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September 8, 2026

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Kal Ka Rashifal 9 September 2026: कल कर्क राशि वालों पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव, वहीं वृश्चिक राशि वालों की मान-सम्मान में वृद्धि होगी

Kal Ka Rashifal 9 September 2026: कल 9 सितंबर 2026, बुधवार का दिन कई राशियों के लिए आर्थिक लाभ और सफलता लेकर आ सकता है. वहीं कुछ राशि वालों को खर्च, विरोधियों और निवेश के मामले में सावधानी बरतनी होगी. जानें ज्योतिषाचार्य नितेश निरंजन से कल का राशिफल. मेष राशि का कल का राशिफल नौकरी और रोजी-रोजगार के मामले में दिन आपके पक्ष में रहेगा. कामकाज के लिए माहौल अच्छा बनेगा. साझेदारों के बीच चल रहा मनमुटाव दूर हो सकता है. धन लाभ के भी अच्छे योग बन रहे हैं. वृषभ राशि का कल का राशिफल कारोबार में आगे बढ़ने के नए मौके मिल सकते हैं. आपने किसी नए काम की योजना बनाई है तो उसमें सफलता मिलने की उम्मीद है. विद्यार्थियों का पढ़ाई में मन लगेगा और वे अपने लक्ष्य पर बेहतर ध्यान दे पाएंगे. मिथुन राशि का कल का राशिफल दिन आपके लिए शुभ संकेत लेकर आएगा. आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और कहीं से अच्छी समाचार मिल सकती है. दोस्तों का सहयोग मिलेगा. आपकी कोई खास इच्छा भी पूरी होने की संभावना बन रही है. कर्क राशि का कल का राशिफल आपको विरोधियों से सावधान रहने की जरूरत है. बेवजह के खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए बजट का ध्यान रखें. लापरवाही की स्थिति में आर्थिक दबाव बढ़ सकता है. संतान से जुड़ी किसी बात को लेकर चिंता हो सकती है. सिंह राशि का कल का राशिफल प्रशासनी या प्रशासनिक कामों में सफलता मिल सकती है. आपकी पद-प्रतिष्ठा बढ़ेगी और लोग आपके काम की सराहना करेंगे. यात्रा के दौरान आर्थिक लाभ के योग हैं. कुल मिलाकर दिन उत्साह और प्रसन्नता से भरा रह सकता है. कन्या राशि का कल का राशिफल आप अपने प्रयास और आत्मविश्वास के दम पर कई जरूरी काम पूरे कर लेंगे. घर में मेहमानों का आना हो सकता है, जिससे दिन व्यस्त रहेगा. परिवार के साथ समय बिताने का अच्छा अवसर भी मिलेगा. तुला राशि का कल का राशिफल संपत्ति से जुड़े मामलों में फैसला आपके पक्ष में आ सकता है. अचानक कोई अच्छी समाचार मिलने से मन प्रसन्न होगा. आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं. पुराने मामलों को सुलझाने के लिए दिन अच्छा रह सकता है. वृश्चिक राशि का कल का राशिफल नए लोगों से मुलाकात और संपर्क बढ़ेंगे, जिनका फायदा आगे चलकर मिल सकता है. आपकी प्रतिष्ठा और मान-सम्मान में वृद्धि होगी. व्यापार और वाणिज्य से जुड़े लोगों को अच्छा लाभ मिलने की संभावना है. धनु राशि का कल का राशिफल आमदनी के नए रास्ते खुल सकते हैं. घर-परिवार में सुख-सुविधाओं से जुड़ी चीजों में बढ़ोतरी हो सकती है. वाहन या भौतिक सुख-साधनों पर खर्च संभव है. दांपत्य जीवन में प्रेम और तालमेल बना रहेगा. मकर राशि का कल का राशिफल अचानक धन लाभ मिलने की संभावना है. जिस काम में काफी समय से सफलता का इंतजार था, उसमें सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं. घर के लिए कोई नई वस्तु खरीदने की योजना भी बन सकती है. कुंभ राशि का कल का राशिफल प्रशासनी नौकरी से जुड़े लोगों के लिए दिन अच्छा रहेगा. पद और प्रतिष्ठा बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं. घर, जमीन या वाहन से जुड़ा सुख प्राप्त होगा. संतान की ओर से भी कोई अच्छी समाचार मिल सकती है. मीन राशि का कल का राशिफल लंबे समय से अटके काम पूरे करने में व्यस्तता रहेगी. नौकरी में पदोन्नति या आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है. हालांकि जोखिम वाले निवेश से बचें. लॉटरी, जुआ और शेयर बाजार में बिना सोचे पैसा लगाने से बचना बेहतर होगा. आज बुधवार 9 सितंबर के उपाय गणेश जी को 21 दूर्वा चढ़ाएं और “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करें. हरी मूंग का दान करें, इससे बुध देव की कृपा पाने की मान्यता है. शिवलिंग पर जल चढ़ाकर “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें. राहुकाल (12:18 से 1:52 बजे) में नया शुभ काम शुरू करने से बचें. The post Kal Ka Rashifal 9 September 2026: कल कर्क राशि वालों पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव, वहीं वृश्चिक राशि वालों की मान-सम्मान में वृद्धि होगी appeared first on Naya Vichar.

