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Ganesh Chauth 2026: गणेश चौठ कब मनाया जाएगा? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Ganesh Chauth 2026: गणेश चौठ भाद्रपद यानी भादो मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. भविष्य पुराण के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था. इसलिए इस दिन गणपति की पूजा-अर्चना की जाती है. शास्त्रों के अनुसार, गणेश चौठ पर शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश का पूजन करने से विघ्न (बाधा) दूर होता है. साथ ही, गणपति जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है. गणेश चौठ की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और विधि क्या है, जानिए. गणेश चौठ 2026 शुभ मुहूर्त और महत्व भविष्य पुराण के अनुसार भाद्रपद (भादो) मास की चतुर्थी के दिन मध्याह्न काल में भगवान गणेश का जन्म हुआ था. इसलिए उनकी पूजा के लिए मध्याह्न काल का समय सबसे अच्छा माना गया है. इस दौरान उनकी पूजा करने से मनोकामना पूरी होने की मान्यता है. मिथिला और काशी के पंचांग के मुताबिक, इस साल गणेश चौठ 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा. इस दिन मध्याह्न पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजकर 58 मिनट तक है. गणपति की पूजा के लिए 2 घंटे 28 मिनट का समय मिलेगा. चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होगी जबकि इसकी समाप्ति 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर होगी. इस दिन चंद्रमा के उदित होने का समय शाम 7 बजकर 36 मिनट है. चंद्रोदय के बाद ‘चौठ चंद्र’ पूजन का समय शाम 7 बजकर 36 मिनट से शुरू है. मुहूर्त विवरण तारीख और समय गणेश चौठ 2026 14 सितंबर 2026, सोमवार चतुर्थी तिथि प्रारंभ 14 सितंबर, सुबह 7:06 बजे चतुर्थी तिथि समाप्त 15 सितंबर, सुबह 7:44 बजे गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त 14 सितंबर, सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक पूजा की कुल अवधि 2 घंटे 28 मिनट चंद्रोदय का समय 14 सितंबर, शाम 7:36 बजे चौठ चंद्र पूजन प्रारंभ शाम 7:36 बजे से ये भी पढ़ें: Ganesh Chaturthi Special: कार्तिकेय ने लगाई पृथ्वी की दौड़, गणेश जी ने माता-पिता की परिक्रमा से जीत ली बाजी गणेश चौठ 2026 पूजा विधि भाद्रपद यानी भादो शुक्ल चतुर्थी को सुबह नहाने के बाद शुद्ध आसन पर पूरब की तरफ मुंह करके बैठ जाएं. भगवान गणेश के लिए एक छोटी चौकी स्थापित करें. चौकी को गंगाजल से शुद्ध कर उसकी पूजा करें फिर उस पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें. शास्त्रों के अनुसार, मूर्ति सोने, चांदी, तांबे, पीतल, मिट्टी या गाय के गोबर से बना होना चाहिए. पूजन से पहले संकल्प लें और इसके बाद कलश स्थापित करें. कलश की स्थापना करने के बाद नवग्रह, दशदिग्पाल (दसों दिशाओं के देवता) का पूजन करें. दशदिग्पाल की पूजा के बाद भगवान गणेश का शोडषोपचार, दशोपचार या पंचोपचार जो बन सके, पूजा करें. गणेश जी का ध्यान “ॐ एकदन्तं शूर्पकर्णं गजवक्त्रं चतुर्भुजम्, पाशांकुशधरं देवं ध्यायेत् सिद्धिविनायकम्” इस मंत्र के करें. संभव हो, गणपति जी का ध्यान करने के बाद दूर्वा (घास) की 21 गांठ अर्पित करें. अगर ऐसा संभव न हो सके, तो कम से कम एक दूर्वा जरूर अर्पित करें. दूर्वा के साथ-साथ गणेश जी को शमी का पत्ता भी चढ़ाएं. इसके बाद घी से बना हुआ मोदक अर्पित करें. इसके अलावा गुड़ और घी से बना कोई दूसरा पकवान भी चढ़ा सकते हैं. भोग में गणपति बप्पा को मौसम के अनुकूल फल जैसे- केला, सेब, जामुन और नारियल भी चढ़ाएं, क्योंकि ये चीजें भी उनको प्रिय हैं. भगवान गणेश को सिंदूर, अबीर, सुगंधित फूल अर्पित करने के साथ-साथ उन्हें धूप-दीप दिखाएं. इतना करने के बाद अरती करें और तीन बार उनकी परिक्रमा करें. गणेश चौठ (चतुर्थी) पूजा विधि इंफोग्राफिक Image- AI ये भी पढ़ें: Ganesh Chaturthi Special: गणेश जी की भूख के आगे कम पड़ गया कुबेर का खजाना, ऐसे टूटा धन के देवता का घमंड The post Ganesh Chauth 2026: गणेश चौठ कब मनाया जाएगा? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि appeared first on Naya Vichar.

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भारत, चीन और रूस की बढ़ती ताकत से बदल रहा पावर बैलेंस! समझिए BRICS कैसे बना रहा है नया वर्ल्ड ऑर्डर?

आज(11 सितंबर) से अगले तीन दिनों तक दुनिया की नजरें दिल्ली पर रहने वाली हैं. वजह है 12 और 13 सितंबर को हिंदुस्तान मंडपम में होने वाला BRICS शिखर सम्मेलन. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत BRICS के सदस्य देशों के नेता और कई साझेदार देशों के प्रतिनिधि इस बैठक में जुट रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं. BRICS का शिखर सम्मेलन अब सिर्फ एक और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन तक सीमित नहीं है, करीब दो दशक पहले कुछ उभरती वित्तीय स्थितिओं के मंच के तौर पर शुरू हुआ BRICS आज 11 सदस्य देशों का मजबूत समूह बन चुका है. जो दुनिया की करीब 49.5 फीसदी आबादी, 40 फीसदी वैश्विक जीडीपी और 26 फीसदी वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं. ऐसे में इस सम्मेलन से अलग,अहम सवाल ये है कि क्या BRICS अब सिर्फ सहयोग का मंच नहीं होकर, दुनिया के आर्थिक और कूटनीतिक शक्ति-संतुलन को बदलने वाला नया केंद्र बन रहा है? आसान भाषा में कहें तो क्या BRICS नया वर्ल्ड ऑर्डर बना रहा है? 20 सालों में कितनी बदली BRICS की तस्वीर? BRICS की कहानी सिर्फ सहयोग संगठन तक सीमित नहीं है. इससे आगे संगठन में शामिल देशों के बीच बढ़ता आपसी व्यापार, स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन की कोशिश, न्यू डेवलपमेंट बैंक जैसा वैकल्पिक वित्तीय संस्थान और वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की ज्यादा हिस्सेदारी की मांग है, जो The post हिंदुस्तान, चीन और रूस की बढ़ती ताकत से बदल रहा पावर बैलेंस! समझिए BRICS कैसे बना रहा है नया वर्ल्ड ऑर्डर? appeared first on Naya Vichar.

