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Video : 320 की रफ्तार में भी नहीं लगेगा झटका? मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन में पहली बार लगी ये खास तकनीक

Video : हिंदुस्तानीय रेलवे में पहली बार मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट में ऐसे खास टर्नआउट लगाए जा रहे हैं, जिनमें मूवेबल क्रॉसिंग यानी स्विंग-नोज तकनीक का इस्तेमाल होगा. ये टर्नआउट 320 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार वाली ट्रेनों के लिए बनाए गए हैं. इसकी खासियत यह है कि ट्रैक पर पहियों के गुजरने के दौरान कोई गैप नहीं रहता. इससे ट्रेन के पहियों को बेहतर सहारा मिलता है और झटके, कंपन, शोर और ट्रैक की टूट-फूट कम होती है. हर हाई-स्पीड टर्नआउट में दो पॉइंट मशीनें लगी हैं. ये स्विच और मूवेबल क्रॉसिंग को नियंत्रित करती हैं. सुरक्षित संचालन के लिए कई स्तरों पर इसकी जांच भी की जाती है. मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट का एक वीडियो न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया है. हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट की लंबाई 508 किलोमीटर पीआईबी ने 25 मार्च 2026 को बताया कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट की लंबाई 508 किलोमीटर है. यह गुजरात, महाराष्ट्र और दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगा. इस रूट पर मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती समेत 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं. प्रशासन के अनुसार प्रोजेक्ट के लिए जरूरी 1,389.5 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण पूरा हो चुका है. सभी जरूरी प्रशासनी मंजूरियां भी मिल गई हैं. प्रोजेक्ट से जुड़ी 1,651 बिजली, पानी और दूसरी सेवाओं की लाइनों को भी दूसरी जगह शिफ्ट किया जा चुका है. महाराष्ट्र में जमीन मिलने में देरी के कारण 2021 तक काम प्रभावित रहा. 2022 से वहां जमीन अधिग्रहण में तेजी आई. ये भी पढ़ें: बिहार में दौड़ेगी बुलेट ट्रेन! बक्सर से किशनगंज तक बनेगा हाई स्पीड रेल कॉरिडोर, पटना से सिलीगुड़ी का सफर 2 घंटे में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की खास जानकारी जानने के लिए यहां क्लिक करें प्रोजेक्ट में समुद्र के नीचे बनने वाली है करीब 21 किलोमीटर लंबी सुरंग मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में समुद्र के नीचे बनने वाली करीब 21 किलोमीटर लंबी सुरंग का काम शुरू हो चुका है. इसमें महाराष्ट्र के घनसोली से शिलफाटा के बीच 4.8 किलोमीटर सुरंग बनकर तैयार हो गई है. महाराष्ट्र के रेलवे बजट में 20 गुना बढ़ोतरी किसी रेलवे प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से पहले उसकी विस्तृत रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाती है. इसके बाद राज्य प्रशासन समेत अलग-अलग विभागों से राय ली जाती है. प्रोजेक्ट को मंजूरी देने के लिए नीति आयोग और वित्त मंत्रालय जैसी संस्थाओं की भी मंजूरी जरूरी होती है. इसलिए किसी प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने की तय समयसीमा पहले से बताना मुश्किल होता है. महाराष्ट्र में रेलवे के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा से जुड़े कामों के लिए बजट में बड़ी बढ़ोतरी हुई है. 2009-14 के दौरान जहां हर साल औसतन 1,171 करोड़ रुपये मिलते थे, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 23,778 करोड़ रुपये हो गया. यानी करीब 20 गुना बढ़ोतरी हुई है. The post Video : 320 की रफ्तार में भी नहीं लगेगा झटका? मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन में पहली बार लगी ये खास तकनीक appeared first on Naya Vichar.

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IIT में 5 साल में 53 की मौत, साहिल की मौत पर बवाल के बीच SC-ST OBC छात्रों को लेकर आया ये आंकड़ा

IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस और इंजीनियरिंग विभाग के छात्र साहिल वाकोडे हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे.  बीटेक दूसरे वर्ष के छात्र साहिल की मौत के बाद आक्रोशित छात्रों ने IIT परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया. परिवार ने साहिल की मौत के पीछे जातिगत उत्पीड़न को वजह बताया. मुंबई पुलिस ने परिवार की ओर से लगाए गए आरोप के आधार पर SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है. अब देश के शिक्षण संस्थानों में जातीय आधार पर उत्पीड़न और आत्महत्या की घटनाओं पर नई बहस छिड़ गई है. SC-ST और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों से जुड़े आत्महत्या के मामलों की गूंज संसद में भी सुनाई देती रही है. साल 2024 में इसे लेकर सांसद एंटो एंटनी ने लोकसभा में सवाल भी पूछा था. सांसद एंटो एंटनी ने किया था ये सवाल लोकसभा में सांसद एंटो एंटनी ने 25 नवंबर 2024 को शिक्षा मंत्री से IIT में छात्रों की आत्महत्या को लेकर सवाल पूछा था. उन्होंने जानना चाहा कि पिछले पांच साल में हर IIT में कितने छात्रों ने आत्महत्या की, इनमें SC, ST और OBC वर्ग के कितने छात्र थे और इनका साल और संस्थान के हिसाब से आंकड़ा क्या है. साथ ही, प्रशासन से यह भी पूछा गया कि IIT में आत्महत्या रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और हर IIT में इस समय कितने मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ काम कर रहे हैं. उस वक्त शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने बताया कि आत्महत्या से जुड़े आंकड़े राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) पुलिस में दर्ज मामलों के आधार पर जुटाता है. छात्रों की आत्महत्या से जुड़े 2022 के आंकड़े NCRB की ‘Accidental Deaths & Suicide in India (ADSI) 2022’ रिपोर्ट में उपलब्ध हैं. ये भी पढ़ें: IIT बॉम्बे छात्र आत्महत्या केस, डीन सूर्यनारायण डूला सस्पेंड सवाल से संबंधित कागजात देखने के लिए यहां क्लिक करें. वहीं, हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में IIT में छात्रों की मौत से जुड़ा आधिकारिक आंकड़ा सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2020-21 से 2024-25 के बीच देश के अलग-अलग IIT में कम से कम 53 छात्रों की मौत हुई. इनमें आधे से ज्यादा छात्र SC, ST और OBC वर्ग से थे. इन 53 मामलों में 45 आत्महत्या और 8 अप्राकृतिक मौत के मामले शामिल हैं. IIT छात्रों की मौत का डेटा संसद में नहीं हुआ पेश हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, उच्च शिक्षा विभाग के अंडर सेक्रेटरी नीलेश चंद्र श्रीवास्तव ने 1 दिसंबर 2025 को सभी IIT को पत्र भेजकर छात्रों की आत्महत्या से जुड़ी जानकारी मांगी थी. यह जानकारी लोकसभा में पूछे जाने वाले एक सवाल के जवाब के लिए मांगी गई थी. इस सवाल का डायरी नंबर 3682 था और इसे 8 दिसंबर 2025 को पेश किया जाना था. मंत्रालय को सभी IIT से जानकारी मिल गई थी, लेकिन यह आंकड़ा संसद में पेश नहीं किया गया. कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने 8 दिसंबर को IIT और दूसरे केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या से जुड़े सवाल पूछे थे. ये भी पढ़ें: IIT बॉम्बे छात्र आत्महत्या मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला का नाम क्यों आया? जानें कौन हैं IIT में छात्रों की मौत के आंकड़े बढ़े IIT की ओर से शिक्षा मंत्रालय को दी गई जानकारी के मुताबिक, देश के इन बड़े इंजीनियरिंग संस्थानों में छात्रों की मौत के मामले बढ़े हैं. 2020-21 में 5 छात्रों की मौत हुई थी. 2021-22 और 2022-23 में यह संख्या 6-6 रही. इसके बाद 2023-24 में 17 और 2024-25 में 19 छात्रों की मौत दर्ज की गई. कुल मौतों में 84.9 फीसदी मामले आत्महत्या के थे. वहीं, 2024-25 में 19 मौतों में से 6 को अप्राकृतिक मौत की श्रेणी में रखा गया. इन 53 मौतों में सबसे ज्यादा 23 छात्र जनरल कैटेगरी से थे, जो कुल मामलों का 43.4 फीसदी है. इसके बाद OBC वर्ग के 12 छात्र (22.6 फीसदी), SC वर्ग के 10 छात्र (18.9 फीसदी), ST वर्ग के 7 छात्र (13.2 फीसदी) और EWS वर्ग का 1 छात्र (1.9 फीसदी) शामिल था. यानी SC, ST और OBC वर्ग को मिलाकर कुल 29 छात्रों की मौत हुई, जो सभी मामलों का 54.7 फीसदी है. The post IIT में 5 साल में 53 की मौत, साहिल की मौत पर बवाल के बीच SC-ST OBC छात्रों को लेकर आया ये आंकड़ा appeared first on Naya Vichar.

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SC/ST एक्ट जैसा कानून दुनिया के 7 देशों में कैसे काम करता है? जानिए आदिवासी और अल्पसंख्यक अधिकारों की कानूनी सुरक्षा

हिंदुस्तान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के खिलाफ होने वाले विशिष्ट अत्याचारों से निपटने के लिए Scheduled Castes and the Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989 लागू है. यह सामान्य anti-discrimination कानून से अलग है. इसका उद्देश्य केवल भेदभाव को रोकना नहीं, बल्कि SC/ST समुदायों के खिलाफ कानून में परिभाषित कई विशिष्ट कृत्यों को अपराध बनाना, उनके लिए विशेष अदालतों की व्यवस्था करना और पीड़ितों को राहत एवं पुनर्वास देना है. कानून 11 सितंबर 1989 को पारित हुआ और 30 जनवरी 1990 से लागू हुआ. इस कानून की जरूरत के पीछे संसद के Statement of Objects and Reasons में सामाजिक और आर्थिक वंचना, नागरिक अधिकारों से वंचित किए जाने, अपमान, हिंसा, भूमि और श्रम से जुड़े विवाद तथा अस्पृश्यता जैसी ऐतिहासिक परिस्थितियों का उल्लेख किया गया था. लेकिन क्या दुनिया के दूसरे देशों में भी ऐसा कोई कानून है? जवाब है—हां, लेकिन बिल्कुल उसी रूप में नहीं. कई देशों ने अपने इतिहास, उपनिवेशवाद, नस्लीय भेदभाव, दासता, Indigenous dispossession या जातीय संघर्ष के अनुभवों के आधार पर अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाएं बनाई हैं. आइए 10 देशों को समझते हैं. Read more: The post SC/ST एक्ट जैसा कानून दुनिया के 7 देशों में कैसे काम करता है? जानिए आदिवासी और अल्पसंख्यक अधिकारों की कानूनी सुरक्षा appeared first on Naya Vichar.