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Duleep Trophy Final, Day 3 Live: तिलक वर्मा पर टिकी निगाहें, चायकाल तक साउथ जोन का स्कोर 176/5

दलीप ट्रॉफी फाइनल के पहले दिन में ईस्ट जोन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 708 रन बनाए. अब तीसरे दिन साउथ जोन के बल्लेबाजों पर नजरें रहेगी. लाइव अपडेट्स के लिए नया विचार के साथ जुड़े रहे. The post Duleep Trophy Final, Day 3 Live: तिलक वर्मा पर टिकी निगाहें, चायकाल तक साउथ जोन का स्कोर 176/5 appeared first on Naya Vichar.

बिहार, समस्तीपुर

बेगूसराय जाने के दौरान मुसरीघरारी में रुके जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, कार्यकर्ताओं से की मुलाकात

नया विचार न्यूज़ सरायरंजन। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय झा तथा जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा मंगलवार को बेगूसराय जाने के क्रम में मुसरीघरारी चौक स्थित बाबा ट्रांसपोर्ट परिसर में कुछ देर के लिए रुके। इस दौरान पार्टी के स्थानीय एवं जिला स्तर के कार्यकर्ताओं ने दोनों नेताओं का फूल-माला पहनाकर गर्मजोशी से स्वागत किया। नेताओं के मुसरीघरारी पहुंचने की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में जदयू कार्यकर्ता बाबा ट्रांसपोर्ट परिसर में पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेताओं का स्वागत करते हुए संगठन को मजबूत करने तथा प्रशासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने पर चर्चा की। इस दौरान नेताओं ने भी कार्यकर्ताओं से पार्टी की गतिविधियों और संगठन की स्थिति की जानकारी ली। मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने आगामी कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर भी चर्चा की। जदयू नेताओं ने कार्यकर्ताओं से आपसी समन्वय के साथ पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत करने तथा आम लोगों से लगातार संपर्क बनाए रखने का आह्वान किया। इस अवसर पर समस्तीपुर जदयू जिलाध्यक्ष दुर्गेश राय, अनिल सिंह बाबा, जदयू जिला महासचिव विधाकर झा, नागराज झा, डॉक्टर कृष्ण कुमार झा राम विनोद झा, रंजीत पटेल, फणींद्र कुमार राम सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे। नेताओं के स्वागत को लेकर कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखा गया। कुछ देर कार्यकर्ताओं से मुलाकात और संवाद के बाद संजय झा एवं उमेश सिंह कुशवाहा बेगूसराय के लिए रवाना हो गए। इस दौरान मुसरीघरारी चौक पर पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी से माहौल पूरी तरह नेतृत्वक नजर आया।

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Gita Gyan: जब जीवन में सब खत्म सा लगे, श्रीकृष्ण की ये 3 सीख दिखाएंगी नई राह