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A Name Marriage Life: A नाम से शुरू होता है आपका नाम? जानें रिश्तों और शादीशुदा जिंदगी को लेकर क्या कहता है नाम ज्योतिष

A Name Marriage Life: नेम एस्ट्रोलॉजी यानी नाम ज्योतिष में आपके नाम का पहला अक्षर आपके स्वभाव और पसंद-नापसंद जैसी कई चीजों के बारे में झलक मिलती है. चैल्डियन न्यूमेरोलॉजी के अनुसार अगर A (ए) अक्षर (अंग्रेजी) के बारे में बात करें तो A को अंक 1 से जोड़ा जाता है. अंक 1 को आत्मविश्वास, नेतृत्व और अपनी बात पर कायम रहने वाला माना जाता है. रिश्ते में अपनी बात रखना पसंद करते हैं नाम ज्योतिष की मान्यता के अनुसार A नाम वाले लोग अपनी सोच को लेकर काफी स्पष्ट होते हैं. वे जानते हैं कि उन्हें क्या हासिल करना है, इसके अलावा रिश्तों के मामले में भी वे अपने पक्ष को मजबूती से रखते हैं. उनका ये स्वभाव उन्हें जीवन में अहम फैसले लेने में मदद करता है. कभी-कभार वे रिश्तों में डिसिजन लेने को लेकर परेशान हो सकते हैं, पर अगर वे अपने हर फैसले को लेकर अड़े रहें, तो ये कभी-कभी अत्यधिक जिद रिश्ते में संवाद की समस्या पैदा कर सकती है. A नाम वालों को अपनी बात सामने रखने के साथ-साथ सामने वाले की बात को समझना बेहद जरूरी है. प्यार में ईमानदारी और सम्मान को देते हैं महत्व अंक ज्योतिष में अंक 1 के बारे में कहा जाता है कि वे स्वतंत्र सोच वाले माने जाते हैं और आत्मसम्मान को लेकर काफी सचेत रहते हैं. न्यूमरोलॉजी की मान्यता के अनुसार A नाम के अक्षर वाले लोग प्यार में सम्मान की इच्छा रखते हैं. उन्हें ये पसंद होता है कि उनका पार्टनर उनकी बातों को समझे और अहमियत दे. नाम ज्योतिष की मान्यता के अनुसार A नाम वाले लोग रिश्ते को लेकर काफी जिम्मेदार और समर्पित रह सकते हैं. ये भी पढ़ें: Numerology: प्यार में जल्दी नहीं पड़ते ये मूलांक वाले, पहले करते हैं पूरी जांच-परख शादीशुदा जिंदगी में यह बात रखें ध्यान अंक ज्योतिष में माना जाता है कि A नाम वाले शादीशुदा लोगों को जिद से बचने की जरूरत है. कभी-कभी छोटी बातों पर बहस करने की बजाय बातचीत से उसे सुलझाने की जरूरत होती है, ऐसे में उनकी मैरिड लाइफ हैप्पी रहती है. फैसले लेने में अपने पार्टनर की राय लेने से काम आसान हो सकता है और रिश्ते मजबूत हो सकते हैं. क्या ज्योतिष भी यही कहता है? ये बात जानना जरूरी है कि सिर्फ नाम का पहला अक्षर किसी की शादीशुदा जीवन की भविष्यवाणी नहीं करता है. लेकिन नेम एस्ट्रोलॉजी यानी नाम ज्योतिष के बारे में ज्योतिषाचार्य नितेश निरंजन के अनुसार, वैदिक ज्योतिष की परंपरा में विवाह संबंधी आकलन के दौरान 7वें भाव, उसके स्वामी और शुक्र की स्थिति को देखा जाता है. नाम ज्योतिष और कुंडली में अंतर इसलिए न्यूमरोलॉजी की मान्यता के अनुसार A नाम वालों के बारे में बताए गए संकेतों को सामान्य ज्योतिषीय मान्यता के तौर पर देखना चाहिए. वैवाहिक जीवन के बारे में भविष्यवाणी करने के लिए कुंडली आधारित ज्योतिषीय आकलन के लिए सामान्य तौर पर जन्म तारीख, जन्म समय और जन्म स्थान का इस्तेमाल किया जाता है. A नाम वाली स्त्री ने बताया अपना अनुभव देवघर की एक स्त्री, जिनका नाम A अक्षर से शुरू होता है, ने बताया कि उन्हें और उनके पति को न्यूमरोलॉजी से जुड़ी सामग्री पढ़ने में रुचि है. उनके अनुसार, कभी-कभी वह अपनी बात पर अड़ जाती हैं, लेकिन दोनों एक-दूसरे की राय और सहयोग को महत्व देते हैं. नोट: ये ज्योतिषीय मान्यताएं हैं और नया विचार इसकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं करता है. The post A Name Marriage Life: A नाम से शुरू होता है आपका नाम? जानें रिश्तों और शादीशुदा जिंदगी को लेकर क्या कहता है नाम ज्योतिष appeared first on Naya Vichar.

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BRICS Summit 2026 LIVE: दिल्ली में 30 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात, PM मोदी करेंगे राष्ट्रपति पुतिन से द्विपक्षीय बातचीत

BRICS Summit 2026 LIVE : 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी हिंदुस्तान को सौंपी गई है. यह सम्मेलन 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के हिंदुस्तान मंडपम में आयोजित हो रहा है. वर्ल्ड लीडर्स के आने का सिलसिला जारी है. ब्रिक्स समिट की हर अपडेट के लिए जुड़े रहें नया विचार के साथ. The post BRICS Summit 2026 LIVE: दिल्ली में 30 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात, PM मोदी करेंगे राष्ट्रपति पुतिन से द्विपक्षीय बातचीत appeared first on Naya Vichar.

