Amit Shah Birthday Special: साल 2002 की बात है. केशूभाई पटेल गुजरात के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देते हैं. इसके बाद नरेंद्र मोदी राज्य के नये सीएम बने. उन्होंने अमित शाह को अपनी प्रशासन में गृह मंत्री समेत 11 मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपी.
अमित शाह इस मंत्रिमंडल में इकलौते ऐसे मंत्री थे जो नरेंद्र मोदी की गैरमौजूदगी में बैठकों का नेतृत्व करते थे. पत्रकार पूर्णिमा जोशी ने अपने एक आर्टिकल में लिखा है कि मोदी को सत्ता तक पहुंचाने में शाह ने अहम भूमिका निभाई थी.
अब 24 साल बाद शाह देश के गृह मंत्री हैं और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री. आज अमित शाह का 62वां जन्मदिन है. इस मौके पर अमित शाह के जीवन से जुड़ी अहम किस्से जानते हैं.
सबसे पहले ग्राफिक्स में अमित शाह और उनकी फैमली के बारे में जानिए-
लगातार नेतृत्वक कार्यक्रमों और प्रशासनी बैठकों में व्यस्त रहने वाले अमित शाह को संगीत से भी खास लगाव है. उनकी आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, उन्हें पुराने हिंदी फिल्मी गाने और मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी की लिखी गजलें पसंद हैं. इसके अलावा उन्हें अलग-अलग तरह के व्यंजन खाना और महान हिंदुस्तानीय हस्तियों के जीवन पर बनी फिल्में देखना भी अच्छा लगता है. इतिहास की किताबें पढ़ना, शतरंज स्पोर्ट्सना और क्रिकेट में दिलचस्पी रखना उनके व्यक्तिगत शौक में शामिल हैं. वह परिवार के साथ समय बिताना भी पसंद करते हैं.
नेतृत्व ही नहीं, क्रिकेट से भी है गहरा लगाव
भले ही चुनावी हलफनामे में शाह अभी भी खुद को किसान बताते हों, लेकिन नेतृत्व के इतर उनकी सबसे अधिक दिलचस्पी क्रिकेट और शतरंज में है.साल 2009 में वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बने थे. उस समय नरेंद्र मोदी इसके अध्यक्ष थे.
इसके बाद 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर अमित शाह ने गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली. इस तरह नेतृत्व के साथ स्पोर्ट्स प्रशासन में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही. उनकी रुचि केवल क्रिकेट देखने तक सीमित नहीं रही, बल्कि स्पोर्ट्सों के आयोजन और खिलाड़ियों के लिए सुविधाओं से जुड़ी गतिविधियों में भी रही.
2014 में भाजपा अध्यक्ष बने, कार्यकर्ताओं की संख्या 3 करोड़ से 13 करोड़ तक पहुंचाया
अमित शाह के नेतृत्वक जीवन में सबसे बड़ा बदलाव साल 2014 में आया. लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया था. उस चुनाव में भाजपा ने प्रदेश की 80 में से 71 सीटें जीतीं, जबकि सहयोगी दल को दो सीटें मिलीं. चुनाव के बाद 9 जुलाई 2014 को अमित शाह को हिंदुस्तानीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया. उस दौर में उन्होंने कहा था कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विश्वास का माहौल बना है. अब उनकी कोशिश इस भरोसे को भाजपा के संगठनात्मक विस्तार में बदलने की थी.
इसी उद्देश्य से नवंबर 2014 में पार्टी ने देशव्यापी सदस्यता अभियान शुरू किया. इसमें आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया. लोगों को मिस्ड कॉल के जरिए भाजपा का सदस्य बनने की सुविधा दी गई. पार्टी के आंकड़ों के मुताबिक, अभियान से पहले सदस्यों की संख्या करीब तीन करोड़ थी. अप्रैल 2015 के अंत तक यह आंकड़ा 11 करोड़ तक पहुंच गया. इस अभियान ने भाजपा को देश के छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में नए लोगों तक पहुंचने का अवसर दिया.