Gita Gyan: जीवन में कई बार ऐसा समय आता है, जब इंसान को लगता है कि उसके पास आगे बढ़ने के लिए कोई रास्ता नहीं बचा है. नौकरी का छूटना, कारोबार में नुकसान, किसी अपने का साथ छोड़ देना या किसी असफलता का सामना करना व्यक्ति को अंदर से तोड़ सकता है. ऐसे समय में मन में निराशा और भविष्य को लेकर डर बढ़ने लगता है. भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कई ऐसी सीख दी हैं, जो मुश्किल समय में मन को संभालने और आगे बढ़ने की राह दिखाती हैं. असफलता के डर से रुकें नहीं, कर्म करते रहें योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय। सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥ अध्याय 2, श्लोक 48 भावार्थ: श्रीकृष्ण कहते हैं कि व्यक्ति को अपने कर्म करते रहना चाहिए और उसके परिणाम की चिंता नहीं करनी चाहिए. जीवन में सफलता मिले या असफलता, दोनों परिस्थितियों में मन को संतुलित रखना जरूरी है. सीख: कई बार असफलता के बाद इंसान दोबारा कोशिश करने से डरने लगता है. उसे लगता है कि अगर फिर से हार मिली तो क्या होगा. ऐसे समय में श्रीकृष्ण की यह सीख याद रखनी चाहिए कि हमारे हाथ में केवल प्रयास है, परिणाम नहीं. इसलिए असफलता से डरकर रुकने के बजाय लगातार अपना कर्म करते रहना चाहिए. ये भी पढ़ें: Gita Gyan: मन को शांत और बुद्धि को स्थिर रखना है? अपनाएं गीता के 5 सूत्र जब मन परेशान हो, तो उसे संभालना सीखें असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम्। अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते॥ अध्याय 6, श्लोक 35 भावार्थ: भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि मन बहुत चंचल होता है और उसे वश में करना आसान नहीं है. लेकिन लगातार अभ्यास करने और मोह-माया व बेवजह की इच्छाओं को कम करने से मन को धीरे-धीरे शांत और नियंत्रित किया जा सकता है. सीख: मुश्किल समय में मन बार-बार एक ही बात सोचता रहता है. बीती हुई घटनाओं को याद करना और भविष्य की चिंता करना व्यक्ति को और परेशान कर सकता है. ऐसे में खुद को संभालने के लिए मन को धीरे-धीरे सही दिशा में लगाने की कोशिश करनी चाहिए. लगातार अभ्यास से मन को शांत और स्थिर किया जा सकता है. जब कोई रास्ता न दिखे, तब ईश्वर पर विश्वास रखें सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥ अध्याय 18, श्लोक 66 भावार्थ: इस श्लोक में श्रीकृष्ण अपनी शरण में आने और सभी चिंताओं को छोड़ने का संदेश देते हैं. वह कहते हैं कि उनकी शरण में आने वाले व्यक्ति को डरने या शोक करने की जरूरत नहीं है. सीख: जीवन में जब परिस्थितियां बहुत कठिन हो जाएं और कुछ समझ न आए कि आगे क्या करना है, तब खुद को अकेला और असहाय समझकर हार नहीं माननी चाहिए. ऐसे समय में ईश्वर पर विश्वास और धैर्य बनाए रखना मन को हिम्मत देता है और आगे बढ़ने की ताकत देता है. ये भी पढ़ें: Gita Gyan: गुस्सा और गलतफहमी बढ़ा रहे हैं रिश्ते में दूरी? गीता की ये 3 सीख आएंगी काम गुस्सा और गलतफहमी बढ़ा रहे हैं रिश्ते में दूरी? गीता की ये 3 बातें जानें The post Gita Gyan: जब जीवन में सब खत्म सा लगे, श्रीकृष्ण की ये 3 सीख दिखाएंगी नई राह appeared first on Naya Vichar.

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Duleep Trophy Final, Day 3 Live: पडिक्कल की नजरें शतक पर, लंच तक साउथ जोन का स्कोर 115/2

दलीप ट्रॉफी फाइनल के पहले दिन में ईस्ट जोन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 708 रन बनाए. अब तीसरे दिन साउथ जोन के बल्लेबाजों पर नजरें रहेगी. लाइव अपडेट्स के लिए नया विचार के साथ जुड़े रहे. The post Duleep Trophy Final, Day 3 Live: पडिक्कल की नजरें शतक पर, लंच तक साउथ जोन का स्कोर 115/2 appeared first on Naya Vichar.