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BRICS Summit Menu : PM मोदी से लेकर विदेशी मेहमानों तक की थाली में क्या होगा? ऐसे तय होता है खाना

BRICS Summit Menu : BRICS सम्मेलन में दुनिया के बड़े नेता एक साथ बैठकर कई अहम मुद्दों पर बात करेंगे. लेकिन इस बड़े सम्मेलन की एक और खास तैयारी भी चल रही है और वह है मेहमानों के खाने की तैयारी. हिंदुस्तान में होने वाले 18वें BRICS सम्मेलन के लिए दिल्ली के बड़े होटलों ने विदेशी मेहमानों के लिए खास खाना तैयार किया है. इसमें हिंदुस्तानीय स्वाद के साथ उनकी पसंद और खाने से जुड़ी जरूरतों का भी ध्यान रखा जा रहा है. ये भी पढ़ें: BRICS Summit 2026 LIVE: PM मोदी ने संस्कृत के श्लोक से किया ब्रिक्स का आगाज, राष्ट्रपति पुतिन से करेंगे द्विपक्षीय बातचीत विदेशी मेहमानों की थाली में दिखेगा हिंदुस्तान का स्वाद हिंदुस्तान चाहता है कि विदेश से आने वाले मेहमान यहां के खाने का स्वाद भी अपने साथ लेकर जाएं. इसलिए खाने में हिंदुस्तानीय मसालों और देश के अलग-अलग हिस्सों में इस्तेमाल होने वाले अनाज और दूसरी चीजों को जगह दी गई है. दिल्ली के लीला पैलेस की ओर से तैयार खाने में जौ, मिलेट, ज्वार और सत्तू जैसी चीजों को शामिल किया गया है. मिलेट से उपमा जैसी चीजें भी तैयार की जा रही हैं. बाजरा उपमा से बिरयानी तक, कई देसी पकवान विदेशी मेहमानों के लिए तैयार खाने में सिर्फ एक तरह का खाना नहीं होगा. हिंदुस्तान के अलग-अलग हिस्सों के स्वाद को दिखाने की कोशिश की जा रही है. रिपोर्टों के मुताबिक, मेन्यू में बाजरा उपमा, अवधी कबाब, हैदराबादी बिरयानी और किनुआ बिरयानी जैसी चीजों को जगह दी गई है. यानी मेहमानों को एक ही जगह पर हिंदुस्तान के अलग-अलग स्वाद चखने का मौका मिलेगा. खाने का मेन्यू कौन तय करता है? अब सवाल है कि आखिर इतने बड़े सम्मेलन में नेताओं को क्या खिलाना है, यह तय कौन करता है? इसकी तैयारी में मेजबान देश की व्यवस्था, होटल की टीम और शेफ की बड़ी भूमिका होती है. अलग-अलग मेहमानों की पसंद और खाने से जुड़ी जरूरतों की जानकारी पहले से ली जाती है. इसके बाद उसी के हिसाब से खाना तैयार किया जाता है. लीला पैलेस की ओर से भी बताया गया है कि विदेशी मेहमानों की पसंद और खाने से जुड़ी जरूरतों की जानकारी पहले से मिलने के बाद मेन्यू तैयार किया गया है. यानी किसी नेता को कौन सा खाना पसंद है, वह क्या नहीं खाता या उसे किसी चीज से परेशानी होती है, इन बातों का भी ध्यान रखा जाता है. ये भी पढ़ें: Aaj Ka Mausam : घर से छाता लेकर निकलें या नहीं! UP-बिहार से MP और झारखंड तक बरसेंगे बादल, जानें 11 सितंबर के मौसम का हाल एक होटल में अलग, दूसरे में अलग खास तैयारी BRICS मेहमानों के लिए दिल्ली के कई बड़े होटलों में अलग-अलग तरह की तैयारी की जा रही है. ताज महल, द लीला पैलेस और द ललित जैसे होटलों ने हिंदुस्तानीय खाने को खास तरीके से पेश करने की तैयारी की है. ताज में अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक खाने को दिखाने की तैयारी है, जबकि लीला पैलेस ने हिंदुस्तानीय अनाज और मसालों पर खास ध्यान दिया है. सिर्फ खाना नहीं, हिंदुस्तान की पहचान भी दिखेगी BRICS सम्मेलन में खाना सिर्फ मेहमानों का पेट भरने तक सीमित नहीं है. इसके जरिए हिंदुस्तान की अलग-अलग जगहों की खाने की परंपरा और यहां के स्वाद को दुनिया के सामने रखने की कोशिश भी है. 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के हिंदुस्तान मंडपम में होने वाले 18वें BRICS सम्मेलन में दुनिया के कई देशों के नेता और प्रतिनिधि शामिल होंगे. ऐसे में विदेशी मेहमानों की थाली भी हिंदुस्तान की मेजबानी का एक खास हिस्सा बनने जा रही है. ये भी पढ़ें: 11 सितंबर की टॉप 20 समाचारें: BRICS Summit के लिए दिल्ली में अभेद्य सुरक्षा, हिंदुस्तान आएंगे जिनपिंग-पुतिन, एशिया कप के फाइनल में पहुंची टीम इंडिया The post BRICS Summit Menu : PM मोदी से लेकर विदेशी मेहमानों तक की थाली में क्या होगा? ऐसे तय होता है खाना appeared first on Naya Vichar.