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MP Police के 7500 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन शुरू, 10वीं पास ऐसे करें अप्लाई

MP Police Constable Recruitment 2026: मध्य प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए आवेदन का इंतजार खत्म हो गया है. मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल यानी MPESB ने पुलिस कांस्टेबल जीडी भर्ती 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू कर दिए हैं. इस भर्ती के तहत कुल 7500 कांस्टेबल पद भरे जाएंगे. आवेदन की प्रक्रिया आज यानी 22 सितंबर से शुरू हुई है. योग्य उम्मीदवार 6 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं. आवेदन के बाद करेक्शन के लिए 11 अक्टूबर तक मौका मिलेगा. लिखित परीक्षा 19 नवंबर 2026 से शुरू होगी.  10वीं पास कर सकते हैं आवेदन MP Police Constable Recruitment 2026 में सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों के लिए कम से कम 10वीं पास होना जरूरी है. एसटी वर्ग के उम्मीदवार 8वीं पास होने पर भी आवेदन कर सकते हैं. उम्र की बात करें तो 6 अक्टूबर 2026 को उम्मीदवार की उम्र कम से कम 18 साल और अधिकतम 33 साल होनी चाहिए. आरक्षित वर्गों को नियम के अनुसार अधिकतम उम्र में छूट मिलेगी. जरूरी तारीखें एक नजर में कार्यक्रम तारीख आवेदन शुरू 22 सितंबर 2026 आवेदन की लास्ट डेट 6 अक्टूबर 2026 करेक्शन की लास्ट डेट 11 अक्टूबर 2026 लिखित परीक्षा 19 नवंबर 2026 से कितनी है आवेदन फीस? सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन फीस 500 रुपये है. एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों के लिए फीस 250 रुपये रखी गई है. आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को ऑफिशियल नोटिफिकेशन जरूर देखनी चाहिए, क्योंकि अलग-अलग श्रेणी और भर्ती व्यवस्था के अनुसार फीस से जुड़े प्रावधान लागू हो सकते हैं. ऑफिशियल नोटिफिकेशन नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर देखा जा सकता है. MP Police Constable Recruitment 2026 Official Notification ऐसे करें MP Police Constable का ऑनलाइन फॉर्म सबसे पहले MPESB की ऑफिशियल वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाएं. इसके बाद पुलिस कांस्टेबल जीडी भर्ती 2026 के Online Form लिंक पर क्लिक करें. अब रजिस्ट्रेशन के लिए मांगी गई जानकारी दर्ज करें और लॉगिन करें. आवेदन फॉर्म में अपनी व्यक्तिगत, शैक्षणिक और कैटेगरी से जुड़ी जानकारी भरें. इसके बाद जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें और उपलब्ध पद/कैडर से जुड़ी जानकारी को ध्यान से भरें. अब ऑनलाइन आवेदन फीस जमा करें. फॉर्म सबमिट करने से पहले पूरी जानकारी दोबारा चेक कर लें. सब कुछ सही होने पर फाइनल सबमिशन करें और कंफर्मेशन पेज का प्रिंटआउट या पीडीएफ सेव करके रख लें. चार चरणों में होगा सेलेक्शन उम्मीदवारों का सेलेक्शन कंप्यूटर बेस्ड लिखित परीक्षा, फिजिकल टेस्ट, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल टेस्ट के जरिए किया जाएगा. लिखित परीक्षा 19 नवंबर 2026 से शुरू होगी.  ये भी पढ़ें: IBPS RRB ग्रामीण बैंक क्लर्क और पीओ भर्ती की लास्ट डेट बढ़ी, अब इस दिन तक भरें फॉर्म The post MP Police के 7500 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन शुरू, 10वीं पास ऐसे करें अप्लाई appeared first on Naya Vichar.

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किचन में चूल्हा रखते समय कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती? घर का माहौल बिगड़ने के साथ बढ़ सकती हैं परेशानियां

