने तक पहुंचा कैसे? और उसे दोबारा होने से रोकने के लिए क्या बदला गया? क्योंकि अगर सिस्टम में वही कमजोरी बनी रहती है, तो एक परीक्षा के बाद दूसरी परीक्षा में भी वही सवाल खड़े हो सकते हैं. झारखंड का सवाल सिर्फ झारखंड का नहीं है झारखंड में सड़क पर उतरे छात्र सिर्फ एक परीक्षा का जवाब नहीं मांग रहे. उनका सवाल उस पूरी व्यवस्था से है जिसमें उन्हें परीक्षा देने से पहले ही यह भरोसा नहीं रहता कि परीक्षा समय पर होगी, निष्पक्ष होगी और उसका परिणाम समय पर आएगा. यही सवाल देश के दूसरे राज्यों के उन अभ्यर्थियों का भी है, जिन्होंने पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने या भर्ती में देरी का सामना किया है. पढ़िए देश दुनिया और बिहार झारखंड की ओरिजिनल समाचार The post प्रशासनी भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवादों के पीछे क्या है कारण ? जानिए सिस्टम में कहां है गड़बड़ी appeared first on Naya Vichar.

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SBI में 9124 पदों पर वैकेंसी, ग्रेजुएट्स आज से कर सकते हैं आवेदन

SBI Clerk Recruitment: बैंक में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी समाचार है. SBI यानी State bank of india ने जूनियर एसोसिएट के पदों पर भर्ती निकाली है. इस भर्ती के तहत कुल 9124 पदों पर कैंडिडेट्स की नियुक्ति की जाएगी. इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया आज यानी 11 अगस्त 2026 से शुरू हो गई है. इच्छुक कैंडिडेट्स SBI की ऑफिशियल वेबसाइट sbi.bank.in पर जाकर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं. आवेदन करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 तय की गई है. SBI Clerk Recruitment: 9124 पदों पर होगी भर्तियां SBI की इस भर्ती में जूनियर एसोसिएट के कुल 9124 पद शामिल हैं. इनमें अलग-अलग कैटेगरी के लिए पद निर्धारित किए गए हैं. भर्ती के लिए कैंडिडेट की उम्र 1 अप्रैल 2026 को कम से कम 20 साल और अधिकतम 28 साल होनी चाहिए. आरक्षित कैटेगरी के कैंडिडेट्स को नियम के अनुसार उम्र में छूट दी जाएगी. 7680 पद रेगुलर वैकेंसी के हैं और बाकि 1444 पद बैकलॉग वैकेंसी के हैं. श्रेणी नियमित पद बैकलॉग पद कुल पद सामान्य (UR) 3,253 — 3,253 EWS 760 — 760 OBC 1,716 480 2,196 SC 1,114 355 1,469 ST 837 964 1,801 कुल 7,680 1,444 9,124 SBI Clerk Eligibility: कौन कर सकता है आवेदन? SBI जूनियर एसोसिएट भर्ती के लिए किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री रखने वाले कैंडिडेट्स आवेदन कर सकते हैं. जो कैंडिडेट ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर या सेमेस्टर में हैं, वे भी निर्धारित शर्तों के अनुसार आवेदन कर सकते हैं. इस भर्ती में कैंडिडेट्स का चयन पहले प्रीलिम्स परीक्षा और फिर मेन्स परीक्षा के आधार पर होगा. इसके बाद संबंधित लोकल लैंग्वेज का टेस्ट भी देना होगा. SBI Clerk Application Fee: कितनी है आवेदन फीस? SBI Clerk भर्ती के लिए सामान्य, EWS और OBC कैटेगरी के कैंडिडेट्स को 750 रुपये आवेदन फीस देनी होगी. वहीं SC, ST और दिव्यांग कैंडिडेट्स के लिए आवेदन फीस नहीं रखी गई है. फीस का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है. ये भी पढ़ें: हाईकोर्ट में 10वीं पास से लेकर ग्रेजुएट के लिए वैकेंसी, सैलरी 60 हजार से ज्यादा How To Apply SBI Clerk Form: ऐसे करें ऑनलाइन अप्लाई सबसे पहले SBI की ऑफिशियल वेबसाइट sbi.bank.in पर जाएं. अब करियर सेक्शन में जाकर Current Openings पर क्लिक करें. यहां Junior Associates भर्ती से जुड़े लिंक को खोलें और Apply Online पर क्लिक करें. अब रजिस्ट्रेशन करके मांगी गई जानकारी भरें. इसके बाद फोटो, सिग्नेचर और जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें. आवेदन फीस जमा करने के बाद फॉर्म को सबमिट कर दें. अंत में भरे हुए फॉर्म का प्रिंटआउट या PDF जरूर सेव कर लें. आप डायरेक्ट नीचे दिए गए लिंक पर भी क्लिक कर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं SBI Junior Clerk Application Apply Online SBI की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस भर्ती की प्रीलिम्स परीक्षा सितंबर 2026 में आयोजित की जा सकती है. परीक्षा की सटीक तारीख और एडमिट कार्ड से जुड़ी जानकारी बाद में जारी की जाएगी. बाकि जानकारी नीचे दिए ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक पर क्लिक कर देख सकते हैंं. SBI Junior Clerk Recruitment 2026 Offcial Notificaion ये भी पढ़ें: Railway Recruitment 2026: इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में अप्रेंटिस के 1,010 पदों पर भर्ती The post SBI में 9124 पदों पर वैकेंसी, ग्रेजुएट्स आज से कर सकते हैं आवेदन appeared first on Naya Vichar.

