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Author name: Vinod Jha

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SIR पर सम्राट चौधरी ने राहुल गांधी-तेजस्वी को घेरा, बोले- एक आदमी भी ऐसा नहीं खड़ा कर पाए जिसका नाम वोटर लिस्ट में न हो

Samrat Choudhary On SIR: बिहार में SIR को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर विपक्ष के सवालों का जवाब दिया. सम्राट ने कहा कि बिहार में 2025 में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR हुआ. इससे पहले 2003 में भी यह प्रक्रिया पूरी की गई थी. उस समय करीब 4.96 करोड़ मतदाता थे. BLO ने घर-घर जाकर किया सत्यापन सम्राट चौधरी ने कहा कि SIR के दौरान BLO ने घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क किया. इसके बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी हुई. लोगों को दावे और आपत्ति दर्ज कराने का मौका भी दिया गया. उन्होंने कहा कि 2025 की प्रक्रिया में करीब 7.42 करोड़ मतदाता आइडेंटिफाई किए गए. सम्राट के अनुसार, जांच के दौरान 22 लाख मृतक मतदाता मिले. करीब 36 लाख लोग एक जगह से दूसरी जगह जा चुके थे. वहीं, करीब 7 लाख लोगों के नाम दो जगह मतदाता सूची में पाए गए. ‘विपक्ष एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं खड़ा कर पाया’ SIR पर विपक्ष के सवालों को लेकर सम्राट चौधरी ने कहा कि विपक्ष एक भी ऐसा व्यक्ति सामने नहीं ला पाया, जो बिहार का रहने वाला हो और उसका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया गया हो. उन्होंने राहुल गांधी की ओर से उठाए गए कई मामलों का भी जिक्र किया. इनमें राजू देवी, नवादा के सुबोध कुमार, औरंगाबाद के अमन, लालमुनि देवी, पूनम कुमारी और बछिया देवी के नाम शामिल हैं. सम्राट ने कहा कि इन मामलों में प्रशासन की ओर से संबंधित लोगों को बुलाया गया और पूरी जानकारी दी गई. राहुल-तेजस्वी पर ‘टूरिज्म’ वाला तंज मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय जनता दल के युवराज तेजस्वी और कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी टूरिज्म करने के लिए बिहार में घूमते रहते हैं.” सम्राट ने कहा कि विपक्ष के नेता चाहे देश के हों या बिहार के, वे तथ्यों के साथ सामने नहीं आते. सीएम बोले- कांग्रेस का मतलब एक परिवार से है सम्राट चौधरी ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मतलब पंडित नेहरू से है. नेहरू देश के प्रधानमंत्री बने. इसके बाद इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं. उन्होंने सोनिया गांधी को लेकर भी टिप्पणी की. सम्राट ने कहा कि ये लोग सत्ता का लाभ लेने वाले लोग हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि देश के आर्थिक संकट और गरीबी के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है. मुख्यमंत्री ने कहा, अगर इस देश में कोई एक परिवार दोषी है तो वह राहुल गांधी का परिवार है. इनको बोलने का कोई अधिकार नहीं है. गरीब परिवार का व्यक्ति PM बना तो इनके पेट में पीड़ा- सम्राट चौधरी सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि एक गरीब परिवार से आने वाला व्यक्ति प्रधानमंत्री बना तो कुछ लोगों को परेशानी होने लगी. उन्होंने कहा कि बिहार और देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तेजी से विकास कर रहा है. सम्राट ने दावा किया कि आजादी के बाद बिहार में 50 लाख लोगों को भी पक्का मकान नहीं मिला था. अब उन्हें पक्का मकान मिल चुका है. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें तीनों CEC की बैठक का भी किया जिक्र SIR को लेकर चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों के बीच सम्राट चौधरी ने तीनों मुख्य चुनाव आयुक्तों की बैठक का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि तीनों CEC ने बैठक कर स्पष्ट किया कि आयोग के फैसले संयुक्त रूप से लिए जाते हैं. सम्राट ने कहा कि अब सबकुछ स्पष्ट हो गया है. उन्होंने कहा कि अगर किसी को चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाना है तो उसके पास तथ्य और दस्तावेज होने चाहिए. सीएम ने कहा- चुनाव में गड़बड़ी हुई या नहीं, कोर्ट तय करेगा तेजस्वी यादव की ओर से चुनाव रद्द करने की मांग के सवाल पर सम्राट ने कहा कि चुनाव आयोग ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने कहा कि किसी पार्टी ने मुद्दा उठाया तो आयोग ने सभी से संवाद किया. सम्राट ने कहा कि अगर चुनाव में गड़बड़ी का कोई साक्ष्य है तो उसे सामने लाना चाहिए. उन्होंने कहा कि न्यायालय भी मौजूद है और अब चुनाव में गड़बड़ी हुई या नहीं, यह तय करने का अधिकार न्यायालय के पास है. छेड़छाड़ के सवाल पर सीएम बोले- अभी SIR पर बात कर रहा हूं प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब मुख्यमंत्री से लड़कियों से छेड़छाड़ से जुड़े सवाल पर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी तो SIR पर बात कर रहा हूं. INDIA गठबंधन की बैठक पर भी कसा तंज 30 सितंबर को दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक के सवाल पर भी सम्राट चौधरी ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कितनी बैठक हो गई, क्या ही हुआ. अब बचा कौन है इस गठबंधन में? Also Read: बिहार के सभी प्रशासनी स्कूलों में अगले साल से अनिवार्य होगा यह विषय, 2-3 स्कूलों पर होगा एक इंस्ट्रक्टर The post SIR पर सम्राट चौधरी ने राहुल गांधी-तेजस्वी को घेरा, बोले- एक आदमी भी ऐसा नहीं खड़ा कर पाए जिसका नाम वोटर लिस्ट में न हो appeared first on Naya Vichar.

