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September 8, 2026

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आसनसोल में बढ़े साइबर ठगी के मामले, पहले महीने में 8 केस दर्ज होते थे, 5 दिन में हुई 10 FIR

Cyber Crime News: आसनसोल दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट (एडीपीसी) में साइबर क्राइम के मामलों में अचानक तेजी आ गयी है. पहले औसतन हर महीने 8 केस दर्ज होते थे. सितंबर के महीने में 1 से 5 तारीख के बीच 10 मामले दर्ज हो चुके हैं. NCRP पोर्टल पर शिकायत और जीरो ई-एफआईआर दरअसल, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर एक लाख रुपए से अधिक की ठगी की शिकायत आने पर स्थानीय थाने में स्वतः ई-जीरो एफआईआर दर्ज हो जाती है. पहले यह राशि 5 लाख रुपए थी. इससे अधिक की ठगी होने पर प्रथमिकी दर्ज करना अनिवार्य था. 5 लाख रुपए से कम की ठगी मामले में पुलिस जनरल डायरी एंट्री (जीडीई) करके जांच करती थी. जरूरत पड़ने पर प्राथमिकी भी दर्ज होती थी. एक लाख रुपए की साइबर ठगी में प्राथमिकी दर्ज करने की बाध्यता की वजह से थानों में एफआईआर में तेजी आ गयी है. ये भी पढ़ें: 9 बैंक खाते और 72 करोड़ का साइबर फ्रॉड, 7 गिरफ्तार, नेटवर्क के मास्टरमाइंड की तलाश 3 माह में साइबर अपराध से जुड़ी प्राथमिकी के आंकड़े जून 2026 में साइबर अपराध की घटना से जुड़ी कुल 8 प्राथमिकी दर्ज हुई. इसमें 5 प्राथमिकी साइबर क्राइम थाना आसनसोल में केस संख्या 30 से 34 तक, दुर्गापुर थाने में केस संख्या 324, अंडाल थाने में केस संख्या 192 और कांकसा थाने में केस संख्या 209 दर्ज हुई. जुलाई 2026 में साइबर क्राइम की 8 प्राथमिकी दर्ज हुई. इसमें 3 प्राथमिकियां साइबर क्राइम थाना आसनसोल में केस संख्या 35 से 37 तक, कुल्टी थाने में 2 प्रथमिकी केस संख्या 317 और 356, दुर्गापुर थाने में केस संख्या 401, आसनसोल नॉर्थ थाने में केस संख्या 338 और एनटीएस थाने में केस संख्या 109 दर्ज हुई. अगस्त 2026 में साइबर अपराध से जुड़ी कुल 9 प्राथमिकियां दर्ज हुईं. इसमें साइबर क्राइम थाने में 2 (केस संख्या 38 और 39), आसनसोल नॉर्थ थाने में केस संख्या 413, रानीगंज थाने में केस संख्या 363, आसनसोल साउथ थाने में केस संख्या 333, अंडाल थाने में केस संख्या 251, जामुड़िया थाने में केस संख्या 343, कुल्टी थाने में केस संख्या 391 तथा हीरापुर थाने में केस संख्या 218 दर्ज हुई. सितंबर 2026 में सिर्फ 5 दिन में 10 प्राथमिकियं दर्ज हुई हैं. साइबर क्राइम थाना आसनसोल में कुल 4 एफआईआर (केस नंबर 40 से 43), दुर्गापुर थाने में भी 4 प्राथमिकियां (केस संख्या 485 से 487 और केस संख्या 497) और कांकसा थाने में 2 प्राथमिकी केस संख्या 321 और 324 दर्ज दर्ज हुई. ये भी पढ़ें: 600 करोड़ के साइबर स्कैम में उद्योगपति पवन रुईया कोलकाता से गिरफ्तार एक लाख रुपए से अधिक की साइबर ठगी की शिकायत एनसीआरपी या 1930 पर होते ही उसकी ई-प्राथमिकी स्थानीय थानों में दर्ज हो रही है. इससे साइबर ठगी की प्राथमिकी दर्ज होने के मामले बढ़े हैं. पहले 5 लाख रुपए से अधिक की राशि की ठगी होने पर ही अनिवार्य प्राथमिकी दर्ज होती थी. 5 लाख से कम की ठगी की शिकायत पर जनरल इन्क्वायरी की जाती थी. जरूरत पड़ने पर प्राथमिकी की जाती थी. डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में नियमित हो रहे सुधार से ई-जीरो एफआइआर दर्ज हो रहे हैं. पुलिस सभी मामलों में त्वरित कार्रवाई कर रही है. पिछले दिनों 44 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है. -राहुल पांडे, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त, साइबर अपराध, आसनसोल दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट दोस्त की मदद करने में गंवा दिये 1.37 लाख रुपए आसनसोल साउथ थाना क्षेत्र में उपरपाड़ा के आमार बाड़ी इलाके के निवासी मानस दास (62) की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना आसनसोल में केस संख्या 42/26 शनिवार रात को दर्ज हुई. इसमें उन्होंने कहा कि 17 अगस्त से 18 अगस्त 2026 के बीच उन्हें मोबाइल फोन नंबर 9575473672 से कॉल आया. कॉल करने वाले ने कहा कि वह उनका (दास का) दोस्त रिंकू साहू है. उसकी पत्नी ईएम बाइपास हॉस्पिटल के भर्ती हैं. उसका फोन-पे काम नहीं कर रहा है और उन्हें 7415776981 नंबर पर ऑनलाइन पेमेंट कर दें. दास ने दोस्त की मदद के नाम पर 7 किस्तों में 1,36,999 रुपए पेमेंट कर दिये. बाद में पता चला कि उनके साथ साइबर ठगी हुई है. उन्होंने इसकी शिकायत एनसीआरपी पर की और शनिवार को साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई. पुलिस जांच में जुट गयी है. ये भी पढ़ें: कोलकाता में कॉल सेंटर खोल ठगी कर रहे थे झारखंड के साइबर अपराधी The post आसनसोल में बढ़े साइबर ठगी के मामले, पहले महीने में 8 केस दर्ज होते थे, 5 दिन में हुई 10 FIR appeared first on Naya Vichar.

