पीयूष गोयल ने सवाल उठाया कि वातावरण में इतना कार्बन किसने छोड़ा और पर्यावरण को हुए नुकसान की जिम्मेदारी किसकी है. 23 अक्टूबर 2026 को जर्मनी की राजधानी बर्लिन में आयोजित बर्लिन ग्लोबल डायलॉग (Berlin Global Dialogue) के दौरान एक राउंडटेबल चर्चा में उन्होंने ये बात कही.
गोयल ने कहा कि यूरोप की आबादी दुनिया की करीब 3-4% है, जबकि हिंदुस्तान दुनिया की 17% आबादी की जरूरतें पूरी कर रहा है. उनके मुताबिक, विकसित देशों ने आर्थिक विकास के दौरान लंबे समय तक कोयले जैसे जीवाश्म ईंधनों का इस्तेमाल किया और कम ऊर्जा लागत का लाभ उठाया. ऐसे में जलवायु संकट की जिम्मेदारी तय करते समय उनके ऐतिहासिक उत्सर्जन को भी ध्यान में रखना चाहिए.
वीडियो में देखें पीयूष गोयल ने क्या कहा-
ऊर्जा और भोजन की जरूरतों के साथ स्वच्छ ऊर्जा पर जोर
गोयल ने कहा कि हिंदुस्तान को 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा और भोजन संबंधी जरूरतें पूरी करने के साथ देश की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी है. इसके बावजूद हिंदुस्तान दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते स्वच्छ ऊर्जा कार्यक्रमों में से एक पर काम कर रहा है.
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उन्होंने हिंदुस्तान के प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन का हवाला देते हुए कहा कि यह यूरोप के मुकाबले काफी कम है. गोयल ने तर्क दिया कि विकासशील देशों पर जलवायु परिवर्तन से निपटने का बोझ डालते समय उनकी आबादी, विकास की जरूरतों और ऐतिहासिक उत्सर्जन के अंतर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
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