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308 पहियों वाला ‘महाबली ट्रक’: 200 टन की मशीन लेकर ओडिशा से यूपी का सफर, जानिए कैसे काम करता है यह चलता-फिरता इंजीनियरिंग का अजूबा

308 Wheel Mega Truck: 308 पहियों वाला एक विशाल मल्टी-एक्सल ट्रेलर इन दिनों उत्तर प्रदेश में लोगों के कौतूहल का केंद्र बना हुआ है. करीब 200 टन वजनी भारी मशीन को लेकर चल रहा यह मेगा ट्रेलर ओडिशा के पारादीप पोर्ट से लखीमपुर खीरी के कुंभी की ओर बढ़ रहा है. इसकी रफ्तार इतनी कम है कि यह दिनभर में करीब 10-20 किलोमीटर ही चल पा रहा है. रास्ते में पुल, फुटओवर ब्रिज, बिजली के तार और सड़क की चौड़ाई जैसी कई चुनौतियां सामने आ रही हैं. 308 पहिए क्यों लगाए गए हैं? यह कोई सामान्य ट्रक नहीं है. यह एक मल्टी-एक्सल हेवी-हॉल ट्रेलर है, जिसे बहुत भारी और बड़े आकार के औद्योगिक उपकरणों को सड़क मार्ग से ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इस पर 308 पहिए लगाए गए हैं ताकि भारी मशीन का वजन बड़ी संख्या में पहियों और एक्सल पर बांटा जा सके. इससे सड़क पर पड़ने वाला भार नियंत्रित करने में मदद मिलती है. ट्रेलर की लंबाई करीब 100 फीट बताई गई है. इसके ऊपर रखी मशीन करीब 8 मीटर ऊंची और 7 मीटर चौड़ी बताई जा रही है. ये भी पढ़ें: Tata Aeris की अनोखी सेफ्टी टेस्टिंग, 20 टन मलबे के नीचे दबाकर परखी कार की मजबूती, देखें कीमत-खासियत डबल इंजन और क्रेन भी काफिले में इतने बड़े और भारी कार्गो को केवल एक सामान्य ट्रक की तरह नहीं खींचा जा रहा है. इस काफिले में दो क्रेन, अतिरिक्त ट्रेलर और बड़ी तकनीकी टीम भी साथ चल रही है. चालक के मुताबिक अब तक करीब 2 करोड़ रुपये के डीजल खर्च होने की बात सामने आई है. हालांकि, डीजल खर्च का यह आंकड़ा चालक के हवाले से है और इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है. बेल्जियम से शुरू हुई मशीन की यात्रा इस पूरी यात्रा की कहानी की बेल्जियम से शुरू हुई. भारी औद्योगिक मशीन को पहले समुद्री रास्ते से हिंदुस्तान लाया गया. इसे ओडिशा के पारादीप पोर्ट पर उतारा गया. इसके बाद मशीन को विशेष मल्टी-एक्सल ट्रेलर पर लादकर सड़क मार्ग से झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश लाया गया. अब इसे लखीमपुर खीरी के कुंभी स्थित प्लांट तक पहुंचाया जा रहा है. रास्ते में पुल सबसे बड़ी चुनौती इस महाबली ट्रक का सफर आसान नहीं है. इसके साथ 20 से 25 लोगों की एक तकनीकी टीम (इंजीनियर, मैकेनिक, सुपरवाइजर) 24 घंटे चलती है. हाल ही में यह ट्रक जब उत्तर प्रदेश के वाराणसी और चंदौली इलाके से गुजरा, तो वाराणसी रिंग रोड पर एक फुट-ओवर ब्रिज इसके रास्ते का रोड़ा बन गया. मशीन की ऊंचाई इतनी ज्यादा थी कि वह पुल के नीचे से नहीं निकल सकती थी. इसका समाधान भी इंजीनियरिंग के जरिए निकाला गया. दो विशालकाय हाइड्रोलिक क्रेनों की मदद से ब्रिज के एक हिस्से को हवा में उठाया गया और फिर इस 308 पहियों वाले ट्रेलर को धीरे-धीरे उसके नीचे से निकाला गया. रास्ते में पड़ने वाले कई टोल प्लाजा और बिजली के तारों को भी अस्थाई रूप से हटाना पड़ता है. अभी कहां फंसा है 308 पहियों वाला ट्रक? 27 सितंबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रेलर चंदौली के रेवसा क्षेत्र में रिंग रोड के पास रुका हुआ है. यहां रिंग रोड का पुल इसके लिए बाधा बना. वैकल्पिक रास्ता तैयार करने की कोशिश की गई, लेकिन बारिश के कारण काम प्रभावित हुआ है. आखिर मशीन है क्या? अलग-अलग रिपोर्ट्स में इस भारी उपकरण को शुगर मिल वेसल, वैक्यूम बॉयलर और औद्योगिक वेसल जैसे नामों से बताया गया है. इतनी बड़ी औद्योगिक मशीन सामान्य ट्रक से अलग होती है. ऐसे वेसल का इस्तेमाल औद्योगिक प्लांट में किसी विशेष प्रक्रिया के दौरान तापमान, दबाव या प्रोसेसिंग से जुड़े कामों के लिए किया जा सकता है. हालांकि, इस विशेष मशीन का मॉडल, निर्माता और प्लांट के अंदर इसका सटीक तकनीकी इस्तेमाल सार्वजनिक आधिकारिक दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है. कुंभी में बन रहा है बड़ा PLA प्लांट इस पूरे मेगा ट्रांसपोर्टेशन का बड़ा मकसद बायोप्लास्टिक निर्माण परियोजना है. Balrampur Chini Mills Limited (BCML) कुंभी, उत्तर प्रदेश में एक इंटीग्रेटेड Polylactic Acid (PLA) प्लांट स्थापित कर रही है. कंपनी के मुताबिक, यह हिंदुस्तान का पहला इंडस्ट्री-स्केल बायो-पॉलिमर प्लांट होगा. कंपनी के के मुताबिक, परियोजना की अनुमानित क्षमता को 80,000 टन प्रति वर्ष किया गया है. परियोजना का संशोधित अनुमानित निवेश ₹3,080 करोड़ है. गन्ने से बनेगा PLA, प्लास्टिक का विकल्प बनने की तैयारी PLA यानी Polylactic Acid एक बायो-बेस्ड पॉलिमर है. BCML के मुताबिक, परियोजना में बायो-बेस्ड कच्चे माल का इस्तेमाल कर PLA और बायोप्लास्टिक तैयार किया जाएगा. कंपनी का कहना है कि PLA और इसके कंपाउंड्स का इस्तेमाल मौजूदा सिंगल-यूज प्लास्टिक के कुछ अनुप्रयोगों के विकल्प के तौर पर किया जा सकता है. यानी 308 पहियों वाला यह महाबली केवल एक भारी मशीन लेकर सड़क पर नहीं चल रहा. इसके पीछे एक बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट की मशीनरी को उसके गंतव्य तक पहुंचाने का अभियान है. क्यों खास है यह पूरा ऑपरेशन? ऑटोमोबाइल और लॉजिस्टिक्स के लिहाज से इस ट्रांसपोर्टेशन की खासियतें हैं: 308 पहियों वाला मल्टी-एक्सल ट्रेलर करीब 200 टन की औद्योगिक मशीन करीब 100 फीट लंबा ट्रेलर करीब 8 मीटर ऊंचा और 7 मीटर चौड़ा कार्गो रास्ते में क्रेन और तकनीकी टीम की मदद पुल और फुटओवर ब्रिज जैसी बाधाओं को हटाकर रास्ता तैयार करना बेहद कम गति से लंबी दूरी तय करना यही वजह है कि ओडिशा से उत्तर प्रदेश तक का यह सफर सामान्य ट्रांसपोर्टेशन से कहीं ज्यादा मुश्किल बन गया है. ये भी पढ़ें: सिंगल चार्ज में 500 KM+ रेंज… कीमत ₹20 लाख से कम, ये हैं हिंदुस्तान की 5 लंबी रेंज वाली Electric Cars The post 308 पहियों वाला ‘महाबली ट्रक’: 200 टन की मशीन लेकर ओडिशा से यूपी का सफर, जानिए कैसे काम करता है यह चलता-फिरता इंजीनियरिंग का अजूबा appeared first on Naya Vichar.