Kitchen Vastu Tips: आपको शायद यह जानकर हैरानी हो, लेकिन आपके घर की खुशहाली, अच्छी सेहत और पैसों की बचत का डायरेक्ट कनेक्शन आपके किचन से ही होता है. आपके घर का किचन सिर्फ वह जगह नहीं है जहां हर दिन एक से बढ़कर एक पकवान बनते हैं, बल्कि यह आपके घर का वह पावरहाउस है जहां से आपके घर की पूरी एनर्जी और मूड तय होता है. हमारे वास्तु शास्त्र में भी घर के किचन को मां अन्नपूर्णा और अग्नि देव का बहुत ही पवित्र स्थान बताया गया है. मान्यताओं के अनुसार आप इस जगह पर जो भी चीजें रखते हैं, उसका सीधा असर आपकी जिंदगी पर देखने को मिलता है. लेकिन, सबसे ज्यादा फर्क तो उस समय पड़ता है जब आप गैस-चूल्हे को गलत दिशा में रख देते हैं. अक्सर लोग किचन में चूल्हा रखते समय कुछ ऐसी छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं, जो आगे चलकर उनके घर की शांति को पूरी तरह से बिगाड़ देती हैं. आज इस आर्टिकल में हम आपको बहुत ही आसान शब्दों में गैस-चूल्हे से जुड़े कुछ जरूरी वास्तु नियम समझाने जा रहे हैं. जब आप इन नियमों का सही तरीके से पालन करना शुरू कर देंगे, तो आपके घर में देखते ही देखते खुशियां आने लगेंगी. अग्नि कोण में ही रखें गैस चूल्हा वास्तु शास्त्र के अनुसार आपको किचन में गैस-चूल्हे को हमेशा ही साउथ-ईस्ट कोने यानी कि अग्नि कोण में ही रखना चाहिए. इस कोने को ही अग्नि का कोना माना जाता है. जब आप इस जगह पर चूल्हे को रखकर खाना पकाते हैं, तो घर के लोगों की सेहत अच्छी बनी रहती है और साथ ही आपको पॉजिटिव वाइब्स का भी एहसास होता है. अगर किसी कारण से साउथ-ईस्ट कोने में चूल्हा रखना संभव न हो, तो आप इसे पूर्व यानी कि ईस्ट डायरेक्शन में भी बिना किसी परेशानी के रख सकते हैं. खाना बनाते समय किस तरफ होना चाहिए चेहरा ? किचन में चूल्हा किस जगह पर रखना है, यह तो जरूरी है ही, लेकिन साथ ही यह भी बहुत मायने रखता है कि खाना बनाते समय आपका चेहरा या मुंह किस तरफ है. वास्तु शास्त्र के अनुसार खाना बनाते समय आपका चेहरा हमेशा पूर्व दिशा की तरफ ही होना चाहिए. जब आप खाना बनाते समय इस दिशा की तरफ अपना मुंह करके रखते हैं, तो आपके घर और परिवार में खुशहाली आने लगती है और बीमारियां भी दूर रहती हैं. इसके ठीक विपरीत, अगर आप खाना बनाते समय अपना मुंह दक्षिण दिशा की तरफ करके रखते हैं, तो इससे परिवार के सदस्यों की तबियत खराब हो सकती है. इसके अलावा, अगर आपका मुंह पश्चिम दिशा की तरफ होता है, तो यह पैसों से जुड़ी दिक्कतों का कारण बन सकता है. ये भी पढ़ें: पर्स में पैसे रखने का सही तरीका क्या है? इन छोटी-छोटी बातों का रखें ध्यान, बढ़ेगी पैसों की बचत सिंक और चूल्हे को कभी पास-पास न रखें वास्तु शास्त्र की अगर मानें तो आपके किचन में पानी और आग का सही बैलेंस होना बहुत ही जरूरी है. पानी का सिंक या फिर पीने का पानी कभी भी गैस-चूल्हे के आसपास नहीं होना चाहिए. अगर आग और पानी अगल-बगल होंगे, तो आपके घर में बिना किसी वजह के भी लड़ाई-झगड़े और क्लेश बढ़ने लग जाएंगे. ऐसा न हो, इसलिए कोशिश करें कि इन दोनों ही चीजों के बीच कम से कम 2 से 3 फीट की दूरी जरूर हो. चूल्हे के ठीक ऊपर अलमारी या भारी बीम न बनवाएं आजकल लोग किचन में जगह बचाने के चक्कर में गैस-चूल्हे के ठीक ऊपर कैबिनेट या फिर अलमारी बनवा लेते हैं, या फिर इसी जगह पर छत की भारी बीम भी मौजूद होती है. वास्तु के नजरिये से अगर देखें तो ऐसा करना आपकी बहुत ही बड़ी गलती साबित हो सकती है. मान्यताओं के अनुसार जब आप चूल्हे के ठीक ऊपर भारी चीज बनवा देते हैं, तो इसकी वजह से खाना बनाने वाले इंसान पर बेवजह ही मेंटल स्ट्रेस बढ़ने लग जाता है. इसके अलावा इस एक गलती की वजह से परिवार की सुख-शांति पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है. जानकारों के अनुसार आपको चूल्हे के ऊपर की जगह को हमेशा खुला और साफ-सुथरा ही रखना चाहिए. रात को गंदा चूल्हा छोड़कर न सोएं कई लोगों में यह आदत देखने को मिलती है कि वे रात को खाना बनाने के बाद चूल्हे को वैसा ही गंदा छोड़ देते हैं और फिर अगली सुबह इसकी सफाई करते हैं. मान्यताओं के अनुसार यह छोटी सी आदत आपके घर में नेगेटिव एनर्जी को लेकर आती है और सेहत को भी बिगाड़ने का काम करती है. जब रात में सारे काम खत्म हो जाएं, तो आपको चूल्हे और स्लैब की अच्छे से सफाई कर लेनी चाहिए. मान्यताओं के अनुसार एक साफ-सुथरे और व्यवस्थित किचन में ही मां अन्नपूर्णा का निवास होता है. इनके आशीर्वाद से आपके घर में कभी भी खाने-पीने की चीजों की और पैसों की कमी नहीं होती है. किचन में गैस चूल्हे से जुड़ी इन छोटी-छोटी और सिंपल बातों का ध्यान रखकर आप अपने घर से नेगेटिविटी को बाहर निकाल सकते हैं और अपने परिवार में सुख, शांति और तरक्की ला सकते हैं. ये भी पढ़ें: तिजोरी में रखते हैं पैसा तो भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, बढ़ जाएंगे बेवजह के खर्चे और आने लगेंगी पैसों से जुड़ी परेशानियां The post किचन में चूल्हा रखते समय कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती? घर का माहौल बिगड़ने के साथ बढ़ सकती हैं परेशानियां appeared first on Naya Vichar.

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72nd National Film Awards: ‘Article 370’ के लिए यामी गौतम को मिला बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड, पति आदित्य धर ने जमकर बजाईं तालियां