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पटना में गंगा-पुनपुन का उफान, कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित; नौबतपुर के 27 गांवों में पानी, पुनपुन में 15 फीट बांध टूटा

Patna Flood: पटना जिले में गंगा और पुनपुन नदी के बढ़े जलस्तर से अलग-अलग इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. नौबतपुर और पुनपुन क्षेत्र में पुनपुन नदी के उफान से गांव, खेत और सड़कें प्रभावित हैं, जबकि दानापुर और मनेर के दियारा इलाके गंगा के बढ़े पानी से जूझ रहे हैं. पुनपुन में जहां 15 फीट जमींदारी बांध टूटने और कई जगह ओवरफ्लो से पानी बाजार व घरों तक पहुंच गया है, वहीं नौबतपुर में चार पंचायतों के करीब 27 गांव प्रभावित हैं. मनेर के दियारा क्षेत्रों में सड़क पर पानी रहने से आवागमन और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है. पटना जिले में गंगा और पुनपुन समेत कई नदियों के बढ़े जलस्तर से बाढ़ का दबाव बना हुआ है. नौबतपुर : पुनपुन नदी के पानी से 27 गांव प्रभावित नौबतपुर प्रखंड में पुनपुन नदी के बढ़ते जलस्तर से चार पंचायतों के करीब 27 गांव प्रभावित हैं. करंजा, खजुरी-सावरचक, बारा और देवरा पंचायत के गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है. बखोरदारचक, पनहारा, करदाहां, मितनचक, खैरा और सलारपुर में पानी घरों तक पहुंचने की बात सामने आयी है. ग्रामीण संपर्क मार्गों के जलमग्न होने से कई गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हुआ है. देवरा और बारा पंचायत में हजारों एकड़ धान की फसल डूबने से किसानों को भारी नुकसान की आशंका है. पशुपालकों के सामने मवेशियों के चारे और सुरक्षित स्थान की समस्या भी बनी हुई है. पटना जिला कृषक संघर्ष समिति के अध्यक्ष अजय कुमार ने प्रभावित फसलों का वैज्ञानिक सर्वे कराकर किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है. पुनपुन नदी में कटाव से गांव में पहुंचा पानी पुनपुन : 15 फीट जमींदारी बांध टूटा, बाजार तक पहुंचा पानी पुनपुन नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब तीन मीटर ऊपर पहुंचने के बाद तटबंधों और निचले इलाकों पर दबाव बना हुआ है. पैमार पंचायत के बड़हियाकोल के समीप करीब 15 फीट जमींदारी बांध टूट गया. इससे गांवों और खेतों में तेजी से पानी फैल गया और बड़ी संख्या में धान की फसल जलमग्न हो गयी. पुनपुन घाट के पास तीन जगह नदी का पानी ओवरफ्लो कर रहा है. मुख्य बाजार के सामने की गली, लक्ष्मण झूला और पकड़ी के समीप पानी फैलने से परेशानी बढ़ गयी है. पुनपुन बाजार में मस्जिद के पास तक पानी पहुंच गया है, जबकि पुनपुन बाजार और शिवनगर के करीब 700 घरों में पानी घुसने की जानकारी है. पटना में गंगा और पुनपुन दोनों से बढ़ा बाढ़ का दबाव पटना जिले में गंगा का असर मुख्य रूप से मनेर, दानापुर और दियारा क्षेत्रों में, जबकि पुनपुन का प्रभाव नौबतपुर, पुनपुन और आसपास के दक्षिणी इलाकों में देखने को मिल रहा है. दोनों नदी तंत्रों के बढ़े जलस्तर से खेत, गांव, सड़क, स्कूल और आवागमन प्रभावित हुए हैं. पुनपुन के उफान से नौबतपुर में बाढ़, 27 गांवों में घुसा पानी; हजारों एकड़ धान की फसल पर खतरा! The post पटना में गंगा-पुनपुन का उफान, कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित; नौबतपुर के 27 गांवों में पानी, पुनपुन में 15 फीट बांध टूटा appeared first on Naya Vichar.