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अमेरिका नहीं चाहता भारत-ईरान की दोस्ती! SCO शिखर सम्मेलन से चाबहार से तक समझिए पूरा मामला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की मुलाकात के बाद तेहरान ने हिंदुस्तान के साथ अपने रिश्तों को पुराना, ऐतिहासिक और सभ्यताओं से जुड़ा बताया है. वहीं अमेरिका ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है. ऐसे में सवाल है कि यह मामला इतना अहम क्यों है और चाबहार बंदरगाह हिंदुस्तान के लिए इतना जरूरी क्यों है? मोदी-पेजेशकियान की मुलाकात के बाद क्या हुआ? शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO के बिश्केक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच हिंदुस्तान-ईरान रिश्तों के साथ-साथ पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और वहां शांति कायम करने को लेकर भी चर्चा हुई. इस मुलाकात के कुछ दिन बाद ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने हिंदुस्तान के साथ रिश्तों को बहुत अहम बताया और उन्होंने खास तौर पर व्यापार, आर्थिक सहयोग और चाबहार बंदरगाह का जिक्र किया. यह बयान इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि हिंदुस्तान और ईरान के रिश्तों की बात ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और ईरान पर अमेरिका का दबाव भी जारी है. ये भी पढ़ें: Explained : हिंदुस्तान के लिए खतरे की घंटी है अमेरिका की बॉन्ड यील्ड? आसान भाषा में समझिए IMF की चेतावनी का मतलब चाबहार बंदरगाह हिंदुस्तान के लिए क्यों जरूरी है? हिंदुस्तान के लिए ईरान का चाबहार बंदरगाह सिर्फ एक बंदरगाह नहीं है. यह हिंदुस्तान के लिए दूसरे देशों तक पहुंच बनाने का एक अहम रास्ता है. इसके जरिए हिंदुस्तान पाकिस्तान को पार किए बिना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक अपना व्यापार पहुंचाने की कोशिश कर सकता है. हिंदुस्तान और ईरान ने मई 2024 में चाबहार के शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल को विकसित करने और चलाने के लिए लंबे समय का समझौता भी किया था. हिंदुस्तान ने इसे दोनों देशों के रिश्तों में एक अहम कदम बताया था. शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) का एक मुख्य और गहरा पानी वाला (Deep-water) समुद्री टर्मिनल है.ओमान की खाड़ी के तट पर स्थित यह टर्मिनल हिंदुस्तान की वैश्विक व्यापार और रणनीतिक नीति का एक बेहद अहम हिस्सा है. अमेरिका को हिंदुस्तान-ईरान की दोस्ती से परेशानी क्यों है? दरअसल, अमेरिका ने ईरान पर कई कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं. अमेरिका चाहता है कि दूसरे देश ईरान को इन प्रतिबंधों से बचने में किसी तरह की मदद न करें. हिंदुस्तान और ईरान के नेताओं की मुलाकात के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि उन्हें हिंदुस्तान और ईरान के बीच किसी नए व्यापार समझौते की जानकारी नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद न करे. द ब्रायन किलमीड शो पर एक साक्षात्कार में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी भी देश को ईरान को प्रतिबंधों से बचने में मदद नहीं करनी चाहिए. हिंदुस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है? हिंदुस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने रणनीतिक हितों और दूसरे देशों के साथ रिश्तों के बीच सही संतुलन बनाए रखने की है. ईरान हिंदुस्तान के लिए ऊर्जा, व्यापार और मध्य एशिया तक पहुंच के लिहाज से अहम है, वहीं अमेरिका भी हिंदुस्तान का एक बड़ा रणनीतिक साझेदार है. इसलिए हिंदुस्तान अपनी जरूरत और हितों को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों के साथ रिश्ते बनाए रखने की कोशिश करता है. हिंदुस्तान और ईरान के रिश्तों में आई यह नई चर्चा सिर्फ दोनों नेताओं की मुलाकात तक सीमित नहीं है. इसके पीछे चाबहार बंदरगाह, मध्य एशिया तक पहुंच, पश्चिम एशिया का तनाव, अमेरिकी प्रतिबंध और हिंदुस्तान की अपनी स्वतंत्र विदेश नीति जैसे कई बड़े मुद्दे जुड़े हैं. यही वजह है कि मोदी-पेजेशकियान की मुलाकात के बाद ईरान का बयान और अमेरिका की प्रतिक्रिया दोनों ही चर्चा में हैं. ये भी पढ़ें: New World Map : बदल गया दुनिया का नक्शा! जानें अब कहां दिखेंगे हिंदुस्तान और पाकिस्तान? The post अमेरिका नहीं चाहता हिंदुस्तान-ईरान की दोस्ती! SCO शिखर सम्मेलन से चाबहार से तक समझिए पूरा मामला appeared first on Naya Vichar.

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26 साल का झारखंड: चार बच्चों के साथ मिट्टी के एक कमरे में जिंदगी गुजारने को बेबस है सोनू मरांडी का परिवार