हिंदुस्तानीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में अभिनेत्री यामी गौतम ने इतिहास रच दिया है. गुजरात के एकता नगर केवड़िया में मंगलवार 22 सितंबर 2026 को आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यामी गौतम को फिल्म ‘Article 370’ में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बेस्ट एक्ट्रेस के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया. यह यामी गौतम के करियर का पहला नेशनल अवॉर्ड है. इस ऐतिहासिक मौके पर उनके पति और मशहूर निर्देशक आदित्य धर भी हॉल में मौजूद रहे और उन्होंने यामी की इस उपलब्धि पर गर्व से जमकर तालियां बजाईं. ब्लैक साड़ी में दिखीं बेहद खूबसूरत पुरस्कार समारोह के दौरान यामी गौतम पारंपरिक ब्लैक और गोल्डन बॉर्डर वाली साड़ी में बेहद खूबसूरत और खूबसूरत नज़र आईं. जैसे ही उनका नाम पुकारा गया, उन्होंने मंच पर पहुँचकर सबसे पहले हाथ जोड़कर दर्शकों का अभिवादन किया और फिर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों यह सर्वोच्च सम्मान स्वीकार किया. यामी गौतम का भावुक संदेश: ’14 साल की मेहनत रंग लाई’ नेशनल अवॉर्ड मिलने के बाद यामी गौतम ने सोशल मीडिया (X) पर एक बेहद भावुक नोट शेयर करते हुए अपनी खुशी जाहिर की. यामी ने लिखा: “हर सफर में एक ऐसा पल आता है जो आपको याद दिलाता है कि आपने कभी हार क्यों नहीं मानी. मेरे लिए आज वही पल है. ‘Article 370’ के लिए नेशनल अवॉर्ड मिलना एक ऐसा सम्मान है जिसे मैं जीवन भर संभालकर रखूंगी.” उन्होंने आगे कहा: “14 सालों से मैंने सिर्फ अपने काम के प्रति सच्चे रहने, ईमानदारी से काम करने और अपनी अदाकारी को बोलने देने की कोशिश की है. यह सम्मान उम्मीद, दृढ़ता और सिनेमा के प्रति अटूट प्यार से भरे सफर का नतीजा लगता है. ‘Article 370’ मेरे लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, यह एक ऐसी कहानी थी जिस पर मुझे गहरा विश्वास था. यह हमारी होम प्रोडक्शन फिल्म थी, जिसने इस सम्मान को और भी अधिक भावुक और खास बना दिया है.” पहली बार दिल्ली से बाहर हुआ आयोजन 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड समारोह का आयोजन इस बार राजधानी दिल्ली से बाहर गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में किया गया. राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब दिल्ली के बाहर इस भव्य कार्यक्रम को आयोजित किया गया था. ‘Article 370’ को मिला दर्शकों का भी भरपूर प्यार फिल्म ‘Article 370’ को आदित्य धर के बैनर तले बनाया गया था, जिसमें यामी गौतम ने एक इंटेलिजेंस ऑफिसर की दमदार भूमिका निभाई थी. उनके इस किरदार की समीक्षाओं में भी काफी तारीफ हुई थी और अब नेशनल अवॉर्ड मिलने से उनके 14 साल के फिल्मी करियर पर एक बड़ा ऐतिहासिक ठप्पा लग गया है. ये भी पढ़ें: National Film Awards: बिहार के लाल संजय मिश्रा को मिला पहला नेशनल अवॉर्ड, राष्ट्रपति मुर्मू ने किया सम्मानित The post 72nd National Film Awards: ‘Article 370’ के लिए यामी गौतम को मिला बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड, पति आदित्य धर ने जमकर बजाईं तालियां appeared first on Naya Vichar.

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संताली फिल्म ‘आंगेन’ के लिए रवि राज मुर्मू को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

जमशेदपुर : संताली सिनेमा और झारखंड के लिए मंगलवार का दिन महत्वपूर्ण रहा. संताली लघु फिल्म ‘आंगेन’ के निर्देशक रवि राज मुर्मू को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में ‘बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर’ (नॉन-फीचर) का पुरस्कार प्रदान किया गया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में आयोजित समारोह में पुरस्कार प्रदान किया. रवि राज मुर्मू की फिल्म ‘आंगेन’ ने संताली भाषा और झारखंड की लोककथा आधारित सिनेमा को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई. पहली बार किसी संताली फिल्म को नॉन-फीचर फिल्म श्रेणी में सम्मान 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में पहली बार किसी संताली फिल्म को नॉन-फीचर फिल्म श्रेणी में सम्मान मिला. ‘आंगेन’ के लिए रवि राज मुर्मू को बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर का पुरस्कार दिया गया.‘आंगेन’ को संताली भाषा में बनी ऐसी फिल्म के रूप में देखा गया, जिसने स्थानीय संस्कृति, लोककथाओं और आदिवासी समाज की कहानी को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का काम किया. फिल्म की सफलता ने संताली भाषा में फिल्म निर्माण को लेकर नई चर्चा भी शुरू की है. झारखंड के जमशेदपुर से राष्ट्रीय मंच तक पहुंचे रवि राज रवि राज मुर्मू झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा क्षेत्र से जुड़े फिल्म निर्देशक हैं. उनकी फिल्म ‘आंगेन’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए सम्मानित किए जाने की घोषणा जुलाई 2026 में हुई थी. इसके बाद से ही झारखंड और संताली समाज में इस उपलब्धि को लेकर चर्चा रही. राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हिंदुस्तानीय सिनेमा के प्रमुख राष्ट्रीय सम्मानों में शामिल हैं. 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में वर्ष 2024 की फिल्मों और फिल्म निर्माण से जुड़ी उपलब्धियों को सम्मानित किया गया. पुरस्कारों की घोषणा 18 जुलाई 2026 को की गई थी. ‘आंगेन’ ने दिखाई संताली कहानी कहने की ताकत ‘आंगेन’ की उपलब्धि केवल एक फिल्म या एक निर्देशक के पुरस्कार तक सीमित नहीं रही. इसने संताली भाषा में बनने वाली फिल्मों और स्थानीय कहानियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने की संभावनाओं को भी सामने रखा. फिल्म के माध्यम से लोककथा, गांव की मिट्टी, परंपरा और अपनी जड़ों से जुड़े रहने जैसे विषयों को सामने लाया गया है.राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद संताली सिनेमा से जुड़े कलाकारों, लेखकों और युवाओं के बीच भी नई उम्मीद जगी है. इससे संताली भाषा में फिल्म निर्माण को आगे बढ़ाने और स्थानीय कथाओं को बड़े मंच तक पहुंचाने के लिए प्रेरणा मिलने की संभावना है. झारखंड लौटने पर होगा स्वागत राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त करने के बाद रवि राज मुर्मू के झारखंड लौटने पर उनके स्वागत की तैयारी की गई है. बुधवार को बिरसा मुंडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, रांची पर उनके आगमन के दौरान स्वागत कार्यक्रम रखा गया है. रवि राज मुर्मू की यह उपलब्धि संताली सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में दर्ज हुई है. ‘आंगेन’ के लिए मिला राष्ट्रीय सम्मान झारखंड की स्थानीय भाषा, संस्कृति और कहानी कहने की परंपरा को देश के बड़े फिल्म मंच तक पहुंचाने वाला अवसर बना है. The post संताली फिल्म ‘आंगेन’ के लिए रवि राज मुर्मू को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित appeared first on Naya Vichar.