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Lala Amarnath Birthday: स्वतंत्र भारत के पहले टेस्ट कप्तान थे अमरनाथ, पहला शतक जड़ते ही महिलाओं ने फेंक दिए थे मंगलसूत्र

Lala Amarnath: हिंदुस्तानीय क्रिकेट के इतिहास में लाला अमरनाथ का नाम कई खास उपलब्धियों के साथ दर्ज है. वह टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाने वाले हिंदुस्तान के पहले बल्लेबाज थे. 1933 में टेस्ट डेब्यू पर 118 रन की उनकी पारी ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया था. उनके इसी शतक से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा आज भी सुनाया जाता है कि स्टेडियम में मौजूद स्त्रीओं ने खुशी में अपने गहने, यहां तक कि मंगलसूत्र भी मैदान की ओर उछाल दिए थे. आज ही के दिन यानी 11 सितंबर को लाला अमरनाथ का जन्म हुआ था. डेब्यू पर ही मचा दिया था तहलका साल था 1933. हिंदुस्तानीय क्रिकेट टीम इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज स्पोर्ट्स रही थी. बंबई के जिमखाना ग्राउंड पर स्पोर्ट्से गए मुकाबले में 22 साल के लाला अमरनाथ को टेस्ट डेब्यू करने का मौका मिला. डेब्यू पर किसी भी बल्लेबाज पर दबाव होता है, लेकिन लाला अमरनाथ ने इसे अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया. हिंदुस्तानीय टीम ने जल्दी ही अपने दो विकेट गंवा दिए थे और स्कोर 21 रन था. ऐसे समय में अमरनाथ क्रीज पर आए और उन्होंने इंग्लैंड के गेंदबाजों का आक्रामक अंदाज में सामना किया. लाला अमरनाथ ने 117 मिनट तक बल्लेबाजी की और 118 रन की शानदार पारी स्पोर्ट्सी. उनकी इस पारी में 21 चौके शामिल थे. इस दौरान उन्होंने कप्तान सीके नायडू के साथ 176 रन की अहम साझेदारी भी की. हिंदुस्तान वह मुकाबला नौ विकेट से हार गया, लेकिन अमरनाथ की पारी ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया. वह टेस्ट डेब्यू पर शतक लगाने वाले हिंदुस्तान के पहले बल्लेबाज बने और हिंदुस्तानीय क्रिकेट को उसका पहला टेस्ट शतकवीर मिला. शतक के बाद स्त्रीओं ने फेंके थे गहने लाला अमरनाथ की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि उनके डेब्यू शतक से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प किस्सा आज भी सुनाया जाता है. वह उन शुरुआती हिंदुस्तानीय क्रिकेटरों में शामिल थे, जिन्हें प्रशंसकों ने सिर्फ खिलाड़ी नहीं, बल्कि स्टार के रूप में देखना शुरू कर दिया था. ‘द एपिक चैनल’ पर लाला अमरनाथ से जुड़े एक किस्से में बताया गया है कि जब उन्होंने टेस्ट डेब्यू में शतक पूरा किया, तो स्टेडियम में मौजूद स्त्रीएं खुशी से इस कदर उत्साहित हो गईं कि उन्होंने अपने गहने, यहां तक कि मंगलसूत्र भी मैदान की ओर उछाल दिए थे. ये भी पढ़ें: BBL 2026-27: फिन एलन से बेन स्टोक्स तक, कौन किस टीम का होगा हिस्सा; देखें स्टार प्लेयर्स की पूरी लिस्ट दूसरे विश्व युद्ध से प्रभावित हुआ करियर लाला अमरनाथ की शुरुआत को देखते हुए उनसे लंबे और सफल अंतरराष्ट्रीय करियर की उम्मीद की जा रही थी. हालांकि, उनका क्रिकेट करियर दूसरे विश्व युद्ध की वजह से प्रभावित हुआ. उस दौर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट लंबे समय तक बाधित रहा. इसके बावजूद अमरनाथ ने घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान बनाए रखी और एक बेहतरीन ऑलराउंडर के तौर पर खुद को स्थापित किया. बने स्वतंत्र हिंदुस्तान के पहले टेस्ट कप्तान 1947 में देश आजाद हुआ और इसके बाद हिंदुस्तानीय क्रिकेट के इतिहास में भी एक नया अध्याय शुरू हुआ. 1947-48 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर लाला अमरनाथ ने हिंदुस्तानीय टीम की कप्तानी की. इसी के साथ वह स्वतंत्र हिंदुस्तान के पहले टेस्ट कप्तान बने. यह दौरा हिंदुस्तानीय टीम के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था. सामने ऑस्ट्रेलिया की मजबूत टीम थी और उसके बल्लेबाजी क्रम में दुनिया के महानतम बल्लेबाजों में शुमार डॉन ब्रैडमैन भी मौजूद थे. अमरनाथ ने इस दौरे पर गेंद से भी अपनी छाप छोड़ी. उन्होंने ब्रैडमैन को हिट विकेट के जरिए आउट किया. खास बात यह थी कि ब्रैडमैन उस पारी में 185 रन बना चुके थे. ब्रैडमैन अपने पूरे टेस्ट करियर में सिर्फ एक बार हिट विकेट आउट हुए और यह विकेट लाला अमरनाथ के नाम रहा. क्रिकेट से लाला अमरनाथ का रिश्ता अगली पीढ़ी तक भी पहुंचा. उनके बेटे मोहिंदर अमरनाथ और सुरिंदर अमरनाथ ने भी हिंदुस्तान के लिए क्रिकेट स्पोर्ट्सा. ये भी पढ़ें: Richest Cricket Board: आखिर कौन है दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड? देखें टॉप-10 की पूरी लिस्ट पाकिस्तान के खिलाफ हिंदुस्तान को दिलाई पहली टेस्ट सीरीज जीत View on Instagram लाला अमरनाथ की कप्तानी में हिंदुस्तानीय क्रिकेट को एक और खास उपलब्धि मिली. 1952 में हिंदुस्तान ने पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट सीरीज स्पोर्ट्सी. अमरनाथ की अगुवाई में हिंदुस्तान ने सीरीज 2-1 से अपने नाम की. यह हिंदुस्तान की पहली टेस्ट सीरीज जीत थी. यानी जिस खिलाड़ी ने हिंदुस्तान को टेस्ट क्रिकेट का पहला शतक दिया था, उसी खिलाड़ी ने स्वतंत्र हिंदुस्तान की टीम को उसकी पहली टेस्ट सीरीज जीत तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाई. लाला अमरनाथ का टेस्ट रिकॉर्ड लाला अमरनाथ ने हिंदुस्तान की ओर से कुल 24 टेस्ट मैच स्पोर्ट्से. इस दौरान उन्होंने 878 रन बनाए. उनके नाम एक शतक और चार अर्धशतक रहे. गेंदबाजी में भी उन्होंने 45 विकेट हासिल किए. उनके नाम टेस्ट क्रिकेट में एक पारी में पांच विकेट लेने का प्रदर्शन भी दर्ज है. श्रेणी टेस्ट फर्स्ट क्लास मैच 24 186 पारी 40 286 नाबाद 4 34 रन 878 10,426 सर्वोच्च स्कोर 118 262 बल्लेबाजी औसत 24.38 41.37 शतक 1 31 अर्धशतक 4 39 फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने 186 मैचों की 286 पारियों में 10,426 रन बनाए. उनका बल्लेबाजी औसत 41 से ज्यादा का रहा. इस दौरान उन्होंने 31 शतक और 39 अर्धशतक लगाए. उनका सर्वोच्च स्कोर 262 रन रहा. ये आंकड़े बताते हैं कि अमरनाथ सिर्फ टेस्ट क्रिकेट में मिली पहचान की वजह से महान नहीं थे, बल्कि घरेलू क्रिकेट में भी उनका प्रदर्शन लंबे समय तक प्रभावशाली रहा. BCCI ने दिया पहला सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड हिंदुस्तानीय क्रिकेट में लाला अमरनाथ के योगदान को देखते हुए उन्हें 1994 में BCCI के पहले सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उनके लंबे क्रिकेट करियर और हिंदुस्तानीय क्रिकेट में दिए गए योगदान की पहचान था. जिस खिलाड़ी ने 1933 में हिंदुस्तान को उसका पहला टेस्ट शतक दिया था, उसी खिलाड़ी ने आजाद हिंदुस्तान की पहली टेस्ट टीम की कप्तानी की और पाकिस्तान के खिलाफ पहली टेस्ट सीरीज जीतने वाली हिंदुस्तानीय टीम की अगुवाई भी की. 5 अगस्त 2000 को लाला अमरनाथ का निधन हो गया. लेकिन हिंदुस्तानीय क्रिकेट के शुरुआती दौर में