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Ganesh Chaturthi Special: मां पार्वती ने हल्दी से कैसे बनाए गणेश जी? जानें जन्म की पूरी कहानी

Ganesh Chaturthi Special: गणेश चतुर्थी 2026 का पावन पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा. इसी खास मौके पर नया विचार की धर्म बीट में शुरू हो रही ‘गणेश चतुर्थी स्पेशल’ सीरीज में हम भगवान गणेश से जुड़ी ऐसी कथाएं आपको बताने जा रहे हैं, जिनमें आस्था के साथ-साथ जीवन के गहरे संदेश भी छिपे होंगे. सीरीज की पहली कड़ी में जानिए भगवान गणेश के जन्म से लेकर उनके गजानन बनने और प्रथम पूज्य कहलाने की रोचक कथा. मां पार्वती ने कैसे बनाया गणेश जी को? भगवान गणेश के जन्म की कथा अलग-अलग पुराणों और परंपराओं में कुछ अंतर के साथ मिलती है. शिव पुराण के रुद्र संहिता के कुमार खंड में बताया गया है कि एक बार मां पार्वती स्नान करने जा रही थीं. वह चाहती थीं कि उस दौरान कोई उनके पास न आए. इसलिए उन्होंने एक ऐसे बालक की रचना की, जो उनकी आज्ञा का पूरी तरह पालन करे. मां पार्वती ने अपने शरीर पर लगे उबटन या लेप से एक बालक की आकृति बनाई और उसमें प्राणों का संचार किया. उन्होंने उसे अपना पुत्र माना और द्वार पर पहरा देने की जिम्मेदारी दी. स्कंद पुराण में भी इससे मिलता-जुलता प्रसंग मिलता है. इसमें भी पार्वती द्वारा अपने शरीर के लेप से बालक की रचना किए जाने का उल्लेख है. यही कारण है कि गणेश जी के जन्म को केवल ‘हल्दी से बने गणेश’ कहना पूरी पौराणिक कथा को नहीं दर्शाता, बल्कि हल्दी के उबटन वाली कथा लोक परंपरा में अधिक प्रचलित है. मां की आज्ञा को माना सबसे बड़ा कर्तव्य पार्वती ने बालक से कहा कि जब तक वह स्नान कर रही हैं, तब तक किसी को भी अंदर न आने न दें. बालक ने मां की आज्ञा को अपना कर्तव्य मान लिया और द्वार पर पहरा देने लगा. कुछ समय बाद भगवान शिव वहां पहुंचे. गणेश जी उन्हें पहचानते नहीं थे. उन्होंने शिव को भी अंदर जाने से रोक दिया. शिव ने बताया कि वह पार्वती के पति हैं और उन्हें अंदर जाने से कोई नहीं रोक सकता. लेकिन गणेश जी अपनी मां की आज्ञा से पीछे नहीं हटे. उनके लिए मां का आदेश सबसे महत्वपूर्ण था. शिव के गणों से हुआ युद्ध गणेश जी को हटाने के लिए भगवान शिव ने अपने गणों को भेजा. तब गणेश जी ने अकेले ही उनका सामना किया. शिव पुराण में गणेश जी और शिव के गणों के बीच हुए युद्ध का विस्तार से वर्णन मिलता है. गणेश जी के साहस और पराक्रम से सभी आश्चर्यचकित रह गए. जब वह किसी भी तरह वहां से हटने को तैयार नहीं हुए, तब भगवान शिव स्वयं उनके सामने आए. शिव ने क्यों काटा गणेश जी का सिर? भगवान शिव और गणेश जी के बीच युद्ध हुआ. युद्ध के दौरान शिव ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से गणेश जी का सिर अलग कर दिया. जब मां पार्वती को इस घटना का पता चला, तो वह क्रोधित हुईं. उन्होंने शिव से गणेश जी के सिर को पुनः स्थापित