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India Vs Japan T20I: आखिरी ओवर में अंपायर के फैसले पर क्यों छिड़ी बहस? जानें क्या कहता है ICC का नियम

Wide Controversy: हिंदुस्तान और जापान के बीच स्पोर्ट्सा गया ऐतिहासिक टी20 इंटरनेशनल मुकाबला भले ही हिंदुस्तान की जीत के साथ खत्म हुआ, लेकिन आखिरी ओवर का एक फैसला चर्चा का विषय बन गया. जापान को जीत के लिए आखिरी चार गेंदों में सिर्फ 6 रन चाहिए थे. तभी अक्षर पटेल की एक गेंद लेग साइड की ओर गई और जापान के बल्लेबाज अलेक्जेंडर शिराई-पैटमोर रिवर्स स्वीप स्पोर्ट्सने से चूक गए. मैदानी अंपायर ने शुरुआत में गेंद को वाइड करार दिया. हालांकि, अक्षर पटेल और हिंदुस्तानीय कप्तान श्रेयस अय्यर की आपत्ति के बाद अंपायर ने अपना फैसला बदल दिया. इसके बाद सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर बहस छिड़ गई. खास बात यह रही कि जापान अंत में सिर्फ 2 रन से मुकाबला हार गया, इसलिए आखिरी ओवर का यह फैसला और भी अहम हो गया. लेकिन सवाल यह है कि क्या अंपायर अपना वाइड का फैसला बदल सकता है? और रिवर्स स्वीप जैसी स्थिति में वाइड का नियम क्या कहता है? लेग साइड की गेंद कब होती है वाइड? आईसीसी के मौजूदा स्पोर्ट्स नियमों के अनुसार, किसी गेंद को वाइड तभी माना जाता है जब वह बल्लेबाज की पहुंच से इतनी दूर हो कि सामान्य क्रिकेट शॉट से उसे स्पोर्ट्सना संभव न हो. नियम 22.1.2 के मुताबिक, गेंद को बल्लेबाज से बाहर माना जाएगा, जब तक कि वह इतनी पहुंच के भीतर न हो कि बल्लेबाज उसे सामान्य क्रिकेट शॉट से मार सके. यानी सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि गेंद लेग साइड पर गई है. अंपायर को यह भी देखना होता है कि क्या बल्लेबाज सामान्य शॉट स्पोर्ट्सकर उस गेंद तक पहुंच सकता था. ये भी पढ़ें: Richest Cricket Board: आखिर कौन है दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड? देखें टॉप-10 की पूरी लिस्ट रिवर्स स्वीप ने बढ़ाया पेंच हिंदुस्तान-जापान मैच में यही स्थिति थोड़ी पेचीदा हो गई. शिराई-पैटमोर रिवर्स स्वीप स्पोर्ट्सने की कोशिश कर रहे थे और गेंद लेग साइड की ओर घूम गई. बल्लेबाज शॉट से चूक गए और अंपायर ने पहले इसे वाइड दे दिया. बाद में फैसला बदलने के पीछे यह तर्क हो सकता है कि बल्लेबाज ने एक सामान्य क्रिकेट शॉट स्पोर्ट्सने की कोशिश की थी और गेंद उसकी पहुंच में थी. हालांकि, गेंद के काफी ज्यादा लेग साइड की ओर घूमने की वजह से यह सवाल भी उठता है कि क्या वह वास्तव में बल्लेबाज की पहुंच में थी. आईसीसी के नियमों में रिवर्स स्वीप या स्विच हिट के लिए अलग से कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है. यही वजह है कि ऐसी परिस्थितियों में अंपायर का फैसला परिस्थितियों की व्याख्या पर निर्भर कर सकता है. क्या अंपायर अपना फैसला बदल सकता है? यह फैसला बदलना भले ही मैदान पर कम देखने को मिलता हो, लेकिन क्रिकेट के नियम अंपायर को कुछ परिस्थितियों में ऐसा करने की अनुमति देते हैं. लॉ 2.12 के अनुसार, अंपायर अपना फैसला बदल सकता है, बशर्ते बदलाव तुरंत किया जाए और वह डेड बॉल से जुड़े नियमों के खिलाफ न हो. एक बार फैसला लेने के बाद वह अंतिम माना जाता है, लेकिन उसे तुरंत बदलने की सीमित गुंजाइश मौजूद है. इसलिए हिंदुस्तान-जापान मुकाबले में अंपायर का वाइड का फैसला बदलना नियमों से पूरी तरह बाहर की बात नहीं थी. असली बहस इस बात पर है कि क्या उस गेंद को वाइड माना जाना चाहिए था या नहीं. ऐसा पहली बार नहीं हुआ रिवर्स स्वीप पर वाइड का फैसला बदलने का ऐसा मामला पहले भी सामने आ चुका है. सितंबर 2024 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की स्त्री टी20 सीरीज के दौरान भी एलिस पेरी लेग साइड की गेंद पर रिवर्स स्वीप स्पोर्ट्सने से चूक गई थीं. अंपायर ने पहले गेंद को वाइड दिया, लेकिन तुरंत अपना फैसला बदल दिया था. ये भी पढ़ें: Colin Ingram Retirement: 41 साल की उम्र में साउथ अफ्रीकी दिग्गज का संन्यास, अब इस नई भूमिका में आएंगे नजर The post India Vs Japan T20I: आखिरी ओवर में अंपायर के फैसले पर क्यों छिड़ी बहस? जानें क्या कहता है ICC का नियम appeared first on Naya Vichar.