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पूजा के बाद शरीर के किन अंगों पर लगाना चाहिए चंदन? जानिए इससे जुड़े चमत्कारी लाभ

Sandalwood Benefits: हिंदू धर्म में चंदन को पूजा-पाठ की पवित्र सामग्रियों में शामिल किया जाता है. भगवान विष्णु सहित कई देवी-देवताओं की पूजा में चंदन अर्पित करने की परंपरा है. आमतौर पर लोग पूजा के बाद माथे पर चंदन का तिलक लगाते हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरीर के कुछ अन्य अंगों पर भी चंदन धारण करने का विशेष महत्व बताया गया है. माथे पर चंदन लगाने की मान्यता माथे को विचार और एकाग्रता से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है. ज्योतिषाचार्य डॉ एन के बेरा ने बताया कि धार्मिक मान्यता है कि माथे पर सफेद चंदन लगाने से मन को शांति मिलती है और एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिलती है. पूजा या ध्यान के समय चंदन का तिलक लगाने की परंपरा इसी आध्यात्मिक भावना से जुड़ी मानी जाती है. कंठ पर चंदन लगाने का महत्व कंठ यानी गले के स्थान पर चंदन लगाने की भी धार्मिक परंपरा मिलती है. मान्यता है कि यहां चंदन धारण करने से वाणी में मधुरता आती है और व्यक्ति के विचारों में सकारात्मकता बनी रहती है. इसे वाणी की शुद्धता और संयम से जोड़कर देखा जाता है. हृदय पर चंदन लगाने से क्या होता है? हृदय को प्रेम, भावना और भक्ति का केंद्र माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हृदय स्थान पर चंदन लगाने से मन में प्रेम, भक्ति और ईश्वर के प्रति समर्पण का भाव मजबूत होता है. यह व्यक्ति को सकारात्मक और सात्विक विचारों की ओर प्रेरित करने वाला माना जाता है. नाभि पर चंदन लगाने की मान्यता नाभि को शरीर का महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्र माना जाता है. धार्मिक परंपराओं में नाभि पर सफेद चंदन लगाने को ऊर्जा, बल और संयम से जोड़ा गया है. मान्यता है कि इससे शरीर और मन के बीच संतुलन बनाए रखने की भावना मजबूत होती है. चंदन को लेकर क्या कहते हैं धार्मिक ग्रंथ? पद्म पुराण से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में शरीर पर चंदन धारण करने के आध्यात्मिक महत्व का उल्लेख मिलता है. हालांकि, इन मान्यताओं को धार्मिक आस्था और परंपरा के संदर्भ में समझना चाहिए. चंदन लगाने से जुड़े आध्यात्मिक लाभों का वैज्ञानिक प्रमाण अलग विषय है. चंदन लगाने से पूजा कैसे होती है पूर्ण? चंदन को शीतलता, पवित्रता और सात्विकता का प्रतीक माना जाता है. देवी-देवताओं को चंदन अर्पित करने और फिर तिलक के रूप में धारण करने की परंपरा भक्त के मन में श्रद्धा और एकाग्रता बढ़ाने से जुड़ी है. इसलिए पूजा में चंदन का प्रयोग केवल परंपरा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक भावनाओं से भी जुड़ा माना जाता है. The post पूजा के बाद शरीर के किन अंगों पर लगाना चाहिए चंदन? जानिए इससे जुड़े चमत्कारी लाभ appeared first on Naya Vichar.