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BRICS Summit 2026 LIVE: PM मोदी ने संस्कृत के श्लोक से किया ब्रिक्स का आगाज, राष्ट्रपति पुतिन से करेंगे द्विपक्षीय बातचीत

BRICS Summit 2026 LIVE : 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) की मेजबानी हिंदुस्तान को सौंपी गई है. यह सम्मेलन 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के हिंदुस्तान मंडपम में आयोजित हो रहा है. वर्ल्ड लीडर्स के आने का सिलसिला जारी है. ब्रिक्स समिट की हर अपडेट के लिए जुड़े रहें नया विचार के साथ. The post BRICS Summit 2026 LIVE: PM मोदी ने संस्कृत के श्लोक से किया ब्रिक्स का आगाज, राष्ट्रपति पुतिन से करेंगे द्विपक्षीय बातचीत appeared first on Naya Vichar.

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Delhi Traffic Advisory: 11 से 13 सितंबर तक दिल्ली में ट्रैफिक डायवर्जन, 22 रास्तों पर जाने से बचें; निकलने से पहले पढ़ें यह खबर

Delhi Traffic Advisory: दिल्ली में 12 और 13 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन की तैयारियों को लेकर ट्रैफिक पुलिस अलर्ट मोड पर है. सुरक्षा और सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है. इसके तहत 11 सितंबर को दोपहर 2:00 बजे से रात 8:30 बजे तक कई प्रमुख मार्गों पर विशेष डायवर्जन रहेगा. ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए घर से निकलने से पहले वैकल्पिक मार्गों और एडवाइजरी की जांच अवश्य कर लें. दिल्ली पुलिस ने दिल्ली में 11 से 13 सितंबर 2026 के दौरान ट्रैफिक में बदलाव किया है. इस दौरान 22 रूट पर यातायात डाइवर्ट किया जाएगा. जबकि 35 से अधिक सड़कें नियंत्रित या प्रभावित रहेंगी. मुख्य कार्यक्रम स्थल हिंदुस्तान मंडपम, प्रगति मैदान है. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने लोगों की सुविधा के लिए रूट गाइड और आवश्यक निर्देश जारी किए हैं. प्रभावित सड़कें और ट्रैफिक डायवर्जन (22 पॉइंट) प्रभावित सड़कें सरदार पटेल मार्ग, मदर टेरेसा क्रीसेंट, तीन मूर्ति मार्ग, अकबर रोड, 30 जनवरी मार्ग, राजेश पायलट मार्ग, सुब्रमण्यम हिंदुस्तानी मार्ग, मथुरा रोड, मोती लाल नेहरू मार्ग, डॉ जाकिर हुसैन मार्ग, ब्रिगेडियर होशियार सिंह मार्ग, अफ्रीका एवेन्यू रोड, सत्या मार्ग, शांति पथ, जनपथ, अशोका रोड, बाराखंबा रोड, टॉलस्टॉय मार्ग, रणजीत सिंह फ्लाईओवर, नीति मार्ग, पंचशील मार्ग, कमाल अतातुर्क मार्ग, एपीजे अब्दुल कलाम रोड, प्रेस एनक्लेव रोड, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग, जोसेफ ब्रोज टीटो मार्ग और लाला लाजपत राय मार्ग. दिल्ली ट्रैफिक, फोटो एक्स डायवर्जन पॉइंट और वैकल्पिक मार्ग डॉ दिनेश नंदिनी डालमिया चौक (W-Point): मथुरा रोड और तिलक मार्ग पर प्रवेश प्रतिबंधित. वैकल्पिक मार्ग: ईस्ट/साउथ दिल्ली के लिए BSZ मार्ग → IP मार्ग; सेंटर/नॉर्थ/वेस्ट दिल्ली के लिए BSZ मार्ग → दिल्ली गेट; न्यू दिल्ली/CP के लिए सिकंदरा रो. राम चरण अग्रवाल चौक (A-Point): W-Point की ओर व्यावसायिक वाहनों की नो एंट्री वैकल्पिक मार्ग: ईस्ट/साउथ दिल्ली के लिए IP मार्ग; न्यू दिल्ली/CP के लिए DDU मार्ग; सेंटर/नॉर्थ/वेस्ट दिल्ली के लिए BSZ मार्ग → दिल्ली गेट. मीर दर्द चौक: महाराजा रणजीत सिंह मार्ग बंद वैकल्पिक मार्ग: न्यू दिल्ली/सेंटर/नॉर्थ/वेस्ट दिल्ली के लिए मीर दर्द मार्ग → अब्दुल गफ्फार मार्ग → DDU मार्ग. कस्तूरबा गांधी मार्ग / आउटर सर्कल CP: C-हेक्सागोन व आउटर सर्कल CP की ओर प्रवेश प्रतिबंधित वैकल्पिक मार्ग: जनपथ को छोड़कर आउटर सर्कल व अन्य सड़कें. जनपथ / कनाट प्लेस: C-हेक्सागोन की ओर जाना मना वैकल्पिक मार्ग: काली बाड़ी, शहीद भगत सिंह, पंचकुइयां, मिंटो व बाराखंबा रोड। पटेल चौक: विंडसर प्लेस और संसद मार्ग (RBI) की तरफ प्रवेश बंद वैकल्पिक मार्ग: अशोका