Minor Income Tax Rules : महज 15 साल की उम्र में आईपीएल (IPL) कॉन्ट्रैक्ट, लीग मैच और बड़े-बड़े ब्रांड एंडोर्समेंट के जरिए करीब 7 करोड़ रुपये कमाकर क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) ने सबको हैरान कर दिया है. इतनी कम उम्र में इतनी मोटी कमाई देखने के बाद हर किसी के मन में एक ही सवाल उठ रहा है.
“क्या इतने छोटे शिशु को भी इनकम टैक्स देना पड़ता है? या नाबालिग होने के नाते उन्हें टैक्स से छूट मिलती है?” हिंदुस्तानीय आयकर कानून (Income Tax Act) के मुताबिक, नाबालिगों की कमाई पर टैक्स लगाने के नियम आम वयस्कों (Adults) से थोड़े अलग हैं. आइए समझते हैं कि वैभव सूर्यवंशी की कमाई पर टैक्स का क्या गणित लागू होगा.
नियम 1
जब शिशु की कमाई माता-पिता की इनकम में जोड़ी जाती है (Clubbing of Income)
आमतौर पर शिशु खुद कोई बिजनेस या नौकरी नहीं करते हैं, लेकिन उनके नाम पर बैंक में एफडी (FD) या सेविंग अकाउंट होता है जिससे ब्याज (Interest) की कमाई होती है. इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 64(1ए) के तहत, किसी नाबालिग शिशु की ऐसी पैसिव इनकम (जैसे ब्याज या निवेश से मुनाफा) को उसके माता या पिता की आय में जोड़ दिया जाता है.
माता और पिता में से जिसकी सालाना टैक्सेबल इनकम ज्यादा होगी, शिशु की कमाई भी उसी की इनकम में जोड़कर उस पर टैक्स वसूला जाएगा. आयकर अधिनियम की धारा 10(32) के तहत, माता-पिता को प्रत्येक नाबालिग शिशु की ऐसी कमाई पर सालाना केवल 1,500 रुपये की छूट मिलती है. इससे ज्यादा की रकम पर माता-पिता को अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होता है.
इन 3 मामलों में माता-पिता की इनकम में नहीं जुड़ती शिशु की कमाई
इनकम टैक्स कानून में कुछ खास परिस्थितियां हैं जहां शिशु की कमाई को माता-पिता की आय के साथ नहीं ‘क्लब’ किया जाता. अगर माता-पिता का तलाक हो चुका है, तो शिशु की इनकम उस पैरेंट की आय में जुड़ेगी जो शिशु की देखरेख (Custody) कर रहा है.
यदि किसी शिशु के माता-पिता दोनों इस दुनिया में नहीं हैं, तो शिशु की कमाई को उसके कानूनी अभिभावक (Guardian) की इनकम में नहीं जोड़ा जाता. ऐसे में शिशु का अलग से आईटीआर (ITR) फाइल होता है. धारा 80U के तहत अगर कोई नाबालिग बच्चा 40% से अधिक शारीरिक या मानसिक रूप से विकलांग (जैसे अंधापन, चलने-फिरने में दिक्कत आदि) है, तो उसकी कमाई माता-पिता की इनकम में नहीं जोड़ी जाती.
नियम 2
वैभव सूर्यवंशी से होने वाली कमाई पर टैक्स का नियम
अब बात करते हैं वैभव सूर्यवंशी की, जिन्होंने अपनी क्रिकेटिंग स्किल और पर्सनल टैलेंट के दम पर करोड़ों रुपये कमाए हैं. यदि किसी नाबालिग ने अपनी खुद की प्रतिभा, विशेष ज्ञान, एक्टिंग, क्रिकेट, शतरंज, गायन, ब्रांड एंडोर्समेंट या सोशल मीडिया कॉन्टेंट क्रिएशन के जरिए पैसा कमाया है, तो वह कमाई माता-पिता की इनकम में नहीं जोड़ी जाएगी. इस कमाई पर खुद उस नाबालिग शिशु को ही टैक्स चुकाना होगा. यही नियम रियलिटी शो के बाल कलाकारों, बाल गायकों, यूट्यूबर्स और मास्टरशेफ जैसे शोज में हिस्सा लेने वाले बच्चों पर भी लागू होता है.
नाबालिग कैसे भरते हैं टैक्स ?
टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, वैभव सूर्यवंशी जैसे प्रतिभावान नाबालिगों की टैक्स गणना और फॉर्म भरने का तरीका इस प्रकार होता है. नाबालिगों की इस टैलेंटेड इनकम पर भी देश के सामान्य टैक्स स्लैब रेट्स (Tax Slab Rates) के हिसाब से ही टैक्स लगता है.
उन्हें कोई अलग से विशेष छूट नहीं मिलती. स्पोर्ट्स, स्पॉन्सरशिप और एंडोर्समेंट से होने वाली इस कमाई को “बिजनेस या पेशे से होने वाले फायदे और कमाई” (Profits and Gains of Business or Profession – PGBP) के तहत रिपोर्ट किया जाता है.
इस तरह की प्रोफेशनल या बिजनेस इनकम के लिए आमतौर पर ITR-3 फॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है. चूंकि बच्चा नाबालिग है, इसलिए वह खुद कानूनी रूप से फॉर्म साइन नहीं कर सकता. यह रिटर्न नाबालिग के नाम पर उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक के जरिए ही फाइल किया जाता है. इसमें माता-पिता ‘प्रतिनिधि करदाता’ (Representative Assessee) के रूप में काम करते हैं.
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