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Tata Punch EV vs Kia Syros EV: किसकी मंथली EMI है सबसे कम? शोरूम जाने से पहले जान लें

टाटा पंच ईवी देश की सबसे पॉपुलर इलेक्ट्रिक कारों में से एक है, जबकि किआ साइरोस ईवी एक नया प्रीमियम कॉम्पैक्ट-इलेक्ट्रिक एसयूवी है. किआ की इलेक्ट्रिक एसयूवी टाटा ईवी की तुलना में ऊपर है. पंच ईवी को चार मीटर से कम लंबाई वाली इलेक्ट्रिक एसयूवी सेगमेंट में किफायती और आसानी से उपलब्ध ऑप्शन के रूप में पेश किया गया है. यदि आप इस इलेक्ट्रिक एसयूवी को घर लाने का प्लान बना रहे हैं और दोनों ईवी आपकी लिस्ट में है, तो यहां पंच ईवी और साइरोस ईवी के बीच मंथली EMI तुलना करेंगे और जानेंगे की किसकी सबसे कम है. टाटा पंच EV vs किआ साइरोस EV: EMI कंपैरिजन  दोनों इलेक्ट्रिक कारों के बीच मंथली EMI का कंपैरिजन करने के लिए हमने दोनों एसयूवी के बेस और टॉप वेरिएंट को रखा है. टाटा पंच ईवी का बेस वेरिएंट स्मार्ट 30 और टॉप वेरिएंट एम्पावर्ड प्लस 40 है, जिसकी एक्स शोरूम कीमत क्रमश: 9.69 लाख रुपये और 12.79 लाख रुपये है. वहीं, किआ साइरोस ईवी बेस HTK और टॉप X-Line ER है. HTK की कीमत 13.50 लाख रुपये और X-Line ER का प्राइस 20 लाख रुपये है, दोनों कीमतें एक्स शोरूम बेस्ड हैं.  दोनों गाड़ियों के बेस और टॉप वेरिएंट के लिए लोन राशि को एक्स शोरूम कीमत 100 प्रतिशत माना गया है. EMI की तुलना करने के लिए ब्याज दर 9.5 पर्सेंट रखा है, जबकि EMI पूरा करने का समय 48 महीने यानि 4 साल है. टाटा पंच EV vs किआ साइरोस EV: किसकी EMI कम? मॉडल और वेरिएंट लोन राशि (100% एक्स-शोरूम कीमत) ब्याज दर लोन अवधि महीने की EMI Tata Punch EV Smart 30 ₹9.69 लाख 9.5% 48 महीने ₹24,344 Tata Punch EV Empowered+ S 40 ₹12.79 लाख 9.5% 48 महीने ₹32,132 Kia Syros EV HTK ₹13.50 लाख 9.5% 48 महीने ₹33,916 Kia Syros EV X-Line ER ₹20.00 लाख 9.5% 48 महीने ₹50,246 ये भी पढ़ें: Tata Sierra बेस वेरिएंट खरीदने का प्लान है? जानें कितना पावरफुल है इंजन और क्या मिलेंगे फीचर्स दोनों इलेक्ट्रिक एसयूवी की मंथली EMI कंपैरिजन के अनुसार, टाटा पंच ईवी के बेस और टॉप वेरिएंट के आधार पर EMI 24,344 रुपये से 32,132 रुपये है. वहीं, किआ साइरोस EV की महीने की ईएमआई बेस और टॉप वेरिएंट के आधार पर 33,916 रुपये से 50,246 रुपये है.  आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि महीने की EMI की बातों पर डिपेंड करती है, जिनमें डाउन पेमेंट की राशि, लिया गया लोन अमाउंट, ब्याज दर और टेन्योर शामिल हैं. ये भी पढ़ें: Kia Sonet, Syros या Clavis EV खरीदने का प्लान है? फटाफट देखें अगस्त 2026 में मिलने वाले ये ऑफर्स टाटा पंच EV vs किआ साइरोस EV: किसे खरीदें? यदि आपकी बजट ज्यादा नहीं बन पा रही और किफायती में एक बेहतर इलेक्ट्रिक एसयूवी लेना चाहते हैं, तो टाटा पंच ईवी बेस्ट चॉइस बन सकती है. वहीं, आपको बजट की दिक्कत नहीं है, तो किआ साइरोस को घर ला सकते हैं, क्योंकि इसमें आपको पंच से ज्यादा बेहतर फीचर्स और सुविधाएं मिलेंगी. The post Tata Punch EV vs Kia Syros EV: किसकी मंथली EMI है सबसे कम? शोरूम जाने से पहले जान लें appeared first on Naya Vichar.