सारठ: झारखंड का गठन आदिवासियों और वंचित तबके के उत्थान, उन्हें सामाजिक समानता का अधिकार दिलाने और गांवों की तस्वीर बदलने के उद्देश्य से हुआ था. राज्य गठन के 26 वर्ष गुजरने के बाद भी अगर किसी परिवार के लिए दो वक्त की रोटी, तन ढकने को कपड़ा और सिर छिपाने के लिए पक्का मकान सपना बना हुआ हो, तो यह प्रशासनी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़ा करता है. सारठ प्रखंड की लगवां पंचायत में ऐसा ही एक परिवार आज भी गरीबी और बेबसी के बीच जिंदगी गुजारने को मजबूर है. बगजोरिया और पीठलापुल गांव के बीच झाड़ियों के झुरमुट में बने मिट्टी के एक कमरे के कच्चे मकान में सोनू मरांडी का छह सदस्यीय परिवार किसी तरह जीवन काट रहा है. चार बच्चों के साथ मिट्टी के कमरे में जिंदगी सोनू मरांडी मजदूरी कर परिवार का पेट पालते हैं. उनकी पत्नी रौशनी हांसदा के अनुसार, परिवार में चार छोटे शिशु हैं. सकल मरांडी की उम्र 10 वर्ष, फुलमुनि मरांडी 8 वर्ष, मीरु मरांडी 5 वर्ष और मंजू मरांडी महज 2 वर्ष की है. परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि बच्चों के पास पहनने के लिए पर्याप्त कपड़े तक नहीं हैं. शिक्षा और पोषण की उम्र में पहुंच चुके इन बच्चों को न तो स्कूल की सुविधा मिल पा रही है और न ही आंगनबाड़ी का लाभ मिल रहा है. ‘मेरे पास भी सिर्फ एक साड़ी है…’ रौशनी हांसदा अपनी जिंदगी की पीड़ा बताते हुए कहती हैं कि उनके पास पहनने के लिए सिर्फ एक साड़ी है. रोज उसे धोकर सुखाया जाता है और सूखने के बाद उसी से तन ढका जाता है. परिवार के पास रात में सोने के लिए एक खटिया तक नहीं है. बोरा बिछाकर पूरा परिवार जमीन पर सोने को मजबूर है. रौशनी बताती हैं कि घर में दो वक्त चूल्हा जलना भी निश्चित नहीं है. कई बार परिवार को भूखे या अधपेट रहकर रात गुजारनी पड़ती है. राशन कार्ड से लेकर आवास तक, हर योजना बनी सपना रौशनी हांसदा का आरोप है कि प्रशासनी योजनाओं का लाभ दिलाने में उनके परिवार के साथ सौतेला व्यवहार हुआ है. परिवार के पास आज तक राशन कार्ड नहीं है. प्रधानमंत्री आवास योजना या अबुआ आवास योजना के तहत भी उन्हें घर नहीं मिला है. रौशनी के मुताबिक उनकी उम्र 27 वर्ष है, इसके बावजूद उन्हें अब तक मंईयां सम्मान योजना का लाभ भी नहीं मिल सका है. ऐसे में प्रशासन की कल्याणकारी योजनाओं के बीच उनका परिवार आज भी बुनियादी जरूरतों के लिए जूझ रहा है. पति मजदूरी करते हैं, लेकिन शराब ने बढ़ाई मुश्किल रौशनी के अनुसार उनके पति मजदूरी करते हैं, लेकिन शराब की लत के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति और खराब हो गई है. उनका कहना है कि पति कई बार मजदूरी करने के बाद भी कमाई का पैसा घर नहीं ला पाते. चार बच्चों की जिम्मेदारी और घर चलाने की मजबूरी के बीच रौशनी अकेले संघर्ष करती नजर आती हैं. प्रशासनी दावों के बीच जमीनी हकीकत पर सवाल झारखंड में आदिवासी और गरीब परिवारों के लिए कई प्रशासनी योजनाएं संचालित की जा रही हैं. राशन, आवास, स्त्रीओं के लिए आर्थिक सहायता और बच्चों की शिक्षा-पोषण से जुड़ी योजनाओं का उद्देश्य ऐसे ही परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ना है. लेकिन सोनू मरांडी का परिवार इन योजनाओं से वंचित नजर आ रहा है. सवाल यह है कि जब प्रशासनी योजनाओं का लाभ सबसे जरूरतमंद परिवार तक ही नहीं पहुंच पा रहा, तो योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन की व्यवस्था कितनी प्रभावी है? पंचायत समिति सदस्य ने कहा – परिवार की पूरी जानकारी है शिमला पंचायत के पंचायत समिति सदस्य रघुनंदन सिंह ने बताया कि उन्हें इस परिवार की पूरी जानकारी है. उन्होंने कहा कि परिवार बेहद गरीबी और बेबसी के बीच जीवन गुजार रहा है और प्रशासनी योजनाओं से भी दूर है. रघुनंदन सिंह के मुताबिक इस परिवार को प्रशासनी सहायता दिलाने के लिए वे अपने स्तर से प्रयास कर रहे हैं. यह भी पढ़ें: RailOne App पर टिकट बुकिंग से PNR तक, मालदा मंडल ने यात्रियों को सिखाया इस्तेमाल अब मदद की दरकार सोनू मरांडी का परिवार आज किसी बड़े सपने की मांग नहीं कर रहा. उसे बस इतना चाहिए कि बच्चों को पहनने के लिए कपड़े मिलें, घर में चूल्हा जले, परिवार को राशन मिले और रहने के लिए एक सुरक्षित मकान हो. झारखंड गठन के 26 वर्ष बाद भी अगर एक आदिवासी परिवार इन बुनियादी जरूरतों से वंचित है, तो यह सिर्फ सोनू मरांडी के परिवार की कहानी नहीं, बल्कि प्रशासनी योजनाओं के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल है. The post 26 साल का झारखंड: चार बच्चों के साथ मिट्टी के एक कमरे में जिंदगी गुजारने को बेबस है सोनू मरांडी का परिवार appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल के एक लाख से अधिक कर्मचारियों के बढ़े वेतन, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने की घोषणा