रोड → GPO या संसद मार्ग → CP. RML अस्पताल गोलचक्कर: मदर टेरेसा क्रीसेंट व तालकटोरा रोड बंद वैकल्पिक मार्ग: शेख मुजीबुर रहमान मार्ग या बाबा खड़क सिंह मार्ग. वंदे मातरम मार्ग / साइमन बोलीवर मार्ग: साइमन बोलीवर मार्ग बंद वैकल्पिक मार्ग: वंदे मातरम मार्ग → धौला कुआं या करोल बाग. धौला कुआं फ्लाईओवर: सरदार पटेल मार्ग बंद वैकल्पिक मार्ग: रिंग रोड (दोनों तरफ), वंदे मातरम मार्ग, NH-48 / गुड़गांव रोड. मोती बाग फ्लाईओवर: शांति पथ बंद वैकल्पिक मार्ग: रिंग रोड (दोनों तरफ) या राव तुला राम मार्ग. गोलचक्कर ब्रिगेडियर होशियार सिंह मार्ग: यशवंत प्लेस की ओर अफ्रीका एवेन्यू बंद वैकल्पिक मार्ग: ब्रिगेडियर होशियार सिंह मार्ग या अफ्रीका एवेन्यू → भीकाजी कामा फ्लाईओवर. मदरसा टी-पॉइंट: ऑरोबिंदो मार्ग बंद वैकल्पिक मार्ग: लोधी रोड या ऑरोबिंदो मार्ग → सफदरजंग फ्लाईओवर. लोधी रोड / अमृता शेरगिल मार्ग: अमृता शेरगिल मार्ग बंद वैकल्पिक मार्ग: लोधी रोड. लोधी रोड / मैक्स मुलर मार्ग: मैक्स मुलर मार्ग बंद वैकल्पिक मार्ग: लोधी रोड. लोधी रोड / महर्षि रमन मार्ग: महर्षि रमन मार्ग बंद वैकल्पिक मार्ग: लोधी रोड या भीष्म पितामह मार्ग. लोधी रोड / आर्कबिशप मेकैरियस मार्ग: आर्कबिशप मेकैरियस मार्ग बंद वैकल्पिक मार्ग: लोधी रोड. लोधी फ्लाईओवर के नीचे: हिंदुस्तान मंडपम की ओर मथुरा रोड बंद वैकल्पिक मार्ग: लोधी रोड → नीला गुंबद, बारापुला फ्लाईओवर या मदरसा / लाला लाजपत राय मार्ग. नीला गुंबद: ओबेरॉय फ्लाईओवर / डॉ जाकिर हुसैन मार्ग बंद वैकल्पिक मार्ग: मथुरा रोड → आश्रम चौक या लोधी रोड. ओबेरॉय फ्लाईओवर के नीचे: मथुरा रोड बंद (ओबेरॉय होटल व गोल्फ लिंक की गाड़ियों को अनुमति) वैकल्पिक मार्ग: लोधी फ्लाईओवर (DPS मथुरा रोड के सामने यू-टर्न अंडरपास होकर). DPS मथुरा रोड के सामने यू-टर्न: हिंदुस्तान मंडपम की ओर बंद वैकल्पिक मार्ग: DPS मथुरा रोड के सामने यू-टर्न अंडरपास के जरिए लोधी फ्लाईओवर. रिंग रोड / भैरों रोड: भैरों मार्ग की ओर प्रवेश बंद वैकल्पिक मार्ग: सराय काले खां होकर रिंग रोड या राजघाट होकर रिंग रोड. मंडी हाउस: फिरोजशाह रोड, भगवान दास रोड, कॉपरनिकस मार्ग बंद वैकल्पिक मार्ग: बाराखंबा रोड या सिकंदरा मार्ग. ये भी पढ़ें: मेट्रो, बैंक, स्कूल और ऑफिस…ब्रिक्स समिट को लेकर दिल्ली में क्या-क्या रहेगा बंद? 11 से 13 सितंबर तक रखें इन बातों का ध्यान रेलवे स्टेशनों और एयरपोर्ट के लिए वैकल्पिक मार्ग रेलवे स्टेशन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन रूट A: ISBT कश्मीरी गेट → बुलेवार्ड रोड → रानी झांसी मार्ग → DBG रोड → पंचकुइयां रोड → आउटर सर्कल, CP. रूट B: आश्रम चौक → रिंग रोड → राजघाट → JLN मार्ग रूट C: वंदे मातरम मार्ग → डॉ अंबेडकर मार्ग → पंचकुइयां रोड → आउटर सर्कल, CP. पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन रूट A: ISBT कश्मीरी गेट → रिंग रोड → हनुमान मंदिर → S.P. मुखर्जी मार्ग. रूट B: आश्रम चौक → रिंग रोड → राजघाट → रिंग रोड → हनुमान मंदिर → S.P. मुखर्जी मार्ग. रूट C: वंदे मातरम मार्ग → डॉ अंबेडकर मार्ग → रानी झांसी मार्ग → रानी झांसी फ्लाईओवर → बुलेवार्ड रोड → लोथियान मार्ग. हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन रूट A: AIIMS → रिंग रोड → आश्रम चौक → मथुरा रोड. रूट B: ISBT कश्मीरी गेट → रिंग रोड → राजघाट → रिंग रोड → आश्रम चौक → मथुरा रोड. एयरपोर्ट (मेट्रो सेवा लेने की सख्त सलाह) गुरुग्राम से (T3/T4/T2/T1): NH-48 → राव गजराज सिंह मार्ग → ओल्ड दिल्ली गुरुग्राम रोड → UER II → सर्विस रोड → T3 टर्मिनल रोड। T1 के लिए: NH-48 → महिपालपुर फ्लाईओवर के नीचे → T-3 रोड, या महिपालपुर फ्लाईओवर होकर उल्लान बातार मार्ग → T-1 रोड. द्वारका से (T3/T4/T2/T1): सेक्टर-22, द्वारका रोड → UER II (T3 के लिए नया टनल) नई दिल्ली और साउथ