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Parliament Session: Tribunals Reforms Bill पर संजय सिंह का विरोध, NCLT में करप्शन और रिजर्वेशन का मुद्दा उठाया

Parliament Live: संसद का मानसून सत्र मंगलवार को भी हंगामे की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है. सत्र 13 अगस्त को समाप्त होना है और अब सिर्फ तीन दिन बाकी हैं. मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के चलते कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई. संसद में जारी हलचल, सत्ता पक्ष और विपक्ष के प्रदर्शन और दिनभर की हर बड़ी समाचार से जुड़े अपडेट के लिए बने रहें हमारे साथ. The post Parliament Session: Tribunals Reforms Bill पर संजय सिंह का विरोध, NCLT में करप्शन और रिजर्वेशन का मुद्दा उठाया appeared first on Naya Vichar.

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पिता के निधन से टूटे लियोनेल मेसी, फुटबॉल से लिया अचानक ब्रेक

Lionel Messi Takes Indefinite Break From Football: अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर लियोनेल मेसी के पिता जॉर्ज मेसी का 68 साल की उम्र में निधन हो गया. लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे जॉर्ज ने रोसारियो के एक क्लिनिक में अंतिम सांस ली. पिता के निधन के बाद मेसी ने फिलहाल फुटबॉल से दूरी बना ली है. रिपोर्ट के मुताबिक, मेसी ने अपने फुटबॉल करियर से अनिश्चित समय के लिए ब्रेक ले लिया है. अब वो मैदान पर कब उतरेंगे, इसकी कोई डेट तय नहीं हैं. मेसी इस समय अपने परिवार के साथ रहना चाहते हैं. पिता हमेशा मेसी के साथ खड़े रहे जॉर्ज मेसी सिर्फ लियोनेल के पिता ही नहीं थे, बल्कि उनके फुटबॉल करियर में भी उनकी बड़ी भूमिका रही. मेसी के करियर की शुरुआत से लेकर उनके दुनिया के महान खिलाड़ियों में शामिल होने तक जॉर्ज लगातार उनके साथ खड़े रहे. बेटे के एजेंट और सलाहकार भी रहे जॉर्ज लियोनेल मेसी के करियर के आगे बढ़ने के बाद जॉर्ज उनके एजेंट और सलाहकार बन गए थे. इससे पहले वह एक स्टील फैक्ट्री में सुपरवाइजर के तौर पर काम करते थे. बेटे के करियर से जुड़े कई बड़े फैसलों में भी उनकी अहम भूमिका रही. 13 साल की उम्र में बार्सिलोना भेजने में मदद की मेसी जब सिर्फ 13 साल के थे, तब जॉर्ज ने उन्हें स्पेन भेजने में मदद की. यहां मेसी ने बार्सिलोना की यूथ अकादमी में दाखिला लिया और आगे चलकर दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल सितारों में शामिल हुए. मेसी को बचपन में ग्रोथ हार्मोन की कमी की समस्या थी. इसके इलाज के लिए उन्हें रोजाना इंजेक्शन लेने पड़ते थे. बार्सिलोना ने मेसी के इलाज का खर्च उठाया, जिससे उन्हें अपनी शारीरिक समस्या से उबरने में मदद मिली. बाद में मेसी करीब 1.70 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचे. जॉर्ज के परिवार में चार शिशु जॉर्ज मेसी की शादी सेलिया कुक्कितिनी से हुई थी. उनके चार शिशु हैं- लियोनेल, रोड्रिगो, मटियास और मारिया सोल. जॉर्ज का पूरा परिवार मेसी के फुटबॉल सफर में उनके साथ रहा है. पिता के निधन के बाद मेसी अपने परिवार के साथ रोसारियो पहुंचे थे. अब उन्होंने फुटबॉल से भी दूरी बना ली है. ये भी पढ़ें: ‘बाबर को इंग्लिश मीडिया से दूर रखो…’, राशिद लतीफ ने PCB को क्यों दी ऐसी सलाह? The post पिता के निधन से टूटे लियोनेल मेसी, फुटबॉल से लिया अचानक ब्रेक appeared first on Naya Vichar.