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मन की बात में PM मोदी ने बताई जीरो टॉलरेंस की नीति, कहा- आतंकवाद को बख्शेगा नहीं भारत

प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक ने आतंकवाद से निपटने की हिंदुस्तान की नीति का एक नया साहसिक उदाहरण पूरी दुनिया के सामने पेश किया है. हिंदुस्तान ने आतंकवादी हमलों का दर्द लंबे समय तक सहा है. 2016 में नियंत्रण रेखा के पार की गई सर्जिकल स्ट्राइक इसका निर्णायक जवाब थी. हमें करारा जवाब देना आता है: पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बीते एक दशक में बालाकोट की एयर स्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक हिंदुस्तान ने बार-बार ये स्पष्ट संदेश दिया है कि अगर आतंकवादी हिंदुस्तान की ओर आंख उठाकर देखेंगे तो उसका करारा जवाब दिया जाएगा. आज का हिंदुस्तान आतंकवाद के खिलाफ जीरों टॉलरेंस की नीति लेकर चल रहा है और हम इसके नतीजे भी देख रहे हैं. 10 वर्ष पहले 28-29 सितंबर, 2016 को हिंदुस्तानीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी. LOC के उस पार जाकर हमारे वीर जवानों ने जिस तरह आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की थी, वो देख दुनिया हैरान थी.सर्जिकल स्ट्राइक ने डंके की चोट पर पूरी दुनिया के सामने हिंदुस्तान की आतंकवाद विरोधी नीति का एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया था. जनगणना हमारा राष्ट्रीय दायित्व प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश के सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में जनगणना का पहला चरण लगभग पूरा हो चुका है. 32 करोड़ से अधिक परिवारों की जानकारी दर्ज की जा चुकी है.उत्तराखंड में जनगणना की शुरुआत चमोली के माणा गांव से हुई. माणा को देश का पहला गांव कहा जाता है. जनगणना हम सबका राष्ट्रीय दायित्व है. उन्होंने कहा कि मैंने 15 अगस्त को भी देशवासियों से आग्रह किया था कि वे जनगणना के लिए अपना समय जरूर निकालें.जनगणना एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी है जिसमें हर नागरिक की भूमिका है; लोगों को जनगणना के दौरान ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा का लाभ उठाना चाहिए. नशा मुक्ति की प्रतिज्ञा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा -हाल ही में देश के लाखों युवाओं ने नशे के विरुद्ध महत्वपूर्ण संकल्प लिया है. युवाओं ने खुद भी नशे से दूर रहने की प्रतिज्ञा ली है और इस संदेश को दूसरों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी ली है, ये सब नशा मुक्त युवा अभियान के तहत हो रहा है. ये अभियान 100 सप्ताह तक चलेगा. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में बापू और विश्व हिंदू परिषद के अशोक सिंघल को भी याद किया. ये भी पढ़ें: चुनाव आयोग के मुद्दे पर प्रशासन को घेरने की तैयारी में इंडिया गठबंधन, 30 को हो सकती है दिल्ली में बैठक The post मन की बात में PM मोदी ने बताई जीरो टॉलरेंस की नीति, कहा- आतंकवाद को बख्शेगा नहीं हिंदुस्तान appeared first on Naya Vichar.