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11 सितंबर को बैंकिंग पर ब्रेक, SBI-PNB समेत कई बैंकों में ठप हो सकता है कामकाज

Bank Strike Today: देशभर में बैंक ग्राहकों के लिए शुक्रवार, 11 सितंबर को बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करने समेत कई मांगों को लेकर एक दिन की देशव्यापी हड़ताल बुलाई है. सार्वजनिक क्षेत्र के कई बैंकों ने ग्राहकों को पहले ही संभावित असर की जानकारी दे दी है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), यूको बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र समेत कई बैंकों ने कहा है कि उन्होंने कामकाज सामान्य रखने के लिए जरूरी इंतजाम किए हैं. हालांकि, कर्मचारियों की भागीदारी के आधार पर शाखाओं और दफ्तरों का काम प्रभावित हो सकता है. बैंक कर्मचारी आखिर हड़ताल क्यों कर रहे हैं? UFBU सात बैंक कर्मचारी और अधिकारी यूनियनों का संयुक्त मंच है. यूनियनों की मुख्य मांग पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करना है. इसके अलावा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े कई मुद्दों को भी जल्द सुलझाने की मांग की जा रही है. मुख्य मांगों में शामिल हैं: पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करना पेंशन को अपडेट करना पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) का एक समान फॉर्मूला नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में जाने का विकल्प सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों के लिए परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना से जुड़े मुद्दों का समाधान PLI योजना को लेकर क्या है मामला? बैंक यूनियनों ने PLI योजना को लेकर भी चिंता जताई है. वित्त मंत्रालय ने 19 नवंबर 2024 को जारी PLI योजना को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए फिलहाल रोक दिया है. मंत्रालय के मुताबिक, इस मुद्दे पर नए द्विपक्षीय समझौते और संयुक्त नोट को लेकर चल रही बातचीत के दौरान विचार किया जाएगा. यह फैसला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक के बाद आया. बैठक में PLI के अलावा एक्स-ग्रेशिया भुगतान और रिटायर हो चुके बैंक कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई. 11 सितंबर के बाद बैंक कब-कब बंद रहेंगे? ग्राहकों के लिए परेशानी सिर्फ 11 सितंबर तक सीमित नहीं रह सकती. UFBU ने 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल का भी ऐलान किया है. अगर मांगों पर समाधान नहीं निकला तो 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी भी दी गई है. इसके अलावा 11 सितंबर की हड़ताल के अगले दिन 12 सितंबर को दूसरा शनिवार और 13 सितंबर को रविवार है। 14 सितंबर को कुछ राज्यों में गणेश चतुर्थी के कारण बैंक अवकाश रहेगा. तारीख स्थिति 11 सितंबर देशव्यापी बैंक हड़ताल 12 सितंबर दूसरा शनिवार 13 सितंबर रविवार 14 सितंबर कुछ राज्यों में गणेश चतुर्थी की छुट्टी ऐसे में कुछ राज्यों में बैंक शाखाओं का काम लगातार कई दिनों तक प्रभावित हो सकता है. इसलिए जरूरी बैंकिंग काम वाले ग्राहकों के लिए बेहतर होगा कि वे अपने संबंधित बैंक की स्थानीय शाखा और छुट्टियों के कैलेंडर के हिसाब से पहले से योजना बना लें. ये भी पढ़ें: Bank Holiday September: 11 सितंबर से लगातार 3 दिन बंद रहेंगे बैंक, जानें क्यों… ? The post 11 सितंबर को बैंकिंग पर ब्रेक, SBI-PNB समेत कई बैंकों में ठप हो सकता है कामकाज appeared first on Naya Vichar.

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‘हनुमान अंश’ ने बदला बॉलीवुड का मूड! जिस धर्म पर फिल्म बनाने से डरते थे मेकर्स, अब उसी पर लग रहा है दांव