कोलकाता से अमर शक्ति प्रसाद की रिपोर्ट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि राज्य प्रशासन ने अपने कर्मचारियों और अनुबंध पर काम करनेवाले कर्मियों का वेतन बढ़ाने का फैसला किया है, जिससे लगभग एक लाख लोगों को फायदा होगा. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि कर्मचारियों के 14 समूहों को पारिश्रमिक में बढ़ोतरी का फायदा मिलेगा, जिन्हें 2026-27 के राज्य बजट में शामिल नहीं किया गया था. उन्होंने कहा कि इस काम के लिए राज्य पर हर साल 390 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आयेगा और इससे एक लाख से अधिक लोगों को फायदा होगा. इन कर्मचारियों के वेतन और भत्ते बढ़ाने का ऐलान वन विभाग के डिप्टी रेंजर, फॉरेस्टर और फॉरेस्ट गार्ड का भत्ता 5,000 रुपये बढ़ेगा. वन सहायकों के वेतन में 2,000 रुपये की बढ़ोतरी होगी. प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के पैरा शिक्षकों का वेतन 5,000 रुपये बढ़ाया जायेगा. शिक्षाबंधु और स्पेशल एजुकेटर का भत्ता 5,000 रुपये बढ़ेगा. एमएसके और एसएसके सहायकों के लिए 5,000 रुपये की बढ़ोतरी की जायेगी. मैनेजमेंट स्टाफ के लिए विभिन्न श्रेणियों के वेतन के अनुसार पांच हजार, सात हजार और 10 हजार रुपये तक की होगी बढ़ोतरी. पूर्व विधायकों का मेडिकल भत्ता 6,000 से बढ़ाकर 10,000 रुपये किया जायेगा. वन विभाग से जुड़े भत्तों में बढ़ोतरी एक अक्टूबर से और पैरा टीचरों के बढ़े हुए वेतन का लाभ एक नवंबर से मिलेगा. ‘शिक्षा बंधुओं’ का मानदेय 5,000 रुपये मुख्यमंत्री ने कहा कि एक अक्टूबर से ‘डिप्टी रेंजर’ से लेकर वन रक्षक तक, वन अधिकारियों के वेतन में 5,000 रुपये की बढ़ोतरी की गयी है. उन्होंने कहा कि लगभग 1,500 वन स्वयंसेवियों के मानदेय में भी प्रति माह 2,000 रुपये की बढ़ोतरी की जायेगी. शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि एक अगस्त से पूर्व विधायकों के चिकित्सा भत्ते को भी 6,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया गया है. शुभेंदु अधिकारी ने यह भी कहा कि एक नवंबर से प्राथमिक स्कूल स्तर के 20343 और अपर प्राथमिक स्कूल स्तर के 21849 पैरा-शिक्षक और ”शिक्षा बंधुओं” का मानदेय 5,000 रुपये प्रतिमाह बढ़ाया जायेगा. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें नेताजी सेवा केंद्र के लिए मिलेंगे हर महीने 30 हजार रुपये उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के जिन विधायकों ने अपने चुनाव क्षेत्रों में ”नेताजी सेवा केंद्र” शुरू किये हैं, उन्हें इन्हें संचालित करने के लिए हर महीने 30,000 रुपये मिलेंगे. मुख्यमंत्री ने हाल में विधायकों को निर्देश दिया था कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्रों में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर ये जन-सेवा केंद्र स्थापित करें. Also Read: शुभेंदु अधिकारी ने ठुकराई विश्व हिंदू परिषद की मांग, बोले- दुर्गा पूजा में मांसाहार पर रोक नहीं The post बंगाल के एक लाख से अधिक कर्मचारियों के बढ़े वेतन, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने की घोषणा appeared first on Naya Vichar.

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लाखों फॉलोअर्स वाला ये अफसर क्यों बना सोशल मीडिया स्टार? रेस्टोरेंट्स पर छापे से मचा हड़कंप, जानें तुकाराम मुंडे की पूरी कहानी