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ट्रंप का दावा: होर्मुज खोलने को ईरान तैयार, बोले- ‘पैसा नहीं आ रहा, इसलिए मर रहे हैं’

मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच छह महीने से अधिक समय से जारी संघर्ष के कारण तनाव बना हुआ है. पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए तैयार है. ट्रंप ने इसके पीछे ईरान की आर्थिक मुश्किलों को वजह बताया. ट्रंप बोले- अब कोई पैसा नहीं आ रहा शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान तत्काल होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना चाहता है. उन्होंने कहा, “वे मर रहे हैं, क्योंकि उनके पास कोई पैसा नहीं आ रहा है.” ट्रंप के मुताबिक, ईरान की आमदनी का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा है और इसके बंद होने से उसे आर्थिक नुकसान हो रहा है. ट्रंप का दावा- हमने सबसे बड़ी नाकाबंदी की ट्रंप ने आगे कहा कि ईरान ने दुनिया के लिए परेशानी पैदा करने के मकसद से जलडमरूमध्य बंद करने का फैसला किया था. उनके अनुसार, इसके जवाब में अमेरिका ने “सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी नाकाबंदी” लागू की. ट्रंप ने इसे “स्टील की दीवार” बताते हुए कहा कि इसके बाद ईरान के पास पैसा आना बंद हो गया. ईरान के प्रस्ताव को ट्रंप ने किया खारिज इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने को लेकर एक प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया. व्हाइट हाउस से रवाना होते समय ट्रंप ने कहा कि ईरान ऐसा समझौता करना चाहता है, जिसके तहत जलडमरूमध्य तुरंत खोल दिया जाए. ‘ईरान बुरी तरह नुकसान में है’- ट्रंप ट्रंप ने कहा कि ईरान तुरंत समझौता करना चाहता है क्योंकि उसे भारी नुकसान हो रहा है. उनके मुताबिक, तेहरान की कोशिश है कि होर्मुज को खोलने के बदले अमेरिका के साथ कोई समझौता किया जाए. अमेरिका-ईरान के बीच समझौते पर चल रही थी बातचीत रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी और ईरानी वार्ताकार एक ऐसे समझौते की संभावनाएं तलाश रहे थे, जिसके तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोला जा सके. इसके बदले अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अपने नाकाबंदी संबंधी कदमों को हटाने पर विचार कर सकता है. होर्मुज को लेकर क्यों बढ़ा तनाव? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है. ईरान के खिलाफ दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका ने उसके खिलाफ आर्थिक और समुद्री प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं. ट्रंप प्रशासन का दावा है कि इन कदमों का उद्देश्य ईरान को जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले रोकने के लिए मजबूर करना है. आगे फिर शुरू हो सकती है अमेरिकी बमबारी इस बीच द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ अमेरिकी बमबारी अभियान फिर शुरू करने की उम्मीद कर रहे हैं. इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका को लेकर चर्चा तेज हो गई है. ये भी पढ़ें: अस्पताल के मलबे से निकाले गए ईरान के सुप्रीम लीडर! ट्रंप बोले- वह मरे नहीं; US- इजराइली हमले में 3 अस्पताल हुए थे तबाह The post ट्रंप का दावा: होर्मुज खोलने को ईरान तैयार, बोले- ‘पैसा नहीं आ रहा, इसलिए मर रहे हैं’ appeared first on Naya Vichar.

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CJP Protest 2.0: 2 अक्टूबर को मुंबई से शुरू होगा आंदोलन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ा संगठन

CJP Protest 2.0: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने एक बार फिर बड़े आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है. संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया है.CJP की रत्ना ने बताया कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन मुंबई से नए आंदोलन की शुरुआत की जाएगी. इसके बाद प्रदर्शन को देश के अलग-अलग शहरों तक ले जाने की योजना है. 48 घंटे का दिया गया अल्टीमेटम CJP ने 24 सितंबर को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी. संगठन ने उन्हें 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. CJP का कहना है कि तय समयसीमा में इस्तीफा नहीं दिया गया तो देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा. इसके साथ ही संगठन ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी सवाल उठाए हैं. View on Instagram 2 अक्टूबर को मुंबई से होगी शुरुआत CJP के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने 25 सितंबर को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आंदोलन की अगली रणनीति बताई. उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 2 अक्टूबर से मुंबई में देशव्यापी प्रदर्शन शुरू किया जाएगा. इसके बाद आंदोलन को देश के दूसरे शहरों तक ले जाने की बात कही गई है. दिल्ली में फिर होगा ‘जंतर-मंतर 2.0’? CJP ने इस आंदोलन को अपने पहले बड़े प्रदर्शन से भी जोड़ा है. संगठन ने कहा है कि देशव्यापी अभियान के बाद दिल्ली में भी बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. CJP की ओर से इसे ‘जंतर-मंतर 2.0’ नाम दिया गया है. इससे पहले संगठन ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबा प्रदर्शन किया था. चुनाव आयोग और SIR को लेकर कई मांगें CJP ने सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग नहीं की है. संगठन ने आगामी चुनावों को रोकने, SIR को स्थगित करने और जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने जैसी मांगें भी रखी हैं. इसके अलावा SIR से जुड़े दस्तावेजों की स्वतंत्र निगरानी और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून में बदलाव की मांग भी सामने रखी गई है. CJP ने क्यों उठाया चुनाव आयोग का मुद्दा? CJP का यह अभियान चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट के बाद तेज हुआ. संगठन ने चुनाव आयोग के कामकाज और SIR से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए हैं. हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा है कि अलग-अलग राय, लिखित टिप्पणियां और आंतरिक विचार-विमर्श संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा SIR समेत पिछले एक साल के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं. पहले आंदोलन से कैसे अलग है Protest 2.0? पहले CJP आंदोलन का केंद्र NEET और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे थे. अब संगठन ने चुनाव आयोग, मतदाता सूची और SIR को अपने अभियान का प्रमुख मुद्दा बनाया है. अगस्त में CJP की ओर से देशभर में संगठन को जमीनी स्तर तक विस्तार देने और नए अभियान की रणनीति बनाने की बात भी कही गई थी. मुंबई से देशभर तक आंदोलन ले जाने का प्लान CJP के मौजूदा प्लान के मुताबिक, आंदोलन की शुरुआत मुंबई से होगी और इसके बाद इसे अन्य शहरों तक ले जाने की तैयारी है. संगठन ने इसे लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों के खिलाफ अभियान के रूप में पेश किया है. अब देखना होगा कि 2 अक्टूबर को मुंबई से शुरू होने वाला यह अभियान किस रूप में आगे बढ़ता है. ये भी पढ़ें: रक्षा मंत्री बोले- दुश्मन से निपटने के लिए सेना को खुली छूट, आतंकियों और उनके आकाओं के बीच कोई फर्क नहीं होगा The post CJP Protest 2.0: 2 अक्टूबर को मुंबई से शुरू होगा आंदोलन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ा संगठन appeared first on Naya Vichar.