करने की मांग की. पार्वती जी का क्रोध इतना बढ़ गया कि उन्होंने पूरी सृष्टि के विनाश की चेतावनी तक दे दी. परिस्थिति को देखते हुए भगवान शिव ने गणेश जी को फिर से उस रूप में वापस लाने का वचन दिया. हाथी का सिर लगाकर मिला नया जीवन भगवान शिव ने अपने गणों को उत्तर दिशा की ओर जाने और वहां मिलने वाले पहले जीव का सिर लाने का आदेश दिया. गणों को उत्तर दिशा में एक हाथी मिला. वे उसका सिर लेकर लौटे. इसके बाद हाथी का सिर गणेश जी के शरीर पर लगाया गया और मंत्रों के माध्यम से उन्हें नया जीवन दिया गया. शिव पुराण में गणेश जी के पुनर्जीवन और उनके गजानन स्वरूप से जुड़ा यह प्रसंग मिलता है. इस तरह गणेश जी को हाथी के मुख वाला (गजानन) स्वरूप प्राप्त हुआ. इसलिए गणेश जी को गजानन कहा जाता है. ये भी पढ़ें: Ganesh Jee Ki Arti: ऐसे करें गणेश जी की आरती, इस मंत्रों का करें जाप ऐसे बने गणपति और प्रथम पूज्य गणेश जी के जीवित होने के बाद भगवान शिव ने उन्हें गले लगाया. इसके बाद उन्हें अपने गणों का प्रमुख बनाया. इस वजह से गणेश जी का एक नाम ‘गणपति’ पड़ा. इस घटना के बाद गणेश जी को कई महत्वपूर्ण वरदान मिले. पौराणिक मान्यता के अनुसार उन्हें शुभ कार्यों और देवपूजा में सबसे पहले पूजे जाने का अधिकार प्राप्त हुआ. यही वजह है कि आज भी किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से की जाती है. गणेश जी की कथा में छिपा जीवन संदेश गणेश जी की यह कथा केवल जन्म और पुनर्जीवन की कहानी नहीं है. इसमें जीवन के कई महत्वपूर्ण संदेश भी छिपे हैं. गणेश जी का अपनी मां की आज्ञा के लिए अडिग रहना कर्तव्य, निष्ठा और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है. वहीं, उनका सिर कटना और फिर हाथी का सिर लगाया जाना आध्यात्मिक रूप से अहंकार से विवेक की ओर बढ़ने का संकेत है. हाथी को हिंदुस्तानीय परंपरा में बुद्धि, धैर्य, शक्ति और स्मरण शक्ति से जोड़कर देखा गया है. इसलिए गणेश जी का गजानन स्वरूप यह संदेश देता है कि जीवन में केवल शक्ति पर्याप्त नहीं है बल्कि सही निर्णय के लिए बुद्धि, धैर्य और विवेक भी जरूरी हैं. पुराणों में अलग-अलग रूपों में मिलती है कथा गणेश जी के जन्म की कथा सभी पुराणों में बिल्कुल एक जैसी नहीं है. शिव पुराण में पार्वती द्वारा अपने शरीर के लेप से बालक की रचना का प्रसंग प्रमुख है. स्कंद पुराण में भी इसी तरह की कथा मिलती है. वहीं, लोक परंपराओं में हल्दी के उबटन से गणेश जी के जन्म की कहानी अधिक लोकप्रिय है. इसलिए गणेश जी के जन्म से जुड़ी इन कथाओं को अलग-अलग पौराणिक और लोक परंपराओं के रूप में समझना चाहिए. ‘गणेश चतुर्थी स्पेशल’ कथा की अगली कड़ी में कल बताएंगे कि गणेश जी को एक दांत क्यों कहा जाता है, और इससे जुड़ी दिलचस्प और पौराणिक कथा The post Ganesh Chaturthi Special: मां पार्वती ने हल्दी से कैसे बनाए गणेश जी? जानें जन्म की पूरी कहानी appeared first on Naya Vichar.