महाराष्ट्र में इन दिनों एक प्रशासनी अधिकारी की कार्रवाई सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है. फूड सेफ्टी को लेकर लगातार छापेमारी और कार्रवाई करने वाले महाराष्ट्र के फूड कमिश्नर तुकाराम मुंडे अब सोशल मीडिया स्टार बन चुके हैं. 51 वर्षीय मुंडे के इंस्टाग्राम पर 38 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. उनके नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं. बड़े क्लब की रसोई में मिले कॉकरोच और गंदगी मुंबई के एक मेंबर्स-ओनली क्लब की रसोई की तस्वीरों ने लोगों का ध्यान खींचा. यहां फर्श पर कॉकरोच घूमते दिखे, दीवारों पर मकड़ी के जाले थे और कई जगह सड़ी हुई सब्जियां पड़ी थीं. खाद्य काउंटरों पर भी कीड़े-मकौड़ों के संक्रमण के संकेत मिले. आमतौर पर ऐसी स्थिति किसी छोटे या संघर्ष कर रहे रेस्टोरेंट में देखने की उम्मीद की जाती है, लेकिन यह मामला मुंबई के एक प्रतिष्ठित क्लब का था. मई से हजारों जगहों पर हुई जांच तुकाराम मुंडे ने मई में महाराष्ट्र के फूड कमिश्नर का पद संभाला. इसके बाद महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने राज्यभर में रेस्टोरेंट, कैफे और दूसरे खाद्य कारोबारों की जांच तेज कर दी. विभाग के मुताबिक, हजारों निरीक्षण किए गए हैं और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की गई है. बड़े नाम और क्विक-कॉमर्स कंपनियां भी कार्रवाई के दायरे में मुंडे का कहना है कि खाद्य सुरक्षा कानून किसी कारोबारी के आकार, प्रभाव या प्रतिष्ठा के आधार पर अलग-अलग तरीके से लागू नहीं हो सकते. उनके विभाग ने कुछ क्विक-कॉमर्स वेयरहाउस के लाइसेंस निलंबित किए हैं. वहीं, प्रतिबंधित उत्पादों के अप्रत्यक्ष प्रचार से जुड़े विज्ञापनों को लेकर बॉलीवुड सितारों को भी नोटिस भेजे गए हैं. सोशल मीडिया पर कार्रवाई को मिल रहा समर्थन मुंडे की कार्रवाई का एक बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया पर नजर आ रहा है. निरीक्षण की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने से आम लोगों को यह देखने का मौका मिल रहा है कि खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई हो रही है. जानकारों के मुताबिक, इससे उपभोक्ताओं में खाद्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है. रेस्टोरेंट कारोबारियों में नाराजगी जहां उपभोक्ता इस कार्रवाई की तारीफ कर रहे हैं, वहीं होटल और रेस्टोरेंट उद्योग का एक वर्ग इससे नाराज है. कारोबारियों का आरोप है कि कुछ मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया. इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के कानूनी चेयरमैन निरंजन लक्ष्मण शेट्टी ने कहा कि नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन छोटे या सुधार योग्य उल्लंघनों पर तुरंत लाइसेंस निलंबित करना और सार्वजनिक रूप से नाम उजागर करना कारोबारियों में डर पैदा कर सकता है. कोर्ट पहुंचा मामला, कार्रवाई पर उठे सवाल खाद्य विभाग की कुछ कार्रवाइयों को अदालत में चुनौती भी दी गई. कुछ मामलों में महाराष्ट्र के फूड कमिश्नर तुकाराम मुंडे अपनी सख्त कार्रवाई से सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं. 38 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स के साथ वे एक सोशल मीडिया स्टार बन गए हैं. जानें कैसे उनकी रेस्टोरेंट छापों की कहानी वायरल हो रही है.अदालतों ने लाइसेंस निलंबन के फैसलों को पलटा और कारोबारियों को मुआवजा देने का आदेश दिया. अदालतों ने कुछ कार्रवाइयों को लेकर नियामक के रवैये की आलोचना भी की है. मिठाई की दुकान को देना पड़ा 5 लाख रुपये मुआवजा अगस्त में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंडे के विभाग को एक मिठाई की दुकान को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, दोबारा निरीक्षण में दुकान 98 फीसदी तक नियमों का पालन करती मिली थी, इसके बावजूद उसका लाइसेंस निलंबित रहा. कोर्ट ने नियामक की मंशा को अच्छी बताया, लेकिन कहा कि कार्रवाई जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ गई थी. कोर्ट की टिप्पणी के बाद प्रशासनी कैंटीन की भी जांच अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि क्या निजी कारोबारियों की तरह प्रशासनी प्रतिष्ठानों की भी जांच की जा रही है. इसके अगले ही दिन मुंडे की टीम ने राज्य के हाई कोर्ट परिसर की कैंटीनों का निरीक्षण किया और वहां भी नियमों के उल्लंघन को चिह्नित किया. मुंडे के लिए यह इस बात का उदाहरण है कि खाद्य सुरक्षा के नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं. हम हर लाइसेंस बंद करने नहीं आए हैं : मुंडे मुंडे का कहना है कि विभाग का उद्देश्य कारोबार बंद करना नहीं, बल्कि लोगों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना है. उनका कहना है कि कार्रवाई तभी की जाती है जब खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन सामने आता है. उनका जोर इस बात पर है कि खाना सुरक्षित हो, घटिया या मिलावटी न हो और गलत तरीके से ब्रांडेड न हो. अखबार में खाना पैक करने से लेकर सिंथेटिक रंग तक पर रोक रेस्टोरेंट की जांच मुंडे के अभियान का सिर्फ एक हिस्सा है. विभाग ने खाने को अखबार में लपेटकर बेचने पर रोक, कुछ सिंथेटिक रंगों के इस्तेमाल पर कार्रवाई और प्रतिबंधित एनालॉग पनीर यानी डेयरी के बजाय दूसरे पदार्थों से बने पनीर के विकल्पों पर भी सख्ती की है. अब स्कूलों की कैंटीन पर फूड विभाग की नजर खाद्य सुरक्षा अभियान का फोकस अब स्कूलों तक पहुंच गया है. विभाग ने स्कूल कैंटीन, हॉस्टल किचन और मिड-डे मील सप्लायरों को उचित लाइसेंस लेने का निर्देश दिया है. इसके अलावा स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में ज्यादा फैट, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर भी रोक लगाई गई है. मुंडे के तबादले के बाद क्या होगा असर? तुकाराम मुंडे की कार्रवाई ने पूरे देश में खाद्य सुरक्षा को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है, लेकिन विशेषज्ञों के सामने बड़ा सवाल यह है कि उनके अगले पद पर जाने के बाद यह अभियान कितना कायम रहेगा. जानकारों का मानना है कि किसी एक अधिकारी की सक्रियता से ज्यादा जरूरी ऐसी व्यवस्था बनाना है, जो अधिकारी बदलने के बाद भी लगातार काम करती रहे. सड़क किनारे सैंडविच बेचने वाले ने भी बदला तरीका इस अभियान का असर छोटे कारोबारियों तक भी पहुंच रहा है. मुंबई के उपनगर में सैंडविच बेचने वाले युवराज यादव ने बताया कि वह पहले पुराने अखबारों में सैंडविच पैक करता था. अखबार की स्याही में मौजूद रसायनों के खाने में पहुंचने की आशंका

