“हर गली में जंतर-मंतर! शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को लोकतंत्र की बहाली के लिए जन मार्च है. आइए, चुनौती का सामना करने के लिए खड़े हों.”
यह बात परकला प्रभाकर ने 21 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखी. चुनाव आयोग की एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के विरोध में 23 अक्टूबर को ‘पीपुल्स मार्च टू रिस्टोर डेमोक्रेसी’ निकाला जाएगा.
इसमें परकला प्रभाकर भी शामिल होंगे. प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर एसआईआर प्रक्रिया खत्म करने की मांग करेंगे.
सबसे पहले ग्राफिक्स में परकला प्रभाकर के बारे में जानिए-
‘मोदी प्रशासन का नोटबंदी से काले धन पर लगाम लगाने का दावा सही नहीं’
सितंबर 2023 में परकला प्रभाकर ने अपनी किताब The Crooked Timber of New India के बारे में बताते हुए नोटबंदी पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अगर नोटबंदी से सुशासन को कोई फायदा हुआ होता, तो केंद्र प्रशासन इसकी उपलब्धियों का जमकर प्रचार करती. उन्होंने यह भी कहा कि कारोबारी काला धन नकद रखने के बजाय जमीन और प्रॉपर्टी में लगाते हैं. ऐसे में नोटबंदी से काले धन पर लगाम लगाने का दावा सही नहीं लगता.
‘हिंदुस्तान में बेरोजगारी दर 24 फीसद है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा’
जनवरी 2024 को मंगलुरु में गणतंत्र दिवस पर ‘रिपब्लिक इन क्राइसिस’ कार्यक्रम में परकला प्रभाकर ने दावा किया कि हिंदुस्तान में बेरोजगारी दर 24% है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है. उनके मुताबिक, ईरान, सीरिया और लेबनान में भी ऐसी ही स्थिति है, जबकि बांग्लादेश में बेरोजगार युवाओं की दर 12% है. उन्होंने जनवरी 2022 का उदाहरण देते हुए बताया कि रेलवे में 35 हजार गैर-तकनीकी पदों के लिए 1.25 करोड़ से ज्यादा युवाओं ने आवेदन किया था. इससे बिहार और उत्तर प्रदेश में युवाओं के बीच भारी नाराजगी और हंगामा हुआ था.
‘न्यू इंडिया में लोकतंत्र सिर्फ चुनाव तक सिमटा, चर्चा से बचती है केंद्र प्रशासन’
नवंबर 2023 में परकला प्रभाकर ने दावा किया कि देश में निजी निवेश घटा है और आर्थिक असमानता बढ़ी है. उन्होंने कहा कि गरीबों का जीवन स्तर गिर रहा है और मध्यम वर्ग के कुछ लोग भी गरीबी की ओर बढ़ रहे हैं. परकला प्रभाकर ने कहा, “न्यू इंडिया में लोकतंत्र को सिर्फ हर पांच साल में होने वाले चुनाव तक सीमित कर दिया गया है. केंद्र प्रशासन चर्चा करने में विश्वास नहीं रखती, जबकि किसी भी लोकतंत्र का असली आधार बातचीत और विचार-विमर्श ही है.”
परकला प्रभाकर का ‘मिडवीक मैटर्स’ यूट्यूब चैनल है फेमस
परकला प्रभाकर ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की है. वह 2014 से 2018 तक आंध्र प्रदेश प्रशासन में कम्युनिकेशन कंसल्टेंट रहे. इस दौरान उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला था. फिलहाल वह हैदराबाद स्थित कंपनी राइटफोलियो (RightFOLIO) के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. वह समसामयिक मुद्दों (कंटेंपरेरी इश्यूज) पर नियमित रूप से लिखते हैं. साथ ही नेतृत्व, वित्तीय स्थिति व समाज से जुड़े विषयों पर अपनी बेबाक राय रखते हैं. उनका यूट्यूब चैनल ‘मिडवीक मैटर्स’ भी काफी फेमस है, जहां वह देश के मौजूदा हालात पर चर्चा करते हैं. इस चैनल पर 58 K सब्सक्राइबर हैं.
The post कौन हैं निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर, नोटबंदी की आलोचना से SIR के विरोध तक, जानिए सबकुछ appeared first on Naya Vichar.