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बारिश बनी काल! कानपुर देहात में कच्चा मकान भरभराकर गिरा, मलबे में दबकर मां-बेटी की मौत

UP News: कानपुर देहात में लगातार हो रही बारिश के बीच रविवार की आधी रात दर्दनाक हादसा हो गया. मैथा तहसील के नवल गांव में करीब रात एक बजे कच्चा मकान अचानक भरभराकर गिर गया. हादसे के समय घर के अंदर सो रही 75 वर्षीय मां और 28 वर्षीय बेटी मलबे में दब गयीं. दोनों की मौके पर ही मौत हो गयी. मृतकों की पहचान शांति देवी (75) और उनकी बेटी शालू (28) के रूप में हुई है. घटना के बाद गांव में मातम पसरा है. तेज आवाज सुनकर पहुंचे ग्रामीण, रात में शुरू हुआ रेस्क्यू बताया गया कि रात करीब एक बजे मकान गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे. ग्रामीणों ने तत्काल शिवली कोतवाली पुलिस को सूचना दी. इसके बाद पुलिस और ग्रामीणों ने मिलकर मलबा हटाने का काम शुरू किया. काफी मशक्कत के बाद दोनों स्त्रीओं को मलबे से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी. शिवली कोतवाली प्रभारी अमरेंद्र बहादुर सिंह के मुताबिक दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है. मां के साथ पुश्तैनी मकान में रहती थीं शालू परिजनों के अनुसार शालू पेशे से वकील थीं और अपनी मां शांति देवी के साथ पुश्तैनी कच्चे मकान में रहती थीं. उनके दो भाई हैं, जो पास में ही अलग-अलग मकानों में अपने परिवार के साथ रहते हैं. इनमें एक भाई राजेश ड्राइवर का काम करता है. जमीन की वसीयत का भी किया गया जिक्र परिजनों ने बताया कि पिता की मृत्यु से पहले शालू ने जमीन की वसीयत अपने नाम करा ली थी. इसके चलते दोनों भाइयों को जमीन नहीं मिली थी. हालांकि, मकान गिरने की घटना और जमीन की वसीयत के बीच कोई संबंध है या नहीं, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि पुलिस की ओर से नहीं की गयी है. लगातार बारिश के बीच कच्चे मकानों की स्थिति को लेकर प्रशासन के सामने भी चुनौती बढ़ी है. कानपुर देहात में हाल के दिनों में बारिश से कच्चे मकानों के क्षतिग्रस्त होने की अन्य घटनाएं भी सामने आयी हैं. यह भी पढ़ें: UP में बुजुर्गों के लिए योगी प्रशासन का बड़ा तोहफा, अब हर महीने 1500 पेंशन, 1500 करोड़ का भी इंतजाम The post बारिश बनी काल! कानपुर देहात में कच्चा मकान भरभराकर गिरा, मलबे में दबकर मां-बेटी की मौत appeared first on Naya Vichar.

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ADR Report : 4 साल में 111 सांसदों-विधायकों ने बदला पाला, 26% की पहली पसंद बनी BJP

