इतिहास में युद्ध को अक्सर राष्ट्रों की त्रासदी कहा गया है, पर उसका एक और चेहरा भी है- आर्थिक पुनर्वितरण. जब हिंदुस्तान, सीरिया, सऊदी अरब, फ्रांस और इटली जैसे देश या तो युद्ध, आक्रमण या जन-आक्रोश का सामना कर रहे हों, तो सवाल केवल ‘कौन जीत रहा है‘ नहीं होता, सवाल यह भी होता है कि किसकी त्रासदी किसके लाभ में बदल रही है.
फ्रांस में अक्टूबर 2026 में जीवन-यापन की लागत और ईंधन कीमतों के खिलाफ बड़े विरोध हुए, जिनमें पेरिस समेत कई शहरों में हिंसक टकराव और आगजनी की समाचारें आईं.
यूरोपीय आयोग के अनुसार गैस कीमतें 140% बढ़ीं, डीजल की कीमत लगभग दोगुनी हो गई और यूरोप पर अतिरिक्त लागत लगभग 100 अरब यूरो की आई. यह केवल आंकड़ा नहीं, यह एक नेतृत्वक संकट का जन्म-प्रमाण है.
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The post जंग, विरोध और वैश्विक हाहाकार: हिंदुस्तान से फ्रांस तक संकट में कौन कमा रहा है? appeared first on Naya Vichar.