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मुजफ्फरपुर: बहादुरपुर BDO के बैरिया आवास पर EOU का बड़ा छापा, आय से अधिक संपत्ति मामले में कार्रवाई; पति-पत्नी गायब

मुजफ्फरपुर बीडीओ ईओयू: दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड के बीडीओ डॉ. आनंद कुमार विभूति के ठिकानों पर मंगलवार सुबह आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने एक साथ बड़ी कार्रवाई शुरू की है. आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में ईओयू की विशेष टीम ने सुबह सात बजे मुजफ्फरपुर के अहियापुर स्थित बैरिया आदर्श ग्राम रोड नंबर एक स्थित उनके निजी आवास पर धावा बोला. हालांकि, टीम के पहुंचते ही बीडीओ और उनकी पत्नी घर से नदारद मिले. मुजफ्फरपुर और दरभंगा में एक साथ दबिश बीडीओ विभूति आनंद की फाइल फोटो डॉ. आनंद कुमार विभूति पूर्व में मुजफ्फरपुर के कांटी प्रखंड में भी बीडीओ के पद पर पदस्थापित रह चुके हैं. कांटी में कार्यकाल के दौरान भी वे काफी विवादों में घिरे रहे थे. उन पर कई विकास योजनाओं में वित्तीय गड़बड़ियों और अनियमितताओं के इनपुट मिले थे. इन्हीं पुराने मामलों और इनपुट्स को आधार बनाकर ईओयू की टीम मुजफ्फरपुर से जुड़े संपत्ति के तारों को तलाश रही है. संपत्ति और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज खंगाल रही टीम बैरिया स्थित आवास पर EOU की टीम, फोटो- नया विचार ईओयू के अधिकारी बंद कमरों और पूरे परिसर की सघन तलाशी ले रहे हैं: घर से मिले जमीन-जायदाद के कागजात, बैंक पासबुक और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच हो रही है. स्थानीय पड़ोसियों से भी बीडीओ और उनके परिवार के संबंध में आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है. मुजफ्फरपुर पुलिस की तकनीकी सहायता से फरार बीडीओ और उनकी पत्नी की लोकेशन ट्रेस की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि सर्च ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही कुल काली कमाई का खुलासा किया जाएगा. View on Instagram ये भी पढ़ें: बाउंड्री विवाद: विधायक के भाई को कोर्ट से राहत, ‘नो कोर्सिव’ आदेश के साथ टली गिरफ्तारी; धमकाने वाले दो आरोपितों ने किया सरेंडर The post मुजफ्फरपुर: बहादुरपुर BDO के बैरिया आवास पर EOU का बड़ा छापा, आय से अधिक संपत्ति मामले में कार्रवाई; पति-पत्नी गायब appeared first on Naya Vichar.

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