सदस्य बनाने के बाद घर-घर पहुंचने का बनाया प्लान
अमित शाह ने सदस्यता अभियान खत्म होने के बाद एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया. उनका मानना था कि केवल लोगों को पार्टी से जोड़ना काफी नहीं है. उनसे लगातार संपर्क बनाए रखना और उन्हें संगठन के काम में शामिल करना भी जरूरी है. इसी सोच के तहत भाजपा ने ‘महासंपर्क अभियान’ चलाया. इसमें कार्यकर्ताओं को नए सदस्यों के घर जाकर उनसे मिलने और पार्टी की गतिविधियों के बारे में जानकारी देने की जिम्मेदारी मिली.
इसके बाद जुलाई 2015 में ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय महाप्रशिक्षण अभियान’ की शुरुआत हुई. इसका लक्ष्य 15 लाख से अधिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करना था. इस तरह संगठन को मजबूत बनाने के लिए सदस्यता, संपर्क और प्रशिक्षण की तीन चरणों वाली रणनीति अपनाई गई. बूथ से लेकर जिला और प्रदेश स्तर तक कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया.
अमित शाह के अध्यक्ष रहते भाजपा ने कई राज्यों में अपना आधार बढ़ाया. पश्चिम बंगाल में भी पार्टी के वोट प्रतिशत और सीटों की संख्या में बढ़ोतरी हुई. साल 2019 में भाजपा ने राज्य की 42 में से 18 लोकसभा सीटें जीतीं. इसके बाद 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को पहली बार राज्य में बहुमत मिला.
कार्यकर्ताओं को किताबों से जोड़ने के लिए बनवाई लाइब्रेरी
अमित शाह के संगठनात्मक काम का एक और रोचक पहलू पुस्तकालयों से जुड़ा है. उनका मानना रहा है कि किसी नेतृत्वक कार्यकर्ता को सिर्फ नारे लगाने या चुनाव प्रचार करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उसे देश के इतिहास, संविधान, समाज और अलग-अलग विचारों की भी समझ होनी चाहिए. इसी सोच के साथ उन्होंने भाजपा कार्यालयों में पुस्तकालय और ई-लाइब्रेरी स्थापित करने पर जोर दिया.
फरवरी 2016 में दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में केंद्रीय पुस्तकालय की शुरुआत हुई. इसके बाद दिसंबर 2016 में छत्तीसगढ़ के रायपुर में नानाजी देशमुख के नाम पर एक पुस्तकालय का उद्घाटन किया गया. इसमें इतिहास, नेतृत्व, संविधान, महान हस्तियों की जीवनियां और दूसरे विषयों की 10 हजार से अधिक किताबें रखी गई थीं. बाद में कई राज्यों के भाजपा कार्यालयों में भी पुस्तकालय स्थापित किए गए. शाह चाहते थे कि कार्यकर्ताओं में नियमित किताबें पढ़ने और मुद्दों पर अध्ययन करने की आदत विकसित हो.
गृह मंत्री बने तो नक्सलवाद के खिलाफ अभियान पर दिया जोर
साल 2017 में अमित शाह राज्यसभा पहुंचे और 2019 के लोकसभा चुनाव में गुजरात की गांधीनगर सीट से सांसद चुने गए. इसके बाद नरेंद्र मोदी प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री बनाया गया. गृह मंत्री के रूप में उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाने और नागरिकता संशोधन कानून जैसे बड़े तथा नेतृत्वक रूप से विवादित फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
उनके कार्यकाल में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा अभियानों पर विशेष जोर दिया गया. केंद्र प्रशासन ने नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के साथ सड़क, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को भी अपनी रणनीति का हिस्सा बनाया.
अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य रखा था. मार्च 2026 में लोकसभा में उन्होंने दावा किया कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को बड़ी सफलता मिली है और इसका श्रेय केंद्रीय सुरक्षा बलों, राज्य पुलिस तथा स्थानीय लोगों को जाता है.
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