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आयुष्मान भारत योजना : बंगाल में 31541 लोगों ने कराया इलाज, 3.23 करोड़ लोगों को मिला PM-JAY कार्ड

Ayushman Bharat Yojana: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि राज्य में हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रशासन बनने के बाद 3.23 करोड़ लोगों को आयुष्मान कार्ड मिले हैं. इसकी मदद से 31,541 लोगों ने अपना इलाज करवाया है. प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (Ayushman Bharat PM-JAY) की उपलब्धियां गिनाते हुए बंगाल के चीफ मिनिस्टर शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में इसकी शुरुआत हुई थी. लोगों को मिल रही कैशलेस इलाज की सुविधा : शुभेंदु उन्होंने यह भी बताया कि इस योजना के तहत अब तक राज्य में 31,541 लोग अस्पताल में भर्ती हुए हैं और अपना इलाज करवाया है. मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया बयान में कहा गया है कि हजारों मरीजों को सूचीबद्ध अस्पतालों में समय पर, बिना नकद भुगतान के इलाज मिल चुका है. उनके परिवारों को आर्थिक संकट में नहीं डाला गया है. बंगाल के बाहर के 716 लोगों को मिला लाभ चीफ मिनिस्टर ने यह भी बताया कि अस्पताल में भर्ती 31,541 मरीजों में से 716 मरीज राज्य के बाहर के थे. मुख्यमंत्री ने दावा किया कि देशव्यापी परिवहन सुविधा का लाभ उठाते हुए पश्चिम बंगाल के मरीजों को हिंदुस्तान भर के प्रमुख संस्थानों में निर्बाध उपचार मिला है. मुख्यमंत्री के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने से लेकर देशभर में स्वास्थ्य सेवा सुविधा उपलब्ध कराने तक, इस योजना ने पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य सेवा में सकारात्मक बदलाव दिखने लगा है. ये भी पढ़ें: आयुष्मान हिंदुस्तान-PMJAY योजना : आज बंगाल में मनेगा ‘आयुष्मान दिवस’, 6 करोड़ लोगों को मिलेगा 5 लाख तक का मुफ्त इलाज ममता बनर्जी ने रोक रखा था योजना को पश्चिम बंगाल में जब ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस प्रशासन थी, तो उसने केंद्र की नरेंद्र मोदी प्रशासन की ओर से शुरू की गयी ‘आयुष्मान हिंदुस्तान योजना’ को राज्य में लागू नहीं होने दिया था. तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना था कि राज्य की स्वास्थ्य बीमा योजना ‘स्वास्थ्य साथी’ लोगों को 5 लाख तक के इलाज की सुविधा देता है. इसलिए पश्चिम बंगाल में केंद्रीय योजना आयुष्मान हिंदुस्तान की कोई आवश्यकता नहीं है. ये भी पढ़ें: बंगाल के 1867 अस्पतालों में ‘आयुष्मान हिंदुस्तान’ और ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना’ के तहत होगा कैशलेस इलाज शुभेंदु अधिकारी ने लागू की आयुष्मान हिंदुस्तान योजना पश्चिम बंगाल के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने सबसे पहले ‘आयुष्मान हिंदुस्तान पीएम-जय योजना’ को राज्य में लागू किया. मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जो लोग ‘आयुष्मान हिंदुस्तान पीएम-जय योजना’ के लिए पात्र नहीं होंगे, उन्हें मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कवर किया जायेगा. कवरेज राशि प्रति वर्ष 5 लाख रुपए होगी. ये भी पढ़ें: बंगाल बजट: आयुष्मान हिंदुस्तान योजना को मिले 3100 करोड़, बंगाल के इतने लोगों का अब होगा मुफ्त इलाज The post आयुष्मान हिंदुस्तान योजना : बंगाल में 31541 लोगों ने कराया इलाज, 3.23 करोड़ लोगों को मिला PM-JAY कार्ड appeared first on Naya Vichar.

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