ADR Report : ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (ADR) और ‘नेशनल इलेक्शन वॉच’ के एक नए विश्लेषण में देश की नेतृत्व में दल-बदल का चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है. 2022 से 2026 के बीच हुए चुनावों और उपचुनावों के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट के अनुसार, 111 मौजूदा सांसदों और विधायकों ने चुने जाने के बाद अपनी नेतृत्वक पार्टियां बदलीं. इनमें 26 लोकसभा सांसद, 7 राज्यसभा सांसद और 78 विधायक (MLA) शामिल हैं. दल बदलने वाले सबसे ज्यादा नागालैंड से यह दल-बदल देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हुआ. इसमें सबसे ज्यादा नागालैंड के 32, पश्चिम बंगाल के 20, तेलंगाना के 9, जबकि गोवा और पंजाब के 8-8 जनप्रतिनिधि शामिल हैं. एडीआर ने स्पष्ट किया है कि इस गिनती में सिर्फ सामान्य दलबदल ही नहीं, बल्कि पार्टियों का विलय, इस्तीफा देकर उपचुनाव जीतने वाले और अयोग्य ठहराए जाने के बाद दूसरी पार्टी से जीतकर आने वाले जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं. ADR को जानिए चुनाव आयोग के व्यवस्थित और आसानी से उपलब्ध डेटा की कमी के कारण यह सूची पूरी तरह अंतिम नहीं भी हो सकती है. बता दें कि एडीआर 1999 में आईआईएम अहमदाबाद के प्रोफेसरों द्वारा बनाई गई एक गैर-पक्षपाती संस्था है, जिसकी कानूनी लड़ाई की बदौलत सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीदवारों के लिए अपने आपराधिक रिकॉर्ड, संपत्ति और शिक्षा का खुलासा अनिवार्य किया था. 29 नेता बीजेपी में गए, इनमें 7 राज्यसभा सांसद और 22 विधायक ADR और नेशनल इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के हवाले से इंडिया टुडे ने बताया कि दलबदल करने वाले 111 जनप्रतिनिधियों में से 29 (26%) बीजेपी में शामिल हुए. इसके साथ ही बीजेपी दूसरे दलों के नेताओं को अपने पाले में लाने वाली दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई. हालांकि, एडीआर के डेटा के मुताबिक कोई भी लोकसभा सांसद सीधे बीजेपी में नहीं गया. बीजेपी में 7 राज्यसभा सांसद और 22 विधायक शामिल हुए. दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी में शामिल होने वाले सभी सातों राज्यसभा सदस्य आम आदमी पार्टी (AAP) से चुनकर आए थे. इनमें स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राघव चड्ढा, संदीप कुमार पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजिंदर गुप्ता के नाम दर्ज हैं. वहीं, बीजेपी में शामिल होने वाले विधायकों में गोवा कांग्रेस के 8 विधायक, गुजरात कांग्रेस के 4 विधायक और हिमाचल प्रदेश के 2 विधायक शामिल हैं. इसके अलावा मणिपुर से जेडीयू (JDU) के 5 विधायक भी बीजेपी में गए. उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी के विधायक मनोज कुमार पांडे, मध्य प्रदेश से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे और कर्नाटक के विधायक जी. जनार्दन रेड्डी (जिनकी पार्टी कल्याणा राज्य प्रगति पक्ष का बीजेपी में विलय हुआ) भी इस सूची में शामिल हैं. गुजरात के कांग्रेस विधायक सीजे चावड़ा, अर्जुन मोढवाडिया, अरविंद लदानी और चिराग पटेल ने इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थामा और बाद में उपचुनाव लड़े. 2 विधायकों वाली NPF को कैसे मिले नागालैंड के 32 विधायक? संख्या के मामले में बीजेपी पहले नंबर पर नहीं है. सबसे ज्यादा 32 जनप्रतिनिधि (29%) नागालैंड की नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) में शामिल हुए, लेकिन ऐसा विधायकों के व्यक्तिगत दलबदल की जगह पूरी पार्टी के विलय (Merger) की वजह से हुआ. नागालैंड में कुल 60 विधानसभा सीटें हैं. मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के नेतृत्व वाली नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (NDPP) के पास 32 विधायक थे, जबकि एनपीएफ के पास सिर्फ 2 विधायक थे. नेफ्यू रियो पहले एनपीएफ में ही थे, लेकिन 2017 में उन्होंने एनडीपीपी बनाई थी. नागालैंड में एनडीपीपी और बीजेपी (12 विधायक) मिलकर बिना विपक्ष वाली प्रशासन चला रहे थे. अक्टूबर 2025 में एनडीपीपी का एनपीएफ में विलय हो गया और नेफ्यू रियो एनपीएफ विधायक दल के नेता चुने गए. रियो ने इसे नगा आकांक्षाओं को पूरा करने और नगा नेतृत्वक मुद्दे के हल के लिए ‘एक मजबूत क्षेत्रीय पार्टी’ बनाने का कदम बताया था. 20 बागी लोकसभा सांसदों ने बनाई नई राह, किस पार्टी को क्या मिला? इस फेहरिस्त में एनपीएफ (32) और बीजेपी (29) के बाद तीसरे नंबर पर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) रही, जिसे 20 जनप्रतिनिधि (18%) मिले. 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद, पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने बगावत कर दी. कानूनी पचड़ों से बचने के लिए उन्होंने 14 जून को एनसीपीआई में अपने विलय का एलान किया और लोकसभा में बीजेपी नीत एनडीए को समर्थन दे दिया. एनसीपीआई का इससे पहले कोई राष्ट्रीय जनाधार नहीं था और उसने 2023 के त्रिपुरा चुनाव से शुरुआत की थी, जहां उसे एक भी सीट नहीं मिली थी. इसके अलावा कांग्रेस में 9, शिवसेना में 8, एनपीपी (NPP) में 6 और पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल में 4 जनप्रतिनिधि शामिल हुए. वहीं नुकसान उठाने वाली पार्टियों में सबसे ऊपर एनडीपीपी (25), तृणमूल कांग्रेस (20) और कांग्रेस (19) रहीं. इन तीनों पार्टियों से ही कुल 64 (58%) जनप्रतिनिधियों का पलायन हुआ. एडीआर के अनुसार, लोकसभा के कुल 543 सांसदों में से 26 (लगभग 5%), राज्यसभा के 233 में से 7 (3%) और 4,100 विधायकों में से 78 (लगभग 2%) ने पाला बदला है. ADR की मांग: दल-बदल कानून हो सख्त, स्पीकर से छीने जाएं अधिकार इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद एडीआर ने देश के दल-बदल विरोधी कानून (एंटी-डिफेक्शन लॉ) में कड़े बदलाव की सिफारिश की है. एडीआर ने मांग की है कि संविधान की 10वीं अनुसूची में संशोधन किया जाए, ताकि सांसदों की अयोग्यता पर फैसला राष्ट्रपति और विधायकों की अयोग्यता पर फैसला राज्यपाल चुनाव आयोग की सलाह पर लें, न कि सदन के पीठासीन अधिकारी (स्पीकर). इसके साथ ही, दल-बदल करने वालों के सार्वजनिक पद संभालने पर रोक लगाने और अयोग्यता याचिकाओं पर फैसले के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करने की सिफारिश भी की गई है. एडीआर ने इसे “सुविधा और निजी स्वार्थ की नेतृत्व” करार देते हुए कहा कि नेताओं को इसकी जगह “विश्वास, साहस और सहमति की नेतृत्व” करनी चाहिए. हालांकि, यह देखना बाकी है कि नेतृत्वक दल इन सिफारिशों पर कितना अमल करते हैं, क्योंकि लगभग सभी प्रमुख दलों की प्रशासनें कभी न कभी इस दलबदल का लाभ उठा चुकी हैं. ये भी पढ़ें: LPU में बवाल : छात्रा से रेप की समाचार फैलते ही फूटा छात्रों का गुस्सा, कैंपस में लगाई आग; फगवाड़ा-जालंधर हाईवे जाम ये भी

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अस्पताल के मलबे से निकाले गए ईरान के सुप्रीम लीडर! ट्रंप बोले- वह मरे नहीं; US- इजराइली हमले में 3 अस्पताल हुए थे तबाह