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‘वंदे मातरम्’ के अपमान पर होगी 3 साल तक की जेल, राष्ट्रपति मुर्मू ने विधेयक को दी मंजूरी

वंदे मातरम् विधेयक 29 जुलाई को राज्यसभा और 30 जुलाई को लोकसभा से पारित हुआ था. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर पहली बार लालकिले की प्राचीर से वंदे मातरम् का गायन किया जाएगा. कानून में क्या हैं मुख्य प्रावधान? सजा और जुर्माना: नए कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर वंदे मातरम् के गायन को रोकता है या इसे गा रही किसी सभा में व्यवधान डालता है, तो उसे अधिकतम तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है. दोबारा अपराध पर कठोर कार्रवाई: यदि कोई व्यक्ति दोबारा या बार-बार यह अपराध करता है, तो उसे कम से कम एक साल की अनिवार्य जेल की सजा भुगतनी होगी. समान दर्जा: अब तक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत केवल राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के अपमान पर ही सजा का प्रावधान था. पुराने कानून में राष्ट्रगीत के लिए ऐसा कोई विशिष्ट सुरक्षात्मक दायरा नहीं था, जिसे अब धारा तीन में संशोधन करके जोड़ दिया गया है. 1950 में डॉ राजेंद्र प्रसाद ने कहा था- वंदे मातरम् को राष्ट्रगान के बराबर सम्मान और दर्जा दिया जाएगा विधेयक के उद्देश्यों में संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद के 24 जनवरी, 1950 को दिए गए ऐतिहासिक वक्तव्य का उल्लेख किया गया है. उन्होंने कहा था कि बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’, जिसने हिंदुस्तान के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, को राष्ट्रगान के बराबर ही सम्मान और दर्जा दिया जाएगा. गृह मंत्रालय ने राष्ट्रगीत के लिए तय किए नए प्रोटोकॉल इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को राष्ट्रगीत के लिए दिशा-निर्देश और प्रोटोकॉल जारी किए थे. पहले गाया जाएगा राष्ट्रगीत: जिन आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों बजाए या गाए जाएंगे, वहां सबसे पहले वंदे मातरम् का गायन होगा. 3 मिनट 10 सेकंड की अवधि: राष्ट्रपति के आगमन, ध्वजारोहण और राज्यपालों के संबोधन जैसे आधिकारिक अवसरों पर वंदे मातरम् के सभी छह अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड होगी. सावधान की मुद्रा अनिवार्य: राष्ट्रगीत के गायन के दौरान सभा में मौजूद सभी व्यक्तियों को ‘सावधान’ की मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य होगा. स्कूलों में अनिवार्य सामूहिक गायन: देश के सभी विद्यालयों में दिन की शुरुआत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ की जाएगी. ये भी पढ़ें: केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने वाला बिल लोकसभा से पास, हंगामे के बीच ध्वनिमत से मिली मंजूरी The post ‘वंदे मातरम्’ के अपमान पर होगी 3 साल तक की जेल, राष्ट्रपति मुर्मू ने विधेयक को दी मंजूरी appeared first on Naya Vichar.

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