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UP सरकार 2026 में क्यों नहीं करा पा रही ग्राम पंचायत चुनाव?, जानिए 10 महत्वपूर्ण बातें

UP Panchayat Election 2026: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर गांवों में बेचैनी बढ़ती जा रही है. ग्राम प्रधान से लेकर बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य बनने की तैयारी कर रहे दावेदार चुनाव की तारीख का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अब तक मतदान कार्यक्रम को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है. खास बात यह है कि एक ओर यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गयी हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार कार्यक्रमों के जरिए जनता के बीच पहुंच रहे हैं, विपक्षी दल भी चुनावी तैयारियों में जुटे हैं और पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी लगातार कार्यक्रम कर रहे हैं, लेकिन पंचायत चुनाव की तारीख को लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों की ओर से चुप्पी बनी हुई है. दूसरी ओर, प्रदेश की निगाहें कोर्ट में चल रही सुनवाई पर टिकी हैं, लेकिन सुनवाई भी आगे बढ़ती जा रही है. ऐसे में सवाल है कि पंचायत चुनाव आखिर कब होगा और 2026 में चुनाव कराने की राह में कौन-कौन से पेंच फंसे हैं? पंचायतों का कार्यकाल पूरा, लेकिन चुनाव कार्यक्रम नहीं आया उत्तर प्रदेश में पिछला त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अप्रैल 2021 में हुआ था. पांच साल का कार्यकाल 2026 में पूरा हो चुका है, इसके बावजूद अभी तक राज्य निर्वाचन आयोग ने आम पंचायत चुनाव के लिए मतदान कार्यक्रम जारी नहीं किया है. यही वजह है कि गांवों में संभावित प्रत्याशियों की नजर लगातार चुनाव की तारीख पर बनी हुई है. सबसे बड़ा पेच OBC आरक्षण का यूपी पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC आरक्षण तय करना इस पूरी प्रक्रिया की अहम कड़ी है, इसके लिए प्रशासन ने समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया था. आयोग को पिछड़ेपन से जुड़े आंकड़ों और सामाजिक-नेतृत्वक स्थिति का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करनी है, इसके बाद आरक्षण की तस्वीर स्पष्ट होगी. आरक्षण तय हुए बिना सीटों का अंतिम गणित अधूरा ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के पदों पर किस सीट को किस वर्ग के लिए आरक्षित किया जाएगा, यह चुनाव की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है. आरक्षण सूची जारी होने के बाद ही दावेदारों को अपनी सीट की वास्तविक स्थिति पता चलेगी, इसलिए आरक्षण प्रक्रिया पूरी हुए बिना चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप देना कठिन है. हाईकोर्ट में भी चुनाव को लेकर सुनवाई हुई यूपी पंचायत चुनाव में देरी का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है. अदालत ने चुनाव प्रक्रिया और OBC आरक्षण को लेकर प्रशासन तथा राज्य निर्वाचन आयोग से जानकारी मांगी है. अदालत ने पंचायतों का कार्यकाल पांच साल से आगे बढ़ाने के सवाल पर भी सख्त रुख अपनाया है. मतदाता सूची में भी हुआ बदलाव पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया चली. राज्य निर्वाचन आयोग ने 2026 की पंचायत मतदाता सूची उपलब्ध कराई है और मतदाता खोजने की सुविधा भी जारी है. आयोग की वेबसाइट पर अब पंचायत 2025-26 की मतदाता सूची और वोटर सर्च की व्यवस्था मौजूद है. परिसीमन से बदले पंचायत और वार्ड के समीकरण चुनाव से पहले पंचायतों और वार्डों की स्थिति में बदलाव भी महत्वपूर्ण है. अलग-अलग जिलों में परिसीमन की प्रक्रिया के बाद ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के क्षेत्र में बदलाव हुआ है, इसका सीधा असर सीटों और चुनावी समीकरण पर पड़ता है. राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत, ग्राम पंचायत और वार्ड का विवरण भी उपलब्ध कराया गया है. सिर्फ चुनाव की तारीख तय करना काफी नहीं पंचायत चुनाव एक बड़े स्तर की चुनावी प्रक्रिया है. मतदाता सूची, पंचायत और वार्ड का विवरण, आरक्षण, मतदान केंद्र, कर्मचारियों की तैनाती और चुनावी तकनीकी व्यवस्था जैसी तैयारियां पूरी करनी होती हैं. राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अगस्त 2026 में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन के लिए FRS सर्वर की सुरक्षा, फायरवॉल, MDM और इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी ऑडिट से जुड़ी ई-निविदा भी जारी की गई, इससे साफ है कि चुनाव की तकनीकी तैयारियां चल रही हैं. चुनाव में EVM की तैयारियां भी शामिल राज्य निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में मई 2026 में पंचायत चुनाव के लिए EVM खरीद से संबंधित ई-टेंडर का उल्लेख है. चुनाव प्रक्रिया के लिए सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि तकनीकी और मतदान संबंधी तैयारियां भी आगे बढ़ाई जा रही हैं. सोशल मीडिया पर चल रही तारीखों पर भरोसा नहीं पंचायत चुनाव को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तारीखें वायरल होती रही हैं, लेकिन जब तक राज्य निर्वाचन आयोग आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं करता, इन तारीखों को चुनाव की पक्की तारीख मानना सही नहीं है. सितंबर 2026 तक आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर पंचायत चुनाव के लिए मतदान कार्यक्रम की घोषणा दिखाई नहीं देती. अब सबसे बड़ा इंतजार आरक्षण और चुनाव कार्यक्रम का यूपी पंचायत चुनाव की कई अहम तैयारियां आगे बढ़ चुकी हैं, लेकिन आरक्षण की अंतिम तस्वीर और आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम अभी सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव हैं. राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर पंचायत चुनाव 2025-26 के लिए मतदाता सूची, पंचायत विवरण और तकनीकी तैयारियों से संबंधित गतिविधियां जारी हैं. ऐसे में अब गांवों की नजर आरक्षण सूची और चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना पर है. यह भी पढ़ें: यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव का ऐलान, 16 अक्टूबर को वोटिंग, ऐसे समझें BJP-सपा के बीच सीटों का गणित The post UP प्रशासन 2026 में क्यों नहीं करा पा रही ग्राम पंचायत चुनाव?, जानिए 10 महत्वपूर्ण बातें appeared first on Naya Vichar.