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को तेहरान के एक अस्पताल के मलबे से निकालने का दावा किया गया है. यह दावा ईरान की Assembly of Experts के सदस्य मोहसेन हैदरी ने किया है. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, हैदरी ने कतर के टीवी नेटवर्क अल अराबी को दिए एक इंटरव्यू में यह जानकारी दी. हैदरी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि घायल होने के बाद मोजतबा खामेनेई को अस्पताल ले जाया गया था. इसके बाद तेहरान के तीन अस्पतालों को निशाना बनाया गया. हैदरी के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई तीसरे अस्पताल में मौजूद थे, जहां हमले के बाद उन्हें मलबे से बाहर निकाला गया. ट्रंप ने कहा था- ‘वह मरे नहीं हैं’ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने अमेरिकी कमेंटेटर ग्लेन बेक के साथ बातचीत में कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि मुजतबा खामेनेई की मौत हुई है. ट्रंप ने कहा था कि ईरानी नेता गंभीर रूप से घायल हुए थे और उनके शरीर के बाएं हिस्से हाथ और पैर पर गंभीर चोटें आई थीं. मलबे से निकलने के बाद कहां हैं मोजतबा? न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, अस्पताल के मलबे से निकाले जाने के बाद मोजतबा खामेनेई कथित तौर पर किसी अज्ञात स्थान पर चले गए. इसके बाद से वह सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं और उनके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है. उनकी स्थिति को लेकर लगातार अटकलें लगाई जाती रही हैं. कैसे बने ईरान के सुप्रीम लीडर? मोहसेन हैदरी ने मोजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर चुने जाने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 8 मार्च को Assembly of Experts की बैठक में मोजतबा खामेनेई के नाम पर फैसला हुआ. उन्होंने दावा किया गया कि मोजतबा को खुद तब तक इसकी जानकारी नहीं थी, जब तक ईरान के प्रशासनी टेलीविजन पर उनके चयन की घोषणा नहीं की गई. Assembly of Experts के ठिकाने पर भी हमला रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम लीडर के चयन की संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने वाली Assembly of Experts भी हमलों की चपेट में आई थी. न्यूयॉर्क पोस्ट ने दावा किया कि क़ोम स्थित इसके सचिवालय पर हुए हमले में आठ लोगों की मौत हुई और नए सुप्रीम लीडर के चयन से जुड़े दस्तावेज तथा सिफारिशें नष्ट हो गईं. गुप्त कमरे में हुआ था चयन हैदरी के अनुसार, दस्तावेज नष्ट होने के बाद Assembly of Experts के सदस्यों ने अपने वोट कागज पर लिखे. इसके बाद उन्हें चयन प्रक्रिया के लिए एक गुप्त कमरे में बुलाया गया. हैदरी ने दावा किया कि मुजतबा खामेनेई के नाम का प्रस्ताव रखने वाले वह पहले सदस्य थे. 59 में से 50 वोट मिलने का दावा रिपोर्ट में हैदरी के हवाले से कहा गया है कि मोजतबा खामेनेई को कुल 59 में से 50 वोट मिले. वहीं, अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को 8 वोट मिले और एक सदस्य ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. हालांकि, ये विवरण उसी इंटरव्यू और मीडिया रिपोर्ट पर आधारित हैं. ‘मैन ऑफ द शैडोज’ के तौर पर पहचान मोहसेन हैदरी ने मुजतबा खामेनेई को ‘मैन ऑफ द शैडोज’ भी बताया. रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम लीडर बनने से पहले उन्होंने ईरानी प्रशासन में कोई प्रमुख नेतृत्वक पद नहीं संभाला था. हालांकि, वह अपने पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के सलाहकार के तौर पर काम कर चुके थे. अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में गंभीर चोट का दावा मुजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर पहले भी कई तरह की समाचारें सामने आती रही हैं. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में उन्हें हमलों के दौरान गंभीर रूप से घायल और चेहरे पर गंभीर चोटों से प्रभावित बताया गया था. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है. ट्रंप ने कहा था- ‘वह मरे नहीं हैं’ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने अमेरिकी कमेंटेटर ग्लेन बेक के साथ बातचीत में कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि मुजतबा खामेनेई की मौत हुई है. ट्रंप ने कहा था कि ईरानी नेता गंभीर रूप से घायल हुए थे और उनके शरीर के बाएं हिस्से हाथ और पैर पर गंभीर चोटें आई थीं. ईरानी राष्ट्रपति ने बताया- ‘पूरी तरह स्वस्थ’ वहीं, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इस सप्ताह फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में मुजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर अलग दावा किया. उन्होंने कहा कि मुजतबा ‘पूरी तरह स्वस्थ’ हैं. पेजेश्कियन के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच पिछले महीने करीब सात घंटे तक मुलाकात और बातचीत हुई थी. ये भी पढ़ें: UNSC में हिंदुस्तान की परमानेंट सदस्यता को रूस का समर्थन, जापान का किया विरोध, कहा-संगठन में और पश्चिमी देशों की जरूरत नहीं The post अस्पताल के मलबे से निकाले गए ईरान के सुप्रीम लीडर! ट्रंप बोले- वह मरे नहीं; US- इजराइली हमले में 3 अस्पताल हुए थे तबाह appeared first on Naya Vichar.

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रक्षा मंत्री बोले- दुश्मन से निपटने के लिए सेना को खुली छूट, आतंकियों और उनके आकाओं के बीच कोई फर्क नहीं होगा