जिस जेनरेशन के लिए कभी भगवान की कहानी का मतलब टीवी पर आने वाली रामायण या दादी-नानी की सुनाई कथा हुआ करता था, आज वही जेनरेशन थिएटर में ‘हनुमान अंश’ के लिए तालियां बजा रही है. सोशल मीडिया पर जय श्री राम लिखने से लेकर धार्मिक किरदारों के पोस्टर शेयर करने तक, आस्था अब सिर्फ पूजा की चीज नहीं रही, वह पॉप कल्चर का हिस्सा बन चुकी है. शायद यही वजह है कि ‘हनुमान अंश’ की सुपर सक्सेस के बाद बॉलीवुड का मूड तेजी से बदला है.  साईं बाबा, जगन्नाथ, खाटू श्याम, महाकाली से लेकर रामायण तक, धार्मिक कहानियों की लंबी लाइन लग गई है. दिलचस्प यह है कि जिन विषयों से कभी बड़े स्टार और मेकर्स यह सोचकर दूरी बनाते थे कि ‘आज की जेनरेशन इसे देखेगी कौन?’, अब उसी जेनरेशन को ध्यान में रखकर करोड़ों के प्रोजेक्ट तैयार हो रहे हैं. तो क्या बदल गया है- दर्शक या बॉलीवुड का नजरिया? एक फिल्म चली और खुल गया आस्था का दरवाजा बॉलीवुड के लिए यह कोई नई बात नहीं है कि एक फिल्म की सफलता के बाद उसी तरह की कई कहानियों पर काम शुरू हो जाए. कभी एक्शन का दौर आया. फिर गैंगस्टर फिल्में चलीं. कॉमेडी का ट्रेंड आया. कंटेंट सिनेमा ने जगह बनाई. अब धार्मिक और पौराणिक कहानियों की बारी दिखाई दे रही है. ‘हनुमान अंश’ की सफलता ने मेकर्स को सबसे बड़ा भरोसा यही दिया है कि धार्मिक विषय को अगर नए अंदाज में पेश किया जाए, तो आज का दर्शक उसे खारिज नहीं करेगा. यही वजह है कि एक के बाद एक नए प्रोजेक्ट सामने आ रहे हैं. साईं बाबा, भगवान जगन्नाथ, खाटू श्याम, महाकाली और रामायण जैसे विषय बड़े पर्दे पर पहुंच रहे हैं. यानी भगवान अब सिर्फ मंदिर की घंटियों और टीवी स्क्रीन तक सीमित नहीं हैं. बॉलीवुड उन्हें सिनेमाघरों की सबसे बड़ी स्क्रीन पर लाने की तैयारी कर रहा है. और इस बार फर्क सिर्फ फिल्मों की संख्या का नहीं है. फर्क यह भी है कि इन फिल्मों के साथ बड़े नाम और बड़े सितारे जुड़ रहे हैं. कभी ‘धोती-कुर्ता और मुकुट’ से डरते थे स्टार यह बदलाव अचानक नहीं आया है. हिंदुस्तानीय सिनेमा के इतिहास में धार्मिक फिल्मों की अपनी एक लंबी और मजबूत परंपरा रही है. शुरुआती दौर में पौराणिक फिल्में सिनेमा का अहम हिस्सा थीं. ‘राजा हरिश्चंद्र’ से लेकर ‘संतोषी मां’ तक धार्मिक कहानियों ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचा. क्यों हनुमान अंश और जय संतोषी माता को कंपेयर कर रहे दर्शक यानी धार्मिक सिनेमा के सफल होने का सबूत बॉलीवुड के पास पहले से था. फिर सवाल यह है कि इतने साल तक मेकर्स इससे दूर क्यों रहे? शायद इसलिए क्योंकि धार्मिक फिल्म में सिर्फ बॉक्स ऑफिस का रिस्क नहीं होता. इसमें दर्शक की आस्था का रिस्क भी होता है. और यही वजह है कि आज धार्मिक फिल्म बनाना एक साथ आसान भी हुआ है और मुश्किल भी. सोशल मीडिया ने आस्था को ‘वायरल’ कर दिया आज की जेनरेशन धार्मिक विषयों से उसी तरह जुड़ती है, जैसे वह बाकी पॉप कल्चर से जुड़ती है. इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स और मीम्स ने धार्मिक किरदारों को भी डिजिटल स्पेस में पहुंचा दिया है. किसी फिल्म का एक डायलॉग वायरल होता है. कोई पोस्टर ट्रेंड करता है. किसी अभिनेता का भगवान वाला लुक सोशल मीडिया पर चर्चा में आ जाता है. यानी फिल्म रिलीज होने से पहले ही उसका एक डिजिटल दर्शक तैयार हो जाता है. ‘हनुमान अंश’ के मामले में भी सोशल मीडिया और वर्ड ऑफ माउथ ने फिल्म को लेकर माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाई. यही वह चीज है जिसे अब मेकर्स नजरअंदाज नहीं कर सकते. डॉ. द्विवेदी भी इस बदलाव को सकारात्मक नजर से देखते हैं. वह कहते हैं, “यह बहुत ही खूबसूरत दौर है. अच्छी बात है कि ऐसी चीजें अब बेबाकी से बन रही हैं.” उनके मुताबिक आज लोग अपने धर्म को लेकर ज्यादा खुलकर बात कर रहे हैं. “लोग अब जय श्री राम बोलने से हिचकते नहीं हैं, अपने धर्म को लेकर प्राउड फील करते हैं.” यानी जो बात कभी पर्दे के पीछे थी, अब वह खुले तौर पर पॉप कल्चर का हिस्सा बन रही है. लेकिन बॉलीवुड के लिए यह स्पोर्ट्स इतना आसान भी नहीं यहीं से कहानी का दूसरा और ज्यादा दिलचस्प हिस्सा शुरू होता है. धार्मिक फिल्म में अगर कहानी दर्शक को पसंद आ गई, तो फिल्म को सिर्फ सफलता नहीं मिलती. उसे एक तरह का भावनात्मक समर्थन भी मिलता है. लेकिन अगर दर्शक को लगा कि उसके आराध्य, धार्मिक ग्रंथ या परंपरा के साथ छेड़छाड़ हुई है, तो वही दर्शक सबसे बड़ा आलोचक भी बन जाता है. ‘आदिपुरुष’ इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. रामायण जैसे विषय पर बनी इस बड़े बजट की फिल्म से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं. लेकिन रिलीज के बाद फिल्म के लुक, वीएफएक्स और संवादों को लेकर ऐसा विवाद हुआ कि मामला सिर्फ फिल्म की समीक्षा तक नहीं रहा. सोशल मीडिया पर जबरदस्त विरोध हुआ. धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप लगे और मेकर्स को विवादित संवादों में बदलाव तक करना पड़ा. डॉ चंद्रप्रकाश द्विवेदी उनके मुताबिक ऐसे विषयों पर गहरी रिसर्च जरूरी है. किताबें पढ़नी होंगी. इतिहास समझना होगा. धार्मिक मान्यताओं और लोककथाओं के बीच अंतर समझना होगा. क्योंकि इंटरनेट पर मौजूद हर जानकारी इतिहास नहीं है और हर वायरल पोस्ट धार्मिक सत्य नहीं. धार्मिक सिनेमा में क्रिएटिव फ्रीडम जरूर हो सकती है, लेकिन रिसर्च से समझौता करना सबसे महंगा पड़ सकता है. अब असली परीक्षा उन फिल्मों की है जो लाइन में हैं ‘हनुमान अंश’ ने रास्ता दिखा दिया है. अब साईं बाबा, जगन्नाथ, खाटू श्याम, महाकाली और रामायण जैसी फिल्मों की बारी है. इन फिल्मों के सामने दो तरह के दर्शक होंगे. एक वह, जो भगवान को अपने बचपन की कहानी की तरह जानता है. और दूसरा वह युवा दर्शक, जो उसी भगवान को सोशल मीडिया, रील्स और सिनेमा की भाषा में देखना चाहता है. मेकर्स की असली चुनौती इन दोनों को एक साथ जोड़ने की है. सिर्फ बड़े सेट बना देने से धार्मिक फिल्म नहीं बनेगी. सिर्फ वीएफएक्स से भगवान का संसार खड़ा नहीं होगा. और सिर्फ किसी सुपरस्टार को भगवान बना देने से दर्शक थिएटर नहीं आएगा. कहानी में भरोसा

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