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Maruti की सबसे ज्यादा माइलेज देने वाली गाड़ियां हुई महंगी, जानें कौन सी कार पर कितने बढ़ेंगे दाम

अगर आप Maruti Suzuki की कोई सस्ती कार खरीदने का प्लान कर रहे हैं, तो यह समाचार आपके लिए है. त्योहारी सीजन से पहले कंपनी ने अपनी दो सबसे पापुलर और अफोर्डेबल हैचबैक कारों को महंगा कर दिया है. आइए जानते हैं किन गाड़ियों के दाम बढ़ें हैं और आपकी जेब पर इसका कितना असर पड़ेगा. किन वेरिएंट्स की कीमत बढ़ी? Maruti Suzuki Celerio के VXi, ZXi और ZXi Plus पेट्रोल वेरिएंट्स की कीमत में ₹2,500 की बढ़ोतरी हुई है. यह बढ़ोतरी मैनुअल और AMT दोनों पेट्रोल वेरिएंट्स पर लागू है. मौजूदा एक्स-शोरूम कीमतों के मुताबिक: LXi MT: ₹4.69 लाख VXi MT: ₹5.18 लाख VXi AGS: ₹5.63 लाख ZXi MT: ₹5.73 लाख ZXi AGS: ₹6.18 लाख ZXi+ MT: ₹6.30 लाख ZXi+ AGS: ₹6.75 लाख VXi CNG: ₹5.97 लाख नोट: ये Maruti Suzuki की मौजूदा वेबसाइट पर दी गई कीमतें हैं. ये भी पढ़ें: Honda QC3 इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च: 145 km की रेंज और ₹1.35 लाख शुरुआती कीमत, मात्र ₹5,000 में शुरू हुई बुकिंग CNG मॉडल की कीमत में बदलाव नहीं Celerio VXi CNG की कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. इसकी एक्स-शोरूम कीमत ₹5.97 लाख बनी हुई है. CNG मॉडल में 1.0-लीटर इंजन मिलता है, जो 56bhp की पावर और 82Nm का टॉर्क जनरेट करता है. इसे सिर्फ 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स के साथ पेश किया जाता है. कंपनी के मुताबिक इसकी क्लेम्ड माइलेज 34.43 km/kg है. Celerio में कितना पावरफुल इंजन? Maruti Celerio में 1.0-लीटर, 3-सिलेंडर K10C पेट्रोल इंजन मिलता है. पेट्रोल इंजन: पावर: 66bhp टॉर्क: 89Nm गियरबॉक्स: 5-स्पीड मैनुअल/AMT AMT माइलेज: 26 kmpl तक Maruti की वेबसाइट पर Celerio के अलग-अलग पेट्रोल वेरिएंट्स के लिए 24.97 से 26 kmpl तक की फ्यूल एफिशिएंसी दी गई है. सेफ्टी में 3-स्टार रेटिंग Celerio की सेफ्टी को लेकर भी हाल में टेस्टिंग हुई है. 6 एयरबैग वाले Celerio वेरिएंट को Bharat NCAP में 3-स्टार रेटिंग मिली है. यह रेटिंग 6-airbag वर्जन के लिए है, जबकि टेस्ट में 2-airbag वर्जन भी शामिल था. Alto K10 भी हुई महंगी Maruti Suzuki ने हाल में Alto K10 के कुछ वेरिएंट्स की कीमत में भी ₹2,500 तक की बढ़ोतरी की है. इसमें चुनिंदा VXi (O) पेट्रोल मैनुअल, VXi (O) पेट्रोल ऑटोमैटिक और CNG वेरिएंट्स शामिल हैं. Alto K10 में 1.0-लीटर पेट्रोल इंजन मिलता है. कंपनी के मुताबिक इसके पेट्रोल मैनुअल और ऑटोमैटिक वेरिएंट क्रमशः 24.39 kmpl और 24.90 kmpl तक माइलेज देते हैं. CNG वेरिएंट की क्लेम्ड माइलेज 33.85 km/kg है. 7-सीटर Grand Vitara से लेकर Ertiga Facelift तक तैयारी Maruti Suzuki आने वाले समय में अपने पोर्टफोलियो में कई बड़े अपडेट करने की तैयारी कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी 7-सीटर Grand Vitara पर काम कर रही है. इसका कोडनेम Y17 बताया जा रहा है और इसे 2027 में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है. इसमें 6 और 7 सीटिंग लेआउट के विकल्प मिलने की संभावना है. हालांकि, कंपनी की ओर से अभी इन जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. Ertiga Facelift में क्या बदलेगा? Maruti Ertiga Facelift को भी अपडेट के साथ लाने की तैयारी की जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इसे 2026 के आखिर से फरवरी 2027 के बीच लॉन्च किया जा सकता है. संभावित बदलावों में शामिल हैं: नई ग्रिल स्लिम LED हेडलाइट नए DRLs अपडेटेड बंपर नए 16-इंच अलॉय व्हील 9-इंच SmartPlay Pro+ टचस्क्रीन हालांकि, इन आगामी मॉडल्स की लॉन्च टाइमलाइन और फीचर्स को लेकर Maruti की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है. ये भी पढ़ें: 1 मिनट में 100 km की रेंज और 10 साल की वारंटी, चीन ने पेश की हैरान करने वाली टेक्नोलॉजी The post Maruti की सबसे ज्यादा माइलेज देने वाली गाड़ियां हुई महंगी, जानें कौन सी कार पर कितने बढ़ेंगे दाम appeared first on Naya Vichar.

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