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ हिंदुस्तान की नीति को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि आतंकवादी ढांचे को खत्म करने के रास्ते में कोई सीमा बाधा नहीं बनेगी. आतंकियों और उनका समर्थन करने वालों के बीच भी कोई अंतर नहीं किया जाएगा. रक्षा मंत्री ने कहा कि हिंदुस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति स्पष्ट कर दी है, जो यह दर्शाता है कि दुश्मन को उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा जिसे वह समझता है. सेना को खुली छूट, दुश्मन को उसी भाषा में मिलेगा जवाब राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंदुस्तानीय सेना को दुश्मन से निपटने के लिए खुली छूट दी गई है. उन्होंने कहा कि जिसे जिस भाषा में समझ आता है, हिंदुस्तानीय सेना उसी भाषा में जवाब देने के लिए तैयार है. रक्षा मंत्री के मुताबिक, देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों में सेना को आवश्यक कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता है. पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान को लेकर सख्त संदेश रक्षा मंत्री ने कहा कि पहलगाम में आतंकी हमला कर पाकिस्तान ने लक्ष्मण रेखा पार कर दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवादी ढांचे को खत्म करने के रास्ते में अब कोई सीमा बाधा नहीं बनेगी. उनके बयान में आतंकवाद के खिलाफ हिंदुस्तान के सख्त रुख को रेखांकित किया गया. आतंकियों के साथ मददगार भी निशाने पर राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंदुस्तान आतंकियों और उनका साथ देने वालों के बीच कोई अंतर नहीं करेगा. यानी आतंकवाद को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देने वालों को भी हिंदुस्तान की नीति के दायरे में रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिए हिंदुस्तान पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुका है, जिसका मतलब है कि अब किसी भी मददगार को बख्शा नहीं जाएगा. अब परमाणु ब्लैकमेल बर्दाश्त नहीं करेगा हिंदुस्तान रक्षा मंत्री ने कहा कि हिंदुस्तान अब परमाणु ब्लैकमेल को स्वीकार नहीं करेगा. उनका यह बयान पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के संदर्भ में हिंदुस्तान की सुरक्षा नीति को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सिंधु जल संधि पर भी दो टूक राजनाथ सिंह ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के निलंबन के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि इसका आधार स्पष्ट था. खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते. उन्होंने इस फैसले को आतंकवाद के खिलाफ हिंदुस्तान के व्यापक रुख से जोड़कर पेश किया. ‘डिटरेंस बाय पनिशमेंट’ की ओर बढ़ चुका है हिंदुस्तान रक्षा मंत्री ने कहा कि हिंदुस्तान अब ‘डिटरेंस बाय पनिशमेंट’ यानी कार्रवाई के जरिए प्रतिरोध की नीति की ओर बढ़ चुका है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश मजबूती से खड़ा है और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर हिंदुस्तान अपने हितों की रक्षा के लिए दृढ़ है. ये भी पढ़ें: EC विवाद पर भड़के एकनाथ शिंदे: “राहुल गांधी देश से मांगें माफी, झूठ पर टिकी है INDIA गठबंधन की नेतृत्व” The post रक्षा मंत्री बोले- दुश्मन से निपटने के लिए सेना को खुली छूट, आतंकियों और उनके आकाओं के बीच कोई फर्क नहीं होगा appeared first on Naya Vichar.

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LPU में बवाल : छात्रा से रेप की खबर फैलते ही फूटा छात्रों का गुस्सा, कैंपस में लगाई आग; फगवाड़ा-जालंधर हाईवे जाम

LPU Violence : पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) परिसर में देर रात भारी तनाव पैदा हो गया. सोशल मीडिया और कैंपस में एक छात्रा के साथ कथित गैंगरेप या खुदकुशी की अपुष्ट समाचारें फैलने के बाद करीब 2,000 छात्र गर्ल्स हॉस्टल के पास इकट्ठा हो गए. देखते ही देखते छात्रों का गुस्सा बेकाबू हो गया. गुस्साए छात्रों ने यूनिवर्सिटी कैंपस के बाहर नेशनल हाईवे को जाम कर दिया और यातायात पूरी तरह ठप कर दिया. इसके बाद भीड़ ने यूनिवर्सिटी परिसर के भीतर जमकर उत्पात मचाया. इमारतों में आगजनी, खिड़कियों के शीशे और गमले तोड़े इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार विरोध प्रदर्शन ने थोड़ी ही देर में हिंसक रूप ले लिया. उपद्रव कर रहे छात्रों ने यूनिवर्सिटी की इमारतों के शीशे तोड़ दिए, ईंट-पत्थर और गमले फेंके और परिसर के कुछ हिस्सों में आग लगा दी. हालात बिगड़ते देख भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा. पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद हाईवे से छात्रों को हटाकर यातायात बहाल कराया और कैंपस में स्थिति को नियंत्रण में लिया. अफवाह से पैदा हुई गलतफहमी! कपूरथला के सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) गौरव तूरा ने स्पष्ट किया कि छात्रों के दावे गलतफहमी और अफवाहों पर आधारित हैं. उन्होंने बताया, “कैंपस के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के पास चार-पांच दिन पहले एक लड़की ने खुदकुशी की थी, लेकिन उस घटना का छात्रों के बीच चल रहे रेप के दावों से कोई संबंध होने की शिकायत पुलिस को नहीं मिली है.” पुलिस अधिकारी ने कहा कि न तो कथित पीड़िता की पहचान हुई है और न ही किसी आरोपी की. सोशल मीडिया पर एक कर्मचारी के शामिल होने के आरोप भी लगाए जा रहे थे, जिसकी पुलिस ने कोई पुष्टि नहीं की है. “छवि खराब करने की साजिश” यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें “झूठा, बेबुनियाद और मनगढ़ंत” करार दिया है. LPU की रजिस्ट्रार डॉ. मोनिका गुलाटी ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया के जरिए छात्रों में भ्रम फैलाने और कैंपस का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने इसे संस्थान की साख को नुकसान पहुंचाने की सोची-समझी कोशिश बताया और छात्रों व अभिभावकों से किसी भी तरह की अफवाहों पर यकीन न करने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की. फिलहाल पुलिस और प्रशासन छात्रों के साथ बातचीत कर तनाव सुलझाने में जुटे हैं. ये भी पढ़ें: EC विवाद पर भड़के एकनाथ शिंदे: “राहुल गांधी देश से मांगें माफी, झूठ पर टिकी है INDIA गठबंधन की नेतृत्व” The post LPU में बवाल : छात्रा से रेप की समाचार फैलते ही फूटा छात्रों का गुस्सा, कैंपस में लगाई आग; फगवाड़ा-जालंधर हाईवे जाम appeared first on Naya Vichar.

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